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“भारत को रूस से तेल खरीदना पड़ सकता है भारी, ट्रंप ने मुनाफे का हवाला देते हुए टैरिफ बढ़ाने की दी चेतावनी”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (4 अगस्त 2025) को एक बार फिर भारत को टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है. ट्रंप ने भारत पर भारी मात्रा में रूस से तेल खरीदने और उसे बड़े मुनाफे पर बेचने का आरोप लगाया है. उन्होने कहा कि भारत ना केवल रुस से तेल खरीदता है, बल्कि उसे खुले बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमाता है.

ट्रंप ने बताया क्यों बढ़ाएंगे टैरिफ?

ट्रंप ने कहा, “भारत को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि यूक्रेन में रूस की युद्ध मशीन कितने लोगों की जान ले रही है. इसी वजह से मैं भारत से अमेरिका को दिए जाने वाले शुल्क को काफी बढ़ाने जा रहा हूं.”

समयसीमा से पहले ट्रंप ने भारत पर लगाया 25% टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारतीय आयात पर 25 फीसदी टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर जुर्माना लगाने की घोषणा की थी. एक अगस्त की समयसीमा से पहले ट्रंप ने भारत पर इतना टैरिफ लगाया. अमेरिकी की ओर से पिछले हफ्ते जारी आदेश के अनुसार भारत पर 25 फीसदी शुल्क लगेगा. हालांकि रूस से सैन्य उपकरण और ऊर्जा खरीद को लेकर घोषित अतिरिक्त जुर्माने का इस आदेश में जिक्र नहीं है.

ट्रंप के टैरिफ के जवाब में भारत ने कहा कि देशहित में संभव कार्रवाई की जाएगी. लोकसभा में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यूएस से बात 10 से 15 फीसदी टैरिफ को लेकर हुई है.

रूस से तेल क्यों खरीद रहा भारत- मार्को रूबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हाल ही में कहा था कि भारत जो रूसी तेल खरीद रहा है उससे मॉस्को को यूक्रेन युद्ध में मदद मिल रही है. उन्होंने कहा था कि ट्रंप भारत से इसलिए नाराज हैं क्योंकि जब तेल खरीदने के इतने विकल्प मौजूद हैं तो भारत रूसे से क्यों खरीद कर रहा है.

भारत-रूस ऊर्जा संबंधों विदेश मंत्रालय का बयान

भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (1 अगस्त 2025) को कहा, “भारत और अमेरिका की साझेदारी समय-समय पर कई बदलावों और चुनौतियों से गुजरी है. हम अपनी द्विपक्षीय प्रतिबद्धताओं पर केंद्रित हैं और हमें विश्वास है कि संबंध आगे भी मजबूत होंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत-रूस ऊर्जा संबंधों पर कहा कि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों को वैश्विक परिस्थितियों और बाजार में उपलब्ध विकल्पों के आधार पर तय करते हैं.”

Health Tips:नींद नहीं आती और सोचते रहते हैं बहुत ज्यादा? इन मनोवैज्ञानिक उपायों से मिलेगी राहत

क्या आप रात को बिस्तर पर लेटे हुए बस सोचते रहते हैं? यह आम बात है, लेकिन इससे नींद खराब होती है. अपनी नींद की क्वालिटी सुधारने और रात में ज्यादा सोचने से बचने के लिए आप कुछ साइकोलॉजिक्ल ट्रिक्स इस्तेमाल कर सकते हैं. आइए जानते हैं इन ट्रिक्स और टेक्निक्स के बारे में.

क्या आप रात को बिस्तर पर लेटे हुए बस सोचते रहते हैं? यह आम बात है, पर इससे नींद खराब होती है. अपनी नींद की क्वालिटी सुधारने और रात में ज़्यादा सोचने से बचने के लिए यहाँ 9 आसान और असरदार तरीके दिए गए हैं.

ब्रेन डंपिंग: सोने से पहले एक नोटबुक और पेन लें. आपके दिमाग में जो भी चल रहा है, जैसे चिंताएं, अधूरे काम, फीलिंग्स  आदि सब लिख डालें. यह आपके दिमाग को खाली करने और चीजों को व्यवस्थित करने में मदद करता है, जिससे आप आराम से सो सकते हैं.

कंट्रोल्ड ब्रीदिंग: गहरी सांस लेने की टेक्निक्स आपके नर्वस सिस्टम को शांत करती हैं. आप 4-7-8 टेक्नीक ट्राई कर सकते हैं. 4 सेकंड के लिए नाक से सांस अंदर लें, 7 सेकंड के लिए सांस रोकें और 8 सेकंड के लिए मुंह से सांस बाहर छोड़ें. यह आपके मन को शांत करेगा.

प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन: अपने शरीर के अलग-अलग मसल ग्रुप्स को धीरे-धीरे टाइट करें और फिर उन्हें ढीला छोड़ दें. पैरों से शुरू करके ऊपर की ओर बढ़ें. यह बॉडी के स्ट्रेस को कम करता है और रिलैक्सेशन को बढ़ावा देता है.

ग्रैटिट्यूड जर्नल: सोने से पहले उन तीन चीजों के बारे में लिखें, जिनके लिए आप आभारी हैं. यह आपका फोकस पॉजिटिव चीजों पर शिफ्ट करता है और नेगेटिव थॉट्स को कम करने में हेल्प करता है.

स्क्रीन टाइम कम करें: सोने से कम से कम एक घंटे पहले अपने फोन, टैबलेट और कंप्यूटर का इस्तेमाल बंद कर दें. स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आपके नींद के साइकिल को डिस्टर्ब कर सकती है.

रेगुलर स्लीप शेड्यूल: हर दिन एक ही टाइम पर सोएं और उठें, चाहे वीकेंड ही क्यों न हो. यह आपके शरीर की इंटरनल क्लॉक को सेट करने में मदद करता है, जिससे आपको बेहतर नींद आती है.

शांत माहौल: अपने बेडरूम को शांत, अंधेरा और ठंडा रखें. यह नींद के लिए एक आरामदायक माहौल बनाता है.

कैफीन और अल्कोहल से बचें: सोने से कुछ घंटे पहले कैफीन (चाय, कॉफी) और अल्कोहल का सेवन न करें, क्योंकि ये दोनों आपकी नींद में रुकावट डाल सकते हैं.

पॉजिटिव सेल्फ टॉक: अपने आप से पॉजिटिव बातें करें. खुद को याद दिलाएं कि आप सेफ हैं और आप आराम से सो सकते हैं. यह आपके माइंड को शांत करने में हेल्प करेगा. ये टेक्निक्स आपको रात में ज्यादा सोचने को रोकने और बेहतर नींद लेने में मदद कर सकती हैं. यदि आपको लगातार नींद की समस्या हो रही है, तो किसी डॉक्टर या मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से सलाह जरूर लें.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पढ़े‑लिखे नेताओं का बढ़ता प्रभाव: विधानभवन की कार्यशैली में दिख रहा बदलाव, IIT से लेकर विदेशों तक पढ़े नेता अब यूपी की नीति‑निर्माण में दे रहे नई दिशा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पढ़े‑लिखे नेताओं का बढ़ता प्रभाव: विधानभवन की कार्यशैली में दिख रहा बदलाव, IIT से लेकर विदेशों तक पढ़े नेता अब यूपी की नीति‑निर्माण में दे रहे नई दिशा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पढ़े‑लिखे नेताओं का बढ़ता प्रभाव: विधानभवन की कार्यशैली में दिख रहा बदलाव, IIT से लेकर विदेशों तक पढ़े नेता अब यूपी की नीति‑निर्माण में दे रहे नई दिशा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पढ़े‑लिखे नेताओं का बढ़ता प्रभाव: विधानभवन की कार्यशैली में दिख रहा बदलाव, IIT से लेकर विदेशों तक पढ़े नेता अब यूपी की नीति‑निर्माण में दे रहे नई दिशा
  • उत्तर प्रदेश की राजनीति में पढ़े‑लिखे नेताओं का दबदबा बढ़ रहा है, जिससे विधानभवन की बहसें और नीति‑निर्माण की दिशा बदल रही है।
  • IIT, मेडिकल, मैनेजमेंट और विदेशी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई कर आए विधायक अब विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा पर शोध‑आधारित प्रस्ताव रख रहे हैं।
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की शिक्षित पृष्ठभूमि ने सदन को आधुनिक और पारदर्शी कार्यशैली दी है।
  • e‑Vidhan प्रणाली, डिजिटल लाइब्रेरी और नई विधानसभा भवन योजना ने विधानभवन की कार्यकुशलता और नीति‑निर्माण की गति को बढ़ाया।
  • जनता की उम्मीदें बदलीं, अब राजनीति केवल जातीय समीकरण नहीं, बल्कि ज्ञान, योग्यता और परिणाम‑उन्मुख फैसलों पर केंद्रित हो रही है।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति अब नए युग में प्रवेश कर रही है, जहां “अनपढ़ नेता” का पुराना टैग पीछे छूटता जा रहा है। मौजूदा विधानसभा में बड़ी संख्या में पढ़े‑लिखे, योग्य और बहु‑डिग्रीधारी जनप्रतिनिधि मौजूद हैं। IIT, मेडिकल, मैनेजमेंट, कानून और विदेशी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई कर राजनीति में आए ये नेता न केवल विकास और नीति‑निर्माण में नई सोच ला रहे हैं, बल्कि विधानभवन की बहसों और कार्यप्रणाली को भी नई ऊंचाई दे रहे हैं।

विधानसभा में पढ़े‑लिखे और बहु‑डिग्रीधारी चेहरे

राज्य की मौजूदा विधानसभा में कई विधायक अपनी शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर अनुभव के कारण अलग पहचान रखते हैं। इनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट पृष्ठभूमि वाले विधायक शामिल हैं।

  • सरोजिनी नगर के डॉ. राजेश्वर सिंह IIT धनबाद से B.Tech, राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से Ph.D. और 2018 में LLB कर चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी करते हैं । NGT और NCLAT में क्षत्रवासीओं की मदद भी करते हैं , उन्होंने स्टेट कैपिटल रीजन(SCR Act ) का कॉन्सेप्ट प्रस्तुत किया जिससे राजधानी क्षेत्र Act पास हुआ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लाइब्रेरीज, स्मार्ट क्लासेज इत्यादि पर उन्होंने ज़ोर दिया।
  • लखनऊ उत्तर के डॉ. नीरज बोरा MBBS, MBA और Ph.D. धारक हैं और ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे जैसे बुनियादी ढांचे पर तार्किक प्रस्ताव रख चुके हैं।लखनऊ के विकास के लिए प्रयासरत रहते हैं ।
  • इटवा के डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी MA, B.Ed. और Ph.D. कर चुके हैं और पूर्व शिक्षा मंत्री रह चुके हैं।
  • अत्रौली के संदीप कुमार सिंह दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA और UK की Leeds Beckett University से MA कर चुके हैं। वे मंत्री रूप में हमेशा तर्कपूर्ण और प्रभावशाली जवाब देने के लिए जाने जाते हैं।
  • मछलीशहर की डॉ. रागिनी सोनकर MBBS और MD हैं, और सदन में चिकित्सा नीतियों व स्वास्थ्य सुधारों पर स्पष्ट व तथ्याधारित मुद्दे रखती हैं।

मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का शिक्षित नेतृत्व

उत्तर प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व भी शिक्षित और आधुनिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना Kanpur University से B.Sc. हैं और कानपुर से लगातार आठवीं बार विधायक बने हैं। वे पहले औद्योगिक विकास मंत्री रह चुके हैं और उनके नेतृत्व में e‑Vidhan प्रणाली, डिजिटल लाइब्रेरी और UPVS आज्ञा‑अनुसंधान ऐप जैसी तकनीकी पहलें लागू हुईं, जिससे सदन की पारदर्शिता और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर अर्बन) Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University से गणित में स्नातक हैं। उनकी विज्ञान पृष्ठभूमि नीति‑निर्माण में तार्किकता और आधुनिक दृष्टिकोण को मजबूत करती है।

विधानभवन में डिजिटल और आधुनिक कार्यप्रणाली

शिक्षित नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश विधानभवन को आधुनिक तकनीक से जोड़ दिया है। अब सदन की कार्यवाही पूरी तरह e‑Vidhan प्रणाली पर आधारित है। बहसों और भाषणों का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होता है और स्थानीय भाषाओं से अंग्रेज़ी तक रियल‑टाइम अनुवाद की सुविधा ने विधायकों की सहभागिता बढ़ा दी है। साथ ही, डिजिटल लाइब्रेरी और नई विधानसभा भवन योजना ने पारदर्शिता, कार्यकुशलता और नीति‑निर्माण की गति को तेज कर दिया है।

नीतिगत बहसों की गुणवत्ता में सुधार

अब विधानसभा में होने वाली बहसें केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहीं। पढ़े‑लिखे जनप्रतिनिधि अपने अनुभव और शिक्षा के आधार पर डेटा‑ड्रिवन और शोध‑आधारित तर्क प्रस्तुत करते हैं। स्वास्थ्य पृष्ठभूमि वाले विधायक चिकित्सा सुविधाओं पर व्यावहारिक सुझाव रखते हैं, जबकि तकनीकी पृष्ठभूमि वाले विधायक शहरी विकास, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय योजनाओं पर ठोस प्रस्ताव देते हैं।

जनता की धारणा और राजनीति की नई तस्वीर

शिक्षित नेताओं की मौजूदगी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति की छवि बदल दी है। जनता अब अपने प्रतिनिधियों से केवल वादों की नहीं, बल्कि तथ्य और परिणाम‑आधारित समाधान की उम्मीद करती है। इसी कारण विधानसभा की बहसें अब विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी उन्नति जैसे विषयों पर केंद्रित होती जा रही हैं। राजनीति धीरे‑धीरे जातीय और सामाजिक समीकरणों से ऊपर उठकर ज्ञान और योग्यता का प्रतीक बन रही है।

भविष्य में और सशक्त होगी नीति‑निर्माण प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीति यह साबित कर रही है कि जब पढ़े‑लिखे और पेशेवर अनुभव वाले नेता नीति‑निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो नीतियां अधिक तार्किक, प्रभावशाली और जनहितकारी होती हैं। आने वाले वर्षों में यह प्रवृत्ति न केवल विधानभवन की कार्यकुशलता बढ़ाएगी, बल्कि राज्य की राजनीति को आधुनिक, ज्ञान‑आधारित और परिणाम‑उन्मुख बनाएगी।

कैल्शियम की कमी से हैं परेशान? इन बीजों को डाइट में शामिल करें

कैल्शियम शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में से एक है। यह हड्डियों की मजबूती को बनाए रखने में मददगार है। लेकिन आज के समय में बच्चों से लेकर बड़ों तक कैल्शियम की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में ना केवल जोड़ों में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है, बल्कि हड्डी के फ्रैक्चर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। अमूमन देखने में आता है कि जब शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है तो अधिकतर लोग सप्लीमेंट्स पर ज्यादा निर्भर रहने लगते हैं। हालांकि, अगर आप अपनी डाइट पर ध्यान दें तो शायद आपको सप्लीमेंट्स का सहारा ना लेना पड़े।

जी हां, ऐसे कई बीज होते हैं, जो कैल्शियम रिच होते हैं। इसलिए, जब इन्हें डाइट में शामिल किया जाता है तो इससे कैल्शियम की कमी को दूर करने में मदद मिलती है। ये छोटे-छोटे बीज ना सिर्फ़ आपकी हड्डियों को मज़बूत बनाते हैं, बल्कि पाचन सुधारने, हार्मोन बैलेंस करने और बालों व स्किन की सेहत का ख्याल रखने में भी मदद करते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ कैल्शियम रिच बीजों के बारे में बता रहे हैं-

तिल के बीज

जब कैल्शियम रिच बीज की बात हो तो तिल के बीज का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है। बता दें कि 100 ग्राम तिल में लगभग 975-1000 एमजी कैल्शियम होता है। इस लिहाज से यह आपके लिए दूध से भी ज्यादा फायदेमंद है। इतना ही नहीं इसमें मैग्नीशियम और फॉस्फोरस भी होता है, जो कैल्शियम को अच्छे से सोखने में मदद करता है। आप हर दिन 1-2 छोटी चम्मच तिल पाउडर या भुना हुआ तिल ले सकते हैं। चूंकि यह गर्म होता है, इसलिए गर्मियों में इसका सेवन ज़्यादा न करें।

चिया सीड्स

चिया सीड्स भी कैल्शियम की कमी को दूर करने में सहायक साबित हो सकता है। दरअसल, 100 ग्राम चिया सीड्स में लगभग 630 एमजी कैल्शियम होता है। इतना ही नहीं, इसमें ओमेगा-3 और फाइबर भी पाया जाता है। यह हड्डियों को मजबूती देने के साथ-साथ पेट को साफ रखने में मददगार है। साथ ही, इससे आपको लंबे समय तक एनर्जी भी मिलती है। आप एक बड़ा चम्मच भीगे हुए चिया सीड्स को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।

अलसी के बीज

अलसी के बीजों में अपेक्षाकृत कैल्शियम कम पाया जाता है। 100 ग्राम अलसी के बीज में लगभग 255 एमजी कैल्शियम होता है। साथ ही साथ, इसमें ओमेगा-3 और फाइटोएस्ट्रोजेन पाया जाता है, जिसकी वजह से इसे महिलाओं के लिए काफी अच्छा माना जाता है। यह हार्मोन बैलेंस करने के साथ-साथ पीसीओडी, मेनोपॉज और थायरॉइड में भी फायदेमंद है। आप एक छोटी चम्मच भूनी हुई अलसी पाउडर को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।

विकास, विश्वास और सेवा : सरोजनीनगर में जनसेवा की नई परिभाषा गढ़ रहे विधायक राजेश्वर सिंह, अमौसी में लगा 130 वां जन संवाद शिविरविकास, विश्वास और सेवा : सरोजनीनगर में जनसेवा की नई परिभाषा गढ़ रहे विधायक राजेश्वर सिंह, 39 समस्याओं पर त्वरित कार्यवाही, 4 मेधावियों का सम्मान, आयुष्मान कार्ड और पेंशन केवाईसी की सुविधा

विकास, विश्वास और सेवा : सरोजनीनगर में जनसेवा की नई परिभाषा गढ़ रहे विधायक राजेश्वर सिंह, अमौसी में लगा 130 वां जन संवाद शिविरविकास, विश्वास और सेवा : सरोजनीनगर में जनसेवा की नई परिभाषा गढ़ रहे विधायक राजेश्वर सिंह, 39 समस्याओं पर त्वरित कार्यवाही, 4 मेधावियों का सम्मान, आयुष्मान कार्ड और पेंशन केवाईसी की सुविधा
विकास, विश्वास और सेवा : सरोजनीनगर में जनसेवा की नई परिभाषा गढ़ रहे विधायक राजेश्वर सिंह, अमौसी में लगा 130 वां जन संवाद शिविरविकास, विश्वास और सेवा : सरोजनीनगर में जनसेवा की नई परिभाषा गढ़ रहे विधायक राजेश्वर सिंह, 39 समस्याओं पर त्वरित कार्यवाही, 4 मेधावियों का सम्मान, आयुष्मान कार्ड और पेंशन केवाईसी की सुविधा
विकास, विश्वास और सेवा : सरोजनीनगर में जनसेवा की नई परिभाषा गढ़ रहे विधायक राजेश्वर सिंह, अमौसी में लगा 130 वां जन संवाद शिविरविकास, विश्वास और सेवा : सरोजनीनगर में जनसेवा की नई परिभाषा गढ़ रहे विधायक राजेश्वर सिंह, 39 समस्याओं पर त्वरित कार्यवाही, 4 मेधावियों का सम्मान, आयुष्मान कार्ड और पेंशन केवाईसी की सुविधा
  • सरोजनीनगर में ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ अभियान का 130वां जन संवाद शिविर संपन्न हुआ।
  • शिविर में आई 39 जनसमस्याओं में से अधिकांश का समाधान स्थल पर ही किया गया।
  • ‘गांव की शान’ योजना के तहत 4 मेधावी छात्रों को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
  • आयुष्मान भारत कार्ड और वृद्धावस्था पेंशन के लिए केवाईसी की सुविधा भी शिविर में दी गई।
  • ‘ताराशक्ति नि:शुल्क रसोई’ के माध्यम से सभी लोगों को मुफ्त व पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया।

लखनऊ : सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में जन सेवा, सुशासन और संवेदनशील प्रशासन को धरातल पर उतारने की दिशा में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा चलाए जा रहे ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ जनसंवाद अभियान की श्रृंखला में रविवार को 130वां जनसुनवाई शिविर संपन्न हुआ। यह शिविर सरोजनीनगर दक्षिण प्रथम मंडल अध्यक्ष के. के. श्रीवास्तव के अमौसी स्थित कार्यालय परिसर में आयोजित हुआ, जहां क्षेत्र के नागरिकों ने बड़ी संख्या में पहुँचकर अपनी समस्याएँ साझा कीं।

समस्याओं का समाधान, संवाद की सार्थकता

शिविर में हैंडपंप, सोलर लाइट, सड़क मरम्मत, नाली निर्माण, वृद्धावस्था पेंशन, राशन कार्ड और अन्य नागरिक जरूरतों से जुड़ी कुल 39 जनसमस्याएं प्राप्त हुईं। इन समस्याओं पर तत्परता से सुनवाई करते हुए अधिकतर मुद्दों का स्थल पर ही समाधान किया गया, जबकि कुछ मामलों में संबंधित विभागों को निर्देशित कर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया।

‘गांव की शान’ – मेधावी छात्रों का हुआ सम्मान

डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर प्रारंभ की गई ‘गांव की शान’ योजना के अंतर्गत इस बार भी क्षेत्र के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया गया। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले चार छात्र-छात्राओं को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मानित मेधावियों के नाम इस प्रकार हैं:

  • शालिनी रावत – 80% (इंटरमीडिएट)
  • सलोनी गौतम – 73.8% (हाईस्कूल)
  • रूपाली सिंह – 73% (हाईस्कूल)
  • पीयूष शर्मा – 67.2% (इंटरमीडिएट)

सरकारी योजनाओं का लाभ – आयुष्मान कार्ड व पेंशन केवाईसी

शिविर में लोगों को केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। इस दौरान 5 नागरिकों के आयुष्मान भारत कार्ड बनाए गए और 2 महिलाओं के पेंशन फॉर्म की केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण करवाई गई, जिससे उन्हें आगामी दिनों में योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।

यह सम्मान न केवल छात्रों के मनोबल को ऊंचा करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के प्रति नई जागरूकता भी पैदा करता है।

ताराशक्ति रसोई द्वारा भोजन की व्यवस्था

हर शिविर की तरह इस बार भी ‘ताराशक्ति नि:शुल्क रसोई’ द्वारा सभी नागरिकों, विशेषकर बुज़ुर्गों, महिलाओं व दूर-दराज़ से आए ग्रामीणों के लिए स्वस्थ, पौष्टिक और गर्म भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था की गई, जिससे शिविर सामाजिक सेवा का वास्तविक उदाहरण बना।

समाजसेवियों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी

शिविर में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों की सक्रिय उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:

  • पार्षद राम नरेश रावत
  • मंडल उपाध्यक्ष दीपक सिंह
  • महामंत्री राजेंद्र गुप्ता
  • दिलीप रावत
  • कमल नयन शर्मा
  • बूथ अध्यक्ष किशोर
  • परमानंद अवस्थी
  • आशीष कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक।

विधायक का विज़न – सेवा, संवाद और समाधान

‘आपका विधायक – आपके द्वार’ अभियान न केवल जनसमस्याओं के समाधान का मंच है, बल्कि यह डॉ. राजेश्वर सिंह की उस विकासोन्मुखी सोच का परिचायक भी है, जिसमें हर व्यक्ति की आवाज़ को महत्व दिया गया है। उनका मानना है कि जवाबदेही, पारदर्शिता और जमीनी संवाद ही लोकतंत्र को सशक्त बनाते हैं।

यह जन संवाद शिविर इस विचार का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया, जहाँ प्रशासन और जनप्रतिनिधि, जनता के बीच खड़े होकर समाधान की प्रक्रिया में सहभागी बने।