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प्रेस क्लब में भाषा एवं प्रौद्योगिकी: अवधी के संदर्भ में विषयक विचार गोष्ठी का हुआ आयोजन

लखनऊ : भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर (कर्नाटक) एवं अवध भारती संस्थान, अर्जुनगंज (लखनऊ) के तत्वावधान में जुटे अवधिया लखनऊ। भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर (कर्नाटक) एवं अवध भारतीय संस्थान, अर्जुनगंज (लखनऊ) के तत्वावधान में “भाषा एवं प्रौद्योगिकी:अवधी के संदर्भ में” विषयक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

प्रेस क्लब में आयोजित इस विचार गोष्ठी में भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के विषय विशेषज्ञ डॉ सत्येन्द्र अवस्थी ने कहा कि आज के डिजिटल युग में भाषा और प्रौद्योगिकी के मध्य अच्छा सामंजस्य होना नितांत आवश्यक है। क्योंकि, भाषा जहां संचार का मूल माध्यम है। वहीं, प्रौद्योगिकी इस संचार को नया आयाम देती है। अवधी के कवियों, लेखकों, कलाकारों को डिजिटल फ्रेंडली बनना होगा।

अवध भारती संस्थान के अध्यक्ष डॉ राम बहादुर मिश्र ने कहा कि प्रौद्योगिकी की बड़ी आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए अवध भारती संस्थान, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) एवं भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर (कर्नाटक) ने इस विचार गोष्ठी का संयोजन किया है। हमें विश्वास है कि हमारी अवधी प्रौद्योगिकी सँग कदमताल करेगी। हम अवधी को प्रौद्योगिकी से जोड़ने के लिए अलग-अलग स्थानों पर कार्यशाला करेंगे। अब हमको आधुनिक तकनीक को अपनाना ही होगा।

यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के लखनऊ मण्डल अध्यक्ष शिव शरण सिंह गहरवार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि इस विचार गोष्ठी में अवधी भाषा के विकास, तकनीकी अनुप्रयोगों एवं उनके आपसी प्रभावों पर विचार-विमर्श किया गया। अवधी को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस उपाय करने होंगे। हवा-हवाई बातों से कोई नतीजा नहीं निकलेगा। यूपी से अवधी आराधकों का 50 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के दौरे पर जाना चाहिए।

इस विचार गोष्ठी के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार एवं अवधी आराधक नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने बताया कि अवध भारती संस्थान अबतक 200 पुस्तकें प्रकाशित कर चुका है। इसमें 20 किताबों को हिन्दी संस्थान, उप्र ने पुरस्कृत भी किया है। पिछले 35 साल में संस्थान ने भारत के विभिन्न राज्यों में ही नहीं, बल्कि 12 देशों में अवधी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के संवर्धन हेतु विभिन्न कार्यक्रम किये हैं। अब अवधी को प्रौद्योगिकी से समर्थ करने पर कार्य किया जा रहा।

“भाषा एवं प्रौद्योगिकी:अवधी के संदर्भ में” विषयक इस विचार गोष्ठी में विशिष्ट अतिथि द्वय केकेसी के प्रोफेसर डॉ सिद्धार्थ सिंह एवं कला वसुधा पत्रिका के सम्पादक शाखा बंदोपाध्याय ने बड़े सारगर्भित विचार रखे। वरिष्ठ पत्रकार एवं अवधी आराधक प्रेमकांत तिवारी ने अवधी को युवाओं से जोड़ने के कई उपाय सुझाए। वहीं, कल्चर दीदी कुसुम वर्मा ने बेटियों को समर्पित एक मार्मिक अवधी गीत प्रस्तुत किया।

गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विनय दास, प्रदीप सारँग, डॉ सत्या सिंह, प्रदीप तिवारी धवल, चित्रकार पप्पू अवस्थी, ओम मिश्रा, आदित्य शुक्ला बंजारा, संजय सांवरा, संदीप अनुरागी, प्रमोद यादव व गौरी शंकर वैश्य सहित कई प्रमुख अवधी साहित्यकार उपस्थित थे।

“शौर्य-2025” में दिखा जोश और जूनून: लखनऊ के बीकेटी स्थित एस.आर. ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस में खेलों का भव्य आयोजन

  • एस.आर. ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस, लखनऊ में दो दिवसीय वार्षिक खेल महोत्सव “शौर्य-2025” का भव्य आयोजन हुआ।
  • उपाध्यक्ष पियूष सिंह चौहान ने उद्घाटन कर खिलाड़ियों को प्रेरणा और मार्गदर्शन दिया।
  • SRIMT, SRMBS और SRMAIMS के 4000+ छात्रों ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
  • इनडोर और आउटडोर खेलों में फुटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन, दौड़, शतरंज जैसे विविध खेल शामिल रहे।
  • दौड़ स्पर्धाओं में अर्पिता, विवेक, शालू सहित कई छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पुरस्कार जीते।

लखनऊ : एस.आर. ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस, लखनऊ के परिसर में खेलों का उल्लास, उमंग और ऊर्जा से भरपूर दो दिवसीय वार्षिक खेल महोत्सव “शौर्य-2025” का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए मनोरंजन और प्रतिस्पर्धा का मंच था, बल्कि नेतृत्व, टीम भावना, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता को भी उजागर करने का एक प्रेरणास्पद अवसर बना।

उद्घाटन समारोह में प्रेरणा और प्रोत्साहन की बयार

इस भव्य खेल महोत्सव का शुभारंभ संस्थान के उपाध्यक्ष श्री पियूष सिंह चौहान की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा,

“खेल न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और जीवन मूल्यों को भी मजबूत बनाते हैं। ‘शौर्य’ जैसे आयोजनों से विद्यार्थियों के छिपे हुए हुनर को दिशा मिलती है और यही उनके समग्र विकास की नींव रखता है।”

उनकी इस प्रेरक बात ने मैदान में मौजूद हज़ारों छात्रों को गहराई से प्रेरित किया।

तीनों संस्थानों की सहभागिता और स्पर्धात्मक प्रदर्शन

इस आयोजन में एस.आर. ग्रुप के तीनों प्रमुख संस्थानों:

  • SRIMT (एस.आर. इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी)
  • SRMBS (एस.आर. एम. बिज़नेस स्कूल)
  • SRMAIMS (एस.आर.एस.आर.एम. इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज)
    से जुड़े 4000+ विद्यार्थियों ने पूरे जोश और जज्बे के साथ भाग लिया।

खेलों की विविधता: मैदान से मैडल तक

“शौर्य-2025” में इनडोर और आउटडोर दोनों प्रकार के खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें शामिल थे:

  • क्रिकेट
  • वॉलीबॉल
  • बास्केटबॉल
  • कबड्डी
  • फुटबॉल
  • खो-खो
  • बैडमिंटन
  • टेबल टेनिस
  • कैरम
  • शतरंज
  • रस्साकशी

हर खेल में विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर अपनी टीम और संस्थान का मान बढ़ाया।

खेल महोत्सव की शुरुआत: फुटबॉल में MBA vs CSE की जबरदस्त भिड़ंत

खेल आयोजन की शुरुआत रोमांचक फुटबॉल मुकाबले से हुई, जिसमें MBA और CSE टीमों के बीच दमदार प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। दर्शकों का उत्साह और खिलाड़ियों की रणनीति ने इसे यादगार बना दिया।

दौड़ प्रतियोगिताएं बनीं आकर्षण का केंद्र

ट्रैक पर भी छात्रों का जोश और जुनून कम नहीं था। 400 मीटर और 800 मीटर की दौड़ प्रतियोगिताओं में लड़कों और लड़कियों ने दमदार प्रदर्शन किया। परिणाम इस प्रकार रहे:

400 मीटर (गर्ल्स – फाइनल)

  • प्रथम स्थान: अर्पिता श्रीवास्तव (AIML, तृतीय वर्ष)
  • द्वितीय स्थान: कनिष्का चौरसिया (CS, प्रथम वर्ष)
  • तृतीय स्थान: मुस्कान (AIML, द्वितीय वर्ष)

800 मीटर (बॉयज़ – फाइनल)

  • प्रथम स्थान: विवेक शर्मा (EC, द्वितीय वर्ष)
  • द्वितीय स्थान: करण सिंह (BT, तृतीय वर्ष)
  • तृतीय स्थान: योगेश यादव (AI, द्वितीय वर्ष)

800 मीटर (गर्ल्स – फाइनल)

  • प्रथम स्थान: शालू (नर्सिंग, प्रथम वर्ष)
  • द्वितीय स्थान: श्रुति दीक्षित (IT, द्वितीय वर्ष)
  • तृतीय स्थान: पूजा चौहान (BT, प्रथम वर्ष)

शौर्य-2025: खेल और संस्कृति का संगम

खेल महोत्सव केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें विद्यार्थियों के बीच एकता, सहयोग और सौहार्द की भावना को भी बल मिला। आयोजन के समन्वयक ने जानकारी दी कि पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अनुशासन, समर्पण और सकारात्मकता के उच्च मानदंड प्रस्तुत किए।

‘शौर्य’ बना SR ग्रुप की प्रेरणादायक पहचान

‘शौर्य-2025’ ने यह प्रमाणित किया कि एस.आर. ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस केवल शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है।

“जहां खेल है, वहीं विजय है – और ‘शौर्य’ उसी जीत की ओर विद्यार्थियों का मार्ग प्रशस्त करता है।”

  • पियूष सिंह चौहान एसआर ग्रुप

युद्ध के बदलते आयामों पर डॉ. राजेश्वर सिंह की डिजिटल चेतना: “कीबोर्ड और कोड ही बनेंगे भविष्य की ढाल”

काशीराम कॉलोनियों की तस्वीर बदलने के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह ने सीएम को दिया प्रस्ताव: दलितों, वंचितों गरीबों की कॉलोनियां बनें स्मार्ट, निर्बल आय वर्ग कॉलोनियों के रूपांतर के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनें कमेटी
काशीराम कॉलोनियों की तस्वीर बदलने के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह ने सीएम को दिया प्रस्ताव: दलितों, वंचितों गरीबों की कॉलोनियां बनें स्मार्ट, निर्बल आय वर्ग कॉलोनियों के रूपांतर के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनें कमेटी
काशीराम कॉलोनियों की तस्वीर बदलने के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह ने सीएम को दिया प्रस्ताव: दलितों, वंचितों गरीबों की कॉलोनियां बनें स्मार्ट, निर्बल आय वर्ग कॉलोनियों के रूपांतर के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनें कमेटी

लखनऊ (सरोजनीनगर), 11 अप्रैल 2025: जब दुनिया के युद्ध के मोर्चे बदल गए हैं, तब देश की सुरक्षा, नेतृत्व और नीति निर्माण की सोच भी पुरानी नहीं रह सकती। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय एवं प्रखर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया पर एक अत्यंत गंभीर, दूरदर्शी और प्रेरणादायी संदेश के माध्यम से युवाओं को चेताया — “भविष्य के युद्ध: युवाओं के लिए एक आह्वान”। यह केवल एक संदेश नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय रणनीति का प्रारूप है, जो भारत के युवाओं को डिजिटल योद्धा बनने का मार्गदर्शन देता है।

युद्ध का नया चेहरा: बारूद नहीं, अब डेटा बन गया है हथियार

डॉ. सिंह ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि आज की दुनिया में युद्ध केवल बंदूक और मिसाइल से नहीं, बल्कि डाटा, सूचना, साइबर नेटवर्क और डिजिटल प्रभुत्व से लड़े जा रहे हैं। ऐसे में भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति युवा पीढ़ी की डिजिटल साक्षरता, साइबर सजगता और तकनीकी नेतृत्व है।

उन्होंने पांच ऐसे आधुनिक युद्धों का ज़िक्र किया, जिनसे न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित है:

1. साइबर युद्ध (Cyber Warfare)

उदाहरण:

  • वन्नाक्राय रैनसमवेयर (2017): 150 देशों में 2 लाख से अधिक कंप्यूटर ठप।
  • नॉटपेट्या अटैक: वैश्विक अर्थव्यवस्था को 10 अरब डॉलर की क्षति।
  • AIIMS दिल्ली पर साइबर हमला (2022): 1.3 टेराबाइट्स डेटा चोरी।
  • स्वच्छ भारत ऐप हैक: 1.6 करोड़ नागरिकों का डेटा लीक।

यह दर्शाता है कि आज हर देश की साइबर सुरक्षा ही उसकी असली सीमा सुरक्षा बन गई है।

2. व्यापार युद्ध (Trade War)

उदाहरण:

  • अमेरिका बनाम चीन: टैरिफ, बैन और तकनीकी वर्चस्व की जंग।
  • यूरोपीय संघ बनाम अमेरिका: आर्थिक तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा।

डॉ. सिंह के अनुसार, भविष्य की आर्थिक स्थिरता अब डिजिटल व्यापार और ई-गवर्नेंस पर निर्भर है।

3. सूचना युद्ध (Information Warfare)

उदाहरण:

  • 2016 अमेरिकी चुनाव: सोशल मीडिया के माध्यम से जनमत को प्रभावित करने का प्रयास।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध: सूचना अभियानों द्वारा भ्रम फैलाने और मनोबल तोड़ने का प्रयास।

यह दिखाता है कि “सूचना” अब केवल ज्ञान नहीं, एक प्रभावशाली हथियार बन चुकी है।

4. आर्थिक जासूसी (Economic Espionage)

उदाहरण:

  • चीन पर बौद्धिक संपदा चोरी के गंभीर आरोप।
  • अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के गुप्त डेटा की हैकिंग।

डॉ. सिंह ने जोर दिया कि “भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनने के लिए अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।”

5. मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare)

उदाहरण:

  • QAnon सिद्धांत: अमेरिका में लाखों युवाओं को भ्रमित किया।
  • फेक न्यूज़ और षड्यंत्र थ्योरीज: समाज को तोड़ने और भय का माहौल बनाने के उपकरण बन गए हैं।

डॉ. सिंह मानते हैं कि युवाओं की सोच को प्रभावित करने की यह रणनीति भविष्य की सबसे खतरनाक चुनौती हो सकती है।

डिजिटल साक्षरता: 21वीं सदी की आत्मरक्षा और नेतृत्व की कुंजी

डॉ. सिंह के अनुसार, डिजिटल जागरूकता केवल तकनीक सीखने तक सीमित नहीं है। यह आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और नेतृत्व का नया आधार है, जो तीन स्तंभों पर आधारित है:

  1. सशक्तिकरण (Empowerment): युवा तकनीक के सिर्फ उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनें।
  2. संरक्षण (Protection): साइबर हमलों, डेटा चोरी, हैकिंग और डिजिटल ठगी से स्वयं को सुरक्षित रखें।
  3. भागीदारी (Participation): डिजिटल अर्थव्यवस्था, ई-गवर्नेंस और स्मार्ट राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भाग लें।

सरोजनीनगर: डिजिटल क्रांति की प्रयोगभूमि

डॉ. सिंह का यह विचार केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यान्वित है। उनके नेतृत्व में सरोजनीनगर को डिजिटल क्रांति की मिसाल बनाया जा रहा है:

  • 30 डिजिटल पुस्तकालयों की स्थापना
  • 31 स्मार्ट पैनल बोर्ड
  • 13 रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा केंद्र
  • रोबोटिक्स और STEM प्रयोगशालाएं
  • बाल क्रीड़ा केंद्र और तारामंडल प्रयोगशाला
  • 1100+ विद्यार्थियों को लैपटॉप, टैबलेट, साइकिल वितरण

यह सब प्रमाणित करता है कि डॉ. सिंह केवल विचार नहीं रखते, उन्हें अमल में भी लाते हैं।

रणनीति नहीं, प्रेरणा है यह विचार

डॉ. सिंह का यह विचार न केवल सोशल मीडिया पोस्ट है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय नीति निर्माताओं, शिक्षकों, अभिभावकों और युवाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है।

“युद्ध के नए मैदानों में अब कीबोर्ड और कोड ही भारत की रक्षा करेंगे।”

यह दृष्टिकोण दिखाता है कि भविष्य का भारत केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सूचना और तकनीक से जीतेगा।

विशेषज्ञों की राय और वैश्विक दृष्टिकोण

  • एश्टन कार्टर (पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री): “युद्ध का भविष्य प्रौद्योगिकी के बारे में नहीं, बल्कि इसके प्रयोग के बारे में है।”
  • नेल्सन मंडेला: “आज के युवा, कल के नेता हैं – उन्हें समय के अनुसार तैयार होना चाहिए।”

डॉ. सिंह के विचारों को यह वैश्विक राय और भी मजबूत आधार देती है।

कीबोर्ड से युद्ध, कोड से निर्माण

डॉ. सिंह ने अंत में दोहराया:

“युवा अब कीबोर्ड से लड़ेंगे, कोड से देश गढ़ेंगे, और सूचना के मोर्चे पर भारत को अजेय बनाएंगे।”

यह नारा नहीं, बल्कि आगामी पीढ़ी की दिशा है।

Baby Diet: शिशु को ठोस आहार शुरू कराने से पहले जानें सही तरीका, पोषण मिलेगा भरपूर और सेहत भी रहेगी दुरुस्त

डॉक्टर बच्चे के जन्म के 6 महीने तक उनको सिर्फ मां का दूध पिलाने की सलाह देते हैं। क्योंकि नवजात बच्चे के लिए मां का दूध पौष्टिक और हेल्दी माना जाता है। जो बच्चे के विकास में सहायक होता है। लेकिन 6 महीने पूरे होने के बाद पेरेंट्स बच्चे की डाइट में धीरे-धीरे बदलाव करना शुरूकर देते हैं। वहीं जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वैसे-वैसे उनका पाचन तंत्र भी विकसित होता है। ऐसे में बच्चे की डाइट में सॉलिड फूड शामिल करना शुरूकर दिया जाता है। लेकिन ठोस आहार पर बच्चों की शुरूआत करने के सही तरीके के बारे में जानकारी होना जरूरी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि बच्चे को सॉलिड फूल कैसे खिलाना चाहिए।

शिशुओं को ठोस आहार खिलाने का सही तरीका

बच्चे का आहार उनकी सेहत और विकास में अहम भूमिका निभाता है। क्योंकि शुरूआत के 6 महीने बच्चा सिर्फ मां के दूध पर निर्भर रहता है। लेकिन 6 महीने के बाद आप बच्चे को ठोस आहार देना शुरूकर सकते हैं। जोकि उनके शारीरिक विकास और पोषण दोनों में महत्वपूर्ण होता है। लेकिन बच्चे के ठोस आहार की शुरूआत करने और इसके सही प्रोसेस को सही तरीके से समझना जरूरी है। जिससे कि बच्चे का पोषण सही तरीके से हो सके।

6-8 महीने के बच्चे को खिलाएं मसला हुआ खाना

वहीं 6 महीने के बच्चे की डाइट में आप धीरे-धीरे सॉलिड फूड शामिल कर सकते हैं। हालांकि इस समय तक उनका पाचन तंत्र पूरी तरह से मजबूत नहीं होता है, इसलिए उनको मुलायम और हल्का खाना देना चाहिए। आप बच्चे को सूप, दाल का पानी, स्टीम सब्जियां, चावल का पानी या फल आदि मसलकर दे सकती हैं।

7-8 महीने के बच्चे को खिलाएं थोड़ा गाढ़ा और बारीक प्यूरी

7-8 महीने के बच्चे को आप हल्का गाढ़ा और बारीक प्यूरी खिला सकते हैं। क्योंकि इस उम्र तक बच्चे के दांत निकलना शुरू हो जाते हैं। ऐसे में आप उनको हल्का ठोस खाना खिला सकते हैं। आप बच्चे को प्यूरी, उबली हई सब्जियां जैसे गाजर, मटर, आलू और फलों में केला, नाशपाती और सेब आदि खिला सकते हैं। यह खाना बच्चे की सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।

9-11 महीने के बच्चे को खिलाएं बारीक कटा हुआ खाना

जब बच्चा 9 महीने का हो जाता है तो आप उनकी डाइट में बारीक कटा खाना और ठोस आहार को शामिल कर सकते हैं। क्योंकि इस उम्र तक बच्चे के दांत और मसूढ़े मजबूत होने लगते हैं। जिससे वह ठोस आहार को चबाकर खा सकते हैं। आप 9 महीने के बच्चे के कटा हुआ फल, दलिया, सब्जियों के छोटे टुकड़े और रोटी आदि खिला सकते हैं।

12 से 24 महीने के बच्चे को खिलाएं घर का नॉर्मल खाना

बता दें कि जब बच्चा एक साल का हो जाता है, तो आप उसे धीरे-धीरे बड़े लोगों की तरह नॉर्मल खाना खिलाना शुरूकर सकते हैं। क्योंकि 1 साल के उम्र के बच्चों का पाचन तंत्र पहले से अधिक मजबूत हो चुका होता है। ऐसे में वह ऐसा खाना आसानी से पचा सकते हैं। वहीं आप एक साल के बच्चे को थाली के ज्यादा व्यंजन खिला सकते हैं। लेकिन बच्चे की सेहत का ध्यान रखकर उसे खिलाएं। वहीं आप उनको पानी और जूस जैसे तरल पदार्थ भी देते रहें, जिससे कि बच्चा हाइड्रेटेड रहे।

बेंगलुरु की हार का सबसे बड़ा जिम्मेदार बना ये खिलाड़ी, टीम को मुश्किल में डालकर खुद हो गया आउट।

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम आईपीएल का एक और मैच हार गई है। टीम ने जब बल्लेबाजी शुरू की तो काफी तूफानी शुरुआत मिली, लेकिन अचानक से मैच ने पलटा खाया और आरसीबी मुकाबले में काफी पीछे रह गई। आरसीबी की इस साल के आईपीएल में ये दूसरी हार है, ये हार काफी भारी पड़ सकती है।

विराट कोहली और फिल साल्ट ने दी अपनी टीम को तूफानी शुरुआत

आरसीबी बनाम दिल्ली कैपिटल्स के मैच में जब विराट कोहली और फिल साल्ट ओपनिंग के लिए आए तो टीम ने जोरदार शुरुआत की। खास तौर पर फिल साल्ट तो ऐसा लग रहा था कि हर बॉल पर चौका और छक्का लगाने के लिए ही मैदान में आए हैं। चार ओवर में टीम का स्कोर 61 रन तक जा पहुंचा था, तभी इसी स्कोर पर कोहली और साल्ट के बीच ​कुछ गलतफहमी हुई और साल्ट को रन आउट होकर वापस जाना पड़ा। इसके बाद तीसरे नंबर पर देवदत्त पडिक्कल ​कोहली का साथ देने के लिए आए। लेकिन अभी टीम के खाते में केवल 3 ही रन और जुड़ पाए थे कि तभी देवदत्त पडिक्कल भी आउट होकर चले गए।

देवदत्त पडिक्कल केवल एक ही रन बनाकर आउट हो गए

देव​दत्त पडिक्कल इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर मैदान में आए थे, लेकिन वे कोई इम्पैक्ट नहीं छोड़ पाए, बल्कि अपनी टीम की हार के कारण भी बन गए। उन्होंने आठ बॉल पर केवल एक ही रन बनाया। उनका स्ट्राइक रेट 12.50 का था। देवदत्त शायद भूल गए थे कि ये टी20 मैच है, टेस्ट नहीं। इतने कम स्ट्राइक रेट से तो कोई टेस्ट में भी बल्लेबाजी नहीं करता है। ​फिल साल्ट और विराट कोहली ने एक अच्छा स्टेज सेट कर देवदत्त पडिक्कल को दिया था, लेकिन वे वहां भी नाकाम ही साबित हुए। उनके आउट होने से कोहली भी प्रेशर में आ गए और वे भी 74 के स्कोर पर अपना विकेट गवां बैठे। कोहली ने 14 बॉल पर 22 रन की पारी खेली। इसके बाद टीम की गाड़ी पटरी से उतर गई।

अब तक ऐसा रहा है इस साल के आईपीएल में देवदत्त का प्रदर्शन

देवदत्त पडिक्कल अपनी टीम के लिए इस साल कुछ भी नहीं कर पाए हैं। पहले मैच में केकेआर के खिलाफ उन्होंने केवल 10 रन बनाए और दूसरे मैच में सीएसके के खिलाफ 27 रन बनाकर आउट हो गए। तीसरे मैच में जीटी के खिलाफ वे केवल चार ही रन बना पाए। चौथे मुकाबले में उन्होंने मुंबई इंडियंस के खिलाफ 37 रन ही बनाए। अब एक रन पर अपना विकेट लेकर चलते बने। साफ है कि गुरुवार का जो मैच आरसीबी की टीम हारी है, उसमें सबसे बड़ा योगदान देवदत्त पडिक्कल का है और वे हार के सबसे बड़े विलेन हैं। अगर देवदत्त 40 से 50 रन भी बना जाते तो टीम की ये दुर्दशा नहीं हुई होती।