भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान एक बार फिर से एक के बाद एक आतंकी हमले झेल रहा है। बुधवार को पाकिस्तान का अशांत क्षेत्र बलूचिस्तान एक बार फिर से भीषण बम धमाके से दहल उठा। जानकारी के मुताबिक, इस बम धमाके में 5 लोगों की मौत हो गई है और 5 अन्य लोग बुरी तरह से घायल हो गए हैं। आइए जानते हैं कि अधिकारियों ने इस बम धमाके को लेकर क्या जानकारी सामने रखी है।
मोटरसाइकिल में IED लगा कर विस्फोट
क्षेत्र के पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, बम धमाके की ये घटना खुजदार के नाल बाजार इलाके में हुई है। यहां बाजार में खड़ी एक मोटरसाइकिल में आईईडी लगा दी गयी थी जिसमें भयंकर विस्फोट हुआ। घटना में 5 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। इनमें से दो घायलों की स्थिति गंभीर है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री ने एक बयान में इस विस्फोट की कड़ी निंदा की है।
अन्य आतंकी हमला रोका गया
स्थानीय पुलिस के मुताबिक, बम विस्फोट बाजार के पास एक कॉलेज के पास हुआ और विस्फोट की चपेट में अन्य वाहन भी आ गए और जल गए। बम निरोधक दस्ता मौके पर मौजूद है और घटनास्थल का निरीक्षण कर रहा है। पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बलों समय पर कार्रवाई की और बलूचिस्तान के पिशिन इलाके में एक और आतंकी हमले को रोक दिया। खुफिया जानकारी के आधार पर पिशिन में चार आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है। वे बुधवार को आतंकी हमले की योजना बना रहे थे।
खैबर पख्तूनख्वा में भी 12 की मौत
इससे पहले पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में भी बड़ा धमाका देखने को मिला था। यहां मंगलवार की शाम एक दो दो बम धमाके हुए थे। बम धमाके में 7 बच्चों समेत 12 लोगों की मौत हो गई है। ये घटना पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बन्नू छावनी के पास हुई। इस घटना के बाद तहरीक-ए-तालिबान के 6 आतंकी भी मारे गए हैं। जानकारी के मुताबिक, आत्मघाती हमलावरों की एक जोड़ी ने मंगलवार को उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में एक सुरक्षा प्रतिष्ठान में विस्फोटक से भरे दो वाहनों को घुसा दिया, जिसकी वजह से धमाका हुआ और इतनी बड़ी संख्या में जनहानि हुई।
कर्नाटक में बेंगलुरु स्थित केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव को बीते दिनों गोल्ड तस्करी करने के आरोप में पकड़ा गया था। जानकारी के मुताबिक, गोल्ड तस्करी मामले में गिरफ्तार एक्टर और DGP हाऊसिंग की स्टेप डॉटर रन्या राव ने जमानत की अर्जी दाखिल की है जिस पर आज सुनवाई होगी। हालांकि, इससे पहले जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। इस बात का भी पता लगा है कि सोने की तस्करी से अभिनेत्री रान्या राव को कितना कमाई होती थी।
प्रति किलो पर एक लाख रुपये
DRI सूत्रों के मुताबिक अब तक कि जाँच में कुछ अहम जानकारी सामने आई हैं। रान्या को गोल्ड तस्करी करने के बदले प्रति किलो पर एक लाख रुपये मिलते थे। इस बार वो 14 किलो सोने के साथ पकड़ी गईं। इससे ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि हर बार वो 12 से 15 लाख रुपये तक कि कमाई करती थीं।
एक साल में करीब 30 बार दुबई की यात्रा
पिछले एक साल में रान्या तकरीबन 30 बार और पिछले 15 दिनों में 4 बार दुबई गयी थीं। उनके बार बार दुबई जाने के सिलसिले से ही DRI को शक हुआ और रान्या पर नज़र रखी जाने लगी। DGP रैंक के अधिकारी की बेटी होने की बात कह कर हर बार वो तलाशी से बच जाती थीं। एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन से एक कॉन्स्टेबल उसको एस्कॉर्ट करता था। इस बार भी बसवराजू नाम का कॉन्स्टेबल रान्या को एस्कॉर्ट करने पहुँचा था। जब DRI की टीम ने रान्या को पूछताछ के लिए रोका तो कॉन्स्टेबल ने उन्हें ये कहते हुए रोकने की कोशिश की कि रान्या DGP की बेटी हैं, लेकिन चूंकि DRI के पास टिप ऑफ था इसीलिए रान्या की तलाशी ली गई और 12 किलो सोने के साथ उन्हें अरेस्ट किया गया।
खास तरह का बेल्ट और जैकेट बनावाया
DRI के सूत्रों ने यह भी बताया कि इतना सोने को अपने लिबास के अंदर छिपाने के लिए रान्या ने एक खास तरह का बेल्ट और जैकेट बनावाया था जिसके अंदर वो सोने के बिस्किट छिपाकर लाती थी। घर की तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में कैश और सोना मिला है। इससे ये शक हो रहा है कि दुबई से बेंगलुरु के हर ट्रिप में उन्होंने सोने की तस्करी की होगी और अब तक अपने पिता का नाम लेकर वो तलाशी से बचती रही होंगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसले से पूरी दुनिया को चौंकाते रहते हैं। इस बार फिर उन्होंने अपने फैसले से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने मंगलवार को अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए जहां पारस्परिक टैरिफ से लेकर अमेरिका में गोल्डन एज की वापसी जैसे मामलों पर चर्चा की, वहीं इसी दौरान उन्होंने एक 13 साल के बच्चे डीजे डेनियल को अमेरिका के सीक्रेट सर्विस का एजेंट बनाए जाने का घोषणा कर दी है।
ट्रंप की बड़ी घोषणा
ट्रंप ने सीक्रेट सर्विस के निदेशक शॉन करम से आधिकारिक तौर पर डीजे डेनियल को सीक्रेट सर्विस एजेंट के रूप में नियुक्त करने के आदेश दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने ने कहा, ‘आज रात डीजे हम आपको सबसे बड़ा सम्मान देने जा रहे हैं। मैंने अमेरिकी सीक्रेट सर्विस डायरेक्टर शॉन करन से कहा है कि आपको आधिकारिक तौर पर सीक्रेट एजेंट बनाएं।’ ट्रंप के इस ऐलान के बाद अमेरिकी कांग्रेस तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी और इस दौरान डीजे डेनियल भी कांग्रेस में मौजूद रहे। राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें लेकर इतना बड़ा ऐलान किया और तुरंत बाद ही डेनियल को गोद में भी उठा लिया।
कौन हैं डीजे डेनियल, जिसे ट्रंप ने बनाया सीक्रेट एजेंट
बता दें कि 13 साल के डीजे डेनियल कैंसर सर्वाइवर है। डेनियल को ब्रेन कैंसर है और साल 2018 में इस बारे में पता चला था। डॉक्टर्स ने कहा था कि वह सिर्फ पांच महीने तक ही जिंदा रह पाएंगे, हालांकि, डॉक्टर्स की उस बात को अब छह साल बीत चुके हैं लेकिन डीजे डेनियल अबतक बिल्कुल स्वस्थ हैं। ट्रंप ने उनके बारे में बताया कि डीजे हमेशा से ही पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखते थे, लेकिन डॉक्टर ने कहा था कि उनके पास सिर्फ पांच महीने का ही समय है। इसके बावजूद लाख मुश्किलों से लड़कर आज डीजे सबके सामने खड़े हैं और अब सीक्रेट एजेंट बनेंगे।
Babbar Khalsa International (BKI) और ISI के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार
कौशांबी से गिरफ्तार हुआ खतरनाक आतंकी लाजर मसीह
विदेशी हथियार, विस्फोटक और फर्जी दस्तावेज बरामद
पंजाब में न्यायिक हिरासत से फरार होने के बाद रच रहा था साजिश
कौशांबी/लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) और पंजाब पुलिस की संयुक्त टीम ने Babbar Khalsa International (BKI) और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक खतरनाक आतंकी को गिरफ्तार कर लिया है। यह आतंकी कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि भारत में खूनी खेल खेलने की तैयारी कर रहा था।6 मार्च 2024 की रात करीब 3:20 बजे यूपी के कौशांबी जिले के कोखराज थाना क्षेत्र में इस आतंकी को धर दबोचा गया।
गिरफ्तार किए गए आतंकी का नाम लाजर मसीह है, जो BKI के जर्मनी मॉड्यूल के प्रमुख स्वर्ण सिंह उर्फ जीवन फौजी के लिए काम करता था। इसके अलावा, वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में भी था और भारत में किसी बड़े हमले की साजिश रच रहा था।
कौन है लाजर मसीह और क्यों था वह खतरनाक?
गिरफ्तार आतंकी लाजर मसीह पुत्र कुलविंदर सिंह, मूल रूप से पंजाब के अमृतसर जिले के कुरलियां गांव का रहने वाला है। लेकिन गिरफ्तारी के समय वह यूपी में छिपकर अपने नापाक इरादों को अंजाम देने की कोशिश कर रहा था।
लाजर मसीह कोई आम आतंकी नहीं, बल्कि BKI और ISI के बीच की कड़ी था। वह जर्मनी में बैठे BKI मॉड्यूल के सरगना स्वर्ण सिंह उर्फ जीवन फौजी के इशारों पर काम कर रहा था। ISI के आतंकियों से उसका सीधा संपर्क था और वह भारत में किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की योजना बना रहा था।
कैसे हुआ आतंक के इस मोहरे का भंडाफोड़?
पंजाब में न्यायिक हिरासत से फरार होने के बाद लाजर मसीह लगातार अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग राज्यों में घूम रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से इसकी तलाश थी। पुलिस को जैसे ही इस आतंकी की लोकेशन की पक्की जानकारी मिली, तुरंत ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।
6 मार्च की रात 3:20 बजे यूपी STF और पंजाब पुलिस की संयुक्त टीम ने कौशांबी जिले के कोखराज थाना क्षेत्र में छापेमारी की और आतंकी को हथियारों के जखीरे के साथ दबोच लिया।
आतंकी के पास से क्या-क्या बरामद हुआ?
3 सक्रिय हैंड ग्रेनेड
2 सक्रिय डेटोनेटर
1 विदेशी पिस्टल (Norinco M-54 Tokarev, USSR निर्मित 7.62 mm)
13 विदेशी कारतूस (7.62×25 mm)
संदिग्ध सफेद रंग का विस्फोटक पाउडर
गाजियाबाद के पते वाला आधार कार्ड
1 मोबाइल फोन (बिना सिम कार्ड)
पंजाब की जेल से फरार होकर कर रहा था नई साजिश
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लाजर मसीह 24 सितंबर 2024 को पंजाब में न्यायिक हिरासत से फरार हुआ था। ▪️ वह फरारी के बाद नए ठिकानों पर छिपता रहा और अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कर खुद को बचाने की कोशिश करता रहा। ▪️ STF और पंजाब पुलिस की सतर्कता ने आखिरकार उसकी हर चाल को नाकाम कर दिया।
आतंकी साजिश का बड़ा खुलासा, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
लाजर मसीह की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब BKI और ISI के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं। इस गिरफ्तारी के बाद कई सवाल उठ रहे हैं—
क्या लाजर मसीह भारत में किसी बड़े आतंकी हमले की योजना बना रहा था? इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है? क्या ISI और BKI मिलकर भारत में बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे?
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी, आतंकी नेटवर्क पर करारा झटका
UP STF और पंजाब पुलिस की इस कार्रवाई ने भारत में आतंकवाद के एक बड़े षड्यंत्र को समय रहते विफल कर दिया। अब आतंकी से पूछताछ की जा रही है और उसके नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। इस मामले में जल्द और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
रानी तलाश कुँवरी जी: पूर्वांचल की वीरांगना जिन्होंने अंग्रेजों को दी कड़ी चुनौती
✅ रानी तलाश कुँवरी जी को ‘पूर्वांचल की लक्ष्मीबाई’ कहा जाता है, जिन्होंने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से लोहा लिया। ✅ अंग्रेजों की ‘डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स’ नीति के विरुद्ध लड़ते हुए उन्होंने अपनी रियासत की रक्षा के लिए युद्ध किया। ✅ जनवरी 1858 में अमोढ़ा रियासत में कर्नल रॉक्राफ्ट के नेतृत्व में हुए युद्ध में रानी की सेना ने अंग्रेजों को हराया। ✅ 2 मार्च 1858 के पखेरवा युद्ध में अंग्रेजों से घिर जाने पर रानी ने आत्मसमर्पण के बजाय आत्मबलिदान को चुना। ✅ आज भी अमोढ़ा की धरती पर रानी तलाश कुँवरी जी का बलिदान श्रद्धा और वीरता का प्रतीक बना हुआ है।
बस्ती/लखनऊ: 1857 की क्रांति भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसने देश के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। इस संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई और अवंतीबाई लोधी जैसी वीरांगनाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। लेकिन इतिहास के पन्नों में कई ऐसी नायिकाएँ भी थीं, जिनके बलिदान को उतनी प्रसिद्धि नहीं मिली, जितनी मिलनी चाहिए थी। ऐसी ही एक वीरांगना थीं रानी तलाश कुँवरी जी, जिन्हें ‘पूर्वांचल की लक्ष्मीबाई’ भी कहा जाता है।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की अमोढ़ा रियासत की शासक रही रानी तलाश कुँवरी जी ने अंग्रेजों की कूटनीति और षड्यंत्रों के खिलाफ मजबूती से मोर्चा लिया और अपने रणकौशल से अंग्रेजों को कई बार परास्त किया। लेकिन अंततः 2 मार्च 1858 को पखेरवा के युद्ध में वे अंग्रेजों से घिर गईं और आत्मसमर्पण करने के बजाय आत्मबलिदान को चुना।
आज भी पूर्वांचल की धरती पर उनके साहस और बलिदान की गाथाएँ गूंजती हैं, लेकिन मुख्यधारा के इतिहास में उन्हें वह स्थान नहीं मिला, जो उन्हें मिलना चाहिए था। आइए, विस्तार से जानते हैं रानी तलाश कुँवरी जी के जीवन, संघर्ष और बलिदान की पूरी कहानी।
रानी तलाश कुँवरी जी का जीवन परिचय
जन्म और विवाह
रानी तलाश कुँवरी जी का जन्म उत्तर प्रदेश के अंगोरी राज्य में हुआ था। वे एक राजपूत परिवार से थीं और बाल्यकाल से ही उन्हें शस्त्र विद्या और युद्ध कौशल की शिक्षा दी गई थी। सन् 1850 में उनका विवाह अमोढ़ा रियासत के राजा जंगबहादुर सिंह से हुआ। लेकिन विवाह के मात्र तीन वर्षों बाद ही 1853 में राजा की असमय मृत्यु हो गई।
राज्य का उत्तराधिकार और अंग्रेजों की साजिश
चूँकि रानी तलाश कुँवरी जी निःसंतान थीं, इसलिए अंग्रेजों ने उनकी रियासत को हड़पने की योजना बनाई। उस समय ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी की ‘डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स’ नीति लागू थी, जिसके तहत किसी निःसंतान शासक की मृत्यु के बाद उसकी रियासत को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया जाता था।
अंग्रेजों ने अमोढ़ा रियासत पर कब्जा करने की पूरी योजना बना ली थी, लेकिन रानी तलाश कुँवरी जी ने ब्रिटिश हुकूमत के सामने झुकने से इनकार कर दिया और अपनी रियासत की रक्षा के लिए संघर्ष का बिगुल बजा दिया।
1857 का स्वतंत्रता संग्राम और रानी तलाश कुँवरी जी का योगदान
युद्ध की तैयारी और सेना का गठन
जब 1857 में देशभर में क्रांति की ज्वाला भड़की, तब रानी तलाश कुँवरी जी ने भी अंग्रेजों से मुकाबला करने की ठानी। उन्होंने अपनी सेना को मजबूत किया और आसपास के इलाकों के वीरों को संगठित किया।
👉 रानी की सेना में ये लोग शामिल थे: ✅ क्षत्रिय योद्धा जो तलवारबाजी और घुड़सवारी में निपुण थे। ✅ किसान और ग्रामीण नागरिक जिन्होंने अपने पारंपरिक हथियारों से लड़ाई में योगदान दिया। ✅ पठान लड़ाके, जो उस समय भारत में विभिन्न रियासतों की सेनाओं में काम करते थे।
युद्ध कौशल और रणकौशल
रानी तलाश कुँवरी जी शस्त्र विद्या में निपुण थीं। वे भाला, तलवार, घुड़सवारी, तीरंदाजी आदि में माहिर थीं। उन्होंने युद्ध के दौरान अपनी रणनीति और व्यूह रचना से अंग्रेजों को कई बार मात दी।
अमोढ़ा का युद्ध (जनवरी 1858)
अंग्रेजों को जब पता चला कि रानी तलाश कुँवरी जी 1857 के संग्राम में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं, तो उन्होंने उनकी रियासत पर हमला करने की योजना बनाई।
👉 जनवरी 1858 में कर्नल रॉक्राफ्ट के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने अमोढ़ा पर हमला कर दिया। 👉 रानी तलाश कुँवरी जी ने अपनी सेना के साथ अंग्रेजों की छावनी पर हमला किया और उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया। 👉 अंग्रेजों को इस युद्ध में भारी पराजय का सामना करना पड़ा और उन्हें पीछे हटना पड़ा।
लेकिन अंग्रेज इस हार से बौखला गए। उन्होंने नेपाली सेना और भारी तोपों की मदद ली और दोबारा हमला किया।
पखेरवा का युद्ध (2 मार्च 1858)
जब अंग्रेजों को महसूस हुआ कि बिना अतिरिक्त मदद के वे रानी तलाश कुँवरी जी को नहीं हरा सकते, तो उन्होंने बड़ी संख्या में सेना भेजी और चारों ओर से हमला कर दिया।
👉 इस युद्ध में अंग्रेजों की रणनीति: ✅ भारी तोपखाने और बंदूकों से हमला ✅ नेपाली सेना की मदद ✅ नौसेना ब्रिगेड की तैनाती
👉 रानी तलाश कुँवरी जी की रणनीति: ✅ गुरिल्ला युद्ध शैली अपनाई ✅ घाघरा नदी के माझा इलाके में अंग्रेजों को फंसाने की कोशिश ✅ वीरतापूर्वक अंतिम क्षण तक युद्ध किया
लेकिन दुर्भाग्य से रानी की सेना अंग्रेजों से घिर गई। अपनी आत्मसम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए रानी ने आत्मसमर्पण से इनकार कर दिया और स्वयं अपनी कटार से अपने प्राण त्याग दिए।
रानी तलाश कुँवरी जी की स्मृति और विरासत
👉 श्रद्धा का केंद्र ‘रानी चौरा’ जहाँ रानी के घोड़े की मृत्यु हुई, वहाँ आज भी एक पीपल का पेड़ श्रद्धा का प्रतीक बना हुआ है।
👉 वीर सैनिकों का बलिदान रानी के बलिदान के बाद भी उनकी सेना ने संघर्ष जारी रखा। उनके सैकड़ों सैनिकों को पीपल के पेड़ से लटकाकर फाँसी दे दी गई।
👉 स्थानीय जनमानस की आस्था आज भी बस्ती जिले और पूर्वांचल के अन्य भागों में रानी तलाश कुँवरी जी की वीरता की गाथाएँ गाई जाती हैं
रानी तलाश कुँवरी जी का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक गौरवशाली अध्याय है। हमें उनकी वीरता और संघर्ष को न केवल याद रखना चाहिए बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहिए। “भारत की बेटियाँ हमेशा अपने शौर्य से इतिहास रचती रही हैं, और रानी तलाश कुँवरी जी उसी गौरवशाली परंपरा का एक अमिट अध्याय हैं।”