अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित किया। दावोस फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका का स्वर्णिम दौर शुरू हो गया है, हमारा देश जल्द ही पहले से अधिक मजबूत, एकजुट और संपन्न बनेगा। उन्होंने कहा कि मैं सऊदी अरब, ओपेक से तेल की कीमतें कम करने के लिए कहूंगा, अगर तेल की कीमतें कम हुईं तो रूस-यूक्रेन युद्ध तत्काल समाप्त हो जाएगा।
अमेरिका के पास सबसे अधिक तेल और गैस
ट्रंप ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कहा, ‘मैंने ग्रीन न्यू डील को खत्म कर दिया। मैं इसे ग्रीन न्यू स्कैम कहता हूं, मैं एकतरफा पेरिस जलवायु समझौते से हट गया और महंगे इलेक्ट्रिक वाहन के मैंडेट को समाप्त कर दिया। अमेरिका के पास धरती पर किसी भी देश की तुलना में सबसे अधिक मात्रा में तेल और गैस है, और हम इसका इस्तेमाल करने जा रहे हैं।
ट्रंप ने कारोबारियों को दिया संदेश
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दुनिया भर के कारोबारियों को संदेश दिया कि वो अपने मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस को अमेरिका में लाएं, अन्यथा टैरिफ बढ़ोतरी का सामना करने के लिए तैयार रहें। ट्रंप ने कहा, ‘दुनिया के हर बिजनेस के लिए मेरा मैसेज बहुत सरल है। आइए और अपना प्रोडक्ट अमेरिका में बनाइए और हम आपको दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सबसे कम टैक्स की सुविधा देंगे।’
ट्रंप ने और क्या कहा?
विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने चार दिनों में वह हासिल कर लिया जो अन्य सरकारें चार साल में भी हासिल नहीं कर सकीं। राष्ट्रपति के तौर पर कार्यकाल के लिए उन्होंने 20 जनवरी को शपथ ग्रहण की। इसी दिन पांच दिवसीय विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक शुरू हुई थी।
सरोजनीनगर विधानसभा: डॉ. राजेश्वर सिंह का 193 स्कूलों को झूलों और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य, बच्चों को दी खुशियों की सौगात देते हुए अब तक 61 स्कूलों में लगवाए झूले
सरोजनीनगर के बच्चों के लिए नई सौगात : डॉ राजेश्वर सिंह ने सरोजनीनगर के 61 परिषदीय स्कूलों में CSR फण्ड के माध्यम से लगवाए झूले
बच्चे हँसते-खेलते और मुस्कुराते स्कूल जाएँ इसके लिए जरूरी है उन्हें अच्छी शिक्षा के साथ-साथ खेलने के बेहतर संसाधन भी मिलें-डॉ. राजेश्वर सिंह
विधायक डॉ राजेश्वर सिंह का बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास: 61 स्कूलों में झूलों की सौगात
डॉ. सिंह ने कहा- बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सरोजनीनगर के सभी प्राइमरी स्कूलों में झूले लगवाना मेरा लक्ष्य-
लखनऊ, 23 जनवरी 2025: सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति अपनी दूरदर्शी सोच और समर्पित प्रयासों के लिए जाने जाते हैं। उनका मानना है कि कोई भी राष्ट्र तभी सशक्त हो सकता है, जब उसकी नींव मजबूत हो, और बच्चे ही उस नींव का आधार हैं। उन्होंने क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और प्रेरणादायक माहौल प्रदान करने के लिए अनेक नवाचार किए हैं।
अपने इन्हीं विचारों को साकार करने के लिए, विधायक डॉ. सिंह ने वर्ष 2022 में सरोजनीनगर से विधायक बनने के बाद परिषदीय विद्यालयों में झूलों की स्थापना का कार्य शुरू किया। उनका उद्देश्य था कि बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आए और वे स्कूल आने के प्रति अधिक उत्साहित हों। अब तक उन्होंने सीएसआर फंड और निजी संसाधनों के माध्यम से अब-तक 61 विद्यालयों में झूले लगवाए हैं, और क्षेत्र के सभी 193 विद्यालयों में झूले लगाने का लक्ष्य रखा है।
पूर्व में 55 स्कूलों में झूले लगवाए जाने के बाद फिर विधायक द्वारा प्राथमिक विद्यालय सदरौना, अमांवा, शिवदत्तखेड़ा, भटगांव, रामदासखेड़ा और पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिजनौर में 6 प्रकार के झूले—स्लाइडर, सीसॉ, मंकी बार, मैरी-गो-राउंड और स्विंग—स्थापित किए गए हैं। स्कूलों में झूले लगने से बच्चों में स्कूल जाने की बढ़ती अभिरुचि और उत्साह को देखते हुए 15 और प्राथमिक विद्यालयों से झूले लगवाने के आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिसकी प्रक्रिया भी डॉ राजेश्वर सिंह द्वारा शुरू की जा चुकी है।
सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सरोजनीनगर और लोकबंधु अस्पताल में भी झूलों की व्यवस्था की गई है। यह पहल बच्चों और क्षेत्रवासियों के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए की गई है। इसके अतिरिक्त, ओपन-एयर जिम और सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग जैसी योजनाओं की शुरुआत भी की गई है, जो युवाओं और बच्चों को खेलकूद की ओर प्रेरित करती हैं।
डॉ. सिंह ने क्षेत्र के चार प्राथमिक विद्यालयों को गोद लेकर उनका कायाकल्प किया है और सभी स्कूलों में सीएसआर के माध्यम से आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। प्राथमिक विद्यालय लतीफनगर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमौसी को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया गया है। उच्च प्राथमिक विद्यालय खसरवारा में भी व्यापक कायाकल्प करके इसे एक मॉडल स्कूल के रूप में स्थापित किया गया है। इन स्कूलों में जॉयफुल लर्निंग क्लास, मल्टी-प्लेस्टेशन, स्मार्ट इंटरेक्टिव पैनल, गूगल फ्यूचर क्लासरूम, STEM रोबोटिक्स लैब और साउंड सिस्टम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। इसलिए स्कूलों का कायाकल्प, खेलकूद की व्यवस्था और आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बच्चे हमारे भविष्य हैं, और उनके चेहरे की मुस्कान मुझे नई ऊर्जा देती है। उनके विकास से जुड़े हर संसाधन उपलब्ध कराना मेरा कर्तव्य है।”
डॉ. सिंह के प्रयासों से न केवल बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है, बल्कि सरोजनीनगर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मॉडल क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।
एनयूजे लखनऊ कार्यालय में आयोजित हुई बैठक, सदस्यता नवीनीकरण और स्मारिका प्रकाशन पर हुई विस्तृत चर्चा
लखनऊ, 23 जनवरी 2025: राष्ट्रीय पत्रकार संघ (एनयूजे) उत्तर प्रदेश की लखनऊ इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक मीराबाई मार्ग स्थित विधायक निवास कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में एनयूजे स्मारिका के प्रकाशन, सदस्यता नवीनीकरण, नए पत्रकारों को जोड़ने और संगठन की आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में एनयूजे के संरक्षक, पदाधिकारी और लखनऊ इकाई के प्रमुख सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस दौरान संगठन के उद्देश्यों को मजबूत बनाने के लिए कई प्रस्ताव पारित किए गए। साथ ही, स्मारिका प्रकाशन के लिए एक समर्पित टीम का गठन किया गया।
स्मारिका को लेकर बनी रणनीति
बैठक का प्रमुख विषय एनयूजे स्मारिका का प्रकाशन था। इसमें तय किया गया कि स्मारिका का अंतिम स्वरूप तय करने के लिए 10 फरवरी 2025 को एक और बैठक आयोजित की जाएगी। इस दौरान स्मारिका को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए जनपद स्तर के पदाधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
स्मारिका के लिए एक टीम का गठन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हरीश सैनी, प्रदेश कोषाध्यक्ष अनुपम सिंह चौहान, और प्रदेश महामंत्री संतोष भगवन को शामिल किया गया। यह टीम स्मारिका की सामग्री, डिजाइन और प्रकाशन से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालेगी।
सदस्यता अभियान को बढ़ावा
बैठक में पुराने सदस्यों की सदस्यता नवीनीकरण और नए पत्रकारों को संगठन से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने नए पत्रकारों को एनयूजे से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और सदस्यता प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्णय लिया।
बैठक में उपस्थित प्रमुख सदस्य
बैठक में एनयूजे के राष्ट्रीय महामंत्री प्रमोद गोस्वामी, संरक्षकगण के. बख्श. सिंह और सुरेन्द्र दुबे मौजूद रहे, इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सक्सेना, प्रदेश कोषाध्यक्ष अनुपम सिंह चौहान, प्रदेश महामंत्री संतोष भगवन, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हरीश सैनी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य टीटू शर्मा, लखनऊ जिलाध्यक्ष आशीष मौर्या, महामंत्री पद्माकर पांडेय, संगठन मंत्री अश्वनी जायसवाल, उपाध्यक्ष मीनाक्षी वर्मा, कोषाध्यक्ष अनुपम पाण्डेय, मीडिया प्रभारी/प्रवक्ता शिव सागर सिंह भी मौजूद रहे।
इस बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य मार्कण्डेय सिंह, और सदस्यता अभियान में रुचि दिखाने वाले नए पत्रकार मार्कण्डेय पाण्डेय, रंजना यादव, मुइनुद्दीन अंसारी, और प्रेम रंजन डे ने भी भाग लिया।
बैठक के मुख्य निष्कर्ष
स्मारिका प्रकाशन: स्मारिका के अंतिम स्वरूप को तय करने और प्रकाशन से जुड़ी सभी जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करने के लिए 10 फरवरी को अंतिम बैठक।
सदस्यता अभियान: पुराने सदस्यों की सदस्यता नवीनीकरण और नए पत्रकारों को संगठन से जोड़ने के प्रयासों पर जोर।
समन्वय स्थापित करना: स्मारिका की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ाने के लिए जनपद स्तर के पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना।
टीम का गठन: स्मारिका प्रकाशन के लिए हरीश सैनी, अनुपम सिंह चौहान, और संतोष भगवन की टीम का गठन।
सक्रिय भागीदारी: बैठक में लखनऊ इकाई और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से संगठन को और मजबूत करने पर जोर दिया।
संगठन की आगामी योजनाएं
एनयूजे (उत्तर प्रदेश) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सक्सेना ने बताया कि संगठन आने वाले महीनों में पत्रकारों की आवाज को बुलंद करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष प्रयास करेगा। इसके साथ ही, स्मारिका का प्रकाशन संगठन की उपलब्धियों और उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
सर्दियों के मौसम में डिहाइड्रेशन होना एक गंभीर समस्या होती है। सर्दियों में पसीने की मात्रा भले ही कम होती है, लेकिन डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। शरीर में पानी की कमी होने पर कई जरूरी प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं। इसलिए सर्दियों में भी पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए। हमेशा शरीर हाइड्रेटेड रहने की कोशिश करें। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, शरीर को अपनी सभी प्रक्रियाएं सही रूप से करने के लिए पानी की जरूरत होती है। ऐसे में आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिए कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आप यह पता लगा सकते हैं कि कहीं आपके शरीर में तो पानी की कमी नहीं है। क्योंकि ठंड में प्यास कम लगती है और हम हाइड्रेशन पर भी ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं।
थकावट और कमजोरी लगना
शरीर में पानी की कमी होने पर थकावट और कमजोरी होना आम बात है। सर्दियों में अगर आप अधिक कमजोर या फिर थका हुआ महसूस कर रहे हैं, तो इसके पीछे का कारण डिहाइड्रेशन हो सकता है। कोशिकाओं और अंगों को सही तरीके से कार्य करने के लिए पानी की जरूरत होती है। अगर पानी की कमी हो, तो सेल्स अपना काम ठीक से नहीं कर पाती हैं। वहीं शरीर का एनर्जी लेवल भी कम हो जाता है। इसकी वजह से थकान और कमजोरी का एहसास होता है। अगर आपको भी ऐसे ही लक्षण नजर आते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि शरीर में कहीं पानी की कमी तो नहीं है।
स्किन में रूखापन
पानी की कमी का सबसे बड़ा संकेत स्किन में रूखापन होना है। जब शरीर में हाइड्रेशन की कमी हो जाती है, तो स्किन की नमी भी कम होने लगती है। इसकी वजह से स्किन में सूखापन और खिंचाव महसूस होने लगता है। सर्दियों में हवा ड्राई होती है, जिससे ड्राइनेस की समस्या अधिक बढ़ सकती है। शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड फ्लो पर भी इसका असर पड़ता है। पानी की कमी से स्किन मुरझाई हुई नजर आने लगती है।
मुंह सूखना
डिहाइड्रेशन होने की वजह से मुंह और आंखों में सूखापन लगता है। मुंह सूखना शरीर में पानी की कमी का संकेत है। शरीर में पानी की कमी होने पर आंसू बनने की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ता है और आंखें सूखी-सूखी नजर आती है। सर्दियों में यह समस्या अधिक होती है, क्योंकि इस मौसम में लोग कम पानी पीते हैं और एटमॉस्फेयर में भी कम नमी होती है। बता दें कि मुंह सूखने की वजह से ताजगी का एहसास नहीं होता है।
पेट की समस्याएं
शरीर में पानी की कमी होने पर पेट से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। इससे हमारा डाइजेशन स्लो हो जाता है और कब्ज की समस्या हो सकती है। सर्दी के मौसम में अक्सर लोग कम पानी पीते हैं और आंतों में पानी की कमी होने पर मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। गैस, अपच और कब्ज की समस्याएं पैदा हो सकती है। यह वेट बढ़ने का भी कारण बन सकता है। ऐसे में शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए बार-बार पानी पीना चाहिए और पाचन तंत्र को मजबूत बनाएं।
सिर में भारीपन और दर्द
सर्दियों के मौसम में अगर आपके सिर में भी दर्द होता है, तो यह भी डिहाइड्रेशन का एक लक्षण हो सकता है। शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड फ्लो और ब्रेन के फंक्शनिंग पर असर डालता है। जिसकी वजह से सिर दर्द की समस्या होती है। हमारी बॉडी सेल्स में पानी की कमी होने की वजह से हर अंग सही तरीके से कार्य नहीं कर पाता है। इस असुविधा की वजह से सिर दर्द की समस्या हो सकती है। सर्दी से बचने के लिए हम सभी गर्म कपड़े पहनते हैं। वहीं कम मात्रा में पानी पीने की वजह से नियमित रूप से सिर दर्द की समस्या हो सकती है।
बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान अब घर आ गए हैं। लीलावती अस्पताल में हुई सर्जरी के बाद वो रिकवर कर रहे हैं। एक्टर पर धारदार चाकू से हमला किया गया था। सैफ सिर्फ फिल्मी परिवार से नहीं बल्कि क्रिकेट फैमिली और एक शाही कुल से नाता रखते हैं। पटौदी शाही खानदान के सैफ अली खान वारिस हैं। सैफ का परिवार मध्यप्रदेश के नवाब से भी ताल्लुक रखता है। भोपाल के पूर्व शासकों में एक नाम जो इतिहास में खो गया है या कहें कि अनदेखा किया गया वो है बेगम सुल्तान जहां का। ये भोपाल की आखिरी महिला नवाब थी, जो ऐतिहासिक राजधानी को एक यूरोपीय शहर में बदलना चाहती थीं और कुछ हद तक ऐसा करने में सफल रहीं।
30 वर्षों तक किया शासन
सरकार अम्मान जिन्हें बाद में सुल्तान जहां के नाम से जाना गया का जन्म 9 जुलाई 1858 को भोपाल में हुआ था। नवाब बेगम सुल्तान शाहजहां और उनके पति बाकी मुहम्मद खान बहादुर के घर में वो पैदा हुई थीं। भोपाल के नवाब की एकमात्र जीवित संतान के रूप में सुल्तान जहां को उनकी दादी सिकंदर बेगम की मृत्यु और 1868 में उनकी मां के सिंहासन पर उत्तराधिकार के बाद भोपाल मुसनद की उत्तराधिकारी घोषित किया गया था। साल 1901 में अपनी मां के निधन के बाद सुल्तान जहां भोपाल की गद्दी पर बैठीं और दार-उल-इकबाल-ए-भोपाल की नवाब बेगम बन गईं। बेगम सुल्तान जहां की साल 1930 में मौत हो गई। लगभग 30 वर्षों तक उन्होंने राज्य पर शासन किया।
रोल्स रॉयस कारों के लिए था जुनून
बेगम सुल्तान जहां बेगम को रोल्स रॉयस कारों का शौक था और उस समय उनके पास तीन महंगी गाड़ियां थीं। उस दौर में ये मशीनें दुनिया में काफी दुर्लभ थीं। उनके पास तीन रोल्स रॉयस कारें थीं। यह उनकी शाही जीवनशैली को दर्शाती है। कहते हैं कि वह सिर्फ अपने शौक पूरे करने में व्यस्त नहीं थीं। उन्होंने शिक्षा को भी बहुत महत्व दिया। उनका नाम आज भी शिक्षा, प्रगति और नवाचार से जुड़ा है। समाज को शिक्षित करने पर उनका खास जोर रहा।
नवाब बेगम का सैफ अली खान से संबंध
बेगम सुल्तान जहां सैफ अली खान की परनानी थीं। बेगम के इकलौते बेटे और उत्तराधिकारी हमीदुल्लाह खान की बेटी साजिदा सुल्तान की शादी पटौदी के नवाब इफ्तिखार अली खान से हुई थी, जो सैफ अली खान के दादा और मंसूर अली खान पटौदी के पिता थे। बाद में मंसूर की शादी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से हुई थी।
एएमयू की पहली चांसलर
बेगम सुल्तान जहां को 1920 में एएमयू की स्थापना के समय इसका पहला चांसलर नियुक्त किया गया था और 1930 में उनके निधन तक वे इस पद पर बनी रहीं। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे हमीदुल्लाह खान ने गद्दी संभाली और भोपाल के आखिरी नवाब बने। वो तब तक नवाब रहे जब तक कि भारत की आजादी के करीब एक दशक बाद 1956 में शहर का मध्य प्रदेश में विलय नहीं हो गया।