जब भी महिलाएं पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं, तो सबसे पहले दिमाग में आता है. “गंदा है, कहीं इन्फेक्शन न हो जाए!” और इसी डर से ज्यादातर महिलाएं टॉयलेट सीट पर ठीक से बैठने के जगह हाफ-स्क्वॉट या सीट के ऊपर झुक कर पेशाब करना पसंद करती हैं. लेकिन क्या आप जानती हैं कि ये आदत जितनी साफ-सुथरी लगती है, उतनी ही आपकी ब्लैडर हेल्थ के लिए खतरनाक हो सकती है?
डॉक्टर्स के अनुसार, यह तरीका पेशाब को पूरी तरह से बाहर नहीं निकलने देता, जिससे यूरीन रिटेंशन, बार-बार यूरिनरी इंफेक्शन (UTI) और पेल्विक फ्लोर मसल्स में कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यूरोलॉजी, PSRI अस्पताल की एसोसिएट डायरेक्टर, डॉ. निखिल खट्टर बताती हैं कि, पेशाब करते समय बिना बैठकर पेशाब करने से ब्लैडर पर दबाव बढ़ता है और यह आदत धीरे-धीरे शरीर को अधूरा पेशाब करने का आदी बना देती है.
टॉयलेट सीट से ज्यादा खतरनाक है गलत पोजीशन
कई महिलाएं संक्रमण से बचने के लिए सीट पर नहीं बैठतीं, लेकिन इससे ब्लैडर को पूरा खाली नहीं किया जाता, जो और ज्यादा नुकसान करता है. अगर आप या तो पेशाब रोककर रखती हैं, या ठीक से बैठकर पेशाब नहीं करतीं, दोनों ही आदतें पेल्विक फ्लोर मसल्स को नुकसान पहुंचाती हैं.
टॉयलेट से संक्रमण का डर कितना सही?
टॉयलेट सीट से संक्रमण का खतरा उतना ज्यादा नहीं होता, जितना हम समझते हैं.
अच्छी बात यह है कि, आप चाहें तो टॉयलेट सीट को सैनिटाइज़र या टिशू से साफ कर, या सीट कवर का इस्तेमाल कर सुरक्षित तरीके से बैठ सकती हैं.
खुद को नुकसान पहुंचाने वाली गलत आदतें छोड़कर, थोड़ी सी साफ-सफाई और सतर्कता से आप खुद को सुरक्षित रख सकती हैं.
सुरक्षित और हेल्दी रहने के लिए क्या करें?
हमेशा टॉयलेट सीट पर ठीक से बैठें
सीट को पहले सैनिटाइज कर लें
जरूरत होने पर डिस्पोजेबल सीट कवर इस्तेमाल करें
पेशाब बिल्कुल न रोकें
बहुत लंबे समय तक पेशाब रोके रहना पेल्विक मसल्स को कमजोर करता है
खूब पानी पिएं ताकि यूरिन साफ और पतला रहे
अगर बार-बार UTI हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
पब्लिक टॉयलेट से संक्रमण से बचना जरूरी है, लेकिन गलत पोजीशन अपनाकर पेशाब करना उससे कहीं ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है. बेहतर है कि, आप साफ-सफाई पर ध्यान दें और टॉयलेट सीट का सही तरीके से इस्तेमाल करें.
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
समाधान का संकल्प, सेवा का संचार: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का 129वां ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ जनसंवाद शिविर सफलतापूर्वक संपन्न, सुनी गईं 44 जनसमस्याएं, 4 मेधावियों को किया सम्मानित, खेल को बढ़ावा देने के लिए दो यूथ क्लब भी हुए गठित”
129वें जनसंवाद शिविर में 44 जनसमस्याओं के समाधान का प्रयास किया गया।
4 मेधावी छात्र-छात्राओं को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित।
139वें बॉयज और 80वें गर्ल्स यूथ क्लब का गठन कर युवाओं को खेल संसाधन वितरित किए गए।
वृक्षारोपण और ताराशक्ति रसोई के माध्यम से पर्यावरण और पोषण का ध्यान रखा गया।
शिविर में बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति, जनसेवा और संवाद का बना प्रेरणास्त्रोत।
लखनऊ | True News Up ब्यूरो : सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में ‘जन सेवा को जनसंवाद के माध्यम से साकार’ करने वाले लोकप्रिय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ अभियान लगातार समाज में एक नई राजनीतिक संस्कृति को जन्म दे रहा है। इसी क्रम में रविवार को इस पहल का 129वां जनसंवाद शिविर सरोजनीनगर द्वितीय मंडल अध्यक्ष शिव शंकर विश्वकर्मा के औरंगाबाद जागीर स्थित कार्यालय पर आयोजित किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक, युवा, महिलाएं, बुजुर्ग एवं कार्यकर्ता उपस्थित हुए, जिन्होंने अपनी समस्याओं को विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के समक्ष रखा और समाधान की दिशा में आश्वस्त हुए।
गाँव की शान – मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान
शिविर में चार मेधावी विद्यार्थियों – मानसी वर्मा (79%), मानसी गुप्ता (64%), सृष्टि श्रीवास्तव (64%) और अंकित कुमार (62%) को हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया गया। उन्हें साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सार्वजनिक रूप से सराहा गया।
डॉ. सिंह ने इस अवसर पर कहा, “ग्रामीण प्रतिभाएं हमारे राष्ट्र की नींव हैं। इनका उत्साहवर्धन हमारी जिम्मेदारी है।”
जन समस्याओं पर त्वरित संज्ञान और समाधान की पहल
शिविर में कुल 44 जनसमस्याएं प्राप्त हुईं, जिनमें प्रमुख रूप से सड़क, जल निकासी, प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन, राशन कार्ड, शौचालय, आवासीय प्रमाण पत्र एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित मुद्दे शामिल थे। डॉ. सिंह ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से तत्काल संवाद स्थापित कर समस्याओं के समाधान हेतु दिशा-निर्देश दिए।
साथ ही, उपस्थित जनता को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ‘जन सेवा रथ’ के माध्यम से दी गई, जिससे लोग योजनाओं से सीधे लाभ ले सकें।
युवा सशक्तिकरण: खेल संसाधनों से लैस नए यूथ क्लबों का गठन
डॉ. सिंह की सोच है कि “युवाओं को समाज से जोड़ना है तो उन्हें खेल, कौशल और नेतृत्व से जोड़ा जाए।” इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए शिविर के दौरान 80वें गर्ल्स यूथ क्लब और 139वें बॉयज यूथ क्लब की स्थापना की गई। दोनों क्लबों को क्रिकेट, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, फुटबॉल, कैरम जैसी खेल किट उपलब्ध कराई गईं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली युवाओं को संसाधन और मंच मिल सके।
वृक्षारोपण और प्रबुद्ध नागरिकों का सम्मान
पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करते हुए शिविर में वृक्षारोपण किया गया। इसके साथ ही समाज के वरिष्ठ और प्रबुद्धजनों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
डॉ. सिंह ने कहा, “समाज की प्रगति में हर आयु वर्ग की भूमिका है। वरिष्ठजनों का सम्मान हमारी संस्कृति की आत्मा है।”
सामाजिक समावेशन: हर वर्ग की भागीदारी, हर समस्या की सुनवाई
इस शिविर की विशेषता रही सभी वर्गों की भागीदारी — चाहे वह ग्रामीण महिलाएं हों, दिव्यांगजन, युवा खिलाड़ी, बुजुर्ग या अन्य वंचित वर्ग। हर व्यक्ति को न केवल मंच मिला, बल्कि समाधान का भरोसा भी मिला।
ताराशक्ति रसोई में भोजन व्यवस्था: सेवा का भाव, स्वाद और स्वास्थ्य के साथ
शिविर में सभी उपस्थित नागरिकों के लिए ‘ताराशक्ति नि:शुल्क रसोई’ के माध्यम से पौष्टिक एवं स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई। यह रसोई डॉ. राजेश्वर सिंह की निगरानी में महिलाओं द्वारा संचालित एक सेवा अभियान है, जो मानवता और सहयोग का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
शिविर में प्रमुख लोगों की उपस्थिति और संचालन
इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष शिव शंकर विश्वकर्मा, मंडल उपाध्यक्ष हनुमान पाल, राज कपूर वर्मा, अमृता वर्मा, अखिलेश त्रिपाठी, रमेश शुक्ला, सेक्टर संयोजक राम सुमेर, अरविन्द कुमार सिन्हा, प्रमोद सिंह, सर्वेश पांडे, मंडल मंत्री रमेश शर्मा, वार्ड अध्यक्ष गुलाब श्रीवास्तव, बूथ अध्यक्ष रंजना मिश्रा, अजय प्रताप सिंह, करुणा सारस्वत सहित अनेक कार्यकर्ता, पदाधिकारी और क्षेत्रीय जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
डॉ. राजेश्वर सिंह की जन सेवा की दृष्टि
डॉ. सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं, उनका समाधान सुनिश्चित करना है। हमारा लक्ष्य है – सुशासन, संवेदनशीलता और समावेशी विकास।”
निष्कर्ष
129वां जनसंवाद शिविर केवल एक आयोजन नहीं था, यह शासन और जनसमूह के बीच सेतु की तरह काम करता दिखा। डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा प्रत्येक रविवार आयोजित किए जा रहे यह शिविर शासन के मानवीय स्वरूप को जमीन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनते जा रहे हैं।
आजकल हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है. लंबे समय तक अगर इसका ध्यान न दिया जाए, तो यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन जब यह अधिक मात्रा में बढ़ता है, तो खतरनाक हो जाता है.
कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाली आदतें-
ज्यादा जंक फूड का सेवन बाजार में मिलने वाला फास्ट फूड और डीप फ्राइड चीजें ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट से भरपूर होती हैं. बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और पैक्ड स्नैक्स को बार-बार खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर बढ़ जाता है.
अत्यधिक मीठा और रिफाइंड कार्ब्स मीठी चीजें, कोल्ड ड्रिंक्स, केक और सफेद ब्रेड में हाई शुगर होती है, जो ब्लड शुगर को बढ़ाने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी प्रभावित करती है.
शारीरिक गतिविधि की कमी पूरे दिन बैठे रहना, एक्सरसाइज न करना और एक्टिविटी की कमी भी कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का बड़ा कारण है. फिजिकल एक्टिविटी न होने से शरीर में फैट जमा होने लगता है, जिससे LDL बढ़ता है और HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) कम होता है.
धूम्रपान और शराब का सेवन धूम्रपान करने से न केवल हृदय की सेहत खराब होती है, बल्कि यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को कम कर देता है. वहीं, शराब का अत्यधिक सेवन ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ाता है.
तनाव और नींद की कमी लगातार तनाव और नींद पूरी न होना भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करता है. स्ट्रेस के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जिससे लिपिड मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है.
South Denver Cardiology Associates के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए ये कदम उठाएं-:
डाइट में बदलाव करें हरी सब्जियां, फल, ओट्स, ब्राउन राइस और हाई फाइबर डाइट को शामिल करें. खाना ऑयली और डीप फ्राइड कम से कम लें. सैचुरेटेड फैट की जगह हेल्दी फैट जैसे ऑलिव ऑयल, फ्लैक्स सीड्स और नट्स को अपनाएं.
नियमित एक्सरसाइज करें रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या योग करना जरूरी है. नियमित शारीरिक गतिविधि से HDL बढ़ता है और LDL कम होता है.
स्मोकिंग और शराब से दूरी बनाएं स्मोकिंग और शराब छोड़ना हाई कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने का सबसे प्रभावी तरीका है.
तनाव को मैनेज करें मेडिटेशन, ब्रिदिंग एक्सरसाइज और पर्याप्त नींद लेकर स्ट्रेस को कंट्रोल करें.
नियमित जांच कराएं समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाएं. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से मेडिसिन लें.
हाई कोलेस्ट्रॉल को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. गलत खानपान, लाइफस्टाइल और तनाव इसकी मुख्य वजह हैं. अगर समय रहते डाइट, एक्सरसाइज और हेल्दी आदतों को अपनाया जाए, तो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है और दिल की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
अजय देवगन की कॉमेडी फिल्म ‘सन ऑफ सरदार 2’ को लेकर फैंस काफी एक्साइटेड हैं. फिल्म 1 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. इससे पहले फिल्म के बजट और स्टार कास्ट की फीस का खुलासा हो गया है. ‘सन ऑफ सरदार 2’ के लिए अजय देवगन ने फीस नहीं ली है, वहीं दूसरे कलाकारों ने करोड़ों और लाखों वसूल किए हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘सन ऑफ सरदार 2’ का बजट 100 करोड़ रुपए है. इस फिल्म के लिए अजय देवगन ने कोई फीस नहीं ली है क्योंकि ये फिल्म जियो स्टूडियो और टी-सीरीज के साथ उनके प्रोडक्शन हाउस पैनोरमा स्टूडियो के बैनर तले बनी है. ऐसे में अजय देवगन ‘सन ऑफ सरदार 2’ के प्रॉफिट शेयर लेंगे.
‘सन ऑफ सरदार 2’ की स्टार कास्ट फीस
‘सन ऑफ सरदार 2’ में मृणाल ठाकुर लीड एक्ट्रेस के तौर पर दिखाई देंगी. फिल्म के लिए एक्ट्रेस ने 5 करोड़ रुपए की फीस ली है.
मृणाल ठाकुर ने बाकी स्टार कास्ट के मुकाबले सबसे ज्यादा फीस चार्ज की है.
चंकी पांडे ने ‘सन ऑफ सरदार 2’ के लिए 1 करोड़ रुपए वसूल किए हैं तो वहीं रवि किशन ने भी 50 लाख रुपए चार्ज किए हैं.
संजय मिश्रा भी अजय देवगन की फिल्म का हिस्सा हैं. अपने रोल के लिए उन्होंने 20 लाख रुपए फीस ली है.
अश्विनी कलसेकर भी ‘सन ऑफ सरदार 2’ में खास भूमिका अदा करेंगे. फिल्म के लिए उन्हें 10 लाख रुपए मिले हैं.
वहीं शरत सक्सेना को 30 लाख रुपए फीस दी गई है.
इसके अलावा दीपिका डोबरियाल को भी फिल्म के लिए 40 लाख रुपए रकम दी गई हैं.
फिल्म में कुब्रा सैत और रोशनी वालिया भी नजर आएंगी.
13 साल बाद लौट रहा सीक्वल ‘सन ऑफ सरदार 2’ साल 2012 की फिल्म सन ऑफ सरदार का सीक्वल है. अजय देवगन की ये सीक्वल फिल्म 13 साल बाद आ रही है. सीक्वल में सोनाक्षी सिन्हा को मृणाल ठाकुर ने रिप्लेस किया है. वहीं संजय दत्त की जगह रवि किशन ने ली है.
भारतीय बाजारों में इन दिनों A2 घी और A2 लेबल वाले डेयरी प्रोडक्ट्स की जबरदस्त डिमांड है. खासकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इसे एक सुपरफूड के तौर पर प्रमोट किया जा रहा है. कंपनियां दावा करती हैं कि A2 घी देसी गायों के दूध से बनता है, जो A2 बीटा-कैसीन प्रोटीन से भरपूर होता है. उनका कहना है कि यह प्रोटीन A1 प्रोटीन की तुलना में पचाने में आसान है और शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) को कम करता है.
कंपनियां यह भी कहती हैं कि A2 घी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड (CLA), विटामिन A, D, E और K पाए जाते हैं, जो दिल के लिए फायदेमंद हैं, पाचन को बेहतर करते हैं, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और स्किन ग्लो लाते हैं. इतना ही नहीं, इसे घाव भरने में मददगार भी बताया जाता है. लेकिन क्या ये सारे दावे सच हैं?
A1 और A2 प्रोटीन में क्या फर्क है?
दूध में पाया जाने वाला एक प्रमुख प्रोटीन है बीटा-कैसीन. इसके दो प्रकार होते हैं:-
A1 बीटा-कैसीन, जो मुख्य रूप से यूरोपीय नस्ल की गायों के दूध में पाया जाता है.
A2 बीटा-कैसीन, जो भारतीय देसी गायों के दूध में प्राकृतिक रूप से मिलता है.
कंपनियों का दावा है कि A2 दूध या घी स्वास्थ्य के लिए बेहतर है. हालांकि, नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ (NAAS) के रिसर्च के अनुसार, इस दावे को लेकर अभी कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं है. कुछ स्टडीज में A2 दूध को पचाने में आसान बताया गया है, लेकिन बड़े स्तर पर ऐसी रिसर्च नहीं हुई है, जिससे यह साबित हो सके कि A2 घी वास्तव में आम घी से ज्यादा हेल्दी है.
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
अमूल के पूर्व MD और इंडियन डेयरी एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.एस. सोढी का कहना है, “मैं इसे सिर्फ़ मार्केटिंग का तमाशा मानता हूं. आज नामी कोऑपरेटिव्स और कंपनियां अच्छा देसी घी 600 से 1000 रुपये किलो बेच रही हैं, जबकि A2 लेबल लगाकर वही घी 2000 से 3000 रुपये किलो बेचा जा रहा है. असल में, A1 और A2 बीटा-कैसीन प्रोटीन के दो प्रकार हैं. इनमें अंतर सिर्फ़ एक अमीनो एसिड का है. इससे हेल्थ पर बड़ा असर पड़ता है, ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.”
वह आगे कहते हैं, “घी में 99.5 प्रतिशत वसा (Fat) होता है. प्रोटीन नाममात्र का भी नहीं होता. ऐसे में यह कहना कि मेरे घी में A2 प्रोटीन है और यह ज्यादा फायदेमंद है, यह गलत है. यह सिर्फ़ लोगों को भ्रमित करने का तरीका है.”
डॉ. विभूति रस्तोगी, सीनियर डाइटिशियन, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज, दिल्ली का कहना है कि “A2 घी को आम घी से ज्यादा हेल्दी बताने का दावा जब तक वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं होता, तब तक इसे सच नहीं माना जा सकता. घी प्रोटीन का स्रोत नहीं है. अगर कोई कंपनी यह कहती है कि इसमें A2 प्रोटीन है और यह आपको प्रोटीन देगा, तो यह भ्रामक है.”
वह यह भी बताती हैं कि आयुर्वेद में A2 घी को लेकर कोई विशेष उल्लेख नहीं है. उनका कहना है कि कंपनियां यह कहकर फायदा उठा रही हैं कि घी मशीन से नहीं निकाला गया या पारंपरिक तरीके से बनाया गया है, लेकिन यह साबित करने के लिए उनके पास ठोस आधार नहीं है.
FSSAI की चेतावनी
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने भी कंपनियों को A1 और A2 लेबलिंग करने से मना किया था. FSSAI का कहना था कि यह लेबलिंग भ्रामक है और फूड सेफ्टी एक्ट, 2006 का उल्लंघन करती है. हालांकि, बाद में यह एडवाइजरी हटा ली गई, लेकिन सवाल अब भी वही है. A2 घी ज्यादा हेल्दी है या सिर्फ़ महंगा होने का कारण उसका ब्रांडिंग गेम है?
हकीकत क्या है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि घी किसी भी रूप में चाहे A1 हो या A2 वसा (Fat) का स्रोत है. यह शरीर को एनर्जी देता है और फैट-सॉल्युबल विटामिन्स (A, D, E, K) का स्रोत है. लेकिन ज्यादा मात्रा में घी खाने से मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है.
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.