केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू हो चुकी है और केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचने लगी है। 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र धाम हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।
अगर आप दिल्ली से केदारनाथ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो पहले से पूरी जानकारी और बजट समझना बेहद जरूरी है, ताकि यात्रा आसान और सुरक्षित रहे।
रजिस्ट्रेशन सबसे जरूरी
केदारनाथ यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, जो फ्री में किया जाता है। इसमें नाम, उम्र और ID की जानकारी देकर ई-पास (QR कोड) जारी किया जाता है। यह पास यात्रा के दौरान कई जगह चेक किया जाता है, खासकर सोनप्रयाग में।
दिल्ली से केदारनाथ का रास्ता
- दिल्ली से हरिद्वार: लगभग 220 किमी
- हरिद्वार से गौरीकुंड: लगभग 240 किमी
- आगे का रास्ता ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग और गुप्तकाशी से होकर जाता है
यात्रा ट्रेन, बस या फ्लाइट (देहरादून तक) से की जा सकती है।
केदारनाथ तक कैसे पहुंचें
गौरीकुंड से केदारनाथ तक करीब 16–18 किमी का ट्रेक है:
- पैदल यात्रा: 6–10 घंटे
- घोड़ा/पालकी की सुविधा
- हेलीकॉप्टर सेवा: फाटा, सिरसी और गुप्तकाशी से उपलब्ध
मौसम कैसा रहेगा
अप्रैल–मई में मौसम ठंडा रहता है। दिन में तापमान 0°C से 15°C के बीच और रात में इससे नीचे जा सकता है। अचानक बारिश या बर्फबारी भी संभव है, इसलिए गर्म कपड़े जरूरी हैं।
कितना आएगा खर्च (लगभग)
- दिल्ली से हरिद्वार/देहरादून: ₹300–₹1000
- बस से गौरीकुंड: ₹300–₹500
- दिल्ली से सीधी बस: ₹500–₹1000
- हेलीकॉप्टर (राउंड ट्रिप): ₹5500 से ₹7740 तक
- कुल यात्रा बजट (औसतन): ₹8,000 से ₹20,000 तक (सुविधा के अनुसार)
कहां ठहरें
मंदिर के पास सीमित सुविधा होने के कारण गुप्तकाशी और सोनप्रयाग में ठहरना बेहतर रहता है। भीड़ के कारण पहले से होटल बुकिंग जरूरी है।
जरूरी सावधानियां
- रजिस्ट्रेशन और ID साथ रखें
- पर्याप्त पानी और गर्म कपड़े रखें
- रात में ट्रेकिंग से बचें
केदारनाथ यात्रा आस्था और एडवेंचर दोनों का अनोखा अनुभव देती है, लेकिन सही प्लानिंग से ही यह यात्रा सुरक्षित और यादगार बनती है।


































