अक्सर खाना खाने के बाद या फिर मुंह से बदबू आने पर हम इलायची का सेवन करना पसंद करते हैं। यह ना केवल मुंह से आने वाली बदबू को दूर करती है, बल्कि ओरल हेल्थ का भी ख्याल रखती है। फिर चाहे वह खराब सांसों से लड़ना हो, मसूड़ों के दर्द को शांत करना हो या आपके दांतों को कैविटी से बचाना हो, यह बेहद ही कारगर है।
इसकी एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रोपर्टीज मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करने के साथ-साथ मसूड़ों की सूजन को कम करती है, जबकि इसका मीठा, मसालेदार स्वाद आपकी सांसों को बेहतरीन खुशबूदार बनाता है। साथ ही, इलायची चबाने से लार का उत्पादन भी बढ़ सकता है, जिससे आपका मुंह प्राकृतिक रूप से साफ रहता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि इलायची ओरल हेल्थ के लिए किस-किस तरह से फायदेमंद साबित हो सकती है-
मुंह से आने वाली बदबू करे दूर
अक्सर लोग खाने के बाद इलायची चबाना पसंद करते हैं, क्योंकि यह एक नेचुरल माउथ फ्रेशनर की तरह काम करती है। इसमें मौजूद एसेंशियल ऑयल में एंटी-माइक्रोबायल प्रोपर्टीज होती हैं, जो सांसों की बदबू के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को मारती हैं। साथ ही, इसकी तेज़, मीठी खुशबू आपके मुंह को खुशबूदार बना देती है।
मुंह के बैक्टीरिया से लड़े
इलायची के नेचुरल कंपाउंड जैसे कि सिनेओल में एंटी-बैक्टीरियल प्रोपर्टीज होती हैं। वे आपके मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया को टारगेट करके जो मसूड़ों में संक्रमण, कैविटी और अन्य दांत से जुड़ी समस्याओं को दूर करते हैं।
मसूड़ों के दर्द को करे शांत
अगर आपको मसूड़ों में सूजन महसूस हो रही है तो ऐसे में इलायची आपकी मदद कर सकती है। इसकी एंटी-इफ्लेमेटरी प्रोपर्टीज सूजन को कम करके राहत प्रदान कर सकती है। इसकी फली को धीरे से चबाने से मसूड़ों की मालिश भी होती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
रोके कैविटी
इलायची बैक्टीरिया के विकास को कम करके और आपके मुंह में पीएच को बैलेंस करके, इलायची कैविटी के जोखिम को कम कर सकती है। यह आपके लिए किसी मिनी टूथ प्रोटेक्टर से कम नहीं है।
ठंडे के मौसम में सबसे ज्यादा गर्मा-गर्म चाय-कॉफी अधिक पीने लगते हैं। इसके सेवन से हमें गर्माहट को तो मिलती है साथ ही सर्दी-जुकाम भी दूर हो जाता है। लेकिन एक गलती के कारण पेट और आंत का कैंसर होने का खतरा बना रहता है। चाय-कॉफी ही नहीं, हॉट चॉकलेट, गर्मा-गर्म सूप या फिर कोई और हॉट ड्रिंक्स का सेवन करते हैं, तो इससे कैंसर का खतरा बढ़ने लगता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एकदम गर्म चाय-कॉफी पीने से कैंसर का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
कितनी गर्म चाय पीने से कैंसर का खतरा होता है
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के रिपोर्ट से पता चला है कि 65 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म ड्रिंक इंसानों के लिए संभावित रुप से कार्सिनोजेनिक हो सकती हैं। यानी इतनी गर्म चाय या कॉफी में स्टमक कैंसर या इंटेस्टाइनल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
आखिर क्यों खतरा है
अगर आप गर्मा-गर्म ड्रिंक का सेवन सबसे ज्यादा करते हैं, तो तापमान अधिक खाने की नली को थर्मल डैमेज पहुंचा सकती है। यह नुकसान पेट और आंतों को करता है। क्लिवलैंड क्लिनिक हेल्थ एसेशियल स्टडी कहती है कि ऐसी ड्रिंक्स से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट खराब हो सकता है। इसी समस्या से टिश्यू कैंसर बन जाता है।
यह लोग सावधान रहें
– स्मोकिंग करने वाले
– शराब का सेवन करने वाले
– पहले से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी के मरीज
डॉक्टर का भी मानना है कि कम तापमान वाली चाय पीना सही होता है, वहीं अत्याधिक गर्म चाय न पिएं।
कैसे बचा जाए
इस खतरे को कम करने के लिए आप हॉट ड्रिंक्स को पीने से पहले थोड़ा ठंडा होने दें। इसके बाद ही इसका सेवन करें। चाय-कॉफी पीने से पहले इसे फूंक मारकर भी ठंडा किया जा सकता है।
IND vs AUS: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है। इस सीरीज के पहले दो मुकाबले खेले जा चुके हैं। जहां टीम इंडिया ने एक और ऑस्ट्रेलिया ने एक मैच जीता है। वहीं सीरीज का तीसरा मुकाबला गाबा में खेला जा रहा है। इस मुकाबले में टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था। जिसके बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 7 विकेट खोकर 405 रन बनाकर खेल रही है। इसी बीच दूसरे दिन के खेल के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसके कारण गाबा टेस्ट में नया विवाद खड़ा हो गया है। लाइव टीवी पर भारत के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह पर नस्लीय कमेंट किया गया है।
बुमराह पर किसने किया नस्लीय कमेंट
टीम इंडिया के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह इस सीरीज के दौरान शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। वह इस सीरीज में लीडिंग विकेट टेकर रहे हैं। इसी बीच इंग्लैंड की पूर्व क्रिकेटर और फॉक्स स्पोर्ट्स की कमेंटेटर ईशा गुहा ने जसप्रीत बुमराह को लेकर कुछ ऐसा कह दिया जिसके बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल उन्होंने कॉमेंट्री के दौरान बुमराह पर नस्लीय टिप्पणी करते हुए उन्हें प्राइमेट कह दिया। दरअसल प्राइमेट एक तरह से नरवानर को कहा जाता है। स्तनधारी प्राणियों के विकास के स्टेज में एक दौरान एक दौर प्राइमेंट्स का भी रहा है।
क्या है पूरा मामला?
7 न्यूज के रिपोर्ट्स के अनुसार दूसरे दिन के खेल के पहले सेशन के दौरान ईशा गुहा ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली के साथ कॉमेंट्री कर रही थी। उस दौरान ब्रेट ली बुमराह की गेंदबाजी की तारीफ कर रहे थे। उसी दौरान ईशा ने बुमराह को MVP कहा। उन्होंने कहा कि बुमराह MVP हैं। मोस्ट वेल्यूएबल प्राइमेट। हालांकि MVP का मतलब मोस्ट वेल्यूएबल प्लेयर होता है, लेकिन उन्होंने प्लेयर शब्द को प्राइमेट से रिप्लेस कर दिया। फिर क्या था। उनके इतना कहते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने भी उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया है। ईशा ने कहा कि बुमराह टीम इंडिया के ऐसे खिलाड़ी हैं जो सबसे ज्यादा काम करते हैं और इस टेस्ट मैच में भी पूरा फोकस उन पर है। बता दें कि बुमराह ने इस मुकाबले में 5 विकेट हॉल हासिल किया है। हालांकि भारतीय क्रिकेट टीम और जसप्रीत बुमराह की ओर से ईशा को लेकर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है।
केपटाउन: फ्रांस के मायोट क्षेत्र में चक्रवात ‘चिडो’ ने जमकर तबाही मचाई है। यहां जान गंवाने वाले लोगों की संख्या लगभग 1,000 हो सकती है। सरकार के शीर्ष अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। मायोट प्रीफेक्ट फ्रांकोइस-जेवियर बियुविले ने टीवी चैनल मायोट ला1एरे से कहा, “मुझे लगता है कि सैकड़ों लोग मारे गए हैं, शायद संख्या लगभग एक हजार के करीब पहुंच जाए।” उन्होंने बताया कि शनिवार को हिंद महासागर के द्वीपों पर आए भीषण उष्णकटिबंधीय चक्रवात के कारण हुई व्यापक तबाही के बाद अभी सटीक संख्या बता पाना ‘बेहद कठिन’ है।
यूरोपीय संघ का सबसे गरीब क्षेत्र है मायोट
अधिकारियों ने रविवार को पहले मायोट में कम से कम 11 लोगों की मौत की पुष्टि की थी लेकिन कहा था कि यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है। अफ्रीका के तट से दूर दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर में स्थित मायोट, फ्रांस का सबसे गरीब द्वीप क्षेत्र और यूरोपीय संघ का सबसे गरीब क्षेत्र है।
220 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से हवाएं चलीं
फ्रांसीसी मौसम सेवा के अनुसार, चिडो के कारण 220 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से हवाएं चलीं, जिससे मायोट में कई मकानों को नुकसान पहुंचा है। अफ्रीका के पूर्वी तट से लगभग 800 किलोमीटर दूर दो मुख्य द्वीपों में फैली मायोट की आबादी 3 लाख से अधिक है। कुछ जगह तो पूरा इलाका ही तबाह हो गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई पेड़ उखड़ गए और नावें पलट गईं या डूब गईं। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया विधानसभा की नवीनीकृत दर्शक दीर्घा का उद्घाटन, योगी बोले- विधानसभा लोकतंत्र का पवित्र मंदिर और दर्शक दीर्घा इसका फर्स्ट इंप्रेशन,
मुख्यमंत्री ने विधानसभा द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों का भी किया विमोचन
लोकतंत्र के सशक्त स्तंभ के साथ ही आधुनिकता के साथ भी जुड़ी उत्तर प्रदेश विधानसभाः सीएम
लखनऊ, 16 दिसंबर 2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को उत्तर प्रदेश विधान सभा की नवीनीकृत दर्शक दीर्घा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने इसे समस्त विधानसभा सदस्यों और प्रदेश की 25 करोड़ जनता को समर्पित करते हुए कहा कि विधानसभा प्रदेश के समस्त नागरिकों के लिए लोकतंत्र का आधार है। यह लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है। इस पवित्र मंदिर में जब कोई आए तो उसका फर्स्ट इंप्रेशन यहां की दर्शक दीर्घा के माध्यम से ही पड़े। यह सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष के लिए भी प्रसन्नता का क्षण होना चाहिए, क्योंकि आप सभी की संस्तुति पर ही दर्शक दीर्घा के सुंदरीकरण का यह कार्यक्रम संपन्न हुआ है।
दर्शक दीर्घा के उद्घाटन के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मुख्यमंत्री समेत मंच पर उपस्थित सभी मंत्रियों एवं नेता विपक्ष को मूल संविधान की एक-एक प्रति भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों का भी विमोचन किया। इन पुस्तकों में देश की आजादी से लेकर अब तक मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष की संपूर्ण जानकारी दी गई है।
संविधान की मूल प्रति कराती है भारत का दर्शन
सीएम योगी ने कहा कि शीकतालीन सत्र के पहले अध्यक्ष जी ने एक सौगात और दी है। यह वर्ष भारत के संविधान को लागू करने के 75 वर्ष पूरा करने की ओर बढ़ रहा है। 26 जनवरी 2025 को भारत के संविधान को 75 वर्ष पूरे होंगे और मैं आग्रह करूंगा कि सभी माननीय सदस्यों को बाबा साहब डॉ भीम राव आंबेडकर जी की अध्यक्षता में बनी संविधान की ड्राफ्टिंग समिति की एक-एक मूल प्रति उपलब्ध कराई जाए। आप इसको पढ़िए, इसका एक-एक पेज वास्तव में भारत की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है, भारत का दर्शन कराता है।
लोकतंत्र के सशक्त स्तंभ के साथ ही आधुनिकता से भी जुड़ी विधायिका सीएम योगी ने कहा कि लोकतंत्र के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विधायिका का महत्वपूर्ण स्थान है। विधायिका एक प्रकार से मार्गदर्शिका है। सभी माननीय सदस्य न केवल विधायिका से जुड़ते हैं, बल्कि यह उन्हें विकास की, जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने का भी एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराता है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष जा का भी अभिनंदन करूंगा, जिन्होंने पौने तीन वर्ष के इस कार्यकाल में उत्तर प्रदेश की विधानसभा को न केवल लोकतंत्र के सशक्त स्तंभ के रूप में, बल्कि आधुनिकता के साथ जोड़ने का भी काम किया है। ये गौरव, देश की सबसे बड़ी विधानसभा को जाता है जिसने ई विधान लागू किया है। आज आप देख सकते हैं कि आपके सामने ई विधान किस रूप से सफलतापूर्वक लागू हो सकता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा पेपरलेस होकर इसका उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। यह सिर्फ विधानसभा के लिए नहीं, बल्कि हम सबके लिए और 25 करोड़ की आबादी के लिए भी गौरवपूर्ण क्षण था। इसके साथ ही विधानसभा के गलियारे का किस रूप में सुंदरीकरण किया जाना चाहिए, यह भी आपने देखा।
1952 के नियमों में संशोधन कर उसे लागू किया मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा संचालन के जो नियम 1952 में पहली विधानसभा गठन के तत्काल बाद लागू हुए थे, वे जैसे के तैसे पड़े थे। समय के अनुरूप मांग के आलोक में उसमें आवश्यक संसोधन नहीं हो पाए थे। यह कार्य भी इस दौरान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। प्रश्नकाल में हम देखते हैं कि केवल दो सदस्य ही नहीं, बल्कि 20-20 प्रश्नों का उत्तर मंत्रियों से पूछ सकते हैं और उनका जवाब भी यहां पर हाथों-हाथ उन्हें प्राप्त होता है। यही सही लोकतंत्र है कि जब एक माननीय सदस्य संबंधित विभाग के मंत्री से संबंधित प्रश्नों का जवाब लेकर लोकहित से जुड़े हुए मुद्दों को रखने का माध्यम बनता है। यह तब हो पाया जब हम लोगों ने विधानसभा संचालन के नियमों में संशोधन करके यथासमय में उसे लागू भी किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में अपनी रुचि के अनुसार विषयों को रखने का मुद्दा हो या फिर एक दिन केवल महिला सदस्यों को चर्चा करने देने का निर्णय रहा हो, ये सब इस सदन ने देखा है।
विधायिका सशक्त लोकतंत्र का माध्यम मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1952 से लेकर अब तक कब-कब कौन नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष रहा, उससे संबंधित एक प्रकाशन विधानसभा के शोध ग्रंथालय के माध्यम से प्रकाशित हुआ है। मुख्यमंत्री के रूप में किन-किन महानुभावों ने सदन की गरिमा को बढ़ाया है, इसके विकास के लिए किन मुद्दों को उन्होंने छुआ है और कैसे विकास को एक निरंतरता देने में योगदान किया है, यह जानना महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र और विधायिका में काम का आधार सत्ता और विपक्ष दोनों हैं, यही लोकतंत्र के दो पहिए हैं। दोनों जब मिलकर कार्य करते हैं तो एक सशक्त लोकतंत्र को जन्म देते हैं। उसका सशक्त माध्यम संवाद है, चर्चा परिचर्चा है। हमारा मुद्दों पर एक दूसरे से मतभेद हो सकता है, लेकिन संवाद बाधित नहीं हो सकता है, बल्कि हम संवाद से उस समस्या के समाधान का रास्ता निकालेंगे। चाहूंगा कि आपमें से हर माननीय सदस्य को इसे अपने पास रखना चाहिए, नॉलेज के लिए भी और आने वाली पीढ़ी को विरासत में देने के लिए भी।
सीएम योगी के निर्देश पर हुआ दर्शक दीर्घा का सुंदरीकरण विधानसभा की दर्शक दीर्घा के सुंदरीकरण पर प्रकाश डालते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बताया कि पूरी दुनिया में जब भी कोई सरकारी डेलीगेशन जाते हैं तो वहां की पार्लियामेंट और असेंबली को जरूर देखने जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार चर्चा की थी कि अगर पूरे देश और दुनिया की पार्लियामेंट और असेंबली को देखा जा सकता है तो उत्तर प्रदेश की विधानसभा का स्वरूप भी ऐसा होना चाहिए कि दुनिया भर से लोग देखने आएं। उन्होंने बताया कि दर्शक दीर्घा में संविधान के मूल स्वरूप के पन्नों के आर्ट्स लगाए गए हैं, ताकि जो लोग आएं, उन्हें पता चले कि हमारे देश के संविधान का कितना महत्व है।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना एवं नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडे मंच पर उपस्थित रहे।