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Sonakshi Sinha Speaks Up on Hera Pheri 3:जब ‘हेरा फेरी 3’ से बाहर हुए परेश रावल, सोनाक्षी सिन्हा ने कहा – “उनकी मौजूदगी ही फिल्म की जान है”

  एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘निकिता रॉय’ को लेकर चर्चा में हैं. इस बीच एक्ट्रेस ने मोस्ट-अवेटेड फिल्म ‘हेरा फेरी 3’ से परेश रावल के एग्जिट पर बात की है. सोनाक्षी का मानना है कि अपकमिंग फिल्म में अभिनेता परेश रावल के बिना मजा नहीं है. वो ‘बाबूराव गणपतराव आप्टे’ के बिना फिल्म के बारे में सोच भी नहीं  सकती हैं.

परेश रावल ने ‘हेरा फेरी’ फ्रेंचाइज में बाबूराव गणपतराव आप्टे का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीता था. सोनाक्षी का कहना है कि कॉमेडी फिल्म परेश रावल के बिना अधूरी है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए सोनाक्षी ने कहा- ‘मैं हेरा फेरी 3 परेश रावल के बिना सोच भी नहीं सकती. उनकी मौजूदगी इस फिल्म की जान है.’

सोशल मीडिया पोस्ट से किया खुलासा
हाल ही में परेश रावल ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वह ‘हेरा फेरी 3’ का हिस्सा नहीं होंगे. उन्होंने पोस्ट में उन्होंने बताया था कि ‘हेरा फेरी 3’ से उनके हटने का फैसला क्रिएटिव डिफ्रेंस की वजह से नहीं था. निर्देशक प्रियदर्शन के साथ भी उनका कोई मनमुटाव नहीं है.


‘निकिता रॉय’ में सोनाक्षी ने परेश रावल के साथ किया काम
सोनाक्षी सिन्हा ने इस दौरान अपनी फिल्म ‘निकिता रॉय’ में परेश रावल के साथ पहली बार काम करने का एक्सपीरियंस भी शेयर किया. उन्होंने कहा- ‘परेश रावल जैसे शानदार एक्टर के साथ स्क्रीन शेयर करना मेरे लिए सम्मान की बात थी. उनके काम और एक्टिंग की गहराई ने मुझे बहुत प्रभावित किया.’

जब उनसे पूछा गया कि वह परेश रावल को कॉमेडी किरदारों में ज्यादा पसंद करती हैं या गंभीर किरदारों में, तो सोनाक्षी ने कहा, ‘वो हर किरदार में कमाल करते हैं, चाहे वह कॉमेडी हो या गंभीर रोल. उनके लिए कोई एक चुनना मुश्किल है. ‘

‘निकिता रॉय’ की रिलीज डेट
सोनाक्षी की नई फिल्म ‘निकिता रॉय’ में वह परेश रावल, अर्जुन रामपाल और सुहैल नायर के साथ मुख्य भूमिका में नजर आएंगी. इस फिल्म के साथ उनके भाई कुश सिन्हा बतौर निर्देशक शुरुआत करने जा रहे हैं. यह फिल्म 27 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

Imran Khan Pakistan:इमरान खान को नहीं मिली राहत! लाहौर हाई कोर्ट ने याचिका की खारिज, जेल में ही रहेंगे – जानें क्या है 9 मई का मामला

 पाकिस्तान की एक अदालत ने मंगलवार को 9 मई के दंगों से जुड़े आठ आतंकवाद मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद जमानत का अनुरोध करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया.

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान पर 9 मई, 2023 की हिंसा के संबंध में लाहौर में कई मामले दर्ज हैं, जिसमें अपने समर्थकों को सरकारी और सैन्य भवनों पर हमला करने के लिए उकसाने का आरोप भी शामिल हैं. यह हिंसा इस्लामाबाद हाई कोर्ट परिसर से अर्धसैनिक रेंजर्स द्वारा इमरान की गिरफ्तारी के बाद भड़की थी.

अदालत के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘लाहौर उच्च न्यायालय (LHC) ने जिन्ना हाउस/लाहौर कोर कमांडर हाउस पर हमले और आगजनी की घटनाओं सहित नौ मई, 2023 के मामलों से संबंधित आठ मामलों के संबंध में इमरान खान द्वारा दायर सभी जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है.’’

इमरान खान के खिलाफ आठ केस

न्यायमूर्ति शहबाज रिजवी की अध्यक्षता वाली एलएचसी की दो-सदस्यीय पीठ ने आठ मामलों में खान द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया.

पीठ ने सोमवार को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इन आठ मामलों में जिन्ना हाउस हमला, अस्करी टॉवर हमला, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीटीआई-एन) कार्यालय में आगजनी, शादमान पुलिस थाने को आग लगाना, जिन्ना हाउस के पास पुलिस वाहनों को जलाना और शेरपाओ पुलिस पर आगजनी शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे इमरान खान

लाहौर की आतंकवाद-निरोधी अदालत ने पहले इन मामलों में खान की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने एलएचसी में इस फैसले को चुनौती दी थी. खान के एक वकील ने कहा कि वह लाहौर उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे. खान कई मामलों में लगभग दो साल से जेल में हैं.

इसके अलावा, उनकी पार्टी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि खान को एकांत कारावास में रखा गया है और उनके सेल की बिजली काट दी गई है. पीटीआई के वरिष्ठ नेता जुल्फी बुखारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इमरान खान को अलग-थलग रखा गया है, उन्हें वे बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं जिनके वे कानूनी तौर पर हकदार हैं.’’

Asim Munir Donald Trump Meet: पहले चीन से लिए करोड़ों डॉलर, अब अमेरिका को दिया प्रस्ताव – पाकिस्तान का दोहरा रवैया आया सामने

चीन का वफादार पाकिस्तान अब पैसों के लिए अमेरिका का गुनगान करने में लग गया है. हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बंद कमरे में बैठक की, जिसमें पाकिस्तान  ने अमेरिका को बलूचिस्तान की महत्वपूर्ण खनिज संपदा की पेशकश कर डाली. चीन इस जगह पर पहले ही करीब 60 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुका है.

बलूचिस्तान के खनिजों पर अमेरिका की नजर

चीन का सबसे ज्यादा निवेश चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत बुनियादी ढांचे और माइनिंग पर केंद्रित है. पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों और संसद में नेताओं की ओर से दिए गए बयानों से पता चलता है कि अमेरिका बलूचिस्तान के खनिज क्षेत्रों में कमर्शियल एंट्री चाह रहा है. इस क्षेत्र को लंबे समय से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है और जहां पहले से चीनी हितों का दबदबा रहा है.

बलूचिस्तान पाकिस्तान के कुल भूभाग का करीब 43 फीसदी है. यहां तांबा, लिथियम, सोना, कोयला और क्रोमाइट जैसे प्राकृतिक संपदा का भंडार है. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आसिम मुनीर और डोनाल्ड ट्रंप की बैठक में बलूचिस्तान के खनिजों पर चर्चा की गई.

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में उठा मुद्दा

अगर अमेरिका यहां अपनी पहुंच बना लेता है तो उन देशों पर उसकी निर्भरता कम हो जाएगी, जिसे वह अपना दुश्मन समझता है. पाकिस्तानी सांसद ने भी नेशनल असेंबली में इस मुद्दे को उठाया, जिसमें संकेत दिया कि जनरल मुनीर ने ट्रंप के साथ बलूचिस्तान के खनिजों को लेकर बातचीत की है. हालांकि अमेरिका ने इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है.

दूसरी तरफ अमेरिका यूक्रेन के साथ भी महत्वपूर्ण खनिजों के लिए 500 बिलियन डॉलर की डील पर चर्चा कर रहा है. इस डील का उद्देश्य लिथियम और अन्य संसाधनों को सुरक्षित करना है, जो अमेरिकी रक्षा प्रणालियों और इंडस्ट्रीज के लिए जरूरी है.

चीन ने इन क्षेत्रों में किया है 60 बिलियन डॉलर का निवेश

चीन बलूचिस्तान में CPEC के माध्यम से बंदरगाहों, सड़कों और खनन परियोजनाओं में बड़ा निवेश कर रहा है. चीन ने पाकिस्तान में CPEC गलियारे में लगभग 60 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसका अधिकांश हिस्सा बलूचिस्तान में है.

हालांकि स्थानीय संसाधनों के विदेशी दोहन का विरोध करने वाले बलूच अलगाववादी समूहों के हमलों से चीन को बड़ा झटका भी लगा है. इस क्षेत्र में अमेरिका की एंट्री से चीन के लिए चिंताएं पैदा हो सकती है.

MEA on Israel-Iran Conflict: ‘भारत अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार’ – सीजफायर के बाद ईरान और इजरायल को भारत का प्रस्ताव

ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष पर अब विराम लग गया है. ईरान और इजरायल ने सीजफायर का ऐलान कर दिया है. ईरान-इजरायल के संघर्ष के कारण पश्चिमी एशिया में तनाव की स्थिति बन गई थी. वहीं, इसे पश्चिमी एशिया के घटनाक्रमों पर मंगलवार (24 जून) को भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार (24 जून) को एक बयान जारी कर कहा, “हम ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष से संबंधित घटनाक्रमों पर रात भर नजर रख रहे हैं. इसमें ईरान की परमाणु सुविधाओं के खिलाफ अमेरिका की ओर से की गई कार्रवाई और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ ईरान की जवाबी कार्रवाई शामिल है.”

युद्धविराम में हम अमेरिका और कतर की भूमिका का करते हैं स्वागत- MEA

विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम समग्र और निरंतर क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता की संभावनाओं के बारे में गहराई से चिंतित हैं. हम ईरान और इजरायल के बीच युद्ध विराम की रिपोर्ट और इसे लाने में अमेरिका और कतर की ओर से निभाई गई भूमिका का हम स्वागत करते हैं.”

संघर्षों को हल करने के लिए वार्ता और कूटनीति केवल विकल्प- मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि हम दोहराना चाहते हैं कि क्षेत्र में कई संघर्षों को संबोधित करने और हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है.

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “भारत इन प्रयासों में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है और उम्मीद करता है कि सभी संबंधित पक्ष निरंतर शांति और स्थिरता की दिशा में काम करेंगे.”

12 दिनों के संघर्ष के बाद ईरान-इजरायल के बीच युद्ध विराम लागू

उल्लेखनीय है कि ईरान और इजरायल ने 12 दिनों के संघर्ष और लगातार जारी हमलों के बाद युद्धविराम की घोषणा की है. इन 12 दिनों ने दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कई ताकतवर और विनाशकारी मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए हमले किए. वहीं, इन दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष के कारण पश्चिमी एशिया में काफी ज्यादा तनाव देखा जा रहा था. ऐसे में अगर ईरान-इजरायल के बीच यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता, तो इसका प्रभाव दुनिया भर में हो सकता था.

Lumps in Stomach:पेट में दिखी गांठ – जानिए कब हो सकती है यह खतरे का संकेत?

 कल्पना कीजिए कि आप रोज की तरह अपने कपड़े पहन रहे हों और अचानक पेट पर हल्की-सी उभरी हुई गांठ महसूस होती है. कोई दर्द नहीं, न ही जलन, लेकिन कुछ “अलग” सा जरूर लगता है. आप इसे नज़रअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन शरीर का ये छोटा-सा बदलाव कभी-कभी किसी गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकता है. हमारा शरीर समय-समय पर संकेत देता है.  जरूरत बस इन्हें पहचानने और समझने की है. पेट में उभरी गांठ कई बार सामान्य हो सकती है, हालांकि कुछ मामलों में यह खतरे की घंटी भी साबित हो सकती है. तो आइए जानते हैं कि पेट में गांठ क्यों बनती है, इसके क्या कारण हो सकते हैं और किन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

पेट में गांठ बनने के संभावित कारण

हर्निया 

यह सबसे आम कारणों में से एक है। जब पेट की भीतरी दीवार कमजोर हो जाती है और आंत का कुछ हिस्सा बाहर की ओर उभर आता है, तो उसे हर्निया कहा जाता है. हर्निया की गांठ खड़े होने पर या खांसते समय ज्यादा उभरती है.

लिपोमा 

यह वसा फैट से बनी एक सॉफ्ट गांठ होती है जो आमतौर पर बिना दर्द की होती है। यह कैंसरस नहीं होती, लेकिन आकार में बढ़ सकती है।

सिस्ट 

सिस्ट तरल या अर्ध-ठोस पदार्थ से भरी गांठ होती है. यह स्किन के नीचे बनती है और कभी-कभी दर्द या सूजन पैदा कर सकती है.

इंफेक्शन या सूजन

पेट की त्वचा के नीचे बैक्टीरियल इंफेक्शन या लिम्फ नोड्स की सूजन के कारण भी गांठ बन सकती है. यह स्पर्श में गर्म और दर्दनाक हो सकती है.

ट्यूमर या कैंसर

यह कम ही होता है, लेकिन पेट में गांठ अगर धीरे-धीरे बढ़ रही है, कठोर है और उसमें दर्द नहीं हो रहा, तो यह किसी ट्यूमर या कैंसर का संकेत हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है.

गंभीर संकेत कब दिखते हैं

गांठ का आकार धीरे-धीरे बढ़ना

दर्द रहित लेकिन कठोर गांठ

गांठ के पास त्वचा का रंग बदलना

बुखार या वजन कम होना

गांठ में जलन, मरोड़ या पस बनना

पेट में उभरी गांठ एक आम लेकिन अनदेखी जाने वाली समस्या है. कई बार ये बिल्कुल सामान्य होती है, तो कभी यह किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत भी बन सकती है. इसलिए बेहतर यही है कि शरीर की हर छोटी-बड़ी बात को समझें और समय रहते सही कदम उठाएं.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.