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नागासाकी की बजाय जापान के इस शहर पर गिराया जाना था एटम बम; जानिए क्यों बदला गया लक्ष्य

द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में, 6 और 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के दो शहरों, ‘हिरोशिमा और नागासाकी’ पर परमाणु बम गिराकर इतिहास की सबसे भीषण तबाही मचाई थी। हिरोशिमा पर “लिटिल बॉय” और नागासाकी पर “फैट मैन” नामक बम गिराए गए, जिसमें लाखों लोग मारे गए और दोनों शहर राख में तब्दील हो गए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे पहले नागासाकी अमेरिका का निशाना नहीं था? दूसरा परमाणु बम असल में जापान के एक अन्य शहर पर गिराया जाना था लेकिन आखिरी वक्त में अमेरिका का निशाना बदल गया और उस शहर की जगह नागासाकी को तबाह कर दिया गया।

ये शहर था अमेरिका का पहला निशाना

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, अमेरिका ने जापान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने के इरादे से परमाणु बमों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी। हिरोशिमा पर पहला बम गिराने के बाद, दूसरा निशाना तय किया गया और वह टारगेट था जापान का कोकुरा शहर। कोकुरा उस समय जापान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर था, जहां बड़े पैमाने पर गोला-बारूद और हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां थीं। अमेरिका की रणनीति थी कि कोकुरा पर हमला करके जापान की सैन्य शक्ति को और कमजोर किया जाए। इसके लिए 9 अगस्त 1945 को बी-29 बॉम्बर विमान “बॉक्स कार” को “फैट मैन” बम के साथ कोकुरा की ओर रवाना किया गया।

कैसे बदला निशाना

9 अगस्त की सुबह, जब बी-29 विमान कोकुरा के ऊपर पहुंचा, तो वहां का मौसम खराब था। आसमान में घने बादल और धुआं छाया हुआ था, जिसके कारण पायलट मेजर चार्ल्स स्वीनी को टारगेट साफ तौर पर दिखाई नहीं दे रहा था। अमेरिकी सेना के नियमों के अनुसार, परमाणु बम को केवल विजन के आधार पर ही गिराया जाना था, ताकि सटीक निशाना लगाया जा सके। कई चक्कर लगाने के बाद भी जब कोकुरा पर हमला संभव नहीं हुआ, तो विमान में ईंधन की कमी होने लगी। ऐसे में, स्वीनी को दूसरा विकल्प चुनना पड़ा और वह विकल्प था नागासाकी।

बम गिरने से 74,000 लोग मारे गए

नागासाकी उस समय अमेरिका की सूची में वैकल्पिक निशाना था। यह एक बंदरगाह शहर था और औद्योगिक रूप से भी महत्वपूर्ण था, लेकिन कोकुरा की तुलना में कम प्राथमिकता वाला लक्ष्य था। मौसम की वजह से कोकुरा को निशाना बनाना संभव नहीं हुआ, और आखिरकार सुबह 11:02 बजे “फैट मैन” बम नागासाकी पर गिरा दिया गया। इस हमले में लगभग 74,000 लोग मारे गए, और शहर का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।

क्योटो भी था निशाने पर, लेकिन बच गया

यह जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका ने शुरुआत में जापान के क्योटो शहर को भी निशाने की सूची में शामिल किया था। क्योटो उस समय जापान की सांस्कृतिक राजधानी थी, जहां कई विश्वविद्यालय, उद्योग, और ऐतिहासिक धरोहरें थीं। लेकिन अमेरिकी युद्ध मंत्री हेनरी स्टिम्सन ने क्योटो को सूची से हटवा दिया। कारण था उनका निजी लगाव। स्टिम्सन ने अपनी पत्नी के साथ क्योटो में हनीमून मनाया था और इस शहर से उनकी कई यादें जुड़ी थीं। उनकी जिद के कारण क्योटो की जगह नागासाकी को सूची में शामिल किया गया। इस तरह, एक हनीमून की याद ने क्योटो को तबाही से बचा लिया, लेकिन नागासाकी को इसकी कीमत चुकानी पड़ी।

हमले की भयावहता

नागासाकी पर गिराया गया “फैट मैन” बम हिरोशिमा के “लिटिल बॉय” से भी ज्यादा शक्तिशाली था। यह बम जमीन से करीब 500 मीटर ऊपर फटा, जिसके कारण आग का एक विशाल मशरूमनुमा गोला आसमान में उठा। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि शहर का 70% औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह नष्ट हो गया। हालांकि, नागासाकी के आसपास पहाड़ों ने तबाही के दायरे को कुछ हद तक सीमित कर दिया, जिसके कारण हिरोशिमा की तुलना में नुकसान कम हुआ। फिर भी, इस हमले ने हजारों लोगों की जिंदगी छीन ली और आने वाली पीढ़ियों पर रेडियेशन का गहरा असर छोड़ा।

क्या कहते हैं इतिहासकार?

कई इतिहासकारों का मानना है कि जापान उस समय पहले ही हार के कगार पर था, और परमाणु बमों का इस्तेमाल शायद जरूरी नहीं था। कुछ का तर्क है कि अमेरिका ने इन हमलों के जरिए अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया और सोवियत संघ को एक संदेश देना चाहता था। वहीं, कुछ का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमन जापान को जल्द से जल्द आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना चाहते थे, ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके। इन हमलों के बाद, 15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया, और द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हो गया।

पाकिस्तान में आतंकियों को घेरे जाने के बाद दी गई आत्मसमर्पण की चेतावनी, नहीं माने तो तीन मारे गए

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शुक्रवार को प्रतिबंधित आतंकवादी समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के 3 आतंकवादी मारे गए। पंजाब पुलिस के आतंकवाद-रोधी विभाग (CTD) के एक बयान में कहा गया है कि उसे लाहौर से लगभग 325 किलोमीटर दूर मियांवाली जिले में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में सूचना मिली थी।

मिली थी खुफिया जानकारी

दी गई सूचना में बताया गया था कि ये आतंकवादी रहमानी खेल मोड़ के पास पुलिस चौकियों पर हमला करने की साजिश रच रहे थे। खुफिया जानकारी के आधार पर सीटीडी की टीम ने उनके (आतंकवादियों के) ठिकाने को घेर लिया और आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।

दो राइफल और कई कारतूस बरामद

बयान के अनुसार, ‘मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकवादी मौके पर ही मारे गए, जबकि उनके 6 साथी भागने में सफल रहे।’ बयान में कहा गया है कि आतंकवादियों के पास से दो राइफल और कई कारतूस बरामद किए गए हैं।

पुलिस चौकियों पर हमला करने की थी साजिश

आतंकवादियों ने पुलिस चौकियों पर हमला करने की साजिश रची थी। फरार आतंकवादियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। नवंबर 2022 में सरकार और टीटीपी के बीच संघर्ष विराम समझौते के टूटने के बाद पाकिस्तान में विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।

बन्नू जिले की पुलिस चौकी पर किया था हमला

इसी बीच उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पुलिस ने अपनी चौकी पर गुरुवार रात को एक दर्जन से अधिक भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के हमले को विफल कर दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि आतंकवादियों ने बन्नू जिले के मंडन इलाके में जांच चौकी पर हमला किया और उस पर कब्जा करने का प्रयास किया।

आतंकियों को पकड़ने के लिए सर्च अभियान

अधिकारी के अनुसार, पुलिस ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और हमलों को विफल कर दिया। हमले में एक कांस्टेबल घायल हुआ, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि बताया कि हमले के बाद पुलिस ने आतंकवादियों की तलाश में अभियान शुरू कर दिया।

एक्टर ने सोशल मीडिया पर साझा किया अपना दर्द, कहा – मुझे किया गया धोखा, उन्होंने तोड़ा मेरा भरोसा।

अभिनव शुक्ला ने एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में अपने फैंस को बताया है। उन्होंने हाल ही में एक ब्रांड के साथ काम करने के बाद अपना अनुभव शेयर किया। मशहूर टीवी एक्टर जो अक्सर अपने विचारों और राय की वजह से चर्चा में रहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर उनके साथ हुई दुखद घटना के बारे में खुलासा किया है। इंस्टाग्राम पर अभिनव के 1 मिलियन से अधिक फैन फॉलोइंग है और इन प्रशंसकों को सचेत करने के लिए रुबीना दिलैक के पति ने बताया कि उन्हें दो ब्रांड कंपनी ने धोखा दिया है और यहां तक ​​​​कि अब वह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने वाले हैं।

लाखों की ठगी का शिकार हुए अभिनव शुक्ला

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अभिनव शुक्ला ने अपने प्रशंसकों को सूचित किया कि वह अब उन दो ब्रांड्स के साथ नहीं जुड़े हैं। उन्होंने उनके साथ अपने सारे बिजनेस रिलेशन खत्म करने का कारण भी बताया और लिखा, ‘उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन किया है और मेरे पैसों के साथ गोलमाल किया है!’ एक्टर ने यह भी साझा किया कि वह कानूनी कार्रवाई करेंगे और कहा, ‘कानून के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे!’

बिश्नोई गिरोह के निशाने पर टीवी एक्टर

अभिनव शुक्ला टेलीविजन इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेताओं में से एक रहे हैं। कुछ दिनों पहले, एक्टर तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने अपने प्रशंसकों को बिश्नोई गिरोह के सदस्य से जान से मारने की धमकियां मिलने की जानकारी दी थी। यह विवाद तब हुआ जब बैटलग्राउंड पर रुबीना दिलैक और आसिम रियाज़ के बीच हुई लड़ाई ने सबका ध्यान खींचा। यह तमाशा तब और बढ़ गया जब अभिनव ने रुबीना के लिए अपना समर्थन दिखाते हुए आसिम की खिंचाई की। जिसके बाद, बिश्नोई गिरोह के एक सदस्य ने अभिनव और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी।

स्क्रीन से दूर बेटी की सेवा में एक्टर

काम की बात करें तो अभिनव शुक्ला कई शो जैसे ‘जाने क्या बात हुई’, ‘छोटी बहू’, ‘गीत- हुई सबसे पराई’, ‘एक हज़ारों में मेरी बहना है’, ‘दीया और बाती हम’, ‘बिग बॉस 14’ और ‘खतरों के खिलाड़ी 11’ कुछ का हिस्सा रहे हैं। निजी जीवन की बात करें तो, अभिनव शुक्ला ने 21 जून, 2018 को शिमला में रुबीना दिलैक के साथ शादी के बंधन में बंध गए। उन्होंने 27 नवंबर, 2023 को जुड़वां बच्चियों, एधा और जीवा का स्वागत किया। कपल अक्सर सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की झलकियां शेयर करते हैं। एक्टर बेटियों के जन्म के बाद से किसी भी टीवी सीरियल और शो में नजर नहीं आए हैं। वे इन दिनों एधा और जीवा की देखभाल में लगे हुए हैं।

विदेशी छात्रों के दाखिले पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर हार्वर्ड ने ट्रंप पर किया मुकदमा, जानिए पूरा मामला

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने ट्रंप के विदेशों छात्रों के एडमिशन को लेकर लगाए गए बैन को बोस्टन कोर्ट में चुनौती दी है और इसे व्हाइट हाउस की राजनीतिक मांगों की अवेहलना करने के लिए असंवैधानिक प्रतिशोध कहा है। हार्वर्ड ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई प्रथम संशोधन का उल्लंघन करती है और इसका ‘हार्वर्ड और 7000 से अधिक विदेशी छात्रों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।’

मुकदमे में क्या कहा गया?

हार्वर्ड ने अपने मुकदमे में कहा, अमेरिका की सरकार ने एक झटके से यूनिवर्सिटी के एक चौथाई विदेशी छात्र-छात्राओं को मिटाने की कोशिश की है, जो हमारे यूनिवर्सिटी मिशन में महत्वपूर्व योगदान देते हैं। आगे कहा कि वह होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट को यह कदम उठाने से रोकने के लिए एक अस्थायी निरोधक आदेश दायर करने की योजना बना रही है।

छात्रों में फैली अव्यवस्था

आगे मुकदमे में कहा कि इस कदम से ग्रेजुएट होने से कुछ दिन पहले ही परिसर में छात्रों के बीच परेशानी बढ़ गई है। प्रैक्टिकल क्लास लेने वाले, सिलेबस पढ़ाने वाले, प्रोफेसरों के सहायता करने वाले और हॉर्वर्ड के स्पोर्ट्स में भाग लेने वाले इंटरनेशनल स्टूडेट्स को इस फैसले के बाद यह तय करना है कि वे यूनिवर्सिटी से चले जाएं ले या देश में रहकर कानून प्रक्रिया का जोखिम उठाएं।

किन पर दिख रहा ज्यादा असर?

ट्रंप प्रशासन के फैसले का प्रभाव हार्वर्ड कैनेडी जैसे ग्रेजुएट स्कूलों पर सबसे ज्यादा दिख रहा है, यहां करीबन आधे से ज्यादा छात्र विदेशी मूल के हैं और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में करीब एक तिहाई विदेशी छात्र पढ़ रहे हैं।

यूनिवर्सिटी को बड़ा नुकसान

हार्वर्ड ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी को बड़े नुकसान में डाल रहा है, क्योंकि दुनिया के टॉपर स्टूडेंट यहां पढ़ते हैं। भविष्य में विदेशा मूल के छात्र यूनिवर्सिटी में आवेदन करने से पहले सोचेंगे क्योंकि सरकार हमसे बदला ले रही है। आगे हार्वर्ड ने कहा कि अगर सरकार की कार्रवाई जारी रहेगी तो उसे कम से कम 2 एकेडमिक सालों तक नए इंटरनेशनल छात्रों को एडमिशन देने से वंचित होना पड़ेगा।

जानकारी दे दें कि हार्वर्ड कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स में अपने परिसर में लगभग 6,800 विदेशी छात्रों को दाखिला देता है। इनमें से ज़्यादातर स्नातक छात्र हैं और वे 100 से ज़्यादा देशों से आते हैं।

विभाग ने क्या लगाए आरोप?

बता दें कि अमेरिकी सरकार ने हार्वर्ड पर यह आरोप लगाते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी में एंटी अमेरिकन और प्रो टेरेरिस्ट्स समर्थक आंदोलनकारियों को तैयार किया जाता है, जो यहूदी छात्रों पर हमला करते हैं। इसके अलावा, विभाग ने हार्वर्ड पर चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के साथ कोआर्डिनेट करने का आरोप लगाया, जिसमें कहा कि स्कूल ने 2024 तक चीन के पैरामिलिट्री के मेंबर की मेजबानी की और उन्हें ट्रेनिंग दी।

सैम और टॉम करन के भाई बेन करन इंग्लैंड के खिलाफ क्यों उतरे मैदान में? जानिए इसके पीछे की वजह।

इंग्लैंड के खिलाड़ी सैम करन और टॉम करन को तो सभी जानते हैं कि ये सगे भाई हैं। हालांकि सैम करन इसलिए भारत में ज्यादा लोकप्रिय हैं, क्योंकि वे आईपीएल में खूब खेलते रहे हैं। टॉम करन भी आईपीएल खेल चुके हैं, लेकिन वे ज्यादा दिन नहीं चले, इसलिए भुला दिए गए। लेकिन ये कम ही लोगों को पता है कि उनके एक और भाई हैं बेन करन। जो इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते हैं, लेकिन इंग्लैंड के लिए नहीं, बल्कि जिम्बाब्वे के लिए। अब उनके पास मौका आया है कि वे अपने ही भाई की टीम इंग्लैंड के खिलाफ खेल रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि जब सैम और टॉम इंग्लैंड के लिए खेलते हैं तो बेन करन जिम्बाब्वे के लिए क्यों खेलते हैं। चलिए इसके पीछे की पूरी कहानी बताते हैं।

बेन करन के पिता जिम्बाब्वे के लिए खेल चुके हैं क्रिकेट

पहली बात तो ये है कि इंग्लैंड के लिए इंटरनेशनल ​क्रिकेट खेलना कोई आसान काम नहीं है। वहां पहले से ही इतने खिलाड़ी अपनी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं कि वहां बेन का नंबर आएगा कि नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। दूसरी बात ये है कि इन तीनों भाईयों यानी टॉम, सैम और बेन करन के पिता का जन्म जिम्बाब्वे में ही हुआ था। उनका नाम केविन करन है। खास बात ये भी है कि केविन करन यानी इन तीनों के पिता जिम्बाब्वे के लिए क्रिकेट खेल चुके हैं। उन्होंने साल 1983 से लेकर 1987 तक जिम्बाब्वे के लिए खेला है। केविन ने 11 मैच इस टीम के लिए खेले हैं, ऐसे में बेन ने भी सोचा कि वे अपने पिता की टीम यानी जिम्बाब्वे के लिए क्रिकेट खेलेंगे।

इंग्लैंड के लिए काउंटी क्रिकेट खेल चुके हैं बेन करन

बेन करन इंग्लैंड की काउंटी टीम के लिए क्रिकेट खेल चुके हैं। वे नॉर्थम्पटनशायर के लिए साल 1991 से लेकर 1999 तक क्रिकेट खेले हैं। यानी अपने भाईयों की तरह ही बेन के पास भी एक विकल्प था कि वे इंग्लैंड के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलें, लेकिन इसके बाद भी कुछ सोचकर उन्होंने अपने पिता की टीम के लिए क्रिकेट खेलने का फैसला किया और अब वे इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं और इंग्लैंड के खिलाफ भी खेलने का मौका उन्हें मिल गया है।

ऐसा रहा है अब तक बेन करन का प्रदर्शन

बेन करन अब तक इंग्लैंड के लिए 5 टेस्ट मैच खेल चुके हैं, जिसमें उनके नाम 307 रन हैं। उन्होंने एक अर्धशतक भी अब तक लगाया है। उन्हें पिछले साल दिसंबर में अफगानिस्तान के खिलाफ जिम्बाब्वे के लिए टेस्ट डेब्यू का मौका मिला था। हालांकि जब वे इंग्लैंड के खिलाफ खेलने के लिए उतरे तो कुछ खास नहीं कर सके। इस मैच की पहली पारी में वे दस बॉल पर केवल 6 रन ही बना सके। अब देखना है कि मैच की दूसरी पारी में वे कैसा प्रदर्शन करते हैं।