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Sports News: ये 5 खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट में छाए रहे, लेकिन अब उनका कोई पता नहीं

क्रिकेट हो, फुटबॉल या कोई अन्य खेल, वहां ऐसे कुछ खिलाड़ी आते हैं जो सदा-सदा के लिए फैंस पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं. क्रिकेट का उदाहरण लें तो डॉन ब्रैडमैन, गैरी सोबर्स, सचिन तेंदुलकर, जेम्स एंडरसन जैसे दिग्गजों का करियर इतना ऐतिहासिक रहा कि लोग उन्हें दशकों तक याद रखेंगे. मगर इसी बीच कुछ ऐसे क्रिकेटर भी रहे, जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट पर छाप तो छोड़ी, लेकिन अब कहीं गायब हो गए हैं. यहां तक कि वो लीजेंड्स लीग में भी दिखाई नहीं पड़ते हैं.

1. जेम्स फॉकनर

ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर जेम्स फॉकनर सिर्फ 1 टेस्ट मैच खेल पाए, लेकिन उन्होंने व्हाइट बॉल करियर में अच्छी खासी छाप छोड़ी. उन्होंने वनडे और टी20 में मिलाकर ऑस्ट्रेलिया के लिए 132 विकेट लिए. भारत के खिलाफ मोहाली में खेली गई उस पारी को कौन भुला सकता है जब उन्होंने तीसरे ODI मैच में 29 गेंदों में 64 रनों की पारी खेल ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से जीत दिलाई थी. फॉकनर PSL 2022 के बाद कहीं भी प्रतिस्पर्धातमक क्रिकेट खेलते नहीं दिखे हैं.

2. मोहम्मद आसिफ

शोएब अख्तर खुद स्वीकार चुके हैं कि मोहम्मद आसिफ लंबा खेलते तो क्रिकेट के महानतम गेंदबाजों में से एक बन सकते थे. आसिफ को दोनों तरफ गेंद को स्विंग करवाने में महारत हासिल थी, सिर्फ 44 टेस्ट पारियों में 106 विकेट ले चुके थे. वैसे तो आसिफ का प्रतिबंध खत्म हो चुका है, लेकिन अब कहीं भी दिखाई नहीं पड़ते हैं.

3. मार्वन अटापट्टू

मार्वन अटापट्टू श्रीलंका के पूर्व कप्तान रह चुके हैं, उन्हीं की कप्तानी में श्रीलंका ने 2004 एशिया कप जीता था. 90 टेस्ट मैचों में 5502 और 268 वनडे मैचों में 8529 रन बनाए. वो श्रीलंका के लिए आखिरी बार साल 2007 में खेलते दिखे. जैसे ही टी20 क्रिकेट का युग शुरू हुआ, अटापट्टू कहीं गायब ही हो गए. रिटायरमेंट के बाद वो बहुत कम बार मीडिया में दिखे हैं.

4. डेमियन मार्टिन

डेमियन मार्टिन भी उन कारणों में से एक बने, जिसकी वजह से भारत 2003 ODI वर्ल्ड कप फाइनल हारा था. मार्टिन ने फाइनल मैच में नाबाद 88 रनों की पारी खेली थी, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को 359 के स्कोर तक पहुंचने में मदद की थी. अपने इंटरनेशनल करियर में उन्होंने 9,872 रन बनाए, लेकिन 2006 के बाद उन्हें बहुत कम बार क्रिकेट मैदान पर उतरते देखा गया है.

5. नाथन मैक्कुलम

नाथन मैक्कुलम बतौर ऑलराउंडर न्यूजीलैंड के लिए कई बार मैच विनर साबित हुए. उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में न्यूजीलैंड के लिए 121 विकेट लिए, लेकिन 2016 में रिटायरमेंट के बाद वो कभी प्रतिस्पर्धात्मक क्रिकेट नहीं खेले हैं. वहीं उनके भाई ब्रेंडन मैक्कुलम लगातार चर्चा में बने रहते हैं और अभी इंग्लैंड टीम के हेड कोच हैं.

मानसून के समय बढ़ जाता है यूटीआई का रिस्क, बरतें सावधानी : अपोलो स्पेक्ट्रा हास्पिटल के संचालक डाॅ. विनीत सिंह सोमवंशी

  • मानसून में बढ़ी नमी और स्वच्छता की कमी से यूटीआई का खतरा ज्यादा होता है।
  • महिलाओं में इसकी संभावना पुरुषों की तुलना में अधिक रहती है।
  • लक्षणों में पेशाब के समय जलन, दर्द और बार-बार पेशाब आना शामिल हैं।
  • पर्याप्त पानी पीना, साफ-सफाई और सूखे कपड़े पहनना सबसे जरूरी बचाव है।
  • समय पर इलाज न कराने पर संक्रमण किडनी तक फैल सकता है।

कानपुर/लखनऊ: बारिश का मौसम जहां प्रकृति को ताज़गी और हरियाली प्रदान करता है, वहीं यह हमारी सेहत के लिए कुछ चुनौतियां भी लेकर आता है। विशेष रूप से इस मौसम में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन ( यू.टी.आई ) का खतरा बढ़ जाता है। यू.टी.आई एक आम संक्रमण है जो हमारे यूरिनरी सिस्टम को प्रभावित करता है, जिसमें किडनी, ब्लैडर, मूत्रमार्ग और महिलाओं में गर्भाशय के आस-पास के हिस्से शामिल होते हैं। बढ़ती आर्द्रता और स्वच्छता की कमी के कारण इस मौसम में यू.टी.आई के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। आइए इस लेख में हम जानेंगे कि यू.टी.आई क्या होता है, इसके लक्षण क्या हैं, और बारिश के मौसम में इससे कैसे बचा जाए।

यू.टी.आई क्या है?
यू.टी.आई या यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन एक प्रकार का बैक्टीरिया या कभी-कभी फंगल संक्रमण होता है जो मूत्र प्रणाली के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है। मूत्र प्रणाली में किडनी, ब्लैडर, मूत्रमार्ग और महिलाओं में गर्भाशय के पास का क्षेत्र शामिल है। खासतौर पर महिलाओं में यू.टी.आई की समस्या अधिक होती है क्योंकि उनकी मूत्रमार्ग की संरचना महिलाओं में छोटी और अधिक खुली होती है, जिससे बर्ताव आसान होता है।

यू.टी.आई के कारण
बारिश के मौसम में बढ़ी हुई आर्द्रता से शरीर में नमी बनी रहती है, जिससे बैक्टीरिया और हानिकारक जीवाणु पनपते हैं। गीले कपड़े, लंबे समय तक गीले रहना, स्वच्छता की कमी, और गंदगी के संपर्क में आना यू.टी.आई का कारण बन सकता है। इसके अलावा, ठीक से पेशाब न करना, भारी या अधिक तली-भुनी खाद्य वस्तुएं खाना, और जागरूकता की कमी भी इस संक्रमण को बढ़ावा देती है।

यू.टी.आई के लक्षण
यू.टी.आई के लक्षण सामान्यतः शरीर के हिस्से पर निर्भर करते हैं जहां संक्रमण हुआ है। कुछ सामान्य लक्षण हैं: पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना, बार-बार पेशाब आना लेकिन कम मात्रा में, पेशाब का बदबूदार या धुंधला होना, पेट के निचले हिस्से या कमर में दर्द, बुखार और थकान महसूस होना, कभी-कभी पेशाब में रक्त आना

बारिश के मौसम में यू.टी.आई से बचने के उपाय

साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें: गीले कपड़े, खासकर पानी में भीगे हुए कपड़ों को लंबे समय तक न पहनें। बार-बार कपड़े बदलें और सूखा पहनें। महिलाओं को स्वच्छता के लिए पौधों के आस-पास न बैठना चाहिए और जरूरी सफाई नियमित करें।

पानी अधिक मात्रा में पियें: खूब पानी पीने से मूत्र मार्ग साफ रहता है और बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं। यह आपके मूत्र मार्ग को स्वस्थ रखने का सबसे सरल तरीका है।

नीचे से ऊपर की दिशा में पोंछें: स्वच्छता के दौरान यह ध्यान रखें कि पोंछने का तरीका सही हो, जिससे संक्रमण फैलने की संभावना कम हो।

संयमित और संतुलित भोजन करें: अधिक तली-भुनी और मैदा आधारित खाद्य पदार्थ बचाएं। हरी सब्जियां, फल, और फाइबरयुक्त आहार लें जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं: योग, ध्यान, और पर्याप्त नींद लेकर अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाएं।

गीले जूतों और मोज़ों से बचें: बारिश में गीले जूते या मोज़े अपनी त्वचा को नमी में रखना संक्रमण को बढ़ावा दे सकता है। आरामदायक और सूखे जूते पहनें।

संतुलित और नियमित पेशाब करें: पेशाब को लंबे समय तक रोकना सही नहीं है। शरीर से विषैले पदार्थ और बैक्टीरिया निकालने के लिए नियमित पेशाब जरूरी है।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?
यदि आप ऊपर बताए गए लक्षण महसूस करें, जैसे पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, या पेशाब में खून आना तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर आपके मूत्र की जांच कर उचित दवा और उपचार बताएंगे। यदि यू.टी.आई गंभीर हो जाए तो किडनी तक संक्रमण फैल सकता है, जो खतरे की बात हो सकती है। इसलिए बारिश के मौसम में अपनी साफ-सफाई और स्वास्थ का पूरा ध्यान रखना जरूरी है।

बारिश का मौसम जहां जीवन में ताजगी लाता है, वहीं यह स्वास्थ्य के लिए कुछ विशेष खतरे भी लेकर आता है। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है, खासकर महिलाओं में। इस संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना, पर्याप्त पानी पीना, और सही जीवनशैली अपनाना जरूरी है। यदि लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सा सलाह लें। अपनी और अपने परिवार की सेहत का पूरा ख्याल रखते हुए आप इस मौसम का आनंद पूरी सेहत के साथ ले सकते हैं।

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की भेंट : विकास कार्यों, जलभराव समस्या और SCR बोर्ड बैठक को लेकर दिया विस्तृत प्रस्ताव

  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
  • विधायक ने सरोजनीनगर में मातृशक्ति और युवा सशक्तिकरण की योजनाओं की जानकारी दी।
  • लखनऊ में जलभराव, नालों की सफाई और गड्ढों वाली सड़कों की समस्या उठाई।
  • लखनऊ-कानपुर Elevated Highway की गति तेज करने और स्थानीय समस्याओं के समाधान का अनुरोध किया।
  • SCR बोर्ड की बैठक शीघ्र बुलाने का आग्रह करते हुए लखनऊ सहित छह जनपदों के विकास की संभावनाएँ रखीं।

लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंटकर न केवल उनका आत्मीय आशीर्वाद प्राप्त किया, बल्कि सरोजनीनगर और राजधानी लखनऊ के विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को उनके समक्ष विस्तार से रखा। इस दौरान उन्होंने विकास, शिक्षा, महिला-युवा सशक्तिकरण, सांस्कृतिक नवजागरण और बुनियादी ढांचे की समस्याओं पर ठोस कार्यवाही की मांग की।

सरोजनीनगर में विकास और नवाचार की तस्वीर

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि सरोजनीनगर में विकास की कई योजनाएँ गति पकड़ चुकी हैं। इनमें मातृशक्ति सशक्तिकरण, युवाओं के लिए रोजगार और खेलकूद से जुड़ी पहल, डिजिटल शिक्षा के नए प्रयोग तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण की योजनाएँ प्रमुख हैं। उनका कहना था कि इन प्रयासों से न केवल सरोजनीनगर बल्कि पूरे लखनऊ में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा।

लखनऊ की बरसाती चुनौती: जलभराव और जर्जर सड़कें

डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री के समक्ष लखनऊ में बरसात के दौरान उत्पन्न होने वाली जलभराव की समस्या को गम्भीरता से रखा। उन्होंने बताया कि नालों की सफाई और अवरोध हटाने में नगर निगम व नगर विकास विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावी नहीं है, जिसके चलते शहरवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही सड़कों पर गड्ढों की स्थिति भी आमजन के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है। उन्होंने आग्रह किया कि इस विषय पर उच्च स्तरीय समीक्षा कर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाए।

लखनऊ-कानपुर Elevated Highway पर जोर

भेंट के दौरान विधायक ने निर्माणाधीन लखनऊ-कानपुर Elevated Highway का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि परियोजना की गति और तेज की जाए ताकि जनता को शीघ्र राहत मिल सके। साथ ही, निर्माण के दौरान आसपास के स्थानीय निवासियों को हो रही समस्याओं जैसे आवाजाही में कठिनाई, धूल-धुआं और यातायात जाम का समाधान करने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएं।

State Capital Region (SCR) की अहमियत

डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उनकी अध्यक्षता में गठित State Capital Region (SCR) लखनऊ समेत छह समीपवर्ती जनपदों में विकास का नया इतिहास रच सकता है। उन्होंने कहा कि SCR से क्षेत्र में रोजगार, औद्योगिक निवेश, परिवहन और शहरी ढांचे को नई दिशा मिलेगी। इस दृष्टि से उन्होंने मुख्यमंत्री से SCR बोर्ड की बैठक शीघ्र आहूत करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री का मार्गदर्शन विकास की ऊर्जा

विधायक ने मुलाकात के अंत में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दूरदर्शी नेतृत्व ही प्रदेश के विकास का आधार है। उनका मार्गदर्शन सरोजनीनगर समेत पूरे प्रदेश को नई ऊर्जा प्रदान करता है। डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योगी जी का आशीर्वाद और प्रेरणा ही उन्हें जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की शक्ति देती है।

“डिजिटल साक्षरता ही युवाओं का भविष्य कवच” AI क्रांति में भारत की युवा शक्ति बनेगी वैश्विक नेतृत्व की धुरी : विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह

  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि डिजिटल illiteracy आने वाले समय की सबसे बड़ी अशिक्षा होगी।
  • 2025 तक 85 मिलियन नौकरियाँ खत्म होंगी, जबकि 97 मिलियन नई नौकरियाँ पैदा होंगी।
  • भारत की 65% युवा आबादी को AI और डिजिटल शिक्षा से सशक्त करना समय की मांग है।
  • फेक न्यूज़ और डीपफेक से निपटने के लिए सजग और डिजिटल साक्षर युवा ही सक्षम होंगे।
  • डिजिटल साक्षरता केवल रोजगार नहीं बल्कि लोकतंत्र और राष्ट्र-निर्माण की मजबूती का आधार है।

लखनऊ : सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा है कि डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्रांति में भारत के युवाओं को सबसे बड़ी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में डिजिटल illiteracy ही नई अशिक्षा साबित होगी, और जो युवा समय रहते डिजिटल कौशल हासिल नहीं करेंगे, वे भविष्य की प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे।

डिजिटल क्रांति और बदलती दुनिया

डॉ. सिंह ने अपने संदेश में बताया कि आज दुनिया एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि गैर-मानव बुद्धि यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संस्कृति का निर्माण कर रही है।
AI अब केवल कंप्यूटर या टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लेख लिख रहा है, संगीत रच रहा है, कोडिंग कर रहा है और कानूनी-चिकित्सकीय सलाह भी देने लगा है। इसका सीधा मतलब है कि यह बदलाव पूरी मानव सभ्यता को प्रभावित करेगा। ऐसे में यदि युवा केवल AI के उपभोक्ता बनकर रह जाएंगे तो वे पीछे रह जाएंगे। उन्हें उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता और नियंत्रक बनना होगा।

रोजगार की चुनौतियाँ और नए अवसर

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि AI के आगमन से रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक 85 मिलियन पारंपरिक नौकरियाँ खत्म होंगी, लेकिन इसी दौरान 97 मिलियन नई नौकरियाँ पैदा होंगी। ये नौकरियाँ पारंपरिक कौशल से नहीं, बल्कि डिजिटल और AI आधारित कौशल से जुड़ी होंगी।
उन्होंने युवाओं को समझाया कि आने वाले समय में डेटा एनालिसिस, मशीन लर्निंग, प्रोग्रामिंग, डिजिटल समस्या-समाधान जैसे क्षेत्र ही भविष्य की सबसे बड़ी रोजगार संभावनाएँ पैदा करेंगे। इसलिए आज से ही इन क्षेत्रों में दक्ष होना आवश्यक है।

भारत की युवा शक्ति – सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ

डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि भारत के पास इस समय दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। देश की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। यह युवा जनसांख्यिकीय भारत की सबसे बड़ी ताकत है। यदि इन्हें डिजिटल कौशल और AI ज्ञान से प्रशिक्षित किया जाए, तो भारतीय युवा पूरी दुनिया के लिए AI Workforce of the World बन सकते हैं।
उन्होंने 90 के दशक का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे उस समय भारतीय इंजीनियरों ने सॉफ्टवेयर क्रांति में दुनिया का नेतृत्व किया था, वैसे ही आज के भारतीय युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्रांति में भी नेतृत्व कर सकते हैं।

फेक न्यूज़ और डीपफेक का बढ़ता खतरा

डॉ. सिंह ने युवाओं को आगाह किया कि AI केवल अवसर ही नहीं बल्कि बड़ी चुनौतियाँ भी लेकर आया है। आज डीपफेक वीडियो, फर्जी सूचनाएँ और फेक न्यूज़ लोकतंत्र, चुनाव प्रक्रिया और सामाजिक सद्भाव के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि केवल वही युवा इस खतरे का सामना कर पाएंगे, जो डिजिटल साक्षर होंगे और तकनीकी उपकरणों का सही उपयोग कर पाएंगे। सजग और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवा ही समाज को इन खतरों से बचाने की ढाल बन सकते हैं।

लोकतांत्रिक सशक्तिकरण का आधार

डॉ. राजेश्वर सिंह ने डिजिटल साक्षरता को केवल रोजगार या तकनीकी प्रगति से नहीं जोड़ा, बल्कि इसे लोकतंत्र की मजबूती का आधार भी बताया। उनके अनुसार, डिजिटल कौशल युवाओं को सवाल पूछने, जवाबदेही तय करने और शासन में सक्रिय भागीदारी करने की शक्ति देता है।
डिजिटल शिक्षा युवाओं को अधिक जागरूक नागरिक बनाती है, जो न केवल अपने अधिकार समझते हैं बल्कि राष्ट्र के विकास में भी योगदान करते हैं।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और भारत की भूमिका

उन्होंने कहा कि आज चीन, अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रिसर्च और शिक्षा पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं। भारत यदि इस दिशा में ठोस पहल करता है तो वह न केवल पिछड़ापन दूर करेगा बल्कि सीधे लीपफ्रॉग करते हुए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे पहुँच सकता है।
डॉ. सिंह का मानना है कि भारत के पास अवसर है कि वह डिजिटल साक्षरता को अपनाकर दुनिया का नेतृत्व करे।

डॉ. राजेश्वर सिंह का विज़न

अंत में अपने संदेश में डॉ. सिंह ने कहा कि युवाओं को डिजिटल शिक्षा केवल रोजगार के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण और लोकतंत्र की मजबूती के लिए भी अर्जित करनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा—
“जो युवा आज डिजिटल कौशल अपनाएंगे, वही कल भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाएंगे। डिजिटल साक्षरता ही युवाओं का भविष्य-सुरक्षा कवच है।”

Madhya Pradesh Tourism: शिवपुरी—प्रकृति, इतिहास और आध्यात्म का अद्भुत मिलन स्थल।

शिवपुरी मध्य प्रदेश का एक सुरम्य और ऐतिहासिक नगर है, जो अपनी हरियाली, प्राचीन स्मारकों, राजसी विरासत और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। यह नगर एक समय में सिंधिया राजवंश की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा है और आज यह पर्यटकों के लिए एक शांत, सुंदर और विविध अनुभव प्रदान करता है।

शिवपुरी का ऐतिहासिक परिचय

शिवपुरी का नाम भगवान शिव के नाम पर पड़ा है। यह नगर कभी नरवर रियासत का हिस्सा था और बाद में ग्वालियर राज्य के अधीन आ गया। सिंधिया राजवंश ने यहाँ कई महलों, उद्यानों और स्मारकों का निर्माण करवाया, जो आज भी उसकी राजसी भव्यता की गवाही देते हैं।

शिवपुरी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. माधव राष्ट्रीय उद्यान (Madhav National Park)

शिवपुरी का सबसे प्रसिद्ध स्थल। यह राष्ट्रीय उद्यान कभी सिंधिया राजाओं का शिकार क्षेत्र हुआ करता था। अब यह बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय, मगरमच्छ, और अनेक पक्षियों का निवास स्थान है। यह प्रकृति प्रेमियों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स के लिए स्वर्ग है

2. सिंधिया की छतरियाँ (Royal Cenotaphs)

सिंधिया राजाओं और रानियों की याद में बने ये संगमरमर के स्मारक भारतीय और मुगल वास्तुकला के सुंदर मिश्रण का उदाहरण हैं। यहाँ की कलाकृति, मेहराबें और जालीदार खिड़कियाँ देखने योग्य हैं।

3. माधव विलास महल

यह एक भव्य शाही महल है, जहाँ सिंधिया परिवार गर्मियों में रहा करता था। ऊँचाई पर स्थित यह महल अपने बगीचों, झरोखों और शाही वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।

4. सागर तालाब और भदैया कुंड

शिवपुरी के यह जल स्रोत प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आस्था से भी जुड़े हुए हैं। यहाँ बैठकर आप शांति का अनुभव कर सकते हैं।

5. नरवर किला

शिवपुरी से लगभग 40 किमी दूर स्थित यह प्राचीन किला 10वीं शताब्दी में बना था और चंदेल, परमार, तोमर, और मुगलों के अधीन रहा। किले से आसपास का मनोरम दृश्य दिखाई देता है।

धार्मिक स्थल

सिद्धेश्वर महादेव मंदिर – एक प्राचीन शिव मंदिर जो स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत पूजनीय है।

छत्री मंदिर परिसर – यहाँ भगवान विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापत्य कला का अनोखा उदाहरण हैं।

क्या करें?

वन सफारी – माधव राष्ट्रीय उद्यान में सुबह या शाम की सफारी जरूर लें।

फोटोग्राफी – प्रकृति, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम आपको कैमरे से दूर नहीं रहने देगा।

स्थानीय भोजन – यहाँ का पारंपरिक मालवी और बुंदेली खाना जरूर चखें।

कैसे पहुँचे?

निकटतम रेलवे स्टेशन: शिवपुरी रेलवे स्टेशन, ग्वालियर (110 किमी)

निकटतम हवाई अड्डा: ग्वालियर

सड़क मार्ग: ग्वालियर, झाँसी, भोपाल और इंदौर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है

ठहरने की व्यवस्था

शिवपुरी में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित रिसॉर्ट्स, लॉज और कई निजी होटल उपलब्ध हैं। यदि आप प्रकृति के करीब रहना चाहते हैं, तो माधव राष्ट्रीय उद्यान के पास रिसॉर्ट एक बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं।

यात्रा का सर्वोत्तम समय

अक्टूबर से मार्च के बीच का मौसम शिवपुरी घूमने के लिए सबसे उपयुक्त है। इस समय तापमान सुखद होता है और वन्यजीव भी अधिक दिखते हैं।

शिवपुरी एक ऐसा स्थल है जहाँ इतिहास के पदचिन्ह, राजसी भव्यता, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति— सब एक साथ मिलते हैं। यह पर्यटन के शोरगुल से दूर, आत्मिक और सुकून भरी यात्रा के लिए आदर्श स्थल है। यदि आप मध्य प्रदेश की अनदेखी विरासत को महसूस करना चाहते हैं, तो शिवपुरी की यात्रा जरूर करें।