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‘महाभारत’ की गांधारी का बदला लुक, अब पहचानना हो गया मुश्किल – आजकल दिखती हैं ऐसी

साल 2013 में टीवी पर प्रसारित हुआ महाकाव्य पौराणिक ‘महाभारत’ को खूब पसंद किया गया था, जिसमें कई ऐसे कलाकार नजर आए जो आज भी दर्शकों के बीच चर्चा में रहते हैं। इसके हर किरदार को खूब सराहना मिली। हम बात कर रहे हैं सिद्धार्थ कुमार तिवारी का धारावाहिक ‘महाभारत’ जो उस वक्त इसकी कास्ट और कहानी की वजह से खूब सुर्खियों में रहा है। बी आर चोपड़ा द्वारा निर्देशित ‘महाभारत’ के बाद सबसे ज्यादा पसंद इसी पौराणिक टीवी धारावाहिक को किया गया है। कृष्ण, भीष्म, द्रोण, कर्ण, कुंती, दु:शासन, कृपाचार्य, धृतराष्ट्र, शकुनि, अश्वत्थामा, बलराम, सुभद्रा, व्यास, अभिमन्यु, पांडु, सत्यवती और अम्बा जैसे मशहूर किरदार के अलावा एक ऐसा उल्लेखनीय पात्र भी है जो कोई नहीं भूल सकता। जी हां, हम बात कर रहे हैं शो में गांधारी का किरदार निभाने वाली रिया दीपसी की।

गांधारी बन मशहूर हुईं ये एक्ट्रेस

‘महाभारत’ की गांधारी का किरदार निभाकर घर-घर मशहूर हुईं रिया दीपसी ने इस शो के साथ एक्टिंग की दुनिया में डेब्यू किया था। इस शो की वजह से वह इतनी मशहूर हो गई कि आज तक लोग उनका चेहरा नहीं भूल पाए हैं। आइए जानते हैं कि सिद्धार्थ कुमार तिवारी की ‘महाभारत’ में नजर आईं गांधारी यानी रिया दीपसी अब कैसी दिखती हैं। रिया दीपसी ने 17 साल की उम्र में गांधारी का किरदार निभाया था

‘महाभारत’ की गांधारी फिल्मों में भी आ चुकी नजर

17 साल की उम्र में रिया दीपसी ने गांधारी का रोल प्ले कर सभी को अपनी एक्टिंग का दीवाना बना दिया था। वहीं, कमाल की बात ये है कि इतनी कम उम्र में एक्ट्रेस ने खुद से 12 साल बड़े अर्पित रंका की मां का किरदार निभाया था जो ‘महाभारत’ में दुर्योधन बने थे। गांधारी बन कर तारीफ बटोरनी वालीं रिया दीपसी मुंबई से हैं। रिया ने फिल्म मेकिंग में बैचलर ऑफ आर्ट्स किया है। रिया ने थिएटर भी किया है और फिल्मों में भी अपना हाथ आजमा चुकी हैं।‘महाभारत’ की ये एक्ट्रेस कहां है?रिया दीपसी ने साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘भागते रहो’ से बॉलीवुड डेब्यू किया। वहीं, ओटीटी पर भी धूम मचा चुकी है। वह ‘बी सेफ’ और ‘इट हैप्पन इन कैलकटा’ जैसी वेब सीरीज में नजर आ चुकी हैं। रिया ने आखिरी बार पंजाबी म्यूजिक वीडियो में काम किया था। हालांकि, अभी तक एक्ट्रेस ने अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट के बारे में कोई अपडेट नहीं दी है।

अगर डिनर में हल्का-फुल्का खाने का मन हो, तो तुरंत बना लें ब्रेड उपमा – बिना ज्यादा काटने-छाँटने और झंझट के तैयार होने वाली टेस्टी डिश।

रात के खाने में कुछ हल्का और स्वादिष्ट बनाने का मन है, लेकिन बहुत ज़्यादा मेहनत नहीं करना चाहते? तो ब्रेड उपमा की यह रेसिपी आपके लिए एकदम सही है। यह एक ऐसा व्यंजन है जो न सिर्फ़ झटपट तैयार हो जाता है, बल्कि इसका स्वाद भी लाजवाब होता है। इसे बनाने के लिए न तो सब्ज़ियां काटने का झंझट है और न ही ज़्यादा देर तक पकाने का। बस कुछ ही मिनटों में आप अपने परिवार और दोस्तों के लिए एक पौष्टिक और स्वादिष्ट डिनर तैयार कर सकते हैं। यह रेसिपी आपके व्यस्त दिनों के लिए एक बढ़िया विकल्प है, जब आपके पास समय कम हो और कुछ टेस्टी खाना हो।

ब्रेड उपमा बनाने के लिए सामग्री:

6 ब्राउन ब्रेड, एक प्याज, एक हरी मिर्च, धनिया पत्ता, एक टमाटर और एक शिमला मिर्च, तलने के लिए तेल, आधा चम्मच सरसो के बीज, एक चम्मच गर्म मसाला, नमक स्वाद अनुसार

कैसे बनाएं ब्रेड उपमा?

  • पहला स्टेप: ब्रेड उपमा बनाने के लिए सबसे पहले प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ता, टमाटर और फिर शिमला मिर्च को धोएं और फिर इन सब्जियों को बारीक काटकर रख लें।
  • दुसरा स्टेप: इसके बाद आपको करना ये है कि एक कड़ाही में थोड़ा सा तेल और सरसों के बीज डालें।इसमें प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ता और फिर शिमला मिर्च काटकर डालें।
  • तीसरा स्टेप: इसके बाद इसमें, हल्का-हल्का मसाला डालें और सबको भून लें। थोड़ा सा नमक डालें और पका लें। इसमें  ब्रेड को तोड़कर डालें और ऊपर से घी डालकर भून लें। फिर इसमें थोड़ा सा पानी डालें और सबको पकाते रहें। इस तरह तैयार हो जाएगा आपका ब्रेड उपमा।

मुंबई से दूर जाते ही छूटी शराब की लत, डिप्रेशन भी हुआ गायब

बॉलीवुड डायरेक्टर अनुराग कश्यप अपने तीखे बयानों और खरी बात को लेकर अक्सर  ही सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में अनुराग कश्यप ने बॉलीवुड में फैली नकारात्मकता को उजागर किया है। अनुराग ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब से उन्होंने मुंबई छोड़ा है उनकी जिंदगी में काफी सकारात्मक  बदलाव देखने को मिले हैं। जिसमें से पहला है कि उन्होंने शराब छोड़ दी है और डिप्रेशन भी जिंदगी से दूर जा चुका है। सुधीर श्रीनिवासन के यूट्यूब चैनल पर अनुराग कश्यप ने कहा कि मुंबई के लोगों को लगता है कि उन्हें एक रक्षक की जरूरत है क्योंकि वह ‘आरजीवी के रास्ते’ पर जा रहे हैं।

क्या हो रहा है

मार्च में, अनुराग कश्यप ने द हिंदू से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि वह दक्षिण में जा रहे हैं। उन्हें मुंबई से प्यार कम होता महसूस हो रहा था क्योंकि हिंदी फिल्म निर्माता अपनी रचनात्मक ऊर्जा को बढ़ाए बिना बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के पीछे भाग रहे हैं। अनुराग कश्यप ने कहा, ‘मैं डिप्रेशन में चला गया था। अब मैं इससे बाहर आ गया हूं। अब मैं अपने काम का आनंद ले रहा हूं। मैंने एक काम किया, मैंने हिंदी फिल्में देखना बंद कर दिया। मैंने नए फिल्म निर्माताओं की ढेर सारी फिल्में देखनी शुरू कर दीं, मैंने मलयालम फिल्में भी खूब देखीं। ‘

हिंदी फिल्म निर्माता क्यों बचते हैं?

मुंबई में अपने साथ हुए अनुभवों को साझा करते हुए, अनुराग कश्यप ने कहा, ‘हिंदी फिल्म निर्माता मुझसे बचते रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि मैं नया हूं, क्योंकि उन्हें लगता है कि मेरे पास कोई फ़िल्टर नहीं है और मैं बोलता हूं। उन्हें लगता है कि अगर वे मेरे साथ जुड़ गए, तो उन्हें किसी स्टूडियो के साथ काम करने का मौका नहीं मिलेगा या कोई और नाराज हो जाएगा। और मैं एक ऐसी जगह पर आ गया हूं जिससे मैं प्रेरित हूं, और लोग मुझसे बहुत प्यार करते हैं।’ अनुराग कश्यप ने याद करते हुए कहा,  ‘मैं ऐसी जगह क्यों हूँ जहाँ मुझे बताया जा रहा है कि लोग तुम्हारी शराबखोरी के बारे में बात कर रहे हैं, लोग तुम्हारे डिप्रेशन के बारे में बात कर रहे हैं, लोग कह रहे हैं कि तुम अपना रास्ता भटक रहे हो। वे मेरे रक्षक बनने की कोशिश कर रहे हैं और मुझे बता रहे हैं कि मुझे खुद से बचने के लिए क्या करना चाहिए।’ दक्षिण जाने के बाद, अनुराग कश्यप को मन की शांति मिल गई है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लोगों से जूझना नहीं पड़ता। मैंने अपने आप ही व्यायाम करना शुरू कर दिया। अपने आप ही लिखना शुरू कर दिया।’ उन्होंने नेटफ्लिक्स के लिए अपनी पसंदीदा सीरीज मैक्सिमम सिटी के अचानक बंद होने के बाद मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के बारे में भी खुलकर बात की।

अनुराग कश्यप की साउथ प्रोजेक्ट्स

अनुराग कश्यप डकैत में नजर आएंगे, जिसमें वह एक पुलिसवाले की भूमिका निभा रहे हैं। हिंदी और तेलुगु में बनी इस द्विभाषी फिल्म में अदिवी शेष और मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की रिलीज़ की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। राइफल क्लब में उनकी भूमिका के लिए भी उन्हें काफी सराहना मिली।

दुनिया घूमने के शौकीनों के लिए खुशखबरी – अब समुद्र में पूरा जीवन बिताने का मौका देगा क्रूज़ कंपनी का नया ऑफर

क्या आप हर सुबह एक नए नज़ारे के साथ जागने का सपना देखते हैं, वो भी बिना सामान पैक करने या खोलने की झंझट के? अगर हाँ, तो विला वी रेजिडेंस आपके लिए एक सुनहरा मौका लेकर आया है। विला वी रेजीडेंसी एक वैश्विक क्रूज शिप है जो एक यात्रा पर निकलने वालों को जहाज पर एक घर की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जहाँ वे दुनिया भर के विभिन्न देशों में जाते हैं। यह जहाज से जुड़ते हुए, जहाज पर रहने, यात्रा करने का एक अनूठा तरीका प्रदान करता है। कंपनी ने ‘गोल्डन पासपोर्ट’ लॉन्च किया है, जो आपको जिंदगी भर समुद्र में रहने की आज़ादी देता है।

यह क्रूज़ टिकट कई सुविधाओं से है लैस:

यह कोई आम क्रूज़ टिकट नहीं, बल्कि एक लाइफटाइम मेंबरशिप है। एक बार इस पासपोर्ट को खरीदने के बाद, आप जब चाहें और जहाँ चाहें विला वी के क्रूज़ पर असीमित यात्रा कर सकते हैं। चलिए जानते हैं इस गोल्डन पासपोर्ट में कौन कौन सी सुविधाएं मिलेंगी? 

क्या-क्या मिलेगा इस गोल्डन पासपोर्ट में?

  • आजीवन क्रूज़िंग: आप अपनी पूरी ज़िंदगी समुद्र में बिता सकते हैं।
  • कीमत: इसकी कीमत 83 लाख से शुरू होकर ₹2.5 करोड़ तक है।
  • विश्व भ्रमण: आप सात महाद्वीपों, 140 से ज़्यादा देशों और 400 से ज़्यादा जगहों की यात्रा कर पाएँगे। इसमें दुनिया के 12 अजूबे भी शामिल हैं।
  • सुविधाएं: इसमें सभी तरह की सुविधाएँ शामिल हैं, जैसे रहने की जगह, खाने के साथ वाइन या बीयर, कपड़े धोने की सर्विस, इंटरनेट, मनोरंजन और सालाना हेल्थ चेकअप।
  • कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं: पोर्ट टैक्स और सर्विस फीस भी इसी कीमत में शामिल हैं।

यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो रिटायर हो चुके हैं या फिर खानाबदोश हैं और दुनिया को ही अपना घर बनाना चाहते हैं। यह सिर्फ़ यात्रा नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक नया तरीका है, जो हर सुबह आपको एक नया एडवेंचर देगा

वॉशिंगटन: ‘यह तेल और सिरके के मिलने जैसा है’, पुतिन-जेलेंस्की की मीटिंग पर ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के बीच संभावित मुलाकात पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की मुलाकात कुछ-कुछ तेल और सिरके के मिलने जैसी होगी। उन्होंने कहा, ‘हम देखेंगे कि क्या पुतिन और ज़ेलेंस्की साथ मिलकर काम कर पाएंगे। ये कुछ-कुछ तेल और सिरके की तरह है। ये दोनों बहुत अच्छे से नहीं जमते, इसका कारण साफ है, लेकिन हम देखेंगे। फिर हम यह भी देखेंगे कि मुझे वहां जाना पड़ेगा या नहीं।’

‘जंग में हर हफ्ते 7000 लोग मर रहे हैं’

दोनों नेताओं की मुलाकात के जगह पर जाने को लेकर ट्रंप ने कहा, ‘मैं तो नहीं जाना चाहता। मैं तो चाहता हूं कि ये दोनों मिलें और देखें कि ये कैसे कर सकते हैं। लेकिन इस बीच, ये दोनों लड़ाई जारी रखे हुए हैं और लोगों को मार रहे हैं, जो बहुत ही बड़ी बेवकूफी है क्योंकि हर हफ्ते 7000 लोग मर रहे हैं। अब हर हफ्ते औसतन 7000 लोग मर रहे हैं, जिनमें ज्यादातर सैनिक हैं। तो हम देखेंगे कि क्या हम इसे रोक सकते हैं। मैंने 7 जंगें रोक दी हैं। मैं चाहता हूं कि इसको भी रोकूं, मैंने सोचा था कि यह मुश्किलों के मामले में बीच में होगा, लेकिन यह सबसे मुश्किल साबित हो रही है।’

यूक्रेन की मदद को नहीं जाएंगे अमेरिकी सैनिक

बता दें कि हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि रूस के खिलाफ यूक्रेन की रक्षा में मदद के लिए अमेरिकी सैनिकों को नहीं भेजा जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा था कि ‘NATO’ में शामिल होने और रूस से क्रीमिया प्रायद्वीप को पुनः प्राप्त करने की यूक्रेन की उम्मीदें पूरी होना ‘असंभव’ हैं। ‘व्हाइट हाउस’ में ट्रंप, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अन्य यूरोपीय नेताओं के बीच सोमवार को एक लंबी बैठक हुई थी। पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए ट्रंप ने तब जेलेंस्की द्वारा मांगी गई सुरक्षा गारंटी के तहत यूक्रेन की रक्षा के लिए यूरोपीय नेतृत्व वाले प्रयास में भाग लेने के लिए अमेरिकी सैनिकों को भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया था।