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गौतम गंभीर के करीबी स्टाफ पर गिर सकती है गाज़! BCCI जल्द सुनाएगा बड़ा फैसला- जानिए क्या है पूरा मामला

अभी कुछ सप्ताह पहले की बात है जब अभिषेक नायर को BCCI ने टीम इंडिया के सहायक कोच पद से हटा दिया था. अब खबर है कि कोचिंग स्टाफ में शामिल 2 अन्य कोचों की नौकरी जा सकती है. हेड कोच गौतम गंभीर के अंडर एक युवा टेस्ट टीम तैयार की जा रही है, लेकिन टेस्ट सीरीज में लचर प्रदर्शन के कारण मोर्ने मोर्केल और रायन टेन डोइशे को निकाला जा सकता है. द टेलीग्राफ के मुताबिक बीसीसीआई जल्द दोनों को बर्खास्त कर सकता है.

अपने कार्यकाल के 7 महीने पूरे होने के बाद ही अभिषेक नायर को हटा दिया गया था. द टेलीग्राफ के अनुसार पिछले 3 दौरों पर रणनीतियों और टीम के चयन को देखते हुए BCCI मोर्ने मोर्केल और रायन टेन डोइशे को सहायक कोच के पद से हटा सकता है. एक सूत्र ने बताया कि कोच हमेशा टीम में बैलेंस बनाए रखने की बात करते हैं, लेकिन कुलदीप यादव जैसे वर्ल्ड-क्लास रिस्ट स्पिनर को बाहर बैठाने के बेकार परिणाम निकल कर आए हैं.

भारत-इंग्लैंड सीरीज पर ही नजर डालें तो जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज ने बहुत ज्यादा गेंदबाजी की है. ऐसा ही ऑस्ट्रेलिया में भी हुआ था, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने अपनी गलतियों में सुधार नहीं किया. इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में सिराज ने रवींद्र जडेजा से अधिक गेंदबाजी की है. वहीं बुमराह अब तक सीरीज में 119.4 ओवर फेंक चुके हैं.

रिपोर्ट अनुसार भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का परिणाम कुछ भी आए, मोर्केल और रायन की नौकरी जानी लगभग तय है. दोनों का पद एशिया कप 2025 तक सुरक्षित रह सकता है, क्योंकि व्हाइट बॉल टीमों का प्रदर्शन अच्छा रहा है. मगर अक्टूबर में भारत की अगली टेस्ट सीरीज वेस्टइंडीज के साथ होनी है, रिपोर्ट अनुसार तब तक मोर्केल और रायन, दोनों को निकाला जा चुका होगा.

Sanjay Dutt Birthday Special: जब संजय दत्त ने की पापा सुनील दत्त से ज़िद और पहुंच गए बांग्लादेश, लेकिन करना पड़ा शर्मिंदगी का सामना – जानिए क्या हुआ था वहां

 बॉलीवुड के ‘बाबा’ संजय दत्त की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. वह आज बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार्स में से एक हैं. उनकी दमदार एक्टिंग और बेहतरीन अंदाज ने लाखों लोगों का दिल जीता है. हर चमकते सितारे के जीवन में कई दिलचस्प कहानियां होती हैं. ऐसे ही संजय के बचपन की एक घटना है, जब उन्हें एक छोटी सी गलती के कारण स्वर कोकिला लता मंगेशकर के सामने शर्मिंदा होना पड़ा था.

संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को एक फिल्मी परिवार में हुआ था. उनके पिता सुनील दत्त और मां नरगिस दोनों ही मशहूर कलाकार थे. बचपन में संजय को म्यूजिक का बड़ा ही शौक था. वह स्कूल की बैंड में सबसे पीछे ड्रम बजाते हुए चलते थे. उनकी बहन प्रिया दत्त ने एक टीवी शो में बताया था कि संजय को सिर्फ़ एक ही तरह का स्कूल ड्रम बजाना आता था.

जब संजय दत्त ने की थी बांग्लादेश जाने की जिद

1971 में भारत और पाकिस्तान के युद्ध के बाद कलाकारों का एक समूह बांग्लादेश जाकर वहां के सैनिकों और आम जनता के लिए शो करने वाला था. सुनील दत्त भी उस ग्रुप में थे. उस वक्त संजय दत्त की उम्र महज 12-13 साल की थी, जब इस बात का पता उन्हें चला तो उन्होंने भी पिता से बांग्लादेश जाने की जिद की.

इस पर सुनील दत्त ने पहले संजय को मना किया और कहा कि वहां वही कलाकार जा रहे हैं, जो गा सकते है, बजा सकते है या कोई कला दिखा सकते हैं. इस पर संजय ने तुरंत जवाब देते हुए कहा, ‘मैं बोंगो बजाऊंगा!’

संजय की जिद के आगे आखिरकार पिता को झुकना पड़ा और वह उन्हें अपने साथ ले गए. जब शो का दिन आया तो मंच पर लता मंगेशकर अपनी जादुई आवाज में गा रही थीं. पूरा माहौल शांत और भावुक था. इस दौरान संजय दत्त ने बोंगो बजाना शुरू कर दिया.

बोंगो की गड़बड़ाती लय ने लता जी का ध्यान भटकाया और उन्होंने अचानक पीछे मुड़कर देखा कि ये कौन बोंगो बजा रहा है? तब मासूमियत भरे अंदाज में संजय पीछे खड़े थे. लता जी को देख संजय शर्म से पानी-पानी हो गए. ये पल उनके लिए ऐसा था जिसे वह कभी नहीं भूल सके.

इस किस्से को खुद सुनील दत्त ने फारुक शेख को दिए एक टीवी इंटरव्यू में सुनाया था.

संजय दत्त की फिल्मी करियर

संजय दत्त का फिल्मी करियर बहुत ही दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. उन्होंने 1981 में फिल्म ‘रॉकी’ से अपने अभिनय की शुरुआत की, जिसे उनके पिता सुनील दत्त ने निर्देशित किया था.

इसके बाद उन्होंने ‘साजन’, ‘खलनायक’, ‘वास्तव’ और “कांटे’ जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय निभाते हुए अपनी अलग पहचान बनाई. लेकिन लोकप्रियता उन्हें फिल्म ‘वास्तव’ से मिली. इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

उन्होंने फिल्मों में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए. वह कभी प्रेमी बने, तो कभी खतरनाक गैंगस्टर की भूमिका में दिखे. उनके स्टाइल की वजह से उन्हें ‘संजू बाबा’ के नाम से बुलाया जाने लगा. लेकिन उनका जीवन फिल्मों जितना आसान नहीं था.

संजय दत्त पर लगे आरोप

1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के मामले में संजय दत्त का नाम आया. उस वक्त उन पर आरोप लगे कि उन्होंने अपने घर पर हथियार रखे थे, जो उन धमाकों में इस्तेमाल हो सकते थे. संजय ने हमेशा कहा कि वह ऐसा नहीं करना चाहते थे और केवल अपने परिवार की सुरक्षा के लिए हथियार रखे थे. इस मामले की वजह से उन्हें कई साल जेल में बिताने पड़े और 2016 में जेल से रिहा हुए.

नशे ने घेरा था संजू बाबा को

इसके अलावा, संजय दत्त की जिंदगी में नशे की आदत भी एक बड़ा संघर्ष रही. कई इंटरव्यूज में उन्होंने खुद कबूल किया कि वह ड्रग्स के आदी हो गए थे. लेकिन इलाज के बाद उन्होंने नशे से छुटकारा पाया. उनकी इस लड़ाई को देखकर कई लोग प्रेरित हुए.

फैंस की पसंदीदा फिल्मों में ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ और ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ शामिल हैं. 2022 में रिलीज हुई ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ में उनका ‘अधीरा’ किरदार काफी चर्चा में रहा; इस किरदार ने उन्हें साउथ इंडस्ट्री में पहचान दिलाने में मदद की.

उन्होंने ‘शमशेरा’, ‘सम्राट पृथ्वीराज’, और ‘लियो’ जैसी फिल्मों में भी अहम भूमिकाएं निभाईं. इसके अलावा, उन्होंने प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया और ‘प्रस्थानम’ जैसी फिल्म को प्रोड्यूस किया. संजय दत्त का करियर कभी एक सीध में नहीं चला, लेकिन हर गिरावट के बाद उन्होंने और मजबूत होकर वापसी की. वह आज भी फिल्मों में सक्रिय हैं और उनकी झोली में कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं.

Ind vs Eng Fifth Test: पांचवें टेस्ट में टीम इंडिया कर सकती है 3 बड़े बदलाव, बुमराह हो सकते हैं बाहर – जानिए किसे मिल सकता है प्लेइंग इलेवन में मौका

भारत और इंग्लैंड के बीच पांचवां टेस्ट केनिंग्टन ओवल के मैदान पर खेला जाएगा. ये मैच 31 जुलाई से 4 अगस्त के बीच खेला जाएगा. तेंदुलकर-एंडरसन सीरीज के इस आखिरी मैच में भारत की प्लेइंग इलेवन में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. जसप्रीत बुमराह इस सीरीज के तीन टेस्ट मैच खेल चुके हैं, इसलिए पांचवें टेस्ट में बुमराह के खेलने पर संदेह बना हुआ है. वहीं ऋषभ पंत भी पांचवें टेस्ट से बाहर हो गए हैं.

ऋषभ पंत की जगह किसे मिलेगा मौका?

मैनचेस्टर टेस्ट में चोट लगने के बाद ऋषभ पंत के अंगूठे में फ्रैक्टर सामने आया, जिस वजह से वो आखिरी टेस्टे से पहले सीरीज से बाहर हो गए हैं. पंत की जगह टीम इंडिया के स्क्वाड में नारायण जगदीसन को शामिल किया गया है. वहीं पंत की जगह प्लेइंग इलेवन में ध्रुव जुरेल को जगह दी जा सकती है. ध्रुव जुरेल, पंत के रिटायर्ड हर्ट होने के बाद चौथे टेस्ट में विकेटकीपिंग करते नजर आए थे.

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जसप्रीत बुमराह होंगे बाहर?

जसप्रीत बुमराह के बारे में मैनेजमेंट ने पहले ही ये बात साफ कर दी थी कि बुमराह इंग्लैंड के खिलाफ पांच में से केवल तीन ही टेस्ट मैच खेलेंगे. बुमराह ने इस सीरीज के तीनों मैच खेल लिए हैं, ऐसे में पांचवें मुकाबले में बुमराह प्लेइंग इलेवन से बाहर हो सकते हैं और उनकी जगह तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को टेस्ट में डेब्यू करने का मौका मिल सकता है.

कुलदीप यादव को मिलेगा मौका?

मैनचेस्टर टेस्ट में अंशुल कंबोज को डेब्यू करने का मौका मिला था, जिसमें वो कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए. वहीं पहले टेस्ट से चौथे टेस्ट तक कुलदीप यादव बेंच पर बैठकर मौके की तलाश में हैं. कुलदीप यादव को इंग्लैंड के खिलाफ प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जा सकता है. कुलदीप यादव टीम इंडिया को विकेट दिलाने वाले खिलाड़ी साबित हो सकते हैं.

क्या जवानी में मोटापा आएगा या नहीं, इसका पता अब बचपन में ही लगाया जा सकेगा? नई तकनीक से खुलेगा आपकी सेहत का पूरा राज!

यह जानना कि बच्चा बड़ा होकर मोटा होगा या नहीं, अब मुश्किल नहीं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि 6 साल की उम्र में ही इसका पता लगाया जा सकता है. डच वैज्ञानिकों के अनुसार, पहले पांच साल बच्चे के स्वस्थ जीवन के लिए सबसे अहम होते हैं. 3,500 से अधिक बच्चों के रिकॉर्ड खंगालने पर पाया गया कि अगर 6 साल की उम्र में बॉडी मास इंडेक्स में सिर्फ एक यूनिट की भी बढ़ोतरी होती है, तो 18 साल की उम्र तक मोटापे या अधिक वजन का खतरा दो गुना से ज्यादा हो जाता है. रिसर्चर्स जोर देते हैं कि बचपन में ही ऐसी नीतियां बननी चाहिए, जिनसे बच्चों में मोटापा न बढ़े.

कितना खतरनाक होता है मोटापा?

गाजियाबाद में पीडियाट्रिशियन डॉ. आशीष प्रकाश बताते हैं कि मोटापा एक साइलेंट किलर है, जो ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों को जन्म देता है. कई स्टडीज में पाया गया है कि बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. करीब आधा बच्चे समय से पहले ज्यादा वजन के शिकार हो जाते हैं. यूरोपीय कांग्रेस ऑन ओब्सिटी में पेश एक अलग रिसर्च में बताया गया कि पिछले 15 वर्षों में किशोरों में मोटापे की दर 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है. इसमें पाया गया है कि बच्चों में मोटापा के लिए अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स और खराब जीवनशैली सबसे बड़े जिम्मेदार कारक हैं. ऐसे में जरूरी है कि बचपन में ही पता चल जाए कि जवानी में मोटापा आएगा या नहीं. विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में हो रही नई तकनीकों और अध्ययनों से यह बात सामने आई है.

बचपन में मोटापे का अनुमान बताने वाली तकनीक

हाल ही में, वैज्ञानिकों ने जेनेटिक टेस्ट (पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर) विकसित किया है , जो पांच-छह साल की उम्र तक यह बता सकता है कि बच्चे को वयस्कता में मोटापा होने का कितना खतरा है.  यह टेस्ट डीएनए से प्राप्त जेनेटिक डाटा का विश्लेषण करता है और उन हजारों जेनेटिक वैरिएंट्स को पहचानता है, जो मोटापे के जोखिम को बढ़ाते हैं.

यह कैसे काम करता है?

    • जेनेटिक फैक्टर्स: यदि माता-पिता मोटे हैं, तो बच्चों में भी मोटापे का खतरा अधिक होता है. नए जेनेटिक टेस्ट इसी आनुवंशिक प्रवृत्ति को समझने में मदद करते हैं.
    • बॉडी मास इंडेक्स: बच्चों में बीएमआई की गणना उनकी उम्र और लिंग के अनुसार की जाती है. दो साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों में बीएमआई का 95वें परसेंटाइल से अधिक होना मोटापे का संकेत माना जाता है. हालांकि, केवल बीएमआई वर्तमान मोटापे का संकेत देता है, भविष्य के मोटापे का नहीं.
    • मशीन लर्निंग: एआई और मशीन लर्निंग मॉडल बचपन के मोटापे की भविष्यवाणी में सटीकता बढ़ाते हैं. ये मॉडल बच्चे के जन्म के समय के बीएमआई गर्भकालीन आयु और विभिन्न क्लिनिकल विजिट  से प्राप्त बीएमआई जैसे बुनियादी डाटा का उपयोग करके पांच साल की उम्र तक बच्चे की मोटापे की श्रेणी का अनुमान लगा सकते हैं.

इस तकनीक का महत्व

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम उम्र में ही उन बच्चों की पहचान करने में मदद करती है, जिन्हें जेनेटिकली मोटापे का अधिक खतरा है. इससे माता-पिता और हेल्थ प्रोफेशनल्स को कम उम्र में ही जीवनशैली में हस्तक्षेप करने का अवसर मिलता है, जिससे भविष्य में मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को रोका जा सके. यह तकनीक निश्चित रूप से भविष्य में मोटापे के जोखिम को बचपन में ही पहचानने का राज खोल सकती है. यह शुरुआती हस्तक्षेप और रोकथाम के लिए एक शक्तिशाली उपकरण साबित हो सकती है, जिससे बच्चों को स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलेगी.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Health Tips:न लिवर रहेगा फैटी, न बॉडी में ज़हर रुकेगा – बस रुटीन में अपनाएं डॉक्टर की बताई ये 3 आदतें, सेहत बन जाएगी जबरदस्त।

हममें से ज्यादातर लोग लिवर के बारे में तब सोचते हैं जब इसमें कोई समस्या आ जाती है. जबकि यह हमारे शरीर का सबसे मेहनती अंग है. लिवर पाचन को दुरुस्त रखता है, खाने-पीने की चीजों को प्रोसेस करता है और शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है. आयुर्वेद में लिवर को और भी खास माना गया है. इसे रक्तवाह स्रोत से जोड़ा गया है, यानी यह न सिर्फ खून और पित्त के प्रवाह को नियंत्रित करता है, बल्कि इसका असंतुलन दिल, फेफड़े और पेट समेत कई अंगों को प्रभावित कर सकता है.

AVP रिसर्च फाउंडेशन के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. सोमित कुमार के अनुसार, लिवर को स्वस्थ रखने के लिए बड़े बदलाव नहीं, बल्कि जीवन में छोटे-छोटे बदलाव जरूरी हैं. आयुर्वेद के अनुसार, लिवर का सीधा संबंध पित्त दोष से है, जो शरीर में गर्मी और पाचन को नियंत्रित करता है. ज्यादा शराब पीना या अत्यधिक नमकीन और खट्टे खाद्य पदार्थ खाना इस संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे लिवर पर दबाव बढ़ता है. इसका असर सूजन, सेल डैमेज और समय से पहले बुढ़ापे के रूप में दिख सकता है.

आयुर्वेद में अग्नि यानी पाचन अग्नि का भी जिक्र है, जो भोजन को रस धातु में बदलती है. लिवर में पांच सूक्ष्म अग्नियां (भूत अग्नि) होती हैं, जो शरीर को डिटॉक्स, डाइजेस्ट और रिन्यू करती हैं.

कैसा हो खानपान?

लिवर की देखभाल फैंसी डाइट से नहीं, बल्कि संतुलित खाने से होती है. आयुर्वेद के अनुसार:

रूटीन में खाएं: समय पर भोजन करें, उल्टे-सीधे फूड कॉम्बिनेशन (विरुद्ध आहार) से बचें और डाइट में सभी छह रस शामिल करें.

आसान पचने वाला भोजन: चावल, ओट्स, गेहूं, जौ और मिलेट जैसे अनाज लें. दालों में मूंग सबसे हल्की मानी जाती है.

फल और सब्जियां: सेब, पपीता, अनार लिवर के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन साइट्रस फ्रूट्स और आम का अधिक सेवन न करें. सब्जियों में गाजर और चुकंदर बेहतर विकल्प हैं.

डेयरी प्रोडक्ट्स: घी और छाछ लाभकारी हैं, जबकि दही और पनीर सीमित मात्रा में खाएं.

जड़ी-बूटियों और मसालों का महत्व

हल्दी करक्यूमिन की वजह से प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी मानी जाती है. लहसुन, अदरक, जीरा, सौंफ, काली मिर्च: पाचन सुधारते हैं और लिवर पर तनाव घटाते हैं. गिलोय, भूम्यामलकी, मुलैठी: लिवर सेल्स को रिन्यू करते हैं और टॉक्सिन्स हटाते हैं.

लाइफस्टाइल टिप्स

    • रोजाना थोड़ी एक्सरसाइज, योग या वॉक करें.
    • तनाव कम करें मेडिटेशन और माइंडफुलनेस अपनाएं.
    • पर्याप्त नींद लें, क्योंकि लिवर की रिपेयरिंग नींद में ही होती है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.