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वाशिंगटन: ट्रंप ने ईरान को दी परमाणु शांति समझौते की पेशकश, साथ ही दे दी कड़ी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु शांति समझौता करने की पेशकश की है लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान नहीं मानता है, तो यह उसके लिए घातक साबित होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। आदेश के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह ईरान पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी पहली प्राथमिकता है।

‘ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता’

ईरान से संबंधित शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर करने के दौरान ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, “मैं ईरान से यह कहना चाहता हूं कि मैं एक बड़ा समझौता करना चाहता हूं। एक ऐसा समझौता जिससे वो अपनी जिंदगी आगे बढ़ा सकें।” ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता, अगर ऐसा होता है तो यह उसके लिए बहुत दुर्भाग्यशाली साबित होगा।

ट्रंप के पहले कार्यकाल में क्या हुआ

बता दें कि, मई 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को एकतरफा बताते हुए इससे अमेरिका को हटा लिया था। समझौते से बाहर होते ही ट्रंप ने ईरान पर अपनी दबाव की रणनीति तेज कर दी थी जिसमें कई मांगें शामिल थीं। इन मांगों में से अधिकतर परमाणु समझौते से संबंधित ही नहीं थी लेकिन इनका संबंध ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों से जरूर था। ट्रंप ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की थी।

जो बाइडेन प्रशासन ने किए थे प्रयास

जो बाइडेन प्रशासन ने ईरान के साथ परमाणु डील को फिर से बहाल करने की कोशिश की थी लेकिन ईरान ने डील में वापसी के लिए शर्तें लगा दीं। ईरान ने कहा था कि अमेरिका पहले यह स्वीकार करे कि समझौते से उसका हटना अनुचित था, उस पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाए और यह गारंटी दे कि भविष्य में कभी अमेरिका एकतरफा तरीके से समझौते से नहीं हटेगा। ईरान की इन शर्तों पर अमेरिका राजी नहीं हुआ था जिस कारण दोनों देशों के बीच समझौता बहाल नहीं हो पाया था।

यह भी जानें

गौर करने वाली बात यह है कि पिछले चार सालों में ईरान ने अपने परमाणु संवर्धन को काफी हद तक उन्नत किया है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने इस बारे में चौंकाने वाली बातें कही थीं। दिसंबर 2024 की IAEA की एक अन्य रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि ईरान 60 प्रतिशत अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम बनाने की आड़ में हथियार-ग्रेड यूरेनियम बनाने की क्षमता स्थापित कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान संभवतः अपने मौजूदा स्टॉक का उपयोग किए बिना भी हथियार-ग्रेड यूरेनियम का उत्पादन कर सकता है,यह खतरे वाली बात है।

दुबई: गाजा पट्टी पर ट्रंप के बयान का असर दिखना शुरू, सऊदी अरब ने भी अपना रुख स्पष्ट किया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गाजा पट्टी को लेकर जो कुछ कहा गया है उसके बाद इसे लेकर प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। गाजा पट्टी पर कब्जा करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुझाव पर मध्यपूर्व से रिएक्शन सामने आया है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बयान जारी करके कड़े शब्दों में कहा कि एक स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र का वह लंबे समय से आह्वान करता रहा है और उसका यह रुख ‘दृढ़ और अटूट’ है।

सऊदी अरब का स्पष्ट रुख

बयान के मुताबिक, सऊदी अरब के ‘क्राउन प्रिंस’ मोहम्मद बिन सलमान (जो देश के वास्तविक शासक हैं) ने कहा है कि उनका देश पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना की दिशा में अपने काम को नहीं रोकेगा और सऊदी अरब इसके बिना इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित नहीं करेगा। सऊदी अरब एक सुरक्षा समझौते और अन्य शर्तों के बदले इजरायल को राजनयिक रूप से मान्यता देने के समझौते पर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने क्या कहा?

गाजा को लेकर ट्रंप के बयान पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस का कहना है कि उनकी सरकार मध्य पूर्व में दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करना जारी रखेगी जहां इजरायल और फलस्तीन के लोग शांति और सुरक्षा के साथ रह सकें। अल्बनीस ने कहा, ‘‘हमने युद्ध विराम का समर्थन किया है, हमने बंधकों को रिहा करने का समर्थन किया है और हमने गाजा में सहायता पहुंचाने का समर्थन किया है।’’ न्यूजीलैंड के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान का समर्थक रहा है जिसका रिकॉर्ड भी है। बयान में कहा गया है कि न्यूजीलैंड लाए गए हर प्रस्ताव पर टिप्पणी नहीं करेगा।

‘गाजा पट्टी को अपने अधीन लेगा अमेरिका’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रत्याशित ऐलान करते हुए कहा है कि अमेरिका ‘गाजा पट्टी को अपने अधीन लेगा’, ‘इस पर अधिकार करेगा’ और वहां आर्थिक विकास करेगा जिससे लोगों के लिए बड़ी संख्या में रोजगार और आवास’’ उपलब्ध होंगे। ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह बातें कही हैं। ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिका उस जगह को विकसित करेगा। हालांकि, इस बारे में उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी कि वहां किसे रहने की अनुमति दी जाएगी।

Travel Tips :अंडमान ट्रिप का बना रहे हैं प्लान? तो इन प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन करना न भूलें!

समुद्र किनारे सुकून के पल बिताने के लिए कपल्स बीचेज पर जरुर जाते हैं। अगर आप भी अंडमान जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आप समुंद्र तटों के अलावा वहां के खूबसूरत और धार्मिक मंदिरों का जरुर दर्शन करें। अंडमान में नीले पानी से लेकर सफेद रेत तक समुद्र तटों तक फैली शांति कपल्स को सुकून देती है। बीचेज के साथ ही यहां पर कुछ ऐसे मंदिर भी है, जो आपको सुकून का एहसास कराते हैं। आइए आपको अंडमान में मौजूद फेमस मंदिरों के बारे बताते हैं।

मुरुगन मंदिर

पोर्ट ब्लेयर के केंद्र में स्थित यह मंदिर आपकी पहली अंडमान और निकोबार ट्रिप के लिए बेहतर है। यह मंदिर अपने भक्तों की आध्यात्मिक आस्था के लिए आकर्षित करते हैं, बल्कि सुंदर वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। इस मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है। वीकेंड पर भी काफी ज्यादा लोग जाते हैं। जब जाएं तो मंदिर के समय का ध्यान रखें।

शंकराचार्य मंदिर

अगर आप अंडमान की ट्रिप पर जा रहे हैं, तो आप इस मंदिर में जरुर जाएं। यह मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर स्थित होने की वजह से यहां का नजारा शानदार है। यदि आप अपने पार्टनर के साथ ट्रिप पर जा रही हैं, तो आप यहां जरुर जाएं।

श्री गणेश मंदिर

यह मंदिर पोर्ट ब्लेयर में स्थित है। श्री गणेश मंदिर सुबह 8 बजे से 10.30 बजे तक और शाम 5 बजे से 7 बजे तक हर दिन खुला रहता है। भगवान गणेश को समर्पित यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है और यह भक्तों के लिए विश्वास का सबसे खास प्रतीक माना जाता है। यहां पर जाने के लिए आपको पोर्ट ब्लेयर के एबरडीन बाजार के पास स्थित है। सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

Health Tips :शहद में भिगोकर आंवला का सेवन है रामबाण, मिलते हैं अनेक स्वास्थ्य लाभ

आंवला सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते है। शहद और आंवला दोनों ही सेहत के लिए सुपरफूड है। आयुर्वेद में इन दोनों कॉम्बिनेशन फायदे बताएं है। इन दोनों को अपनी डाइट में जरुर शामिल करें। इससे आपकी इम्यूनिटी बूस्ट होती है। शहद को खांसी-जुकाम के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं। इसके सेवन से इंफेक्शन का खतरा कम होता है। जब यह दोनो साथ खाएं जाते हैं, तो कई फायदे मिलते हैं। आइए आपको बताते हैं शहद में आंवला भिगोकर खाने के फायदे।

इम्यूनिटी बूस्ट होती

अगर आप शहद में आंवला भिगोकर खाएंगे तो इम्यूनिटी बूस्ट होती है। आंवला में विटामिन सी मौजूद होता है जो इम्यूनिटी बूस्ट करता है। वहीं, शहद में एक्टी-बैक्टीरियल गुण इंफेक्शन का खतरा कम करता है। शहद में भीगे हुए आंवले खाने के वायरल-इंफेक्शन जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है।

पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है

यदि आपको भी पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं रहती हैं, तो यह कॉम्बिनेशन आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा। इसके सेवन से अपच, एसिडिटी, कब्ज और पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। इसके सेवन से भी गट हेल्थ भी अच्छा होता है, जिससे पाचन स्वस्थ रहता है।

गुड फॉर स्किन

आंवला और शहद का कॉम्बिनेशन स्किन हेल्थ को इंप्रूव करती है। वहीं, शहद स्किन को मॉइस्चराइज करता है और स्किन इंफेक्शन का खतरा भी कम करता है। आंवला में विटामिन सी होता, जो कि स्किन में कोलेजन बूस्ट करने में मदद करता है।

खांसी-जुकाम में आराम मिले

सर्दियों में खांसी-जुकाम में ज्यादातर होते रहते हैं। शहद में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं। इसके सेवन से गले का इंफेक्शन कम होता है और कफ से भी राहत मिलती है। शहद और आंवला खांसी और जुकाम में भी राहत देता है।

बॉडी को एनर्जी मिलती है

सोकर जब आप उठते हैं तो आपको भी थकावट और कमजोरी महसूस होती है, तो आंवला और शहद जरुर खाएं। इसके सेवन से बॉडी में एनर्जी बनी रहती है। इसके साथ ही कमजोरी और थकावट भी नहीं होते हैं।

इसका सेवन कैसे करें

इसके लिए आपको कच्चे आंवला को शहद में भिगोकर खाना है। आंवला को टुकड़ों में काट लें। अब इसे शहद में डालकर कच्चा ही खाएं। आप चाहे तो आंवले को धूप में सूखाकर शहद में डालकर रख दें। इसमें आप काला नमक और काली मिर्च डालकर भी रख सकते हैं। रोजाना आप 2-3 टुकडें का सेवन करें। जब आप सुबह खाली पेट इसका सेवन करना चाहते हैं और जो कि काफी फायदेमंद होता है।

स्टॉकहोम: स्वीडन के स्कूल में हुई गोलीबारी, 10 की मौत से मचा हड़कंप

 मध्य स्वीडन के स्कूल में गोलीबारी की खबर है। इस गोलीबारी में दस लोग मारे गए हैं। खबर लिखे जाने तक ये सामने नहीं आ पाया है कि मृतकों में बंदूकधारी शामिल हैं या नहीं। हालांकि अभी यह पता नहीं लग सका है कि इस गोलीबारी में कितने लोग घायल हुए हैं।

क्या है पूरा मामला?

ऑरेब्रो के बाहरी क्षेत्र में ये गोलीबारी हुई है। अचानक हुई इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया, जिसके बाद फौरन पुलिस मौके पर पहुंची। जिस जगह पर ये गोलीबारी हुई है, वह स्टॉकहोम से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर है। स्थानीय पुलिस प्रमुख रॉबर्टो एड फोरेस्ट का कहना है कि ये घटना कैसे हुई, इसकी जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गोलीबारी स्कूल (भवन) के अंदर हुई है या कहीं और। जिस स्कूल में ये गोलीबारी हुई है, उसमें 20 साल से ज्यादा उम्र के लोग पढ़ते हैं। इस स्कूल का नाम कैंपस रिसबर्गस्का है। इस मामले में पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि ये पूरे स्वीडन के लिए बहुत दुखद दिन है।

पुलिस अधिकारी फॉरेस्ट ने कहा, ‘हमें लगता है कि वह अकेला अपराधी है। गोलीबारी बेहद दुखद थी, इसमें कई लोग शामिल थे। यह एक भयानक घटना है, यह असाधारण है और एक बुरा सपना है। जनता से इस क्षेत्र से दूर रहने और घर के अंदर रहने का आग्रह किया गया है। स्वीडन के न्याय मंत्री गुन्नार स्ट्रोमर ने मंगलवार को पुलिस अभियान में तेजी बताई और कहा कि सरकार पुलिस के साथ निकट संपर्क में है और घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है।’

स्वीडन में हुई इस घटना में मारे गए लोगों की ये संख्या दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गई है। इससे पहले भी विदेशों से इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।