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शांति वार्ता में यूरोपीय देशों की रुकावट! रूस ने कहा- यूक्रेन में पश्चिमी नेताओं की दखलअंदाजी नामंजूर

रूस-यूक्रेन के बीच शांति वार्ता को लेकर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूरोपीय देशों पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच चले रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रहे शांति वार्ता में पश्चिमी देश बाधा डाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि कूटनीतिक गतिविधियों के कारण वार्ता में रुकावट आती दिख रही है.

‘शांति वार्ता रोकने के बहाने तलाश रहे यूरोपीय देश’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाह रहे हैं कि जेलेंस्की और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक हो, लेकिन दोनों एक-दूसरे पर शांति वार्ता को सफल नहीं होने देने का आरोप लगा रहे हैं.  रूसी विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश शांति वार्ता को रोकने के लिए बस एक बहाने की तलाश में हैं.

‘पुतिन के साथ अड़ियल रवैया अपना रहे जेलेंस्की’

रूस की सरकारी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में लावरोव ने कहा, “यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ अड़ियल रवैया अपना रहे हैं. वे शर्तें रख रहे हैं और किसी भी कीमत पर तत्काल बैठक की मांग कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि पश्चिमी देश शांति वार्ता को विपल करने के प्रयास में सफल नहीं होंगे.”

यूक्रेन में किसी पश्चिमी नेता को नहीं करेंगे बर्दाश्त- रूस

जेलेंस्की ने पुतिन से मिलने की इच्छा जताई है, लेकिन ऐसा तभी होगा जब उनके सहयोगी (यूरोपीय देश) यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर सहमत हो जाएंगे. ताकि लड़ाई बंद होने के बाद भविष्य में रूसी हमलों को रोका जा सके. रूस का कहना है कि शांति वार्ता के लिए इस तरह की शर्तों को बाधा नहीं बनाया जा सकता है. रूस ने साफ किया है कि यूक्रेन में यूरोप के नेताओं की उपस्थिति बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

मॉस्को ने रविवार को यूक्रेन पर आरोप लगाया कि उसने रूस के पश्चिमी क्षेत्र कुर्स्क में स्थित एक परमाणु बिजली संयंत्र पर ड्रोन हमला किया. रूसी अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन हमले से संयंत्र का ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुआ. यह हमला ऐसे समय में हुआ जब यूक्रेन अपनी स्वतंत्रता के 34 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा था.

Sports News:एमएस धोनी को BCCI से कितनी पेंशन मिलती है? जानें हर महीने उनके खाते में कितनी रकम आती है

एमएस धोनी ने साल 2020 में अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर को विराम दे दिया था. वो उसके बाद सिर्फ IPL में खेलते हुए नजर आते हैं, जहां 2025 सीजन में खेलने के CSK ने उन्हें 4 करोड़ रुपये की सैलरी दी थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धोनी की नेट वर्थ (MS Dhoni Net Worth) 1000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. उनकी कमाई के कई सारे जरिये हैं, लेकिन रिटायर हो चुके क्रिकेटरों को BCCI पेंशन देता है. तो क्या धोनी को भी इस पेंशन का लाभ मिलता है?

क्या एमएस धोनी को मिलती है पेंशन?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने साल 2022 में पेंशन स्कीम में बदलाव किए थे, जिसके तहत रिटायर हो चुके खिलाड़ियों को मिलने वाली पेंशन की रकम को बढ़ाया गया था. यह पेंशन कई पहलुओं को ध्यान में रखकर दी जाती है, जिनमें करियर की लंबाई भी एक होती है. पूर्व फर्स्ट-क्लास खिलाड़ियों को प्रतिमाह 30 हजार रुपये की पेंशन मिलती है. वहीं पूर्व टेस्ट खिलाड़ियों को 60 हजार रुपये की पेंशन मिलती है. चूंकि एमएस धोनी ने भारत के लिए 25 से ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं, करियर में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. इसलिए उन्हें प्रतिमाह 70,000 रुपये की पेंशन मिलती है.

महिला क्रिकेटरों को भी पेंशन मिलती है. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुकीं भारतीय खिलाड़ियों को 52,500 रुपये की पेंशन मिलती है. वहीं फर्स्ट-क्लास क्रिकेट की पूर्व खियालड़ियों को 45,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है.

एमएस धोनी का करियर

2004 से शुरू हुए अपने इंटरनेशनल करियर को एमएस धोनी ने साल 2020 में विराम दिया. इस दौरान वो टीम इंडिया के कप्तान बने और अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को 2007 टी20 वर्ल्ड कप, 2011 ODI वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जिताई. उन्होंने विकेटकीपिंग में सबसे ज्यादा स्टंपिंग (195) का रिकॉर्ड अपने नाम किया. धोनी ने अपने 538 मैचों के इंटरनेशनल करियर में 17,266 रन बनाए, जिनमें 16 शतक और 108 अर्धशतक भी शामिल रहे.

हर रविवार उम्मीद की चौपाल : भटगांव के हसनखेड़ा में आयोजित हुआ 132वां ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ शिविर, सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की जनसेवा पहल बनी जनविश्वास का आधार

  • भटगांव के हसनखेड़ा में आयोजित हुआ 132वां ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ शिविर।
  • ग्रामीणों ने 42 समस्याओं को साझा किया, समाधान के लिए विभागीय निर्देश जारी।
  • 4 मेधावी छात्रों को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
  • 142वां बॉयज और 82वां गर्ल्स यूथ क्लब गठित, अब तक 222 क्लब सक्रिय।
  • सामाजिक कार्यकर्ताओं को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
  • ‘तारा शक्ति निःशुल्क रसोई’ से ग्रामीणों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया।
  • विभिन्न आरडब्ल्यूए में आयोजित हुए विशेष मतदाता पंजीकरण शिविर।
  • युवाओं ने उत्साह के साथ नए मतदाता बनने की प्रक्रिया पूरी की।

लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में जनप्रतिनिधित्व को केवल चुनाव तक सीमित न रखते हुए, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जनता और सरकार के बीच एक ऐसा संवाद मंच स्थापित किया है, जिसे जनता “उम्मीद की चौपाल” कह रही है। हर रविवार आयोजित होने वाला ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ जनसुनवाई शिविर आज लोगों के बीच विश्वास, समाधान और जनसंपर्क का प्रतीक बन चुका है। रविवार को ग्राम पंचायत भटगांव के मजरा हसनखेड़ा में आयोजित हुआ 132वां शिविर इस बात का प्रमाण है कि जनसेवा केवल घोषणा नहीं बल्कि जमीनी हकीकत भी हो सकती है।

समस्याओं से समाधान तक – भरोसे की सीढ़ी

132वें शिविर में क्षेत्रीय नागरिकों ने सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, आवास और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से जुड़ी 42 समस्याओं और सुझावों को विधायक डॉ. सिंह के समक्ष रखा। खास बात यह रही कि हर शिकायत और हर सुझाव को न केवल गंभीरता से सुना गया बल्कि मौके पर ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को समाधान के लिए निर्देश भी दिए गए।

यह पहल केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं, बल्कि “समाधान की संस्कृति” को मजबूत करने का एक नया तरीका है। आंकड़े बताते हैं कि अब तक इस अभियान के अंतर्गत 6,000 से अधिक समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया गया है। यह आँकड़ा इस बात को दर्शाता है कि यदि जनता और जनप्रतिनिधि के बीच सीधा संवाद बना रहे तो किसी भी समस्या का समाधान कठिन नहीं।

प्रतिभा का सम्मान – भविष्य को प्रोत्साहन

‘गाँव की शान’ पहल के अंतर्गत मेधावी छात्रों को सम्मानित करने की परंपरा भी इस शिविर का विशेष आकर्षण रही। इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चार मेधावियों को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

  • खुशी कश्यप (76%)
  • निखिल कश्यप (70%)
  • शिवानी गौतम (88%)
  • जतिन कुमार (70%)

इन छात्रों के लिए यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं बल्कि प्रेरणा का स्रोत है। अब तक इस पहल के तहत 500 से अधिक मेधावी छात्रों को साइकिलें प्रदान की जा चुकी हैं। डॉ. सिंह का मानना है कि गाँव से निकलने वाले ये होनहार बच्चे ही भविष्य में समाज और देश का नेतृत्व करेंगे।

युवाओं को जोड़ने की नई ऊर्जा – यूथ क्लब

132वें शिविर में युवाओं की भागीदारी को और मजबूत करने के लिए 142वें बॉयज और 82वें गर्ल्स यूथ क्लब का गठन किया गया। सरोजनीनगर क्षेत्र में अब तक कुल 222 यूथ क्लब सक्रिय हो चुके हैं। इन क्लबों को क्रिकेट, वॉलीबॉल, फुटबॉल, कैरम और इंडोर-आउटडोर खेलों की किट प्रदान की जाती है।

यह पहल युवाओं में खेल और फिटनेस की भावना को मजबूत करती है। साथ ही, यह अनुशासन, टीम वर्क और समाजसेवा की सीख भी देती है। यूथ क्लब अब सिर्फ खेलकूद तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक विकास में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

सम्मान और सामुदायिक सहयोग की परंपरा

शिविर में गाँव और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। इनमें भाजपा मंडल अध्यक्ष विवेक राजपूत, महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष मधु चौरसिया, ग्राम प्रधान तारा, विपिन कुमार (पीनू), बूथ अध्यक्ष केदार मौर्या, बृज किशोर, राम प्यारे, रमेश गौतम, बांके लाल, राम चंद, राम दुलारे कश्यप, बराती लाल, पंकज शुक्ला, बुद्धिलाल मौर्या, चन्दन कश्यप, प्रिओम सिंह और सूरज सिंह शामिल रहे।

सम्मान के इस अवसर ने सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को और मजबूत किया। कार्यक्रम के अंत में ‘तारा शक्ति निःशुल्क रसोई’ के माध्यम से आए हुए सभी ग्रामीणों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। यह पहल केवल भोजन वितरण नहीं बल्कि आपसी भाईचारे और अपनत्व का प्रतीक बन गई है।

लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम : मतदाता पंजीकरण शिविर

डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल केवल जनसमस्याओं और युवाओं तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र की मजबूती को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न आरडब्ल्यूए (RWA) में विशेष मतदाता पंजीकरण शिविर भी आयोजित कराए।

इन शिविरों का उद्देश्य ऐसे युवाओं और नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना रहा, जो हाल ही में 18 वर्ष के हुए हैं या किसी कारण से अब तक सूची में पंजीकृत नहीं हो पाए।

लाइटहाउस अपार्टमेंट, रिशिता मैनहट्टन, सूरत रेजीडेंसी, आरजी एम्फोरिया, शिवा ग्रीन्स अपार्टमेंट, हिमालय एन्क्लेव, नीलगिरि अपार्टमेंट और आश्रा एन्क्लेव में आयोजित इन शिविरों में बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। युवाओं ने विशेष उत्साह के साथ नए मतदाता बनने की प्रक्रिया पूरी की।

132वां ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ शिविर यह साबित करता है कि जब जनप्रतिनिधि जनता तक पहुंचता है तो लोकतंत्र और अधिक सशक्त होता है। समस्याओं का समाधान, युवाओं का सम्मान, खेलों के माध्यम से ऊर्जा का संचार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी – ये सभी प्रयास डॉ. राजेश्वर सिंह की सोच को दर्शाते हैं, जो कहते हैं –
“हर रविवार जनता के नाम।”

कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की जननी, यूपीए काल में “हिंदू आतंकवाद” थ्योरी से भारत की छवि धूमिल हुई : डॉ. राजेश्वर सिंह

  • डॉ. राजेश्वर सिंह बोले – कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की जननी है।
  • 1916 लखनऊ पैक्ट से शुरू हुई वोट बैंक राजनीति।
  • शाह बानो केस से शाहीनबाग आंदोलन तक कांग्रेस की भूमिका।
  • देश को डॉ. कलाम जैसे प्रगतिशील मुस्लिम नेता की जरूरत।

लखनऊ : सरोजनीनगर के विधायक और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता डॉ. राजेश्वर सिंह ने कांग्रेस पार्टी पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि “कांग्रेस भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण की जननी है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 100 साल से ज्यादा समय से केवल वोट बैंक की राजनीति की और देश की एकता और अखंडता के साथ खिलवाड़ किया।

डॉ. सिंह ने कहा कि आज़ादी से पहले से लेकर आज तक, कांग्रेस ने हर दौर में मुस्लिम तुष्टिकरण को ही प्राथमिकता दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “शाह बानो से लेकर शाहीनबाग तक कांग्रेस का एजेंडा केवल मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति रहा है।”

आज़ादी से पहले की राजनीति और कांग्रेस का तुष्टिकरण

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने विस्तृत विचारों में कहा कि मुस्लिम तुष्टिकरण की शुरुआत कांग्रेस ने आज़ादी से पहले ही कर दी थी।

1916 का लखनऊ पैक्ट – कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के साथ समझौता कर मुसलमानों को पृथक निर्वाचन की सुविधा दी। यह भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिक आधार पर वोट बैंक की नींव थी।

1920 का खिलाफ़त आंदोलन – कांग्रेस ने तुर्की के खलीफा के समर्थन में आंदोलन छेड़ा। परिणामस्वरूप मालाबार क्षेत्र में भयानक मोपला नरसंहार हुआ, जिसमें हजारों हिंदुओं की हत्या और महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ। लेकिन कांग्रेस ने उस त्रासदी पर कभी आवाज़ नहीं उठाई।

1942 में कांग्रेस मंत्रिमंडल में मुस्लिम लीग को जगह – इस कदम ने साम्प्रदायिक ताकतों को और बढ़ावा दिया।

1947 का विभाजन – डॉ. सिंह ने याद दिलाया कि विभाजन के समय कांग्रेस की कमजोर नीतियों ने देश को 1.5 करोड़ विस्थापित और 15–20 लाख लोगों की मौत की त्रासदी दी। लाखों महिलाओं पर अमानवीय अत्याचार हुए।

उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय एकता की कीमत पर कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति को जन्म दिया और देश को विभाजन की पीड़ा दी।”

स्वतंत्र भारत में कांग्रेस और तुष्टिकरण की नीतियाँ

आज़ादी के बाद कांग्रेस ने तुष्टिकरण को नीतिगत स्तर पर लागू किया। डॉ. सिंह ने कई उदाहरण गिनाए :

  1. नेहरू-लियाकत समझौता (1950) – जिसमें भारतीय मुसलमानों को सुरक्षा दी गई, लेकिन पाकिस्तान में हिंदू और सिख अल्पसंख्यकों की स्थिति पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
  2. 1955-56 में हिंदू कोड बिल सुधार – सिर्फ हिंदू समाज में सुधार लाया गया, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ पर कोई बदलाव नहीं किया गया।
  3. हज सब्सिडी (1959) – कांग्रेस सरकार ने पहली बार हज यात्रा पर सरकारी सब्सिडी दी, जो दशकों तक जारी रही।
  4. शाह बानो केस (1985) – सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद में कानून बनाकर पलट दिया गया, ताकि मुस्लिम वोट बैंक नाराज़ न हो।
  5. वक्फ अधिनियम (1995) – जिसके जरिए वक्फ संपत्तियों को अत्यधिक विशेषाधिकार दिए गए।
  6. सच्चर समिति रिपोर्ट (2006) – मुस्लिम तुष्टिकरण का नया चेहरा, जिसमें कहा गया कि मुस्लिम समाज पिछड़ा है और उन्हें विशेष लाभ दिए जाएं।
  7. मनमोहन सिंह का बयान – “देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का है।”

डॉ. सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने बहुसंख्यक समाज के साथ लगातार भेदभाव किया और मुस्लिम तुष्टिकरण को संस्थागत रूप दे दिया।

यूपीए काल और वोट बैंक राजनीति

डॉ. सिंह ने यूपीए सरकार के दौर को कांग्रेस की वोट बैंक राजनीति का चरम बताया। उन्होंने कहा :

Communal Violence Bill (2011) – इसमें दंगों की स्थिति में हमेशा बहुसंख्यक समाज को दोषी मानने का प्रावधान था।

RTE (2009) – मदरसों को आधुनिक शिक्षा से छूट देकर लगभग 2.5 करोड़ बच्चों को विकास से वंचित कर दिया गया।

POTA हटाना और SIMI पर ढील – आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कानून कमजोर किया गया।

अफजल गुरु को बचाने की कोशिश – संसद हमले के दोषी को फांसी से बचाने के प्रयास हुए।

“हिंदू आतंकवाद” थ्योरी – देश की सांस्कृतिक छवि धूमिल करने के लिए कांग्रेस ने यह झूठा नैरेटिव खड़ा किया।

शाहीनबाग आंदोलन और CAA विरोध – कांग्रेस ने खुलेआम इन आंदोलनों का समर्थन किया।

हिजाब विवाद – कांग्रेस ने कट्टरपंथी एजेंडे को समर्थन देकर मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा को नुकसान पहुंचाया।

डॉ. सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक राम मंदिर निर्माण का भी विरोध किया और अदालत में अड़ंगे लगाए।

शाह बानो से शाहीनबाग तक कांग्रेस का एजेंडा

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि “कांग्रेस ने वही किया जो 1916 में शुरू किया था। शाह बानो केस से लेकर शाहीनबाग आंदोलन तक कांग्रेस की नीतियाँ केवल मुस्लिम वोट बैंक पर केंद्रित रहीं।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि उसने हमेशा मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के लिए राष्ट्रीय हितों की बलि दी।

भारत को चाहिए प्रगतिशील मुस्लिम नेतृत्व

डॉ. सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे प्रगतिशील और प्रेरक मुस्लिम नेता चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को तय करना होगा कि वे किस तरह का नेतृत्व चाहते हैं –

क्या अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे अपराधी नेता?

या फिर कलाम जैसे महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद और राष्ट्रप्रेमी नेता?

उन्होंने कहा –

“धार्मिक नेताओं को मस्जिदों तक सीमित रहना चाहिए, राजनीति का निर्धारण नहीं करना चाहिए।”

“मुस्लिम महिलाओं को शिक्षा, बराबरी और सम्मान का अधिकार मिलना चाहिए।”

“मुस्लिम समाज को अशिक्षा, कट्टरपंथ और पिछड़ेपन से बाहर आना होगा।”

दो सवाल जिन पर मुस्लिम समाज को आत्ममंथन करना चाहिए

डॉ. सिंह ने मुस्लिम समाज से दो अहम सवाल पूछे :

  1. नेतृत्व का चुनाव – क्यों मुस्लिम समाज से बड़े पैमाने पर डॉ. कलाम जैसे प्रेरक नेता नहीं निकलते, और क्यों अतीक-अंसारी जैसे अपराधियों को नेता बनाया जाता है?
  2. प्रगति या पतन – क्यों दुबई जैसे मुस्लिम देश शिक्षा और विकास का मॉडल बन गए, जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान चरमपंथ और अस्थिरता में फंसे हुए हैं?

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने बयान के अंत में कहा :
“भारत को आज ऐसे प्रगतिशील और अग्रगामी मुस्लिम समाज की आवश्यकता है, जो शिक्षा, रोज़गार और सुधार की राह पर चले। सच्चा नेतृत्व वही है जो समाज को कट्टरपंथ से बाहर लाकर तरक़्क़ी की ओर ले जाए।”

इस आसान रेसिपी से साधारण भिंडी को दें नया ट्विस्ट – बनाएं इसे कुरकुरी और चटपटी

कई लोगों को भिंडी की सब्जी बहुत पसंद होती है लेकिन घर पर ढाबे पर बनाई जाने वाली कुरकुरी और चटपटी भिंडी का स्वाद नहीं मिल पाता है। अगर आप भी कुरकुरी और चटपटी भिंडी बनाना चाहते हैं, तो इस रेसिपी को फॉलो कर सकते हैं। आपको 250 ग्राम भिंडी, 4 स्पून बेसन, 2 स्पून चावल का आटा, एक छोटी स्पून लाल मिर्च पाउडर, हाफ छोटी स्पून हल्दी पाउडर, एक छोटा स्पून धनिया पाउडर, हाफ छोटा स्पून गरम मसाला, एक छोटा स्पून चाट मसाला, नमक और तेल की जरूरत पड़ेगी।

पहला स्टेप- सबसे पहले भिंडी को अच्छी तरह से धो लीजिए। जब भिंडी पूरी तरह से सूख जाए, तब आप भिंडी के दोनों किनारों को काटकर इन्हें बीच से लंबाई में काट लीजिए। 

दूसरा स्टेप- अब आप एक कटोरे में बेसन, चावल का आटा, लाल मिर्च पाउडर और हल्दी पाउडर निकाल लीजिए। इसी कटोरे में धनिया पाउडर, गरम मसाला, चाट मसाला और नमक भी निकाल लीजिए।

तीसरा स्टेप- आपको इन सभी मसालों को अच्छी तरह से मिक्स कर लेना है। इसके बाद कटी हुई भिंडी के सभी स्लाइस को इस मसाले के साथ मिला लीजिए।

चौथा स्टेप- अगर भिंडी के स्लाइस में मसाला अच्छी तरह से नहीं चिपक रहा है, तो आप थोड़े से पानी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अब एक कड़ाही में तेल को गर्म कर लीजिए।

पांचवां स्टेप- मीडियम फ्लेम पर मसाले वाली भिंडी को गोल्डन ब्राउन यानी क्रंची होने तक फ्राई कर लीजिए। एक प्लेट में टिशू पेपर निकाल लीजिए।

छठा स्टेप- टिशू पेपर के ऊपर तली हुई कुरकुरी और चटपटी भिंडी को निकाल लीजिए। आखिर में भिंडी के ऊपर थोड़ा सा चाट मसाला बुरक लीजिए और फिर इस सब्जी का लुत्फ उठाइए।

अगली बार आप जब भी भिंडी बनाएं, इस रेसिपी को फॉलो करें। यकीन मानिए सभी को इस क्रिस्पी और स्पाइसी भिंडी का स्वाद काफी ज्यादा पसंद आएगा।