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अनुरागिनी संस्था व बिसलेरी की ‘बॉटल्स फॉर चेंज’ पहल के तहत लखनऊ में प्लॉगिंग अभियान संपन्न: स्वर्ण जयंती उद्यान में जुटे सैकड़ों युवा, लिया प्लास्टिक मुक्त लखनऊ का संकल्प

अनुरागिनी संस्था व बिसलेरी की ‘बॉटल्स फॉर चेंज’ पहल के तहत लखनऊ में प्लॉगिंग अभियान संपन्न: स्वर्ण जयंती उद्यान में जुटे सैकड़ों युवा, लिया प्लास्टिक मुक्त लखनऊ का संकल्प
अनुरागिनी संस्था व बिसलेरी की ‘बॉटल्स फॉर चेंज’ पहल के तहत लखनऊ में प्लॉगिंग अभियान संपन्न: स्वर्ण जयंती उद्यान में जुटे सैकड़ों युवा, लिया प्लास्टिक मुक्त लखनऊ का संकल्प
अनुरागिनी संस्था व बिसलेरी की ‘बॉटल्स फॉर चेंज’ पहल के तहत लखनऊ में प्लॉगिंग अभियान संपन्न: स्वर्ण जयंती उद्यान में जुटे सैकड़ों युवा, लिया प्लास्टिक मुक्त लखनऊ का संकल्प
  • लखनऊ के स्वर्ण जयंती उद्यान में युवाओं ने दौड़ते हुए प्लास्टिक कचरा एकत्र किया, जिससे स्वच्छता व पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया गया।
  • बिसलेरी के शुभम मिश्रा ने बताया कि साफ व सूखा प्लास्टिक पुनर्चक्रण के योग्य होता है और जागरूकता ही इसका स्थायी समाधान है।
  • ICCMRT लखनऊ के छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और प्लास्टिक मुक्त शहर का संकल्प लिया।
  • कार्यक्रम में कई शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संस्था पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने पहल की सराहना की।
  • संस्था के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण सिंह जादौन ने कहा कि सही प्रबंधन ही प्लास्टिक संकट से मुक्ति दिला सकता है, और यह अभियान उसी दिशा में एक कदम है।

लखनऊ: पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक प्रदूषण के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने की दिशा में अनुरागिनी संस्था और बिसलेरी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से ‘बॉटल्स फॉर चेंज’ अभियान के अंतर्गत एक प्रभावशाली प्लॉगिंग अभियान और जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम लखनऊ स्थित सहकारी और कॉर्पोरेट प्रबंधन, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (ICCMRT) तथा स्वर्ण जयंती उद्यान, इंदिरा नगर में संपन्न हुआ।

इस आयोजन का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति युवाओं को न केवल सजग बनाना, बल्कि उन्हें इस समस्या के व्यावहारिक समाधान का भागीदार बनाना भी था। कार्यक्रम में ICCMRT के छात्र-छात्राओं, बिसलेरी के प्रतिनिधियों, तथा अनुरागिनी संस्था की टीम ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत एक ऊर्जावान प्लॉगिंग गतिविधि से हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने दौड़ते हुए उद्यान व आसपास के क्षेत्र से प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, चिप्स के रैपर और अन्य अपघटनीय कचरे को इकट्ठा किया। इस गतिविधि का उद्देश्य केवल क्षेत्र को साफ करना नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश देना था कि हर नागरिक की भागीदारी से ही पर्यावरण की रक्षा संभव है।

‘बॉटल्स फॉर चेंज’: प्लास्टिक पुनर्चक्रण की दिशा में बड़ा कदम

बिसलेरी इंटरनेशनल के उत्तर प्रदेश CSR कार्यपालक अधिकारी शुभम मिश्रा ने कार्यक्रम के दौरान ‘बॉटल्स फॉर चेंज’ अभियान की रूपरेखा और उद्देश्यों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि सूखा, साफ और पृथक किया गया प्लास्टिक कचरा पुनः उपयोग हेतु भेजा जा सकता है, जिससे पर्यावरणीय बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

शुभम मिश्रा ने यह भी कहा, “हमारी छोटी-छोटी आदतें जैसे प्लास्टिक को अलग करना, उसे दोबारा उपयोग में लाना और जागरूकता फैलाना ही इस संकट से लड़ने के बड़े उपाय हैं।”

शिक्षण संस्थानों की भागीदारी: बदलाव की राह पर युवा

ICCMRT के प्राचार्य डॉ. राम कोमल प्रजापति ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा, “युवाओं को केवल जागरूक होना पर्याप्त नहीं, उन्हें समाधान का भी सक्रिय हिस्सा बनना चाहिए। आज जिस तरह से छात्रों ने सहभागिता की है, वह दर्शाता है कि हमारी नई पीढ़ी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी है।”

अनुरागिनी संस्था की भूमिका: सामाजिक बदलाव की अग्रदूत

संस्था के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण सिंह जादौन ने कहा, “प्लास्टिक अब जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है, लेकिन उसका जिम्मेदार प्रबंधन ही हमें इस पर्यावरणीय संकट से बाहर निकाल सकता है। इस प्रकार की पहलें समाज में स्थायी और सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।”

युवाओं का उत्साह और संकल्प

कार्यक्रम में सम्मिलित छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के प्रति लापरवाही अब नहीं चलेगी। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने ‘प्लास्टिक मुक्त लखनऊ’ का संकल्प लिया और मानव शृंखला बनाकर पर्यावरणीय चेतना का सशक्त संदेश दिया।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाया उत्साह

इस अवसर पर आई.सी.सी.एम.आर.टी. के प्रोफेसर वीलू भार्गव, पर्यावरणविद् नीरज श्रीवास्तव, UPCLDF के निदेशक हिरेंद्र कुमार मिश्र, अवध विकास परिषद् के अध्यक्ष अरविंद मिश्र, परिवहन सहकारी समिति के निदेशक संजय चौहान, तथा अनुरागिनी संस्था के उत्कर्ष सिंह, प्रिंस यादव, ऋषि नामदेव, अभिरूप सिंह और राहुल यादव प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

जनसहभागिता से ही बनेगा स्वच्छ, हरित लखनऊ

‘बॉटल्स फॉर चेंज’ के माध्यम से अनुरागिनी संस्था और बिसलेरी ने यह दिखाया कि जब सामाजिक संगठन, शैक्षणिक संस्थान और कॉर्पोरेट क्षेत्र मिलकर काम करते हैं, तब सामाजिक बदलाव केवल सपना नहीं, सच्चाई बन सकता है। यह कार्यक्रम एक प्रेरक उदाहरण बन गया है कि पर्यावरण संरक्षण कोई एक दिन की क्रिया नहीं, बल्कि सतत प्रयास है।

विश्व पृथ्वी दिवस पर उठी शिक्षा से संरक्षण तक की पहल: सरोजनीनगर बना हरित क्रांति का उदाहरण, पर्यावरण शिक्षा बने माध्यमिक पाठ्यक्रम का हिस्सा, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील

विश्व पृथ्वी दिवस पर उठी शिक्षा से संरक्षण तक की पहल: सरोजनीनगर बना हरित क्रांति का उदाहरण, पर्यावरण शिक्षा बने माध्यमिक पाठ्यक्रम का हिस्सा, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील
विश्व पृथ्वी दिवस पर उठी शिक्षा से संरक्षण तक की पहल: सरोजनीनगर बना हरित क्रांति का उदाहरण, पर्यावरण शिक्षा बने माध्यमिक पाठ्यक्रम का हिस्सा, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील
विश्व पृथ्वी दिवस पर उठी शिक्षा से संरक्षण तक की पहल: सरोजनीनगर बना हरित क्रांति का उदाहरण, पर्यावरण शिक्षा बने माध्यमिक पाठ्यक्रम का हिस्सा, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर यूपी बोर्ड में पर्यावरण शिक्षा अनिवार्य करने की मांग की।
  • पत्र में जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, जल संकट जैसी पाँच गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियाँ उजागर की गईं।
  • डॉ. सिंह ने कहा कि “प्राकृतिक संरक्षण का संस्कार छात्र जीवन से ही विकसित होना चाहिए।”
  • सरोजनीनगर में 28,000 इको-फ्रेंडली बैग्स वितरण, रुद्राक्ष व फलदार पौधों का रोपण जैसे जमीनी कार्य किए जा रहे हैं।
  • ‘एनवायरमेंट वारियर्स अभियान’ के तहत प्रदेश के छात्रों व वनकर्मियों को जोड़ते हुए हरित आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया गया।

लखनऊ: विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर सरोजनीनगर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने पर्यावरणीय संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल की। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तारपूर्वक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) के अंतर्गत संचालित सभी स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए। उनका यह प्रयास केवल एक नीति सुझाव नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में डॉ. सिंह ने उजागर की पाँच गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियाँ

डॉ. सिंह द्वारा भेजे गए पत्र में उन्होंने पर्यावरणीय संकट की गहराई को पाँच ठोस बिंदुओं में बाँधा और बताया कि किस प्रकार ये मुद्दे वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए खतरा बन चुके हैं:

1. जलवायु परिवर्तन:

पृथ्वी का औसत तापमान तेजी से बढ़ रहा है। 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष घोषित हो चुका है। औसत वैश्विक तापमान 15.1 डिग्री सेल्सियस पहुँच चुका है, जो औद्योगीकरण से पहले की तुलना में 1.6 डिग्री अधिक है। तापमान में यह वृद्धि प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता को कई गुना बढ़ा रही है।

2. जैव विविधता की क्षति:

भारत में 22% जीव-जंतु और वनस्पतियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं। जैव विविधता में गिरावट खाद्य सुरक्षा, पारिस्थितिकी संतुलन और औषधीय प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।

3. प्लास्टिक प्रदूषण:

प्रति वर्ष 1.5 करोड़ टन प्लास्टिक समुद्रों में जाता है। इसका सीधा प्रभाव न केवल समुद्री जीवन बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति अब हमारी थालियों तक पहुँच चुकी है।

4. जल संकट:

भारत की केवल 4% जल संसाधनों पर 18% आबादी की निर्भरता है। भूजल का स्तर प्रतिवर्ष औसतन 1.2 मीटर तक गिर रहा है। आने वाले दशक में पानी युद्ध और पलायन का कारण बन सकता है।

5. वनों की कटाई:

तेजी से हो रहे नगरीकरण, सड़क निर्माण और औद्योगीकरण के कारण बड़े पैमाने पर वन नष्ट हो रहे हैं, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन टूट रहा है और जलवायु परिवर्तन को और बल मिल रहा है।

“माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः” – प्रकृति कोई विषय नहीं, एक संस्कार है: डॉ. सिंह

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ. सिंह ने अथर्ववेद के इस मंत्र के माध्यम से स्पष्ट किया कि प्रकृति से जुड़ाव हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “आज हम संकट की ओर नहीं, संकट के भीतर जी रहे हैं।” उन्होंने अपने तर्कों को आंकड़ों से सशक्त किया, जैसे कि:

  • भारत में 2019 में 23 लाख मौतें केवल वायु और जल प्रदूषण के कारण हुईं।
  • देश की 100% आबादी PM2.5 के मानक से अधिक प्रदूषित वायु में सांस ले रही है।

शिक्षा के ज़रिए समाधान: पर्यावरणीय साक्षरता ही भविष्य की कुंजी

डॉ. सिंह का मानना है कि यदि स्कूल स्तर पर बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के मूल सिद्धांतों की शिक्षा दी जाए, तो वे न केवल अपने परिवेश के प्रति जागरूक बनेंगे, बल्कि “हर बच्चा प्रकृति का संरक्षक” बनकर उभरेगा।

उन्होंने लिखा, “सिर्फ जागरूकता नहीं, जिम्मेदारी का भी भाव जरूरी है और यह भाव विद्यालयों में ही विकसित हो सकता है।”

सरोजनीनगर: शिक्षा और क्रियान्वयन का आदर्श मॉडल

डॉ. सिंह ने अपने क्षेत्र सरोजनीनगर को इस सोच का प्रयोग स्थल बना रखा है, जहां धरातलीय क्रियान्वयन के अनेक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिलते हैं।

प्रमुख स्थानीय पहलें:

  • 28,000 ईको-फ्रेंडली बैग्स का निर्माण तारा शक्ति केंद्र की महिलाओं द्वारा और उनका बच्चों में वितरण।
  • 200 रुद्राक्ष के पौधों का रोपण धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से।
  • 1 अगस्त 2025 से 2,000 फलदार पौधों का प्रस्तावित रोपण – आम, जामुन, इमली, कटहल, महुआ आदि।
  • पौधों की देखभाल को ‘वृक्ष रक्षा यज्ञ’ का स्वरूप देना, जिससे बच्चों, माता-पिता और समाज की भावनात्मक भागीदारी सुनिश्चित हो।

जन सहभागिता की अपील: वृक्षारोपण से बने सामाजिक अभियान

डॉ. सिंह ने अपने पत्र और पोस्ट के माध्यम से यह आग्रह किया कि आगामी वृक्षारोपण अभियान में सभी RWA, ग्राम प्रधान, विद्यालय और स्वयंसेवी संगठन सक्रिय रूप से भाग लें। उनका उद्देश्य केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि हर पौधे को एक परिवार की जिम्मेदारी बनाना है।

‘एनवायरमेंट वारियर्स’ बना जनआंदोलन

डॉ. सिंह द्वारा शुरू किया गया ‘एनवायरमेंट वारियर्स अभियान’ अब एक राज्यव्यापी जागरूकता आंदोलन बन चुका है, जिसमें अब तक निम्नलिखित कार्य संपन्न हो चुके हैं:

  • 90 वन रक्षकों को साइकिल वितरित की गईं ताकि वे वन सुरक्षा का कार्य अधिक दक्षता से कर सकें।
  • 15 वन कर्मियों को सम्मानित किया गया।
  • 35 स्कूलों के 500 से अधिक छात्र वाद-विवाद, क्विज़ और ड्राइंग प्रतियोगिताओं के माध्यम से पर्यावरण रक्षकों के रूप में प्रशिक्षित हुए।

एक विधायक नहीं, एक दूरदर्शी नागरिक की आवाज़

डॉ. राजेश्वर सिंह का यह पत्र, यह सोच और यह सक्रियता एक राजनेता की सीमाओं से परे है। यह उस नागरिक की पुकार है जो आने वाले भारत को हरित, जीवंत और टिकाऊ देखना चाहता है।

यदि यह सुझाव स्वीकार होता है और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद में पर्यावरण शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में जोड़ा जाता है, तो यह केवल राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक कदम साबित होगा।

निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र चुनाव पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया, तथ्यों के साथ किया बिंदुवार खंडन

  • महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 6.4 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने पारदर्शी तरीके से किया मतदान।
  • अंतिम दो घंटे में 65 लाख वोटिंग को लेकर उठाए गए सवाल निराधार साबित।
  • सभी बूथों पर राजनीतिक दलों के अधिकृत एजेंटों की मौजूदगी में सम्पन्न हुई मतदान प्रक्रिया।
  • 9.77 करोड़ मतदाताओं में से केवल 90 शिकायतें दर्ज – आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल।
  • निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस को पहले ही सभी तथ्यों के साथ भेजा था विस्तृत स्पष्टीकरण।

नई दिल्ली/लखनऊ, 22 अप्रैल, 2025: भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए तथ्यों के आधार पर बिंदुवार खंडन जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, विधिसम्मत और बहुदलीय निगरानी में सम्पन्न हुई है। नीचे आयोग द्वारा जारी किए गए छह प्रमुख बिंदु प्रस्तुत हैं:

1. मतदान आंकड़ों को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम

महाराष्ट्र विधानसभा निर्वाचन के दौरान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान केंद्र पर पहुंचे 6,40,87,588 मतदाताओं ने मतदान किया।

औसतन प्रति घंटे करीब 58 लाख वोट डाले गए।

इन औसत रुझानों के अनुसार, मतदान के अन्तिम दो घंटों में लगभग 116 लाख मतदाताओं ने मतदान किया।

इसलिए, दो घंटों में मतदाताओं द्वारा 65 लाख वोट डालना औसत प्रति घंटे मतदान रुझानों से काफी कम है।

हर मतदेय स्थल पर मतदान, उम्मीदवारों / राजनीतिक दलों द्वारा औपचारिक रूप से नियुक्त मतदान एजेंटों की उपस्थिति में हुआ।

2. मतदान प्रक्रिया राजनीतिक दलों की निगरानी में सम्पन्न

कांग्रेस के नामित उम्मीदवारों या उनके अधिकृत एजेंटों ने रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) और निर्वाचन प्रेक्षकों के समक्ष जाँच के समय किसी असामान्य मतदान के संबंध में कोई सिद्ध आरोप नहीं लगाया है।

3. मतदाता सूचियाँ विधिसम्मत प्रक्रिया से तैयार

महाराष्ट्र सहित भारत में मतदाता सूचियाँ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के अनुसार तैयार की जाती हैं।

चुनावों से ठीक पहले और/या प्रत्येक वर्ष एक बार, मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण आयोजित किया जाता है।

अंतिम मतदाता सूची भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) सहित सभी राष्ट्रीय/राज्यीय राजनीतिक दलों को उपलब्ध करायी जाती है।

4. नाम मात्र की आपत्तियाँ दर्शाती हैं प्रक्रिया की पारदर्शिता

महाराष्ट्र निर्वाचन के दौरान मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, 9,77,90,752 मतदाताओं के सापेक्ष:

प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (डीएम) के समक्ष केवल 89 अपीलें,

द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी (सीईओ) के समक्ष केवल 01 अपील दायर की गई।

यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि 2024 में हुए चुनावों से पहले कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल को कोई गंभीर शिकायत नहीं थी।

5. सभी दलों की सहभागिता से नियुक्त किए गए एजेंट

मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान, 1,00,427 मतदेय स्थलों के लिए:

97,325 बूथ लेवल अधिकारी (EROs द्वारा नियुक्त)

कांग्रेस के 27,099 एजेंटों सहित सभी राजनीतिक दलों द्वारा कुल 1,03,727 बूथ लेवल एजेंट नियुक्त किए गए।

इसलिए, मतदाता सूची के विरुद्ध लगाए गए ये निराधार आरोप विधि के शासन का अपमान हैं।

6. पूर्व में कांग्रेस को भेजा गया था विस्तृत स्पष्टीकरण

निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस को 24 दिसंबर 2024 को भेजे गए अपने उत्तर में उपरोक्त सभी तथ्य सामने रखे थे।

यह उत्तर निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।

यह प्रतीत होता है कि ऐसे प्रकरण बार-बार उठाते समय इन सभी तथ्यों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

सभी भारतीय चुनाव विधि के अनुसार आयोजित किए जाते हैं।

भारत में जिस पैमाने और सटीकता के साथ चुनाव आयोजित होते हैं, उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा की जाती है।

मतदाता सूची तैयार करने, मतदान और मतगणना आदि प्रत्येक प्रक्रिया सरकारी कर्मचारियों द्वारा, और वह भी राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सम्पन्न होती है।

गलत सूचना फैलाने पर आयोग का कड़ा संदेश

“किसी भी व्यक्ति द्वारा फैलाई गई कोई भी गलत सूचना न केवल कानून के प्रति अनादर का संकेत है, बल्कि उनके स्वयं के राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त हजारों प्रतिनिधियों के लिए भी अपयश लाती है तथा लाखों निर्वाचन कर्मचारियों का मनोबल गिराती है, जो चुनावों के दौरान अथक और पारदर्शी तरीके से काम करते हैं।”

“मतदाताओं द्वारा किसी भी प्रतिकूल निर्णय के बाद, इसे समझौतापूर्ण कहकर निर्वाचन आयोग को बदनाम करने की कोशिश पूरी तरह से असंगत है।”

Travel Tips: अप्रैल में पार्टनर के साथ इन खूबसूरत जगहों पर बिताएं रोमांटिक पल, आपकी जिंदगी में आएगा रोमांस

अप्रैल साल का एक ऐसा महीना है, जब देश के अधिकतर हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ने लगती है। अप्रैल की चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए कई लोग पहाड़ों पर घूमने के लिए जाते हैं। इस महीने में कपल्स गर्मी से दूर हसीन, खूबसूरत और ठंडी-ठंडी जगहों की तलाश करते हैं। जहां पर वह रोमांटिक और सुकून के पल बिता सकें। ऐसे में अगर आप भी अप्रैल के महीने में किसी ठंडी जगह की तलाश कर रहे हैं, लेकिन यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आपको कहां जाना चाहिए तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पूर्व भारत से लेकर उत्तर-दक्षिण भारत की कुछ ऐसी हसीन जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आप अपने पार्टनर के साथ घूमने के लिए जा सकते हैं।

सोनमर्ग

अप्रैल की चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए आप सोनमर्ग का ही रुख कर सकते हैं। यह जम्मू कश्मीर की हसीन वादियों में मौजूद है। इसको जम्मू-कश्मीर का एक रोमांटिक और खूबसूरत हिल स्टेशन माना जाता है।

अप्रैल में सोनमर्ग का तापमान 2°C से लेकर 15°C के बीच रहता है। यहां पर आप कृष्णासर झील, विशनसर झील, थजवास ग्लेशियर और बालटाल घाटी जैसी रोमांटिक जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

स्पीति वैली

हिमाचल प्रदेश में ऐसी कई शानदार और हसीन जगहें मौजूद हैं, जहां पर आप अप्रैल के महीने में अपने पार्टनर के साथ घूमने के लिए जा सकते हैं। हिमाचल में स्पीति वैली एक रोमांटिक डेस्टिनेशन माना जाता है।

अप्रैल की गर्मी में यहां पर कई कपल्स घूमने के लिए आते हैं। अप्रैल में स्पीति वैली का तापमान 7°C से लेकर 20°C के बीच रहता है। यहां पर आप पिन वैली नेशनल पार्क और चंद्रताल को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इसके अलावा आप यहां पर एडवेंचर एक्टिविटी भी कर सकते हैं।

गंगटोक 

अप्रैल के महीने में पूर्व भारत में गंगटोक जा सकते हैं। कपल्स के लिए यह एक हसीन और रोमांटिक जगह है। सिक्किम की राजधानी गंगटोक पूर्व भारत का एक टॉप क्लास डेस्टिनेशन है।

गंगटोक में बादलों से ढके ऊंचे-ऊंचे पहाड़, झीर-झरने और घने जंगल यहां की खूबसूरती को बढ़ाने का काम करते हैं। यह पूर्व भारत का एक रोमांटिक डेस्टिनेशन माना जाता है। गंगटोक में आप एनचे मठ, त्सोमो झील, ताशी व्यू प्वांइट और हिमालयन जूलॉजिकल पार्क जैसी हसीन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

चोपता

समुद्र तल से करीब 8 हजार से ज्यादा फीट की ऊंचाई पर मौजूद चोपता एक बेहतरीन हिल स्टेशन है। हिमालय की गोद में बसे चोपता हिल स्टेशन पर हर कपल्स जाना चाहता है। चोपता एक रोमांटिक डेस्टिनेशन के रूप में जाना जाता है।

अप्रैल में यहां का तापमान 2°C और अधिकतम 15°C रहता है। इसलिए यहां पर कई कपल्स हनीमून मनाने के लिए पहुंचते हैं और साथ में टाइम स्पेंड करते हैं। चोपता में आप देवरिया ताल, तुंगनाथ मंदिर और चंद्रशिला ट्रेक आदि जगहों पर घूमने के लिए जा सकते हैं।

कुर्ग

अगर आप अप्रैल महीने में दक्षिण भारत की किसी शानदार और हसीन जगह जाना चाहते हैं। तो आपको कुर्ग पहुंचना चाहिए। यह कर्नाटक का एक खूबसूरत और रोमांटिक हिल स्टेशन है।

कुर्ग की हसीन वादियों में स्टे के लिए आपको कई रिसॉर्ट और विला मिल जाएंगे। जहां पर आप रोमांटिक पल बिता सकते हैं। यहां पर आप राजा की सीट, एबी फॉल्स, दुबारे हाथी शिवर और नामद्रोलिंग मठ आदि जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं और एडवेंचर एक्टिविटी कर सकते हैं।

मॉस्को:यूक्रेन मुद्दे पर पुतिन ने दिखाया नरम रुख, पहली बार बातचीत को लेकर जताई खुली इच्छा

 अमेरिका के दबाव में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तेवर यूक्रेन को लेकर नरम पड़ गए हैं। तीन साल की जंग के दौरान पहली बार पुतिन ने यूक्रेन के साथ सीधी बातचीत का ऑफर दिया है और कहा है कि वह युद्धविराम के लिए तैयार हैं। जानकारी के अनुसार, यूक्रेन में शांति स्थापित करने की इच्छा दिखाने के लिए अमेरिका के दबाव में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने सोमवार को कीव के साथ द्विपक्षीय वार्ता का प्रस्ताव रखा और कहा कि वह एक दिवसीय ईस्टर युद्धविराम के बाद और युद्धविराम आगे और बढ़ाने के लिए राजी हैं। पुतिन ने कहा कि किसी भी शांति पहल के लिए रास्ता खुला है और कीव से भी यही अपेक्षा है।

यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल बुधवार को जाएगा लंदन 

वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने पुष्टि की कि कीव बुधवार को अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों से मिलने के लिए लंदन में एक प्रतिनिधिमंडल भेज रहा है। बता दें कि पिछले सप्ताह पेरिस में बैठक हुई थी जिसमें अमेरिका और यूरोपीय देशों ने तीन साल से अधिक युद्ध को समाप्त करने के तरीकों पर चर्चा की गई थी।

युद्धविराम उल्लंघन करने का एक-दूसरे पर लगाया आरोप

पुतिन ने रूसी टीवी रिपोर्टर से बात करते हुए कहा कि 30 घंटे के ईस्टर युद्धविराम के बाद लड़ाई फिर से शुरू हो गई है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर पुतिन के युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जिसे कीव ने शुरू से ही एक स्टंट के रूप में खारिज कर दिया था। रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि यूक्रेनी बलों ने रूसी ठिकानों पर 444 बार गोलीबारी की थी और कहा कि उसने 900 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन हमलों की गिनती की है, साथ ही कहा कि नागरिक आबादी में मौतें हुई हैं।

वाशिंगटन ने कहा कि वह युद्धविराम के विस्तार का स्वागत करेगा। लंदन वार्ता के लिए यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल की घोषणा करने वाले एक्स पर अपनी टिप्पणियों में ज़ेलेंस्की ने द्विपक्षीय वार्ता पर पुतिन की टिप्पणियों का कोई जवाब नहीं दिया। इससे पहले सोमवार को ज़ेलेंस्की ने कहा कि सेनाओं को रूसी सेना की कार्रवाइयों का जवाब देने के लिए उन्होंने निर्देश दिया है।