लोकप्रिय टीवी और फिल्म अभिनेत्री हिना खान ने हाल ही में अपने के-ड्रामा फैन होने के सपने को हकीकत में बदल दिया। वह अपने लॉन्गटाइम बॉयफ्रेंड रॉकी जैसवाल के साथ दक्षिण कोरिया की यात्रा पर निकलीं, जहां दोनों ने के-ड्रामा की दुनिया से जुड़े कई प्रतिष्ठित स्थानों की सैर की। इस यात्रा की खास बात यह रही कि हिना खान को कोरिया पर्यटन की ओर से मानद राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर इस समारोह की कुछ शानदार तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे कोरियन ड्रामा की किसी लीड हीरोइन की तरह बेहद ग्लैमरस नजर आईं।
बता दें कि हिना खान ने अपने इंस्टाग्राम पर तस्वीरें शेयर कर इसकी जानकारी दी है। हिना ने लिखा, ‘कोरिया पर्यटन की मानद राजदूत नियुक्त किए जाने पर खुद को सम्मानित महसूस कर रही हूं। कोरिया की सुंदरता, संस्कृति और गर्मजोशी को दुनियाभर में बढ़ावा देने के लिए उत्साहित हूं। इन कुछ दिनों में मैंने कोरिया को इतने करीब से महसूस किया है कि शब्दों में बयां करना मुश्किल है। प्राचीन महलों से लेकर जीवंत गलियों तक, कोरिया का हर कोना एक नई कहानी कहता है।’ इस खास मौके पर हिना ने एक खूबसूरत नीली ड्रेस पहनी थी, जो सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में रही।
हिना खान ने दिखाई कोरिया यात्रा की तस्वीरें
हिना और रॉकी की कोरियाई यात्रा की शुरुआत हुई गंगनेउंग स्थित बीटीएस के फेमस बस स्टॉप से, जिसे असली आर्मी स्टाइल स्टार्ट कहा जा सकता है। इसके बाद दोनों पूरी तरह के-ड्रामा मोड में चले गए और लोकप्रिय सीरीज ‘Goblin’ सहित कई के-ड्रामा शूटिंग लोकेशन्स को एक्सप्लोर किया। हिना ने इसकी तस्वीरें शेयर करते हुए झलकियां दिखाईं। गौरतलब है कि इस समय हिना खान ‘स्तन कैंसर स्टेज 3’ का इलाज करवा रही हैं। बावजूद इसके, उनका हौसला और ऊर्जा प्रेरणादायक है। इस कोरियाई यात्रा और मानद राजदूत की उपाधि ने उनके फैंस को यह दिखा दिया कि जीवन में मुश्किल समय के बीच भी सपनों को जिया जा सकता है। हिना खान की इन तस्वीरों पर भी फैन्स ने खूब प्यार लुटाया है साथ ही उनकी खूबसूरती की भी तारीफ की है। बता दें कि हिना खान अक्सर ही अपने फैन्स के साथ निजी जिंदगी के पलों को शेयर करती रहती हैं।
रियाद: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात की है। दोनों देशों के नेताओं की 25 साल बाद यह पहली मुलाकात थी। इस मुलाकात को सीरिया के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो दशकों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने की स्थिति से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है। खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के नेताओं के साथ ट्रंप की मुलाकात से इतर हुई यह वार्ता ‘असद परिवार’ के 50 साल से अधिक के शासनकाल से उबर रहे सीरिया के लिए एक बड़ा घटनाक्रम है। खास बात यह की कभी अल-शरा की गिरफ्तारी पर अमेरिका ने एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा था।
ट्रंप ने वार्ता के बाद एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात करते हुए अल-शरा की तारीफ की और कहा, “वो एक युवा और आकर्षक व्यक्ति हैं। सख्त व्यक्ति है। उनका बहुत मजबूत अतीत रहा है। वह योद्धा हैं।” बुधवार को हुई मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि अल-शरा, अबू मोहम्मद अल-गोलानी के नाम से अल-कायदा से जुड़े थे और सीरियाई युद्ध में हिस्सा लेने से पहले इराक में अमेरिकी बलों से लड़ने वाले विद्रोहियों में शामिल थे। अमेरिकी बलों ने उन्हें कई वर्ष तक वहां कैद रखा था। ट्रंप ने कहा, “वह वास्तविक नेता हैं। उन्होंने जिम्मा उठाया है और वह बहुत अद्भुत हैं। ”
सीरिया में लोगों ने मनाया जश्न
ट्रंप ने पश्चिम एशिया के तीन देशों की यात्रा की शुरुआत करते हुए एक दिन पहले रियाद में घोषणा की थी कि वह पूर्व तानाशाह बशर अल-असद के शासन में सीरिया पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने के लिए कदम उठाएंगे। ट्रंप के इस बयान के बाद सीरिया में मंगलवार रात को लोगों ने जश्न मनाया और आतिशबाजी की। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके देश को ऐसे समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से जगह बनाने में मदद मिलेगी, जब उन्हें निवेश की सबसे अधिक आवश्यकता होगी।
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सीरिया में लोगों ने मनाया जश्न
ट्रंप ने नहीं सुनी इजरायल की बात
ट्रंप और अल-शरा की मुलाकात से पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सीरिया पर लगे प्रतिबंध ना हटाने का आह्वान किया था। नेतन्याहू के आह्वान को ट्रंप द्वारा अनदेखा किए जाने से एक बार फिर व्हाइट हाउस और इजरायल सरकार के बीच बढ़ता असंतोष उजागर हो गया है। ट्रंप ने अल-शरा से मुलाकात के बाद जीसीसी से कहा, “मैं सीरिया के खिलाफ प्रतिबंधों को समाप्त करने का आदेश दे रहा हूं ताकि वो नई शुरुआत कर सकें। इससे उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। प्रतिबंध वाकई बहुत गंभीर और बेहद कठोर हैं।”
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जीसीसी में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ट्रंप ने कहा कि अल-शरा ने अब्राहम समझौते में शामिल होने और अंततः इजरायल को मान्यता देने पर सहमति व्यक्त की है, लेकिन सीरिया ने इसकी पुष्टि नहीं की है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि उन्हें (सीरिया) खुद को सही करना होगा। मैंने उनसे (अल-शरा) कहा, मुझे उम्मीद है कि जब सब सही हो जाएगा तो आप भी इसमें (अब्राहम समझौता) शामिल हो जाएंगे।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हां, उनके पास लेकिन अभी करने को काफी कुछ है।” अल-शरा बैठक के लिए सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे थे।
कौन-कौन हुआ शामिल
अमेरिका ने सीरिया को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश बताते हुए 1979 में प्रतिबंध लगा दिया था। बैठक बंद कमरे में हुई और पत्रकारों को वहां जाने की अनुमति नहीं थी। व्हाइट हाउस ने बाद में कहा कि यह मुलाकात लगभग 30 मिनट से अधिक समय तक चली। इसके साथ ही अल-शरा 25 साल में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने वाले पहले सीरियाई राष्ट्रपति बने। इससे पहले 2000 में सीरिया के राष्ट्रपति के तौर पर हाफिज असद ने जिनेवा में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से मुलाकात की थी। ट्रंप और अल-शरा की बैठक में सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान भी शामिल हुए। इसके अलावा तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन ने फोन कॉल के जरिये बैठक में शिरकत की। तुर्किये अल-शरा और उनके विद्रोही धड़े का प्रमुख समर्थक है।
सऊदी के युवराज ने निभाई बड़ी भूमिका
ट्रंप ने सीरिया के बारे में कहा, “मुझे पक्का यकीन है कि इससे उन्हें एक मौका मिलेगा। उनके पास एक अच्छा मौका है। ऐसा करना मेरे लिए सम्मान की बात थी।” ट्रंप ने कहा कि अल-शरा से मिलने के लिए मुख्य रूप से सऊदी के युवराज मोहम्मद ने उन्हें प्रोत्साहित किया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने एक बयान में कहा कि ट्रंप ने अल-शरा से आग्रह किया कि वह कूटनीतिक रूप से इजरायल को मान्यता दें, “सभी विदेशी आतंकवादियों को सीरिया छोड़ने के लिए कहे” और इस्लामिक स्टेट समूह के किसी भी तरह के उभार को रोकने में अमेरिका की मदद करें। अल-शरा इस साल जनवरी में सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति बने थे।
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पिछले साल दिसंबर में अल-शरा के नेतृत्व में हयात तहरीर अल-शाम के विद्रोहियों ने राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से हटा दिया था। इसके साथ ही सीरिया में असद परिवार के 54 साल के शासनकाल का अंत हो गया था। ट्रंप पश्चिम एशिया के दौरे पर हैं और सऊदी अरब के बाद वह कतर पहुंचे हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो चुका है। दरअसल पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने एक्शन लेते हुए 9 आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर उन्हें तबाह कर दिया। लेकिन दुर्भाग्य की बात ये है कि पाकिस्तान ने इसके बाद भारत पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। हालांकि जब भारतीय सेना ने इन हमलों का जवाब देना शुरू किया और मिसाइल और ड्रोन से हमले कर पाकिस्तान के एयरबेस और रडार सिस्टमों को तबाह कर दिया तो पाकिस्तान घुटने के बल आ गया और उसने भारत के सामने सीजफायर का प्रस्ताव रखा जिसे भारत सरकार ने मान लिया। लेकिन भारत सरकार कोई घोषणा करती उससे पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर की घोषणा कर दी और कहा कि अमेरिकी की मध्यस्थता के बाद यह सीजफायर हुआ। हालांकि भारत सरकार ने किसी भी तरह की मध्यस्थता से इनकार कर दिया।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर पेंटागन के पूर्व अधिकारी और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो माइकल रुबिन ने कहा, “यह ऐसा संघर्ष नहीं था जो भारत चाहता था। यह ऐसा संघर्ष था जो भारत पर थोपा गया था। हर देश को अपने नागरिकों की रक्षा करने का अधिकार है। यह इस बात में कोई अंतर नहीं करता कि देश पर औपचारिक सेना हमला करती है या आतंकवादी सेना हमला करती है। लेकिन अंततः, यह भारत का काम है कि वह एक सीमा रेखा खींचे और कहे कि नहीं, हम अपनी सीमा पर आतंकवादी हमलों को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे, इसलिए भारत ने वही किया जो बिल्कुल जरूरी था।”
ट्रंप हर चीज का श्रेय लेना पसंद करते हैं: माइकल रुबिन
उन्होंने कहा, ‘डोनाल्ड ट्रम्प हर चीज का श्रेय लेना पसंद करते हैं। अगर आप डोनाल्ड ट्रम्प से पूछें, तो वे अकेले ही विश्व कप जीत गए। उन्होंने इंटरनेट का आविष्कार किया। उन्होंने कैंसर का इलाज किया। भारतीयों को इस मामले में अमेरिकियों की तरह होना चाहिए और डोनाल्ड ट्रम्प को शाब्दिक रूप से नहीं लेना चाहिए।’ माइकल रुबिन ने भारत-पाकिस्तान समझ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों के बारे में पूछे जाने पर कहा, “जब भी पाकिस्तान और भारत के बीच टकराव होता है, तो अमेरिका पर्दे के पीछे से मध्यस्थता करने की कोशिश करता है, और यह उचित भी है क्योंकि अमेरिका कूटनीतिक रूप से अप्रतिबंधित युद्ध को रोकने के लिए एक रास्ता प्रदान करने की कोशिश कर रहा है और सबसे खराब स्थिति में, किसी भी तरह के परमाणु आदान-प्रदान को बढ़ने से भी रोक रहा है। इसलिए यह तथ्य कि अमेरिका नई दिल्ली और इस्लामाबाद दोनों के संपर्क में रहेगा, यह स्पष्ट है, और यह तथ्य कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद दोनों संदेश भेजने के लिए वाशिंगटन का उपयोग करेंगे, यह भी स्पष्ट है।”
भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों तक चली सैन्य झड़प के बाद फिलहाल शांति का माहौल है। आपको बता दें कि भारत के सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाकर कुछ ही देर में पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। इसके बाद पाकिस्तान के अनुरोध पर भारत ने सीजफायर की बात मान ली। दुनियाभर के देशों ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर पर खुशी जाहिर की है। वहीं, अब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी पहली बार भारत-पाक सीजफायर पर बयान जारी किया है।
सऊदी अरब की सरकारी एजेंसी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, रियाद में खाड़ी सहयोग परिषद की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य नेताओं को संबोधित करते हुए क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के हवाले से कहा- ‘‘हम पाकिस्तान और भारत के बीच संघर्ष विराम सहमति का स्वागत करते हैं। उम्मीद uw कि इससे दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और शांति बहाल करने में मदद मिलेगी।’’
कैसे हुआ सीजफायर?
बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों को मार डाला था। भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। इसके बाद से पाकिस्तान ने भारतके जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात तक लगातार मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट से हमला किया है। हालांकि, भारतीय सेना ने एयर डिफेंस की मदद से पाकिस्तान के सभी प्रयासों को विफल कर दिया है। इसके बाद भारत ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी वायुसेना के 11 एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड और कंट्रोल सेंटर और रडार स्थलों समेत कई प्रमुख पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया था। भारत के डर से पाकिस्तान घुटनों पर आ गया और शांति की अपील करने लगा जिसके बाद दोनों देशों के बीच 10 मई को सीजफायर हुआ।
टीवी की मशहूर एक्ट्रेस रुपाली गांगुली घर-घर में पहचानी जाती हैं। इन्हें सीरियल ‘अनुपमा’ में उनकी दमदार भूमिका के लिए जाना जाता है। हाल ही में एक अफवाह को लेकर सोशल मीडिया पर भावुक और नाराज नजर आईं। कुछ ऑनलाइन रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्हें अनुपमा के सेट पर एक कुत्ते ने काट लिया है। इस खबर के फैलते ही उन्हें लगातार कॉल्स और मैसेज आने लगे, जिससे परेशान होकर उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो साझा किया और झूठी खबरों पर अपनी नाराजगी जाहिर की। एक्ट्रेस ने इस वीडियो में साफ किया कि उन्हें किसी भी कुत्ते ने नहीं काटा है और उनके बारे में झूठी अफवाह फैलाई जा रही है।
रुपाली कहती हैं, ‘कुत्ते ने नहीं काटा, ये अब तक की सबसे भयानक अफवाह है।’ वीडियो की शुरुआत में रुपाली ने साफ कहा कि यह पूरी तरह से झूठी और डरावनी खबर है कि उन्हें किसी कुत्ते ने काटा है। उन्होंने अपने सभी प्यारे ‘बच्चों’ राधा, रिमझिम, घुंघरू, गॉगल, कॉफी, जादू, डिस्को, डायना, लंबूजी और मदन की झलकियां वीडियो में दिखाईं। ये सभी अनुपमा के सेट पर पालतू डॉग्स हैं। उन्होंने कहा कि वह न सिर्फ इन जानवरों का ध्यान रखती हैं बल्कि बंदरों को भी खुद हाथ से खाना खिलाती हैं। रूपाली ने वीडियो में भावुक होते हुए कहा, ‘कम से कम इतनी कर्टसी तो होना चाहिए कि लिखने से पहले पूछ लिया जाए।’ उन्होंने बिना पुष्टि के उनके और उनके पालतू जानवरों के बारे में झूठी खबरें फैलाने वालों को आड़े हाथों लिया और कहा कि बेजुबानों को तो बख्श दो।
बच्चों की तरह रखती हैं सेट के कुत्तों का ध्यान
रुपाली ने आगे कहा, ‘असल में कोई भी जानवर आपको तब तक नहीं काटेगा जब तक आप उसे नुकसान नहीं पहुंचाते। ये सारे आवारा नहीं, मेरे बच्चे हैं। आप उनके बारे में लिख रहे हैं, जो अपने लिए भी आवाज नहीं उठा सकते।’ रुपाली गांगुली ने बताया कि वह पांच साल की उम्र से ही सड़कों पर रहने वाले जानवरों की मदद कर रही हैं और कभी ऐसी किसी घटना का सामना नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वो आम तौर पर अपने बारे में लिखी बातों पर प्रतिक्रिया नहीं देतीं, लेकिन जब बात मासूम जानवरों की हो तो वह चुप नहीं रह सकतीं।
फैंस ने जताया समर्थन
वीडियो में रूपाली का भावुक और गुस्से से भरा अंदाज़ देखने के बाद फैंस ने उनका जमकर समर्थन किया। एक यूजर ने लिखा, ‘मैम, आप पर गर्व है, आपने हमारे प्यारे बच्चों के लिए बहुत अच्छा बोला।’ एक अन्य ने लिखा, ‘मीडिया आजकल अपनी मर्जी से कहानियां बनाता है, लेकिन आपने जो कहा वह बहुत जरूरी था।’ इस तरह के कई और कमेंट भी उनके पोस्ट पर देखने को मिल रहे हैं।