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स्वतंत्रता दिवस : सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने आवास पर फहराया तिरंगा, स्वाधीनता सेनानियों को दी श्रद्धांजलि

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई
  • देश की आजादी असंख्य क्रांतिकारियों के त्याग, बलिदान और संघर्षों का परिणाम है- सीएम योगी
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत’ के संकल्प की ओर तेजी से अग्रसर है- मुख्यमंत्री
  • ऑपरेशन सिंदूर भारत की आत्मनिर्भरता और भारतीय सेना के शौर्य और सामर्थ्य का प्रतीक है- सीएम योगी
  • भारत के संविधान ने सम और विषम परिस्थितियों में पूरे देश को एकता के सूत्र में बांध कर सामाजिक न्याय को मजबूत किया- सीएम योगी
  • स्वदेशी को जीवन का हिस्सा बनना देश के स्वाधीनता दिवस का एक संकल्प बनना चाहिए- सीएम

लखनऊ, 15 अगस्त 2025 : भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हृदय से बधाई दी और स्वतंत्रता संग्राम के उन महान नायकों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश को सैकड़ों वर्षों की गुलामी से मुक्ति दिलाई।

सीएम योगी ने कहा कि यह स्वतंत्रता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और असंख्य क्रांतिकारियों के त्याग, बलिदान और संघर्षों का परिणाम है, जिन्होंने उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक देश को एकजुट कर आजादी की लड़ाई लड़ी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भारत के संविधान के शिल्पी बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और अन्य स्वाधीनता सेनानियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूकता और संकल्प का अवसर है। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत’ के संकल्प की ओर तेजी से अग्रसर है।

भारत का संविधान अपने अमृत काल में प्रवेश किया है। भारत के संविधान ने सम और विषम परिस्थितियों में पूरे देश को एकता के सूत्र में बांध करके देश के अंदर सामाजिक न्याय, बंधुता और समता के उन संकल्पों को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन किया
है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सेना के शौर्य का प्रतीक- मुख्यमंत्री

सीएम योगी ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना के शौर्य और स्वदेशी हथियारों जैसे मिसाइलों और ड्रोनों, की ताकत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह भारत की आत्मनिर्भरता और सामर्थ्य का प्रतीक है। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के माध्यम से स्थानीय उत्पादन को आगे बढ़ाने उसकी ब्रांडिंग करने, उसे मार्केट से लिंक करने, उसको नई डिजाइन और नई तकनीक व पैकेजिंग के साथ न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश और दुनिया के मार्केट तक पहुंचाने के लिए जो कार्यक्रम चला वह प्रधानमंत्री जी के वोकल फॉर लोकल के उस अभियान को एक नई ऊंचाई प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को जीवन का हिस्सा बनना देश के स्वाधीनता दिवस का एक संकल्प बनना चाहिए। सीएम योगी ने देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में सिविल पुलिस और अन्य संगठनों की भूमिका की भी सराहना की।

सीएम योगी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरणा लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के हर नागरिक को अपने कर्तव्यों के प्रति संकल्पबद्ध होकर विकसित भारत के सपने को साकार करना होगा।

UP विधानसभा में रात के सन्नाटे में गूंजा ऐतिहासिक विज़न: डॉ. राजेश्वर सिंह ने भी सदन में रखा सरोजनीनगर के विकास का ब्लूप्रिंट

  • यूपी विधानसभा के इतिहास में पहली बार 24 घंटे से ज़्यादा चला सत्र, रात 3 बजे डॉ. राजेश्वर सिंह का दमदार भाषण।
  • भारत 6.5% विकास दर के साथ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, निर्यात 38 से 74 लाख करोड़ पहुँचा।
  • यूपी 11.5% जीएसडीपी और 2.25 लाख करोड़ कैपिटल एक्सपेंडिचर के साथ निवेशकों का पसंदीदा राज्य।
  • सरोजनीनगर में 7,000 करोड़ की आवासीय परियोजना, 10,000 करोड़ की एआई सिटी और ईवी प्लांट से विकास को गति।
  • डिफेंस कॉरिडोर में ब्रह्मोस निर्माण और 32,000 करोड़ की 4,118 परियोजनाओं से सरोजनीनगर बना रोल मॉडल।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को इतिहास रचा गया। पहली बार सदन का संचालन लगातार 24 घंटे से अधिक चला। इस विशेष चर्चा का विषय था “विकसित भारत – विकसित उत्तर प्रदेश विज़न 2047”। देर रात करीब साढ़े तीन बजे, जब आमतौर पर सदन की कुर्सियाँ खाली होती हैं, उस वक्त सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने ऐसा भाषण दिया जिसने पूरे सदन को ऊर्जा से भर दिया।

भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था पर बोले डॉ. सिंह

डॉ. सिंह ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि आज भारत 6.5% की विकास दर से आगे बढ़ रहा है, जबकि वैश्विक औसत महज़ 3.5% है। उन्होंने आँकड़ों के साथ बताया कि जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी, तब भारत का निर्यात 38 लाख करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर 74 लाख करोड़ रुपये हो गया है। भारत अब 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के विदेशी मुद्रा भंडार और सालाना 6 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के साथ विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

उत्तर प्रदेश के प्रगति की नई पहचान

डॉ. सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेज़ी से उभरती हुई राज्य अर्थव्यवस्था है। 11.5% जीएसडीपी के साथ यूपी रेवेन्यू सरप्लस राज्य बन चुका है और राज्य का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। उन्होंने बताया कि 33.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से 15 लाख करोड़ रुपये पहले ही धरातल पर उतर चुके हैं। अस्पतालों, कॉलेजों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढाँचों के तेज़ विकास ने यूपी को निवेशकों का प्रमुख गंतव्य बना दिया है।

सरोजनीनगर का रोल मॉडल विज़न

अपने विधानसभा क्षेत्र सरोजनीनगर को विकास का आदर्श बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि यहाँ 7,000 करोड़ रुपये की लागत से देश की सबसे बड़ी आवासीय परियोजना विकसित हो रही है। इसमें 1.5 लाख लोगों के लिए आवास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 5,000 फ्लैट बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, नादरगंज में 10,000 करोड़ रुपये से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस सिटी, 1,500 एकड़ में ऐरोसिटी और 1,500 करोड़ रुपये की लागत से अशोक लीलैंड का ईवी प्लांट स्थापित हो रहा है।

डिफेंस कॉरिडोर से राष्ट्रीय गौरव

डॉ. सिंह ने सदन को बताया कि सरोजनीनगर में डिफेंस कॉरिडोर स्थापित हो चुका है, जहाँ ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। हाल ही में इसका सफल परीक्षण भी देखा गया। उन्होंने कहा कि राजधानी क्षेत्र के गठन के बाद आने वाले वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये के नए निवेश जुड़ेंगे, जिससे सरोजनीनगर पूरे प्रदेश के लिए रोल मॉडल बनेगा।

तीन साल में हज़ारों परियोजनाओं को मंजूरी

डॉ. सिंह ने आँकड़ों के साथ बताया कि पिछले तीन वर्षों में सरोजनीनगर में 41 विभागों से 32,000 करोड़ रुपये की लागत वाली 4,118 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से विधानसभा स्तर पर विकास कार्य हो रहे हैं, उसी रफ्तार से “विकसित भारत – विकसित यूपी” का सपना साकार होगा।

“हमने नींद नहीं, सपने जगाए”

अपने भाषण के समापन में डॉ. सिंह ने कहा, “आज यूपी में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। लखनऊ में तीन एक्सप्रेसवे, विश्वस्तरीय एयरपोर्ट और मेट्रो नेटवर्क हमारी प्रगति का सजीव प्रमाण हैं। हम भाग्यशाली हैं कि प्रदेश का नेतृत्व सक्षम हाथों में है।”

भाषण के बाद डॉ. सिंह ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (एक्स) पर भी साझा किया। उन्होंने लिखा—
“जब विधानमंडल की रोशनी रातभर जलती है, तब प्रदेश के भविष्य का सूरज और तेज़ चमकता है। हमने नींद नहीं, बल्कि सपनों को जगाए रखा- और वह सपना है, उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना।”

सहारा समूह पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: 9 ठिकानों पर छापेमारी में पोंजी स्कीम के सबूत

लखनऊ/ नई दिल्ली: सहारा समूह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 11 अगस्त 2025 को गाज़ियाबाद, लखनऊ, श्रीगंगानगर और मुंबई में 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई। जिन परिसरों पर छापे मारे गए, वे सहारा समूह की भूमि और शेयर लेनदेन से जुड़ी संस्थाओं से संबंधित बताए गए हैं।

तीन राज्यों की एफआईआर पर हुई कार्रवाई

ईडी ने यह जांच तीन एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जिन्हें ओडिशा, बिहार और राजस्थान पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी के तहत दर्ज किया था। ये एफआईआर हुमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (HICCSL) और अन्य सहारा समूह की संस्थाओं के खिलाफ दर्ज हैं। अब तक सहारा की विभिन्न कंपनियों पर 500 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से 300 से ज्यादा मामलों में PMLA के तहत अनुसूचित अपराधों के आरोप हैं।

पोंजी स्कीम से करोड़ों की ठगी

जांच में सामने आया कि सहारा समूह ने HICCSL, SCCSL, SUMCS, SMCSL, SICCL, SIRECL, SHICL समेत अन्य संस्थाओं के माध्यम से पोंजी स्कीम चलाई। इसमें जमाकर्ताओं और एजेंटों को ऊंचे मुनाफे और कमीशन का लालच देकर पैसे जमा कराए गए।
मच्योरिटी राशि लौटाने के बजाय निवेशकों पर दबाव बनाकर या गुमराह करके दोबारा निवेश कराया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कंपनी ने आर्थिक संकट के बावजूद नई जमा राशि लेना जारी रखा और इसका इस्तेमाल संदिग्ध शेयर सौदों, बेनामी संपत्तियों और निजी खर्चों में किया गया।

ईडी ने कुर्क की कीमती संपत्तियां

ईडी ने इस मामले में पहले ही तीन अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए हैं। इनमें—

  • अंबी वैली में 707 एकड़ जमीन (मूल्य लगभग ₹1460 करोड़)
  • सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड की 1023 एकड़ जमीन (मूल्य लगभग ₹1538 करोड़)
  • सीमांत रॉय की पत्नी चंदनी रॉय की चल-अचल संपत्ति (मूल्य लगभग ₹14.75 करोड़) को कुर्क किया जा चुका है।

गिरफ्तारियां और न्यायिक हिरासत

ईडी ने पहले सहारा समूह के चेयरमैन कोर मैनेजमेंट (CCM) ऑफिस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल वैलापरमपिल अब्राहम और लंबे समय से जुड़े ब्रोकर जितेंद्र प्रसाद वर्मा को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

आगे की जांच जारी

अधिकारियों ने बताया कि हालिया छापों में कई आपत्तिजनक दस्तावेज और रिकॉर्ड बरामद हुए हैं। साथ ही अहम गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। ईडी ने साफ किया है कि सहारा समूह की मनी लॉन्ड्रिंग और निवेश घोटाले की परतें अभी और खुलनी बाकी हैं।

Health Tips:“नई स्टडी का दावा – वजन घटाने की दवाएं आंखों के लिए बन सकती हैं खतरा”

डायबिटीज और मोटापा कम करने के लिए इस्तेमाल हो रही नई पीढ़ी की दवाएं आजकल दुनिया भर में चर्चा में हैं. इन्हें ‘ब्लॉकबस्टर वेट लॉस ड्रग्स’ के नाम से जाना जाता है. लेकिन क्या आपको यह मालूम है कि ये दवाएं आपकी आंखों की सेहत पर असर डाल सकती हैं? हाल ही में JAMA Network Open में छपी दो नई स्टडीज ने इसको लेकर खुलासा किया है, जिसके बाद दुनियाभर में बहस शुरू हो गई है कि क्या सच में यह हमारे आंखों के लिए नुकसानदायक है.

कौन-सी दवाएं हैं चर्चा में?

Semaglutide: यह एक GLP-1 हार्मोन जैसी दवा है, जो ब्लड शुगर कंट्रोल करती है और भूख कम करती है. इसे टाइप-2 डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

Tirzepatide: यह GLP-1 के साथ GIP हार्मोन की तरह भी काम करती है, जिससे इंसुलिन रिलीज और वजन नियंत्रण में मदद मिलती है.

किन आंखों की बीमारियों से जुड़ा खतरा?

स्टडीज में इन दवाओं को दो गंभीर आंखों की समस्याओं से जोड़ा गया है:

Diabetic Retinopathy: लंबे समय तक ब्लड शुगर ज्यादा रहने से रेटिना की नसें खराब हो जाती हैं, जिससे अंधापन तक हो सकता है.

NAION (Non-arteritic Anterior Ischemic Optic Neuropathy): आंख की नस में ब्लड फ्लो कम हो जाने से अचानक, बिना दर्द के, विजन लॉस हो सकता है.

रिसर्च में क्या सामने आया?

पहली स्टडी में, टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में GLP-1 दवा लेने वालों की तुलना अन्य दवाएं लेने वालों से की गई. नतीजा GLP-1 दवाओं से Diabetic Retinopathy और NAION का खतरा थोड़ा ज्यादा पाया गया. अच्छी बात यह रही कि इन दवाओं से कुल मिलाकर अंधेपन का खतरा कम था और रेटिनोपैथी की गंभीर दिक्कतों की संभावना भी घटी.

दूसरी स्टडी में, सबसे ताकतवर GLP-1 दवाएं (Semaglutide, Tirzepatide) लेने वालों में NAION और अन्य Optic Nerve Disorders के मामूली बढ़े हुए केस पाए गए. इन दोनों स्टडी ने लोगों को फिर से एक बार सोचने के लिए मजबूर कर दिया है.

रिसर्च की जरूरत क्यों पड़ी?

अगर बात करें कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी, तो करीब 10 साल पहले Semaglutide के शुरुआती ट्रायल में Diabetic Retinopathy का खतरा बढ़ने के संकेत मिले थे. इसके बाद हाई-रिस्क मरीजों को आगे के ट्रायल से बाहर रखा गया और निगरानी बढ़ा दी गई. हाल में एक स्टडी में NAION के केस बढ़ने के बाद दो बड़ी रिसर्च की गईं. यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी के मुताबिक, Semaglutide लेने वाले हर 10,000 में से लगभग 1 व्यक्ति में NAION हो सकता है. Tirzepatide के लिए भी इसी तरह की स्टडी जरूरी है.

क्या दवा लेना बंद कर देना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का कहना है नहीं. ये दवाएं डायबिटीज और मोटापे के मैनेजमेंट में गेमचेंजर हैं. साथ ही, हार्ट, किडनी और लिवर हेल्थ पर भी इनका पॉजिटिव असर देखा गया है.

किन बातों का ध्यान रखें?

  • जिन लोगों को पहले से Diabetic Retinopathy है, उन्हें दवा शुरू करने या डोज बढ़ाने से पहले और बाद में आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए.
  • डोज को धीरे-धीरे बढ़ाएं ताकि ब्लड शुगर में अचानक बदलाव न हो.
  • डायबिटीज डॉक्टर और आई-स्पेशलिस्ट के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन रखें.
  • भविष्य की सभी GLP-1 दवा ट्रायल में आंखों की सेफ्टी भी शामिल की जानी चाहिए.

 ये दवाएं वजन और ब्लड शुगर कंट्रोल में बेहद असरदार हैं, लेकिन आंखों की सेहत के लिए सतर्क रहना जरूरी है. समय-समय पर चेकअप और सही निगरानी से आप इनके फायदे ले सकते हैं और रिस्क को कम कर सकते हैं.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

300 करोड़ की लागत से वेल्लोर में बना सोने सा चमकता श्रीलक्ष्मी नारायणी मंदिर

जब भी गोल्डन टेंपल का जिक्र होता है, तो सबसे पहले लोगों की जुबां पर पंजाब के अमृतसर का नाम आता है। गोल्डन मंदिर को स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है। गोल्डन टेंपल सिख धर्म का पवित्र तीर्थ स्थल है। हर साल यहां पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु मत्था टेकने के लिए आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सिर्फ एक ही स्वर्ण मंदिर नहीं है। आपको हैरान होने की जरूरत नहीं है। भारत के तमिलनाडु के वेल्लोर नगर में भी एक स्वर्ण मंदिर है। इसको दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर कहा जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर मां लक्ष्मी को समर्पित है और इसको महालक्ष्मी मंदिर भी कहा जाता है।

दक्षिण का स्वर्ण मंदिर

साउथ के गोल्डन टेंपल को बनाने में करीब 1500 किलो सोने का इस्तेमाल हुआ है। यह मंदिर तमिलनाडु के वेल्लूर से करीब 7 किमी की दूरी थिरुमलाई कोडी में स्थित है। अगर आप चेन्नई से इस मंदिर के दर्शन के लिए जाते हैं, तो यहां से दूरी करीब 145 किमी है।

श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर का प्रवेश द्वार मुख्य मंदिर से करीब 1.5 से 2 किमी दूरी पर है। द्वार से चलकर मुख्य मंदिर तक जाने के दौरान आपको चारों ओर हरियाली देखने को मिलेगी।

लक्ष्मीनारायणी मंदिर की खासियत

तमिलनाडु के वेल्लूर में स्थित लक्ष्मी नारायणी मंदिर के निर्माण में कई किलो सोने का इस्तेमाल हुआ है। बताया जाता है कि जब इस मंदिर का निर्माण हुआ था, तो करीब 300 करोड़ रुपए का खर्च आया था।

लक्ष्मी नारायणी मंदिर का मुख्य मंदिर और दीवारें सोने की बनी हैं। इस मंदिर में मां लक्ष्मी की करीब 70 किलो की सोने की ठोस मूर्ति स्थापित है। मंदिर में मां लक्ष्मी की मूर्ति देख ऐसा लगता है कि जैसे साक्षात मां लक्ष्मी मंदिर में विराजमान हैं।

यह मंदिर दिन में चमकता है और रात में इसकी भव्यता देखने लायक होती है। मंदिर के परिसर में 27 फीट ऊंचा दीपमाला है। जब इसमें दीपक जलते हैं, तो सोने की चमक में इसकी सुंदरता शब्दों में बयां नहीं की जा सकती है।

मंदिर में फहराया जाता है तिरंगा

बता दें कि लोकसभा, राष्ट्रपति भवन और अन्य सरकारी इमारतों की तरह साउथ के गोल्डन टेंपल यानी श्रीलक्ष्मी नारायणी मंदिर पर तिरंगा झंडा फहराया जाता है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए नहीं बल्कि सभी धर्म के लोगों के लिए खुला रहता है। माना जाता है कि साल 2007 में इस मंदिर का निर्माण पूरा हुआ था। यह मंदिर इतना फेमस है कि प्राचीन मंदिर की सुंदरता और भव्यता भी इससे पीछे रह जाते हैं।

ऐसे पहुंचे श्री लक्ष्मी नारायणी मंदिर

अगर आप साउथ के गोल्डन टेंपल यानी श्रीलक्ष्मी नारायणी मंदिर जाना चाहती हैं, तो आप यहां पर हवाई, रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकती हैं।

यह मंदिर तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित है। ऐसे में अगर आप प्लेन से जाना चाहती हैं, तो निकटतम हवाई अड्डा तिरुपति और चेन्नई का पड़ता है। तिरुपति हवाई अड्डे की दूरी करीब 120 किमी और चेन्नई से करीब 145 किमी दूर है। वहीं अगर आप रेल से जा रही हैं, तो वेल्लोर से करीब का रेलवे स्टेशन कटपडी है। जोकि मंदिर से करीब 7 किमी दूर है।