नेपाल और भारत की सीमा के पास भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। हालांकि भूकंप का केंद्र तिब्बत में था। वहीं रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.7 मापी गई है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इस भूकंप के बारे में जानकारी दी। भूकंप के झटके इतने तेज थे लोग आधी रात को भी घरों से बाहर निकल गए। 5.7 की तीव्रता का भूकंप होने की वजह से लोगों में भय का माहौल बन गया। बता दें कि इससे पहले भी तिब्बत में रिक्टर स्केल पर 3.7 तीव्रता का भूकंप आया। एनसीएस के अनुसार, भूकंप 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया, जो आफ्टरशॉक के लिए अतिसंवेदनशील था।
बता दें कि इससे पहले सोमवार को भी पाकिस्तान में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मॉलॉजी (NCS) ने बताया कि भूकंप शाम को 4 बजकर 5 मिनट पर आया। भूकंप के झटकों के डर से लोग घर छोड़कर बाहर आ गए। एनसीएस के अनुसार, भूकंप का केन्द्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिसका अक्षांश 36.60 उत्तर तथा देशान्तर 72.89 पूर्व था।
क्यों आते हैं भूकंप?
हाल के दिनों में देश-दुनिया के कई इलाकों में भूकंप की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हमारी धरती के भीतर 7 टेक्टोनिक प्लेट्स हैं। ये प्लेट्स लगातार अपने स्थान पर घूमते रहती हैं। हालांकि, कभी-कभी इनमें टकराव या घर्षण भी होता है। इसी कारण धरती पर भूकंप की घटनाएं देखने को मिलती हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम जनजीवन को उठाना पड़ता है। भूकंप से मकानें गिर जाती हैं, जिसमें दबकर हजारों लोगों की मौत हो जाती है।
भारत में क्या हैं भूकंप के जोन
भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कुल भूभाग के लगभग 59 फीसदी हिस्से को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। वैज्ञानिकों ने भारत में भूकंप क्षेत्र को जोन-2, जोन-3, जोन-4 व जोन-5 यानी 4 भागों में विभाजित किया है। जोन-5 के इलाकों को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है, जबकि जोन-2 कम संवेदनशील माना जाता है। हमारे देश की राजधानी दिल्ली भूकंप के जोन-4 में आती है। यहां 7 से अधिक तीव्रता के भी भूकंप आ सकते हैं जिससे बड़ी तबाही हो सकती है।
राज बब्बर और उनका परिवार इस साल तब सुर्खियों का हिस्सा बन गया, जब राज बब्बर और स्मिता पाटिल के बेटे और अभिनेता प्रतीक गर्लफ्रेंड प्रिया बनर्जी के साथ शादी के बंधन में बंधे और पूरा बब्बर परिवार इस शादी से नदारद रहा। प्रतीक ने 14 फरवरी को प्रिया बनर्जी से शादी की, जिसमें उन्होंने अपने पिता या उनकी पहली पत्नी नादिरा और उनके परिवार से किसी को इनवाइट नहीं किया। इसकी खबर लगने पर अभिनेता के सौतेले भाई आर्य बब्बर और बहन जूही बब्बर ने नाराजगी व्यक्त की। अब प्रतीक बब्बर ने खुलासा किया कि आखिर उन्होंने अपनी शादी में अपने पिता और उनके पहले परिवार को आखिर क्यों नहीं बुलाया।
प्रतीक ने अपनी शादी में पिता राज बब्बर को क्यों नहीं बुलाया?
जूम के साथ बातचीत में प्रतीक बब्बर ने अपनी शादी में पिता राज बब्बर और उनके परिवार को ना बुलाने के बार में बात की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने ये फैसला किसी के दवाब या किसी व्यक्तिगत मतभेद या मनमुटाव के कारण नहीं लिया। इसी के साथ उन्होंने वो वजह भी बताई, जिसके चलते उन्होंने अपने पिता और उनके परिवार को इस शादी में नहीं बुलाया।
प्रतीक ने मां स्मिता पाटिल के घर पर की थी शादी
प्रतीक बब्बर ने बताया कि उनकी शादी एक प्राइवेट सेरेमनी थी और उनकी मां स्मिता पाटिल के घर में हुई थी। अपनी मां और सौतेली मां नादिरा बब्बर के बीच अतीत के कॉम्प्लीकेशन्स को देखते हुए, उन्होंने अपनी मां के घर पर अपने पिता और परिवार को शामिल करना उचित नहीं समझा और यही वजह थी कि उन्होंने अपनी शादी में अपने पिता या उनके परिवार को नहीं बुलाया। हालांकि, उन्होंने परिवार के लिए एक अलग प्लान बना रखा था, लेकिन बाद में अपने सौतेले भाई-बहन की प्रतिक्रिया के बाद ये फैसला बदल दिया।
पिता की पत्नी और मां के बीच था तनाव- प्रतीक
प्रतीक बब्बर ने कहा- ‘मेरे पिता की पत्नी (नादिरा बब्बर) और मेरी मां (स्मिता पाटिल) के बीच अतीत में कुछ कॉम्प्लीकेशन्स थे, प्रेस में बहुत सी बातें कही गई हैं और इस तरह की बातें अगर आप 38-40 साल पहले की खोज करें तो पता चलेंगी। मैं अपने पिता और उनके परिवार के साथ किसी दूसरे समारोह में कुछ करने के लिए तैयार था। मुझे लगा कि उनके और उनके परिवार के बीच सबकुछ खत्म हो जाने के बाद उस घर में उनका और उनके परिवार का उस घर में होना अनैतिक था। मुझे लगता है ये बिलकुल ठीक नहीं होता। जो करना सही था, वह हमने किया और फिर अगर, जाहिर है कि अब परिस्थितियां अलग हैं, तो सब कुछ गलत हो गया है और यह बेहद जटिल है। लेकिन यह मेरे लिए नहीं है। मैं अभी भी वैसा ही हूं।’
मेरी मां की इच्छाओं का सम्मान करने के लिए लिया फैसला
प्रीतक ने आगे कहा- ‘यह किसी को अस्वीकार करने के बारे में नहीं था। यह मेरी मां और उनकी इच्छाओं का सम्मान करने के बारे में था… मुझे खेद है कि मेरे पिता और उनकी पत्नी वहां मौजूद नहीं रह सके, उस घर में नहीं रह सके जिसे मेरी मां ने मेरे लिए खरीदा था जहां मेरी मां मुझे सिंगल मदर के तौर पर पाल सकें। वह उस घर में मेरे साथ एक सिंगल मदर के रूप में रहना चाहती थीं। मेरा लालन-पालन करना चाहती थीं। मुझे खेद है। लेकिन, यह मेरी पत्नी और मेरे द्वारा लिया गया सबसे अच्छा फैसला था। लोग आवेगी होते हैं, लोग इम्पल्सिव डिसीजन लेते हैं और गुस्से में आकर बातें कहते हैं और यह बस अप्रिय था और मुझे लगता है कि वह कड़वा स्वाद अभी भी बना हुआ है।’
प्रतीक बब्बर ने शादी में पिता को नहीं बुलाया
बब्बर परिवार के बीच मनमुटाव तब सामने आया जब 14 फरवरी को प्रतीक ने प्रिया बनर्जी से शादी कर ली और बब्बर परिवार को शादी में आमंत्रित नहीं किया। राज बब्बर ने पहली शादी 1975 में नादिरा बब्बर से की थी और उनके दो बच्चे हैं, जूही बब्बर और आर्य बब्बर। बाद में उन्होंने 1983 में स्मिता पाटिल से शादी की और 1986 में उनके बेटे प्रतीक का स्वागत किया। हालांकि, उसी साल प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण स्मिता का निधन हो गया और उनके निधन के कुछ साल बाद राज और नादिरा में सुलह हो गई। जिसके बाद नन्हे प्रतीक की जिम्मेदारी उनकी मां स्मिता पाटिल के परिवार ने अपने ऊपर ले ली।
लखनऊ स्थित केजीएमयू में पहली बार सफलतापूर्वक हुआ रोबोटिक सर्जरी द्वारा हर्निया ऑपरेशन: मरीज स्वस्थ होकर दूसरे दिन हुआ डिस्चार्ज
केजीएमयू में 9 मई को पहली बार रोबोटिक हर्निया सर्जरी सफल रही।
मरीज एक दिन में पूरी तरह ठीक होकर 10 मई को डिस्चार्ज हुआ।
सर्जरी में प्रो. पाहवा, डॉ. पाल, डॉ. हर्ष और डॉ. विनोद शामिल रहे।
‘मंत्रा’ रोबोटिक सिस्टम देशी तकनीक से बना और कम लागत वाला है।
शुरुआत में इलाज मुफ्त, आगे रियायती दरों पर किया जाएगा।
लखनऊ, 10 मई 2025: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के लिए 9 मई 2025 का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब संस्थान में पहली बार Robot Assisted Repair of Inguinal Hernia (रूग्ण हर्निया का रोबोटिक सर्जरी से उपचार) सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। यह प्रदेश की सरकारी चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में तकनीकी प्रगति और जनकल्याणकारी चिकित्सा का सशक्त उदाहरण बन गया है।
इस ऐतिहासिक सर्जरी को प्रोफेसर डॉ. हरविंदर सिंह पाहवा की अगुवाई में किया गया, जिनके साथ डॉ. अजय कुमार पाल (अतिरिक्त प्रोफेसर), डॉ. हर्ष (रेजीडेंट डॉक्टर), एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विनोद श्रीवास्तव और उनकी टीम शामिल रही। यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत सूक्ष्म तकनीक और विशेषज्ञता के साथ सम्पन्न की गई।
ऑपरेशन के अगले ही दिन यानी 10 मई को मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की सभी लक्षणों से राहत मिली है और अब आगे उसे नियमित रूप से OPD में फॉलोअप किया जाएगा।
कम लागत वाली भारतीय रोबोटिक तकनीक “मंत्रा” से सुसज्जित हुआ केजीएमयू
इस अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सफलता केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यनंद के दूरदर्शी नेतृत्व और उनकी विशेषज्ञ टीम के प्रयासों का प्रतिफल है। यह सर्जरी भारतीय कंपनी SSI Mantra द्वारा विकसित Low-Cost Indian Robotic Surgical System – MANTRA की सहायता से की गई, जो कि Cardiothoracic Surgeon द्वारा स्थापित एक स्वदेशी कंपनी है।
यह भी उल्लेखनीय है कि यह रोबोटिक सिस्टम CDSCO (Central Drugs Standard Control Organization) से टेली-सर्जरी के लिए स्वीकृत है, जो भविष्य में दूरस्थ क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं सुलभ बनाने में मददगार सिद्ध होगा।
अब सरकारी अस्पतालों में भी रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत
वर्तमान में रोबोटिक सर्जरी का उपयोग मुख्यतः बड़े निजी अस्पतालों और कुछ गिने-चुने सरकारी संस्थानों में ही होता है, वह भी अधिक खर्चीली होने के कारण। ऐसे में केजीएमयू द्वारा इस तकनीक को आम जनता के लिए सुलभ बनाना एक क्रांतिकारी पहल है। शुरुआती कुछ मामलों में यह सर्जरी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के की जा रही है, जबकि भविष्य में अत्यंत रियायती दरों पर यह सुविधा आम जनमानस के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
रोबोटिक सर्जरी के फायदे
इस तकनीक के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं:
ऑपरेशन के दौरान अधिक सटीकता (Enhanced Precision)
3D विजन के माध्यम से बेहतर दृश्य
सर्जन के लिए बेहतर एर्गोनॉमिक्स और कार्यक्षमता
कम चीरा (Minimal Invasive Surgery) जिससे कम दर्द, कम रक्तस्राव और जल्द रिकवरी
मरीज की अस्पताल में कम समय की आवश्यकता
मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान में भी लाभकारी
केजीएमयू के अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से न केवल मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सा मिलेगी, बल्कि पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों की प्रशिक्षण प्रक्रिया में भी यह उपयोगी सिद्ध होगी। इसके माध्यम से युवा सर्जनों को भविष्य की तकनीकों के साथ प्रशिक्षित किया जा सकेगा और चिकित्सा अनुसंधान को भी नई दिशा मिलेगी।
केजीएमयू की उपलब्धि — सस्ती चिकित्सा, अत्याधुनिक तकनीक
यह उपलब्धि न केवल केजीएमयू के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा की दिशा में एक नई शुरुआत है। केजीएमयू की लम्बी शैक्षणिक और सेवा परंपरा में यह तकनीकी प्रगति एक मील का पत्थर साबित होगी।
धन्वंतरि दूतों का हुआ अभिनंदन — रामेश्वरी जगदीश योगक्षेम ट्रस्ट ने आरएसएम हॉस्पिटल बीकेटी के चिकित्सकों एवं स्टाफ को किया सम्मानित
आरएसएम हॉस्पिटल बीकेटी के चिकित्सकों व स्टाफ का रामेश्वरी जगदीश योगक्षेम ट्रस्ट द्वारा सम्मान।
ट्रस्ट के अध्यक्ष नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने CMS डॉ. वीके शर्मा, MS डॉ. सुमित महाराज और अधीक्षक अरविन्द श्रीवास्तव को किया सम्मानित।
डॉ. वीके शर्मा की टीम ने सिर्फ 90 दिन में अस्पताल का कायाकल्प कर 100 से बढ़ाकर 150 बेड किए।
स्वच्छ पेयजल, मुफ्त Wi-Fi, UPI पर्चा सेवा जैसी सुविधाएं अस्पताल में शुरू की गईं।
44 बेड की डेडिकेटेड पीडियाट्रिक यूनिट, पैथोलॉजी लैब और जन औषधि केंद्र जैसी नई सेवाएं 3 मई को प्रारंभ हुईं।
लखनऊ (बीकेटी): स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सा कर्मियों को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रामेश्वरी जगदीश योगक्षेम ट्रस्ट द्वारा बीकेटी स्थित राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय (RSM हॉस्पिटल) के चिकित्सकों और स्टाफ सदस्यों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान के नेतृत्व में यह कार्यक्रम उस भावना का प्रतीक बना जिसमें समर्पित सेवा और नवाचार को खुले मंच पर सराहा गया।
पहले चरण में हुआ मुख्य चिकित्सा अधिकारियों का सम्मान
समारोह के पहले चरण में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. वी.के. शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक (MS) डॉ. सुमित महाराज और कार्यालय अधीक्षक अरविंद श्रीवास्तव का फूल-मालाओं और अंगवस्त्रों से भव्य अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में ट्रस्ट के अध्यक्ष नागेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि “डॉ. शर्मा और उनकी टीम ने बीते तीन महीनों में जो कार्य किए हैं, वे वास्तव में अनुकरणीय हैं। ऐसे ‘धन्वंतरि दूतों’ को सम्मानित करना समाज का नैतिक कर्तव्य है।”
90 दिनों में बदला अस्पताल का चेहरा
आरएसएम हॉस्पिटल के नए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वी.के. शर्मा के नेतृत्व में अस्पताल का रूपांतरण हुआ है। महज 90 दिनों के भीतर अस्पताल को 100 बेड से बढ़ाकर 150 बेड का किया गया, और साथ ही अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं को धरातल पर सफलतापूर्वक उतारा गया।
मरीजों और तीमारदारों के लिए स्वच्छ एवं शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई।
अस्पताल परिसर में मुफ्त Wi-Fi की सुविधा शुरू की गई।
UPI स्कैनर के माध्यम से OPD पर्चा बनवाने और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण की व्यवस्था लागू की गई।
अस्पताल के अंदर प्रतीक्षालय (waiting area) की बेहतर व्यवस्था की गई जिससे तीमारदारों को बैठने में सहूलियत हो।
नई चिकित्सा सुविधाओं की शुरुआत
हाल ही में 3 मई 2025 को अस्पताल में कई नई और जनोपयोगी सेवाओं का उद्घाटन किया गया, जिनमें शामिल हैं:
44-बेड की डेडिकेटेड पीडियाट्रिक केयर यूनिट (DCU) — जिससे बच्चों के लिए विशिष्ट इलाज की व्यवस्था सुलभ हो गई है।
स्पोक एंड हब मॉडल पर आधारित अत्याधुनिक पैथोलॉजी लैब का शुभारंभ किया गया।
जरूरतमंदों को किफायती दरों पर दवा उपलब्ध कराने हेतु जन औषधि केंद्र की स्थापना की गई।
दूसरे चरण में अन्य कर्मचारियों का होगा सम्मान
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कुछ चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारी अवकाश पर होने के कारण पहले चरण में सम्मिलित नहीं हो सके। इन सभी को दूसरे चरण के सम्मान समारोह में आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा। इसमें डॉ. गिरीश पांडेय सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल होंगे, जो अस्पताल की सेवा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी ‘धन्वंतरि टीम’
रामेश्वरी जगदीश योगक्षेम ट्रस्ट के अध्यक्ष नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि “यह टीम न केवल चिकित्सीय सेवा में समर्पित है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता, मानवता और तकनीकी समावेशन का भी अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। जिस प्रकार एक सरकारी अस्पताल में इतने कम समय में इतने बदलाव आए हैं, वह स्वयं में एक प्रेरणादायक मिसाल है।”
यह सम्मान समारोह एक ऐसे विचार को पुष्ट करता है कि जब चिकित्सा कर्मियों के प्रयासों की सार्वजनिक रूप से सराहना होती है, तो उनमें न सिर्फ उत्साह बढ़ता है बल्कि अन्य सरकारी संस्थानों के लिए भी यह आदर्श बनता है।
ट्रस्ट द्वारा आगामी दिनों में और भी चिकित्सा संस्थानों व चिकित्सकों को सम्मानित करने की योजना है, ताकि सेवा के इस यज्ञ में योगदान देने वाले हर कर्मवीर को उचित मंच और मान्यता मिल सके।
अनुरागिनी संस्था द्वारा आयोजित 'नारी शक्ति गौरव उत्सव' में प्रेरणास्पद महिलाओं को किया गया सम्मानित: मुख्य अतिथि रीता मित्तल ने कहा- "आज की नारी हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही"
अनुरागिनी संस्था द्वारा “नारी शक्ति गौरव उत्सव” का भव्य आयोजन आशियाना, लखनऊ में सम्पन्न।
समाज सेवा, शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्रों में योगदान देने वाली 4 महिलाओं को नारी गौरव सम्मान से किया गया सम्मानित।
डाबर इंडिया लिमिटेड के सहयोग से 150 महिलाओं को पोषण युक्त पेय पदार्थ वितरित कर स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश।
मुख्य अतिथि रीता मित्तल ने कहा – “आज की नारी हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है।”
महिला स्वास्थ्य, स्वरोजगार और कानूनी जागरूकता से जुड़े विशेष सत्रों का भी आयोजन, प्रेरक उपस्थिति रही।
लखनऊ, 11 मई 2025 – महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल के तहत सामाजिक जागरूकता हेतु समर्पित संस्था अनुरागिनी द्वारा राष्ट्रीय सृजन कल्याण समिति, आशियाना परिसर में “नारी शक्ति गौरव उत्सव” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया।
चार प्रेरणास्पद महिलाओं को मिला ‘नारी गौरव सम्मान’
इस विशेष अवसर पर शिक्षा, समाज सेवा, स्वास्थ्य और उद्यमिता जैसे विविध क्षेत्रों में अनुकरणीय योगदान देने वाली चार महिलाओं – मणि टन्नन, कोमल गुप्ता, शालिनी सिंह और नीता दीक्षित को ‘नारी गौरव सम्मान’ से नवाजा गया। यह सम्मान उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा बना जो सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर हैं।
स्वास्थ्य और पोषण पर भी रहा जोर: कार्यक्रम में डाबर इंडिया लिमिटेड के सहयोग से 150 महिलाओं को पोषणयुक्त पेय पदार्थ वितरित किए गए। इसका उद्देश्य महिलाओं में पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, विशेषकर ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग की महिलाओं के लिए यह प्रयास अत्यंत सराहनीय रहा।
मुख्य अतिथि रीता मित्तल का संबोधन
मुख्य अतिथि रीता मित्तल, अध्यक्ष लघु उद्योग भारती (अवध प्रांत) ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा –
“आज की नारी हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है – चाहे वह विज्ञान हो, शिक्षा हो, उद्यमिता हो या प्रशासन। ऐसे आयोजन महिलाओं को सम्मान ही नहीं, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं। अनुरागिनी संस्था का यह कार्य समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक सशक्त कदम है।”
विशिष्ट अतिथि का संदेश: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम
उत्तर प्रदेश सहकारी फेडरेशन के उपसभापति रमाशंकर जायसवाल ने कहा –
“ग्रामीण महिलाओं को मंच देना और उनकी उपलब्धियों को समाज के सामने लाना, सामाजिक समरसता और समावेशी विकास का उदाहरण है। हमें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में और अधिक प्रयास करने चाहिए।”
संस्था के उद्देश्य व प्रयास
संस्था के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण सिंह जादौन ने बताया कि –
“अनुरागिनी संस्था का उद्देश्य है कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता के माध्यम से सशक्त बनें। ‘नारी शक्ति गौरव उत्सव’ इस दिशा में एक मजबूत प्रयास है।”
कार्यक्रम संयोजक शिविता गोयल ने बताया कि संस्था पिछले 28 वर्षों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, जल संरक्षण और सांस्कृतिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
स्वास्थ्य, स्वरोजगार और कानूनी जागरूकता सत्र भी आयोजित
इस आयोजन के दौरान महिला स्वास्थ्य, स्वरोजगार और कानूनी जागरूकता से जुड़े विशेष सत्रों का आयोजन भी किया गया। इन सत्रों ने महिलाओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सशक्त किया।
गौरवमयी उपस्थिति और आयोजन का समापन
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में अवध विकास परिषद के अध्यक्ष अरविंद मिश्रा, शिक्षाविद सर्वेश यादव, रीना तिवारी, निशा सिंह, रेनू सिंह, लक्ष्मी सोनकर, अंजुल मिश्रा, शीतल यादव, कार्तिक माथुर, सुमन (समूह सखी), और शशिकला शामिल रहीं। कार्यक्रम का सफल संचालन शिविता गोयल ने किया।
नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणास्पद प्रयास
कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों और प्रतिभागियों ने अनुरागिनी संस्था के इस सराहनीय आयोजन को एक प्रेरणादायी पहल बताया और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना।