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प्रसिद्ध भोजपुरी अभिनेता गोपाल राय का हुआ निधन, निरहुआ और पवन सिंह के साथ भी काम कर चुके थे

मधौल के रहने वाले और मशहूर भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता गोपाल राय का निधन हो गया। वे 76 साल के थे। रविवार, 25 मई की शाम उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने अपने पैतृक घर पर आखिरी सांस ली। अपनी बेहतरीन एक्टिंग और कॉमेडी के लिए मशहूर गोपल राय ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए जो हमारी यादों में हमेशा अमर रहेंगे। उनके निधन की खबर मिलते ही सोशल मीडिया पर उनके चाहने वालों ने श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया। इस दुखद खबर से पूरी इंडस्ट्री सन्न रह गई।

गोपाल राय ने भोजपुरी सिनेमा पर किया

गोपाल राय ने 200 से अधिक भोजपुरी फिल्मों और टीवी सीरियल में अपने अभिनय का दमखम दिखाया था। वह मनोरंजन जगत में खलनायक से लेकर सहायक कलाकार के रूप में काम कर चुके थे, जिसके लिए उन्हें दर्शकों से खूब प्यार भी मिला। गोपाल राय ने भोजपुरी इंडस्ट्री में दो दशक तक अपने काम के दम पर राज किया था। इनकी ‘नदिया के पार’, ‘गंगा किनारे मोरा गांव’ और ‘निरहुआ हिन्दुस्तानी’ जैसी फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। गोपाल राय ने कई भोजपुरी सुपरस्टार्स के साथ काम किया और कई पुरस्कार भी अपने नाम किए।

भोजपुरी फिल्मों में निभाए अनगिनत रोल्स

तबीयत खराब होने के बाद मशहूर अभिनेता गोपाल राय चार साल पहले मुंबई से गांव आने के बाद पूर्व सांसद और भोजपुरी सुपरस्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ से उनके घर जाकर मिले थे। इतना ही नहीं उनकी मुलाकात एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे से भी हुई थी। बता दें कि उन्होंने अपने अनगिनत किरदारों में दर्शकों के दिलों में अपनी एक अलग ही छाप छोड़ी थी। गोपाल राय के निधन की पुष्टि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के फिल्म क्रिटिक संजय भूषण पटियाला ने की।

भोजपुरी सिनेमा में पसरा मामत

गोपाल राय की मौत पर विधायक अशोक कुमार सिंह, भोजपुरी गायक नीरज रवि, हास्य अभिनेता संजय रजक, सुनील प्रिय, जिला पार्षद प्रतिनिधि रहमतुल्ला राईन मुन्ना, एमएलसी प्रतिनिधि अजय सिंह, जिला पार्षद बिपिन शाही और साहित्यकार डॉ. एमके गिरि राकेश जैसे महान हस्तियों ने अपना दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी है।

लखनऊ के सरोजनीनगर में 121वां “आपका विधायक-आपके द्वार” जनसंवाद शिविर : विधायक डॉ. राजेश्वर द्वारा शकूरपुर के 4 मेधावियों को साइकिल प्रदान कर किया सम्मानित, ग्रामवासियों ने रखी आवास, लाइट और पेंशन जैसी समस्याएँ

लखनऊ के सरोजनीनगर में 121वां "आपका विधायक-आपके द्वार" जनसंवाद शिविर : विधायक डॉ. राजेश्वर द्वारा शकूरपुर के 4 मेधावियों को साइकिल प्रदान कर किया सम्मानित, ग्रामवासियों ने रखी आवास, लाइट और पेंशन जैसी समस्याएँ
लखनऊ के सरोजनीनगर में 121वां "आपका विधायक-आपके द्वार" जनसंवाद शिविर : विधायक डॉ. राजेश्वर द्वारा शकूरपुर के 4 मेधावियों को साइकिल प्रदान कर किया सम्मानित, ग्रामवासियों ने रखी आवास, लाइट और पेंशन जैसी समस्याएँ
लखनऊ के सरोजनीनगर में 121वां "आपका विधायक-आपके द्वार" जनसंवाद शिविर : विधायक डॉ. राजेश्वर द्वारा शकूरपुर के 4 मेधावियों को साइकिल प्रदान कर किया सम्मानित, ग्रामवासियों ने रखी आवास, लाइट और पेंशन जैसी समस्याएँ
  • जनसेवा का संकल्प, समाधान की पहल, शकूरपुर में लगा 121 वां जन संवाद शिविर
  • विकास, विश्वास और सेवा – सरोजनीनगर में जनसेवा की नई परिभाषा गढ़ रहे विधायक राजेश्वर सिंह
  • जनसंवाद से जनसमाधान – राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में सरोजनीनगर विकास की नई ऊंचाइयों की ओर
  • सिर्फ वादे नहीं, समाधान की गारंटी – विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रयासों से गाँव-गाँव हो रहा विकास

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के जनसेवा संकल्प और जन संवाद अभियान के तहत प्रत्येक सप्ताह आपका विधायक – आपके द्वार जन सुनवाई शिविर का आयोजन किया जाता है। रविवार को जनसंवाद शिविर का 121वां संस्करण ग्राम पंचायत शकूरपुर में आयोजित किया गया। शिविर में क्षेत्रवासियों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान की दिशा में त्वरित कार्यवाही की गई। हैंडपंप, सोलर लाइट, दिव्यांगजन पेंशन, ट्राई साइकिल जैसी करीब 35 आवश्यकताओं से सम्बंधित आवेदन प्राप्त हुए। संभावित विषयों का त्वरित समाधान और शेष के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया।

मेधावी छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान
शकूरपुर के होनहार विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए “गाँव की शान” पहल के तहत इंटरमीडिएट परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने वाले 2 मेधावियों कृष्ण गौतम (82.4) % एवं दिव्यम सिंह (81.4%) एवं हाईस्कूल परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने वाले 2 मेधावियों सौम्या त्रिपाठी (83%) और गौरी कनौजिया (71%) को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

गणमान्य लोगों का सम्मान, सभी को भोजन
शिविर में उपस्थित वार्ड अध्यक्ष सौरभ अवस्थी, सेक्टर संयोजक आर.पी. सैनी, बूथ अध्यक्ष सतेन्द्र शर्मा एवं संगीत देवी, अमर सिंह, सुमिता रानी, भावना सिंह तथा आशीष तिवारी, महिला मोर्चा पदाधिकारी मोनी सिंह, दीपमाला, आनंद शुक्ला, उदय प्रताप, श्रीकांत तिवारी एवं सरदार रंजीत सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। शिविर में भाग लेने आए सभी क्षेत्रवासियों के लिए “ताराशक्ति नि:शुल्क रसोई” के माध्यम से ताजा एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई।

विकास और जनसेवा की दिशा में आगे बढ़ता सरोजनीनगर
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का कहना है कि यह जनसंवाद शिविर जनता की समस्याओं को सीधे समझने और उनके समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे शिविरों का आयोजन आगे भी निरंतर जारी रहेगा, जिससे विकास और जनकल्याण के कार्यों को और गति दी जा सके।

पीलीभीत: तराई के जंगलों में गूंजा ‘प्रकृति रक्षार्थ राष्ट्रधर्म’ का संदेश: डॉ. राजेश्वर सिंह की अगुवाई में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में ‘वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन इवेंट 5.0’ सम्पन्न, वन रक्षकों, गाइड्स, छात्रों, ड्राइवर्स और पर्यावरण प्रेमियों के साथ संवाद, सम्मान और संरक्षण का अभिनव संगम

पीलीभीत: तराई के जंगलों में गूंजा ‘प्रकृति रक्षार्थ राष्ट्रधर्म’ का संदेश: डॉ. राजेश्वर सिंह की अगुवाई में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में ‘वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन इवेंट 5.0’ सम्पन्न, वन रक्षकों, गाइड्स, छात्रों, ड्राइवर्स और पर्यावरण प्रेमियों के साथ संवाद, सम्मान और संरक्षण का अभिनव संगम
पीलीभीत: तराई के जंगलों में गूंजा ‘प्रकृति रक्षार्थ राष्ट्रधर्म’ का संदेश: डॉ. राजेश्वर सिंह की अगुवाई में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में ‘वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन इवेंट 5.0’ सम्पन्न, वन रक्षकों, गाइड्स, छात्रों, ड्राइवर्स और पर्यावरण प्रेमियों के साथ संवाद, सम्मान और संरक्षण का अभिनव संगम
पीलीभीत: तराई के जंगलों में गूंजा ‘प्रकृति रक्षार्थ राष्ट्रधर्म’ का संदेश: डॉ. राजेश्वर सिंह की अगुवाई में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में ‘वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन इवेंट 5.0’ सम्पन्न, वन रक्षकों, गाइड्स, छात्रों, ड्राइवर्स और पर्यावरण प्रेमियों के साथ संवाद, सम्मान और संरक्षण का अभिनव संगम
  • पीलीभीत टाइगर रिजर्व में ‘वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन इवेंट 5.0’ का आयोजन डॉ. राजेश्वर सिंह की अगुवाई में हुआ।
  • वन रक्षकों, गाइड्स और ड्राइवर्स को पुरस्कार, साइकिल व सम्मान चिन्ह देकर प्रेरित किया गया।
  • प्रसिद्ध फोटोग्राफर सरोश लोधी ने वन्यजीव फोटोग्राफी पर विशेष कार्यशाला आयोजित की।
  • पर्यावरण संरक्षण पर आधारित क्विज़ और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित कर छात्रों को जागरूक किया गया।
  • ‘एनवायार्मेंट वारियर्स’ मिशन के तहत तराई अंचल में 4 चरणों में संरक्षण कार्यक्रम चलाए गए।

पीलीभीत/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के तराई अंचल स्थित पीलीभीत टाइगर रिजर्व के मुस्तफाबाद फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण को समर्पित भव्य आयोजन “वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन इवेंट 5.0” का आयोजन हुआ। इस आयोजन का नेतृत्व सरोजनीनगर के विधायक और पर्यावरण के प्रति जागरूक जनप्रतिनिधि डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया। इस पूरे कार्यक्रम की केंद्रीय भावना रही – “प्रकृति संरक्षण ही राष्ट्र की सुरक्षा है“। इस आयोजन का उद्देश्य फ्रंटलाइन वन कर्मियों, वाचर्स ड्राइवर्स, और गाइड्स को जागरूक करना, प्रोत्साहित करना सम्मानित करना और उन्हें सच्चे पर्यावरण योद्धा के रूप में तैयार करना था। सुप्रसिद्ध शिक्षा एवं पर्यावरणविद अम्बिका मिश्रा, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव ललित वर्मा एवं डीएफओ मनीष सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और कार्यशाला वनरक्षकों का उत्साहवर्धन किया। दरअसल, तराई क्षेत्र में वन एवं जैव विविधता को बचाने तथा वन कर्मियों, स्कूली छात्र – छात्राओं में जागरूकता लाने के प्रति सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रतिबद्धता एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुकी है।

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण:

वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी वर्कशॉप : सुप्रसिद्ध वन्यजीव फोटोग्राफर सरोश लोधी के नेतृत्व में वन रक्षकों के लिए 2 दिवसीय वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें उन्हें फोटोग्राफी के कौशल सिखाए गए। इस वर्कशॉप की प्रसंशा करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने अमेरिका वियतनाम युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि बम गिरने के बाद बच्चों के बीच दौड़ती एक बच्ची की तस्वीर वियतनाम युद्ध का चेहरा बन गई थी, तस्वीर वायरल होने के बाद वो विश्वभर में ‘नेपालम गर्ल’ नाम से प्रसिद्द हुई। विधायक ने अन्य उदाहरण देते हुए बताया कि 24 दिसंबर, 1968 को अपोलो 8 के चालक दल ने चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए, उन्होंने पृथ्वी को चंद्र क्षितिज के ऊपर उगते हुए देखा और इस दृश्य को “अर्थराइज” नामक विश्व-प्रसिद्ध तस्वीर में कैद किया। इस तस्वीर ने विलियम एंडर्स को प्रेरित किया, जिन्होंने कहा, “हम चंद्रमा की खोज के लिए आए, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण खोज पृथ्वी की थी।”

क्विज प्रतियोगिता : पीलीभीत टाइगर रिजर्व से जुड़े 180 ड्राइवर्स और गाइड्स ने क्विज प्रतियोगिता में भाग लिया। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले सलीम शाह को 25,000 रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त जसवंत कुमार को 20,000 रुपये, और तृतीय स्थान प्राप्त राहुल एवं सुभाष को 15,000 रुपये की सम्मान राशि के साथ प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, 13 अन्य प्रतिभागियों को 5,000 रुपये का सांत्वना पुरस्कार और मौखिक क्विज में सही उत्तर देने वाले 10 प्रतिभागियों को दूरबीन (Binoculars) प्रदान कर सम्मानित किया गया।

वन रक्षकों का सम्मान: पीलीभीत टाइगर रिजर्व के 30 वॉचर्स को साइकिलें प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त, पांच उत्कृष्ट वन अधिकारियों— दिनेश गिरी, दिनेश कुमार, जितेंद्र सिंह, सरवन सिंह और तुलाराम—को विशिष्ट पदक से सम्मानित किया गया। वन्यजीव तस्करी के खिलाफ योगदान: उपप्रभारी वनाधिकारी श्री रमेश चौहान, जिन्होंने 140 कछुओं को तस्करों से मुक्त कराया, को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

वन संरक्षण: सबसे बड़ा राष्ट्र धर्म

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “वन संरक्षण सबसे बड़ा राष्ट्र धर्म है। ‘एनवायार्मेंट वारियर्स’ अभियान के माध्यम से हम न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि जागरूकता और प्रोत्साहन के जरिए पर्यावरण संतुलन की रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं। पर्यावरण की स्थित पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि विश्व की 18% आबादी का निवास होने के बावजूद भारत के पास मात्र 4% ताजा जल संसाधन हैं। वायु प्रदूषण के कारण प्रतिदिन लगभग 6,500 लोगों की जान जाती है, और औसत जीवन प्रत्याशा 5 वर्ष तक कम हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, जैव विविधता पर संकट गहराता जा रहा है, हर घंटे औसतन तीन प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं, और 1970 के बाद से 60% वन्यजीव आबादी नष्ट हो चुकी है। आज 99% संकटग्रस्त प्रजातियों के विलुप्त होने का कारण मानव गतिविधियां हैं।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति उल्लेखनीय
सरोजनी नगर विधायक ने बताया कि इन चुनौतियों के बीच, उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 8 वर्षों में राज्य में 200 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप वन क्षेत्र में 559.19 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या दोगुनी होकर एक मील का पत्थर साबित हुई है।

युवा दिवस के अवसर पर 12 जनवरी 2025 को अभियान की शुरुआत
प्रथम कार्यक्रम – गुरु गोविंद सिंह डिग्री कॉलेज, पलिया कलां (खीरी)
इस आयोजन में डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन किया गया। पाँच मेधावी छात्रों को टैबलेट वितरित किए गए, 30 वन रक्षकों (वॉचर्स) को साइकिलें दी गईं और 5 वन कर्मियों को सम्मानित किया गया। साथ ही ‘प्राइड ऑफ तराई’ सम्मान भी प्रदान किया गया।

द्वितीय कार्यक्रम – मोतीपुर गेस्ट हाउस, बहराइच यहाँ इंटर स्कूल क्विज प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें 12 विद्यालयों के 81 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में 30 वॉचर्स को साइकिलें दी गईं और 5 वन कर्मियों को सम्मानित किया गया।

तृतीय कार्यक्रम – मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस, पीलीभीत इस आयोजन में 10 स्कूलों के विद्यार्थियों के बीच वाद-विवाद एवं क्विज प्रतियोगिताएँ हुईं। ‘प्राइड ऑफ तराई’ और ‘प्राइड ऑफ पीलीभीत’ सम्मान प्रदान किए गए। 1000 पौधों का रोपण किया गया, दो सोलर वॉटर होल्स, एक तारा शक्ति केंद्र, एक स्मार्ट क्लास और एक रण बहादुर सिंह डिजिटल एजुकेशन एवं यूथ एम्पावरमेंट सेंटर का उद्घाटन किया गया। साथ ही 30 वॉचर्स को साइकिलें और 5 वन कर्मियों को सम्मानित किया गया।

चतुर्थ कार्यक्रम – किशनपुर फॉरेस्ट गेस्ट हाउस, खीरी इस कार्यक्रम में 17 विद्यालयों के 250 छात्रों के बीच पेंटिंग एवं क्विज प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। 30 वॉचर्स को साइकिलें प्रदान की गईं और 5 वन कर्मियों को सम्मानित किया गया।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग के लिए माँ पीताम्बरा ट्रस्ट का भी आभार व्यक्त किया।

अवधी समागम में चार पुस्तकों का हुआ विमोचन: दो दर्जन से अधिक अवधी रचनाकार हुए सम्मानित, प्रेस क्लब लखनऊ में सैप प्रकाशन एवं साहित्यकार समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजन

अवधी समागम में चार पुस्तकों का हुआ विमोचन: दो दर्जन से अधिक अवधी रचनाकार हुए सम्मानित, प्रेस क्लब लखनऊ में सैप प्रकाशन एवं साहित्यकार समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजनअवधी समागम में चार पुस्तकों का हुआ विमोचन: दो दर्जन से अधिक अवधी रचनाकार हुए सम्मानित, प्रेस क्लब लखनऊ में सैप प्रकाशन एवं साहित्यकार समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजन
अवधी समागम में चार पुस्तकों का हुआ विमोचन: दो दर्जन से अधिक अवधी रचनाकार हुए सम्मानित, प्रेस क्लब लखनऊ में सैप प्रकाशन एवं साहित्यकार समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजन
अवधी समागम में चार पुस्तकों का हुआ विमोचन: दो दर्जन से अधिक अवधी रचनाकार हुए सम्मानित, प्रेस क्लब लखनऊ में सैप प्रकाशन एवं साहित्यकार समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजनअवधी समागम में चार पुस्तकों का हुआ विमोचन: दो दर्जन से अधिक अवधी रचनाकार हुए सम्मानित, प्रेस क्लब लखनऊ में सैप प्रकाशन एवं साहित्यकार समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजन
  • प्रेस क्लब लखनऊ में हुआ भव्य ‘अवधी समागम’ कार्यक्रम।
  • चार महत्त्वपूर्ण अवधी पुस्तकों का हुआ लोकार्पण।
  • पद्मश्री डॉ. विद्याबिंदु सिंह समेत कई विद्वानों ने रखे विचार।
  • ‘संत न मोल बिकाय’ और ‘कजरी’ जैसी रचनाओं को सराहा गया।
  • 24 अवधी रचनाकारों को स्मृति चिन्ह और पुस्तकों के सेट सहित किया गया सम्मानित।

लखनऊ: अवधी भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति के समर्पित रचनाकारों को समर्पित एक भव्य समारोह ‘अवधी समागम’ का आयोजन सैप प्रकाशन एवं साहित्यकार समिति के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को प्रेस क्लब लखनऊ में किया गया। इस अवसर पर चार महत्त्वपूर्ण अवधी पुस्तकों का लोकार्पण हुआ और साथ ही दो दर्जन से अधिक अवधी साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।

दीप प्रज्वलन से आरंभ हुआ समारोह

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. विद्याबिंदु सिंह, प्रो. डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित, डॉ. उमाशंकर शुक्ल शितिकंठ, डॉ. ज्ञानवती दीक्षित, डॉ. राम बहादुर मिश्र और डॉ. रश्मिशील द्वारा किया गया।

चार पुस्तकों का हुआ लोकार्पण

अवधी समागम में चार नई पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  1. विनय दास का उपन्यास ‘संत न मोल बिकाय’,
  2. दीपक सिंह का कहानी संग्रह ‘कजरी’,
  3. डॉ. ज्ञानवती दीक्षित की पुस्तक ‘दीदी कै पाती’,
  4. ओपी वर्मा ओम की काव्यकृति ‘चेतना के स्वर’।

पुस्तकों पर विद्वानों की गहन टिप्पणी

मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. विद्याबिंदु सिंह ने कहा कि ‘संत न मोल बिकाय’, ‘कजरी’, ‘दीदी कै पाती’ जैसी रचनाएं अवधी गद्य कोष में ऐतिहासिक वृद्धि करेंगी। इन रचनाओं में विषयगत नवाचार और भाषा की मिठास है। उन्होंने कहा कि ‘संत न मोल बिकाय’ में सतनामी संतों का जीवंत चित्रण हुआ है, जो कथावाचक शैली में अवधी भाषा की प्रामाणिकता को प्रस्तुत करता है।

‘कजरी’ को उन्होंने देशज स्त्री-विमर्श का गंभीर आख्यान बताया, जो बदलते ग्रामीण समाज की तस्वीर पेश करता है। ‘दीदी कै पाती’ में रिक्त पत्र विधा और संस्मरण को अवधी में सशक्त स्वर मिला है, जबकि ‘चेतना के स्वर’ पाठकों को भीतर तक आंदोलित करती है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने ‘संत न मोल बिकाय’ को इस्लामीकरण और धर्मांतरण के प्रतिरोध का दस्तावेज बताया। उन्होंने इसे एक ओर औरंगजेब की धार्मिक कट्टरता का प्रमाण तो दूसरी ओर सतनामी संत जगजीवन दास के सामाजिक योगदान की गौरवगाथा कहा। ‘कजरी’ की नायिका के संघर्ष को ग्रामीण स्त्रियों के सोच में आए बदलाव का प्रतीक बताया।

डॉ. ज्ञानवती दीक्षित की ‘दीदी कै पाती’ को उन्होंने संस्मरण और पत्र लेखन की अवधी में पुनर्स्थापना बताया, वहीं ओपी वर्मा ओम की ‘चेतना के स्वर’ को चेतन भावों की गहन अभिव्यक्ति करार दिया।

डॉ. उमाशंकर शुक्ल शितिकंठ ने कहा कि ‘संत न मोल बिकाय’ लोक संस्कृति की गहन पड़ताल करती है और अवधी भाषा के मानकीकरण की दिशा में सशक्त प्रयास है। वहीं, ‘कजरी’ ग्रामीण जीवन की यथार्थवादी झांकी है।

अवधी रचनाकारों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के अंत में अवधी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए 24 रचनाकारों को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और पुस्तकों का सेट भेंट कर सम्मानित किया गया।

सम्मानित रचनाकारों में शामिल रहे — डॉ. ज्ञानवती दीक्षित, डॉ. उमाशंकर शुक्ल शितिकंठ, डॉ. रश्मिशील, अनीस देहाती, सूर्य प्रसाद शर्मा, आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप, रमाकांत तिवारी रामिल, नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान, डॉ. अनामिका श्रीवास्तव, सुधा द्विवेदी, विनोद मिश्र, भूपेन्द्र दीक्षित, अरुण तिवारी, प्रदीप तिवारी धवल, अजय साहू, डॉ. अर्जुन पाण्डेय, डॉ. अशोक अज्ञानी, डॉ. प्रदीप कुमार शुक्ल, डॉ. शेषमणि शुक्ला एवं नूतन वशिष्ठ सहित अन्य रचनाकार।

अन्य वक्ताओं ने भी रखा विचार

समारोह को डॉ. राम बहादुर मिश्र, प्रदीप सारंग, डॉ. श्याम सुंदर दीक्षित, अजय प्रधान, सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया। सभी ने अवधी भाषा और साहित्य को जनमानस से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

अवधी साहित्य को समर्पित प्रेरणास्रोत आयोजन

अवधी समागम ने यह स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान की आत्मा होती हैं। इस आयोजन ने अवधी भाषा के उत्थान, विस्तार और नई पीढ़ी से जुड़ाव की दिशा में एक सशक्त कदम उठाया है।

लखनऊ: डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया अत्याधुनिक कैंसर जांच यूनिट का लोकार्पण, पीके पैथोलॉजी लैब बनी उम्मीद की नई किरण

  • देशभर में 25 लाख कैंसर मरीजों के बीच लखनऊ को मिली नई सुविधा: सरस्वती पुरम स्थित पीके लैब में शुरू हुई कैंसर जांच
  • कैंसर से 80% मौतें रोकी जा सकती हैं अगर हो समय पर जांच: डॉ. राजेश्वर सिंह ने दिया जागरूकता का संदेश

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शनिवार को मनीमोंटा मार्केट, सरस्वती पुरम, रायबरेली रोड स्थित पी. के. पैथोलॉजी लैब में अत्याधुनिक कैंसर जांच यूनिट का शुभारंभ किया। इस अवसर पर डॉ. सिंह ने कहा, “कैंसर की लड़ाई जागरूकता से शुरू होती है और समय पर जांच से जीती जा सकती है।

चिंताजनक आंकड़े, गंभीर संदेश

इस दौरान डॉ. सिंह ने कैंसर के बढ़ते मामलों के आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि, “वर्ष 2022 में वैश्विक स्तर पर लगभग 2 करोड़ कैंसर के नए मामले सामने आए और 97 लाख से अधिक मौतें दर्ज की गईं।

भारत में वर्तमान में 25 लाख से अधिक कैंसर रोगी हैं। ICMR रिपोर्ट (2022) के अनुसार भारत में 14 लाख से अधिक नए कैंसर मामलों की पुष्टि हुई, जिनमें से 9 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु इस घातक रोग के कारण हुई। WHO के अनुसार, हर 5 में से 1 व्यक्ति को जीवनकाल में कभी न कभी कैंसर हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रारंभिक अवस्था में कैंसर का पता चल जाए, तो 80-90% तक मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।

पी. के. पैथोलॉजी लैब स्वास्थ्य सेवाओं में मील का पत्थर:

पी. के. पैथोलॉजी लैब द्वारा यह पहल एक जन-स्वास्थ्य केंद्रित दृष्टिकोण की मिसाल है। इस आधुनिक कैंसर जांच यूनिट से समयबद्ध और सटीक जांच संभव होगी। डॉ. सिंह ने इस अवसर पर डॉ. पी. के. गुप्ता, डॉ. अविरल गुप्ता और डॉ. रोहिणी सिंह सहित पूरी टीम की सराहना की, जो न केवल तकनीकी रूप से उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, बल्कि कैंसर पीड़ितों का मनोबल बढ़ाकर उन्हें मानसिक संबल भी दे रहे हैं।

इस अवसर पर डॉ. संगीता गुप्ता, डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी (डायरेक्टर, लोकबंधु हॉस्पिटल), डॉ. बी. एस. नेगी (एमएस, लोकबंधु हॉस्पिटल), डॉ. एस. सागर, डॉ. प्रमोद चौरसिया, डॉ. अमितेश मिश्रा, डॉ. आँचल केसरी, डॉ. ज्ञानेन्द्र शुक्ला, डॉ. कर्नल सबलोक, डॉ. वी. के. गुप्ता सहित अनेक गणमान्य चिकित्सक और समाजसेवी उपस्थित रहे।