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लखनऊ के अंबालिका इंस्टीट्यूट में 8वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी: डॉ. राजेश्वर सिंह ने AI क्रांति और भारत की भूमिका पर किया मंथन, डॉ. सिंह बोले- “भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करना चाहिए”

  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने अंबालिका इंस्टीट्यूट में AI की चुनौतियों और अवसरों पर विचार रखे।
  • उन्होंने कहा कि 2045 तक मशीनें मानव बुद्धि से आगे निकल सकती हैं।
  • उत्तर प्रदेश में AI इंटेलिजेंस सेंटर स्थापित करने की योजना पर प्रकाश डाला।
  • AI के उपयोग से शासन, स्वास्थ्य, वित्त और साइबर सुरक्षा में क्रांति लाने पर जोर दिया।
  • छात्रों को AI अनुसंधान और डिजिटल कौशल में दक्ष बनने के लिए प्रेरित किया।

लखनऊ, 08 मार्च 2025: वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा तकनीकी परिवर्तन लाने वाली शक्ति बन चुकी है। भारत भी इस परिवर्तन के केंद्र में है, और देश को AI के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। इसी विषय पर विचार-विमर्श करने के लिए शनिवार को अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस, मोहनलालगंज में “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में चुनौतियाँ और अवसर” विषय पर 8वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित इंजीनियरिंग छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को संबोधित करते हुए AI के महत्व, इसकी संभावनाओं और भारत के लिए इससे जुड़ी चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

AI क्रांति: भारत के लिए अवसर और चुनौती

डॉ. राजेश्वर सिंह ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आने वाले समय में दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित करने वाली तकनीक होगी। उन्होंने बताया कि 1950 में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” शब्द गढ़े जाने के बाद से इस क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति हुई है।

उन्होंने विशेषज्ञों के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि 2045 तक मशीनें मानव बुद्धि से आगे निकल सकती हैं। यह एक बड़ा बदलाव होगा, और भारत को इसके लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि AI सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि एक क्रांति है, और भारत को इसे अपनाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि “भारत में हर साल लगभग 1.5 मिलियन इंजीनियर स्नातक होते हैं, लेकिन यदि वे AI और डिजिटल तकनीकों में दक्षता हासिल नहीं करेंगे, तो वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं।”

साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे युवा जनसंख्या है, और अगर इस जनसंख्या को AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाए, तो भारत तकनीकी महाशक्ति बन सकता है।

AI विकास के लिए सरकार की पहल

डॉ. सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने AI अनुसंधान और विकास के लिए ₹10,371 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इस निधि का उपयोग भारत को AI के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने और डिजिटल इंडिया मिशन को सशक्त करने के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों के तहत सरोजनीनगर के नादरगंज में एक अत्याधुनिक AI इंटेलिजेंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह सेंटर फोरेंसिक साइंस, मशीन लर्निंग और प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और उत्तर प्रदेश को AI हब के रूप में विकसित करेगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में बढ़ रहा है, और AI इसमें अहम भूमिका निभाएगा।”

AI के विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव

डॉ. राजेश्वर सिंह ने AI द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे सकारात्मक बदलावों का जिक्र करते हुए कुछ प्रमुख उदाहरण प्रस्तुत किए –

1. शासन और प्रशासन में AI का उपयोग

  • कुंभ मेले में 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन में AI ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • यातायात और सुरक्षा प्रबंधन में AI आधारित स्मार्ट कैमरों और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जा रहा है।

2. बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में AI

  • बैंकिंग सेक्टर में डिजिटल धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए AI आधारित साइबर सुरक्षा प्रणाली विकसित की जा रही है।
  • ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को सुरक्षित बनाने के लिए AI का प्रयोग बढ़ रहा है।

3. स्वास्थ्य सेवाओं में AI की भूमिका

  • AI की मदद से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है।
  • रोगों के निदान और टेलीमेडिसिन सेवाओं में AI के बढ़ते उपयोग से सस्ती और कुशल स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हो रही हैं।

4. परिवहन और स्मार्ट शहरों में AI

  • स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम AI की मदद से बेहतर हो रहा है।
  • ड्राइवरलेस कारों और AI आधारित ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर तेजी से शोध किया जा रहा है।

AI से जुड़ी चुनौतियाँ और नैतिक चिंताएँ

डॉ. राजेश्वर सिंह ने AI से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नैतिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा की, जिनमें शामिल हैं –

1. रक्षा क्षेत्र में AI का प्रयोग

  • युद्ध और सैन्य अभियानों में AI के उपयोग की सीमाएँ तय करना आवश्यक है।
  • ड्रोन और ऑटोमेटेड हथियारों के बढ़ते उपयोग को नियंत्रित करने की जरूरत है।

2. साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी

  • 2018 में जहां साइबर अपराध के 26,000 मामले थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 26 लाख हो गई है।
  • डेटा सुरक्षा और निजता बनाए रखने के लिए सख्त कानूनों की आवश्यकता है।

3. डिजिटल डिवाइड को कम करना

  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच AI और डिजिटल साक्षरता की खाई को पाटना होगा।
  • AI को सभी के लिए सुलभ बनाना आवश्यक है, ताकि कोई भी इससे वंचित न रहे।

डिजिटल साक्षरता और AI में भारतीय युवाओं की भागीदारी

डॉ. सिंह ने कहा कि AI को समझना अब एक विकल्प नहीं, बल्कि सफलता की कुंजी है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे AI अनुसंधान, कौशल विकास और नवाचार में सक्रिय रूप से भाग लें।

उन्होंने कहा कि –

“यदि भारत डिजिटल डिवाइड (डिजिटल अंतराल) को दूर नहीं करेगा, तो हम वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे।”

उन्होंने सरकार द्वारा स्टार्टअप्स और AI रिसर्च के लिए उपलब्ध कराई गई ₹10,371 करोड़ की निधि का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।

सम्मान और पुरस्कार वितरण

कार्यक्रम के दौरान, AI विषय पर आर्टिकल प्रस्तुत करने वाले विजेताओं को डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा ट्रॉफी प्रदान की गई।

इस संगोष्ठी में कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें शामिल थे –
✅ अंबालिका इंस्टीट्यूट के चेयरमैन – अंबिका मिश्रा
✅ संस्थान के निदेशक – डॉ. अशुतोष द्विवेदी
✅ पूर्व IRS अधिकारी – रामेश्वर सिंह
✅ KSG (बेंगलुरु) के निदेशक – प्रो. के. एस. गुप्ता
✅ ब्रिगेडियर आर. के. सिंह
✅ लखनऊ विश्वविद्यालय, कंप्यूटर विज्ञान विभाग प्रमुख – डॉ. पुनीत मिश्रा

AI अपनाना समय की मांग

इस संगोष्ठी के माध्यम से डॉ. राजेश्वर सिंह ने AI के महत्व, अवसरों और चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने AI को भारत के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए युवाओं को इसमें दक्षता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। “AI में भारत को केवल भागीदार नहीं, बल्कि एक वैश्विक नेता बनना होगा।”

ट्रंप ने दी चेतावनी: रूस और यूक्रेन को जल्द बातचीत करने की सलाह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस को धमकी देते हुए यूक्रेन के साथ बातचीत करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि देर होने से पहले दोनों देशों को आपस में बातचीत कर युद्ध खत्म कर लेना चाहिए। ट्रंप ने कहा, “इस तथ्य के आधार पर कि रूस इस समय युद्ध के मैदान में यूक्रेन को तबाह करने पर तुला हुआ है, मैं रूस पर बड़े पैमाने पर बैंकिंग प्रतिबंध और टैरिफ लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा हूं। ये प्रतिबंध युद्ध विराम और शांति पर अंतिम समझौता होने तक जारी रहेंगे। रूस और यूक्रेन से निवेदन है कि वे अभी बातचीत के लिए राजी हो जाएं, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”

इससे पहले ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ बहस के दौरान धमकी भरे अंदाज में कहा था कि अमेरिका की मदद के बिना यूक्रेन युद्ध में नहीं टिक पाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि ट्रंप के साथ बहस करने के बाद यूक्रेन और जेलेंस्की के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। जेलेंस्की समझौते के लिए अमेरिका गए थे। उम्मीद थी कि वह रूस के साथ समझौते के लिए तैयार हो जाएंगे और ट्रंप की मध्यस्थता से युद्ध खत्म होगा, लेकिन मीटिंग के अंत में दोनों के बीच बहस हो गई और जेलेंस्की तय समय से पहले ही वापस लौट गए।

क्या हैं प्रतिबंध?

जब कोई देश अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ता है या आक्रामक तरीके से व्यवहार करता है, तब अन्य देश उस देश पर कई तरह के प्रतिबंध लगाते हैं। ये प्रतिबंध एक सजा के रूप में लगाए जाते हैं ताकि उस देश को कानून तोड़ने से रोका जा सके। कोई भी देश दूसरे देश पर प्रतिबंध लगाने से बचता है, क्योंकि इससे चौतरफा नुकसान होता है और संबंध खराब होते हैं। मुश्किल हालातों में ही ऐसे प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

रूस पर 21 हजार से ज्यादा प्रतिबंध

तीन साल पहले यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान जैसे देश साथ मिलकर रूस पर 21,000 से अधिक प्रतिबंध लगा चुके हैं। उनका मुख्य लक्ष्य रूस को मिलने वाले पैसे में कटौती करना और रूस के तेल उद्योग को कमजोर करना रहा है। पश्चिमी देशों ने रूस को हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। रूस से सोने और हीरे के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। रूस के लिए जाने वाली सभी विमान सेवाएं बंद कर दी गई हैं। क्रेमलिन से जुड़े धनी बिजनेसमैन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है और उनके जहाज भी जब्त हो चुके हैं।

GBS Syndrome: हाथ-पैरों में झुनझुनी हो सकती है शुरुआती लक्षण, जानें बचने के तरीके

पुणे में इन दिनों गुइलेन-बर्रे सिंड्रोम काफी तेजी से फैल रहा है। बता दें कि संक्रमण के बाद यह होने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। अब तक इस बीमारी के 100 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं महाराष्ट्र के एक शहर में इस बीमारी से एक मौत भी हो गई है। तो वहीं करीब 14 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। GBS एक ऐसी दुर्लभ स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करती है। जिसकी वजह से सुन्नता, कमजोरी और लकवा पैदा हो सकता है। कैंपिलोबैक्टर जेजुनी नाम का बैक्टीरिया पेट के संक्रमण का कारण बनता है।

आमतौर पर हाथों-पैरों में झुनझुनी और कमजोरी इसके शुरूआती लक्षण होते हैं। यह लक्षण काफी तेजी से फैल सकते हैं और यह स्थति लकवे तक भी पहुंच सकती है। अपने सबसे गंभीर रूप में यह सिंड्रोम एक मेडिकल इमरजेंसी बन सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं।

कैसे होता है कैंपिलोबैक्टर जेजुनी

बता दें कि दूषित भोजन या पानी के सेवन से कैंपिलोबैक्टर जेजुनी का संक्रमण हो सकता है। बिना पाश्चुरीकृत दूध, कच्चा या अधपका चिकन और गंदा पानी इस बीमारी के प्रमुख स्त्रोत हैं। खाना बनाते हुए एक ही कटिंग बोर्ड या बर्तन का उपयोग करने से क्रॉस-कंटैमिनेशन के जरिए बैक्टीरिया फैल सकता है। वहीं संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने या फिर कच्चा मांस आदि छूने के बाद हाथ न धोने की वजह से भी इसका जोखिम बढ़ता है।

जिन स्थानों पर साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता है और खाद्य सुरक्षा के तरीकों को ठीक से नहीं अपनाया जाता है, वहां पर इसका प्रकोप अधिक होता है। बैक्टीरिया जब शरीर में जाता है, तो यह आंतों की परत को संक्रमित करते हैं। इससे पेट में ऐंठन, दस्त, बुखार और जी मिचलाने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

GBS के लक्षण

आमतौर पर पैरों में झुनझुनी, कमजोरी या फिर सुन्नता से शुरू होती है। यह कमजोरी हाथों और शरीर के ऊपरी हिस्से तक फैल सकती है। गंभीर मामलों में यह लकवा भी हो सकता है। इसके अन्य लक्षणों में चेहरे की गतिविधियों में कठिनाई, लड़खड़ाकर चलना और असामान्य हृदय गति या रक्तचाप आदि शामिल है। कुछ लोगों को सांस लेने में तकलीफ, मूत्राशय/आंत्र नियंत्रण में कमी और तेज दर्द आदि का अनुभव होता है।

कैसे फैलती है ये बीमारी

एक रिपोर्ट के मुताबिक GBS संक्रामक नहीं है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है और इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी नसों पर हमला करता है और नुकसान पहुंचाता है। वहीं यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है।

किसको ज्यादा खतरा

हाल के प्रकोप का सटीक वजह पता लगाया जाना अभी बाकी है। वहीं GBS होने का खतरा अधिक होता है, इसका कोई विशिष्ट समूह नहीं है। लेकिन आमतौर पर यह संक्रमण सर्जरी या पुरानी बीमारी की वजह से कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को अधिक खतरा हो सकता है।

क्या न खाएं

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, पनीर, चावल और चीज़ खाने से बचना चाहिए। क्योंकि इन चीजों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, क्योंकि इनमें नमी की मात्रा ज्यादा होती है। हालांकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। पनीर और चीज डेयरी उत्पाद हैं, इसलिए इनको अगर सही तरीके से स्टोर नहीं किया जाता है, तो इनमें साल्मोनेला, लिस्टेरिया और ई। इनमें कोलाई होने की संभावना होती है और पके हुए चावल में बैसिलस सेरेस हो सकता है। जो कमरे के तापमान पर यदि छोड़ दिया जाए, तो इनमें जहर पैदा हो सकता है। जिससे फूड पॉइजनिंग हो सकती है।

ये खाने-पीने की चीजें ‘डेंजर जोन’ में जल्दी खराब हो सकती हैं। इन जगहों पर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। बैक्टीरिया के दूषित होने और फूड पॉइजनिंग की संभावना को कम करने के लिए इनको फ्रिज में स्टोर करना चाहिए या फिर खा लेना चाहिए।

इन बातों का रखें खास ख्याल

हेल्थ एक्सपर्ट ने इस बीमारी से बचने के लिए बाहर का खाना न खाने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि जेजुनी बैक्टीरिया की वजह होने वाला गैस्ट्रोएंटेराइटिस है। हालांकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। लेकिन एक कारण ऐसा भी है, जिससे हम बच सकते हैं। इसलिए बाहर का खाना खाने से बचना चाहिए और दूषित भोजन और पानी से बचना चाहिए।

Women’s Premier League 2025 Points Table: मुंबई इंडियंस प्लेऑफ के करीब, यूपी वॉरियर्स की उम्मीदें खत्म

 हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली मुंबई इंडियंस की टीम ने महिला प्रीमियर लीग यानी डब्ल्यूपीएल में एक और मैच अपने नाम कर लिया है। मुंबई इंडियंस ने यूपी वॉरियर्स को 6 विकेट से हरा दिया है। इसके साथ ही अंक तालिका में उसके 8 अंक हो गए हैं, अब टीम प्वाइंट्स टेबल में दूसरे नंबर पर पहुंच गई है। साथ ही अपनी प्लेऑफ में जाने की संभावनाओं को और भी मजबूत कर लिया है। हालांकि दिल्ली कैपिटल्स की टीम अभी भी नंबर एक पर बनी हुई है। इस बीच यूपी वॉरियर्स की कहानी अब करीब करीब खत्म हो गई है। टीम अंक तालिका में सबसे नीचे के पायदान पर है।

दिल्ली कैपिटल्स नंबर एक और मुंबई इंडियंस दूसरे नंबर पर पहुंची

डब्ल्यूपीएल की मौजूदा अंक तालिका की बात की जाए तो दिल्ली कैपिटल्स इस वक्त टॉप पर है। टीम ने 7 मैच खेलकर उसमें से 5 जीते हैं और दो में उसे हार का सामना करना पड़ा है। उसके पास दस अंक हैं, वहीं टीम का नेट रन रेट भी प्लस 0.482 का है। इसके बाद अब दूसरे नंबर पर गुजरात जायंट्स को हटाकर मुंबई इंडियंस ने यहां पर कब्जा कर लिया है। मुंबई इंडियंस ने अब तक 6 मुकाबले खेले हैं, इसमें से चार मैच टीम ने जीते हैं और 2 में उसे हार मिली है। टीम के पास आठ अंक हैं। टीम का नेट रन रेट इस जीत के बाद बढ़का प्लस 0.267 हो गया है। गुजरात जायंट्स की टीम अब तीसरे नंबर पर चली गई है। इस टीम ने अब तक 6 मैच खेलकर उसमें से तीन जीते हैं और तीन में ही उसे हार मिली है। टीम के पास 6 अंक हैं और उसका नेट रन रेट प्लस 0.357 का है।

आरसीबी की भी हालत खराब, यूपी वॉरियर्स आखिरी नंबर पर

इस बीच आरसीबी यानी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम अंक तालिका में नंबर 4 पर है। आरसीबी ने अब तक 6 मैच खेल लिए हैं, लेकिन इसमें से उसे केवल दो में ही जीत मिली है। उसके पास चार अंक हैं, क्यों​कि टीम अब तक चार मैच हार चुकी है। टीम का नेट रन रेट माइनस 0.244 का है। बात अगर यूपी वॉरियर्स की करें तो आज की हार के बाद टीम को और भी ज्यादा नुकसान हुआ है। टीम ने 7 में से केवल दो ही मैच अपने नाम किए हैं। पांच में उसे हार मिली है। इस मैच में मिली हार के बाद टीम का नेट रन रेट माइनस में 0.785 का हो गया है।

मुं​बई ने 6 विकेट से शानदार तरीके से जीता मैच

जहां तक इस मैच की बात करें तो मुंबई इंडियंस के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करने उतरी यूपी वॉरियर्स की टीम 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर केवल 150 रन ही बना सकी। टीम को शुरुआत तो अच्छी मिली थी, लेकिन इसके बाद एक एक टीम के विकेट गिरते रहे और टीम बड़ा स्कोर करने से चूक गई। सलामी बल्लेबाज जॉर्जिया वोल ने 33 बॉल पर 55 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन दूसरी कोई भी बल्लेबाज उनके साथ टिककर नहीं खेल पाई। जवाब में मुंबई इंडियंस ने 18.3 ओवर में ही चार विकेट पर 153 रन बनाकर छह विकेट से मैच अपने नाम कर लिया। सलामी बल्लेबाज हीली मैथ्यूज ने 46 बॉल पर 68 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली।

लॉन्च के तुरंत बाद स्टारशिप में हुआ विस्फोट, जाने क्या बोले एलन मस्क

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को गुरुवार को बड़ा झटका लगा। दरअसल मेगा रॉकेट स्टारशिप की 8वीं परीक्षण उड़ान के दौरान स्पेसएक्स को झटका लगा और लॉन्च होने के कुछ ही मिनटों बाद स्टारशिप से संपर्क टूट गया। इस कारण रॉकेट के इंजन बंद हो गए और स्टारशिप रॉकेट आसमान में ही फट गया, जिसके वीडियो को एलन मस्क ने अपने अधिकारिक एक्स हैंडल पर शेयर किया है। रॉकेट में हुए धमाके के बाद कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे जिसमें दक्षिणी फ्लोरिडा और बहामास के आसमान में स्टारशिप रॉकेट के मलबे गिरते दिखाई दे रहे हैं।  हालांकि कंपनी द्वारा इसे पूरी तरह असफल नहीं बताया गया है। स्पेसएक्स का कहना हैकि इस लॉन्चिंग के दौरान उन्होंने सुपर हेवी बूस्टर पर सफलतापूर्वक काम किया है जिससे उन्हें महत्वपूर्ण डेटा मिला है।

स्पेसएक्स का स्टारशिप से टूटा संपर्क

बता दें कि 7 मार्च को स्पेसएक्स ने टेक्सास के बोका चीका स्थित अपने लॉन्च पैड से स्टारशिप को लॉन्च किया था। उड़ान के दौरान सबकुछ सामान्य था और सुपर हेवी बूस्टर का स्पेसएक्स ने सफलतापूर्वक परीक्षण किया। लॉन्च के बाद बूस्टर ने खुद को स्टारशिप से अलग कर लिया है जैसी योजना बनाई गई थी उसी तर्ज पर बूस्टर समुद्र में जा गिरा। इस हिस्से को स्पेसएक्स सफल मान रही है, क्योंकि कंपनी की पुन: प्रयोज्य रॉकेट प्रणाली की विकास की दिशा में यह एक अहम कदम था। हालांकि लॉन्च के कुछ ही मिनटों पर स्पेसएक्स और स्टारशिप के बीच संपर्क टूट गया और अंतरिक्ष में प्रवेश करने से पहले ही स्टारशिप अनियंत्रित हो गया और उसने धमाका हो गया, जिस कारण उसका मिशन अधूरा रहा गया।

क्या बोले एलन मस्क

बता दें कि स्टारशिप का यह परीक्षण महत्वपूर्ण था क्योंकि स्पेसएक्स इसे भविष्य में मंगल और चंद्रमा पर जैसे मिशनों के लिए तैयार कर रही है। स्पेसएक्स ने इस परीक्षा को सफल बताया है। एलन मस्क ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर एक वीडियो को शेयर किया और लिखा, यह परीक्षण एक बड़ा कदम था और इससे कंपनी को अपनी प्रणाली को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। कंपनी ने आगे के परीक्षणों के लिए तैयारी शुरू कर दी है और आने वाले महीनों में अगले प्रयास की उम्मीद की जा रही है।