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Steve Smith:अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में स्टीव स्मिथ ने दिखाई खेल भावना, रन आउट की अपील वापस ली

 चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान के बीच मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया। इसके बाद दोनों टीमों को एक-एक अंक दे दिया। इसी के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम ने सेमीफाइनल में एंट्री कर ली।  मैच उस समय बारिश के कारण रोकना पड़ा जब 274 रन के लक्ष्य के जवाब में आस्ट्रेलिया ने 12.5 ओवर में एक विकेट पर 109 रन बना लिए थे। इसके बाद ग्राउंड गीला हो गया और बारिश के कारण मुकाबला नहीं हो पाया। इस मैच में एक ऐसी घटना हो गई, जिस पर स्टीव स्मिथ ने बड़ा दिल दिखाया है।

स्टीव स्मिथ ने दिखाया बड़ा दिल

ऑस्ट्रेलिया के लिए पारी का 47वां ओवर नाथन एलिस ने किया। तब अफगानिस्तान के लिए अजमतुल्लाह उमरजई और नूर अहमद क्रीज पर मौजूद थे। उमरजई उस समय अपने अर्धशतक के करीब थे। ओवर की आखिरी गेंद उन्होंने खेली और दौड़कर एक रन पूरा कर लिया। लेकिन नूर अहमद रन पूरा करने के बाद क्रीज के बाहर चले गए। उन्हें लगा कि बॉल डेड हो चुकी है। तभी ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर जोस इंग्लिस के पास थ्रो आया, जिस पर उन्होंने नूर अहमद की गिल्लियां बिखेर दीं। इसके बाद इंग्लिस बहुत ही उत्साह में नजर आ रहे थे और उन्होंने आउट होने की अपील कर दी। लेकिन फिर ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ ने दरियादिली दिखाते हुए अपील वापस ले ली। जिसके बाद नूर रन आउट होने से बच गए।

ट्रेविस हेड ने लगाया अर्धशतक

मैच में ग्राउंड स्टाफ की तमाम कोशिशों के बावजूद पिच पर कई जगह पानी भर गया था, जिसे देखकर अंपायरों ने मुआयने के बाद मैच को रद्द करने का फैसला किया। मैच पूरा करने के कटऑफ समय से एक घंटा पहले बारिश आ गई थी। बारिश के समय ट्रेविस हेड 40 गेंद में नौ चौकों और एक छक्के की मदद से 59 रन बनाकर खेल रहे थे। उन्हें छह के स्कोर पर फजलहक फारूकी की गेंद पर मिड ऑन में राशिद खान ने जीवनदान भी दिया, जिसका उन्होंने भरपूर फायदा उठाया। दूसरे छोर पर कप्तान स्टीव स्मिथ ने 22 गेंद में 19 रन बनाए थे। अब अफगानिस्तान के अंतिम चार में पहुंचने की उम्मीदें कम ही रह गई हैं।

बीजिंग/इस्लामाबाद:चीन के अंतरिक्ष स्टेशन में जाने वाला पहला विदेशी नागरिक होगा एक पाकिस्तानी

 चीन ने अपने अंतरिक्ष मिशन के तहत पाकिस्तान के साथ बड़ी डील को मंजूरी दी है। चीन अपने अंतरिक्ष स्टेशन में पहले विदेशी व्यक्ति के रूप में अपने मित्र देश पाकिस्तान के एक अंतरिक्ष यात्री को भेजने का ऐलान किया है। चीन तियानगोंग अंतरिक्ष स्टेशन से पाकिस्तानी नागरिक को भेजने की योजना पर काम कर रहा है। यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चीन और पाकिस्तान ने शुक्रवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इसमें पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों का चयन करना और उन्हें प्रशिक्षित करना तथा उनमें से कुछ को तियानगोंग भेजना भी शामिल है। ‘चाइना डेली’ की खबर के अनुसार, पाकिस्तानी नागरिक को अंतरिक्ष में भेजने के समझौते पर चीनी और पाकिस्तानी अंतरिक्ष एजेंसियों ने इस्लामाबाद में हस्ताक्षर किए। चीन अपने मित्र देश पाकिस्तान की मदद करने के लिए पिछले कुछ वर्षों से उसके लिए उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है।

चीन 2030 से पहले अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारेगा

चीनी अंतरिक्ष स्टेशन को रूस के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन मीर का प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है। चीन को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से कथित तौर पर बाहर किए जाने के बाद बीजिंग ने तियानगोंग बनाया। चीनी अंतरिक्ष स्टेशन को चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा के एक नए क्षेत्र के रूप में भी देखा जा रहा है। चीनी मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी के उपनिदेशक लिन शियाकियांग ने इससे पहले यहां मीडिया को बताया था कि चीन की योजना 2030 से पहले अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की है, जबकि अमेरिका की योजना 2025 में अपने अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चंद्रमा पर भेजने की है।

तेल अवीव:इजरायल ने 7 अक्टूबर को हुए हमास हमले में अपनी सुरक्षा चूक को स्वीकार किया

 इजरायली सेना ने 7 अक्टूबर को हमास द्वारा किए गये हमले में अपनी विफलता को स्वीकार कर लिया है। इजरायली सेना द्वारा की गई जांच से यह पता चला है कि हमास सात अक्टूबर 2023 को देश के इतिहास में सबसे घातक हमला करने में सक्षम था, क्योंकि इजरायली सेना ने उग्रवादी समूह के इरादों को गलत समझा और उसकी क्षमताओं को कम करके आंका।

बृहस्पतिवार को जारी किए गए इन निष्कर्षों से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर दबाव पड़ सकता है कि वह हमले से पहले की राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया की पड़ताल के लिए व्यापक रूप से मांग की जा रही विस्तृत जांच शुरू करें, जिसके कारण गाजा में युद्ध शुरू हो गया। कई इजराइलियों का मानना ​​है कि सात अक्टूबर की गलतियां सैन्य बलों से परे हैं, और वे हमले से पहले के वर्षों में निवारण और नियंत्रण की असफल रणनीति के लिए नेतन्याहू को दोषी मानते हैं। इस रणनीति में कतर को गाजा में नकदी से भरे बैग भेजने की अनुमति देना तथा हमास के प्रतिद्वंद्वी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त फिलस्तीनी प्राधिकरण को दरकिनार करना शामिल था।

प्रधानमंत्री ने नहीं लिया जिम्मा

प्रधानमंत्री ने जिम्मेदारी नहीं ली है और कहा है कि वह युद्ध के बाद ही कठिन सवालों का जवाब देंगे, जो कि एक अस्थिर युद्धविराम के कारण लगभग छह सप्ताह से रुका हुआ है। सात अक्टूबर के हमले में मारे गए लगभग 1,200 लोगों और गाजा में बंधक बनाए गए 251 लोगों के परिवारों सहित जनता के दबाव के बावजूद, नेतन्याहू ने जांच आयोग की मांग का विरोध किया है। सेना के मुख्य निष्कर्ष यह हैं कि क्षेत्र की सबसे शक्तिशाली और परिष्कृत सेना ने हमास के इरादों को गलत समझा, उसकी क्षमताओं को कम करके आंका और वह एक प्रमुख यहूदी अवकाश के दिन सुबह-सुबह भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों द्वारा किए गए आश्चर्यजनक हमले के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं थी। सोमवार को सैन्य कमांडरों को दी गई टिप्पणी में, तथा बृहस्पतिवार को मीडिया के साथ साझा की गई टिप्पणी में, सेना के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल हर्जी हलेवी ने कहा कि वह सेना की विफलताओं की जिम्मेदारी लेते हैं।

उत्तरप्रदेश से एक और बड़ी खबर: वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आशीष गुप्ता ने मांगा वीआरएस, पुलिस महकमे में मची हलचल

उत्तरप्रदेश से एक और बड़ी खबर: वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आशीष गुप्ता ने मांगा वीआरएस, पुलिस महकमे में मची हलचल
उत्तरप्रदेश से एक और बड़ी खबर: वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आशीष गुप्ता ने मांगा वीआरएस, पुलिस महकमे में मची हलचल
उत्तरप्रदेश से एक और बड़ी खबर: वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आशीष गुप्ता ने मांगा वीआरएस, पुलिस महकमे में मची हलचल
  • यूपी के 1989 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आशीष गुप्ता ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन दिया।
  • वर्तमान में डीजी रूल्स एंड मैनुअल्स के पद पर तैनात, दिसंबर 2026 में होना था रिटायरमेंट।
  • नेटग्रिड के पूर्व सीईओ और बीएसएफ में एडीजी रह चुके हैं, खुफिया और तकनीकी मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
  • आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में डिग्री प्राप्त, प्रशासनिक दक्षता के लिए जाने जाते हैं।
  • यूपी में बढ़ते वीआरएस ट्रेंड पर उठ रहे सवाल, वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफों को लेकर अटकलें तेज।

लखनऊ, 28 फरवरी 2025: उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। यूपी कैडर के 1989 बैच के वरिष्ठतम आईपीएस अधिकारी आशीष गुप्ता ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया है। वह वर्तमान में डीजी रूल्स एंड मैनुअल्स के पद पर कार्यरत हैं और दिसंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले थे। हालांकि, उन्होंने तीन महीने का नोटिस देकर अपनी सेवा से स्वैच्छिक रूप से हटने की इच्छा जताई है।

आशीष गुप्ता की इस घोषणा के बाद पुलिस महकमे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पुलिस विभाग में उन्हें एक तकनीकी मामलों और खुफिया तंत्र के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है। आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट गुप्ता की पहचान एक कुशल प्रशासक के रूप में भी रही है।

नेटग्रिड के सीईओ और बीएसएफ में एडीजी का महत्वपूर्ण कार्यकाल

अपने कार्यकाल में आशीष गुप्ता ने कई अहम पदों पर अपनी सेवाएँ दी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के खुफिया तंत्र को मजबूत करने वाले नेटग्रिड (NATGRID) के सीईओ के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा, वे सीमा सुरक्षा बल (BSF) में अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के रूप में भी कार्यरत रह चुके हैं।

उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशासनिक कौशल को देखते हुए उन्हें यूपी पुलिस और केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी गई थी। यही वजह है कि उनके अचानक वीआरएस लेने के फैसले को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है।

वरिष्ठ अधिकारियों के वीआरएस पर उठ रहे सवाल

आशीष गुप्ता यूपी के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी बन गए हैं, जिन्होंने हाल ही में वीआरएस के लिए आवेदन किया है। पिछले कुछ महीनों में यूपी पुलिस महकमे में कई वरिष्ठ अधिकारियों ने समय से पहले सेवा से मुक्त होने का फैसला लिया है।

इससे पहले भी कई बड़े अधिकारियों ने वीआरएस लिया था, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यूपी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कोई असंतोष की भावना है या फिर यह किसी बड़े प्रशासनिक बदलाव का संकेत है?

पत्नी भी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, 2025 में रिटायरमेंट

गौरतलब है कि आशीष गुप्ता की पत्नी तिलोत्तमा वर्मा भी 1990 बैच की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में डीजी ट्रेनिंग के पद पर तैनात हैं। उनका सेवानिवृत्त होने का निर्धारित समय नवंबर 2025 है।

आशीष गुप्ता के वीआरएस के फैसले के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या वे किसी नई जिम्मेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, या फिर प्रशासनिक सेवा से पूरी तरह अलग होने का मन बना चुके हैं?

क्या हो सकते हैं संभावित कारण?

हालांकि, आशीष गुप्ता की ओर से अभी तक वीआरएस लेने के पीछे की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है, लेकिन कुछ संभावित कारणों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं –

  1. कोई नई जिम्मेदारी: कई बार वरिष्ठ अधिकारी किसी अन्य क्षेत्र में योगदान देने के लिए वीआरएस लेते हैं।
  2. व्यक्तिगत कारण: निजी या पारिवारिक कारण भी अधिकारियों के समय से पहले सेवा छोड़ने के निर्णय में भूमिका निभा सकते हैं।
  3. सिस्टम से असंतोष: हाल के वर्षों में पुलिस महकमे में बढ़ते राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं।
  4. निजी क्षेत्र में संभावनाएँ: टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए, वे किसी निजी संस्थान या सरकार की किसी अन्य परियोजना से जुड़ सकते हैं।

आशीष गुप्ता जैसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी का वीआरएस लेना निश्चित रूप से यूपी पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। उनके इस निर्णय से वरिष्ठ अधिकारियों के बीच स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार उनकी वीआरएस अर्जी को मंजूरी देती है या उन्हें किसी अन्य बड़ी जिम्मेदारी के लिए रोका जाता है। वहीं, यह भी संभव है कि वे किसी अन्य प्रशासनिक या निजी भूमिका में सक्रिय रूप से काम करना शुरू कर दें।

पुलिस महकमे और राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और भी नए खुलासे हो सकते हैं।

उत्तरप्रदेश के सरोजनीनगर में शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा का नया युग: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रयासों से बदल रही विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर

उत्तरप्रदेश के सरोजनीनगर में शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा का नया युग: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रयासों से बदल रही विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर
उत्तरप्रदेश के सरोजनीनगर में शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा का नया युग: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रयासों से बदल रही विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर
उत्तरप्रदेश के सरोजनीनगर में शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा का नया युग: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रयासों से बदल रही विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर
  • सरोजनीनगर के सभी परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प होगा, जर्जर विद्यालयों का होगा पुनर्निर्माण
  • विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने विधानसभा में उठाया अवस्थापना सुविधाओं के विस्तार का मुद्दा
  • 42 विद्यालयों में फर्नीचर की उपलब्धता, 7 विद्यालयों का पुनर्निर्माण पूर्ण, 24 अन्य का आकलन जारी
  • स्मार्ट क्लास, डिजिटल पैनल और STEM लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं का विस्तार
  • अस्थाई वन कर्मियों के वेतन वृद्धि और स्थायीकरण की मांग, सरकार ने विचार करने का आश्वासन दिया

लखनऊ, 28 फरवरी 2025: उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और परिषदीय विद्यालयों की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह लगातार प्रयासरत हैं। विधानसभा में 24 फरवरी 2025 को उन्होंने नियम 51 के अंतर्गत एक अविलंबनीय लोक महत्व की सूचना प्रस्तुत कर सरकार से मांग की कि सरोजनीनगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार किया जाए और ‘कायाकल्प योजना’ के तहत स्कूलों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया जाए।

इस मांग पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने शुक्रवार को विधान सभा में वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरोजनीनगर के सभी बेसिक स्कूलों का कायाकल्प किया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के 42 विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है, जबकि बाकी विद्यालयों में पहले से ही फर्नीचर मौजूद है।

जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तेज

शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि सरोजनीनगर क्षेत्र के 7 प्राथमिक विद्यालयों के जर्जर भवनों को ध्वस्त कर नया निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। वहीं, 24 अन्य विद्यालयों के भवनों के ध्वस्तीकरण और पुनर्निर्माण के लिए तकनीकी मूल्यांकन समिति का गठन किया गया है, जिससे जल्द ही इन स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम का विस्तार

डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल रूप से उन्नत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा के तहत स्मार्ट क्लास, इंटरेक्टिव पैनल, STEM लैब और मल्टी-प्ले स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

बता दें कि डॉ. राजेश्वर सिंह ने पहले ही चार परिषदीय विद्यालयों – पहाड़पुर, लतीफनगर, अमौसी और खासरवारा को गोद लेकर इन स्कूलों को डिजिटल पैनल, फ्यूचर क्लासरूम और STEM लैब जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस कर दिया है। इसके अलावा, क्षेत्र के 61 विद्यालयों में झूले भी लगवाए गए हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजन और व्यायाम का भी अवसर मिलेगा।

अस्थायी वन कर्मियों को स्थायी करने और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग

शिक्षा के अलावा सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने वन विभाग में नियत वेतन पर काम कर रहे 2112 अस्थायी कर्मियों के स्थायीकरण और उनके वेतन वृद्धि की मांग भी विधान सभा में उठाई।

21 फरवरी 2025 को नियम 51 के तहत प्रस्तुत सूचना में उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि इन वन कर्मियों को उचित वेतन के साथ सामाजिक सुरक्षा कवर प्रदान किया जाए। इस पर वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना ने विधान सभा में जवाब देते हुए कहा कि वन कर्मियों को सुरक्षा कवर देने और उन्हें समायोजित करने के लिए सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी।

सरोजनीनगर में शिक्षा और विकास को मिलेगी नई दिशा

डॉ. राजेश्वर सिंह की यह पहल सरोजनीनगर में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उनकी कोशिशों से परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए स्मार्ट क्लास, इंटरेक्टिव पैनल, फर्नीचर और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही, जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण कराकर बच्चों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में शिक्षा दी जा सकेगी।

इसके अलावा, वन विभाग में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने और उनके वेतन में वृद्धि की मांग भी सरकार तक पहुंच गई है, जिससे हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सरोजनीनगर में शिक्षा और विकास के इस नए युग की शुरुआत को लेकर क्षेत्र के लोग भी काफी उत्साहित हैं। यह बदलाव आने वाले समय में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है।