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एलन मस्क ने ट्रंप का साथ छोड़ने के बाद DOGE ऑफिस में मिले गांजा, चूहे, कॉकरोच समेत कई हैरान कर देने वाली चीजें

Elon Musk News: टेस्ला के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने व्हाइट हाउस और अपने बनाए विभाग “Department of Government Efficiency” (DOGE) को छोड़ दिया है. उनके जाने के बाद जिस ऑफिस में उनकी टीम ठहरी थी, वहां काफी गंदगी और अव्यवस्था पाई गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की एक संस्था USIP (United States Institute of Peace) के सफाई कर्मचारियों ने बताया कि मस्क की टीम के जाने के बाद उनकी बिल्डिंग में गांजा (मारिजुआना) पड़ा मिला और वहां चूहे, कॉकरोच और पानी की लीकेज जैसी समस्याएं देखी गईं.

The Economist की रिपोर्ट के अनुसार, DOGE ने जबरन USIP की बिल्डिंग पर कब्जा कर लिया था, लेकिन कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी. मार्च से मई तक यह बिल्डिंग DOGE के कब्जे में रही और संस्थान के अधिकारी 19 मई को ही वापस अपनी बिल्डिंग में लौट पाए.

जज ने सुनाया ये फैसला

एक जज ने पिछले महीने फैसला सुनाया कि DOGE को न तो USIP के मुख्यालय (जिसकी कीमत 500 मिलियन डॉलर है) पर कब्जा करने का अधिकार था और न ही वहां के कर्मचारियों को हटाने का. USIP की स्थापना 1984 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा की गई थी और यह संस्था विदेशों में हिंसक संघर्षों को रोकने, कम करने और सुलझाने के लिए काम करती है.

USIP के कार्यवाहक अध्यक्ष जॉर्ज मूस ने कही ये बात

संस्था के कार्यवाहक अध्यक्ष जॉर्ज मूस ने एक हलफनामे में कहा कि बिल्डिंग में लौटने के बाद उन्हें पानी की लीकेज, चूहों और कॉकरोच की मौजूदगी जैसे कई खामियां नजर आईं, जो पहले नहीं थी. इसी दौरान एलन मस्क पर ड्रग्स के सेवन के आरोप भी लगे हैं. New York Times की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मस्क ने केटामीन नामक दवा का अत्यधिक सेवन किया, जिससे उन्हें पेशाब से जुड़ी समस्याएं होने लगीं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मस्क के पास एक पिल बॉक्स (दवा रखने का डिब्बा) था, जिसमें लगभग 20 गोलियां थीं, जिनमें कुछ पर Adderall (एक उत्तेजक दवा) के चिन्ह भी थे.

आरोपों को मस्क ने बताया ‘झूठा’

इन आरोपों पर मस्क ने पहले New York Times को झूठा करार दिया और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. फिर उन्होंने स्पष्ट कहा, “मैं ड्रग्स नहीं ले रहा हूँ!” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कुछ साल पहले डॉक्टर की सलाह पर केटामीन का उपयोग किया था, और उस समय उन्होंने यह बात X (पहले ट्विटर) पर साझा भी की थी, लेकिन अब वह इसे नहीं ले रहे हैं.

NEET PG परीक्षा 15 जून को कराना संभव नहीं, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन ने अगस्त में आयोजन की नई तारीख मांगी है।

NEET PG Exam: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज ने कहा है कि नीट पीजी परीक्षा का आयोजन 15 जून को कर पाना संभव नहीं है. बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर मेडिकल के पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिले की यह परीक्षा 3 अगस्त को आयोजित करने की अनुमति मांगी है.

नीट पीजी परीक्षा पहले 15 जून को दो शिफ्ट में होनी थी, लेकिन 30 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि परीक्षा को एक ही शिफ्ट में आयोजित कराया जाए. कोर्ट ने यह आदेश उन याचिकाओं को सुनते हुए दिया जिनमें कहा गया था कि अलग-अलग पाली में होने वाली परीक्षा छात्रों को असमान स्थिति में डाल सकती है. इस तरह परीक्षा होने से यह आशंका बनी रहेगी कि एक पाली में छात्रों को आसान प्रश्न पत्र मिल जाए.

‘दो शिफ्ट में परीक्षा का आयोजन मनमाना कदम’
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए दो शिफ्ट में परीक्षा के आयोजन को मनमाना कदम बताया था. कोर्ट ने यह भी कहा था कि एक शिफ्ट में परीक्षा के आयोजन के लिए केंद्रों की संख्या को बढ़ाया जाए. अगर ऐसा करने में कुछ समय लगता है तो नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इसके लिए आवेदन दाखिल कर सकता है.

अब बोर्ड ने आवेदन दाखिल कर बताया है कि कोर्ट का फैसला आते ही उसने परीक्षा में तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) से बातचीत की. TCS ने उसे बताया कि एक ही शिफ्ट पर परीक्षा के आयोजन के लिए जितने केंद्रों की जरूरत पड़ेगी, उन्हें इतनी जल्दी उपलब्ध करा पाना संभव नहीं है.

बोर्ड ने कहा है कि लगभग 2.5 लाख परीक्षार्थियों के लिए पहले 195 शहरों के 448 केंद्रों में परीक्षा आयोजित की जा रही थी. अब लगभग 1000 केंद्रों की जरूरत पड़ेगी. हर केंद्र को चुनने से पहले वहां उपलब्ध सुरक्षा, इंटरनेट सुविधा, पावर बैकअप जैसी कई बातों को परखना होगा. परीक्षा को सफलतापूर्वक करवाने के लिए लगभग 60 हज़ार लोगों की तैनाती भी करनी होगी.

साउथ कोरिया में बड़ा राजनीतिक बदलाव, जे-म्युंग ने चुनाव में जीत हासिल की, मजदूर से राष्ट्रपति बनने का सफर पूरा किया

South Korea Election: साउथ कोरिया में 3 जून 2025 को हुए विशेष राष्ट्रपति चुनाव में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार ली जे-म्युंग, ने कंज़र्वेटिव प्रत्याशी किम मून-सू को बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की. अब तक 85% से अधिक मतगणना पूरी हो चुकी है और किम मून-सू ने अपनी हार स्वीकार कर ली है. यह जीत सिर्फ एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुकी है.

साउथ कोरिया में विशेष चुनाव की जरूरत तब पड़ी जब पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल ने 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ लागू कर दिया था, जिसने पूरे देश में लोकतंत्र की नींव हिला दी. यह दक्षिण कोरिया में 1987 में लोकतंत्र की बहाली के बाद पहली बार था, जब किसी राष्ट्रपति ने सेना का सहारा लेकर शासन करने की कोशिश की.

चुनाव के पहले क्या-क्या हुआ?
साउथ कोरिया में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का नेतृत्व ली जे-म्युंग ने किया, जिन्होंने संसद में यून के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया था. अप्रैल 2025 में संवैधानिक न्यायालय ने यून को पद से हटा दिया. उनके खिलाफ देशद्रोह और सत्ता के दुरुपयोग के आपराधिक मुकदमे शुरू हुए. इस राजनीतिक भूचाल के चलते जून 2025 में विशेष चुनाव कराना अनिवार्य हो गया.

ली जे-म्युंग का चुनावी संदेश
ली जे-म्युंग ने अपने चुनाव प्रचार को “जनता का न्याय दिवस” कहा और यून की सरकार को अलोकतांत्रिक मानसिकता, न्यायिक संस्थाओं की अवहेलना और जनता के अधिकारों के दमन के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि जनता के आत्मसम्मान की वापसी है.

लोकतंत्र के पक्ष में जनता का निर्णायक जनादेश
इस विशेष चुनाव में 80% से अधिक मतदान हुआ, जो 1997 के बाद सबसे अधिक है. यह दर्शाता है कि जनता राजनीतिक अस्थिरता से थक चुकी थी. लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान केंद्रों पर उतरी और ली जे-म्युंग को नया नेता चुनने के लिए एकजुट थी. यह केवल मतदान नहीं बल्कि एक सामूहिक विद्रोह और लोकतांत्रिक आंदोलन था.

साउथ कोरिया में ली जे-म्युंग की प्राथमिकताएं
साउथ कोरिया में चुनावी जीत से पहले ली जे-म्युंग ने कहा था कि वह देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण को समाप्त करना चाहते हैं. वह आर्थिक पुनरुद्धार पर खासा ध्यान देंगे. खासकर युवाओं और मध्यम वर्ग के लिए काम करना पहली प्राथमिकता होगी. नॉर्थ कोरिया के साथ शांति और सहयोग के रास्ते तलाशे जाएंगे. हालांकि, ये देखना दिलचस्प होगा कि उनकी नीतियां दक्षिण कोरिया को स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि की नई दिशा में ले जा सकती है या नहीं.

किम मून-सू ने दी बधाई, स्वीकार की हार
यून सुक योल के करीबी और पूर्व श्रम मंत्री किम मून-सू ने अपनी हार स्वीकार की और ली को जीत की बधाई दी. किम मून-सू कंज़र्वेटिव पीपल पावर पार्टी के उम्मीदवार थे.

दीवार फांदते हुए लोकतंत्र बचाने की कोशिश
दिसंबर 2024 के वक्त दक्षिण कोरिया में जब तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक योल ने देश में मार्शल लॉ लगाने की घोषणा की, उस वक्त विपक्षी नेता ली जे-म्युंग ने प्रतिरोध का साहसिक रास्ता चुना. नेशनल असेंबली में प्रवेश पर जब सेना ने रोक लगाई तब ली ने दीवार फांदकर संसद में प्रवेश की कोशिश की. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को यूट्यूब लाइव किया, जो कुछ ही घंटों में वायरल हो गया. उसी दिन संसद में मार्शल लॉ को रद्द करने के लिए वोटिंग हुई.

संघर्षों से बने नेता
61 वर्षीय ली जे-म्युंग का जीवन संघर्षों से शुरू हुआ और सिद्धांतों से आगे बढ़ा. गरीबी में बचपन, बाल मजदूर के रूप में काम किया. खुद पढ़ाई कर कानून में डिग्री हासिल की. मानवाधिकार वकील के रूप में शुरुआत की. इसके बाद सियोंगनाम के मेयर और फिर ग्योंगगी प्रांत के गवर्नर बने

2022 में मिली हार
2022 के राष्ट्रपति चुनाव में ली जे-म्युंग हार गए, लेकिन राजनीति से वापस नहीं हटे. उन्होंने विपक्ष का नेतृत्व करते हुए जनता के मुद्दों को संसद और सड़कों पर उठाना जारी रखा. इस बीच उनकी जनप्रियता विशेषकर युवाओं और निम्न-मध्यम वर्ग में लगातार बढ़ती गई.

जानलेवा हमला फिर भी डिगा नहीं हौसला
जनवरी 2024 में बुसान यात्रा के दौरान एक व्यक्ति ने ऑटोग्राफ के बहाने उनके गले पर 7 इंच लंबी चाकू से हमला किया. उन्हें एयरलिफ्ट कर सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनके समर्थकों और आलोचकों दोनों ने हमले की निंदा की. यह हमला उन्हें डरा नहीं सका, बल्कि उनकी छवि को और मजबूत कर गया.

भारत की कड़ी कार्रवाई से बांग्लादेश हुआ परेशान, विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने दिया खास बयान

Bangladesh Illegal Immigration: बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि भारत से लोगों को विदेशी बताकर बिना प्रक्रिया के उनके देश में वापस भेज रहा है. बांग्लादेश इस पर भारत को कूटनीतिक पत्र भेजेगा.

भारत ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद अवैध बांग्लादेशियों की जांच शुरू की थी और 7 मई से ऑपरेशन सिंदूर के तहत उन्हें वापस भेजना तेज किया. भारत में अवैध तरीके से रह रहे हर बांग्लादेशी की जांच हो रही है, लेकिन बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन का कहना है कि भारत बिना प्रक्रिया के लोगों को सीमा पार भेज रहा है. उन्होंने कहा, “हम नया पत्र भेजेंगे. हम जानते हैं कि ऐसा हो रहा है, लेकिन हम इसे रोक नहीं सकते.”

अवैध प्रवासियों को लेकर क्या बोले तौहीद हुसैन?

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने बांग्लादेश को कुछ अवैध प्रवासियों की लिस्ट दी है, जिन्हें बांग्लादेशी माना जा रहा है. इस बारे में तौहीद हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश ने जांच के बाद कुछ अवैध प्रवासियों को स्वीकार भी किया है. उन्होंने बताया कि कांसुलर मुद्दों के लिए एक प्रक्रिया है और बांग्लादेश उसका पालन कर रहा है. भारत के साथ नियमित बातचीत हो रही है. उन्होंने आगे कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर कोई नया जवाब नहीं मिला. दूसरा पत्र अभी नहीं भेजा गया, लेकिन जरूरत पड़ी तो भेजा जा सकता है.

दिल्ली से 16 अवैध बांग्लादेशी हुए गिरफ्तार

2 जून को दिल्ली पुलिस की फॉरेनर्स सेल और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम ने शाहदरा के सीमापुरी इलाके में 16 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था. इनमें 4 पुरुष, 5 महिलाएं और 7 बच्चे हैं. ये सभी गैरकानूनी तरीके से भारत में दाखिल हुए थे.

पूछताछ में पता चला कि पकड़े गए कई बांग्लादेशी नागरिक 18-19 साल पहले भारत आए थे. उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी और रोजगार की कमी के कारण वे रात के अंधेरे में सीमा पार कर भारत में घुसे. सीमा पार करने के बाद वे पहले पश्चिम बंगाल के कूचबिहार पहुंचे, फिर ट्रेन से दिल्ली आए. कुछ समय बाद वे हरियाणा के गांवों में चले गए, जहां उन्होंने ईंट भट्ठों पर मजदूरी शुरू की. इन भट्ठों के दूर-दराज के इलाकों में होने के कारण वे लंबे समय तक किसी की नजर में नहीं आए

RCB की जीत पर विजय माल्या ने दिया बयान, बोले– ‘ई साला कप नाम दे’; लोगों ने उठाई पैसे वापस करने की मांग

Vijay Mallya First Reaction: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने आईपीएल 2025 का खिताब जीत लिया है. बेंगलुरु ने फाइनल मुकाबले में पंजाब किंग्स को 6 रन से हरा दिया. बेंगलुरु के आईपीएल की पहली ट्रॉफी जीतने पर RCB के पूर्व मालिक विजय माल्या का रिएक्शन भी सामने आया है. विजय माल्या ने पूरी टीम को जीत की बधाई दी है. विजय माल्या ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि ‘ई साला कप नाम दे’, जो कि आरसीबी की टैग लाइन है.

विजय माल्या ने दी RCB को जीत की बधाई

विजय माल्या ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु आखिरकार 18 साल बाद आईपीएल चैंपियन बन गई है. आरसीबी के लिए 2025 का ये आईपीएल टूर्नामेंट काफी शानदार रहा’. विजय माल्या ने आगे लिखा कि ‘बेहतरीन कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ के साथ एक बैलेंस्ड टीम ने बोल्ड गेम खेला है. बहुत-बहुत बधाई! ई साला कप नामदे’.

लोगों ने मांग लिए विजय माल्या से पैसे

विजय माल्या को आरसीबी को जीत की बधाई देना भारी पड़ गया. लोगों ने माल्या से देश के पैस मांगने शुरू कर दिए. विजय माल्या ने बेंगलुरु के क्वालीफायर-ौ1 में पहुंचने पर भी बधाई दी थी. तब भी सोशल मीडिया पर लोगों ने विजय माल्या को पैसे देने के लिए ट्रोल किया था.

RCB ने जीता पहला खिताब

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम ने अपना पहला आईपीएल टाइटल जीत लिया है. बेंगलुरु की इस जीत पर टीम के स्टार प्लेयर विराट कोहली काफी इमोशनल नजर आए. आरसीबी के इस 18वें सीजन को जीतने पर विराट बीच स्टेडियम में ही रोने लगे. विराट आईपीएल की शुरुआत से इस टीम के साथ हैं और 3 जून की रात रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अपना पहला खिताब जीत लिया है.