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आयुक्त एवं निबन्धक, सहकारिता हीरालाल ने समस्त अधिकारियों से सहकारिता विभाग को नम्बर-वन बनाने के लिए की अपील: बोले- सामूहिक प्रयास, मेहनत, लगन से हम सब मिलकर विभाग को ऊंचाईयों तक पहुंचा सकते हैं

आयुक्त एवं निबन्धक, सहकारिता हीरालाल ने समस्त अधिकारियों से सहकारिता विभाग को नम्बर-वन बनाने के लिए की अपील: बोले- सामूहिक प्रयास, मेहनत, लगन से हम सब मिलकर विभाग को ऊंचाईयों तक पहुंचा सकते हैं
आयुक्त एवं निबन्धक, सहकारिता हीरालाल ने समस्त अधिकारियों से सहकारिता विभाग को नम्बर-वन बनाने के लिए की अपील: बोले- सामूहिक प्रयास, मेहनत, लगन से हम सब मिलकर विभाग को ऊंचाईयों तक पहुंचा सकते हैं
आयुक्त एवं निबन्धक, सहकारिता हीरालाल ने समस्त अधिकारियों से सहकारिता विभाग को नम्बर-वन बनाने के लिए की अपील: बोले- सामूहिक प्रयास, मेहनत, लगन से हम सब मिलकर विभाग को ऊंचाईयों तक पहुंचा सकते हैं

लखनऊ : 15 मई 2025: आयुक्त एवं निबन्धक सहकारिता हीरालाल ने आज लखनऊ मण्डल की समीक्षा आयुक्त एवं निबन्धक के सभागार में की। जिसमें संयुक्त निबन्धक, सहायक निबन्धक, सचिव जिला सहकारी बैंक, अपर जिला सहकारी अधिकारी, क्षेत्रीय प्रबन्धक पीसीएफ/पीसीयू/यूपीएसएस के अधिकारी उपस्थित रहे। आयुक्त ने जिले से आये सहायक निबन्धकों से अपने एक महीने के कार्यकाल में भेजे गये दिशा-निर्देशों परिपत्रों के कार्यवाही के सम्बन्ध में बिन्दुवार जानकारी प्राप्त की तथा अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सहकारिता विभाग में परिवर्तन दिखाई देगा तथा सहकारिता विभाग प्रगति की राह पर चलकर देश में नम्बर-वन प्रदेश बनेगा।

आयुक्त एवं निबन्धक, सहकारिता हीरालाल ने समस्त अधिकारियों से सहकारिता विभाग को नम्बर-वन बनाने के लिए की अपील: बोले- सामूहिक प्रयास, मेहनत, लगन से हम सब मिलकर विभाग को ऊंचाईयों तक पहुंचा सकते हैं
आयुक्त एवं निबन्धक, सहकारिता हीरालाल ने समस्त अधिकारियों से सहकारिता विभाग को नम्बर-वन बनाने के लिए की अपील: बोले- सामूहिक प्रयास, मेहनत, लगन से हम सब मिलकर विभाग को ऊंचाईयों तक पहुंचा सकते हैं

आयुक्त एवं निबन्धक ने बैठक में आये सहायक निबन्धक, अपर जिला सहकारी अधिकारी से उनका परिचय प्राप्त की। उन्होंने समस्त अधिकारियों से सहकारिता विभाग को नम्बर-वन बनाने के लिए अपील की। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास मेहनत लगन से हम सब मिलकर विभाग को ऊंचाईयों तक पहुंचा सकते हैं। सहकारिता विभाग को ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए दिशा-निर्देश भी दिये। उन्होंने सहकारिता का मूल मंत्र बताया कि नियत साफ है तो रास्ते मिल ही जाते हैं। उन्होंने सहकार से समृद्धि, आडिट व अन्य कार्यों को 20 मई तक करने के निर्देश दिये। उन्होंने ब्रांच मैनेजर सहायक निबन्धकों को एक-एक समिति को गोद लेने के निर्देश दिये। कॉमन सर्विस सेन्टर में 31 मई तक बिजली बिल जमा करवाने को प्राथमिकता दी।

उन्होंने इसी प्रकार मूल्य समर्थन योजना, भण्डारण योजना, जनऔषधि केन्द्र, एफपीओ, पीएम सम्मान निधि योजना, आहरण वितरण, धान एवं गेहूं खरीद भुगतान की स्थिति, बैंकिंग योजना, लखनऊ में रिकवरी की प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। आयुक्त निबन्धक ने निर्देश दिये कि 10 लाख लिमिट वाली समितियों पर खाद अभी से भेज दी जाये। दलहन-तिलहन की खरीद को पूरे प्रदेश में बढ़ाया जाय। नैनो यूरिया, नैनो डीएपी पर भी चर्चा की। उन्होंने मध्यस्थवाद को जीरो करने का अभियान चलाकर निस्तारण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जो भी वाद न्यायालय में लम्बित हैं उनका शीघ्र निस्तारण कराकर विभागीय वादों को खत्म किया जाय। सहकारिता विभाग की कार्यवाही जो प्रचलित हैं उनका शीघ्र निस्तारण किया जाए। उन्होंने वृक्षारोपण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। जहां पर वृक्ष लग चुके हैं उनको कैसे बचाया जाय इस पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने पेड़ लगाओ-पेड़ बचाओं अभियान पर विशेष जोर दिया।

आयुक्त ने आये हुये समस्त अधिकारियों को निर्देश दिया कि 10 प्रगतिशील किसानों से सम्पर्क किया जाय। चरित्र प्रविष्ट सम्बन्धी ‘क’ ‘ख’ ‘ग’ संवर्ग को मानव सम्पदा पोर्टल पर अपडेट करने को कहा। गेंहूं क्रय नीति पालन पर जोर दिया। राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में क्रमवार ट्रेनिंग करवाने हेतु प्रोत्साहित किया।

डॉ. राजेश्वर सिंह का अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह व तुर्की को चेतावनी: आतंक के संरक्षकों को सशक्त संदेश दे विश्व, धर्म के नाम पर आतंक को बढ़ावा अस्वीकार्य, तुर्की की भूमिका वैश्विक शांति के विरुद्ध एक सुनियोजित चुनौती

डॉ. राजेश्वर सिंह का अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह व तुर्की को चेतावनी: आतंक के संरक्षकों को सशक्त संदेश दे विश्व, धर्म के नाम पर आतंक को बढ़ावा अस्वीकार्य, तुर्की की भूमिका वैश्विक शांति के विरुद्ध एक सुनियोजित चुनौती
डॉ. राजेश्वर सिंह का अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह व तुर्की को चेतावनी: आतंक के संरक्षकों को सशक्त संदेश दे विश्व, धर्म के नाम पर आतंक को बढ़ावा अस्वीकार्य, तुर्की की भूमिका वैश्विक शांति के विरुद्ध एक सुनियोजित चुनौती
डॉ. राजेश्वर सिंह का अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह व तुर्की को चेतावनी: आतंक के संरक्षकों को सशक्त संदेश दे विश्व, धर्म के नाम पर आतंक को बढ़ावा अस्वीकार्य, तुर्की की भूमिका वैश्विक शांति के विरुद्ध एक सुनियोजित चुनौती
  • “भारत की नीति अडिग, तुर्की की भूमिका घातक – डॉ. राजेश्वर सिंह का वैश्विक आह्वान”
  • “तुर्की की दोहरी नीति पर करारा प्रहार, डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया मानवता का अपमान”

लखनऊ। सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेशवर सिंह ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए हालिया बयान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को प्रोत्साहन देने वाला बताते हुए उसकी तीव्र शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इसे “आतंकवाद का खुला समर्थन” और “विश्व शांति के विरुद्ध एक घातक हस्तक्षेप” करार दिया।

तुर्की का दोहरा आचरण और आतंक के प्रति सहिष्णु रुख

डॉ. सिंह ने कहा कि तुर्की लगातार उन तत्वों के साथ खड़ा रहा है जो कट्टरपंथ और वैश्विक आतंकवाद को पोषित करते हैं। उन्होंने तुर्की के इस दोहरे रवैये को चिन्हित करते हुए कहा: कश्मीर पर पाकिस्तान के पक्ष में लगातार बयानबाज़ी – जबकि पाकिस्तान को विश्व स्तर पर आतंकवाद का संरक्षक देश माना जाता है। मुस्लिम ब्रदरहुड और अन्य कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के साथ तुर्की के सक्रिय संबंध जो वैश्विक चरमपंथ की जड़ें मजबूत करते हैं। सीरिया, लीबिया और अफगानिस्तान में चरमपंथी गुटों को तुर्की द्वारा दिए गए प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन के आरोप – जिससे इन क्षेत्रों में स्थायित्व और शांति की संभावनाएं क्षीण हुईं।तुर्की के सरकारी मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा चलाया गया भारत-विरोधी और जिहादी मानसिकता को पोषित करने वाला प्रचार अभियान।

आतंकवाद पर भारत की नीति स्पष्ट, अडिग और सख्त

डॉ. सिंह ने कहा, “भारत ने सदैव आतंकवाद और कट्टरता के विरुद्ध स्पष्ट, सुसंगत और कठोर नीति अपनाई है। जो राष्ट्र ऐसी शक्तियों को संरक्षण और समर्थन प्रदान करते हैं, वे मानवता के विरोधी हैं। इन्हें वैश्विक समुदाय द्वारा अलग-थलग किया जाना समय की आवश्यकता है।”

तुर्की के लिए चेतावनी और विश्व बिरादरी से आह्वान

डॉ. राजेश्वर सिंह ने तुर्की को स्पष्ट शब्दों में चेताया कि “धर्म की आड़ में आतंकवाद को प्रोत्साहित करना न केवल तुर्की के लिए, बल्कि पूरी सभ्य दुनिया के लिए आत्मघाती सिद्ध हो सकता है।” उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की कि वह तुर्की की इस “खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना भूमिका” पर तत्काल संज्ञान ले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा सशक्त संदेश दे जिससे आतंक के संरक्षकों को स्पष्ट चेतावनी मिल सके।

यह बयान डॉ. राजेश्वर सिंह ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और तुर्की द्वारा पाकिस्तान का समर्थन करने के संदर्भ में, सोशल मीडिया मंच X (पूर्ववर्ती ट्विटर) पर साझा किया है।

वरिष्ठ भाजपा नेता और सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेशवर सिंह ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए हालिया बयान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को प्रोत्साहन देने वाला बताते हुए उसकी तीव्र शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इसे “आतंकवाद का खुला समर्थन” और “विश्व शांति के विरुद्ध एक घातक हस्तक्षेप” करार दिया।

तुर्की का दोहरा आचरण और आतंक के प्रति सहिष्णु रुख

डॉ. सिंह ने कहा कि तुर्की लगातार उन तत्वों के साथ खड़ा रहा है जो कट्टरपंथ और वैश्विक आतंकवाद को पोषित करते हैं। उन्होंने तुर्की के इस दोहरे रवैये को चिन्हित करते हुए कहा: कश्मीर पर पाकिस्तान के पक्ष में लगातार बयानबाज़ी – जबकि पाकिस्तान को विश्व स्तर पर आतंकवाद का संरक्षक देश माना जाता है। मुस्लिम ब्रदरहुड और अन्य कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के साथ तुर्की के सक्रिय संबंध जो वैश्विक चरमपंथ की जड़ें मजबूत करते हैं। सीरिया, लीबिया और अफगानिस्तान में चरमपंथी गुटों को तुर्की द्वारा दिए गए प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन के आरोप – जिससे इन क्षेत्रों में स्थायित्व और शांति की संभावनाएं क्षीण हुईं।तुर्की के सरकारी मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा चलाया गया भारत-विरोधी और जिहादी मानसिकता को पोषित करने वाला प्रचार अभियान।

आतंकवाद पर भारत की नीति स्पष्ट, अडिग और सख्त

डॉ. सिंह ने कहा, “भारत ने सदैव आतंकवाद और कट्टरता के विरुद्ध स्पष्ट, सुसंगत और कठोर नीति अपनाई है। जो राष्ट्र ऐसी शक्तियों को संरक्षण और समर्थन प्रदान करते हैं, वे मानवता के विरोधी हैं। इन्हें वैश्विक समुदाय द्वारा अलग-थलग किया जाना समय की आवश्यकता है।”

तुर्की के लिए चेतावनी और विश्व बिरादरी से आह्वान

डॉ. राजेश्वर सिंह ने तुर्की को स्पष्ट शब्दों में चेताया कि “धर्म की आड़ में आतंकवाद को प्रोत्साहित करना न केवल तुर्की के लिए, बल्कि पूरी सभ्य दुनिया के लिए आत्मघाती सिद्ध हो सकता है।” उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की कि वह तुर्की की इस “खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना भूमिका” पर तत्काल संज्ञान ले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा सशक्त संदेश दे जिससे आतंक के संरक्षकों को स्पष्ट चेतावनी मिल सके।

यह बयान डॉ. राजेश्वर सिंह ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और तुर्की द्वारा पाकिस्तान का समर्थन करने के संदर्भ में, सोशल मीडिया मंच X (पूर्ववर्ती ट्विटर) पर साझा किया है।

तांबे के बर्तन में पानी पीते समय ये गलतियां बिल्कुल न करें, नहीं तो ये आपके शरीर के लिए जहरीला साबित हो सकता है।

भारत में तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। वहीं भारतीय ग्रंथों में भी तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने के कई फायदे बताए गए हैं। इस पानी को पीने से दिल और दिमाग दोनों स्वस्थ रहते हैं। साथ ही इम्यूनिटी मजबूत होती है, वेट कम करता है, एंटी एजिंग और टैनिंग भी कम करता है। तांबे का पानी पीने से पाचन बेहतर होने के साथ इम्यूनिटी बढ़ती है और एंटीऑक्सीडेंट जैसे फायदे भी मिलते हैं। हालांकि इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना चाहिए।

भले ही तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से फायदा मिलता है, लेकिन सही मात्रा में इसका इस्तेमाल करना जरूरी माना जाता है। क्योंकि तांबा पावरफुल चीज है और इस पानी को पीते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पावरफुल है कॉपर

बता दें कि कॉपर बहुत शक्तिशाली होता है। लेकिन हर शक्तिशाली चीज की तरह इसको भी संतुलन के साथ इस्तेमाल करना चाहिए। भले ही यह इम्यूनिटी बढ़ाने, नेचुरल एंटी-ऑक्सीडेंट्स और पाचन सुधारने के रूप में काम कर सकता है। लेकिन इसका अधिक इस्तेमाल आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

कितनी मात्रा है सही

असल में हर एक चीज की सीमा होता है। ऐसे में अगर शरीर में ज्यादा तांबा जमा हो जाए, तो इसका असर जहर जैसा हो सकता है। इससे आपके पेट में जलन, उल्टी, पेट दर्द और जिंक के संतुलन में गड़बड़ी हो सकती है।

तांबे के बर्तन में रखा कितना पानी पिएं

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक आपको दिन भर तांबे का पानी पीने या फिर उसमें नींबू मिलाने या गर्म करने की आवश्यकता नहीं है। आप साधारण तापमान वाले एक या दो मग तांबे के पानी का सेवन कर सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से पहले इसकी सही मात्रा का इस्तेमाल करना जरूरी है। क्योंकि अधिक तांबा आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए ध्यान रखें कि तांबे के पानी का सही तरीके से सेवन करके आप स्वास्थ्य फायदों का आनंद ले सकते हैं।

तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है और बीमारियों से लड़ने में सहायता करता है।

तांबे के गुण पेट साफ रखने के साथ पाचन में भी सुधार करता है। साथ ही यह गैस, पेट दर्द और अपच जैसी समस्याएं दूर होती हैं।

दरअसल, तांबा शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म करने का काम करता है। इससे शरीर की सफाई होती है और सूजन भी कम होती है।

तांबा दिल की सेहत में सुधार करता है। वहीं यह दिमाग के सही तरीके से काम करने में सहायता करता है।

अगर आप सही तरीके से इस पानी का सेवन करते हैं, तो यह मेटाबॉलिज्म को तेज कर सकता हैं। इससे वेट कंट्रोल में मदद मिलती है।

वहीं तांबा बॉडी में रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में सहायता करता है। इससे खून की गुणवत्ता में सुधार आता है।

RCB को बड़ी राहत मिली, ये दो जबरदस्त विदेशी खिलाड़ी अब पूरे सीजन के लिए टीम के साथ रहेंगे।

इंडियन प्रीमियर लीग के 18वें सीजन के बाकी बचे लीग स्टेज के 13 मुकाबले और प्लेऑफ मैचों की शुरुआत 17 मई से होगी। भारत और पाकिस्तान के बीच बॉर्डर पर बढ़ते तनाव को देखते हुए 9 मई को आईपीएल 2025 को एक हफ्ते के लिए सस्पेंड कर दिया गया था, जिसके बाद गवर्निंग काउंसिल ने हालात सामान्य होने के बाद नए शेड्यूल का ऐलान कर दिया है। वहीं आईपीएल सस्पेंड होने के बाद अधिकतर विदेशी खिलाड़ी अपने देश वापस लौट गए थे, जिसमें से कुछ जहां अब नहीं आ रहे हैं, तो वहीं कई का लौटना शुरू हो गया है, जिसमें आरसीबी की टीम के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है।

शेफर्ड और लिविंगस्टन आरसीबी की टीम से जुड़े

आईपीएल 2025 के सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु टीम का प्रदर्शन काफी शानदार देखने को मिला है, जिसमें उन्होंने 11 मैचों में से 8 में जीत हासिल की है तो वहीं सिर्फ तीन मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में उन्हें प्लेऑफ में अपनी जगह को पक्का करने के लिए बाकी बचे तीन मुकाबलों में सिर्फ एक मैच और जीतना होगा। वहीं इसी आरसीबी के लिए एक जो अच्छी खबर सामने आई है वह उनके 2 धाकड़ खिलाड़ी रोमारियो शेफर्ड और लियम लिविंग्सटन वापस टीम के साथ जुड़ गए हैं। रोमारियो शेफर्ड के साथ कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के खिलाड़ी सुनील नारायण और उनके मेंटर ड्वेन ब्रावो भी वापस लौट आए हैं। रोमारियो शेफर्ड को वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच होने वाली 29 मई से वनडे सीरीज के लिए विंडीज टीम में जगह मिली है, जिस दिन से आईपीएल के प्लेऑफ मैचों की शुरुआत होगी, जिसमें अभी तक क्रिकेट वेस्टइंडीज ने इस बात को लेकर जानकारी नहीं दी है कि उनके खिलाड़ी आईपीएल को बीच में छोड़कर वापस लौटेंगे या नहीं।

आरसीबी को आखिरी तीन लीग स्टेज मुकाबलों में इन टीमों का करना है सामना

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम को आईपीएल 2025 के सामने आए नए शेड्यूल के अनुसार आखिरी तीन लीग स्टेज के मैचों में केकेआर, सनराइजर्स हैदराबाद और लखनऊ सुपर जाएंट्स की टीम का सामना करना है। इसमें उन्हें 17 मई को जहां केकेआर के खिलाफ मैच खेलना है तो वहीं 23 मई को उनका सामना सनराइजर्स हैदराबाद से होगा जबकि 27 मई को आरसीबी की टीम लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ इस सीजन का अपना आखिरी लीग स्टेज मैच खेलने मैदान पर उतरेगी।

Arvalem Cave: गोवा की यात्रा पर हैं तो पांडवों की गुफा जरूर देखें, जानिए यहां पहुंचने का आसान तरीका

गोवा में घूमने के लिए वैसे तो कई अच्छी जगहें हैं। कई लोगों को लगता है कि गोवा सिर्फ अपने खूबसूरत समुद्र तटों के लिए जाना जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है। गोवा अपने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक आकर्षणों के लिए भी फेमस है। गोवा को बीच के नाम से इसलिए भी जाना जाता है, क्योंकि यहां के समुद्र तट काफी फेमस है। साथ ही यहां की नाइटलाइफ भी काफी ज्यादा फेमस है। अक्सर गोवा को बीच डेस्टिनेशन के रूप में प्रमोट किया जाता है। वहीं सोशल मीडिया, फिल्मों और ट्रैवल एजेंसियों के प्रचार में अधिकतर पार्टीज, बीच और वाटर स्पोर्ट्स को दिखाया जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको गोवा की अरवलम गुफाओं के बारे में बताने जा रहे हैं।

अरवलम गुफा

बताया जाता है कि अवरलम गुफा महाभारत में पांडवों के वनवास के दौरान रुकने का स्थान था। यही वजह है कि इस गुफा को पांडव गुफा भी कहा जाता है। इन गुफाओं की वास्तुकला हिंदू और बौद्ध प्रभाव से जुड़ी हुई लगेंगी। यह गुफा अवरलम झरने की तरफ जाने वाले रास्ते में पड़ती है। यह गोवा में घूमने के लिए अच्छी जगहों में से एक है।

लोकेशन

गोवा के नॉर्थ गोवा में संकेलिम के पास स्थित है।

पणजी से यह गुफा करीब 29 किमी की दूरी पर है। यहां पर पहुंचने में करीब 40 मिनट का समय लग सकता है।

अरवलम गुफा से कुछ दूरी पर अवरलम झरना और रुद्रेश्वर मंदिर भी है। आप यहां के नजारे भी देख सकते हैं।

ऐसे पहुंचे अरवलम गुफा

अगर आप थिविम रेलवे स्टेशन से आ रहे हैं, तो यह करीब 20 किमी की दूरी पर है। यहां पर पहुंचने में आपको करीब 30 मिनट का समय लग सकता है।

अरवलम गुफा से गोवा का नजदीकी डाबोलिम एयरपोर्ट से लगभग 45 किमी है।

आप गोवा में कही भी जाने के लिए कैब बुक कर सकते हैं। आपको मापसा या पणजी से कैब और बस मिल जाएगी।

आप चाहें तो बाइक रेंट पर लेकर घूम सकते हैं।