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जोसेफ स्टालिन: दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों में से एक की भयावह विरासत

  • ✅ महान पर्ज के दौरान लाखों लोगों को मौत की सजा दी गई।
  • ✅ गुलाग श्रम शिविरों में 1.5 से 2 मिलियन लोग मारे गए।
  • ✅ होलोडोमोर अकाल में 4 से 7 मिलियन लोग भुखमरी से मरे।
  • ✅ कैटिन नरसंहार में 22,000 पोलिश अधिकारियों की हत्या हुई।
  • ✅ स्टालिन की मृत्यु के बाद उनके अपराधों की निंदा हुई।

लखनऊ: 5 मार्च को इतिहास में एक महत्वपूर्ण तिथि के रूप में याद किया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1953 में सोवियत तानाशाह जोसेफ स्टालिन की मृत्यु हुई थी। उनका शासन आतंक, अत्याचार, नरसंहार और दमन का पर्याय था। 1920 के दशक के मध्य से 1953 तक, स्टालिन ने सोवियत संघ पर एक नृशंस अधिनायकवादी शासन लागू किया, जिसने लाखों निर्दोष लोगों की मौत और असहनीय यातनाओं का कारण बना।

उनका नेतृत्व सत्ता प्राप्ति के लिए चालबाज़ी, धोखे और निर्ममता का प्रतीक था। महान पर्ज (The Great Purge) के दौरान लाखों लोग मारे गए, लाखों को जबरन श्रम शिविरों (गुलाग) में भेज दिया गया, और लाखों अन्य भुखमरी व दमन के शिकार हुए। विशेष रूप से होलोडोमोर नामक कृत्रिम अकाल ने यूक्रेन में 4 से 7 मिलियन लोगों की जान ले ली।

स्टालिन के सत्ता में आने का रक्तरंजित सफर

स्टालिन का सत्ता तक पहुंचना न तो लोकतांत्रिक था और न ही शांतिपूर्ण। व्लादिमीर लेनिन की 1924 में मृत्यु के बाद, स्टालिन ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को क्रूरतापूर्वक हटाने का अभियान शुरू किया।

  • लियोन ट्रॉट्स्की, जो स्टालिन के सबसे बड़े विरोधी थे, निर्वासित कर दिए गए और 1940 में उनकी हत्या कर दी गई।
  • अन्य विरोधियों को झूठे मुकदमों, जबरन स्वीकारोक्तियों और सार्वजनिक फांसी के ज़रिए समाप्त कर दिया गया।
  • कम्युनिस्ट पार्टी को अपने नियंत्रण में लेकर, स्टालिन ने विरोधियों को खत्म कर व्यक्तिगत सत्ता को मजबूत किया।

इतिहासकार रॉबर्ट कॉन्क्वेस्ट अपनी प्रसिद्ध पुस्तक The Great Terror (1968) में लिखते हैं कि स्टालिन का शासन “धोखे, जबरदस्ती और निर्ममता की बेजोड़ नीति पर आधारित था।”

महान पर्ज: लाखों लोगों की हत्या का भयावह दौर

1936 से 1938 के बीच, स्टालिन ने महान पर्ज (Great Purge) नामक दमन अभियान चलाया।

  • कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं, सैन्य अधिकारियों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों को राजद्रोह, जासूसी और प्रतिक्रांतिकारी गतिविधियों के झूठे आरोपों में फंसाया गया।
  • एनकेवीडी (NKVD – सोवियत गुप्त पुलिस) ने सैकड़ों हजारों लोगों को गिरफ्तार किया और यातनाएं देकर अपराध कबूल करवाए।
  • मास्को परीक्षणों (Moscow Trials) में स्टालिन के पूर्व सहयोगियों ग्रिगोरी ज़िनोविएव और लेव कामेनेव को झूठे आरोपों के तहत मौत की सज़ा दी गई।
  • अनुमानित 1.2 मिलियन लोग मारे गए, जबकि लाखों लोगों को साइबेरिया के गुलाग शिविरों में भेज दिया गया।

इतिहासकार स्टीफन कोटकिन अपनी पुस्तक Stalin: Paradoxes of Power (2014) में लिखते हैं कि स्टालिन के व्यामोह ने उसे अपने ही लोगों को खत्म करने के लिए मजबूर किया, जिससे सोवियत सेना भी कमजोर हो गई।

गुलाग: स्टालिन के श्रम शिविरों में नरक की ज़िंदगी

स्टालिन के शासनकाल में गुलाग (Gulag) श्रम शिविरों का नेटवर्क क्रूरता की मिसाल बन गया।

  • सोवियत संघ में 18 मिलियन से अधिक लोग गुलाग शिविरों में भेजे गए, जिनमें से कम से कम 1.5 से 2 मिलियन लोग भूख, बीमारी या हत्या के कारण मारे गए।
  • यहाँ कैदियों को अत्यधिक ठंड, अमानवीय श्रम और यातनाओं का सामना करना पड़ता था।
  • नोबेल पुरस्कार विजेता अलेक्जेंडर सोल्झेनित्सिन ने अपनी पुस्तक The Gulag Archipelago (1973) में इन शिविरों का भयावह वर्णन किया है।
  • साइबेरिया के ये श्रम शिविर सिर्फ जेल नहीं थे, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराधों का केंद्र थे।

होलोडोमोर: स्टालिन के आदेश से हुआ नरसंहार

1932-33 में स्टालिन के आदेश से यूक्रेन में कृत्रिम अकाल (Hulodomor) फैलाया गया, जो नरसंहार जैसा था।

  • स्टालिन ने किसानों की फसलें जब्त कर लीं, जिससे 4 से 7 मिलियन लोग भुखमरी से मर गए।
  • भूख से तड़पते लोगों की लाशें सड़कों पर पड़ी रहती थीं, और कई परिवार नरभक्षण करने के लिए मजबूर हो गए।
  • इतिहासकार ऐनी एप्पलबाम अपनी पुस्तक Red Famine (2017) में लिखती हैं कि स्टालिन ने जानबूझकर यूक्रेन की राष्ट्रीय पहचान को कुचलने के लिए यह दमनकारी नीति अपनाई।

द्वितीय विश्व युद्ध: स्टालिन के विश्वासघात और युद्ध अपराध

  • 1939 में हिटलर के साथ स्टालिन का गुप्त समझौता (Molotov-Ribbentrop Pact) हुआ, जिसमें सोवियत संघ और नाजी जर्मनी ने पूर्वी यूरोप का बंटवारा कर लिया।
  • 1940 में कैटिन नरसंहार (Katyn Massacre) में सोवियत सेना ने 22,000 से अधिक पोलिश अधिकारियों, डॉक्टरों और बुद्धिजीवियों की हत्या कर दी।
  • युद्ध के दौरान, सोवियत सैनिकों को पीछे हटने से रोकने के लिए स्टालिन ने आदेश संख्या 227 जारी किया – “एक कदम भी पीछे नहीं”, जिससे लाखों सोवियत सैनिकों की जान चली गई।

इतिहासकार नॉर्मन डेविस अपनी पुस्तक Europe: A History (1996) में लिखते हैं कि स्टालिन ने अपनी सेना को “मानव ढाल” की तरह इस्तेमाल किया, जिससे अनगिनत सैनिक बेवजह मारे गए।

युद्धोत्तर युग: लौह परदा और दमन का विस्तार

  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, स्टालिन ने पूर्वी यूरोप के कई देशों पर कठोर कम्युनिस्ट शासन लागू किया।
  • 1948-49 में बर्लिन नाकाबंदी से पश्चिमी बर्लिन को भूखा मारने का प्रयास किया।
  • 1952-53 में डॉक्टर्स प्लॉट नामक यहूदी-विरोधी अभियान चलाया।

इतिहासकार साइमन सेबैग मोंटेफ़ियोर अपनी पुस्तक Stalin: The Court of the Red Tsar (2003) में लिखते हैं कि स्टालिन के नज़दीकी लोग भी डर में जीते थे, क्योंकि वे कभी भी मारे जा सकते थे।

स्टालिन की मृत्यु और उनकी विरासत

  • 5 मार्च 1953 को स्टालिन की मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई, संभवतः उन्हें ज़हर दिया गया था।
  • उनकी मृत्यु के बाद निकिता ख्रुश्चेव ने 1956 में “सीक्रेट स्पीच” में स्टालिन के अपराधों की निंदा की।
  • उनके आतंक की विरासत आज भी चीन, उत्तर कोरिया और अन्य कम्युनिस्ट तानाशाहों के शासन में देखी जा सकती है।

स्टालिन का शासन – एक खून से सना अधिनायकवाद

स्टालिन का शासन दुनिया के सबसे क्रूर शासन में से एक था। उन्होंने लाखों लोगों को मौत, भूख, आतंक और गुलामी की ओर धकेल दिया। उनकी नीतियों ने यह स्पष्ट किया कि जब सत्ता असीमित होती है, तो वह केवल विनाश लाती है।

लखनऊ: 90 दिन बाद वन विभाग ने रहमान खेड़ा में बाघ को किया रेस्क्यू, बेंगलुरु से आई टीम ने ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा, तीन महीने से इलाके में थी बाघ की दहशत, 25 से अधिक जानवरों को बना चुका था शिकार

लखनऊ: 90 दिन बाद वन विभाग ने रहमान खेड़ा में बाघ को किया रेस्क्यू, बेंगलुरु से आई टीम ने ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा, तीन महीने से इलाके में थी बाघ की दहशत, 25 से अधिक जानवरों को बना चुका था शिकार
लखनऊ: 90 दिन बाद वन विभाग ने रहमान खेड़ा में बाघ को किया रेस्क्यू, बेंगलुरु से आई टीम ने ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा, तीन महीने से इलाके में थी बाघ की दहशत, 25 से अधिक जानवरों को बना चुका था शिकार
लखनऊ: 90 दिन बाद वन विभाग ने रहमान खेड़ा में बाघ को किया रेस्क्यू, बेंगलुरु से आई टीम ने ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा, तीन महीने से इलाके में थी बाघ की दहशत, 25 से अधिक जानवरों को बना चुका था शिकार
  • ✅ 90 दिनों की मशक्कत के बाद वन विभाग ने रहमान खेड़ा में घूम रहे बाघ को सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया।
  • ✅ बाघ ने अब तक 25 से अधिक जानवरों को अपना शिकार बनाया था, जिससे इलाके में दहशत का माहौल था।
  • ✅ बेंगलुरु से आई विशेषज्ञ टीम की मदद से बाघ को ट्रेंकुलाइज करने में सफलता मिली, इससे पहले कई बार ऑपरेशन असफल रहा था।
  • ✅ बाघ के कारण ग्रामीण रात में घरों से बाहर निकलने से डरते थे, खेतों में जाने से भी बच रहे थे।
  • ✅ रेस्क्यू किए गए बाघ को सुरक्षित स्थान पर भेजने की प्रक्रिया शुरू, वन विभाग कर रहा है स्वास्थ्य जांच।

लखनऊ: रहमान खेड़ा, मलिहाबाद में पिछले 90 दिनों से घूम रहे बाघ को आखिरकार वन विभाग ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है। यह बाघ लंबे समय से इलाके में आतंक का कारण बना हुआ था और अब तक 25 से अधिक जानवरों का शिकार कर चुका था। वन विभाग की 100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम लगातार बाघ को पकड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी।

आखिरकार, बेंगलुरु से आई विशेषज्ञ टीम की मदद से बाघ को ट्रेंकुलाइज किया गया और उसे सुरक्षित पकड़ लिया गया। वन विभाग की टीम ने जोन-2 में बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के बाद उसे काबू में किया। इस ऑपरेशन के दौरान बाघ को पकड़ने के लिए कई दिनों तक इलाके में घेराबंदी की गई थी।

बाघ पकड़ने के लिए बेंगलुरु से बुलाई गई विशेषज्ञ टीम

बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने बेंगलुरु से विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया, जिन्होंने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर उसे ट्रेंकुलाइज किया। वन विभाग की यह बड़ी सफलता तीन महीनों से दहशत में जी रहे ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है।

वन विभाग ने पहले भी बाघ को बेहोश करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन हर बार बाघ चकमा देकर भागने में सफल हो जाता था। इस बार वन विभाग की विशेष टीम ने सटीक योजना बनाकर बाघ को काबू में किया।

बाघ के कारण तीन महीने से ग्रामीणों में था खौफ

बाघ की मौजूदगी से रहमान खेड़ा और आसपास के गांवों के लोग लगातार भयभीत थे। ग्रामीणों का कहना था कि रात के समय घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। कई किसान अपने खेतों में जाने से डरते थे, क्योंकि बाघ पहले भी कई बार इंसानों के करीब आता देखा गया था।

वन विभाग को इस इलाके में बाघ के पदचिह्न मिले थे, जिसके आधार पर उन्होंने ट्रैप कैमरों और ड्रोन की मदद से बाघ की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद, विशेष टीम को बुलाकर सफल ऑपरेशन चलाया गया।

क्या बाघ को अब सुरक्षित स्थान पर भेजा जाएगा?

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बाघ को अब सुरक्षित स्थान पर भेजने की तैयारी की जा रही है। बाघ के स्वास्थ्य की पूरी जांच की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह किसी बीमारी से पीड़ित नहीं है। इसके बाद बाघ को उचित अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा जाएगा।

वन विभाग के इस सफल अभियान से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और इलाके में अब सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद है।

उ.प्र.खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023: उद्यमियों और महिलाओं के लिए सुनहरा अवसर, अनुदान और प्रोत्साहन से आत्मनिर्भरता की ओर कदम- केशव प्रसाद मौर्य

  • नई नीति: यूपी सरकार की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 लागू।
  • महिला लाभ: ग्रामीण महिला उद्यमियों को 90% तक सौर ऊर्जा अनुदान।
  • अनुदान: 35%-50% तक (₹10 करोड़ तक) वित्तीय सहायता।
  • रोजगार: किसानों को लाभ, स्थानीय स्तर पर नौकरियां बढ़ेंगी।
  • आवेदन: ‘निवेश मित्र’ पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें।

लखनऊ, 5 मार्च 2025: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई ‘खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023’ प्रदेश में उद्यमिता को बढ़ावा देने और किसानों की उपज के समुचित उपयोग के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह नीति देश की सर्वोत्तम नीतियों में से एक है, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूती देना और महिला उद्यमियों, किसानों व स्थानीय श्रमिकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

उन्होंने प्रदेश के उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (SHG), कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) और युवा व्यवसायियों से अपील की है कि वे इस नीति का अधिकतम लाभ उठाएं और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करें।

महिला सशक्तीकरण और स्वावलंबन में मिलेगा लाभ

श्री मौर्य ने कहा कि यह नीति महिला सशक्तीकरण के लिए भी वरदान साबित होगी। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने अलग से प्रोत्साहन योजनाएं लागू की हैं।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमियों द्वारा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर 75 केवीए तक की सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर 90% तक अनुदान प्रदान किया जाएगा।
  • अन्य उद्यमियों के लिए 50% तक अनुदान का प्रावधान किया गया है।

अनुदान और वित्तीय सहायता से उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा

उत्तर प्रदेश सरकार इस योजना के तहत उद्यमियों को आर्थिक सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस नीति में परियोजना लागत का 35% से 50% तक (अधिकतम ₹10 करोड़ तक) का अनुदान प्रदान किया जा रहा है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (PM-FME) योजना के तहत परियोजना लागत का 35% (अधिकतम ₹10 लाख तक) अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस अनुदान से नए उद्यमियों को अपने व्यापार को शुरू करने में मदद मिलेगी और पहले से स्थापित व्यवसायों को अपनी क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

किसानों और स्थानीय समुदायों को मिलेगा सीधा लाभ

श्री मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलेगा।

  • खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से किसानों की उपज का अधिकतम उपयोग होगा और उनकी फसलें बर्बाद नहीं होंगी।
  • स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
  • इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

योजना के बेहतर प्रचार-प्रसार पर जोर

उप मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस नीति का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, इसके लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए।

  • जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों से अपील की गई है कि वे इच्छुक उद्यमियों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को इस योजना का लाभ दिलाने में सहयोग करें।
  • सरकार की ओर से निवेश मित्र वेब पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे इच्छुक व्यक्ति आसानी से इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

योजना के मुख्य लाभ एक नजर में:

✅ परियोजना लागत का 35%-50% तक अनुदान (अधिकतम ₹10 करोड़ तक)
✅ ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए 75 केवीए तक की सौर ऊर्जा परियोजना पर 90% अनुदान
✅ अन्य उद्यमियों के लिए 50% तक अनुदान
✅ PM-FME योजना के तहत ₹10 लाख तक अनुदान
✅ स्थानीय स्तर पर नए रोजगार सृजन के अवसर
✅ किसानों की उपज का अधिकतम उपयोग और बर्बादी में कमी
✅ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा और स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार

कैसे करें आवेदन?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक उद्यमी और किसान ‘निवेश मित्र’ वेब पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे सभी पात्र व्यक्तियों को योजना का पूरा लाभ मिल सके।

सरकार की प्रतिबद्धता

उत्तर प्रदेश सरकार इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने और अधिकतम लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। श्री मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 किसानों, उद्यमियों और महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अब समय है आगे बढ़ने का! इच्छुक उद्यमी तुरंत ‘निवेश मित्र’ पोर्टल पर आवेदन करें और अपने सपनों को साकार करें।

Health Tips :जिद्दी चर्बी होगी छू-मंतर! वजन घटाने में मदद करेंगी किचन की ये 3 चीजें

खराब लाइस्टाइल और गलतखान के कारण आजकल लोगों में वेट लॉस की समस्या बढ़ती जा रही है। अनहेल्दी खानपान और तनाव के कारण लोग मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में किचन में रखी 3 चीजें आपके शरीर का फैंट तुरंत गायब कर देंगी। पानी में मिला लीजिए ये 3 चीजें देखें कैसे फैट बर्न होता है। ये घरेलू नुस्खे न सिर्फ वजन घटाने में मदद करता है। आइए जानते है कैसे इन 3 चीजों से वेट लॉस किया जा सकता है।

नींबू पानी पिएं

क्या आप जानते हैं नींबू पानी से भी वजन घटाया जा सकता है? नींबू में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और डिटॉक्सिफाइंग गुण होते हैं। यह शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसलिए आप सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट करता है, जिससे कैलोरी को बर्न करने में मदद करता है। नींबू पानी पीने से पाचन दुरुस्त रखता है और यह भूख को कंट्रोल करता है।

कैसे बनाएं 

एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू को निचोड़ें और इसमें शहद मिलाए। फिर इसको खाली पेट पिएं और रोजाना नींबू पानी पिएं।

शहद पानी

शहद एक प्रकार से नेचुरल स्वीटनर है, मीठा होने के साथ ही हेल्थ के लिए काफी बढ़िया रहता है। शहद में कई पोषक तत्व पाएं जाते है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। शहद का पानी पीने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, जोकि फैट को बर्न करता है।

कैसे बनाएं

 सबसे पहले एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाएं और इसे सुबह खाली पेट पिएं।

हल्दी पानी 

हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर होता है। इसमें मौजूद करक्यूमिन शरीर की चर्बी को कम करने में मदद करता है। हल्दी पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और फैट सेल्स को बर्न करता है। हल्दी पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर से टॉक्सिंस को बाहर करता है।

कैसे बनाएं

सबसे पहले आप गुनगुने पानी में आधा चम्मच हल्दी पाउडर डालें और इसे अच्छे घोल लें। इसे सुबह खाली पेट पिएं।

इन बातों का रखें ध्यान

– यदि आपको कोई एलर्जी और स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह लें।

– अधिक मात्रा में नींबू पानी और शहद पानी पीने से बचें, क्योंकि इससे एसिडिटी समस्या हो सकती है।

– हल्दी की कम मात्रा में ले। अधिक हल्दी के सेवन से पेट में गर्मी हो सकत है।

Latest Bollywood News :पूर्व सीएम के बेटे हैं बॉलीवुड सुपरस्टार, अब उनके स्टारकिड्स ने बटोरी सुर्खियां”

बॉलीवुड स्टार रितेश देशमुख के पिता विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। सियासी परिवार से होने के बाद भी रितेश ने फिल्मी दुनिया में अपना नाम कमाया। रितेश अब बॉलीवुड के स्टार हैं और अक्सर ही फिल्मों में अपनी एक्टिंग को लेकर तारफें बटोरते रहते हैं। अब रितेश देशमुख के साथ उनके बच्चे भी सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं। हाल ही में रितेश के बच्चों के स्कूल के एक ईवेंट का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में रितेश के बच्चे डांस कर रहे हैं। इस वीडियो को देख फैन्स को भी तैमूर की याद आ गई।

रितेश के बेटे ने लूटी महफिल

बता दें कि रितेश के बेटे का एक वीडियो वायरल हो रहा है। ये वीडियो स्कूल के एक प्रोग्राम का है। इस प्रोग्राम में बच्चे एक गाने पर डांस कर रहे हैं। इस वीडियो में कुणाल खेमू और सोहा अली खान की बेटी भी नजर आ रही हैं। इसके साथ ही रितेश का बेटा भी इस डांस में शामिल है। रितेश के बेटे का डांस देख लोगों को तैमूर अली खान की याद आ गई। फैन्स इस वीडियो के कमेंट्स में दोनों स्टारकिड्स की तारीफें करते दिख रहे हैं। इस वीडियो में रितेश के साथ सोहा अली खान की बेटी के भी क्यूट एक्स्प्रेशन देख फैन्स काफी खुश हो गए थे।

सोशल मीडिया पर सुर्खियों में रहते हैं स्टारकिड्स

बता दें कि फिल्मी सितारों के बच्चे भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल रहते हैं। फैन्स अक्सर इन स्टारकिड्स की फोटो और वीडियो पसंद करते रहे हैं। इससे पहले शाहरुख खान से लेकर अमिताभ बच्चन के परिवार के बच्चे भी अब फिल्मी दुनिया में अपनी जमीन तलाश रहे हैं। इसके साथ ही करीना  कपूर के दोनों बेटे भी फैन्स के बीच काफी पॉपुलर हैं। अमिताभ बच्चन की पोती आराध्या भी अक्सर लाइम लाइट लूटती रहती हैं। अब रितेश देखमुख के बच्चे भी इस रेस में शामिल हो गए हैं। रितेश खुद भी अपने इंस्टाग्राम पर इनकी तस्वीरें शेयर करते रहते हैं। बता दें कि रितेश देशमुख ने साल 2012 में एक्ट्रेस जेनेलिया डिसूजा से शादी की थी। शादी के बाद दोनों के 2 बच्चे भी हो गए हैं। अब रितेश अपनी पत्नी जेनेलिया के साथ अक्सर ही रियालिटी शोज में नजर आते रहते हैं।