रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि रूस ने भारत को सूचित किया है कि रूसी सेना में सेवा दे रहे 16 भारतीय लापता हैं। मंत्रालय ने कहा कि रूसी सेना में कार्यरत भारतीय नागरिकों को वापस भेजे जाने का आग्रह किया गया है। इसने कहा कि रूसी सेना में कार्यरत 12 भारतीयों की अब तक मौत हो चुकी है।
96 लोग भारत लौटे
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘126 मामले (रूस की सेना में भारतीय नागरिकों के काम करने के) हैं। इन 126 में से 96 लोग भारत लौट आए हैं और रूसी सशस्त्र बलों से उन्हें मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘रूस की सेना में अब भी 18 भारतीय नागरिक हैं जिनमें से 16 का अता-पता नहीं है।’’ जायसवाल ने कहा, ‘‘रूस ने इन्हें लापता की श्रेणी में रखा है। जो अब भी सेना में हैं हम उन्हें मुक्त करने और वापस भेजे जाने की मांग करते हैं।’’
भारतीय की हुई थी मौत
बता दें कि, हाल ही में रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में केरल के रहने वाले एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी। केरल के त्रिशूर के रहने वाले 32 वर्षीय बिनिल बाबू रूस की सेना में भर्ती थे और वह यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे थे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले को रूसी सरकार के समक्ष उठाया था। मंत्रालय ने कहा था कि भारत ने रूसी सेना में शामिल किए गए देश के अन्य लोगों को भी जल्द भारत भेजने की अपनी मांग दोहराई है।
राष्ट्रपति पुतिन से मिला है आश्वासन
बीते साल अगस्त में इस मुद्दे को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से आश्वासन मिला है कि जो भी भारतीय नागरिक रूसी सेना की सेवा में है, उन्हें सेवा से हटाकर बाहर कर दिया जाएगा। भारत का इस पूरे मामले पर रुख पहले से ही स्पष्ट है और रूस के सामने इस मुद्दे को उठाया जा चुका है।
इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने शुक्रवार को अहम बैठक की है। बैठक यह तय करने के लिए की गई है कि क्या उस समझौते को मंजूरी दे दी जाए, जिससे गाजा में आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाए गए दर्जनों लोगों को रिहा किया जा सके और 15 महीने से चल रहे युद्ध को रोका जा सके। अगर कैबिनेट ने मंजूरी दे दी, तो युद्ध विराम लागू होने से पहले समझौते को अंतिम मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा।
नेतन्याहू के कार्यालय ने क्या कहा?
शुक्रवार की बैठक से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से पहले कहा गया था कि समझौते को अंतिम रूप देने में अंतिम समय में कुछ अड़चनें आई हैं। इजरायल ने बृहस्पतिवार को सुरक्षा कैबिनेट के मतदान में देरी की, जिसमें हमास के साथ विवाद को मंजूरी में देरी का कारण बताया गया। हालांकि, सुबह-सुबह एक बयान ने सुरक्षा कैबिनेट द्वारा सौदे पर मतदान का रास्ता साफ होता दिखाई दिया।
समझौते को समझें
पीएम नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने गाजा से लौटने वाले बंधकों को लेने के लिए एक विशेष कार्य बल को तैयार करने का निर्देश दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि समझौता पूरी तरह होने पर रविवार को शुरुआती बंधकों की रिहाई के साथ युद्ध विराम शुरू हो सकता है। इस समझौते के तहत, गाजा में बचे हुए लगभग 100 बंधकों में से 33 को अगले छह सप्ताह में रिहा किया जाना है, बदले में इजरायल द्वारा कैद किए गए सैकड़ों फलस्तीनियों को छोड़ा जाएगा। इसके अलावा, इजरायली सेना कई क्षेत्रों से वापस आ जाएगी, सैकड़ों हजारों फलस्तीनी अपने घरों में वापस लौट सकेंगे, और मानवीय सहायता में वृद्धि होगी। पुरुष सैनिकों सहित शेष बंधकों को दूसरे चरण में रिहा किया जाना है।
हमास ने क्या कहा?
हमास ने कहा है कि वह स्थायी युद्ध विराम और इजरायल के पूरी तरह वापसी के बिना शेष बंदियों को रिहा नहीं करेगा, जबकि इजरायल ने समूह को खत्म करने और क्षेत्र पर खुले सुरक्षा नियंत्रण को बनाए रखने तक लड़ाई जारी रखने की कसम खाई है। युद्ध के बाद की स्थित और गाजा को लेकर कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मिलने बाकी हैं। जिसमें यह भी शामिल है कि क्षेत्र पर कौन शासन करेगा या पुनर्निर्माण के कठिन कार्य की देखरेख कौन करेगा।
नेतन्याहू के सामने है बड़ी मुश्किल
समझौते पर नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन सहयोगियों की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है, जिन पर इजरायल के प्रधानमंत्री सत्ता में बने रहने के लिए निर्भर हैं। इजरायल के कट्टरपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इटमार बेन-ग्वीर ने धमकी दी है कि अगर इजरायल ने युद्ध विराम को मंजूरी दी तो वह सरकार छोड़ देंगे। शुक्रवार को बेन-ग्वीर ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘अगर यह समझौता हो जाता है, तो हम भारी मन से सरकार छोड़ देंगे।’’
गाजा में जारी है लड़ाई
इस बीच, गाजा में लड़ाई जारी है बृहस्पतिवार को इजरायली हमलों में कम से कम 72 लोग मारे गए। पिछले संघर्षों में, दोनों पक्षों ने ताकत दिखाने के लिए युद्ध विराम से पहले अंतिम घंटों में सैन्य अभियान बढ़ा दिए थे। हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल में सीमा पार से हमला करके युद्ध की शुरुआत की, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए और 250 अन्य को बंधक बना लिया गया। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इजरायल ने विनाशकारी हमले के साथ जवाब दिया, जिसमें 46,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए। मरने वालों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं।
प्रदेश स्तरीय मूल्य परामर्शदात्री परिषद की बैठक सम्पन्न: खरीफ सीजन की 10 फसलों के लिए केंद्र को भेजे जाएंगे सुझाव
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में विधान भवन में मूल्य परामर्शदात्री परिषद की बैठक आयोजित हुई।
धान (सामान्य और ग्रेड-ए), ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, मूँगफली, सोयाबीन, और तिल पर MSP निर्धारण पर चर्चा की गई।
केंद्र सरकार को खरीफ फसलों के लिए MSP सुझाव जल्द भेजे जाएंगे।
बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री जेपीएस राठौर, खाद्य एवं रसद मंत्री सतीश शर्मा, और अन्य अधिकारी शामिल थे।
किसानों के हित में MSP निर्धारण का उद्देश्य उनकी आय में सुधार और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
लखनऊ, 17 जनवरी 2025: प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में शुक्रवार को विधान भवन में खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारण के लिए केंद्र सरकार को सुझाव देने के उद्देश्य से प्रदेश स्तरीय मूल्य परामर्शदात्री परिषद की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करते हुए उनकी फसलों के लिए उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने हेतु केंद्र सरकार को सटीक और प्रभावी सुझाव देना था।
खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गहन चर्चा
बैठक के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का निर्धारण इस प्रकार होना चाहिए, जिससे प्रदेश के किसानों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित हो सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण में किसानों की लागत, बाजार की स्थितियां, और उनकी आय को बेहतर बनाने के पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
बैठक में खरीफ सीजन की 10 प्रमुख फसलों के MSP पर विशेष चर्चा हुई, जिनमें धान (सामान्य और ग्रेड-ए), ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, मूँगफली, सोयाबीन, और तिल शामिल हैं। इन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को तय करने के लिए परिषद के सदस्यों ने अपने सुझाव दिए और व्यापक विचार-विमर्श किया।
उपस्थित गणमान्य और अधिकारियों की भागीदारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में मूल्य परामर्शदात्री परिषद के कई प्रमुख सदस्यों ने हिस्सा लिया। इसमें सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर, खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री सतीश शर्मा, सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार, प्रमुख सचिव कृषि रवींद्र, प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद, और निदेशक कृषि सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। सभी अधिकारियों और सदस्यों ने किसानों के हित में ठोस सुझाव दिए और इस पर सहमति व्यक्त की कि फसलों के लिए MSP का निर्धारण किसानों की भलाई और उनकी आय में सुधार के उद्देश्य से किया जाना चाहिए।
किसानों के हित में निर्णय
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि खरीफ सीजन की इन 10 फसलों के MSP सुझावों को जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इन सुझावों का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल के लिए उचित मूल्य दिलाना और उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है।
कृषि मंत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया में किसान संगठनों, सहकारी समितियों, और कृषि विशेषज्ञों की राय को भी शामिल किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों के लिए अधिकतम फायदेमंद हो।
संपूर्ण समाज के लिए महत्वपूर्ण पहल
बैठक में लिए गए निर्णयों को केंद्र सरकार को जल्द ही भेजा जाएगा ताकि समय पर खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की जा सके। यह कदम किसानों की आय में सुधार और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
लखनऊ: डॉ. राजेश्वर सिंह का जनसेवा मॉडल, सच्ची राजनीति ने पेश की मानवता की मिसाल, विधायक कार्यालय के माध्यम से अब तक 847 मरीजों को 16.63 करोड़ की मदद
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अब तक 847 मरीजों को 16.63 करोड़ रुपये की सहायता दी।
विधायक कार्यालय मरीजों को 24-48 घंटों के भीतर आर्थिक मदद उपलब्ध कराता है।
विधायक टीम मरीजों से सीधा संपर्क कर तत्काल सहायता सुनिश्चित करती है।
विधायक कार्यालय के सदस्यों ने कई मरीजों की जान बचाने के लिए रक्तदान किया।
चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक उपकरण और अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी।
लखनऊ, 17 जनवरी 2025: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का सरोजिनी नगर इलाका आज चिकित्सा सहायता की एक नई परिभाषा प्रस्तुत कर रहा है। इस बदलाव के केंद्र में हैं सरोजनीनगर विधानसभा से भाजपा विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह, जिनकी नेतृत्व क्षमता और जनसेवा की भावना ने उन्हें राजनीतिक क्षेत्र में सिर्फ एक विधायक से कहीं अधिक बना दिया है। उनका प्रयास इस बात का प्रतीक है कि राजनीति केवल सत्ता की भूख नहीं, बल्कि जनता की असल समस्याओं को हल करने का एक जरिया है। आज सरोजिनी नगर में हजारों लोग डॉ. सिंह के कार्यों के कारण नए जीवन का अनुभव कर रहे हैं, और उनका यह जनसेवा मॉडल न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि समूचे देश के लिए आदर्श बन चुका है।
चिकित्सा सहायता की क्रांति: 16.63 करोड़ का योगदान
डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में सरोजिनी नगर में एक ऐसी व्यवस्था स्थापित की गई है, जहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इलाज के लिए तत्काल मदद मिलती है। अब तक 847 मरीजों को 16.63 करोड़ रुपये की चिकित्सा सहायता दी जा चुकी है। यह राशि डॉ. सिंह की त्वरित पैरवी से मुख्यमंत्री राहत कोष से उन लोगों को दी गई, जिनके पास इलाज के लिए आवश्यक संसाधन नहीं थे। यह राशि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन परिवारों की आस्था का प्रतीक है जिनकी जिंदगी अब बेहतर हो चुकी है।
कैसे काम करता है डॉ. राजेश्वर सिंह का जनसेवा सिस्टम ?
यह जनसेवा मॉडल सिर्फ कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हर कदम पर त्वरित निर्णय और मानवीय संवेदनाएं शामिल हैं। डॉ. सिंह के कार्यालय ने एक ऐसा संवेदनशील सिस्टम तैयार किया है, जो मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की देरी को अस्वीकार करता है।
सीधा संपर्क और प्राथमिकता: विधायक कार्यालय की टीम मरीजों और उनके परिवारों से सीधा संपर्क करती है। किसी को भी सहायता के लिए भटकने की जरूरत नहीं होती। प्रत्येक पीड़ित के पास तत्काल मदद पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
दस्तावेज़ों की तुरंत व्यवस्था: इलाज के लिए जरूरी दस्तावेजों को तत्काल तैयार कर लिया जाता है, ताकि किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी न हो।
मुख्यमंत्री राहत कोष से सिफारिश: डॉ. सिंह की टीम हर मरीज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से सिफारिश भेजती है, और इस प्रक्रिया को बेहद तेजी से पूरा किया जाता है।
मदद की त्वरित पहुंच: धनराशि मरीजों के खातों में त्वरित गति से ट्रांसफर कर दी जाती है। डॉ. सिंह के निर्देशों के मुताबिक यह सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज के इलाज में किसी भी प्रकार की देरी न हो इसलिए ऐसे मामलों की पैरवी में भी देरी नहीं होनी चाहिए।
मरीज का तत्काल इलाज: गंभीर मामलों में, विधायक कार्यालय अस्पतालों से समन्वय करके मरीजों को तुरंत अस्पताल में भर्ती करवा देता है, जिससे उनका इलाज बिना किसी देरी के शुरू हो सके।
किसान परिवार की बेटी को नया जीवन मिला
हाल ही में, सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र के एक गरीब किसान परिवार की बेटी को जीवन की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। उसे एक गंभीर बीमारी थी, और इलाज के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता थी। लेकिन एक गरीब किसान के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना असंभव सा प्रतीत हो रहा था। विधायक कार्यालय को सूचना मिलने पर त्वरित गति से न सिर्फ सिफारिश भेजी बल्कि त्वरित गति से, मुख्यमंत्री राहत कोश से आवश्यक धनराशि उनके खाते में जमा हो गई, और लड़की का इलाज तुरंत शुरू हुआ। यह घटना केवल एक मामला नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करता है जिनकी जिंदगी अब डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में दिन प्रतिदिन बेहतर हो रही है।
विधायक कार्यालय की टीम द्वारा की गए रक्तदान से बचाई गई जानें
डॉ. सिंह का जनसेवा मॉडल केवल कागजी मदद तक सीमित नहीं है। जब-जब जरूरत पड़ी, विधायक डॉ. सिंह के कार्यालय के सदस्य न केवल आर्थिक सहायता देने पहुंचे, बल्कि स्वयं रक्तदान कर कई मरीजों की जान भी बचाई। जरूरत के मुताबिक विधायक डॉ. सिंह के कार्यालय की टीम खुद रक्तदान करती है ताकि किसी मरीज को इलाज में कोई रुकावट न हो। यह न केवल एक प्रशासनिक इकाई के रूप में, बल्कि एक मानवीय संस्था के रूप में उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जनता का भरोसा: विधायक कार्यालय की वास्तविक शक्ति
अब सरोजिनी नगर की जनता जानती है कि किसी भी कठिनाई में उनका विधायक उनके साथ है। पहले लोग इलाज के लिए अस्पतालों के दरवाजों तक भटकते थे, लेकिन अब वे जानते हैं कि उनके विधायक कार्यालय से हर समस्या का समाधान मिलेगा। एक स्थानीय निवासी सौरभ ने truenewsup.com के संस्थापक एवं मुख्य सम्पादक शिवसागर सिंह चौहान से बताया कि, “पहले हमें हर जगह गंभीर बीमारी के इलाज के लिए दौड़ना पड़ता था, लेकिन अब इलाज से लेकर हमारी हर मदद विधायक कार्यालय से ही पूरी हो जाती है और हमें पूरा भरोसा है कि हमारे विधायक और उनकी सक्रिय टीम हर समय हमारे साथ हैं। उनकी निःस्वार्थ मदद ने ही हमें यह विश्वास दिलाया कि अब हम किसी से कम नहीं हैं।”
एक स्थानीय निवासी अंजलि ने भी truenewsup.com के मुख्य संपादक से कहा, “पहले जब परिवार में कोई गंभीर रूप से बीमार होता था, तो हमें इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह और उनकी टीम ने हमारी हर मुश्किल को हल करने में आगे बढ़कर मदद की है। उनकी मददगार टीम ने हमें यह भरोसा दिया है कि हमें अब किसी भी समस्या का सामना अकेले नहीं करना पड़ेगा। उनके प्रयासों से हमें यह अहसास हुआ है कि हमारी तकलीफें अब ध्यान में रखी जा रही हैं।”
डॉ. राजेश्वर सिंह का दृष्टिकोण: राजनीति से ज्यादा सेवा का उद्देश्य
अधिकारी से पूरी तरह जनप्रिय नेता बन चुके सरोजिनी नगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह का मानना है, “राजनीति सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जनता की सेवा का सबसे बड़ा जरिया है। जब तक एक भी व्यक्ति इलाज के बिना पीड़ित है, मेरी जिम्मेदारी पूरी नहीं हुई।” उनकी इस सोच ने उनके कार्यों को नई दिशा दी है और सरोजिनी नगर में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके प्रयासों के कारण आज सरोजिनी नगर में कोई भी मरीज इलाज के बिना नहीं छोड़ता।
डॉ. सिंह का मानना है, “राजनीति का मूल उद्देश्य जनता की सेवा है, विशेषकर उन लोगों की जो सबसे अधिक असहाय और जरूरतमंद हैं, साथ ही वृद्धजन भी हमारे समाज की नींव हैं, और उनका सम्मान और उनकी देखभाल हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। जब तक कोई बुजुर्ग व्यक्ति बीमारी या असहायता में जी रहा है, तब तक हमारी सेवा अधूरी है।”
उन्होंने सरोजिनी नगर में वृद्धजनों के लिए विशेष चिकित्सा सहायता और सुविधाओं का प्रबंध किया है। डॉ. सिंह ने बुजुर्गों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच शिविरों, घर-घर जाकर चिकित्सा सहायता, और तत्काल वित्तीय मदद जैसी सेवाओं को प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि “वृद्धजन हमारे अनुभव और ज्ञान के स्तंभ हैं, और उनकी भलाई सुनिश्चित करना ही सच्ची सेवा है।” इस मानवीय दृष्टिकोण ने उन्हें केवल एक नेता नहीं, बल्कि जनसेवा का एक प्रतीक बना दिया है, जो अपने हर कदम से यह सुनिश्चित करते हैं कि सरोजिनी नगर में हर गरीब, असहाय व वृद्धजन को भी स्वस्थ व गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिले।
देशभर में सराहना: डॉ. सिंह का जनसेवा मॉडल आदर्श बन चुका है
डॉ.राजेश्वर सिंह का यह जनसेवा मॉडल केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। यह साबित करता है कि जब राजनीति और मानवता साथ-साथ चलती है, तो चमत्कारी बदलाव संभव होते हैं। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों और राज्यों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है।
भविष्य की योजनाएं: चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार
डॉ. सिंह का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है। उनके कार्यालय की योजना है कि सरोजिनी नगर में चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत किया जाए। इसके लिए अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, और अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी, साथ ही जरूरत के मुताबिक और अस्पतालों की भी संख्या बढ़ाई जाएगी।
वर्तमान समय की राजनीति में डॉ. राजेश्वर सिंह ने यह सिद्ध कर दिया है कि सच्ची राजनीति वही है जो जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देती है और उन्हें हल करने के लिए सक्रिय कदम उठाती है। उनका जनसेवा मॉडल न केवल सरोजिनी नगर, लखनऊ और उत्तरप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुका है। यह मॉडल इस बात को साबित करता है कि राजनीति में अगर सेवा की भावना हो, तो समाज में असली बदलाव लाया जा सकता है।
‘बिग बॉस 18’ का ग्रैंड फिनाले 19 जनवरी को होने वाला है और फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि सलमान खान के शो का विनर कौन होगा। फिनाले से पहले शिल्पा शिरोडकर एलिमिनेट हो गईं। वहीं करण वीर मेहरा, अविनाश मिश्रा, ईशा सिंह, विवियन डीसेना, चुम दरंग और रजत दलाल बिग बॉस सीजन 18 के टॉप 6 फाइनलिस्ट बने। आज रात (16 जनवरी) के एपिसोड में करण वीर मेहरा, अविनाश मिश्रा, ईशा सिंह और बाकी फाइनलिस्ट बिग बॉस के घर में अपनी जर्नी वीडियो देखकर भावुक होते दिखाई दिए।
अविनाश मिश्रा का दिखा जलवा
अविनाश मिश्रा का गार्डन एरिया में उनके फैंस ने बहुत ही शानदार तरीके से स्वागत किया। वह अपनी जर्नी वीडियो देख खुशी से झूमने लगे और मंच पर शर्ट उतार दी। बिग बॉस बताते हैं कि उन्हें घर का विलेन कहा जाता था, लेकिन वह हीरो हैं। अविनाश की टोंड बॉडी देख बिग बॉस उनकी तारीफ करते हैं। वह अपनी शर्ट उतारते हैं और अपने एब्स दिखाते हैं।
करण वीर मेहरा की आंखें हुई नम
करण वीर मेहरा भी अपनी जर्नी वीडियो देखने के लिए गार्डन एरिया में जाते हैं। दर्शक उनका हौसला बढ़ाते हैं। वे इस शो को द करण वीर मेहरा शो कहते हैं। स्क्रीन पर सभी पलों को देखने के बाद करण वीर की आंखों में आंसू आ जाते हैं।
ईशा सिंह हुईं इमोशनल
ईशा सिंह अपनी बिग बॉस जर्नी का वीडियो देखने के बाद भावुक हो जाती हैं और रो पड़ती हैं। वह अपनी बातों से दर्शकों का दिल जीत लेती है। बिग बॉस कहते हैं कि वह हमेशा अपने दोस्तों के लिए खड़ी रहती हैं और इसलिए उन्हें लोग पसंद करते हैं। वह बिग बॉस को यह जर्नी दिखाने के लिए धन्यवाद कहती है। बता दें कि, ‘बिग बॉस 18’ का ग्रैंड फिनाले 19 जनवरी, 2025 को रात 9:30 बजे होगा। दिग्विजय राठी को छोड़कर सभी प्रतियोगियों फिनाले की रात में शामिल होंगे।