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संजय दत्त की तलाश में महेश भट्ट को मिले जॉन अब्राहम, जिन्होंने पहली ही फिल्म से धमाल मचा दिया

जॉन अब्राहम ने बॉलीवुड में अपने काम से अपनी पहचान बनाई है और अपने अभिनय के साथ-साथ अपनी मस्कुलर बॉडी और फिटनेस के लिए भी बेहद मशहूर हैं। आज यानी 17 दिसंबर को जॉन अब्राहम का जन्मदिन है। इंडस्ट्री में एक्शन हीरो वाली छवि रखने वाले जॉन अब्राहम 52 साल के हो गए हैं। हालांकि, एक्टर की शक्ल-सूरत और फिटनेस देखकर शायद ही कोई कह सके कि वह 52 साल के हो गए हैं, लेकिन ये सच है। जॉन अब्राहम इंडस्ट्री के फाइनेस्ट एक्शन हीरोज में से एक हैं, लेकिन वह रोमांटिक और कॉमिक हीरो की भी भूमिकाओं से दर्शकों का दिल जीत चुके हैं। इसके अलावा वह गजब के मॉडल भी हैं। एक्टिंग में उनकी एंट्री मॉडलिंग के बाद ही हुई है। चलिए उनके जन्मदिन पर आपको बताते हैं कि फिल्मों में उनकी एंट्री कैसे हुई।

मॉडलिंग से एक्टिंग में रखा कदम

फिल्मी दुनिया में नाम कमाने से पहले जॉन अब्राहम मॉडलिंग किया करते थे और एक एड एजेंसी से जुड़े हुए थे। जॉन ने मॉडलिंग के दौरान ही कुछ म्यूजिक वीडियोज में भी काम किया और धीरे-धीरे मॉडलिंग की दुनिया का बड़ा नाम बन गए। इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ कि उनकी फिल्मों में भी एंट्री हो गई। फिल्म मेकर महेश भट्ट ने जॉन को अपनी फिल्म में एक्टिंग का पहला मौका दिया और वो भी हीरो के तौर पर।

फ्रेश चेहरे की तलाश में थे महेश भट्ट

उन दिनों महेश भट्ट अपनी फिल्म ‘जिस्म’ के लिए नए चेहरे की तलाश में थे और फिल्म के लिए एक ऐसा हीरो ढूंढ रहे थे जिसकी पर्सनालिटी संजय दत्त जैसी हो। महेश भट्ट की ये खोज जॉन अब्राहम पर आकर खत्म हुई। वह अपनी फिल्म के लिए जिस तरह के लुक वाला हीरो तलाश कर रहे थे, उन्हें जॉन में वो सब दिखा। महेश भट्ट ने जॉन को बताया कि वह जिस फिल्म के लिए उन्हें बतौर लीड हीरो कास्ट करना चाहते हैं, वो लीक से हटकर है। ऐसे में दर्शक ये तय करेंगे कि उन्हें फिल्म पसंद आई या नहीं।

जॉन अब्राहम का एक्टिंग डेब्यू

इसी के साथ जॉन ने 2003 में अपना एक्टिंग डेब्यू किया और इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट डेब्यू एक्टर के फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया। अपने 20 साल से ज्यादा के करियर में जॉन अब्राहम ने हीरो से लेकर विलेन तक, हर तरह के किरदार निभाए हैं और अब वह बतौर फिल्म निर्माता भी काम कर रहे हैं।

जॉन अब्राहम का बाइक लव

बाइक्स को लेकर जॉन अब्राहम का प्यार जगजाहिर है। अक्सर उन्हें अपनी बाइक्स के साथ पोज करते देखा जाता है। जॉन के पास बाइक का शानदार कलेक्शन है। अभिनेता के पास यामहा वी-मेक्स 998CC इंजन वाली सुपर बाइक है, जिसकी कीमत 28 लाख के करीब है। इसके अलावा उनके पास Dukati Panigale V4, सुजुकी जीएसएक्स – आर1000, कावासाकी निंजा ZZR 1400 और बीएमडब्ल्यू 1000 आरआर सहित और भी कई शानदार बाइक्स हैं।

कैंसर से हर साल देश में नौ लाख मौत- प्रो. एमके गुप्ता

  • केजीएमयू के रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग के स्थापना दिवस समारोह में एम्स ऋषिकेश के डॉ. एमके गुप्ता ने दिया प्रो.जीएन अग्रवाल ऑरेशन

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग का 38वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर एम्स ऋषिकेश में रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. एमके गुप्ता ने प्रो.जीएन अग्रवाल ऑरेशन दिया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केजीएमयू माननीय कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद और विशिष्टि अतिथि के रूप में संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के डीन प्रो. शालीन कुमार मौजूद रहे। प्रो. एमके गुप्ता ने कहा कि देश में हर साल कैंसर के करीब 15 लाख नए मरीज मिलते हैं। इनमें से नौ लाख की मौत हो जाती है। इसके पीछे बड़ी वजह इलाज के लायक संसाधन नहीं जुटा पाना भी है।

हालत यह है कि बरेली के कैंसर पीड़ित मरीज को कई जनपद पार करके इलाज के लिए लखनऊ आना पड़ता है। इसका समाधान राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के पास है। आयोग हर मेडिकल कॉलेज में रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग को अनिवार्य कर सकता है। इससे हर जनपद में कैंसर के इलाज की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग में जल्द ही लीनियर एक्सीलरेटर मशीन लगेगी। इससे वेंटिंग वाले मरीजों को राहत मिलेगी। प्रो शालीन कुमार ने विभाग से जुड़ी अपनी यादें साझा की। उन्होंने कहा कि छात्रों को उन्नत शिक्षा के साथ साथ मधुर व्यवहार भी सीखना चाहिए।

समारोह के दौरान विभाग के कर्मियों को पुरस्कार दिए गए। पुरस्कार प्राप्त करने वालों में जो सम्मिलित रहे। उनमें संदीप मिश्रा, प्रियंका शर्मा, प्रियंका गौतम, एकता मौर्या, अवधेश कुमार यादव, अमित कुमार, शीबा फातिमा हैं। POCT के सहयोग के लिए अमित अग्रवाल, कैंप संचालन के लिए राजेंद्र मौर्या, निर्मल कुमार, छात्रों में ओमल वाजपेई और आस्था शर्मा।

विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव गुप्ता ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की। समारोह में विभिन्न संकाय सदस्यों की उपस्थिति रही।

कौशाम्बी: ऐसा थाना जहां विजय दिवस पर सैकड़ों पूर्व सैनिकों को किया गया सम्मानित

  • 1971 के युद्ध की कहानी सुनकर छलक उठीं आँखें ।

कौशांबी, 16 दिसम्बर 2024: हर साल 16 दिसम्बर को भारत 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर अपनी निर्णायक जीत का सम्मान करने और अपने सैनिकों के वीर बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए विजय दिवस मनाता है। वैसे तो भारत के जवानों का सम्मान देश के कोने कोने में होता है।लेकिन उत्तर प्रदेश का इकलौता ऐसा करारी थाना हैं जहां पहली बार गौरवान्वित और भावुकता देखने को मिला है। विजय दिवस के अवसर पर सोमवार को करारी थाना परिसर में पूर्व सैनिक कल्याण समिति कौशाम्बी के अध्यक्षता में सन 1971 के युद्ध का 53वां विजय दिवस मनाया गया।

53वीं वर्षगाँठ के मौके पर 1971 के इस युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को याद करने एवं सन् 1962, सन् 1965 एवं सन् 1971 की लड़ाई में भाग लेने वाले पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं बुजुर्ग पूर्व सैनिकों को सम्मानित करने के लिए करारी प्रभारी निरीक्षक विनीत सिंह के द्वारा एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता व संचालन समिति के जिलाध्यक्ष पूर्व हवलदार दशस्थ लाल करवरिया ने किया।उक्त आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में सदर क्षेत्राधिकारी सत्येन्द्र तिवारी रहे। समिति संस्था के संस्थापक/संरक्षक पूर्व सुबेदार शारदा प्रसाद वर्मा एवं जिलाध्यक्ष पूर्व हवलदार दशस्थ लाल करवरिया के आवाहन पर जनपद के सैकड़ों पूर्व सैनिक एवं वीर नारियाँ शामिल हुए। प्रभारी निरीक्षक विनीत सिंह ने आयोजन में पधारे सभी पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं उनके आश्रितों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया।

सन् 1971 के युद्ध में सक्रिय भाग लेने वाले कैप्टन श्रीनाथ सिंह, सुबेदार मेजर जय नारायण मिश्रा, नायब सुबेदार रमाकान्त मिश्रा, सिपाही मूरध्वज सिंह, सिपाही शीतल प्रसाद सिंह, एफ०एफ०ओ० मोती लाल मिश्रा, नायक चन्दन सिंह, कैप्टन बड़े लाल तिवारी एवं कारगिल युद्ध में सक्रिय भाग लेने वाले पूर्व हवलदार दशरथ लाल करवरिया (जिलाध्यक्ष) ने सन् 1962, सन् 1965, सन् 1971 एवं कारगिल युद्ध के अनुभव साझा किया।सीओ सत्येन्द्र तिवारी ने उपरोक्त सभी युद्ध विजेताओं के द्वारा दी गई महत्वपूर्ण जानकारियों को रुचिपूर्वक सीधे-सरल शब्दों में व्याख्या की, जिससे इन युद्धों की तत्कालीन कठिन परिस्थितियाँ परिदृश्य हो गईं। इस दौरान परिसर में उपस्थित सभी लोगों की आँखें छलक उठी। सदर सीओ और थाना प्रभारी के द्वारा द्वारा उपरोक्त युद्धों में सक्रिय भाग लेने वाले जीवित पूर्व सैनिकों को पुष्प गुच्छ देते हुए अंगवस्त्र (शॉल) भेंट कर स्वागत किया गया। इसके साथ ही वीर नारियों को भी अंगवस्त्र (शॉल) भेंट कर स्वागत किया।

कार्यक्रम के समापन के बाद प्रभारी निरीक्षक विनीत सिंह ने मुख्य अतिथि सहित सभी को स्वल्पाहार के लिए आमंत्रित किया तथा सभी पूर्व सैनिकों एवं वीर नारियों एवं उनके आश्रितों ने स्वल्पाहार किया। सभी पूर्व सैनिकों ने करारी पुलिस स्टाफ के द्वारा दिए गए आतिथ्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की, जो अपने आप में एक अनुपम पहल है। ‘पूर्व सैनिक कल्याण समिति, जनपद-कौशाम्बी के जिलाध्यक्ष पूर्व हवलदार दशरथ लाल करवरिया ने सभी पूर्व सैनिकों एवं वीर नारियों की तरफ से प्रभारी निरीक्षक थाना करारी का आभार व्यक्त किया एवं उन्हें धन्यवाद दिया। पूर्व सैनिकों ने भारत माता की जय एवं वन्दे मातरम् के जयकारों से समारोह का विसर्जन किया।

पूर्व सैनिक कल्याण समिति कौशाम्बी के संस्थापक/संरक्षक पूर्व सुबेदार शारदा प्रसाद वर्मा के मुताबिक सन् 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच दिनांक 03 दिसम्बर से 16 दिसम्बर तक चले 13 दिवसीय युद्ध (आपरेशन कैक्टस लिली) की परिणित पूर्वी पाकिस्तान में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों के साथ पाकिस्तानी पूर्वी कमान्ड के कमान्डर लेफ्टीनेन्ट जनरल ए०ए०के० नियाजी द्वारा भारतीय पूर्वी कमान्ड के जनरल ऑफिसर कमान्डिग-इन-चीफ लेफ्टीनेन्ट जनरल जगजीत सिंह अरोरा के समक्ष हार मान कर आत्मसमर्पण करने से हुई। इसी के साथ एक नये राष्ट्र बांग्लादेश का अभ्युदय हुआ। हर साल 16 दिसम्बर को भारत 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर अपनी निर्णायक जीत का सम्मान करने और अपने सैनिकों के वीर बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए विजय दिवस मनाता है। इस ऐतिहासिक घटना ने न केवल एक सैन्य विजय को चिह्नित किया, बल्कि एक नए राष्ट्र बांग्लादेश के निर्माण को भी चिहिनत किया।

प्राथमिक शिक्षा आजीवन सीखने, संज्ञानात्मक विकास और सामाजिक विकास की कुंजी – डॉ. राजेश्वर सिंह

Dr. Rajeshwar singh
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  • देश के 70 लाख लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करता है हस्तशिल्प, जिसमें से 38 लाख महिलायें – डॉ. राजेश्वर सिंह
  • देश के निर्यात में 35 हजार करोड़ का योगदान देता है हस्तशिल्प उद्योग, हस्त शिल्प को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता – डॉ. राजेश्वर सिंह
  • सिन्धी समाज प्रेम और सहिष्णुता का पर्याय, सरोजनीनगर में मनाया जाए सिन्धी सांस्कृतिक सप्ताह – डॉ. राजेश्वर सिंह
  • प्रीमियर लीगों के आयोजन से युवाओं को मिलते हैं अवसर, बढ़ता है आत्मविश्वास – डॉ. राजेश्वर सिंह
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने सिन्धी प्रीमियर लीग का शुभारम्भ कर विजेता टीम के लिए 50 हजार की प्रोत्साहन राशि का किया एलान
  • ब्लू बेल स्कूल और राज माता एकेडमी महानगर में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रदान किये 10 कंप्यूटर

लखनऊ, 16 दिसम्बर 2024: महानगर स्थित ब्लू बेल स्कूल और राज माता एकेडमी के फाउंडर्स डे कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने एकेडमी की संस्थापिका एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रभा अस्थाना जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, इस एकेडमी के रूप में शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों को आलोकित करता रहेगा। प्राइमरी शिक्षा के महत्व को उल्लेखित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा, “प्राथमिक शिक्षा बच्चे की क्षमता को उजागर करने, संभावनाओं से भरा भविष्य बनाने की कुंजी है।”

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सरोजनीनगर विधायक ने विद्यालय में स्मार्ट क्लासेज का अवलोकन ख़ुशी व्यक्त की और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को आगे बढाने के विद्यालय के संकल्प की प्रशंसा की। विद्यालय प्रबंधन की प्रशसा करते हुए डॉ. सिंह ने कहा, ”एक मोमबत्ती की भांति शिक्षक अपने छात्र – छात्राओं के उज्जवल भविष्य के लिए स्वयं का जीवन अर्पित कर देता है, एकेडमी की प्रबंधक चारू प्रिया अस्थाना एवं समस्त स्टाफ को उनके निरंतर प्रयासों के लिए हार्दिक बधाई।” साथ ही सरोजनी नगर विधायक ने डिजिटल शिक्षा के प्रोत्साहन के संकल्प क्रम में एकेडमी में 10 कंप्यूटर प्रदान कर डिजिटल लाइब्रेरी की सथापना का संकल्प व्यक्त किया।

हिन्दुस्तान हस्तशिल्प महोत्सव में की सहभागिता

आशियाना स्थित स्मृति उपवन में माँ गायत्री जनसेवा संस्थान एवं नीशू वेलफेयर फाउन्डेशन द्वारा आयोजित ‘हिन्दुस्तान हस्तशिल्प महोत्सव’ में अपने बड़े भाई रामेश्वर सिंह जी के साथ पहुंचे डॉ. राजेश्वर सिंह ने देश के 28 राज्यों से आये शिल्पकारों की अनुपम कलाकृतियों का अवलोकन और हस्त शिल्पियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उपस्थित शिल्पकारों और दर्शकों को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा, “”हस्त शिल्प केवल कला नहीं, अपितु हमारे पूर्वजों की धरोहर और परिश्रम की जीवंत मिसाल है, जो समय के साथ सजीव बनी रहती है। हस्तशिल्प देश के 70 लाख लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करता है, जिसमें से 38 लाख महिलायें हैं, इस दृष्टि से भी हस्त शिल्प अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत के निर्यात में हस्तशिल्प का योगदान करीब 35 हजार करोड़ है, जो प्रतिवर्ष 14 – 15% की दर से बढ़ रहा है, हस्त शिल्प के सभी उत्पाद प्रकृति के अनुकूल होते हैं।

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपनी विधानसभा क्षेत्र में इस भव्य आयोजन के लिए अरुण प्रताप सिंह, गुंजन वर्मा, मनोज सिंह चौहान, विनय दुबे, रनवीर सिंह, हेमू चौरसिया एवं आयोजन मंडल के सभी सदस्यों को बधाई दी। महोत्सव में पूर्व विधायक चन्द्र प्रकाश मिश्र मटियारी , पार्षद प्रतिनिधि कमलेश सिंह, पार्षद केएन सिंह, आमोद कुमार, अम्बिका सिंह, शिव कुमार सिंह चच्चू, शेर अली खां, विनय सूदन एवं अन्य भाजपा नेता मौजूद रहे।

सिन्धी प्रीमियर लीग : नेशनल लेवल का किया शुभारम्भ

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोमवार को आशियाना स्थित मल्टी एक्टिविटी सेंटर में सिन्धी प्रीमियर लीग : नेशनल लेवल का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर विधायक बल्ले से चौके – चक्के लगाते नजर आये। डॉ. सिंह ने प्रीमियर लीग के आयोजन की प्रसंशा करते हुए कहा इससे प्रतिभाओं में निखार आता है, उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। विधायक ने बताया खेल से हमें टीम भावना, निर्णय लेने, अच्छा स्वास्थ्य, शारीरिक फिटनेस आदि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण गुण विकसित होते हैं।

सिन्धी समाज की प्रसंशा करते हुए सरोजनीनगर विधायक ने आगे जोड़ा, “सिन्धी समाज का गौरवशाली इतिहास अत्यंत प्राचीन होने के साथ प्रेम और सहिष्णुता का पर्याय है, सिन्धी समाज का साहित्य एवं संगीत उत्कृष्ट श्रेणी का है।” सरोजनीनगर में सिन्धी समाज की विभूतियों के सम्मान में 2 सड़कों के नामकरण और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हेमू कालाणी की भव्य प्रतिमा की स्थापना का संकल्प व्यक्त करते हुए डॉ. सिंह ने सरोजनीनगर में सिन्धी सांस्कृतिक सप्ताह मनाये जाने का आह्वान भी किया।

लखनऊ में सिन्धी समाज द्वारा सिन्धी प्रीमियर लीग के आयोजन को युवाओं के स्वास्थ्य, सामजिक एकजुटता, सहयोग और समरसता के दृष्टिगत एक दूरदर्शी पहल बताते हुए डॉ. सिंह ने आयोजन समिति के सभी सदस्यों को बधाई दी। इस दौरान डॉ. सिंह ने लीग में प्रतिभाग कर रही 12 टीमों में से विजेता टीम को 50 हजार की नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। कार्यक्रम में साईं कृष्ण लाल, विनोद पंजाबी, अजय देमरा, नानक चंद लखमानी, वीरेंद्र खत्री, विवेक लधानी, मुरलीधर आहूजा, संजय गुरुनानी, संजय आहूजा, सत्येन्द्र भवनानी, कपिल, भीमेश, कवि, राजू, राहुल, पुलकित व सिन्धी समाज के अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: चित्रकूट में निचली अदालत से मिली सजा में एडवोकेट जितेन्द्र सिंह की कड़ी मेहनत से परिवार को राहत, बेक़सूर को मिला न्याय

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: चित्रकूट में निचली अदालत से मिली सजा में एडवोकेट जितेन्द्र सिंह की कड़ी मेहनत से परिवार को राहत, बेक़सूर को मिला न्याय
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: चित्रकूट में निचली अदालत से मिली सजा में एडवोकेट जितेन्द्र सिंह की कड़ी मेहनत से परिवार को राहत, बेक़सूर को मिला न्याय

प्रयागराज/लखनऊ/चित्रकूट, 16 दिसंबर 2024: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के एक जटिल मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। चित्रकूट के राजापुर (अब सरधुआ) थाना क्षेत्र के देवारी गांव निवासी अखिलेश सिंह को दहेज हत्या के आरोप में निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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11 दिसंबर 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के इस फैसले को निरस्त करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। यह फैसला न केवल कानूनी प्रक्रिया की निष्पक्षता को दर्शाता है, बल्कि एक परिवार के लिए न्याय और राहत का प्रतीक बन गया है।

मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा मामला?

13 सितंबर 2014 को अखिलेश सिंह की पत्नी की जलकर मौत हो गई थी। मृतका के मायके वालों ने इस घटना के लिए ससुराल पक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए दहेज हत्या का आरोप लगाया। मामला दर्ज हुआ, और अखिलेश सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।

परिवार के अनुसार, घटना के समय अखिलेश सिंह ने अपनी पत्नी को बचाने की कोशिश की, जिसमें वह खुद भी बुरी तरह झुलस गया था। विजया हॉस्पिटल में उनका इलाज चार महीने तक चला। बावजूद इसके, मृतका के परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया।

निचली अदालत ने इस मामले में अखिलेश सिंह को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला अखिलेश व उसके परिवार के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं था।

परिवार की त्रासदी और कानूनी लड़ाई

truenewsup.com के मुख्य संपादक शिवसागर सिंह चौहान ने जब इस मामले में अखिलेश सिंह के पिता मास्टर लक्षनपाल सिंह से बात की, तो उन्होंने बताया कि यह घटना उनके परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी।

मास्टर लक्षनपाल सिंह, जो एक सेवानिवृत्त शिक्षक और क्षेत्र में सम्मानित नागरिक हैं, ने कहा:

“मेरे बेटे अखिलेश का इस घटना में कोई दोष नहीं था। वह अपनी पत्नी को बचाने में बुरी तरह झुलस गया था। लेकिन समाज और कानून ने हमें पूरी तरह तोड़ दिया। बहू को बचा नहीं सके और बेटे को जेल में देखना सबसे बड़ा दर्द था।”

वकील जितेंद्र सिंह का योगदान:

इस कठिन समय में परिवार ने एडवोकेट जितेंद्र सिंह से संपर्क किया। उन्होंने पूरे मामले को समझा और हाईकोर्ट में याचिका दायर की, उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया “परेशान मत होइए, उच्च न्यायालय से आपको न्याय मिलेगा।”

इसके बाद उन्होंने साक्ष्यों और तथ्यों का गहराई से अध्ययन किया और प्रभावशाली पैरवी की। उनकी मेहनत के चलते हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले से हाईकोर्ट द्वारा उन्हें राहत मिली।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला और उसका महत्व

बीती 11 दिसंबर 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर 43 में न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की डबल बेंच ने निचली अदालत के फ़ैसले को निरस्त करते हुए तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश जारी किया।

इस फैसले ने परिवार को नई उम्मीद दी और न्यायपालिका के प्रति उनका विश्वास फिर से मजबूत किया।

परिवार की भावनाएं और नई शुरुआत की उम्मीद

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद, देवारी निवासी अखिलेश सिंह के पिता मास्टर लक्षनपाल सिंह ने कहा:

“यह मामला हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था। लेकिन अब, न्यायालय ने हमारे परिवार को नई जिंदगी जीने का मौका दिया है। हम इस कठिन समय को पीछे छोड़कर सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।”

अखिलेश सिंह पर पड़े प्रभाव
जेल में बिताया गया समय अखिलेश के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत कठिन रहा। परिवार ने बताया कि यह समय उनके बेटे के लिए किसी यातना से कम नहीं था। अब, रिहाई के बाद, वह अपने जीवन को नए सिरे से शुरू करने की कोशिश करेगा।

इस मामले का सामाजिक और कानूनी संदेश

दहेज हत्या जैसे गंभीर मामलों में न्यायपालिका का यह फैसला समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है:
1. न्याय की निष्पक्षता: कानून हमेशा साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर काम करता है।
2. व्यक्तिगत परिस्थितियों की समझ: न्यायपालिका ने मामले की गहराई में जाकर हर पहलू का विश्लेषण किया और सही निर्णय लिया।
3. समाज के लिए सीख: दहेज हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाते समय तथ्यों की सटीकता सुनिश्चित करनी चाहिए।

परिवार की नई शुरुआत

इस फैसले ने न केवल अखिलेश सिंह को राहत दी, बल्कि उनके परिवार को एक नई उम्मीद दी है। मास्टर लक्षनपाल सिंह ने कहा कि वे इस कठिन समय को पीछे छोड़कर अपने परिवार के साथ एक सकारात्मक जीवन जिएँगे।

यह खबर केवल कानूनी लड़ाई की नहीं, बल्कि एक परिवार के दर्द, संघर्ष और पुनःस्थापना की कहानी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला न्यायपालिका के प्रति विश्वास को मजबूत करता है और समाज को सच्चाई के महत्व का संदेश देता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला एक परिवार के लिए राहत और न्याय का प्रतीक है। यह घटना बताती है कि कैसे कानून और न्यायपालिका सच्चाई और साक्ष्यों पर आधारित फैसले करते हैं। यह समाज में न्याय और निष्पक्षता का संदेश देते हुए सभी को सच्चाई के साथ खड़े होने की प्रेरणा देता है।