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Latest Bollywood News :19 साल की उम्र में इस एक्ट्रेस ने रचा इतिहास, डिग्री मिलते ही मिली ‘डॉक्टर’ की उपाधि

बॉलीवुड एक्ट्रेस रीवा अरोड़ा महज 19 साल की उम्र में शोहरत का खास मुकाम हासिल कर चुकी हैं। अब तक करीब 31 से ज्यादा टीवी सीरियल्स, ओटीटी सीरीज और म्यूजिक वीडियोज में काम कर चुकीं एक्ट्रेस रीवा अरोड़ा के खाते में एक और बड़ा अचीवमेंट शामिल हो गया है। रीवा अरोड़ा को डॉक्टरेट की डिग्री से नवाजा गया है। रीवा ने इंटरनेशनल वूमन्स डे पर अपने फैन्स के साथ इस खुशखबरी को शेयर किया है। रीवा ने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं जिसमें वे गाउन पहने सिर पर कैप लगाए डॉक्टरेट इन फिलोसिफी की डिग्री रिसीव करती दिख रही हैं। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए रीवा ने लिखा, ‘अब मैं डॉक्टर रीवा अरोड़ा हुई। इस खास मुकाम पर आने के बाद ये सपने के सच होने जैसा लग रहा है। मैं अपनी सफलताओं पर गर्व से फूली नहीं समा रही।’

सबसे अमीर चाइल्ड एक्टर्स में रहा नाम

बता दें कि रीवा अरोड़ काफी समय से टीवी की दुनिया में काम कर रही हैं। कई सीरियल्स और विज्ञापनों में काम कर चुकी रीवा महज 19 साल की हैं। रीवा टीवी सीरियल्स के साथ ओटीटी सीरीज पर भी कई किरदार निभाती नजर आती रहती हैं। रीवा बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट भी लंबे समय से काम कर रही हैं। रीवा को कभी सबसे अमीर चाइल्ड एक्टर्स में भी गिना जाता रहा है। रीवा उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक जैसी सुपरहिट फिल्म में भी काम कर चुकी हैं।

सोशल मीडिया की स्टार हैं रीवा

ओटीटी सीरीज और सीरियल्स के साथ रीवा सोशल मीडिया पर भी काफी पॉपुलर रहती हैं। रीवा अपने फैन्स के साथ भी लगातार अपडेट शेयर करती रहती हैं। रीवा को इंस्टाग्राम पर ही 11 मिलियन से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। साथ ही यूट्यूब पर भी 2 मिलियन से ज्यादा रीवा के सब्सक्राइबर हैं। रीवा महज 19 साल की उम्र में ही ग्लैमर की दुनिया का  बड़ा नाम हैं। रीवा कपूर बीते दिनों प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई सीरीज ‘बंदिश बैंडिट्स-2’ में एक अहम किरदार में नजर आई थीं। इस किरदार में रीवा को काफी पसंद किया गया था और खूब तारीफें मिली थीं।

पावर ऑफ पांच में मचाएंगी धूम

रीवा अरोड़ा इन दिनों अपनी सीरीज ‘पावर ऑफ पांच’ को लेकर सुर्खियों में हैं। हॉटस्टार पर रिलीज हुई इस सीरीज में रीवा ने अहम किरदार निभाया है। ये सीरीज एक साईफाई फिक्शन पर बनी है और एक्शन से भरपूर है। हालांकि इस सीरीज ने लोगों का कोई खास ध्यान नहीं खींच पाया है। इसके पीछे की इसकी कमजोर कहानी और एक्टिंग को भी बताया जा रहा है। लेकिन रीवा ने इस सीरीज में काम किया है और लीड रोल निभाया है।

डोनाल्ड ट्रंप का दावा: ‘भारत टैरिफ कम करने पर सहमत’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत अपने यहां आयात होने वाले अमेरिकी सामान पर टैरिफ कम करने के लिए राजी हो गया है। हालांकि, भारत सरकार की तरफ से अब तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है। ट्रंप ने यह आरोप भी लगाया कि भारत आयात होने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाता है। वहां कुछ भी बेचना बेहद मुश्किल है। हालांकि, खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि अब टैरिफ कम करने को लेकर भारत राजी हो गया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “हमारे देश को हर किसी ने लूटा है और अब यह बंद हो गया है। मैंने अपने पहले कार्यकाल में इसे बंद करवाया था और अब हम इसे पूरी तरह से बंद करने जा रहे हैं क्योंकि यह बहुत अनुचित है। आर्थिक दृष्टिकोण से, वित्तीय दृष्टिकोण से और व्यापार दृष्टिकोण से, हमारे देश को दुनिया के लगभग हर देश ने लूटा है। भारत हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलता है। आप भारत में कुछ भी नहीं बेच सकते। वैसे, वे सहमत हो गए हैं।”

यूक्रेन, रूस को धमकाया

डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ही यूक्रेन और रूस को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि वह रूस पर कई नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। इनमें बड़े पैमाने पर बैंकिंग प्रतिबंध और टैरिफ शामिल हैं। उन्होंने कहा “इस तथ्य के आधार पर कि रूस इस समय युद्ध के मैदान में यूक्रेन को तबाह करने पर तुला हुआ है, मैं रूस पर बड़े पैमाने पर बैंकिंग प्रतिबंध और टैरिफ लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा हूं। ये प्रतिबंध युद्ध विराम और शांति पर अंतिम समझौता होने तक जारी रहेंगे। रूस और यूक्रेन से निवेदन है कि वे अभी बातचीत के लिए राजी हो जाएं, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”

ईरान को दी चेतावनी

ट्रम्प ने शुक्रवार को फॉक्स बिजनेस न्यूज पर एक इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने ईरान के बढ़ते परुमाणु कार्यक्रम को लेकर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को एक पत्र लिखा है। ट्रंप ने कहा, “मैंने उन्हें कल एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है, ‘मुझे उम्मीद है कि आप बातचीत करेंगे क्योंकि अगर हमें सैन्य रूप से आगे बढ़ना पड़ा, तो यह एक भयानक बात होगी।’ मैं सौदे पर बातचीत करना पसंद करूंगा। मुझे यकीन नहीं है कि हर कोई मुझसे सहमत होगा, लेकिन हम एक ऐसा सौदा कर सकते हैं जो सैन्य रूप से जीतने पर भी उतना ही अच्छा होगा। लेकिन अब समय आ गया है। समय आ रहा है। किसी न किसी तरह कुछ होने वाला है।

International Women’s Day 2025: ये 5 भारतीय महिला खिलाड़ी जिन्होंने दुनिया भर में अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेरा

भारत में पुरातन काल से ही देवी दुर्गा, लक्ष्मी जी, मां सररस्वती की पूजा होती रही है और आज के बदलते युग में नारी ही शक्ति का केंद्र बिन्दु है, जिससे समाज चल रहा है। अब महिलाएं सिर्फ चौका-बर्तन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। चाहे वह राजनीति की चौसर हो, खेल का मैदान हो, विज्ञान हो या फिर कला। महिलाओं ने हर जगह अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई है। खेल जगत में कई ऐसी महिला प्लेयर्स रही हैं, जिन्होंने युवा खिलाड़ियों को खेल से जोड़ा और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इनमें मिताली राज, पीटी उषा, मैरी कॉम, साइना नेहवाल, जैसी स्टार प्लेयर्स शामिल रही हैं। इन खिलाड़ियों ने देश और दुनिया में हर जगह अपनी सफलता का झंडा गाड़ा। अपनी प्रतिभा से इन महिला खिलाड़ियों ने दुनिया को हैरान होने पर मजबूर कर दिया। आज 8 मार्च को महिला इंटरनेशनल दिवस के दिन जानते हैं, इन प्लेयर्स की कहानी के बारे में।

1. मिताली राज

मिताली राज का जन्म 1982 में राजस्थान को जोधपुर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट से बहुत ही ज्यादा लगाव था। फिर साल 1999 में उन्होंने भारतीय टीम के लिए वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया और इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने जल्द ही खुद को भारत की बल्लेबाजी की धुरी के रूप में स्थापित कर लिया। उनका फुटवर्क कमाल का था और दुनिया के किसी भी मैदान पर रन बनाने की बेजोड़ काबिलियत ने उन्हें महान प्लेयर्स की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। वह इकलौती भारतीय कप्तान हैं, जिन्होंने दो वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में टीम की कप्तानी की है।

उन्होंने महिला क्रिकेट को नई ऊचाइयों पर ले जाने में अहम भूमिका अदा की। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 232 वनडे मैचों में 7805 रन बनाए, जिसमें उनके बल्ले से 7 शतक और 64 अर्धशतक निकले। इसके अलावा टी20 इंटरनेशनल में उन्होंने 2364 रन और 12 टेस्ट मैचों में कुल 699 रन बनाए थे। वह आज के दौर की सुपरस्टार हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना जैसी प्लेयर्स रोल मॉडल हैं।

2. साइना नेहवाल 

आज बैडमिंटन में भारत के पास प्लेयर्स की पूरी फौज है। लेकिन जब हरियाणा के हिसार की रहने वाली साइना नेहवाल ने बैडमिंटन की दुनिया में कदम रखा, तो इस खेल में भारत महाशाक्ति नहीं था। बैडमिंटन में तब चीन का दबदबा था और उन्होंने चीन की दीवार को तोड़ा और बैडमिंटन के कोर्ट में चीनी प्लेयर्स को धूल चटानी शुरू की। उन्होंने लंदन ओलंपिक 2012 में तो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास ही रच दिया। वह बैडमिंटन में ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय प्लेयर बनीं। इसके अलावा बैडमिंटन रैंकिंग में उन्होंने पहला स्थान भी हासिल किया। उन्होंने बैडमिंटन में भारत में वह नींव डाली, जिस पर बाद में पीवी सिंधु ने महल खड़ा किया। नेहवाल ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी दो मेडल जीते। इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके नाम पर तीन गोल्ड मेडल दर्ज हैं।

3. पीटी उषा 

केरल के कोझिकोड में जन्मीं पीटी उषा ने उस समय ट्रैक एंड फील्ड में अपना नाम बनाया, जब लड़कियों को खेल के मैदान पर इतनी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। वह महान धावक रही हैं और आज वह करोड़ों लड़कियों को प्रेरित कर खेल के मैदान की तरफ मोड़ चुकी हैं। उन्होंने अपने करियर में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की। लेकिन जिस एक चीज के लिए उन्हें सबसे ज्यादा याद किया जाता है, जो उन्होंने जीता ही नहीं है। लॉस एंजिल्स 1984 ओलंपिक में वह 400 मीटर हर्डल रेस में वह चौथे स्थान पर रही थीं और सेकेंड के 100वें हिस्से से ब्रॉन्ज मेडल जीतने चूक गई थीं। भले ही वह मेडल नहीं जीत पाई हों, लेकिन यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। वह उड़न परी के नाम से फेमस रही हैं। अभी वह इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की चीफ हैं और राज्य सभा सदस्य भी हैं।

4. मैरी कॉम 

मैरी कॉम ने बॉक्सिंग की रिंग में ऐसे पंच लगाए, जिससे उनके विरोधी उनके सामने चारों खाने चित हो गए। ओलंपिक रहा हो, वर्ल्ड चैंपियनशिप रही हो। हर बार वह विजेता बनकर उभरी। उन्होंने पूरी दुनिया में तिरंगा लहराया और अपनी काबिलियित के दम पर सफलता हासिल की। मैरी कॉम ने बॉक्सिंग में वह नींव डाली, जिससे प्रेरित होकर लवलीना बोरगोहेन जैसी प्लेयर मुक्केबाजी में आईं। उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में कुल 8 मेडल जीते। इसके अलावा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके नाम पर एक-एक पदक दर्ज है। उन्होंने लंदन ओलंपिक 2012 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था और वह मुक्केबाजी में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला प्लेयर बनी थीं।

5. कर्णम मल्लेश्वरी

कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला प्लेयर हैं। उन्होंने सिडनी ओलंपिक 2000 में वेटलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। उन्होंने ओलंपिक मेडल जीतकर भारत की तमाम महिलाओं के लिए खेलों में दरवाजे खोल दिए। आंध्र प्रदेश की रहने वाली मल्लेश्वरी ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी दो गोल्ड मेडल जीते। बाद में खेलों में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें खेल रत्न और पदम श्री अवॉर्ड से सम्मानित किया था।

कौन सा देश सबसे पहले महिलाओं को मतदान का अधिकार देने वाला बना था ? जानिए कैसे मिला वोटिंग का राइट

दुनिया भर में आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं। एक समय था जब महिलाओं को मतदान तक का अधिकार नहीं होता था। हालांकि अब महिलाओं को मतदान का अधिकार मिलने की वजह से अब महिलाओं से जुड़ें मुद्दों पर भी खास ध्यान रखा जाता है। महिलाओं को सबसे मतदान का अधिकार देने वाले देश की बात करें तो यह न्यूजीलैंड हैं। साल 1893 में न्यूजीलैंड ने पहली बार महिलाओं को मतदान का अधिकार प्रदान किया। महिलाओं को मतदान का अधिकारी देना एक महत्वपूर्ण कदम था, जो न केवल महिलाओं के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक नए युग की शुरुआत थी। इसके साथ ही महिलाओं के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक अधिकारों को सम्मान मिला।

महिलाओं ने उठाई आवाज

बता दें कि महिलाओं के लिए मतदान का अधिकार प्राप्त करने के संघर्ष का इतिहास बहुत लंबा और कठिन था। 19वीं शताब्दी में महिलाओं को समाज में केवल घरेलू कार्यों तक सीमित रखा गया था। उनका कोई अधिकार नहीं था, न तो शिक्षा में और न ही राजनीति में। लेकिन समय के साथ, महिलाओं ने अपनी स्थिति में सुधार के लिए आवाज उठानी शुरू की। महिलाएं अपने अधिकारों के लिए संगठित होनी लगीं, और उन्हें यह महसूस हुआ कि वे समाज के समान हिस्सेदार हैं और उन्हें भी अपने देश के भविष्य के बारे में निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।

न्यूजीलैंड ने दिया वोटिंग का अधिकार

न्यूजीलैंड में महिलाओं के मतदान अधिकार के लिए संघर्ष की शुरुआत 19वीं शताब्दी के अंत में हुई। न्यूजीलैंड में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू हुआ था, और इस संघर्ष में प्रमुख भूमिका निभाई थी कैटरीना स्टीवंस और एमिली सॉकर जैसी महिला नेताओं ने। ये महिला नेता महिलाओं को मतदान का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष कर रही थीं और इस आंदोलन को “सफ्रिजेट मूवमेंट” के रूप में जाना जाता है। इस संघर्ष ने धीरे-धीरे सरकार और समाज के भीतर महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए। आखिरकार, न्यूजीलैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री रिचर्ड सोडेन के नेतृत्व में 19 सितंबर 1893 में महिलाओं को मतदान का अधिकार देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।

महिलाओं ने शांतिपूर्वक चलाया आंदोलन

यह आंदोलन एक प्रेरणादायक उदाहरण बना, जिसने बाद में अन्य देशों को भी महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने के लिए प्रेरित किया। इन महिलाओं ने अपने संघर्ष को बिना हिंसा और संघर्ष के, शांति से चलाया। कठिन संघर्ष और विभिन्न आंदोलनों के बाद न्यूजीलैंड में 1893 में महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला। यह घटना न केवल न्यूजीलैंड के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए ऐतिहासिक थी। इस अधिकार को पाने के लिए कई वर्षों तक महिलाओं ने निरंतर संघर्ष किया, और अंत में उनकी मेहनत रंग लाई। न्यूजीलैंड ने यह कदम उठाकर अन्य देशों को दिखाया कि महिलाओं को उनके अधिकार देना समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है।

मतदान के अधिकार का महत्व

महिलाओं को मतदान का अधिकार मिलने के बाद, उनका राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन बदल गया। उन्होंने राजनीति में सक्रिय भाग लिया और धीरे-धीरे उनके प्रतिनिधित्व में वृद्धि हुई। यह महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। न्यूजीलैंड के बाद, कई अन्य देशों ने भी महिलाओं को मतदान का अधिकार देने की प्रक्रिया शुरू की। इसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल हैं। भारत में 1950 में संविधान लागू होने के साथ ही पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी वोट डालने का अधिकार मिल गया था। न्यूजीलैंड की यह पहल आज भी पूरे विश्व में महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि यदि महिलाओं को बराबरी का मौका दिया जाए, तो वे समाज की प्रगति में सक्रिय योगदान कर सकती हैं।

महिला दिवस 2025: दुनिया का पहला कंप्यूटर प्रोग्राम इस महान महिला ने लिखा था

महिलाओं के काम, सम्मान और अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए आठ मार्च को ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ मनाया दिवस मनाया जाता है। इस दिन हम उन महिलाओं को भी याद करते हैं, जिन्होंने अपने समय से आगे निकलकर कुछ ऐसा किया था, जिससे पूरी मानव सभ्यता का भला हुआ और समाज में महिलाओं की अहमियत भी बढ़ी। एडा लवलेस भी उन महिलाओं में से एक हैं, जिन्हें मानव सभ्यता हमेशा याद रखेगी। दुनिया की पहली कंप्यूटर प्रोग्रामर और गणितज्ञ एडा लवलेस ने तकनीकी दुनिया में महिलाओं के लिए एक नई राह खोलकर इतिहास रचा था। उनकी दूरदर्शिता और प्रतिभा ने आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान की नींव रखी।

एडा लवलेस का जीवन परिचय

एडा लवलेस का जन्म 10 दिसंबर, 1815 को लंदन में हुआ था। उनका पूरा नाम ऑगस्टा एडा बायरन था। वह प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बायरन की पुत्री थीं, लेकिन उनकी मां एनी इसाबेला मिलबैंक ने उन्हें गणित और विज्ञान की शिक्षा दिलाने पर जोर दिया, ताकि वह अपने पिता की आदतों से दूर रहें। इस वजह से गणित और तर्कशास्त्र में एडा की गहरी रुचि बन गई। एडा के जन्म के कुछ समय बाद ही उनके माता-पिता अलग हो गए थे और जब वह आठ साल की थीं, तब उनके पिता की मौत हो गई। हालांकि, एडा का लगाव अपने पिता के प्रति काफी गहरा था और उन्होंने अपने बेटों का नाम अपने पिता के ऊपर ही रखा।

एनालिटिकल इंजन और प्रोग्रामिंग की शुरुआत

एडा लवलेस गणित की होनहार छात्रा थीं और इस वजह से कई वैज्ञानिकों के साथ उनकी जान-पहचान होती चली गई। उन्होंने चार्ल्स बैबेज के साथ मिलकर काम किया, जो “एनालिटिकल इंजन” के आविष्कारक थे। यह मशीन आज के समय में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर का शुरुआती रूप थी, जिसमें काफी सीमित क्षमताएं थीं। इस समय पर कंम्यूटर महज एक कैलकुलेटर की तरह काम करता था। एडा ने इस मशीन के लिए एक एल्गोरिदम विकसित किया, जिसे दुनिया का पहला कंप्यूटर प्रोग्राम माना जाता है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कंप्यूटर केवल संख्याओं की गणना करने वाली मशीन नहीं है, बल्कि इसे किसी भी तरह के डेटा को प्रोसेस करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

एडा ने अपने नोट्स में यह भी भविष्यवाणी की थी कि भविष्य में कंप्यूटर संगीत बनाने, ग्राफिक्स डिजाइन करने और वैज्ञानिक अनुसंधान में मदद करने में सक्षम होंगे। उनकी यह दूरदर्शिता आज की डिजिटल दुनिया में सच साबित हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि पहला कंम्प्यूटर प्रोग्राम चार्ल्स बैबेज ने ही बनाया था, लेकिन उनका जोर गणित पर ज्यादा था, जबकि एडा इसके परे कम्प्यूटर की क्षमताओं को भांप रही थीं। इसी वजह से प्रोग्रामिंग लैग्वेज ‘एडा’ का नाम इस वैज्ञानिक के ऊपर है।

महिला दिवस और एडा लवलेस की प्रासंगिकता

एडा ने 19वीं सदी में तकनीकी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इस समय महिलाओं के लिए शिक्षा और करियर के अवसर सीमित थे। एडा की उपलब्धियां आज भी महिलाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। एडा लवलेस की विरासत को सम्मान देने के लिए हर साल अक्टूबर में “एडा लवलेस दिवस” मनाया जाता है, जो विज्ञान और गणित जैसे क्षेत्र में महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाता है।