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Health Tips:कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया, अगर आप सोने का यह तरीका अपनाएंगे तो ब्लड प्रेशर अपने आप नियंत्रित हो जाएगा।

आजकल हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) एक बेहद आम समस्या बन चुकी है. ज़्यादातर लोग इसे कंट्रोल करने के लिए डाइट, एक्सरसाइज और दवाइयों पर ध्यान देते हैं.

अमेरिका के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजय भोजराज का कहना है कि ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का सबसे आसान और असरदार तरीका हमारी सोने की आदत में छिपा है. डॉ. भोजराज ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि “ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ब्लड प्रेशर कंट्रोल सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज से होता है. लेकिन मैं हर मरीज से कहता हूं कि आपकी नींद का शेड्यूल उतना ही जरूरी है.”

कार्डियोलॉजिस्ट का नंबर-1 रिकमेन्डेशन

उनका सबसे अहम सुझाव है कि रोजाना एक ही समय पर सोएं और एक ही समय पर जागें. चाहे वीकेंड ही क्यों न हो. यह सुनने में बहुत बेसिक लगता है, लेकिन इसके फायदे बड़े गहरे हैं.

नियमित नींद शेड्यूल से-

    • बॉडी का सर्केडियन रिद्म सही रहता है
    • रात में कॉर्टिसोल लेवल कम होता है
    • हार्ट रेट वेरिएबिलिटी बेहतर होती है
    • ब्लड प्रेशर नैचुरली कंट्रोल में रहता है

डॉ. भोजराज कहते हैं कि यह जरूरी नहीं कि आप ज्यादा घंटे सोएं, बल्कि कंसिस्टेंसी जरूरी है. जब शरीर को पता रहता है कि कब आराम करना है और कब रिपेयर होना है, तो ब्लड प्रेशर अपने आप बैलेंस होने लगता है.

साइंस भी कहती है यही बात

मेयो क्लिनिक की गाइडलाइन के मुताबिक, लगातार नींद की कमी हाई ब्लड प्रेशर का बड़ा कारण बन सकती है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति रोज़ाना 6 घंटे से कम सोता है, तो उसे लंबे समय में हाइपरटेंशन होने का खतरा ज़्यादा होता है.

कम नींद के कारण–

    • हार्मोन असंतुलन होता है
    • तनाव बढ़ता है
    • मोटापा और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है

ये सारी चीजें मिलकर दिल की बीमारियों का रिस्क कई गुना बढ़ा देती हैं. वहीं, जब नींद पूरी और नियमित होती है तो शरीर के स्ट्रेस हार्मोन बैलेंस रहते हैं और दिल स्वस्थ रहता है.

घड़ी देखकर सोना है सबसे आसान इलाज

डॉ. भोजराज का मानना है कि ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहना काफी नहीं है. डाइट, एक्सरसाइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है नींद.उनकी सलाह है बस अपनी घड़ी देखकर सोने और उठने की आदत डालें. यह न सिर्फ ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करेगा बल्कि लंबे समय तक दिल की सेहत को भी सुरक्षित रखेगा. यानि अगर आप हाई बीपी से परेशान हैं या भविष्य में इससे बचना चाहते हैं तो रोज़ाना समय पर सोने और उठने की आदत डालना ही सबसे आसान और असरदार दवा साबित हो सकती है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

अमेरिका के 50% टैरिफ के फैसले का भारत के व्यापार पर क्या होगा असर? सरकार ने संसद में किया स्पष्ट जवाब

संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में अमेरिका के 50 परसेंट टैरिफ लगाए जाने के प्रभाव से जुड़े एक सवाल पर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ भारत के करीब 48.2 अरब डॉलर (2024 के ट्रेड वैल्यू के आधार पर) की कीमत के सामानों के निर्यात पर लागू होगा.

केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में दिए लिखित जवाब में कहा, “सरकार देश के राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने और आगे बढ़ाने के साथ किसानों, मजदूरों, व्यवसायियों, निर्यातकों, MSME और उद्योग के सभी वर्गों के कल्याण की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टैरिफ के कारण व्यापार पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें उपयुक्त एक्सपोर्ट प्रोमोशन और ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन के उपाय शामिल हैं.

रूस से तेल आयात पर टैरिफ की वजह
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से निर्यात होने वाले सामानों पर अतिरिक्त 25 परसेंट टैरिफ लगाया था. व्हाइट हाउस ने इसके पीछे तर्क दिया था कि भारत रूस से लगातार तेल और प्राकृतिक गैस का आयात कर रहा है, जिससे यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को को राजस्व मिल रहा है.

इस आदेश के तहत भारत पर पहले से लागू 25 परसेंट टैरिफ के अलावा और अतिरिक्त 25 परसेंट टैरिफ जोड़ा गया. इसके बाद भारत के कुछ छोटे सामानों को छोड़कर अन्य सभी निर्यातित वस्तुओं पर 50 परसेंट टैरिफ लागू हो जाएगा.

ट्रंप के बयान पर ताइवान ने दी प्रतिक्रिया: “जब तक वह राष्ट्रपति हैं, चीन हमला नहीं करेगा”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि जब तक वह राष्ट्रपति हैं, चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा। इसके जवाब में ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनका देश खुद अपनी रक्षा कर सकता है। पिछले कुछ वर्षों से ताइवान चीन की सैन्य और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है, और चीन अक्सर ताइवान को अपने क्षेत्र में शामिल करने की बात करता रहा है।

ताइवान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका और चीन के बीच की बातचीत पर बारीकी से नजर रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान के पास अपनी रक्षा करने की पर्याप्त क्षमता है और देश अपनी आत्मरक्षा क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है।

संयुक्त राज्य अमेरिका ताइवान का सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समर्थक और हथियार आपूर्तिकर्ता है, लेकिन दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध या रक्षा संधि नहीं है। इसका मतलब यह है कि यदि चीन हमला करता है तो अमेरिका मदद करने के लिए बाध्य नहीं है, हालांकि अमेरिका कानूनन ताइवान को अपनी रक्षा के साधन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है और रणनीतिक अस्पष्टता की नीति पर कायम है।

CYBER SECURITY: रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन और .apk फाइल से होने वाली साइबर ठगी से सावधान, रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन क्या होता है….यहाँ खबर पढ़ें और विस्तार से जानें

  • रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन आपके मोबाइल और कंप्यूटर को दूर बैठे किसी भी व्यक्ति के कंट्रोल में दे सकता है।
  • साइबर अपराधी बैंक या टेक्निकल सपोर्ट बनकर लोगों से ऐसे ऐप डाउनलोड कराते हैं और ठगी को अंजाम देते हैं।
  • हाल ही में फर्जी शादी के कार्ड और ऑफर के बहाने .apk फाइल भेजकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
  • एक बार .apk इंस्टॉल होते ही ठग आपके फोन का डेटा, बैंकिंग ऐप्स और पासवर्ड तक पहुंच बना लेते हैं।
  • साइबर ठगी से बचाव का एकमात्र उपाय है सतर्कता, अज्ञात लिंक या फाइल कभी डाउनलोड न करें और तुरंत शिकायत 1930 पर करें।

लखनऊ, 20 अगस्त 2025 : शिवसागर सिंह चौहान, मुख्य सम्पादक- TrueNewsUP : रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जिनकी मदद से कोई भी व्यक्ति आपके मोबाइल या कंप्यूटर को दूर बैठे ही नियंत्रित कर सकता है। आमतौर पर इन ऐप्स का उपयोग तकनीकी सहायता देने, ऑनलाइन मीटिंग करने या दूर से किसी का काम आसान बनाने के लिए किया जाता है। AnyDesk, TeamViewer और VNC जैसे ऐप इसी श्रेणी में आते हैं।
लेकिन जब यही ऐप्स गलत हाथों में चले जाते हैं तो यह खतरनाक हथियार बन जाते हैं। साइबर ठग इन ऐप्स के जरिए आपके फोन की स्क्रीन तक पहुंच जाते हैं और आपके बैंकिंग ऐप्स, पासवर्ड, फोटो, और निजी चैट भी देख सकते हैं।

साइबर ठगी में रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन का इस्तेमाल कैसे होता है?

साइबर अपराधी अक्सर खुद को बैंक अधिकारी, टेक्निकल सपोर्ट एजेंट या फिर किसी सरकारी योजना का प्रतिनिधि बताकर फोन करते हैं। वे पीड़ित को भरोसे में लेते हैं और कहते हैं कि “आपकी मदद के लिए हमें आपके मोबाइल में एक ऐप इंस्टॉल करना होगा।” जैसे ही व्यक्ति वह ऐप डाउनलोड कर लेता है, अपराधी उसके मोबाइल पर पूरी नजर रख सकते हैं।
वे देख सकते हैं कि आप कौन-सा ऐप खोल रहे हैं, कौन-सा पासवर्ड डाल रहे हैं और किस बैंक अकाउंट से लेन-देन कर रहे हैं। धीरे-धीरे वे आपके भरोसे का फायदा उठाकर आपके अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं। कई मामलों में ठगों ने पीड़ित का पूरा बैंक बैलेंस साफ कर दिया है।

.apk फाइल से क्यों बढ़ रहा है खतरा?

आजकल अपराधी एक नया तरीका अपना रहे हैं। वे लोगों को WhatsApp या ईमेल पर .apk फाइल भेजते हैं। .apk फाइल असल में एंड्रॉइड ऐप इंस्टॉलेशन फाइल होती है। सामान्य लोग यह सोचकर इसे इंस्टॉल कर लेते हैं कि इसमें शादी का कार्ड, बैंक से जुड़ा मैसेज या कोई लुभावना ऑफर है।
हाल ही में कई मामलों में देखा गया है कि अपराधियों ने फर्जी शादी का कार्ड भेजकर लोगों को फंसाया। जैसे ही व्यक्ति उस कार्ड के बहाने .apk फाइल इंस्टॉल करता है, उसका मोबाइल पूरी तरह अपराधियों के कब्जे में चला जाता है। अब ठग मोबाइल के सारे ऐप्स, फाइलें और मैसेज तक देख सकते हैं। इतना ही नहीं, वे आपके बैंक अकाउंट तक पहुंच बनाकर लाखों-करोड़ों रुपये गायब कर सकते हैं।

साइबर ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां

साइबर अपराध से बचने का सबसे पहला कदम है सतर्कता। किसी भी अनजान लिंक या अज्ञात स्रोत से मिली फाइल को कभी भी डाउनलोड नहीं करना चाहिए। खासतौर पर अगर वह .apk फाइल हो तो बिल्कुल भी इंस्टॉल न करें। ऐप हमेशा केवल Google Play Store या भरोसेमंद स्टोर से ही डाउनलोड करें।
अगर कोई व्यक्ति फोन या व्हाट्सएप पर आपसे किसी ऐप को डाउनलोड करने की बात कहे तो तुरंत इंकार कर दें। याद रखें, असली बैंक या सरकारी संस्था कभी भी आपसे ऐसा नहीं कहेगी। इसके अलावा अपने OTP, ATM PIN या UPI PIN को हमेशा गुप्त रखें। मोबाइल में एंटीवायरस जरूर रखें और समय-समय पर फोन को अपडेट करते रहें।

परिवार और समाज को कैसे सुरक्षित रखें?

साइबर ठगी से बचना केवल आपकी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आपके परिवार और समाज की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। अपने घर के बुजुर्गों और बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि वे किसी भी अनजान लिंक या ऐप को कभी न खोलें।
अगर आपके रिश्तेदार या दोस्त को इस तरह का फर्जी मैसेज मिले तो तुरंत उन्हें आगाह करें। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए इस तरह की जानकारी लोगों तक पहुंचाएं। अगर दुर्भाग्यवश किसी के साथ धोखाधड़ी हो जाए तो तुरंत 1930 (National Cyber Crime Helpline) पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

निष्कर्ष

साइबर अपराधी हर दिन नए-नए तरीके अपनाते हैं। कभी वे बैंक हेल्पलाइन बनकर कॉल करते हैं, कभी फर्जी शादी का कार्ड भेजते हैं और कभी आकर्षक ऑफर दिखाकर आपको जाल में फंसाते हैं। ऐसे में केवल एक ही हथियार है जो आपको सुरक्षित रख सकता है – जागरूकता और सतर्कता।
अगर आप खुद सतर्क रहेंगे और दूसरों को भी सतर्क करेंगे, तो न केवल आप बल्कि पूरा समाज साइबर ठगी से सुरक्षित रह सकता है।

लखनऊ बनेगा उत्तर भारत की स्वास्थ्य राजधानी : डॉ. राजेश्वर सिंह का ₹15,812 करोड़ का प्रस्ताव, 5,000 नए अस्पताल बेड का विज़न

लखनऊ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह ने सीएम योगी को ₹15,812 करोड़ का रोडमैप सौंपा। 5,000 नए अस्पताल बेड, एआई-सक्षम अस्पताल, मेडिकल टूरिज़्म और 15,000 रोजगार का लक्ष्य।

लखनऊ: स्वास्थ्य सुधार की दिशा में ऐतिहासिक पहल

राजधानी लखनऊ की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई पहचान दिलाने के लिए सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य आने वाले वर्षों में लखनऊ को उत्तर भारत का सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र बनाना है। इसके लिए डॉ. सिंह ने 5,000 अतिरिक्त अस्पताल बेड की तत्काल आवश्यकता पर बल देते हुए 2030 तक लखनऊ को “उत्तर भारत की स्वास्थ्य राजधानी” के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

बढ़ती आबादी और अस्पतालों पर बढ़ता दबाव

लखनऊ की प्रमुख स्वास्थ्य संस्थाएं—किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), संजय गांधी पीजीआई (एसजीपीजीआई), डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल), सिविल और लोक बंधु अस्पताल—अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक मरीजों का उपचार कर रही हैं। राजधानी की आबादी 45 लाख से ऊपर पहुंच चुकी है और शहरीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है। ऐसे में अस्पतालों की मौजूदा संरचना आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर दबाव डाल सकती है। कोविड-19 महामारी के दौरान बेड्स, आईसीयू और ऑक्सीजन की कमी ने इस खाई को और स्पष्ट कर दिया था, जिससे यह साबित हुआ कि लखनऊ को भविष्य की आपात परिस्थितियों के लिए बेहतर तैयारी की आवश्यकता है।

5,000 अतिरिक्त बेड्स का चरणबद्ध विस्तार

डॉ. सिंह के प्रस्ताव में अगले तीन से पाँच वर्षों के भीतर लखनऊ के अस्पतालों में 5,000 नए बेड्स जोड़ने का खाका शामिल है। इसके तहत एसजीपीजीआई और केजीएमयू में 500-500 अतिरिक्त बेड्स की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, आरएमएल, सिविल और लोक बंधु अस्पतालों को 250-250 बेड्स की क्षमता से मजबूत किया जाएगा। बाकी बेड्स जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी संस्थानों में वितरित किए जाएंगे। यह विस्तार न केवल भीड़भाड़ वाले वार्डों में राहत देगा बल्कि मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में भी सहायक होगा।

स्वास्थ्य सुधार की व्यापक रणनीति

यह योजना सिर्फ बेड्स की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ की संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली को बदलने की परिकल्पना भी करती है। प्रस्ताव में रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग सिस्टम और रेफरल लिंक की व्यवस्था की बात कही गई है, ताकि मरीजों को तत्काल सही अस्पताल तक पहुंचाया जा सके। बाहरी लखनऊ में एसजीपीजीआई और केजीएमयू के उपकेंद्र खोलकर सैटेलाइट यूनिट्स स्थापित करने का विचार भी रखा गया है। इसके साथ ही आपातकालीन और सुपर-स्पेशियल्टी इकाइयाँ विकसित करने की योजना बनाई गई है, ताकि सामान्य वार्डों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
प्रस्ताव में तकनीकी सुधारों पर भी विशेष बल दिया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं को लागू करके मरीजों की प्राथमिकता तय करने, टेली-आईसीयू और ई-ओपीडी जैसी सुविधाओं को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा “लखनऊ हेल्थ सिटी” का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें अस्पतालों के साथ रिसर्च सेंटर और बायोटेक हब भी शामिल होंगे।

वित्तीय खाका और निवेश योजना

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने के लिए लगभग ₹15,812.5 करोड़ की आवश्यकता होगी। वित्तीय खाके के अनुसार, राज्य सरकार इस पर ₹6,325 करोड़ खर्च करेगी, जबकि केंद्र सरकार का योगदान लगभग ₹4,743.75 करोड़ रहेगा। इसके अलावा सीएसआर और पीपीपी मॉडल के तहत ₹2,371.87 करोड़ जुटाए जाएंगे। विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी बराबर की राशि प्राप्त करने की योजना है। इस बहुआयामी फंडिंग मॉडल से यह सुनिश्चित होगा कि परियोजना सिर्फ कागज पर न रहकर ज़मीन पर भी उतरे।

मेडिकल टूरिज़्म और रोजगार सृजन की संभावना

डॉ. सिंह के इस प्रस्ताव से लखनऊ न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत का मेडिकल हब बनेगा। आधुनिक चिकित्सा सेवाओं और एआई-सक्षम अस्पतालों के साथ लखनऊ को पड़ोसी देशों और अफ्रीकी राष्ट्रों तक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने लायक बनाया जाएगा। इससे मेडिकल टूरिज़्म को भी नई दिशा मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी। साथ ही इस परियोजना से 15,000 से अधिक नए रोजगार सृजित होंगे, जिससे युवाओं को व्यापक अवसर मिलेंगे।

विज़न 2030: लखनऊ की नई पहचान

डॉ. राजेश्वर सिंह का स्पष्ट विज़न है कि 2030 तक लखनऊ की पहचान सिर्फ़ एक राजनीतिक राजधानी के रूप में नहीं बल्कि एक “स्वास्थ्य राजधानी” के रूप में भी हो। आधुनिक अवसंरचना, सुपर-स्पेशियल्टी सेवाएं, वैश्विक रिसर्च सहयोग और मेडिकल टूरिज़्म इस शहर को विश्व स्तर पर स्थापित करेंगे। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो लखनऊ आने वाले समय में उत्तर भारत ही नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र बन सकता है।