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क्या आईपीएल के शेष मैचों में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी भाग लेंगे? क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने दिया जवाब

इंडियन प्रीमियर लीग का 18वां सीजन भारत और पाकिस्तान के बीच बॉर्डर पर बढ़ते तनाव के चलते 9 मई को सस्पेंड कर दिया गया था, जिसके बाद अब दोनों देशों के बीच सीजफायर होने के साथ आईपीएल 2025 के बाकी बचे मैचों के शेड्यूल का भी ऐलान कर दिया गया है। 17 मई से जहां फिर से मुकाबले खेले जाएंगे तो वहीं 3 जून को खिताबी मैच होगा। वहीं कई विदेशी खिलाड़ी हालात को देखते हुए अपने देश वापस लौट गए थे, जिसके बाद अब नया शेड्यूल आने के साथ कई के वापस आने पर सस्पेंस की स्थिति है, जिसपर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपने प्लेयर्स को लेकर रुख साफ कर दिया है क्योंकि आईपीएल फाइनल मुकाबला खत्म होने के एक हफ्ते बाद ही ऑस्ट्रेलियाई टीम को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के तीसरे संस्करण का फाइनल मैच खेलना है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपने प्लेयर्स पर छोड़ा फैसला

आईपीएल में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के वापस फिर से आने को लेकर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने साफ कर दिया है कि उनके प्लेयर्स को वापस खेलने जाना है या नहीं इसका फैसला वह खुद करेंगे जिसमें हम उनके साथ हैं। टीम मैनेजमेंट उन सभी प्लेयर्स के साथ मिलकर काम करेगा जो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले के लिए स्क्वाड का हिस्सा होंगे और आईपीएल मैचों में खेलने का फैसला लेते हैं। वहीं हम ऑस्ट्रेलियाई सरकार और बीसीसीआई के साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार उनसे संपर्क बनाएं हुए हैं। बता दें कि आईपीएल में अभी भी 13 ग्रुप मुकाबले बाकी हैं।

जोश हेजलवुड पहले ही हो गए थे बाहर

ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाड़ी जोश हेजलवुड पहले ही आईपीएल 2025 सीजन के बाकी बचे मैचों से कंधे की चोट के चलते बाहर हो गए थे, जिनकी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले तक फिट होने की उम्मीद की जा सकती है। वहीं इसके अलावा पैट कमिंस और ट्रैविस हेड के आने पर भी संशय है क्योंकि उनकी टीम सनराइजर्स हैदराबाद पहले ही प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है। इसके अलावा यदि मिचेल स्टार्क वापस नहीं लौटते हैं तो ये दिल्ली कैपिटल्स की टीम के लिए एक बड़ा झटका होगा।

बॉलीवुड के फ्लॉप हीरो ने अपने माता-पिता की केमिस्ट्री की कहानी साझा की

बॉलीवुड स्टारकिड्स के लिए फिल्मों में आना जितना आसान है उतना ही मुश्किल यहां टिके रहना है। बॉलीवुड के एक स्टारकिड ऐसे भी हैं जिनकी पहली फिल्म से लोगों को काफी उम्मीदें थीं और बड़े ही धूमधाम से रिलीज हुई थी। इसके गाने भी हिट रहे थे लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी। इतना ही नहीं इस हीरो की पहली फिल्म के साथ ही करियर भी फ्लॉप हो गया और अभी तक वापसी नहीं कर पाए। हम बात कर रहे हैं सूरज पंचोली की। सूरज के पिता आदित्य पंचोली भी बॉलीवुड के फेमस हीरो और एक्टर रहे हैं। वहीं सूरज की मां भी एक खूबसूरत एक्ट्रेस हैं और अक्सर ही फिल्मों में नजर आती रहती हैं। हाल ही में सूरज पंचोली ने अपने मां-पिता के रिश्ते को लेकर खुलकर बात की और उन्होंने दोनों की जोड़ी को ‘ब्यूटी एंड बीस्ट’ की जोड़ी बताया।

जरीना वहान केस ने 12 साल तक किया दुखी

सूरज पंचोली ने हाल ही में बताया कि कैसे उनके माता-पिता आदित्य पंचोली और ज़रीना वहाब पर्सनालिटी बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 12 साल तक चले जिया खान आत्महत्या मामले के दौरान वे किस तरह के मानसिक आघात से गुजरे। अपने पिता की युवावस्था और विरासत में मिली खूबियों पर विचार करते हुए बॉलीवुड बबल से बातचीत में सूरज ने अपने माता-पिता, आदित्य और ज़रीना को दो बहुत ही अलग-अलग व्यक्ति बताया, और मजाकिया अंदाज़ में उनकी तुलना ‘ब्यूटी एंड द बीस्ट’ से की। अपने पिता के पुराने वीडियो पर विचार करते हुए सूरज ने स्वीकार किया कि आदित्य अपनी युवावस्था में काफी आकर्षक थे। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि उन्हें अपनी मां की मासूमियत और आंखें विरासत में मिली हैं, लेकिन उनका मानना ​​है कि उन्हें अपने माता-पिता दोनों से सबसे अच्छे गुण मिले हैं। अपने पिता का दिल और अपनी मां की बुद्धि।

12 साल तक झेला जिया खास का केस

अभिनेता सूरज पंचोली ने अपने 12 साल लंबे कोर्ट केस के भावनात्मक बोझ के बारे में भी बताया। जिसमें उन्होंने अपने परिवार के अटूट समर्थन को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि जब वे हमेशा उनके साथ थे तो उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में संघर्ष करना पड़ा, संभवतः उन्हें परेशान करने से बचने के लिए या क्योंकि घर पर कुछ विषयों पर चर्चा नहीं की जाती थी। अतीत को याद करते हुए सूरज ने उल्लेख किया कि अब चीजें अलग हैं, लेकिन तब, उन्होंने अपनी भावनाओं को काफी हद तक अपने तक ही सीमित रखा था।

मुश्किल समय और परिवार से मौन समर्थन

उन्होंने कोर्ट केस के दौरान मुश्किल समय के बारे में और बताया जब उनका परिवार एक साथ बैठता था तो कोई आंख से आंख नहीं मिलाता था या बातचीत नहीं करता था। उन्होंने बताया कि वे सभी उस दर्द को समझते थे, जिससे वे गुजर रहे थे और उनमें से कोई भी यह नहीं पूछना चाहता था कि क्या दूसरे ठीक हैं, क्योंकि अंदर से, वे सभी जवाब जानते थे। हालांकि सूरज ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में चीजें काफी बेहतर हुई हैं, जिससे उनके घर और उनके मन दोनों को शांति मिली है।

नई दिल्ली/वाशिंगटन:भारत-पाक संघर्ष के दौरान अमेरिकी नेताओं से बातचीत में “Trade” पर नहीं हुआ कोई उल्लेख, जानें पूरी रिपोर्ट

 भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के दौरान भारत और अमेरिका के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत में व्यापार को लेकर कोई बात नहीं हुई। सरकारी सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के साथ व्यापार में कटौती की धमकी देकर नई दिल्ली और इस्लामाबाद पर संघर्ष समाप्त करने का दबाव बनाया था। सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने नौ मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात की थी, लेकिन बातचीत में व्यापार को लेकर कोई बात नहीं हुई थी।

एक सूत्र ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद उपराष्ट्रपति वेंस ने नौ मई को प्रधानमंत्री से बात की।” सूत्र के मुताबिक, “विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आठ व 10 मई को विदेश मंत्री एस जयशंकर से और 10 मई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से बात की। इनमें से किसी भी चर्चा में व्यापार का कोई संदर्भ नहीं था।” सूत्रों के आधार पर यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है, जब ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने व्यापार में कटौती का मुद्दा उठाकर दोनों देशों को शत्रुता समाप्त करने के लिए मजबूर किया।

ट्रंप ने क्या कहा था

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान से कहा कि यदि वे संघर्ष रोक दें, तो अमेरिका उनके साथ ‘बहुत सारा व्यापार’ करेगा। उन्होंने कहा, “हम आप लोगों के साथ बहुत सारा व्यापार करेंगे। चलो इसे रोकते हैं। अगर आप इसे रोकते हैं, तो हम व्यापार करेंगे। अगर आप इसे नहीं रोकते हैं, तो हम कोई व्यापार नहीं करने जा रहे हैं।” ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं आपको बता सकता हूं कि लोगों ने कभी भी व्यापार का उस तरह से उपयोग नहीं किया, जैसा मैंने किया। और अचानक उन्होंने (भारत और पाकिस्तान ने) कहा, ‘मुझे लगता है कि हम इसे रोकने जा रहे हैं।’’

ट्रंप ने दावा किया, ‘‘और उन्होंने ऐसा किया है तथा उन्होंने ऐसा कई कारणों से किया है, लेकिन व्यापार एक बड़ा कारण है। हम पाकिस्तान के साथ बहुत सारा व्यापार करने जा रहे हैं। हम भारत के साथ बहुत सारा व्यापार करने जा रहे हैं। हम अभी भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं। हम जल्द ही पाकिस्तान के साथ बातचीत करने जा रहे हैं, और हमने एक परमाणु संघर्ष को रोका है।’’

संन्यास के बाद विराट कोहली ऐतिहासिक रिकॉर्ड से चूके, महज इतने रनों की थी कमी

भारत के लिए टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में 10000 रन सिर्फ दो बल्लेबाजों ने ही बनाए हैं, जिसमें सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के नाम शामिल हैं। खास बात ये है कि इसमें विराट कोहली के पास भी शामिल होने का मौका था। लेकिन वह इससे चूक गए हैं। कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से अचानक संन्यास लेकर सभी को चौंका दिया। उन्होंने रिटायरमेंट ऐसे समय में लिया है, जब इंग्लैंड दौरा बिल्कुल सामने था।

टेस्ट क्रिकेट में पूरे नहीं कर पाए 10000 रन

विराट कोहली ने वनडे क्रिकेट में अभी तक कुल 14181 रन बनाए हैं, जिसमें उनके नाम पर 51 शतक दर्ज हैं। वहीं उन्होंने भारत के लिए 123 टेस्ट मैचों में कुल 9230 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में वह 10000 रन पूरे करने से सिर्फ 770 रन दूर थे। अगर वह टेस्ट से संन्यास नहीं लेते और टेस्ट में 10000 रन पूरे कर लेते, तो वह भारत के लिए टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में दस हजार से ज्यादा रन बनाने वाले तीसरे भारतीय बल्लेबाज बन जाते, लेकिन ऐसा हो ना सका।

साल 2011 में किया था डेब्यू

विराट कोहली ने साल 2011 में महेंद्र सिंह धोनी कप्तानी में टेस्ट में डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे क्रिकेट के सबसे बड़े फॉर्मेट में अपनी जगह बनाई और सबसे बड़े सुपर स्टार बनकर उभरे। साल 2014 में वह भारतीय टेस्ट टीम के परमानेंट कैप्टन भी बन गए थे। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने कुल 40 मैच जीते और विदेशी धरती पर अपना लोहा मनवाया। वह भारत के लिए सबसे ज्यादा टेस्ट मैच जीतने वाले कप्तान रहे।

विदेशी धरती पर किया कमाल

विराट कोहली ने भारतीय टेस्ट कप्तान के तौर पर विदेशों में बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया था। उन्होंने साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट कप्तान के तौर पर दो टेस्ट जीते और इंग्लैंड में तीन मैच जीते। वह भारत के लिए विदेशों में सबसे ज्यादा 16 टेस्ट मैच जीतने वाले कप्तान रहे।

ट्रंप का बयान: “अगर भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर नहीं होता, तो परमाणु युद्ध हो सकता था”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर नहीं होता तो परमाणु युद्ध हो जाता। डोनाल्ड ट्रंप का यह संबोधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले हुआ। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देश परमाणु युद्ध के मुहाने पर आ गए थे।

हम दोनों देशों को ट्रेड में मदद करेंगे

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व की तारीफ की कहा कि वे हालात की गंभीरता को पूरी तरह से समझ सके। उन्होंने कहा कि हम दोनों देशों के साथ ट्रेड में मदद करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर यह संघर्ष नहीं रुका तो हम व्यापार में मदद नहीं करेंगे।

संघर्ष बढ़ता तो बहुत बुरा होता

भारत-पाकिस्तान सीजफायर पर उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच अगर युद्ध बढ़ता तो यह एक बुरा परमाणु युद्ध हो सकता था। लाखों लोग मारे जा सकते थे। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को भी धन्यवाद दिया।

भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार को वार्ता के बाद सैन्य कार्रवाई और गोलीबारी रोकने के लिए सहमति बनी। नई दिल्ली में भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच जमीन, हवा और समुद्र में सभी तरह की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से रोकने पर सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था। ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच काफी तनाव था और ऐसा लग रहा था कि यह रुकने वाला नहीं है।