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टेस्ट के बाद वनडे सीरीज में भी बांग्लादेश को झेलनी पड़ी करारी शिकस्त, दोहरी मार से जूझी टीम

बांग्लादेश की टीम इन दिनों ऑल फॉर्मेट सीरीज के लिए श्रीलंका दौरे पर है। दोनों देशों के बीच हाल ही में तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली गई, जिसे श्रीलंका ने 2-1 से अपने नाम किया। सीरीज के तीसरे और आखिरी वनडे मैच में बांग्लादेश को 99 रनों से हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए कुसल मेंडिस की शतकीय पारी के बदौलत 7 विकेट के नुकसान पर 285 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 186 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। इससे पहले दोनों टीमों के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली गई थी, जिसे श्रीलंका ने 1-0 से अपने नाम किया था।

कुसल मेंडिस ने जड़ा वनडे करियर का छठा शतक

श्रीलंका ने इस मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका को पहला झटका 13 के स्कोर पर लगा, जब सलामी बल्लेबाज निशान मदुशंका 1 रन बनाकर आउट हुए। उनके बाद निसंका और कुसल मेंडिस के बीच 56 रन की पार्टनरशिप हुई। निसंका इस मैच में 47 गेंदों में 35 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद कप्तान चरिथ असलंका ने कुसल मेंडिस के साथ मिलकर पारी को संभाला। दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 124 रनों की पार्टनरशिप हुई। असलंका 68 गेंदों में 58 रन बनाकर आउट हुए, तो वहीं कुसल मेंडिस ने अपने करियर का छठा वनडे शतक लगाया। वह 114 गेंदों में 124 रन बनाकर आउट हुए। इन दोनों बल्लेबाजों के आउट होने के बाद श्रीलंका का कोई भी बल्लेबाज क्रीज पर टिक नहीं पाया। बांग्लादेश की तरफ से तस्कीन अहमद और मेहदी हसन मिराज ने दो-दो विकेट लिए। 

श्रीलंका बॉलर्स के सामने बांग्लादेश के बल्लेबाज हुए फ्लॉप

बांग्लादेश टीम की बल्लेबाजी इस मैच में बेहद खराब रही। 286 रनों के जवाब में बांग्लादेश की टीम शुरुआत से ही विकेट गंवाती चली गई। तंजीद हसन के रूप में टीम को पहला झटका लगा, जो 17 रन बनाकर आउट हुए। नंबर तीन पर बैटिंग करने आए नजमुल हसन शान्तो इस मैच में अपना खाता तक नहीं खोल पाए। तौहीद हृदोय ने इस मैच में जरूर अर्धशतक लगाया लेकिन उनके बाद के बल्लेबाज इस मैच में कुछ खास नहीं कर पाए। हृदोय ने इस मैच में 78 गेंदों पर 51 रन बनाए। बांग्लादेश की पूरी टीम 40 ओवर भी बैटिंग नहीं कर पाई और 39.4 ओवर में 186 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। श्रीलंका के तरफ से गेंदबाजी में असिथा फर्नांडो और दुष्मंता चमीरा ने 3-3 विकेट निकाले। उनके अलावा दुनिथ वेलालेग और वनिंदु हसरंगा ने दो-दो विकेट झटके।

‘महावतार नरसिम्हा’ की गूंज अब सिनेमाघरों में सुनाई देगी, धर्म की महायात्रा का होगा शुभारंभ

केजीएफ और कांतारा बना चुके प्रोडक्शन हाउस होम्बाले फिल्म्स ने कुछ माह पहले ही ‘महावतार नरसिम्हा’ का ऐलान करके दर्शकों को खुश कर दिया था और अब मेकर्स की ओर से इसकी रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया गया है। कल यानी 9 जुलाई को फिल्म का ट्रेलर जारी किया जाएगा और इसी महीने 25 जुलाई को फिल्म दर्शकों के बीच दस्तक देगी। महावतार नरसिम्हा का मचनवेटेड ट्रेलर कल शाम 5:22 बजे पावन भूमि वृंदावन में जारी किया जाएगा। मेकर्स ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी शेयर की है।

25 जुलाई को रिलीज होगी फिल्म

इस खास मौके की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा है- “तैयार हो जाइए गर्जना के लिए। न रोके जाने वाला दिव्य प्रकोप अब जाग चुका है! #MahavatarNarsimha का ट्रेलर कल शाम 5:22 बजे होगा रिलीज़। 25 जुलाई 2025 को सिनेमाघरों में दहाड़ते हुए आ रही है ये फिल्म, 3D में!”

होम्बले फिल्म्स का पोस्ट

भगवान विष्णु के दस अवतारों की गाता बताएगा होम्बले फिल्म्स

होम्बले फिल्म्स और क्लीम प्रोडक्शन्स ने पहले ही इस ग्रैंड एनिमेटेड फ्रैंचाइजी की आधिकारिक लाइनअप जारी कर दी थी, जिसेक साथ बताया गया कि अगले एक दशक तक भगवान विष्णु के दस दिव्य अवतारों की गाथा दर्शकों को दिखाई और बताई जाएगी। इस यूनिवर्स की शुरुआत ‘महावतार नरसिम्हा’ (2025) से हो रही है, जो 25 जुलाई को रिलीज होगी।

महावतार नरसिम्हा के बाद दस्तक देंगी ये फिल्में

महावतार नरसिम्हा के बाद इसके बाद ‘महावतार परशुराम’ (2027), ‘महावतार रघुनंदन’ (2029), ‘महावतार द्वारकाधीश’ (2031), ‘महावतार गोकुलानंद’ (2033), ‘महावतार कल्कि पार्ट 1’ (2035) और ‘महावतार कल्कि पार्ट 2’ (2037) रिलीज होंगी। ये यूनिवर्स भारतीय माइथोलॉजी को नई तकनीक और भव्यता के साथ दर्शकों के सामने पेश करेगा। महावतार नरसिम्हा का डायरेक्शन अश्विन कुमार ने किया है, और इसे शिल्पा धवन, कुशल देसाई, और चैतन्य देसाई ने कलीम प्रोडक्शंस के तहत प्रोड्यूस किया है।

सदरौना से अयोध्या तक गूंजा रामनाम: श्रद्धा और सेवा का अद्वितीय संगम बनी डॉ. राजेश्वर सिंह की 44वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा

  • सरोजनीनगर से अयोध्या तक श्रद्धा और सेवा से भरी 44वीं रामरथ यात्रा का आयोजन हुआ।
  • विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मातृ स्मृति में निःशुल्क अयोध्या दर्शन यात्रा की पहल की।
  • श्रद्धालुओं ने सरयू स्नान, हनुमानगढ़ी और श्रीराम जन्मभूमि के दर्शन कर पुण्य लाभ लिया।
  • यात्रा में भोजन, चिकित्सा, परिवहन और सेवा व्यवस्था को सुचारू रूप से संपन्न कराया गया।
  • यह यात्रा श्रद्धा, संस्कृति और संवेदनशील नेतृत्व का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।

लखनऊ: आस्था जब सेवा से जुड़ती है, श्रद्धा जब लोकगीतों में बहती है और नेतृत्व जब संवेदना से संचालित हो—तो ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ जैसा अनुपम दृश्य सामने आता है। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा स्वर्गीय माता श्रीमती तारा सिंह की स्मृति में चलाई जा रही यह सेवा यात्रा मंगलवार को अपने 44वें चरण में पहुंची।

काशीराम कॉलोनी (सदरौना) से अयोध्या के लिए रवाना हुए श्रद्धालुओं का स्वागत ढोलक, करताल, भजन और रामधुन की ध्वनि से हुआ। यात्रा में महिलाओं, वृद्धजनों और युवाओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। डॉ. सिंह की पहल से यह निःशुल्क बस यात्रा अब तक हजारों श्रद्धालुओं को श्रीराम जन्मभूमि तक पहुंचा चुकी है।

दिव्यता से भरपूर अयोध्या दर्शन

अयोध्या पहुंचकर श्रद्धालुओं ने पहले सरयू में पुण्य स्नान किया, फिर हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के दर्शन और अंत में रामलला के भव्य मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान कई वृद्ध श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं—यह केवल तीर्थ नहीं, भावनाओं की तपस्या का प्रतिफल था।

व्यवस्थित सेवा, संपूर्ण व्यवस्था

पूरी यात्रा के दौरान विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की टीम ने भोजन, जलपान, चिकित्सा, लोकल कन्वेंस और दर्शन व्यवस्था को सुसंगठित तरीके से संचालित किया। श्रद्धालुओं को घर से लाना, दर्शन कराना और सम्मानपूर्वक वापस पहुंचाना—हर पहलू में सेवा की भावना स्पष्ट दिखाई दी।

जनता का भावुक आभार

एक वृद्ध श्रद्धालु ने कहा, “जन्म लिया था, अब दर्शन भी हो गए, इस जीवन में और क्या चाहिए।”

एक महिला श्रद्धालु की प्रतिक्रिया थी, “अयोध्या जाना एक सपना था, लेकिन विधायक जी की वजह से यह इतना आत्मिक और सजीव होगा, कभी सोचा नहीं था।”

सेवा, संस्कृति और संवेदना का समन्वय

डॉ. राजेश्वर सिंह की ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ न सिर्फ धार्मिक यात्रा है, बल्कि यह सांस्कृतिक जागरूकता, समाजिक संवेदना और उत्तरदायी जनप्रतिनिधित्व का जीवंत उदाहरण है। यह यात्रा बताती है कि जब नेतृत्व श्रद्धा और सेवा से जुड़ता है, तो जनकल्याण के ऐसे मॉडल बनते हैं जो प्रेरणादायक भी होते हैं और अनुकरणीय भी।

जुलाई में फैमिली के साथ घूमने के लिए ये जगहें हैं सबसे बेहतरीन, रोमांच और मस्ती से भरपूर होगी आपकी ट्रिप

बारिश का मौसम न सिर्फ उमस भरी गर्मी से राहत मिलती है, बल्कि प्रकृति की खूबसूरती को भी कई गुना बढ़ा देती है। बारिश की बूंदे जब भी धरती पर पड़ती हैं, तो भारत की कई जगहें जन्नत जैसी लगती हैं। जुलाई का महीना घूमने के शौकीन लोगों के लिए काफी खास होता है। यह मानसून का महीना होता है, जिसमें बारिश के हल्की फुहारें आपको भिगो देती हैं। साथ ही गर्मी से भी राहत दिला सकती हैं।

अगर आप भी जुलाई के महीने में किसी ऐसी जगह पर जाना चाहते हैं, जहां पर ठंडी हवाएं, खूबसूरत नजारे, एडवेंचर और सुकून भरी छुट्टियां मिल सकें। तो यह आर्टिकल आपके लिए है। क्योंकि आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आपको ठंडा मौसम, खूबसूरत नजारे, सुकून और एडवेंचर एक साथ मिल जाएगा।

माउंट आबू, राजस्थान

अगर आप रेगिस्तान में हरियाली देखना चाहते हैं, तो आपको यहां के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू जाना चाहिए। जुलाई के महीने में यहां की हरियाली और ठंडा मौसम इस जगह को आकर्षक बनाता है। यहां पर आप नक्की झील में नौकाविहार का लुत्फ उठा सकते हैं। गुरु शिखर से आश्चर्यजनक नजारे और दिलवाड़ा मंदिरों की सुंदरता को निहार सकते हैं। माउंट आबू में आप बोटिंग, ट्रेकिंग और फोटोग्राफी कर सकते हैं। वहीं शाम के समय आप झील के किनारे बेहतरीन समय बिता सकते हैं।

महाबलेश्वर, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में सह्याद्रि की पहाड़ियों में बसा महाबलेश्वर बारिश के मौसम में हरियाली और बादलों से घिरा रहता है। यहां के वॉटरफॉल्स, घाटियां और व्यू पॉइंट्स आपका मन मोह लेंगे। सफर के दौरान आपको प्रतापगढ़ किले की ट्रेकिंग, लिंगमाला झरना और वेन्ना लेक की सवारी आपके अनुभव को बेस्ट बना देगा।

चेरापूंजी, मेघालय

भारत की सबसे ज्यादा बारिश वाली जगहों में चेरापूंजी का नाम आता है। जुलाई में चेरापूंजी की खूबसूरती देखने लायक होती है। मेघालय की इस खूबसूरत जगह पर बारिश भी अद्भुत बन जाती है। यहां की गुफाएं, लिविंग रूट ब्रिज और झरने आपके सफर में रोमांच को भर देते हैं। चेरापूंजी में आप नोहकलिकाई झरना और उमशियांग रूट ब्रिज घूम सकते हैं।

स्पीति वैली, हिमाचल

जुलाई के महीने में जब बर्फ पिघल चुकी होती है, तो हिमाचल प्रदेश की स्पीति वैली एक नए रूप में दिखती है। यहां के मठ, रोड ट्रिप एडवेंचर और लामा संस्कृति आपको एक अलग एहसास दिलाएंगी। अगर आप रोमांच, शांति और सुकून पाने की चाहत रखते हैं, तो आपको जुलाई में स्पीति वैली जरूर जाना चाहिए। स्पीति वैली में मठ और चंद्रताल झील कैंपिंग काफी फेमस है।

वायनाड, केरल

मानसून का सबसे सुंदर नजारा हरियाली के बीच अधिक देखने को मिलता है। हरी-भरी मसालों की घाटी की सैर के लिए आप केरल के वायनाड की ट्रिप प्लान कर सकते हैं। मानसून में केरल की यह जगह सपनों की दुनिया जैसी लगती है। वायनाड के वॉटरफॉल्स, कॉफी एस्टेट्स और ट्रेक्स मानसून को वाकई जादुई बना देते हैं। यहां पर घूमने के लिहाज से कई शानदार जगहें हैं। आप वायनाड में मीनमुट्टी वॉटरफॉल और एडक्कल गुफाएं आदि देख सकते हैं।

Health Tips: हर साल दुनियाभर में लाखों जिंदगियां निगल जाता है ये कैंसर, आंकड़े जानकर दहल जाएगा दिल

फेफड़ों का कैंसर: एक खतरनाक सच्चाई

फेफड़ों का कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख और जानलेवा कारण बन चुका है। इसके आंकड़े इतने डराने वाले हैं कि किसी का भी दिल दहल जाए। यह बीमारी सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही नहीं होती, बल्कि बढ़ते वायु प्रदूषण और अन्य कारणों से अब नॉन-स्मोकर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

डरावने आंकड़े

  • सबसे ज्यादा मौतें: फेफड़ों का कैंसर कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। हर साल करीब 18 लाख लोग इससे अपनी जान गंवाते हैं। 2020 में, कुल कैंसर से हुई मौतों में 18% मौतें इसी के कारण हुई थीं।
  • नए मरीजों की संख्या: 2020 में दुनियाभर में 22 लाख से ज्यादा नए केस सामने आए। अनुमान है कि 2040 तक यह संख्या बढ़कर 36 लाख से ज्यादा हो सकती है।
  • कम सर्वाइवल रेट: फेफड़ों के कैंसर के मरीजों में से सिर्फ 15% लोग ही 5 साल तक जीवित रह पाते हैं, क्योंकि अक्सर इसका पता तब चलता है जब यह बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।

चिंताजनक बातें

  • सिर्फ धूम्रपान ही जिम्मेदार नहीं: करीब 85% मामलों में धूम्रपान इसकी वजह है, लेकिन वायु प्रदूषण, अनुवांशिक कारण, निष्क्रिय धूम्रपान (पास में बैठकर धुआं लेना), काम की जगह पर एस्बेस्टस और डीज़ल धुएं का संपर्क, और कुछ फेफड़ों की पुरानी बीमारियां भी इसकी बड़ी वजह हैं।
  • नॉन-स्मोकर्स भी हो रहे शिकार: एक रिसर्च के मुताबिक, भारत में करीब 50% फेफड़ों के कैंसर के मरीज धूम्रपान नहीं करते थे। इनमें से 70% मरीज 50 साल से कम उम्र के थे और 30 साल से कम उम्र के मरीज सभी नॉन-स्मोकर्स थे। महिलाओं में भी इसके केस बढ़ रहे हैं।

समस्या कब बनती है गंभीर?

  • इस बीमारी के लक्षण जब सामने आते हैं, तब तक यह काफी फैल चुकी होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है।

बचाव ही सबसे अच्छा उपाय है

फेफड़ों के कैंसर से बचाव और इसके बारे में जागरूकता बेहद जरूरी है:

  • धूम्रपान तुरंत छोड़ें
  • वायु प्रदूषण से बचाव करें
  • नियमित हेल्थ चेकअप कराएं
  • लक्षणों जैसे कि लंबे समय तक रहने वाली खांसी, सांस लेने में तकलीफ, बार-बार सीने में इंफेक्शन या खांसी में खून आने को नजरअंदाज न करें।

हर साल 1 अगस्त को “वर्ल्ड लंग कैंसर डे” मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस गंभीर बीमारी के बारे में जागरूक किया जा सके। आइए, हम सब मिलकर इस “साइलेंट किलर” के खिलाफ जागरूकता फैलाएं और अपने फेफड़ों का ख्याल रखें।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।