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वियना: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुर्तगाल और स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पूर्ण कर स्वदेश लौटीं

 भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुर्तगाल और स्लोवाकिया की यात्रा पूरी करने के बाद स्वदेश रवाना हो गई हैं। उनकी यह यात्रा कई मामलों में ‘‘ऐतिहासिक’’ रही है। बता दें कि करीब तीन दशकों में भारत के किसी राष्ट्रपति की दोनों देशों की यह पहली यात्रा थी। इससे आप इस दौरे के महत्व का अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं। द्रौपदी मुर्मू से पहले आखिरी बार किसी भारतीय राष्ट्रपति ने 29 साल पहले स्लोवाकिया का दौरा किया था, जबकि पुर्तगाल की यात्रा 27 साल के अंतराल के बाद हुई है।

राष्ट्रपति मुर्मू इन दोनों देशों में चार दिवसीय यात्रा पर रहीं। अब अपना दौरा समाप्त करने के बाद वह वापस लौट रही हैं। वह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन बंभानिया और संसद धवल पटेल व संध्या रे के साथ विमान से नयी दिल्ली रवाना होने के लिए ब्रातिस्लावा से सड़क मार्ग से यहां पहुंचीं हैं। इसके बाद वह हवाई मार्ग से नई दिल्ली आ जाएंगी। राष्ट्रपति ने यात्रा के पहले चरण में पुर्तगाल पहुंची थीं। इसके बाद वह स्लोवाकिया गईं।

द्विपक्षीय संबंधों पर हुई वार्ता

राष्ट्रपति मुर्मू ने यात्रा के दूसरे चरण में स्लोवाकिया पहुंची थीं। यहां राष्ट्रपति ने अपने स्लोवाकिया के समकक्ष पीटर पेलेग्रिनी, प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको, संसद के अध्यक्ष सहित विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की और आपसी सहयोग के कई मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान स्लोवाकिया और भारत ने अंतरिक्ष और कृत्रिम मेधा (एआई) जैसे उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में आगे के अवसरों की खोज की। विदेश मंत्रालय के सचिव तन्मय लाल ने कहा, ‘‘शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सहयोग मजबूत हुआ है। उन्होंने कहाकि हमारे देशों के बीच पर्यटन बढ़ रहा है। ‘‘अगर हम भारत और स्लोवाकिया के बीच आर्थिक संबंधों को देखें तो व्यापार तेजी से बढ़ रहा है।

5 साल में 3 गुना बढ़ा व्यापार

स्लोवाकिया ने कहा कि भारत के साथ उसका व्यापार गत 5 साल में तीन गुना बढ़कर 1.3 अरब यूरो के आसपास हो गया है। बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति ने ब्रातिस्लावा से 100 किलोमीटर दूर नित्रा में डिस्कवरी और डिफेंडर मॉडल के वाहनों का उत्पादन करने वाले टाटा मोटर्स जेएलआर संयंत्र का दौरा किया। वहां उन्होंने भारतीय कर्मचारियों से मुलाकात की और उनका हालचाल लिया। द्रौपदी मुर्मू के साथ स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पेलेग्रिनी भी उनके साथ मौजूद थे। दोनों नेता उस जगह पर भी गए जहां कारों को तैयार किया जा रहा था। मुर्मू को नित्रा स्थित ‘कॉन्स्टेंटाइन द फिलॉसफर यूनिवर्सिटी’ द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

लंदन:एक ओर ब्रिटेन ने यूक्रेन को सैन्य सहायता देने का किया ऐलान, तो दूसरी ओर यूक्रेन पहुंचे प्रिंस हैरी – जानिए क्या है पूरा मामला

रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग में हजारों की संख्या में लोग घायल हुए हैं। जंग जारी है और अब ब्रिटेन ने यूक्रेन के लिए बड़ी सैन्य सहायता का ऐलान कर दिया है। इस बीच ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय के छोटे बेटे युवराज हैरी अचानक यूक्रेन पहुंच गए। प्रिंस हैरी ने यहां रूस के साथ जारी युद्ध में घायल यूक्रेनी लोगों से मुलाकात की। हैरी ने इस दौरान लवीव में ऑर्थोपेडिक क्लीनिक ‘सुपरह्यूमन्स सेंटर’ का भी दौरा किया। इस सेंटर में घायल सैन्य कर्मियों और नागरिकों का इलाज किया जाता है।

युवराज हैरी क्यों पहुंचे यूक्रेन

युवराज हैरी की यात्रा का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि युद्ध के बीच लोगों की शीर्ष-स्तरीय सेवाएं मिलें। ‘सुपरह्यूमन्स सेंटर’ में कृत्रिम अंग, सर्जरी से जुड़ी सलाह और मनोवैज्ञानिक सहायता निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। युवराज हैरी की पश्चिमी यूक्रेन की यात्रा के संबंध में जानकारी तब दी गई जब वो वहां से रवाना हो गए।

ब्रिटिश सेना में कर चुके हैं काम 

बता दें कि, प्रिंस हैरी ब्रिटिश सेना में 10 साल सेवाएं दे चुके हैं और अब उन्होंने घायल सैनिकों की मदद के लिए काम करते हैं। युवराज हैरी ने 2014 में ‘इनविक्टस गेम्स’ की स्थापना की थी जिससे घायल सैनिकों को पैरालिंपिक जैसे खेल आयोजनों में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिल सके। ‘इनविक्टस गेम्स’ के बारे में प्रचलित है कि यह चोट के बाद के जीवन के बारे में है।

यूक्रेन जाने वाले शाही परिवार के दूसरे सदस्य हैं हैरी

अपनी यात्रा के दौरान हैरी ने यूक्रेन के पूर्व सैनिकों के मामलों की मंत्री नतालिया कलमीकोवा सेभी मुलाकात की। हैरी (40) यूक्रेन की यात्रा करने वाले शाही परिवार के दूसरे सदस्य हैं। उनकी रिश्तेदार एवं डचेस ऑफ एडिनबर्ग सोफी ने पिछले साल कीव की यात्रा की थी।

भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का जातिवाद की राजनीति करने पर सपा पर सीधा निशाना: बोले- समाजवाद नहीं, समाज का घात है, पीडीए में सामान्य वर्ग का न स्थान न ही सम्मान, ना पछतावा, ना शर्म! बस जातिवाद की राजनीति

भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का जातिवाद की राजनीति करने पर सपा पर सीधा निशाना: बोले- समाजवाद नहीं, समाज का घात है, पीडीए में सामान्य वर्ग का न स्थान न ही सम्मान, ना पछतावा, ना शर्म! बस जातिवाद की राजनीति
भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का जातिवाद की राजनीति करने पर सपा पर सीधा निशाना: बोले- समाजवाद नहीं, समाज का घात है, पीडीए में सामान्य वर्ग का न स्थान न ही सम्मान, ना पछतावा, ना शर्म! बस जातिवाद की राजनीति
भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का जातिवाद की राजनीति करने पर सपा पर सीधा निशाना: बोले- समाजवाद नहीं, समाज का घात है, पीडीए में सामान्य वर्ग का न स्थान न ही सम्मान, ना पछतावा, ना शर्म! बस जातिवाद की राजनीति
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने सपा पर पीडीए के नाम पर सामान्य वर्ग की उपेक्षा का आरोप लगाया।
  • ट्वीट में उन्होंने समाजवादी पार्टी को “जातिवाद की राजनीति” करने वाला बताया।
  • ‘समाजवाद नहीं, समाज का घात है’ कहकर उन्होंने सपा की वैचारिक दिशा पर सवाल उठाए।
  • उन्होंने पूछा कि “21वीं सदी की सोच कब अपनाएगी समाजवादी पार्टी?”
  • राणा सांगा पर सपा सांसद के बयान को लेकर डॉ. सिंह ने पार्टी की चुप्पी पर आक्रोश जताया।

लखनऊ, 11 अप्रैल 2025: सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी की जातिवादी राजनीति पर एक तीखा,प्रहार करते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा द्वारा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति के नाम पर समाज को केवल विभाजित किया गया है, और सामान्य वर्ग की लगातार उपेक्षा की गई है।

अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल से जारी संदेश में डॉ. सिंह ने लिखा:

“ना पछतावा, ना शर्म — बस जातिवाद की राजनीति!
कभी रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले,
कभी औरंगजेब के समर्थकों के साथ,
कभी राणा सांगा जी को गालियां देने वालों,
तो कभी प्रभु राम की निंदा करने वालों के साथ…!!”

सरोजनीनगर विधायक ने यह भी जोड़ा कि सपा की राजनीति समाजवाद के नाम पर समाज को तोड़ने का काम कर रही है। जिसमें न विकास का सपना है, न समरसता की भावना। उन्होंने कहा ”यह समाजवाद नहीं, यह ‘समाज का घात’ है”

“जिसने प्रदेश को पीछे धकेला,
और देश को कमजोर कर रहे,
जिनके पीडीए में सामान्य वर्ग का कोई स्थान नहीं, कोई सम्मान नहीं है!

केवल बांटने की नीति,
तुष्टिकरण की राजनीति,
यही समाजवादी सोच का प्रमाण है।”

अपने ट्वीट के अंतिम हिस्से समाजवादी पार्टी पर तंज करते हुए विधायक ने लिखा :

“मुझे उस दिन का इंतज़ार है,
जब समाजवादी पार्टी जातिवाद की ज़ंजीर तोड़ेगी, 21वीं सदी की सोच अपनाएगी,
डिजिटल युग के अनुकूल कुछ बात करेगी।

पर अभी तो…
ना विकास का सपना, ना समरसता की धार,
सिर्फ़ जाति की गिनती, और वोट का हिसाब,
जातिवाद, जातिवाद और जातिवाद,
यही समाजवादी पार्टी का असली रूप है !!”

डॉ. सिंह का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब समाजवादी पार्टी के एक राज्यसभा सांसद द्वारा राणा सांगा पर दिए गए विवादित बयान पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा अपनी पार्टी के नेता का यह कहकर बचाव किया गया कि उक्त वक्तव्य को राज्यसभा को कार्यवाही से निकाल दिया गया। सपा प्रमुख के बयान से एक बार फिर राणा सांगा पर आस्था रखने वाले वर्ग को निराशा ही हाथ लगी है।

उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विभाग की योजनाओं की समीक्षा के साथ ही एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के विस्तार और सामुदायिक खेती को बढ़ावा देने पर की चर्चा

उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विभाग की योजनाओं की समीक्षा के साथ ही एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के विस्तार और सामुदायिक खेती को बढ़ावा देने पर की चर्चा
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विभाग की योजनाओं की समीक्षा के साथ ही एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के विस्तार और सामुदायिक खेती को बढ़ावा देने पर की चर्चा
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विभाग की योजनाओं की समीक्षा के साथ ही एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के विस्तार और सामुदायिक खेती को बढ़ावा देने पर की चर्चा
  • किसानों की समृद्धि के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ज़ोर
  • किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए लापरवाही बरतने वालों को चेतावनी

लखनऊ, 11 अप्रैल, 2025: प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिनेश प्रताप सिंह ने शुक्रवार को उद्यान निदेशालय के सभागार में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की बिंदुवार गहन समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक में मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उद्यान विभाग द्वारा किसानों की उत्तरोत्तर समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मंत्री श्री सिंह ने कहा कि उद्यान विभाग राज्य के किसानों को आधुनिक और लाभकारी कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में योजनाओं के तहत हुए क्षेत्रफल विस्तार और प्रगति की तुलनात्मक समीक्षा करते हुए वर्ष 2025-26 के लिए लक्ष्यों को निर्धारित करने पर जोर दिया। प्रदेश में फूल, मसाला और औषधीय खेती की फसलों के क्षेत्रफल को जलवायु क्षेत्र के अनुरूप बढ़ाया जाए, जिसके लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि औद्यानिक खेती से कम क्षेत्रफल में अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है, जो किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

श्री सिंह ने निर्देश दिया कि प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान चलाकर योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने निदेशालय स्तर पर अनुभागवार समीक्षा करते हुए सभी योजना प्रभारियों को किसान हित में सकारात्मक और प्रभावी तरीके से योजनाओं को लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही, जनपदों से नियमित रिपोर्ट तैयार करने और सुधारात्मक कदम उठाने पर भी बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि माननीय न्यायालय में लंबित प्रकरणों का पक्ष ठीक से प्रस्तुत कर उनका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा, प्रदेश के सार्वजनिक और अलंकृत उद्यानों को और अधिक सुंदर बनाकर विभाग की छवि को मजबूत करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने कहा कि कार्मिक बिना अवकाश स्वीकृति के मुख्यालय से बाहर नहीं रहें, ताकि कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। उन्होंने कम प्रगति वाले जनपदों के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसान हित में लापरवाही बरतने वालों को किसी भी सूरत में माफ नहीं किया जाएगा। बैठक में इस वर्ष एकीकृत बागवानी विकास मिशन के सभी जनपदों में विस्तार और उससे किसानों को होने वाले लाभ पर भी चर्चा हुई। औद्यानिक खेती के क्षेत्रफल विस्तार और सामुदायिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। इसके लिए मंडलीय गोष्ठियों का आयोजन कर किसानों को जागरूक करने की योजना बनाई गई है।

समीक्षा के दौरान ड्रिप और मोर-क्रॉप माइक्रोइरिगेशन योजना, एकीकृत बागवानी विकास मिशन, 30 नैनो एनएचएम, जनपदों की औद्यानिक विकास परियोजना, हाईटेक नर्सरी, अनुसूचित जाति/जनजाति कृषकों के लिए औद्यानिक विकास योजना, गुणवत्तायुक्त पान उत्पादन को प्रोत्साहन योजना, राजकीय पौधशालाओं पर पौध उत्पादन एवं वितरण, वृक्षारोपण कार्यक्रम, फलपट्टियों के विकास, आलू एवं शाकभाजी प्रक्षेत्रों, नमामि गंगे, गंगा के तटवर्ती औद्यानिक विकास योजना, बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र में औद्यानिक विकास योजना तथा उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सभी योजनाओं को तुलनात्मक रूप से प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उचित दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण अपर मुख्य सचिव बी. एल. मीणा, निदेशक उद्यान वी. बी. द्विवेदी, संयुक्त निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भौतिक और वर्चुअल रूप से उपस्थित रहे।

वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में माध्यमिक शिक्षा विभाग निभा रहा अहम योगदान, शिक्षा केवल शैक्षिक दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक समृद्धि की नींव है: माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी

वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में माध्यमिक शिक्षा विभाग निभा रहा अहम योगदान, "माध्यमिक शिक्षा केवल शैक्षिक दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक समृद्धि की नींव है": माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी
वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में माध्यमिक शिक्षा विभाग निभा रहा अहम योगदान, "माध्यमिक शिक्षा केवल शैक्षिक दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक समृद्धि की नींव है": माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी
वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में माध्यमिक शिक्षा विभाग निभा रहा अहम योगदान, "माध्यमिक शिक्षा केवल शैक्षिक दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक समृद्धि की नींव है": माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी
  • माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
  • नए शैक्षिक सत्र में नामांकन अभियान चलाकर कक्षा-08 पास छात्रों को जोड़ा जाएगा।
  • विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब, ICT लैब और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
  • 635 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा और 315 स्कूलों को प्रोजेक्ट प्रवीण से जोड़ा गया है।
  • अप्रयुक्त भूमि पर खेल मैदान, पुस्तकालय, वेधशाला व डिजिटल केंद्र बनाए जाएंगे।

लखनऊ, 11 अप्रैल 2025 : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर अग्रसर करने की दिशा में माध्यमिक शिक्षा विभाग एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में कार्य कर रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधारभूत ढांचे का विकास, डिजिटल नवाचार, व्यावसायिक शिक्षा तथा स्किल डेवलपमेंट जैसे बहुआयामी प्रयासों के माध्यम से विभाग प्रदेश की युवा शक्ति को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने के लिए सक्रिय है।

इसी क्रम में शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, लखनऊ में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती गुलाब देवी ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और नवाचार को प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य का कोई भी छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रह जाए।

प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता

मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि 01 अप्रैल, 2025 से आरंभ हुए नए शैक्षिक सत्र के साथ ही यह अत्यंत आवश्यक है कि माध्यमिक स्तर पर सभी छात्र-छात्राओं का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मंडलीय और जनपदीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यालयों का नियमित निरीक्षण और अनुश्रवण गंभीरता से किया जाए। मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर से साप्ताहिक व मासिक समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाए ताकि योजनाओं की प्रगति पर निरंतर निगरानी बनी रहे।

उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा विभाग केवल शैक्षिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक समृद्धि की नींव है। इसीलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि कक्षा-08 पास कोई भी छात्र माध्यमिक शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग से भी समन्वय बनाया जाए।

अवसंरचना विकास की दिशा में ठोस कार्ययोजना

मंत्री ने बताया कि प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की अप्रयुक्त भूमि का उपयोग अब खेल के मैदान, मिनी स्टेडियम, बागवानी केंद्र, डिजिटल पुस्तकालय, कौशल विकास केंद्र, ऑडिटोरियम और वेधशाला जैसे नवाचारी ढांचों के निर्माण में किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को समग्र विकास के अवसर मिलेंगे और शिक्षा अधिक व्यावहारिक और उपयोगी सिद्ध होगी।

उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश के 101 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब की स्थापना की जा चुकी है, और अन्य विद्यालयों में चरणबद्ध कार्य चल रहा है। साथ ही, 578 विद्यालयों में आईसीटी लैब की स्थापना से विद्यार्थियों को डिजिटल साक्षरता से जोड़ा गया है।

व्यावसायिक शिक्षा को मिल रहा बढ़ावा

राज्य में 635 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है। प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत 315 विद्यालयों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जोड़ा गया है। साथ ही राजकीय आईटीआई को स्किल हब के रूप में विकसित कर उन्हें निकटवर्ती माध्यमिक विद्यालयों से जोड़ा जा रहा है। गोरखपुर में कौशल प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण किया जा चुका है।

तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु 1236 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। विज्ञान शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए प्रथम चरण में 303 विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं और द्वितीय चरण में 18 विद्यालयों में नई प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। 488 विद्यालयों में पुस्तकालय कक्षों के निर्माण की योजना पर कार्य प्रगति पर है।

मूल्यांकन और मान्यता प्रक्रिया भी जारी

विद्यार्थियों की सीखने की दक्षता का मूल्यांकन यूनिट टेस्ट के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे उनकी शैक्षिक प्रगति की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके। साथ ही, प्रदेश के निजी विद्यालयों से प्राप्त प्रत्यावेदनों के परीक्षण और मान्यता की प्रक्रिया भी संचालित की जा रही है।

शिक्षा से आत्मनिर्भर और समृद्ध उत्तर प्रदेश का निर्माण

बैठक के समापन पर मंत्री गुलाब देवी ने दोहराया कि शिक्षा से ही आत्मनिर्भर और समृद्ध उत्तर प्रदेश का निर्माण संभव है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की भूमिका इस दिशा में निर्णायक है। उन्होंने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ करें।

उपस्थित अधिकारीगण

इस महत्वपूर्ण बैठक में विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा के.के. गुप्ता, उमेश चंद्र, महानिदेशक स्कूल शिक्षा सुश्री कंचन वर्मा, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. महेंद्र देव, अपर शिक्षा निदेशक सुरेंद्र कुमार तिवारी, अजय कुमार द्विवेदी, सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद भगवती सिंह सहित प्रदेश के सभी मंडलों के संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं उप शिक्षा निदेशक उपस्थित रहे।