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‘नो एंट्री’ के सेट पर लारा दत्ता को सलमान खान से डर लगता था, और 20 साल बाद एक्ट्रेस ने यह राज़ खोला

‘नो एंट्री’ को रिलीज हुए 20 साल हो चुके हैं. साल 2005 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की थी. इसमें सलमान खान, अनिल कपूर, फरदीन खान, बिपाशा बसु, लारा दत्ता, ईशा देओल, सेलिना जेटली और बोमन ईरानी समेत कई कलाकार अहम भूमिकाओं में थे.

‘नो एंट्री’ के 20 साल पूरे होने के मौके पर फिल्म की एक्ट्रेस लारा दत्ता ने खास पोस्ट लिखा है. इसमें उन्होंने खुलासा किया है कि सेट पर उन्हें सलमान खान से काफी डर लगता था. साथ ही फिल्म में बिपाशा वाले रोल के लिए पहले उन्हें सिलेक्ट किया गया था.

‘मुझे वो रोल मिला था, जो बाद में बिपाशा ने निभाया’
लारा दत्ता ने ‘नो एंट्री’ की एक फोटो शेयर करते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा- ”नो एंट्री’ के 20 साल पूरे हो गए. समय कितनी तेजी से गुजरता है. ये फिल्म हमेशा मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक रहेगी. कॉमेडी में मेरा पहला कदम, मुझे वो रोल मिला था, जो बाद में बिपाशा ने निभाया था. मुझे याद है कि मैंने अनीस बज्मी से कहा था कि काजल का किरदार मेरे अब तक के सबसे अलग किरदारों में से एक है. मुझे एक बेहद शक्की, बड़बोली, पंजाबी पत्नी का किरदार निभाने के लिए खुद को कड़ी चुनौती देनी होगी. हैरानी की बात है कि मैंने उस किरदार को पूरी तरह से अपनाया और उसे निभाते हुए मुझे बहुत मजा आया.’

सलमान खान से डरती थीं लारा
सलमान खान को लेकर लारा दत्ता ने लिखा- ‘मैंने अभी तक सलमान खान के साथ पार्टनर नहीं की थी, इसलिए उनका सेट पर होना थोड़ा डराने वाला था… ऐसा लग रहा था जैसे सुपरस्टार आ ही गया हो! लेकिन वो बहुत ही शांत, मज़ेदार और आकर्षक थे. फरदीन खान कॉमेडी के मामले में एक नया आयाम थे और ये देखना अद्भुत था कि उनके लिए ये कितना कंफर्टेबल था.’

लारा ने आगे को-एक्ट्रेसेस को लेकर लिखा- ‘सेलिना जेटली, ईशा देओल और मेरे बीच एक ऐसा रिश्ता बना जो कलीग्स से आगे बढ़कर फिल्म इंडस्ट्री में एक बेहद खास, रेयर दोस्ती बन गया. बिपाशा बसु बेहद खूबसूरत थीं और उन्होंने सेक्स अपील और कॉमिक टाइमिंग का बेहतरीन मेल किया था.’

‘खाकी’ पूरी करते ही ‘नो एंट्री’ के सेट पर पहुंची थीं एक्ट्रेस
लारा आगे बताती हैं- ‘मुझे याद है कि मैं ‘ऐसा जादू डाला रे’ (खाकी) की शूटिंग खत्म करके स्टूडियो से सीधे एयरपोर्ट के लिए निकली थी ताकि अपने पहले शेड्यूल के लिए साउथ अफ्रीका जाने वाली फ्लाइट पकड़ सकूं और वहां उतरकर सीधे अपने पहले शॉट के लिए सेट पर पहुंच गई थी! यहीं पर मैं अपनी नौकरानी से बहस कर रही थी और उससे पूछ रही थी कि उसकी चोली इतनी हवादार क्यों है.’

डायरेक्टर अनीस बज्मी के लिए कही ये बात
एक्ट्रेस ने आखिर में लिखा- ‘मैं अनीस बज्मी के साथ काम करने के लिए बेहद एक्साइटेड थी. उनके साथ काम करना वाकई एक सपने जैसा और एंजॉय करने वाला एक्सपीरियंस था. मुझे बहुत खुशी है कि मुझे अपने करियर में उनके निर्देशन में काम करने का मौका मिला. दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, थाईलैंड, मुंबई… ‘नो एंट्री’ पागलपन भरी मस्ती, अद्भुत सह-कलाकारों और अद्भुत निर्माता बोनी कपूर से भरपूर थी और आज भी हमारे समय की सबसे प्रतिष्ठित कॉमेडी फिल्मों में से एक है.’

‘नो एंट्री 2’ बना रहे अनीस बज्मी
बता दें कि कुछ दिनों पहले अनीस बज्मी ने बताया था कि ‘नो एंट्री’ का सीक्वल ‘नो एंट्री 2’ बन रही है. जब अनीस बज्मी से पूछा गया कि फिल्म सिनेमाघरों में कब तक रिलीज हो जाएगी, तब उन्होंने बताया- ‘अभी इसमें समय लगेगा क्योंकि मुझे फिल्म की कहानी लिखने में लगभग 2 से 3 महीने लगेंगे. इसके बाद ही हम फिल्म शुरू कर पाएंगे.’

हरियाणा के सिंगर गुलजार की बढ़ती फेम उनके लिए परेशानी बन गई, रंगदारी वसूलने आए बदमाशों ने उनके घर में गोलीबारी की।

हरियाणवी सिंगर गुलजार छानीवाला एक लोकप्रिय गायक हैं. 2019 में रिलीज हुआ उनका गाना ‘जुग जुग जीवे’ काफी हिट रहा. इसे यूट्यूब पर अब तक 67 करोड़ बार देखा जा चुका है. इस गाने की धूम ऐसी रही कि इस पर जमकर इंस्टाग्राम पर रील्स भी बनीं.

27 वर्षीय सिंगर गुलजार की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके गाने रिलीज होते ही हिट हो जाते हैं.

आशीष शर्मा से गुलजार छानीवाला बनने तक का सफर

गुलजार छानीवाला का असली नाम आशीष शर्मा है. उनका जन्म हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ था. गुलजार के इंस्टाग्राम पर 2.5 मिलियन फॉलोअर और यूट्यूब चैनल पर 8.2 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं.

गुलजार छानीवाला ने अपने करियर की शुरुआत हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में एक संगीत निर्माता के रूप में की थी, जिसके बाद उन्हें गीतकार के रूप में भी पहचान मिली. उनकी लोकप्रियता उनके म्यूजिक वीडियो के जरिए बहुत बढ़ी, जिनमें अक्सर एक कहानी होती है. उनकी एक खास शैली है जो उन्हें अन्य हरियाणवी कलाकारों से अलग करती है.

2018 में गुलजार छानीवाला का पहला गाना “चार कड़े वाला” रिलीज हुआ था. इसी साल उनका एक और गाना “फाड़-फाड़” रिलीज हुआ, जिसे उनके फैंस ने काफी पसंद किया. इसके बाद उन्होंने कसूते, मेडल, मिडिल क्लास, ठंडी ठंडी, माफिया लव, यमराज, गॉडफादर, दौर और जीजा जैसे कई गाने रिलीज हुए, जिनके मिलियन में व्यूज हैं.

हरियाणवी संगीत को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

उनके गाने अपनी कहानियों और सामाजिक संदेश के लिए जाने जाते हैं, जो अक्सर युवाओं के जीवन, गांव की संस्कृति और सामाजिक मुद्दों को दर्शाते हैं. वह खुद अपने गाने लिखते हैं, कंपोज करते हैं और प्रोड्यूस करते हैं. उन्होंने हरियाणवी संगीत को एक क्षेत्रीय शैली से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

2022 में गुलजार छानीवाला की फिल्म ‘डीजे वाले बाबू’ भी काफी हिट हुई थी. इनके हाई एनर्जी वाले गानों से लोग तुरंत कनेक्ट हो जाते हैं.

हाल ही में भिवानी में हुए टीचर मनीषा हत्याकांड के बाद गुलजार छानीवाला ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए थे.

2021 में गुलजार के भिवानी स्थित घर पर 3 बदमाशों ने फायरिंग की थी और एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी. पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. उन्होंने बताया था कि एक्टर की लोकप्रियता को देखते हुए ही उन्होंने रंगदारी मांगी थी.

अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ विवाद के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने चार बार कॉल किया, लेकिन पीएम मोदी ने बात नहीं की

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया है तब से दोनों देशों के रिश्तों में तल्खियां बढ़ी हुई हैं. इस बीच जर्मनी के एक अखबार ने दावा किया है कि ट्रंप ने टैरिफ विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चार बार कॉल किया, लेकिन पीएम मोदी ने उनसे बात करने से मना कर दिया.

ट्रंप ने टैरिफ विवाद के बीच 4 बार लगाया फोन

जर्मन न्यूज पेपर FAZ ने दावा किया है कि भारत को डेड इकोनॉमी कहने पर पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से नाराज हैं. ट्रंप के टैरिफ की वजह से 25 सालों से चले आ रहे भारत-अमेरिका संबंधों में खटास आ गई. अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है, जो ब्राजील के अलावा किसी दूसरे देश के लिए सबसे अधिक है. अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर जुर्माना भी लगाया है. FAZ का दावा है कि ट्रंप ने हाल के हफ्तों में चार बार पीएम मोदी को फोन किया, लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया.

ट्रंप से क्यों नाराज हैं पीएम मोदी?

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 31 जुलाई को कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं है कि भारत रूस के साथ क्या करता है. वे दोनों मिलकर अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को नीचे गिरा सकते हैं. हमने भारत के साथ बहुत कम व्यापार किया है, उनके टैरिफ बहुत ऊंचे हैं, जो कि दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ वाले देशों में से एक हैं.” जर्मनी के अखबार ने दावा किया है कि पीएम मोदी ट्रंप की इसी टिप्पणी से नाराज हैं.

जर्मन न्यूज पेपर में दावा किया गया है कि ट्रंप ने इसके बाद कई बार पीएम मोदी को मनाने की कोशिश की. इसमें कहा गया कि भारत मौजूदा समय में बहुत ही सावधानीपूर्वक कदम उठा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, पीएम मोदी अमेरिकी कृषि व्यवसाय के लिए भारत के बाजार खोलने के ट्रंप के दबाव का भी विरोध कर रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने को लेकर नोटिस जारी कर दिया है. इसमें बताया गया है कि नया टैरिफ सिस्टम 27 अगस्त रात 12.01 बजे से लागू होगा.

Sports News:पाकिस्तान की एशिया कप के लिए संभावित प्लेइंग-11: 4 ऑलराउंडर, 2 तेज गेंदबाज और 1 स्पिनर।

एशियाई क्रिकेट का सबसे बड़ा महाकुंभ यानी एशिया कप 9 सितंबर से 28 सितंबर के बीच आबू धाबी और दुबई में खेला जाएगा. इस बार यह टूर्नामेंट टी20 फॉर्मेट में खेला जाएगा. टूर्नामेंट का पहला मैच अफगानिस्तान और हांगकांग के बीच खेला जाएगा. यहां जानें 2025 एशिया कप में पाकिस्तान की प्लेइंग इलेवन कैसी हो सकती है.

4 ऑलराउंडर, 2 तेज गेंदबाज और 1 स्पिनर

2025 एशिया कप में पाकिस्तान की प्लेइंग इलेवन में 4 ऑलराउंडर, 2 तेज गेंदबाज और 1 स्पिनर को जगह मिल सकती है. चार ऑलराउंडर में तीन स्पिन ऑलराउंडर हैं और एक तेज गेंदबाज ऑलराउंडर. ऐसे में टीम काफी खूंखार दिख रही है. एशिया कप में इस बार भारत के बाद पाकिस्तान दूसरी सबसे मजबूत टीम नजर आ रही है.

इन खिलाड़ियों को मिल सकती है प्लेइंग इलेवन में जगह 

एशिया कप में पाकिस्तान के लिए सैम अयूब और साहिबजादा फरहान पारी की शुरुआत कर सकते हैं. एशिया कप में पाकिस्तान के लिए सैम अयूब और साहिबजादा फरहान पारी की शुरुआत कर सकते हैं. इसके बाद तीन नंबर पर फखर जमान के खेलने की संभावना है. चार नंबर पर विकेटकीपर मोहम्मद हारिस खेल सकते हैं. इसके बाद कप्तान सलमान आगा और विस्फोटक बल्लेबाज हसन नवाज एक्शन में नजर आ सकते हैं.

सात नंबर पर स्पिन ऑलराउंडर मोहम्मद नवाज और आठ नंबर पर फहीम अशरफ एक्शन में दिख सकते हैं. चाइनामैन सुफियान मुकीम इकलौते मुख्य स्पिनर हो सकते हैं. सलमान मिर्जा और शाहीन अफरीदी पर तेज गेंदबाजी विभाग की जिम्मेदारी रह सकती है. ऐसे में स्पीडस्टार हारिस रऊफ को बेंच पर बैठना पड़ सकता है.

एशिया कप के लिए पाकिस्तान की संभावित प्लेइंग इलेवन- सैम अयूब, साहिबजादा फरहान, फखर जमान, मोहम्मद हारिस (विकेटकीपर), सलमान अली आगा, हसन नवाज, मोहम्मद नवाज, फहीम अशरफ, सुफियान मुकीम, सलमान मिर्जा और शाहीन शाह अफरीदी.

2025 एशिया कप के लिए पाकिस्तान की टीम- सलमान अली आगा (कप्तान), अबरार अहमद, फहीम अशरफ, साहिबजादा फरहान, सैम अयूब, सलमान मिर्जा, फखर जमान, हारिस रऊफ, हसन अली, हसन नवाज, हुसैन तलत, खुशदिल शाह, मोहम्मद हारिस, मोहम्मद नवाज, मोहम्मद वसीम जूनियर, शाहीन अफरीदी और सुफियान मुकीम.

राजधानी लखनऊ की सड़कों और ड्रेनेज व्यवस्था पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री से की उच्च स्तरीय समीक्षा की मांग : उन्होंने कहा- जलभराव, टूटी सड़कों और नालों की समस्या पर जनहित में उठाई आवाज – राजधानी के लिए आधुनिक फ्लड मैनेजमेंट प्लान की जरूरत

  • विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने राजधानी लखनऊ की सड़कों और ड्रेनेज व्यवस्था पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा।
  • मानसून में जलभराव और टूटी सड़कों की समस्या के स्थायी समाधान हेतु उच्च स्तरीय समीक्षा की मांग की।
  • आलमबाग, चारबाग, राजाजीपुरम, इन्दिरानगर, गोमतीनगर विस्तार, हजरतगंज और सरोजनीनगर जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना सुझाई।
  • नालों की वैज्ञानिक सफाई, सड़कों की गुणवत्ता पर निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
  • राजधानी के लिए आधुनिक फ्लड मैनेजमेंट प्लान और स्वतंत्र मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने का सुझाव दिया।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में हर साल मानसून आते ही जलभराव और टूटी-फूटी सड़कों की समस्या सुर्खियों में आ जाती है। आलमबाग से लेकर चारबाग, हजरतगंज से लेकर इन्दिरानगर और सरोजनीनगर तक, कई क्षेत्रों में नालों का पानी भरने से नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर राजधानी की सड़कों और ड्रेनेज व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा कराने की मांग की है।

जनता की पीड़ा को रखा मुख्यमंत्री के सामने

डॉ. सिंह ने पत्र में लिखा कि राजधानी के नागरिकों को बरसात के मौसम में घंटों ट्रैफिक जाम, घरों और दुकानों में घुसते गंदे पानी, सड़कों पर गड्ढों और टूटी सड़क पर यात्रा की कठिनाइयों से जूझना पड़ता है।

  • जन स्वास्थ्य खतरे में – जलभराव से डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • व्यापार पर असर – बाजार और दुकानें पानी में डूबने से व्यापारी व छोटे कारोबारी आर्थिक नुकसान झेलते हैं।
  • ट्रैफिक और सुरक्षा – पानी भरे गड्ढों से सड़क हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि राजधानी की यह स्थिति पूरे प्रदेश की छवि को धूमिल करती है, जबकि लखनऊ को राज्य की पहचान और गौरव का प्रतीक होना चाहिए।

पत्र में सुझाए गए सुधारात्मक कदम

डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कई दीर्घकालिक और ठोस उपाय सुझाए हैं –

  • नालों की नियमित सफाई:
  • वैज्ञानिक पद्धति से नालों की सफाई हो।
  • बारिश से पहले प्री-मानसून सफाई अनिवार्य रूप से कराई जाए।
  • सड़क निर्माण की गुणवत्ता:
  • नई बनी सड़कों की गुणवत्ता पर निगरानी तंत्र हो।
  • गारंटी अवधि में खराब हुई सड़कों की जिम्मेदारी ठेकेदार पर तय हो।
  • संवेदनशील क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना:
  • आलमबाग, राजाजीपुरम, चारबाग, इन्दिरानगर, गोमतीनगर विस्तार, हजरतगंज और सरोजनीनगर जैसे क्षेत्रों में जलभराव रोकने के लिए विशेष परियोजनाएं तैयार की जाएं।
  • अधिकारियों और अभियंताओं की जवाबदेही:
  • जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
  • लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
  • आधुनिक फ्लड मैनेजमेंट प्लान:
  • राजधानी के लिए दीर्घकालिक फ्लड मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाए।
  • इसमें GIS Mapping, Storm Water Drainage, आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग किया जाए।

स्वतंत्र मॉनिटरिंग कमेटी का सुझाव

डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि राजधानी की परियोजनाओं पर सिर्फ सरकारी विभागों पर निर्भर न रहकर एक स्वतंत्र मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाए। इसमें तकनीकी विशेषज्ञ, नगर योजनाकार और सिविल इंजीनियर शामिल हों। यह कमेटी कार्यों की गुणवत्ता, समय-सीमा और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

राजधानी की छवि सुधारना जरूरी

डॉ. सिंह ने अपने पत्र में लिखा—
“लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है और यहां की स्थिति पूरे राज्य की छवि का प्रतिनिधित्व करती है। राजधानी का शहरी ढांचा मजबूत, आधुनिक और दीर्घकालिक दृष्टि से योजनाबद्ध होना चाहिए। जलभराव और जर्जर सड़कों से निजात दिलाना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।”

पिछले अनुभव और भविष्य की जरूरत

लखनऊ में हर साल बारिश के दौरान जलभराव की तस्वीरें सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों की सुर्खियां बनती हैं। चारबाग रेलवे स्टेशन, हजरतगंज, आलमबाग और अन्य इलाकों में पानी भरने से यातायात ठप हो जाता है। पिछले वर्षों में कई बार आम जनता ने प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह का यह कदम न केवल जनता की पीड़ा को आवाज देने वाला है बल्कि राजधानी को एक स्मार्ट और सस्टेनेबल सिटी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल भी है।