Home Blog Page 583

समृद्ध गांव – सशक्त प्रदेश : ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ में 21 अगस्त को कॉन्क्लेव – पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह

  • यूपी पर्यटन विभाग 21 अगस्त को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में ग्रामीण पर्यटन कॉन्क्लेव आयोजित करेगा।
  • कॉन्क्लेव में विशेषज्ञ, फार्म/होम स्टे मालिक, जिला समन्वयक और एनजीओ प्रतिनिधि होंगे शामिल।
  • पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह बोले – “ग्रामीण पर्यटन से समृद्ध गांव, सशक्त प्रदेश का निर्माण होगा।”
  • 234 गांवों का चयन ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में, पर्यटन नीति 2022 के तहत सब्सिडी भी दी जाएगी।
  • तकनीकी व निवेश सत्र में पांडुरंग तवरे, आनंद मल्लिगावाद, पंकज अरोड़ा व मनीषा पांडे रखेंगे विचार।

लखनऊ, 19 अगस्त 2025। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग राज्य में ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism) को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 21 अगस्त, 2025 को राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (IGP) में एक दिवसीय ग्रामीण पर्यटन कॉन्क्लेव का आयोजन करने जा रहा है।

इस कॉन्क्लेव में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, फार्म स्टे व होम स्टे मालिक, जिला समन्वयक, ग्रामीण उद्यमी और एनजीओ प्रतिनिधि भाग लेंगे। विभिन्न सत्रों में प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं, चुनौतियों और रणनीतियों पर विचार-विमर्श होगा।

एग्री टूरिज्म को नई पहचान मिलेगी

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार कृषि और पर्यटन क्षेत्र को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है।

फार्म स्टे, होम स्टे और ग्रामीण अनुभव यात्राओं को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

इसका उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को ग्रामीण जीवनशैली, खेती-बाड़ी, जैविक कृषि और पारंपरिक खानपान से सीधे जोड़ना है।

ग्रामीण पर्यटन से “समृद्ध गांव – सशक्त प्रदेश” की परिकल्पना साकार होगी।

कॉन्क्लेव के सत्र और विशेषज्ञ वक्ता

कॉन्क्लेव में कई तकनीकी और थीमैटिक सत्र आयोजित होंगे :

  • उद्घाटन सत्र – पर्यटन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के संबोधन के साथ।
  • तकनीकी सत्र : एग्री टूरिज्म – पांडुरंग तवरे द्वारा।
  • निवेश सत्र : निवेश सारथी – पंकज अरोड़ा (महाप्रबंधक) के साथ।
  • सामुदायिक आधारित पर्यटन सत्र – आनंद मल्लिगावाद (लेक मैन) के विचार।
  • राउंड टेबल सेशन – ग्रामीण उद्यमिता और पर्यटन को लेकर स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी।
  • समापन सत्र – विलेज वेज से जुड़ी मनीषा पांडे द्वारा निष्कर्ष प्रस्तुति।

234 गांवों का चयन

प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि—

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन नीति 2022 के तहत प्रदेश के 234 गांवों का चयन ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में किया गया है। विभाग फैम ट्रिप्स और अन्य माध्यमों से इन अनछुए स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास कर रहा है। पर्यटन इकाइयों को सब्सिडी देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

ग्रामीण पर्यटन का उद्देश्य

इस कॉन्क्लेव का मुख्य मकसद है :

  • स्थानीय समुदायों को रोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध कराना।
  • पर्यटकों को प्रामाणिक ग्रामीण अनुभव प्रदान करना।
  • प्रदेश के अनछुए और पारंपरिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना।
  • “भारत की आत्मा गांवों में बसती है”— इस दृष्टि को पर्यटन के माध्यम से साकार करना।

होंठों का फटना या किनारों से कटना इस विटामिन की कमी का संकेत, जानें इसकी पूर्ति के आसान उपाय

सर्दी का मौसम हो या गर्मी, होंठ फटना एक आम सी दिखने वाली लेकिन बहुत तकलीफ देने वाली समस्या है. जब होंठों में बार-बार दरारें पड़ें, कोनों से कटने लगे या हर समय सूखे और बेजान लगें, तो सिर्फ मौसम के कारण नहीं होता है. बहुत से लोग दिन में कई बार लिप बाम या पेट्रोलियम जेली लगाते हैं, फिर भी उनके होंठ फटे रहते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आपके शरीर में कुछ जरूरी विटामिन्स की कमी भी इस समस्या की वजह हो सकती है. अगर होंठ फटना आपकी रोज की परेशानी बन चुका है, तो हो सकता है यह शरीर में विटामिन की कमी का संकेत हो. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि कौन से विटामिन की कमी से होंठ फटते हैं, उसके और क्या-क्या लक्षण होते हैं, और इसे कैसे यह दिक्कत दूर करें.

क्यों फटते हैं होंठ? जानिए असली कारण

होंठ फटने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जैसे –

1. शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन

2. सर्द या रूखा मौसम

3. बार-बार जीभ से होंठों को गीला करना

4. रोजाना सिगरेट या तंबाकू का सेवन

5. पोषक तत्वों की कमी, खासतौर पर विटामिन की कमी

6. कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट

7. शरीर में विटामिन A और जिंक की जरूरत से ज्यादा मात्रा

कौन से विटामिन की कमी से होंठ फटते हैं?

अगर होंठ फटना आपकी रोज की परेशानी बन चुका है, तो हो सकता है यह शरीर में विटामिन B12 या B2 की कमी का संकेत हो. विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन) की कमी के कारण स्किन रूखी और खुरदरी हो सकती है, होंठों पर दरारें पड़ती हैं, मुंह के कोनों पर छाले या घाव बन सकते हैं या जीभ लाल और सूजन वाली हो सकती है. वहीं विटामिन B12 (कोबालामिन) की कमी के कारण होंठों में जलन महसूस होती है, होंठ कोनों से कटने लगते हैं, स्किन और बालों की हालत बिगड़ने लगती है, थकान, चिड़चिड़ापन और नींद की कमी महसूस होती है और स्कैल्प ड्राई होकर बाल भी झड़ने लगते हैं.

विटामिन B12 और B2 की कमी कैसे करें दूर?

विटामिन B12 और B2 की कमी को दूर करने के लिए कुछ चीजों को अपनी रोज की डाइट में जरूर शामिल करें जैसे दूध और दूध से बनी चीजें दही, पनीर, चीज या अंडा, मछली, साल्मन, टूना, सार्डीन , इसके अलावा मांस अगर आप नॉनवेज खाते हैं और हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, बीन्ससोया प्रोडक्ट्स. वहीं अगर खानपान से विटामिन की पूरा न हो पा रहा हो, तो आप डॉक्टर से सलाह लेकर विटामिन B12 और B2 के सप्लीमेंट भी ले सकते हैं.

इसके साथ ही होंठ फट रहे हैं या कोनों से कट रहे हैं तो दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीएं, SPF वाला लिप बाम लगाएं, खासतौर पर धूप में निकलते वक्त जरूर लगाएं, हफ्ते में 2-3 बार लिप स्क्रब करें, ऑर्गेनिक लिप बाम यूज करें और होंठ पर बीटरूट का रस रात में लगाकर रखें. इससे होंठों को नेचुरल रंग और नमी दोनों मिलेगी.

Health Tips:डाइट में करें इन चीजों को शामिल, हाई ब्लड प्रेशर से बचेंगे और किडनी भी रहेगी हेल्दी!

क्या आप हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं? तो आपकी थाली में रखा एक सेब या कटोरी हरी सब्जी, दवाओं से ज्यादा असर दिखा सकता है. जी हां, नई रिसर्च में सामने आया है कि सिर्फ रोजाना की डाइट में फल और सब्जियां शामिल करने से न सिर्फ किडनी की सेहत बेहतर होती है, बल्कि ब्लड प्रेशर कम होता है और हार्ट अटैक का खतरा भी घटता है.

5 साल तक चला अध्ययन

अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, ऑस्टिन में हुई इस स्टडी में 153 हाई BP और मैक्रोएल्ब्यूमिन्यूरिया के मरीजों को तीन ग्रुप में बांटा गया.

    • पहला ग्रुप – रोज़ाना के खाने के साथ 2–4 कप बेस बनाने वाले फल और सब्जियां (acid-reducing) शामिल की गईं.
    • दूसरा ग्रुप – रोज़ाना दो बार सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) की 4–5 गोलियां (650 mg) दी गईं.
    • तीसरा ग्रुप – केवल सामान्य मेडिकल केयर दी गई.

मैक्रोएल्ब्यूमिन्यूरिया क्यों खतरनाक है?

यह स्थिति क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ का संकेत है. इसमें समय के साथ किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क भी कई गुना बढ़ जाता है.

रिसर्च के नतीजे

अध्ययन में पाया गया कि फल और सब्जियां तथा सोडियम बाइकार्बोनेट दोनों से ही किडनी की सेहत में सुधार हुआ. लेकिन, ब्लड प्रेशर कम करने और हार्ट डिजीज का खतरा घटाने में सिर्फ फल और सब्जियां ही असरदार रहीं. बेकिंग सोडा से ये दो फायदे नहीं मिले.

दवाई की खुराक भी घटी

एक और बड़ा फायदा यह रहा कि फल और सब्जियां खाने से BP और हार्ट डिजीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की मात्रा कम करनी पड़ी. यानी मरीज को दवा के कम डोज में भी अच्छे नतीजे मिले.

विशेषज्ञ की राय

स्टडी में शामिल डॉ. मनींदर काहलों के मुताबिक, “मरीज को किडनी हेल्थ के फायदे तो बेकिंग सोडा और फल-सब्जियां दोनों से मिल सकते हैं, लेकिन BP कंट्रोल और हार्ट डिजीज से बचाव सिर्फ फल-सब्जियों से संभव है. इसलिए हाई BP के मरीजों के लिए इन्हें फाउंडेशनल ट्रीटमेंट मानना चाहिए.”

क्या करें मरीज?

रोजाना 2–4 कप हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा, टमाटर, गाजर, पपीता, सेब, संतरा आदि डाइट में शामिल करें.

    • जंक फूड, ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड से बचें.
    • नियमित व्यायाम और पर्याप्त पानी पिएं.

अगर आप हाई BP और किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं, तो आपकी प्लेट में फल और सब्जियां किसी भी दवा जितनी ही जरूरी हैं. यह न सिर्फ किडनी को बचाएंगी, बल्कि दिल को भी स्वस्थ रखेंगी और दवा पर निर्भरता कम करेंगी.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

अध्ययन में सामने आया सच: विटामिन B12 की कमी से बढ़ सकता है गंभीर बीमारी का रिस्क

हमारा शरीर सही तरीके से काम करने के लिए कई तरह के विटामिन और मिनरल्स पर निर्भर करता है. इनमें से एक जरूरी विटामिन है विटामिन B12. अगर इसकी कमी हो जाए तो इंसान चिड़चिड़ापन महसूस कर सकता है, थकान रह सकती है और एनर्जी बिल्कुल कम हो जाती है.एक रिसर्च के अनुसार, विटामिन B12 की कमी का संबंध Autoimmune Thyroid Diseases (AITD) से भी हो सकता है. यह स्टडी Endocrine, Metabolic & Immune Disorders Drug Targets नाम की जर्नल में प्रकाशित हुई है.

क्या है कनेक्शन?

इस रिसर्च में बताया गया कि AITD सबसे ज्यादा पाए जाने वाले ऑटोइम्यून डिसऑर्डर हैं. चूंकि विटामिन B12 इम्यून सिस्टम को ठीक से चलाने में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए वैज्ञानिकों ने दोनों के बीच गहराई से संबंध को समझने की कोशिश की. 306 लोगों पर किए गए इस अध्ययन में उन्हें दो ग्रुप्स में बांटा गया. एक ग्रुप जिसमें लोगों को B12 की कमी थी और दूसरा ग्रुप जिसमें कमी नहीं थी. साथ ही उन्हें AITD वाले और बिना AITD वाले ग्रुप्स में भी रखा गया. रिसर्च में पाया गया कि जिन मरीजों को AITD था, उनके शरीर में विटामिन B12 का लेवल काफी कम था. वहीं, जिन लोगों में B12 की कमी थी, उनमें एंटी-TPO के लेवल भी ज्यादा थे. यानी साफ है कि B12 का लेवल AITD से गहराई से जुड़ा हुआ है.

क्यों जरूरी है विटामिन B12?

विटामिन B12 हमारे शरीर के लिए बेहद अहम है. यह खाने को एनर्जी में बदलने, रेड ब्लड सेल्स और DNA बनाने में मदद करता है. इसकी कमी से न सिर्फ थकान और कमजोरी होती है, बल्कि यह थायराइड जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है. इसके अलावा, B12 मेथिलेशन नाम की प्रोसेस में भी काम करता है. यह प्रोसेस शरीर में डिटॉक्सिफिकेशन, हार्ट हेल्थ, नर्वस सिस्टम और एनर्जी प्रोडक्शन के लिए जरूरी है.

B12 के सोर्स और सप्लीमेंट्स

विटामिन B12 की भरपूर मात्रा बीफ, ऑर्गन मीट, सी-फूड और अंडे में मिलती है. लेकिन अगर आप वेजिटेरियन या वीगन हैं, तो सिर्फ डाइट से इसकी सही मात्रा लेना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में मल्टीविटामिन सप्लीमेंट्स मददगार साबित हो सकते हैं, खासकर वे जिनमें B12 अच्छी मात्रा में मौजूद हो. इस रिसर्च से साफ हुआ कि शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन B12 होना बेहद जरूरी है. वरना इसका असर न सिर्फ एनर्जी पर पड़ेगा बल्कि थायराइड और Autoimmune Thyroid Diseases का खतरा भी बढ़ सकता है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Health Tips:वजन घटाने के लिए न जिम की जरूरत, न डाइटिंग की – घर पर अपनाएं ये 4 आसान उपाय

अधिकतर लोगों का मानना होता है कि मोटापा सिर्फ जिम में कड़ी मशक्कत करके या फिर क्रैश डाइट करके कम किया जा सकता है। तो आप एकदम गलत हैं। जबकि आप वेट लॉस के लिए निश्चित पैटर्न, ढाई किलो का डम्बल सेट और थोड़ी सी सेल्फ अवेयरनेस को फॉलो कर सकते हैं। अपनी वेट लॉस की जर्नी को आसान बनाने के लिए ChatGPT की मदद ले सकते हैं। यह अपने बेसल मेटाबोलिक रेट की गणना करके अपने लिए एक ऐसी लाइफस्टाइल तैयार करता है। जिसमें माइंडफुल ईटिंग और अच्छा प्रशिक्षण शामिल है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वेट लॉस के 4 सीक्रेट बताने जा रहे हैं, जिसको आप घर पर अपनाकर अपना वेट लॉस कर सकते हैं।

पोर्शन कंट्रोल

इसका मतलब है कि भोजन की मात्रा को नियंत्रित करना। पोर्शन कंट्रोल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आप सही मात्रा में भोजन करें। यह न तो कम होना चाहिए और न ज्यादा होना चाहिए। आप चाहें तो अपने खाने को चार हिस्सों में बांट सकते हैं। पहले हिस्से में 40% प्रोटीन, 30% फाइबर, 20% कार्बोहाइड्रेट्स और 10% हेल्दी फैट शामिल करना चाहिए। आपको वेट लॉस में खाने की कटौती नहीं बल्कि संतुलन बनाने की जरूरत होती है।

वेट ट्रेनिंग

वेट ट्रेनिंग आपको नियमित रूप से करना चाहिए। तभी आपको फर्क दिखेगा। आप चाहें तो इसके लिए एक रूटीन सेट कर सकते हैं। जिसमें सप्ताह में चार बार स्ट्रेंथ, दो बार कार्डियो और रोजाना वॉक शामिल करें। यह ऐसा वर्कआउट है, जो मांसपेशियों के निर्माण के साथ फैट लॉस के लिए भी अच्छा है। हालांकि शुरूआत में अनुशासित रहना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन अनुशासित रहना ही वेट लॉस की असल कुंजी है।

कैलोरी ट्रैकिंग

वेट लॉस के लिए जरूरी है कि आप अपने कैलोरी ट्रैकिंग पर भी ध्यान दें। अपने भोजन के तरीके को समझने के लिए सिर्फ एक सप्ताह ऐसा करें। लोग वेट लॉस के लिए खाने पीने को लेकर कठिन नियम फॉलो करते हैं। जिससे परेशानी होती है। ऐसे में आप अपनी कैलोरी ट्रैकिंग को प्रोत्साहन के रूप में लें।

मेंटल हेल्थ

वेट लॉस के लिए सिर्फ फिटनेस और डाइट ही जरूरी नहीं है। वेट लॉस के लिए आपको मेंटल हेल्थ का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। इसलिए आप अपने रोजमर्रा के कामों को एक डायरी में लिखें, मेडिटेट करें और ग्रैटिट्यूड फील करें। इन आसान तरीकों को फॉलो करने हार्मोन को नियंत्रित करके तनाव को कम करने में भी सहायता मिल सकती है। जिससे वेट लॉस में फायदा मिलता है।