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सीएम योगी ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले की पत्रकार वार्ता, योगी बोले- सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार, विपक्ष के साथी भी तैयारी के साथ आएं

सीएम योगी ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले की पत्रकार वार्ता, योगी बोले- सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार, विपक्ष के साथी भी तैयारी के साथ आएं
सीएम योगी ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले की पत्रकार वार्ता, योगी बोले- सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार, विपक्ष के साथी भी तैयारी के साथ आएं
  • सीएम ने कहा- विधानमंडल से प्रारंभ होता है यूपी के विकास, सुरक्षा, समृद्धि का रास्ता
  • मुख्यमंत्री ने कहा- विकसित भारत के निर्माण में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका
  • सीएम बोले-वन ट्रिलियन इकॉनमी को प्राप्त करने के महायज्ञ में सभी का सहयोग चाहती है सरकार

लखनऊ, 16 दिसंबर 2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने विगत साढ़े सात वर्ष में विकास व सुरक्षा के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। यूपी में विकास, सुरक्षा, समृद्धि, आस्था व आधुनिकता का जो संगम देखने को मिल रहा है, उसका रास्ता भी इसी विधानमंडल से प्रारंभ होता है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले सोमवार को पत्रकारों से बातचीत की। सीएम ने शीतकालीन सत्र में सभी सदस्यों का स्वागत किया।

सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार, विपक्ष के साथी भी तैयारी के साथ आएं
सीएम योगी ने कहा कि सरकार सदन में नौजवानों, महिलाओं, किसानों, युवाओं, प्रदेश की समृद्धि व सुरक्षा के हित के सभी मुद्दों पर चर्चा को तैयार है। विधानमंडल सार्थक बहस का मंच बने, इसमें सबके सहयोग की अपेक्षा है। विपक्षी दलों के साथियों से भी आग्रह है कि वे तैयारी के साथ आएं। सीएम ने कहा कि हमारा सदन सार्थक मुद्दों पर चर्चा के लिए जाना जाए, इस विश्वास के साथ पूरे शीतकालीन सत्र को सुगमतापूर्वक संचालन की अपील करता हूं।

विकसित भारत के निर्माण में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का विधानमंडल दुनिया के किसी भी राज्य का सबसे बड़ा विधानमंडल है। यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि देश जिस अमृतकाल में प्रवेश कर प्रधानमंत्री मोदी जी की संकल्पनाओं के अनुसार विकसित भारत के निर्माण के पवित्र अभियान के साथ जी जान से जुड़ा है, उसमें उप्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। उत्तर प्रदेश को केंद्र में रखकर अनेक स्वाधीनता संग्राम सेनानी देश की आजादी के अभियान के साथ जुड़े थे। उत्तर प्रदेश को अनेक क्रांतिकारियों की कर्मभूमि व जन्मभूमि होने का भी सौभाग्य प्राप्त है।

वन ट्रिलियन इकॉनमी को प्राप्त करने के महायज्ञ में सभी का सहयोग चाहती है सरकार
सीएम ने कहा कि इस सत्र में विधायी कार्य के साथ अनुपूरक बजट भी आएगा। इसके अलावा जनता व प्रदेश के विकास से जुड़े माननीय सदस्यों के महत्वपूर्ण सुझाव व मुद्दे भी सदन में रखे जाएंगे। मेरी सभी पक्षों से अपील है कि सदन की कार्यवाही सुगमता के साथ संचालित हो और जनता व विकास से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो। वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी को प्राप्त करने के लिए जिस बड़े अभियान को प्रदेश सरकार ने अपने हाथों में लिया है, उसे प्राप्त करने के महायज्ञ में सभी पक्ष भागीदार बनें। इस दृष्टि से सरकार सभी का सहयोग व समर्थन चाहती है।

इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

“हुज़ूर… वाह ताज! बोलिए”: विश्व को ताजगी देने वाले भारत के ‘ताज’ उस्ताद ज़ाकिर हुसैन ‘अमर’ हुए, समूचे विश्व के संगीत प्रेमियों में शोक की लहर

“हुज़ूर… वाह ताज! बोलिए”, विश्व को ताजगी देने वाले भारत के ‘ताज’, उस्ताद ज़ाकिर हुसैन 'अमर' हुए,
“हुज़ूर… वाह ताज! बोलिए”, विश्व को ताजगी देने वाले भारत के ‘ताज’, उस्ताद ज़ाकिर हुसैन 'अमर' हुए,
“हुज़ूर… वाह ताज! बोलिए”, विश्व को ताजगी देने वाले भारत के ‘ताज’, उस्ताद ज़ाकिर हुसैन 'अमर' हुए,
  • पूरे विश्व को ताजगी से भरने वाले और रोज़ सुबह एक नई ऊर्जा प्रदान करने वाले उस्ताद ज़ाकिर हुसैन हुए अमर
  • मशहूर तबला वादक डॉ. ज़ाकिर हुसैन का 73 वर्ष की आयु में हृदय रोग से निधन, अमेरिका के अस्पताल में ली आख़िरी साँस।
  • तबला वादन की कला को वैश्विक पहचान दिलाने वाले महान संगीतकार।
  • “हुज़ूर, वाह ताज! बोलिए” विज्ञापन से एक-एक घर में प्रसिद्धि।
  • ग्रैमी अवार्ड समेत पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी किया अपने नाम।
  • भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उस्ताद जाकिर हुसैन का अहम योगदान।

नई दिल्ली/लखनऊ, 16 दिसम्बर 2024: भले ही हम सबके लिए उस्ताद ज़ाकिर हुसैन की साँसें ठहर गई हों लेकिन उनके तबले की थाप की गूंज कभी नहीं ठहरेगी। कहते हैं कलाकार न कभी बूढ़ा होता है और न ही मरता है बल्कि वो अपनी कलाकारी से रोज़ थोड़ा और युवा हो जाता है। उन चिरयुवा लोगों में से एक हैं ज़ाकिर हुसैन, जिन्हें मैं शिवसागर सिंह चौहान (Editor- truenewsup.com) हाँथ जोड़कर नमन करता हूँ।

भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व मंच पर गौरवान्वित करने वाले महान तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन ने 73 वर्ष की उम्र में सोमवार, 16 दिसंबर 2024 को सुबह अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। दिल की बीमारी और फेफड़े की जटिलताओं के कारण वे पिछले दो सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थे। उनकी मृत्यु के साथ भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय संगीत के एक युग का अंत हो गया। उस्ताद का जाना सिर्फ भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के संगीत प्रेमियों के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके तबले की थाप और संगीत की गूंज आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और गौरव की कहानियाँ कहती रहेगी।

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च 1951 को मुंबई में हुआ। वे तबला वादन के महान उस्ताद अल्लारक्खा खान के पुत्र थे। संगीत, उनके खून में था, और महज 5 साल की उम्र में उन्होंने तबला वादन की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। उनके पिता ने उन्हें तबले की बारीकियाँ सिखाईं, और बचपन से ही वे संगीत समारोहों में हिस्सा लेने लगे। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला कॉन्सर्ट अमेरिका में किया। इस उम्र में भी उनके प्रदर्शन में अद्भुत परिपक्वता थी, जो बताता है कि वे एक असाधारण प्रतिभा के धनी थे।

यूपी के उन्नाव निवासी शागिर्द शेख़ इब्राहिम की जुबानी

मूलतः उत्तरप्रदेश के उन्नाव निवासी और ज़ाकिर हुसैन साहब के गुरुभाई व मुख्य शागिर्द शेख़ इब्राहिम ने उस्ताद के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए बताया कि इनके परिवार से तो मेरे संबंध लगभग तीन दशक से हैं लेकिन उनसे (ज़ाकिर हुसैन जी से) मेरा व्यक्तिगत संबंध सन् 2000 से है। उन्होंने बताया कि इनके अंडर में ही दो साल (2000-2002 तक) भारत सरकार की कल्चरल बीट में नेशनल स्कॉलरशिप भी की और कोर्स भी कम्प्लीट किया, जिसमें उस्ताद का काफ़ी सहयोग रहा।

सन् 2000 में ही बड़े उस्ताद यानी इनके पिता जी दिग्गज तबला वादक अल्ला रक्खा ख़ान की डेथ के बाद इनसे हमारी तालीम लगातार चलती रही और मैं अपनी रोज़ी-रोटी में भी लग गया लेकिन उसके एक लंबे समय बाद, 2018 में उस्ताद जी ने मुझे अपने पास बुला लिया और लास्ट सितम्बर तक मैं उन्हीं के साथ था, उसके बाद वो USA चले गए क्योंकि उनका परिवार वहीं रहता है लेकिन वो साल में तीन महीने (दिसम्बर से हाफ़ मार्च तक) के लिए इंडिया (मुंबई आवास) ज़रूर आते थे और इस दरम्यान वो इंडिया समेत एशिया के सभी कार्यक्रमों में शरीक होते थे।

शेख़ इब्राहिम के मुताबिक़ ज़ाकिर हुसैन साहब ने उन्हें एक सीख दी जिस कारण उनका भी जीवन बदल गया, उन्होंने बताया कि वो मुझसे हमेशा कहते थे कि “जहाँ भी और जिसके भी पास भी काम करने जाओ, उसके बारे में जान लो और उस काम का होमवर्क करके ही उसके पास जाओ, इससे सामने वाले व्यक्ति से बात करने से लेकर आपके काम करने में भी आपको काफ़ी सरलता होगी” यह बताते हुए ही उन्होंने काफ़ी दुःखी लहज़े में भरे हुए गले से बताया कि आज वो जो भी हैं सब उन्हीं की (उस्ताद ज़ाकिर हुसैन की) देन है।

वैश्विक मंच पर भारतीय संगीत का प्रतिनिधित्व

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन भारतीय शास्त्रीय संगीत को दुनिया भर में ले जाने वाले सबसे बड़े राजदूतों में से एक थे।
• उन्होंने मशहूर बैंड ‘शक्ति’ के साथ काम किया, जिसमें गिटार वादक जॉन मैकलॉघलिन और वायलिन वादक एल. शुभ्रमण्यम शामिल थे। यह बैंड भारतीय शास्त्रीय और पश्चिमी जैज़ संगीत का अद्भुत संगम था।
• 1992 में उन्होंने मिकी हार्ट के साथ ‘प्लैनेट ड्रम’ प्रोजेक्ट के लिए काम किया और पहला ग्रैमी अवॉर्ड जीता।
• 2009 में उन्होंने ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट के लिए दूसरा ग्रैमी अवॉर्ड जीता।
• 2024 में ज़ाकिर हुसैन ने इतिहास रचते हुए एक साथ तीन अलग-अलग एलबमों के लिए तीन ग्रैमी अवॉर्ड्स जीते। ज़ाकिर हुसैन को उनके अतुलनीय योगदान के लिए कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए:
• पद्म श्री (1988)
• पद्म भूषण (2002)
• ग्रैमी अवॉर्ड (1992, 2009, और 2024)

इसके अलावा, वे संगीत अकादमी के सदस्य और कई अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं के भागीदार रहे। उनकी उपलब्धियाँ बताती हैं कि वे न केवल एक कलाकार थे, बल्कि भारतीय संगीत और संस्कृति के जीवंत प्रतीक थे। यह उपलब्धियाँ बताती हैं कि उनका संगीत केवल भारतीय सीमाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भी दिलों को छूता था।

जिस तरह से इन्होंने संगीत की दुनिया में तबले को एक आम भाषा में पूरे विश्व में पहुँचाया है वो बहुत ही सराहनीय है क्योंकि यह साधारण काम नहीं है उस्ताद ज़ाकिर हुसैन साहब ने न सिर्फ़ संगीत के रूप में तबले को पूरे विश्व में फैलाया बल्कि हिंदुस्तान की संस्कृति को भी फैलाया, जो कहीं न कहीं समूचे विश्व में हिंदुस्तान का गौरव बढ़ाने का काम करता है।

ताजमहल चाय का ऐड: “हुज़ूर, वाह ताज बोलिए!”

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन की लोकप्रियता न केवल उनके संगीत तक सीमित रही, बल्कि 1980 के दशक में उनका ताजमहल चायपत्ती का विज्ञापन भारतीय घरों में एक नई पहचान लेकर आया।

उनकी तबले की थाप के साथ उनकी जादुई आवाज़ में कहा गया यह संवाद – “हुज़ूर, वाह ताज बोलिए!” – हर भारतीय के दिल में बस गया।
• इस विज्ञापन ने न केवल ताजमहल चाय को प्रसिद्ध किया, बल्कि ज़ाकिर हुसैन को भी आम लोगों के बीच ख्याति दिलाई।
• यह ऐड भारतीय ब्रांडिंग और कला का मील का पत्थर बन गया, जिसने चाय और संगीत को एक अटूट कड़ी में जोड़ दिया।

फिल्म और सांस्कृतिक योगदान

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन ने न केवल संगीत, बल्कि भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ी।
• 1983 में फिल्म ‘हीट एंड डस्ट’ से उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा।
• इसके बाद ‘द परफेक्ट मर्डर’ (1988), ‘मिस बैटीज चिल्डर्स’ (1992) और ‘साज’ (1998) जैसी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया।
• सत्यजीत रे और श्याम बेनेगल जैसे प्रतिष्ठित निर्देशकों की फिल्मों में उनकी संगीत रचनाओं ने चार चाँद लगा दिए।

संगीत का दर्शन: कला और आत्मा का संगम

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के लिए संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा को छूने का साधन था। उनका मानना था कि संगीत सीमाओं और भाषाओं से परे होता है। उनका हर प्रदर्शन इस विचारधारा को जीवंत करता था। उनके संगीत में भारतीय परंपराओं और आधुनिकता का अनोखा मिश्रण था। वे भारतीय शास्त्रीय संगीत को उसकी जड़ों से जोड़े रखते हुए इसे नए युग की धारा के साथ आगे बढ़ाने में सफल रहे।

तबले के एक युग का अंत, लेकिन विरासत रहेगी अमर

भले ही उस्ताद अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके तबले की थाप हमेशा हमारे दिलों में गूँजती रहेगी। उनका जीवन संगीत के प्रति समर्पण, भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान, और कला के प्रति निष्ठा का प्रतीक था। उनकी आवाज़ में “हुज़ूर, वाह ताज बोलिए!” और उनके तबले की ध्वनि ने उन्हें अमर बना दिया। ज़ाकिर हुसैन एक युग थे, एक दर्शन थे, और उनका योगदान हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा।

संगीत प्रेमियों और भारतीय संस्कृति को गौरवान्वित करने वाले इस महान कलाकार को शत-शत नमन।

अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का राष्ट्रीय अधिवेशन

अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का राष्ट्रीय अधिवेशन
अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का राष्ट्रीय अधिवेशन
अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का राष्ट्रीय अधिवेशन

हिन्दुत्व और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित लोधी समाज को संगठित करने का संदेश

लखनऊ, 15 दिसंबर 2024: डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय, आशियाना, लखनऊ में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का राष्ट्रीय अधिवेशन भव्यता के साथ संपन्न हुआ। यह अधिवेशन लोधी समाज के सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ। सैकड़ों की संख्या में देशभर से आए लोधी समाज के प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

सांसद साक्षी महाराज ने दिया ‘समर्पण और संगठन’ का संदेश

महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उन्नाव के सांसद डॉ. साक्षी महाराज ने अपने ओजस्वी संबोधन में लोधी समाज को संगठित और सशक्त बनने की अपील की। उन्होंने कहा, “लोधी समाज हमेशा से हिन्दू धर्म, हिन्दुत्व और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित रहा है। हमें बाबूजी कल्याण सिंह के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिन्होंने अपने आदर्शों और सिद्धांतों पर चलते हुए गांव, गरीब, और समाज के वंचित वर्गों के लिए कार्य किया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है।”

साक्षी महाराज ने यह भी कहा कि आज देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, और लोधी समाज को इस सपने को साकार करने में अपना सक्रिय योगदान देना चाहिए। उन्होंने समाज के प्रत्येक व्यक्ति से हिन्दुत्व को मजबूत करने और संगठन को गांव-गांव तक फैलाने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय संरक्षक राजवीर सिंह ने दिया एकता का संदेश

महासभा के राष्ट्रीय संरक्षक और पूर्व सांसद राजवीर सिंह (राजू भैया) ने संगठन को मजबूत करने और समाज में एकता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “बाबूजी कल्याण सिंह ने हमें जो आदर्श और सिद्धांत दिए हैं, वे आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनका अनुसरण करना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हमें समाज के हर वर्ग को साथ लेकर ऐसा इतिहास रचना है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने।”

राजवीर सिंह ने संगठन को समाज की शक्ति बताया और कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत संगठन ही समाज के उज्जवल भविष्य की कुंजी है।

बेसिक शिक्षा मंत्री ने शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने समाज के विकास में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “शिक्षा ही वह साधन है जो समाज को सशक्त और आत्मनिर्भर बना सकता है। लोधी समाज को शिक्षण संस्थानों की स्थापना पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना संगठन का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।”

उन्होंने लोधी समाज के संघर्षमय इतिहास की सराहना करते हुए कहा कि समाज को संघर्ष से समृद्धि की ओर बढ़ने का लक्ष्य तय करना चाहिए।

नई राष्ट्रीय समिति और प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा

कार्यक्रम के दौरान महासभा की नई राष्ट्रीय समिति और सात राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के नामों की घोषणा की गई। इन पदाधिकारियों को समाज के संगठन और सशक्तिकरण का जिम्मा सौंपा गया।

राष्ट्रीय समिति:

  • राष्ट्रीय संरक्षक: राजवीर सिंह (पूर्व सांसद, एटा)
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष: डॉ. साक्षी महाराज (सांसद, उन्नाव)
  • राष्ट्रीय महामंत्री: गंगा चरण राजपूत (पूर्व सांसद, हमीरपुर)
  • राष्ट्रीय उपाध्यक्ष:
    • प्रेमलता वर्मा (पूर्व विधायक, अतरौली)
    • चंद्रभान सिंह (पूर्व सांसद, दमोह, मध्य प्रदेश)
    • कोमल सिंह जंघेल (पूर्व विधायक, छत्तीसगढ़)
    • शंकर लाल लोधी (लखनऊ)
  • राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष: चंद्रपाल सिंह लोधी (विधायक, डिबाई, बुलंदशहर)

प्रदेश अध्यक्ष:

  • उत्तर प्रदेश: साहब सिंह राजपूत (अलीगढ़)
  • मध्य प्रदेश: महेश नारावरिया (भोपाल)
  • महाराष्ट्र: राम सुरेश लोधी (मुंबई)
  • गुजरात: प्रतीक राजपूत (अहमदाबाद)
  • छत्तीसगढ़: गोवेंद्र पटेल (बेमेतरा)
  • हरियाणा: रवि वर्मा (गुरुग्राम)
  • दिल्ली: योगेंद्र राजपूत

बाबूजी कल्याण सिंह का जीवनवृत्त देख भावविभोर हुआ सभागार

कार्यक्रम के दौरान बाबूजी कल्याण सिंह पर आधारित एक वृत्तचित्र दिखाया गया। इसमें उनके राजनीतिक जीवन, अयोध्या आंदोलन, और ‘राम मंदिर के लिए सौ सरकारें कुर्बान’ जैसे ऐतिहासिक फैसलों को दर्शाया गया। जैसे ही उनके योगदानों का जिक्र हुआ, सभागार तालियों और ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंज उठा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोग बाबूजी के प्रेरणादायक जीवन से भावविभोर हो गए।

कार्यक्रम में दिखा जोश और उत्साह

इस राष्ट्रीय अधिवेशन में लोधी समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान ‘जय श्रीराम’ और ‘कल्याण सिंह जिंदाबाद’ के नारों से सभागार गूंजता रहा। वक्ताओं के जोशीले संबोधनों ने सभा में नई ऊर्जा का संचार किया। वक्ताओं ने समाज को संगठित करने और अपने आदर्शों को बनाए रखने का आह्वान किया।

अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का यह राष्ट्रीय अधिवेशन समाज के संगठन, सशक्तिकरण और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इसने लोधी समाज के राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए नई दिशा प्रदान की। बाबूजी कल्याण सिंह की प्रेरणा और आदर्शों के माध्यम से संगठन ने अपनी ताकत को पहचानते हुए भविष्य की चुनौतियों का सामना करने का संकल्प लिया।

सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का सरोजनीनगर को स्पोर्ट्स हब बनाने का सपना हो रहा साकार

सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का सरोजनीनगर को स्पोर्ट्स हब बनाने का सपना हो रहा साकार
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का सरोजनीनगर को स्पोर्ट्स हब बनाने का सपना हो रहा साकार
सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का सरोजनीनगर को स्पोर्ट्स हब बनाने का सपना हो रहा साकार
  • सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग के अंतर्गत 6ठवें चरण में भी हुए क्रिकेट चैंपियनशिप के रोमांचक मुकाबले।
  • Nilmatha Warriors ने Gauri Cricket Club को 49 रनों से हराकर शानदार जीत दर्ज की।
  • Kalli Pashchim Youth Club ने DSD Team को 43 रनों से हराया, खेल में अनुशासन का प्रदर्शन।
  • Sainik Super Kings ने Vrindavan Knight’s Club को 78 रनों से हराकर बेहतरीन कौशल दिखाया।
  • Sainik Maverick ने Team Underdogs को 7 विकेट से हराकर जीत दर्ज की।
  • विजेता टीमों को ट्रॉफी और खिलाड़ियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

लखनऊ, 15 दिसम्बर 2024: खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और युवाओं को खेलकूद में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग का आयोजन सरोजनीनगर के लोकप्रिय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा किया जा रहा है। इस लीग के तहत इंटर स्कूल और इंटर क्लब क्रिकेट चैंपियनशिप के 6ठवें चरण में रविवार को खेले गए मुकाबले युवाओं के जोश और उत्साह से भरपूर रहे। दिनभर के चार मैचों में खिलाड़ियों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से दर्शकों को रोमांचित किया।

पहला मुकाबला: Nilmatha Warriors बनाम Gauri Cricket Club

पहले मैच में Nilmatha Warriors ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Gauri Cricket Club को 49 रनों से मात दी। Nilmatha Warriors ने बल्लेबाजी में मजबूत शुरुआत की और विपक्षी टीम के सामने बड़ा लक्ष्य रखा। उनकी गेंदबाजी भी उतनी ही दमदार रही, जिससे Gauri Cricket Club बड़े लक्ष्य के दबाव में आ गई और मुकाबला हार गई। Nilmatha Warriors के खिलाड़ियों ने सभी विभागों में बेहतरीन प्रदर्शन कर यह जीत हासिल की।

दूसरा मुकाबला: Kalli Pashchim Youth Club बनाम DSD Team

दूसरे मुकाबले में Kalli Pashchim Youth Club ने दमदार खेल का प्रदर्शन करते हुए DSD Team को 43 रनों से शिकस्त दी। बल्लेबाजों ने तेज गति से रन बनाए और गेंदबाजों ने विपक्षी टीम के बल्लेबाजों को बांधकर रखा। Kalli Pashchim Youth Club की इस जीत ने दर्शाया कि उनका खेल अनुशासन और रणनीति पर आधारित है।

तीसरा मुकाबला: Sainik Super Kings बनाम Vrindavan Knight’s Club

तीसरा मैच Sainik Super Kings और Vrindavan Knight’s Club के बीच खेला गया। इस मुकाबले में Sainik Super Kings ने जोरदार बल्लेबाजी और गेंदबाजी का प्रदर्शन किया और 78 रनों से मैच अपने नाम किया। Sainik Super Kings की टीम ने शुरुआत से ही मैच पर पकड़ बनाई और विपक्षी टीम को वापसी का मौका नहीं दिया। उनकी यह जीत टीम के अद्भुत समन्वय और कौशल का प्रमाण है।

चौथा मुकाबला: Sainik Maverick बनाम Team Underdogs

दिन का अंतिम मुकाबला Sainik Maverick और Team Underdogs के बीच हुआ। Sainik Maverick की टीम ने अपने गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर यह मैच 7 विकेट से जीता। टीम ने विपक्षी टीम को शुरुआत से ही दबाव में रखा और बड़ी आसानी से जीत दर्ज की।

खिलाड़ियों को मिला सम्मान और प्रोत्साहन

चारों मुकाबलों के बाद सभी विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी प्रदान की गई। साथ ही, सभी खिलाड़ियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा, “भारत में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। इन्हें सही मार्गदर्शन, संसाधन और मंच प्रदान करना जरूरी है। सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग इसी दिशा में एक पहल है।”

डॉ. सिंह ने खिलाड़ियों की ऊर्जा और खेल भावना की तारीफ करते हुए यह भी कहा कि खेलकूद युवाओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, “खेल का असली उद्देश्य जीत नहीं, बल्कि टीम वर्क, समर्पण और सहयोग है।” उन्होंने विजेता टीमों को अगले मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

खेलों का महत्व और सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग की भूमिका

खेलकूद न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि मानसिक विकास, अनुशासन, और टीम वर्क जैसे महत्वपूर्ण गुणों को भी विकसित करते हैं। सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग के तहत 200 से अधिक टीमों के खिलाड़ी अपने खेल कौशल को निखारने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं। यह लीग युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और बड़े स्तर पर आगे बढ़ने का मंच प्रदान कर रही है।

महाकुम्भ 2025: बड़े हनुमान मंदिर में षोडशोपचार पूजा का विशेष महत्व, पीएम मोदी ने भी की पूजा

महाकुम्भ 2025: बड़े हनुमान मंदिर में षोडशोपचार पूजा का विशेष महत्व, पीएम मोदी ने भी की पूजा
बड़े हनुमान मंदिर में षोडशोपचार पूजा का विशेष महत्व, पीएम मोदी ने भी की पूजा
महाकुम्भ 2025: बड़े हनुमान मंदिर में षोडशोपचार पूजा का विशेष महत्व, पीएम मोदी ने भी की पूजा
  • षोडशोपचार पूजा: बड़े हनुमान मंदिर में षोडशोपचार पूजा से संकट टलते हैं और इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
  • प्रधानमंत्री का आचरण: पीएम मोदी ने हनुमान जी की पूजा कर विनम्रता और संतों के प्रति सम्मान का परिचय दिया।
  • विशिष्ट रुद्राक्ष भेंट: पीएम मोदी को हनुमान जी के गले का गौरीशंकर रुद्राक्ष भेंट किया गया।
  • सीएम योगी का योगदान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के विकास और महाकुम्भ की तैयारियों में विशेष रुचि दिखाई।
  • स्वच्छता का संदेश: श्रद्धालुओं को महाकुम्भ में गंगा की पवित्रता बनाए रखने के लिए सहयोग करने की अपील।

महाकुम्भ नगर/प्रयागराज, 15 दिसम्बर 2024: प्रयागराज में संगम तट पर स्थित बड़े हनुमान मंदिर का नवनिर्मित कॉरिडोर अब श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार है। करोड़ों भक्त इस मंदिर में हनुमान जी की आराधना के लिए आते हैं और यहाँ विभिन्न विधियों से पूजा-अर्चना करते हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण है षोडशोपचार पूजा, जिसकी मान्यता है कि इससे हर कामना पूर्ण होती है और सभी संकट समाप्त हो जाते हैं।

पीएम मोदी ने भी की षोडशोपचार पूजा

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रयागराज दौरे के दौरान बड़े हनुमान मंदिर में षोडशोपचार पूजा की। महंत एवं श्रीमठ बाघंबरी पीठाधीश्वर बलवीर गिरी जी महाराज ने यह विशेष पूजा विधि संपन्न कराई। पूजा के बाद पीएम मोदी को हनुमान जी के गले में सुशोभित विशिष्ट गौरीशंकर रुद्राक्ष भेंट किया गया। यह रुद्राक्ष शिव और पार्वती का स्वरूप है और इसे प्राप्त करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

16 पदार्थों से संपन्न हुई पूजा

महंत बलवीर गिरी जी ने बताया कि पीएम ने हनुमान जी को कुमकुम, रोली, चावल, सिंदूर, और अन्य सामग्रियों से पूजा अर्पित की। इस पूजा में कुल 16 वस्तुओं का प्रयोग होता है, जो ईष्टदेव की आराधना का पूर्ण रूप है। यह पूजा संकल्प सिद्धि, पुण्य वृद्धि, और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। प्रधानमंत्री ने पूजा के दौरान वैश्विक कल्याण की कामना की और अपने आचरण से विनम्रता का परिचय दिया।

महाकुम्भ की तैयारियों में पीएम और सीएम का योगदान

महंत बलवीर गिरी ने पीएम मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भव्य महाकुम्भ आयोजन के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि सीएम योगी ने प्रयागराज के विकास के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं। मुख्यमंत्री का प्रयागराज के प्रति गहरा लगाव है, और वह हमेशा मंदिर और मठ की स्थिति की जानकारी लेते हैं।

स्वच्छ महाकुम्भ का संदेश

महंत बलवीर गिरी ने महाकुम्भ में आने वाले तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे गंगा और यमुना की पवित्रता बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि स्नान के बाद अपने वस्त्र, फूल, और अन्य सामग्रियों को नदी में न डालें। तीर्थ की पवित्रता बनाए रखने का दायित्व सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं का भी है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज की धरा पर एक कदम चलने से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है, इसलिए इसकी पवित्रता का सम्मान करना आवश्यक है।