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पीएम मोदी ने किंग चार्ल्स से की मुलाकात, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत भेंट किया यादगार पौधा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय यूनाइटेड किंगडम (UK) की यात्रा पर हैं. इस दौरान पीएम मोदी ने गुरुवार (24 जुलाई, 2025) को ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स III से भी मुलाकात की. किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने उन्हें एक पौधा भेंट के रूप में दिया. पीएम मोदी और किंग चार्ल्स की मुलाकात को लेकर द रॉयल फैमिली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गुरुवार (24 जुलाई, 2025) की रात एक पोस्ट शेयर किया.

द रॉयल फैमिली ने एक्स पर किया पोस्ट

एक्स पर अपने पोस्ट में द रॉयल फैमिली ने कहा, “आज, गुरुवार (24 जुलाई) की दोपहर ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स III ने सैंड्रिंघम हाउस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी की ओर से किंग चार्ल्स को एक पौधा भेंट के रूप में दिया गया. इस पौधे को पतझड़ के मौसम में लगाया जाएगा.”

पोस्ट में आगे कहा गया, “यह पौधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से स्वच्छ पर्यावरण के लिए शुरू किए गए अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ से प्रेरित है. प्रधानमंत्री मोदी का यह अभियान लोगों को अपनी माताओं की याद में एक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है.”

पीएम मोदी ने किंग चार्ल्स को कौन सा पौधा भेंट में दिया?

यूनाइटेड किंगडम (UK) के राजा किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ओर से जो पौधा भेंट में दिया गया, उसका नाम डेविडिया इनवोलूक्राटा सोनोमा कहते हैं. इस आमतौर पर सोनोमा डव ट्री या हैंकरचीफ ट्री भी कहा जाता है. यह एक तरह का सजावटी पौधा है, जो जल्दी और अधिक मात्रा में फूल देने के लिए जाना जाता है.

जहां डेविडिया इनवोलूक्राटा के सामान्य प्रजाति को पौधों में फूल आने में 10 से 20 साल लगते हैं. वहीं, सोनोमा प्रजाति का पेड़ सिर्फ 2 से 3 सालों में ही फूल देना शुरू कर देता है. इस पौधे की सबसे खास खुबी इसकी दो बड़ी सफेद पंखुडियां हैं, जो शाखाओं से लटकते हुए रूमाल की तरह लगती है और बसंत ऋतु के आखिरी मौसम में एक मनमोहक दृश्य पैदा करती हैं.

मांडू पर्यटन: प्रेम, वास्तुकला और इतिहास से सजी एक अनोखी धरोहर नगरी

मध्य प्रदेश के धार ज़िले में स्थित मांडू (Mandu), जिसे “मांडवगढ़” या “शादीशुदा पत्थरों का शहर” भी कहा जाता है, भारतीय पर्यटन मानचित्र पर एक अनूठा और ऐतिहासिक स्थल है। पहाड़ियों पर बसा यह नगर न केवल स्थापत्य कला और प्राचीन स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि रानी रूपमती और बाज बहादुर की अमर प्रेम कहानी के लिए भी मशहूर है। मांडू की हवाओं में इतिहास की गूंज, प्रेम की सरगम और स्थापत्य का सौंदर्य साथ-साथ बहता है।

मांडू का ऐतिहासिक परिचय

मांडू का इतिहास लगभग 6वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसका स्वर्ण युग मालवा सल्तनत (15वीं सदी) के दौरान आया। इस दौरान यहाँ कई भव्य महलों, मस्जिदों, बावड़ियों और दरवाजों का निर्माण हुआ। मांडू की भौगोलिक स्थिति— विंध्याचल की पहाड़ियों पर और नर्मदा घाटी के किनारे— इसे एक स्वाभाविक किला बनाती है

मांडू के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. जहाज़ महल

यह महल दो झीलों— कपूर तालाब और मुंज तालाब— के बीच स्थित है, जिससे यह एक जहाज़ की तरह प्रतीत होता है। इसका निर्माण 15वीं सदी में सुल्तान ग़ियासुद्दीन खिलजी ने अपनी 15,000 रानियों के लिए करवाया था। रात्रि में इसका प्रतिबिंब जल में झलकता है, जो एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।

2. हिंदोला महल

हिंदोला (झूला) महल अपनी झुकी हुई दीवारों के कारण प्रसिद्ध है। इसका उपयोग दरबारी सभाओं के लिए किया जाता था। इसकी स्थापत्य शैली वास्तुकला के चमत्कारों में गिनी जाती है।

3. रूपमती महल

यह वह स्थान है जहाँ से रानी रूपमती नर्मदा नदी को निहारती थीं। यह प्रेम कहानी का सबसे भावनात्मक स्थल है, जहाँ से मांडू की घाटी और नर्मदा के दर्शन होते हैं।

4. बाज बहादुर महल

यह महल मांडू के अंतिम स्वतंत्र शासक बाज बहादुर का निवास था। इसकी वास्तुकला में राजपूत और मुस्लिम शैलियों का संगम देखने को मिलता है।

5. जामा मस्जिद

यह मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद से प्रेरित है और मांडू के स्थापत्य वैभव को दर्शाती है। इसके विशाल प्रांगण और सुंदर मेहराबें इसकी विशेषता हैं।

6. रेवा कुंड

यह पवित्र कुंड नर्मदा नदी को समर्पित है और माना जाता है कि रूपमती इसी से जल ग्रहण करती थीं।

मांडू उत्सव

प्रत्येक वर्ष दिसंबर-जनवरी के महीने में “मांडू उत्सव” का आयोजन होता है, जिसमें स्थानीय लोक-संगीत, नृत्य, कला प्रदर्शन, साइकिल टूर और हॉट एयर बलून जैसी गतिविधियाँ होती हैं। यह उत्सव मांडू को जीवंत रूप देता है।

कैसे पहुँचे?

निकटतम हवाई अड्डा: इंदौर (लगभग 100 किमी)

रेलवे स्टेशन: इंदौर और रतलाम दोनों से सड़क मार्ग उपलब्ध

सड़क मार्ग: इंदौर, धार और महेश्वर से मांडू के लिए बसें और टैक्सियाँ आसानी से मिलती हैं

ठहरने की व्यवस्था

मांडू में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित होटल और कुछ निजी रिसॉर्ट्स उपलब्ध हैं। प्राकृतिक सुंदरता के बीच रुकना अपने आप में एक अद्वितीय अनुभव होता है।

यात्रा का सर्वोत्तम समय

अक्टूबर से मार्च के बीच मांडू घूमने के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। खासकर मानसून के बाद (जुलाई–सितंबर) मांडू की हरियाली और झीलें इसे और भी सुंदर बना देती हैं।

मांडू केवल एक ऐतिहासिक नगर नहीं, बल्कि एक जीवित कथा है— प्रेम, कला और संस्कृति की। यहाँ की हवाएं रूपमती के सुरों को, दीवारें बाज बहादुर के प्रेम को और झीलें बीते समय की परछाइयों को संजोए हुए हैं। यदि आप एक शांत, सुंदर और ऐतिहासिक स्थल की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मांडू अवश्य आपकी सूची में होना चाहिए।

Koneru Humpy vs Divya Deshmukh: दिव्या देशमुख के बाद कोनेरू हम्पी ने रचा इतिहास, FIDE विमेंस वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा भारत

भारत ने FIDE चेस वर्ल्ड कप में इतिहास रच दिया है. चेस वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली खिलाड़ी भारत की दिव्या देशमुख बनी थीं, लेकिन अब दूसरे फाइनलिस्ट का नाम भी सामने आ गया है. भारत की ही खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी चेस वर्ल्ड कप की दूसरी फाइनलिस्ट हैं. कोनेरू हम्पी ने सेमीफाइनल के टाई ब्रेकर में चीन की टिंगजी लेई को हराकर भारत का परचम लहरा दिया है. इसी के साथ कोनेरू ने अगले साल होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है.

कोनेरू हम्पी ने जीता सेमीफाइनल

चेस वर्ल्ड कप का दूसरा सेमीफाइनल बुधवार, 23 जुलाई को ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी और चीन की टिंगजी लेई के बीच हुआ. लेकिन इस सेमीफाइनल में दोनों क्लासिकल लेग्स ड्रॉ हो गए और ये मुकाबला टाई ब्रेकर तक पहुंच गया. वहीं टाईब्रेकर में कोनेरू हम्पी ने चीन की खिलाड़ी को हराकर फाइनल में जगह पक्की कर ली.

दिव्या देशमुख के साथ होगा फाइनल?

ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी का फाइनल मुकाबला भारत की ही खिलाड़ी दिव्या देशमुख के साथ होगा. दिव्या FIDE वूमेंस शतरंज वर्ल्ड कप में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनी थीं. वहीं अब कोनेरू हम्पी ने भी इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करा लिया है. जिस टूर्नामेंट के फाइनल तक आज तक कोई भारतीय महिला नहीं पहुंची थीं, वहीं इस बार FIDE चेस वर्ल्ड कप की दोनों फाइनलिस्ट भारत की ही प्लेयर हैं.

दिव्या देशमुख ने भी चीन की खिलाड़ी को हराया

इंटरनेशनल मास्टर दिव्या देशमुख ने बुधवार, 23 जुलाई को खेले गए फाइनल मुकाबले में ही चीन की टैन झोंग्यी को हराकर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया. नागपुर की रहने वाली ये लड़की FIDE शतरंज वर्ल्ड कप में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला है. दिव्या देशमुख और कोनेरू हम्पी के फाइनल में पहुंचने से ये तो तय है कि इस बार चेस का विश्व विजेता भारत बनने जा रहा है.

थाईलैंड-कंबोडिया विवाद: एक हिंदू मंदिर बना टकराव की जड़, दो बौद्ध देशों के बीच कैसे भड़का तनाव – जानिए पूरी कहानी

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जारी सीमा विवाद गुरुवार (24 जुलाई, 2025) को काफी ज्यादा बढ़ गया. दक्षिण-पूर्व एशिया के दो पड़ोसी देशों के बीच हाल ही में बढ़े तनाव में अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है. गुरुवार (24 जुलाई) को इन दोनों देशों के बीच तनाव इतना ज्यादा बढ़ गया, जिसमें कंबोडिया ने थाईलैंड पर रॉकेट से हमला कर दिया और जवाबी कार्रवाई में थाईलैंड ने F-16 लड़ाकू विमानों से कंबोडियाई सेना के कैंपों पर एयरस्ट्राइक कर दी. हालांकि, इन दोनों देशों के बीच जारी सीमा विवाद का कारण एक हिंदू मंदिर है, जिसमें मुख्य देवता के रूप से भगवान शिव स्थापित हैं.

थाईलैंड टूरिज्म के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक, थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर स्थित इस विवादास्पद मंदिर को प्रसात टा मुएन थोम कहा जाता है, जो एक पुरातात्विक स्थल का हिस्सा है. इस मंदिर के अलावा दो और खमेर शैली के ढांचे भी मौजूद हैं, जो धार्मिक रूप से इस पुरातात्विक स्थल के महत्वपूर्ण हिस्से हैं. यह सभी थाईलैंड के बान नोंग खन्ना इलाके में डांगरेक पर्वतों के बीच स्थित हैं.

प्रसात टा मुएन थोम के अलावा, जो दो अन्य धार्मिक स्थल हैं, उनका नाम प्रसात टा मुएन और प्रसात टा मुएन टोट है. यह तीनों स्थल थाईलैंड-कंबोडिया विवाद के केंद्र में हैं. लेकिन प्रसात टा मुएन थोम इसमें प्रमुख है.

क्या है प्रसात टा मुएन थोम का इतिहास

थाईलैंड-कंबोडिया विवाद के केंद्र में स्थित प्रसात टा मुएन थॉम मंदिर को 12वीं शताब्दी के आसपास सम्राट उदयादित्यवर्मन द्वितीय ने एक हिंदू मंदिर के रूप में बनवाया था. यह मंदिर प्रसात टा मुएन टोट से करीब 800 मीटर दक्षिण में स्थित है. इस मंदिर में भगवान शिव सर्वोच्च देवता के रूप में स्थापित हैं और यह तीनों प्रसात ढांचों में सबसे पुराना और सबसे बड़ा है.

प्रसात टा मुएन थोम में एक मुख्य प्रासाद है, जो इसके बीच में स्थित है और सबसे बड़ा है. जबकि अन्य दो छोटे प्रासाद इसके दाईं और बाईं ओर स्थित हैं. यह बालू-पत्थर से बना हुआ है और इसका मुखद्वार दक्षिण दिशा की ओर है.

मंदिर के मुख्य प्रसात के अंदर मौजूद हैं कई महत्वपूर्ण सबूत

थाईलैंड टूरिज्म के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक, इस मंदिर के मुख्य प्रसात के अंदर कई महत्वपूर्ण सबूत हैं, जिसमें प्राकृतिक पत्थर से निर्मित शिवलिंग शामिल हैं. इस शिवलिंग से होते हुए एक जलमार्ग निकलता है, जो मुख्य प्रसात से होते हुए बालकनी के पूर्वी हिस्से तक जाता है.

इसके अलावा, मुख्य प्रसात के दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम कोनों में लेटेराइट से बनी दो पुस्तकालय स्थित हैं. वहीं, मंदिर के पूरे संरचना के चारों ओर से बलूई पत्थर (सैंड स्टोन) से बना एक घुमावदार कॉरिडोर भी है और उत्तरी दिशा में इस गलियारे के ठीक बाहर लेटराइट से बना एक तालाब भी स्थित है.

क्या ‘सैयारा’ पार करेगी 400 करोड़ का आंकड़ा या बनेगी नई ब्लॉकबस्टर? एक्सपर्ट्स ने बताया फिल्म का भविष्य

‘सैयारा’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऑफिशियल आंकड़ों के मुताबिक, 6 दिन में 155.75 करोड़ रुपये कमाए. वहीं सातवें दिन फिल्म ने सैक्निल्क के मुताबिक अभी तक 18.75 करोड़ रुपये का बिजनेस करते हुए टोटल 174.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया.

अब फिल्म बहुत जल्द ‘रेड 2’ और उसके बाद ‘हाउसफुल 5’ का बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड भी तोड़ने के लिए तेजी से आगे बढ़ रही है. अब फिल्मी पंडित कयास लगाने लगे हैं कि फिल्म 200 करोड़ से लेकर 300 करोड़ तक कमा सकती है. इस बीच ट्रेड एक्सपर्ट तरण आदर्श ने 400 करोड़ के जादुई कलेक्शन पर भी लिखा है.

‘सैयारा’ कमाएगी 400 करोड़?

ट्रेड एक्सपर्ट और फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘300 करोड़, 400 करोड़ या उससे भी ज्यादा’. उन्होंने उम्मीद जताते हुए इसकी वजह भी बताई.

तरण आदर्श ने लिखा, ‘सैयारा खेल के नियमों को फिर से लिख रही है. कोई भी पूरे भरोसे के साथ इस बात की भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि इसका लाइफटाइम कलेक्शन कितना होगा.’

‘सैयारा’ है बेहद अविश्वसनीय
तरण आदर्श आगे लिखते हैं, ‘फिल्म दिन-ब-दिन उड़ान भर रही है और ये बेहद अविश्वसनीय है. फिल्म ने सिर्फ 6 दिन में 150 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है और कोई कंपटीशन न होने की वजह से फिल्म दूसरे वीकेंड में 200 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी.’

क्या ‘सैयारा’ पहुंचेगी 400 करोड़ के पार?

ट्रेड एक्सपर्ट ने ये भी लिखा कि 200 करोड़ के बाद 300 करोड़ भी आराम से पहुंच जाएगी, लेकिन क्या 400 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर पाएगी? उन्होंने अपने इस सवाल के साथ फैंस के लिए एक्साइटमेंट छोड़ दिया है. अब देखना ये होगा कि ये फिल्म 400 करोड़ पहुंचती है या नहीं.

‘सैयारा’ के बारे में

फिल्म में दो नए चेहर अहान पांडे और अनीत पड्डा नजर आए हैं, दोनों ने डेब्यू फिल्म से ही कई रिकॉर्ड बना दिए हैं. फिल्म ने इतना ही नहीं किया बल्कि अपने बजट का तीन गुना भी कमा चुकी है. बता दें कि मोहित सूरी की ये फिल्म सिर्फ 60 करोड़ के बजट में तैयार की गई है.