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Shweta Tiwari Transferred Flat To Raja Chaudhary: राजा चौधरी से पलक तिवारी को दूर रखने के लिए श्वेता तिवारी ने खर्च किए थे लाखों रुपये

टीवी की पॉपुलर एक्ट्रेस श्वेता तिवारी की मैरिड लाइफ काफी विवादों में रही. एक्ट्रेस ने दो बार अपना घर बसाया और दोनों बार उनका तलाक हो गया. श्वेता ने पहली शादी 1998 में राजा चौधरी से की थी जिनसे उनकी एक बेटी पलक तिवारी भी हुई. शादी के 9 साल बाद उनका राजा से तलाक हो गया.

श्वेता तिवारी ने तलाक के दौरान राजा चौधरी पर घरेलू हिंसा जैसे कई संगीन आरोप लगाए थे. साथ ही एक्ट्रेस ने पूरी कोशिश की थी कि तलाक के बाद उनकी बेटी पलक तिवारी की कस्टडी हर हाल में उन्हें ही मिले. साथ ही वो अपनी बेटी को पिता राजा के साए से भी दूर रखना चाहती थीं. ऐसे में उन्होंने एक्स हसबैंड के साथ एक डील की थी.

श्वेता ने तलाक के लिए राजा को चुकाए थे लाखों
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि श्वेता तिवारी और राजा चौधरी के बीच एक समझौता हुआ था. श्वेता की लीगल टीम ने राजा के सामने शर्त रखी थी कि वो तलाक के बाद अपनी बेटी पलक से नहीं मिलेंगे. तब राजा ने इस शर्त को मानने के लिए अपनी एक शर्त रख दी थी. उन्होंने मलाड वाला घर जो कि श्वेता और उनके, दोनों के नाम था, उसे पूरी तरह से अपने नाम करवाने की डिमांड की थी.

श्वेता ने राजा की इस डिमांड को पूरा किया था और घर राजा के नाम कर दिया था, जिसकी कीमत 93 लाख रुपए बताई जाती है.

‘बेटी के बदले फ्लैट’ के दावे पर राजा ने तोड़ी चुप्पी
हालांकि राजा चौधरी ने अब तलाक के सालों बाद फ्लैट वाले समझौते पर बात की है. हिंदी रश को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा- ‘कोई भी मुझे फ्लैट किराए पर देने को तैयार नहीं था, इसलिए मुझे अपना फ्लैट हक के साथ मिल गया. वो मुझे कुछ भी नहीं देना चाहती थी, ये कोर्ट ही था जिसने मुझे फ्लैट दिया था. उसने मुझसे एक कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करवाए जिसमें कहा गया था कि वो मुझे तभी तलाक देगी जब मैं पलक से कभी नहीं मिलने के लिए सहमत हो जाऊंगा.’

‘श्वेता ने बेरहमी से मुझे मेरी बेटी से दूर कर दिया’
राजा ने आगे कहा- ‘हम मामले को सुलझाते हैं या नहीं, ये अलग बात है. अहम बात ये है कि इंसान होने के नाते हमें कम से कम एक बार इस मुद्दे पर बात करनी चाहिए थी. लेकिन उस दूरी को बनाने के बजाय श्वेता ने बेरहमी से मुझे मेरी बेटी से दूर कर दिया. ये सही नहीं है. उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो ज्यादा इंफ्लुएंशल और पावरफुल थी.’

सपा राज में व्यापारी दहशत में थे, योगी राज में मिला सम्मान और सुरक्षा: डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार को उस वक्त गर्माहट आ गई जब सरोजनीनगर के विधायक और भाजपा नेता डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयान पर पलटवार करते हुए सपा शासन के कार्यकाल में व्यापारी वर्ग की स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

डॉ. सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी का शासन व्यापारियों के लिए आपातकाल की तरह था, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश आज व्यापार, सुरक्षा और विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर है।

“सपा राज में हर दिन होते थे 76,500 अपराध” – डॉ. सिंह

डॉ. राजेश्वर सिंह ने आंकड़ों के साथ दावा किया कि 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में अपराधों का ग्राफ चरम पर था। उन्होंने बताया कि उस दौर में:

  • प्रतिदिन औसतन 76,50 अपराध दर्ज होते थे
  • 25,000 से अधिक हत्याएं हुईं
  • व्यापारी वर्ग रंगदारी, अपहरण, डकैती और फिरौती जैसी घटनाओं से त्रस्त था
  • पलायन और उद्योगों का बंद होना आम बात बन गई थी

योगी सरकार में ‘Zero Tolerance’ नीति का असर

  • डॉ. सिंह ने योगी आदित्यनाथ सरकार की Zero Tolerance Policy को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि:
  • अब तक 70,000 अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया
  • 1,000 से अधिक पर NSA के तहत कार्रवाई हुई
  • 200 से अधिक कुख्यात अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए

उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश देश का सबसे सुरक्षित राज्य बन चुका है, जहां व्यापारी निर्भय होकर अपने व्यापार को आगे बढ़ा रहे हैं।

राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय प्रगति

विधायक डॉ. सिंह ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा:

राज्य की GSDP ₹12 लाख करोड़ से बढ़कर ₹31 लाख करोड़ तक पहुंच गई है

प्रति व्यक्ति आय ₹45,000 से बढ़कर ₹1.2 लाख हो चुकी है

GST संग्रह अप्रैल 2025 में ₹9,956 करोड़ रहा

राज्य ने $21.98 बिलियन का विदेशी व्यापार किया

यह सभी आँकड़े दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश अब राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है।


🤝 व्यापारी हित में लागू की गई योजनाएं

डॉ. सिंह ने कहा कि योगी सरकार ने व्यापारियों के हितों की रक्षा और प्रोत्साहन के लिए कई योजनाएं शुरू कीं, जैसे:

व्यापारी कल्याण बोर्ड

भामाशाह सम्मान योजना

व्यापारी सुरक्षा फोरम

उन्होंने कहा कि यह योजनाएं केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।


🎯 ‘एक जिला एक माफिया’ से ‘एक जिला एक उत्पाद’ की ओर बढ़ता यूपी

सपा पर तंज कसते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा:

“जिस समाजवादी पार्टी को ‘एक जिला एक माफिया’ की नीति प्रिय थी, उसे ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) की नीति की समझ नहीं है। उत्तर प्रदेश अब समाज को जातियों में बाँटने की नहीं, एकजुट कर आगे बढ़ाने की राजनीति पर चल रहा है।”

उन्होंने सपा प्रमुख को जातिवाद का ज़हर फैलाने से बचने की चेतावनी भी दी और कहा कि इससे युवाओं का भविष्य और राज्य का विकास दोनों बाधित होता है।


🏆 भामाशाह सम्मान समारोह में भी व्यापारी सम्मानित

गौरतलब है कि बीते शनिवार को लोक भवन, लखनऊ में आयोजित ‘भामाशाह सम्मान समारोह’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के श्रेष्ठ GST दाताओं को सम्मानित किया। इस समारोह में डॉ. राजेश्वर सिंह भी मंच पर उपस्थित रहे।

उन्होंने मंच से कहा:

“उत्तर प्रदेश का व्यापारी अब सिर्फ़ करदाता नहीं, बल्कि देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक भागीदार है। यह सम्मान उनकी निष्ठा और योगदान का प्रतीक है।”


📌 निष्कर्ष:

डॉ. राजेश्वर सिंह के ताजा बयान ने प्रदेश की राजनीति में स्पष्ट संदेश दिया है – “अपराध और जातिवाद से बाहर निकलकर उत्तर प्रदेश अब सुरक्षा, विकास और सम्मान की राह पर है।”
उन्होंने साफ किया कि भय और भ्रष्टाचार की जगह अब नीतियों और निवेश ने ले ली है, और यह परिवर्तन व्यापारियों के माध्यम से ही आगे बढ़ रहा है।

रात में बार-बार नींद खुलने पर पानी पीने की आदत? जानिए ये किस स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकती है

कई लोग रात में प्यास की वजह से बार-बार जाग जाते हैं. अक्सर इसे नॉर्मल हैबिट माना जाता है, लेकिन यह आदत लगातार कायम रहे तो किसी गंभीर बीमारी का सिग्नल भी हो सकती है. आइए जानते हैं कि रात में बार-बार लगने वाली प्यास का कनेक्शन किन बीमारियों से होता है?

रात में बार-बार प्यास लगने की वजह क्या?

कई लोगों को रात में बार-बार प्यास लगती है. इसकी वजह से उन्हें नींद से जागकर पानी पीने की जरूरत महसूस होती है. मेडिकल टर्म में इस कंडीशन को नॉक्टूरिया (रात में बार-बार पेशाब जाना) या पॉलिडिप्सिया (अत्यधिक प्यास) कहा जाता है, जिसे नॉर्मल नहीं माना जाता है. जयपुर स्थित नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉ. प्रवीण गुप्ता के मुताबिक, रात में बार-बार प्यास लगना और पानी पीने की जरूरत आमतौर पर डिहाइड्रेशन, डायबिटीज या किडनी से संबंधित दिक्कतों का सिग्नल हो सकती है. अगर यह आदत काफी वक्त तक बनी रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

इन बीमारियों का हो सकता है खतरा

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी की मानें तो रात में बार-बार प्यास लगने और पानी पीने का कनेक्शन कई बीमारियों से हो सकता है. आइए आपको इनके कारण बताते हैं.

डायबिटीज मेलिटस (Diabetes Mellitus): रात में ज्यादा प्यास लगने की वजह टाइप 2 डायबिटीज हो सकती है. दरअसल, जब ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है तो हमारा एक्स्ट्रा ग्लूकोज को यूरिन के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश करता है. इसकी वजह से बार-बार पेशाब आता है और डिहाइड्रेशन की वजह से बार-बार प्यास लगती है.

डायबिटीज इन्सिपिडस (Diabetes Insipidus): जब हमारी किडनी शरीर में पानी का बैलेंस बनाने में नाकाम होती है तो इसे डायबिटीज इन्सिपिडस नाम की रेयर बीमारी का लक्षण माना जाता है. इसकी वजह से बार-बार प्यास लगती है और बार-बार पेशाब जाना पड़ता है. यह दिक्कत हार्मोनल डिसबैलेंस खासकर एंटी-डाइयूरेटिक हार्मोन (ADH) की कमी के कारण होती है.

किडनी की दिक्कतें: क्रोनिक किडनी डिजीज होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ सकता है. इसकी वजह से रात में बार-बार प्यास लगती है. अगर रात में आपकी भी नींद बार-बार प्यास लगने और पेशाब जाने की वजह से टूट रही है तो किडनी की जांच कराने की जरूरत है.

स्लीप एपनिया: स्लीप एपनिया बीमारी में नींद के दौरान सांस रुकने की दिक्कत होती है. इसकी वजह से मुंह सूखने और बार-बार प्यास लगने की दिक्कत हो सकती है. इसका कनेक्शन खर्राटों और रात में बार-बार जागने से भी होता है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

हिमाचल में स्थित कसौली: शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और औपनिवेशिक विरासत का शानदार मेल

हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िले में स्थित कसौली एक छोटा लेकिन बेहद आकर्षक और शांत पहाड़ी स्थल है। समुद्र तल से लगभग 1,900 मीटर की ऊँचाई पर बसा कसौली अपनी हरियाली, शांत वातावरण, औपनिवेशिक इमारतों और मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। यह एक आदर्श स्थान है उन लोगों के लिए जो भीड़भाड़ और शोरगुल से दूर कुछ सुकून के पल बिताना चाहते हैं।

कसौली का इतिहास और विशेषता

कसौली की स्थापना 1842 में ब्रिटिश राज के दौरान एक सैन्य छावनी के रूप में हुई थी। यहाँ आज भी कई ब्रिटिश-युग की इमारतें और चर्च मौजूद हैं, जो इसके इतिहास को जीवंत बनाए रखते हैं। साथ ही, यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और साफ-सुथरी जलवायु इसे एक बेहतरीन हिल स्टेशन बनाती है।

प्रमुख आकर्षण

1. मंकी पॉइंट (Monkey Point)

कसौली का सबसे ऊँचा स्थान मंकी पॉइंट है, जहाँ से सतलुज नदी, चंडीगढ़ और शिमला के दृश्य साफ दिखाई देते हैं। यहाँ एक छोटा हनुमान मंदिर भी है, जो धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य दोनों के लिए प्रसिद्ध है।

2. गिल्बर्ट ट्रेल

प्राकृतिक प्रेमियों और वॉकिंग के शौकीनों के लिए यह एक आदर्श जगह है। यह पगडंडी देवदार और ओक के पेड़ों के बीच से गुजरती है और यहां की शांति आत्मा को सुकून देती है।

3. क्राइस्ट चर्च

1853 में बना यह चर्च कसौली की सबसे पुरानी इमारतों में से एक है। इसकी गोथिक शैली की वास्तुकला और रंगीन कांच की खिड़कियाँ देखने लायक हैं।

4. सनसेट पॉइंट

शाम के समय यहाँ से सूर्यास्त का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है। पहाड़ियों के बीच सूरज को डूबते हुए देखना एक अविस्मरणीय अनुभव है।

5. कसौली ब्रुअरी

यह एशिया की सबसे पुरानी डिस्टिलरी मानी जाती है, जो अब भी संचालित हो रही है। यह ब्रिटिश काल की विरासत को संजोए हुए है।

कसौली में करने योग्य गतिविधियाँ

– प्राकृतिक ट्रेल्स पर वॉकिंग और ट्रेकिंग

– स्थानीय बाजारों में शॉपिंग (हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र, जैम आदि)

– फोटोग्राफी और बर्ड वॉचिंग

– चर्चों और औपनिवेशिक इमारतों की खोज

– शांत वातावरण में ध्यान और योग

यात्रा का सर्वोत्तम समय

मार्च से जून: गर्मियों में ठंडक का आनंद लेने के लिए उपयुक्त।

सितंबर से नवंबर: साफ आसमान और हरियाली देखने के लिए।

दिसंबर से फरवरी: बर्फबारी का आनंद लेने वालों के लिए बेहतरीन समय।

कैसे पहुँचे कसौली?

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा चंडीगढ़ (लगभग 60 किमी) है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन कालका (लगभग 25 किमी) है, जहाँ से टैक्सी या बस ली जा सकती है।

सड़क मार्ग: चंडीगढ़, शिमला, दिल्ली से सीधी बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।

कसौली एक ऐसा पर्यटन स्थल है जहाँ प्रकृति की गोद में शांति, सौंदर्य और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह उन लोगों के लिए आदर्श स्थान है जो जीवन की दौड़-भाग से दूर कुछ पल सुकून और ताजगी के साथ बिताना चाहते हैं।

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Health Tips: मॉनसून में बारिश के बाद तेज धूप से हो सकती है स्किन एलर्जी, जानिए कैसे करें त्वचा की सही देखभाल

मॉनसून में बारिश हर किसी को अच्छी लगती है, क्योंकि सुहाना मौसम ठंडक और ताजगी लाता है. हालांकि, इस मौसम में स्किन के लिए कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं. काफी लोग तो ऐसे होते हैं, जिन्हें बारिश के बाद चटक धूप के कारण स्किन एलर्जी होने लगती है. आइए बताते हैं कि इस मौसम में अपनी स्किन का ख्याल कैसे रखा जाए?

मॉनसून में स्किन एलर्जी के कारण

मॉनसून में बारिश और नमी के कारण स्किन संबंधित दिक्कतें बढ़ जाती हैं. दरअसल, बारिश के बाद चटक धूप और उमस से स्किन के रोमछिद्र बंद हो सकते हैं. दिल्ली स्थित पीएसआरआई अस्पताल के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. भावुक धीर के मुताबिक, मॉनसून में नमी, पसीना, और गंदगी स्किन पर जमा हो जाते हैं, जिससे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं. बारिश के बाद की धूप में यूवी रेज स्किन को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे रैशेज, खुजली और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.

इन वजहों से भी होती है दिक्कत

    • नमी और उमस: मॉनसून में हवा में नमी का लेवल बढ़ जाता है, जिससे स्किन चिपचिपी हो जाती है. यह फंगल इन्फेक्शन जैसे दाद और एथलीट फुट का कारण बनता है.
    • गीले कपड़े और जूते: बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े या जूते लंबे समय तक पहनने से स्किन पर नमी बनी रहती है, जो फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
    • धूप का असर: बारिश के बाद चटक धूप में मौजूद यूवी रेज से स्किन को नुकसान होता है.  दरअसल, धूप से स्किन को होने वाला नुकसान कई घंटों तक रह सकता है, जिससे एलर्जी और कैंसर का खतरा बढ़ता है.
    • गंदे पानी का संपर्क: बारिश का पानी गंदगी और प्रदूषकों के साथ मिलकर स्किन पर जलन और रैशेज पैदा कर सकता है.
    • डाइट में लापरवाही: तला-भुना भोजन और पोषक तत्वों की कमी से स्किन की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है.

ऐसे होते हैं स्किन एलर्जी के लक्षण

    • खुजली और जलन: स्किन पर लगातार खुजली होना स्किन एलर्जी का लक्षण है. इसकी वजह से खासकर अंडरआर्म्स, पैरों की उंगलियों और गर्दन के आसपास लगातार खुजली होती है.
    • रैशेज और चकत्ते: अगर स्किन पर लाल चकत्ते या छोटे-छोटे दाने हो रहे हैं तो आपको इलाज की जरूरत है. यह भी स्किन एलर्जी का लक्षण होता है.
    • पपड़ी और रूखापन: कुछ लोगों की स्किन सूख जाती है और उस पर पपड़ी जम जाती है. यह भी स्किन एलर्जी का सिग्नल होता है.
    • फोड़े-फुंसी: छोटे-छोटे फोड़े या मुंहासे भी दर्दनाक हो सकते हैं. वहीं, गंभीर इंफेक्शन होने पर स्किन से बदबू भी आ सकती है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें