
लखनऊ। महिला आरक्षण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक का विरोध करने पर कांग्रेस-नेतृत्व वाले विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए इसे “दोहरे मापदंड की राजनीति” बताया है। उन्होंने कहा कि जो विपक्ष वर्षों तक महिला आरक्षण को लागू करने में टालमटोल करता रहा, वही अब इसके क्रियान्वयन को तेज करने वाले प्रयासों में भी अड़चन पैदा कर रहा है।
डॉ. सिंह ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और विधानमंडलों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ किया गया है, जो देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 131वां संविधान संशोधन विधेयक इसी प्रक्रिया को गति देने का प्रयास है, लेकिन विपक्ष का विरोध उनकी वास्तविक मंशा पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि “महिला सशक्तिकरण जैसे गंभीर विषय पर भी राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह विरोध दर्शाता है कि विपक्ष महिलाओं को अधिकार देने के बजाय केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को भुनाना चाहता है।”
डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी भी लोकतंत्र की मजबूती अधूरी है। उन्होंने कहा कि यदि देश को समावेशी और संतुलित विकास की ओर बढ़ाना है, तो निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
उन्होंने केंद्र सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। “यह केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर महिलाओं को नेतृत्व देने का अभियान है,” उन्होंने कहा।
डॉ. सिंह ने विपक्ष से आग्रह किया कि वे महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठें और देशहित में इस विधेयक का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि “देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने में देरी करना न केवल अन्याय है, बल्कि राष्ट्र के विकास को भी बाधित करता है।”
अंत में उन्होंने कहा कि “नारी शक्ति को सशक्त बनाना ही विकसित भारत की असली पहचान है, और इस दिशा में किसी भी प्रकार की बाधा देश के भविष्य के साथ समझौता होगी।”


































