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Best Places Near Mussoorie: हिमालय की गोद में छिपा बड़कोट, जिसकी खूबसूरती देख आप रह जाएंगे दंग

हिमालय की हसीन वादियों में स्थित मसूरी उत्तराखंड का एक फेमस और खूबसूरत हिल स्टेशन है। मसूरी को ‘पहाड़ों की रानी’ के नाम से भी जानते हैं। किसी भी मौसम में मसूरी घूमना बेस्ट ऑप्शन हो सकता है। लेकिन जब लोग मसूरी घूमने आते हैं, तो यहां की फेमस जगहों को एक्सप्लोर करके चले जाते हैं। लेकिन आपको बता दें कि मसूरी से 137 किमी दूर स्थित बड़कोट जैसी हसीन और शानदार जगह को घूमना भूल जाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बड़कोट की खूबसूरती से लेकर खासियत और यहां पर आसपास मौजूद कुछ शानदार जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं। बता दें कि बड़कोट की हसीन वादियों में घूमने के बाद आप यहां बार-बार आना चाहेंगे।

जानिए कहां है बड़कोट

बड़कोट को कई लोग बरकोट के नाम से भी जानते हैं। यह उत्तराखंड उत्तरकाशी जिले में स्थित एक खूबसूरत और शांत वातावरण वाला गांव है। बड़कोट गांव को यमुनोत्री धाम के पास अंतिम बड़ा कस्बा माना माना जाता है।

बड़कोट मसूरी से 137 किमी की दूरी पर है और यमुनोत्री से यह गांव करीब 50 किमी दूर है। वहीं ऋषिकेश से इस जगह की दूरी 90, हरिद्वार से 173 और देहरादून से यहां की दूरी करीब 137 किमी है।

क्यों फेमस है बड़कोट

समुद्र तल से करीब 2 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित बड़कोट के शांत और बेहद खूबसूरत गांव है। इसको उत्तरकाशी जिले का छिपा हुआ रत्न भी माना जाता है। यहां पर आने के बाद आप खुद को प्रकृति के बेहद करीब महसूस कर पाएंगे।

बड़कोट में आपको घास के मैदान, बादलों से ढके ऊंचे-ऊंचे पहाड़, बड़े-बड़े देवदार के पेड़ और झील-झरने देखने को मिलेंगे। जो यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं। यह जगह अपनी वाइल्ड लाइफ के लिए भी जानी जाती है। सर्दी-गर्मी और मानसून में यहां घूमना सपने से कम नहीं होता है।

पर्यटकों के लिए खास

जिस तरह से मसूरी को पहाड़ों की रानी के नाम से जाना जाता है, उस तरह बड़कोट पहाड़ों के स्वर्ग से कम नहीं है। मसूरी, नैनीताल और ऋषिकेश की भीड़भाड़ से दूर बड़कोट में आप सुकून और हसीन पल बिता सकते हैं। यहां पर न तो गाड़ियों की आवाज सुनाई देगी और न ही लोगों का शोर सुनाई देगा।

बड़कोट खूबसूरती के अलावा अपनी एडवेंचर एक्टिविटी के लिए भी जाना जाता है। यहां पर आप ट्रेकिंग, हाइकिंग और कैंपिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। इसके अलावा बड़कोट की हसीन वादियों के बीच शानदार फोटोग्राफी भी करवा सकती हैं।

बड़कोट में घूमने की जगहें

उपराड़ी गांव

चकर गांव

छतंगा गांव

सरूताल

ऐसे पहुंचे मसूरी बड़कोट

बता दें कि बड़कोट पहुंचना बहुत आसान है। इसके लिए आप मसूरी से कैब, टैक्सी या फिर रेंट पर स्कूटी लेकर पहुंच सकते हैं। मसूरी बस स्टैंड से भी बड़कोट के लिए बस चलती है। अगर आप रेंट पर स्कूटी लेते हैं, तो इसका किराया 500 रुपए के आसपास हो सकता है। यहां पर सबसे पास में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून है।

PAK vs UAE Asia Cup 2025:बॉयकॉट की धमकी के बाद पाकिस्तान ने दिखाया कमजोर रुख, दबाव में आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द

 एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के मैच को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. लेकिन भारत से हारने के बाद ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी सदमे में आ गए हैं और डरकर बैठे हैं. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के खिलाफ मैच से पहले आज मंगलवार, 16 सितंबर को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस कैंसिल कर दी. एक तरफ जहां पाकिस्तान की टीम एशिया कप से बॉयकॉट करने की बात कर रही थी, वहीं पाकिस्तानी कप्तान सलमान अली आगा मीडिया के सवालों से डर रहे हैं.

डर गए सलमान अली आगा?

भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए मैच के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी प्लेयर्स के साथ हाथ नहीं मिलाया. वहीं टॉस के वक्त भी सूर्यकुमार यादव और सलमान अली आगा के बीच हैंडशेक नहीं हुआ. मैच में इस बात को लेकर बवाल किया और रेफरी एंड्रू पायक्रॉफ्ट को हटाने की मांग की और धमकी देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान की इस बात को नहीं माना जाएगा, तब पाकिस्तान यूएई के खिलाफ मैच नहीं खेलेगा, लेकिन आईसीसी ने पाकिस्तान की इस मांग को खारिज कर दिया है.

पाकिस्तान की बात नहीं मानी गई और अब सलमान अली आगा को डर है कि अब जब वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आएंगे, तब उन्हें सवालों के कठघरे में खड़े होना पड़ेगा. भारत-पाकिस्तान मैच के बाद भी सलमान ने अपनी जगह कोच माइक हेसन को भेजा. सलमान आते तो उनसे सूर्यकुमार यादव के हाथ न मिलाने पर सवाल किया जाते, इन सवालों से बचने के लिए पाकिस्तानी कप्तान प्रेस कॉन्फ्रेंस से भाग रहे हैं.

पाकिस्तान बनाम यूएई

पाकिस्तान और यूएई (PAK vs UAE) के बीच मैच बुधवार, 17 सितंबर को खेला जाएगा. इस मैच में से ये फैसला होगा कि ग्रुप ए से भारत के साथ सुपर-4 में कौन सी टीम क्वालीफाई करेगी. जो भी टीम ये मैच जीतेगी, उसका रास्ता सुपर-4 के लिए क्लीयर हो जाएगा. वहीं अगर पाकिस्तान मैच का बॉयकॉट कर देता है, तब यूएई को बिना खेले ही सुपर-4 में एंट्री मिल जाएगी.

पाकिस्तान का दावा: भारत ने मध्यस्थता प्रस्ताव नहीं माना, ट्रंप के सीजफायर वाले दावे हुए सामने।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार मध्यस्थता कराने के दावे की पाकिस्तान ने ही पोल खोल दी. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार कहा कि अमेरिका खुद ही सीजफायर का प्रस्ताव लेकर आया था, लेकिन भारत इस पर राजी नहीं हुआ था.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से हुई बात को लेकर खुलासा किया. इशाक डार के अनुसार मार्को रुबियो ने उनसे कहा था कि भारत सीजफायर के लिए किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि यह दोनों देशों के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा है.

भारत से बातचीत के लिए कई बार पहल की: इशाक डार

अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत से बातचीत के लिए कई बार पहल की. इशाक डार से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान दोनों देशों के बीच तीसरे पक्ष की भागीदारी के लिए तैयार है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “हमें तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भारत स्पष्ट रूप से कह रहा है कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है. जब हम 25 जुलाई को वाशिंगटन में हमने मार्को रुबियो से पूछा कि वार्ता का क्या हुआ तो उन्होंने कहा कि भारत इसे द्विपक्षीय मुद्दा मानता है.“

बातचीत के लिए भीख नहीं मांगेगा: इशाक डार

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस्लामाबाद द्विपक्षीय वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन वह बातचीत के लिए भीख नहीं मांगेगा. उन्होंने कहा, “अगर कोई देश बातचीत चाहता है तो हमें खुशी होगी, लेकिन हम किसी चीज की भीख नहीं मांग रहे हैं. हम एक शांतिप्रिय देश हैं. हमारा मानना ​​है कि बातचीत ही आगे बढ़ने का रास्ता है. जाहिर है कि बातचीत के लिए दो लोगों की जरूरत होती है. हम भारत को बातचीत के लिए मजबूर नहीं कर सकते.”

इशाक डार के बयान से यह पुष्टि हो गई कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की थी. इससे ये भी साफ हो गया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का निर्णय दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच बातचीत के बाद लिया गया.

Sports News :चमत्कार की राह पर बांग्लादेश, तूफानी शुरुआत के बाद ढह गई बल्लेबाजी; अफगानिस्तान को जीत के लिए 155 रन दरकार

बांग्लादेश ने पहले खेलते हुए 154 रन बनाए हैं. यह बांग्लादेश के लिए एशिया कप में करो या मरो का मैच है. इस पारी के पहले 10 ओवरों में बांग्लादेश हावी रही, लेकिन ड्रिंक्स ब्रेक के बाद अफगानिस्तान टीम के गेंदबाज पूरी तरह हावी हो गए. बांग्लादेश टीम अंतिम 10 ओवरों में सिर्फ 67 रन बना पाई. अफगान टीम के लिए राशिद खान और नूर अहमद ने दो-दो विकेट लिए.

धुआंधार शुरुआत के बाद निकला दम

इस मैच में बांग्लादेश ने पहले बैटिंग करने का निर्णय लिया था. सलामी बल्लेबाज सैफ हसन ने 30 रन तो बनाए, लेकिन उनका धीमा स्ट्राइक रेट आगे चलकर टीम पर भारी पड़ा. तंजीद हसन टीम के टॉप स्कोरर रहे, जिन्होंने 31 गेंद में 52 रन बनाए. जब तक तंजीद हसन खेलते रहे, तब तक बल्लेबाजी रन-रेट करीब 9 का रहा था.

बांग्लादेश पहले 10 ओवरों में एक विकेट के नुकसान पर 87 रन बना चुकी थी. कप्तान लिटन दास ने सिर्फ 9 रन बनाए, जबकि तंजीद हसन 52 रन बनाकर आउट हुए. इसके बाद जैसे बांग्लादेश के रन रेट पर ब्रेक ही लग गई थी. आखिरी 10 में सिर्फ एक ओवर ऐसा आया, जिसमें 10 या उससे ज्यादा रन आए हों.

87 रन पर एक विकेट से देखते ही देखते बांग्लादेश टीम का स्कोर 5 विकेट के नुकसान पर 139 रन हो गया था. अंतिम 2 ओवरों में जाकिर अली ने 12 रन और दूसरे छोर से नुरुल हसन ने 6 गेंद में 12 रन की कैमियो पारी खेल बांग्लादेश का स्कोर 150 के पार पहुंचाया.

विशेष रूप से नूर अहमद, कप्तान राशिद खान और अजमतुल्लाह उमरजई ने बांग्लादेश के रन रेट पर लगाम कसने का काम किया. नूर अहमद का इकॉनमी रेट 6 से भी कम का रहा और उन्होंने 2 बहुमूल्य विकेट भी चटकाए. वहीं उमरजई ने 6.30 और राशिद खान ने सिर्फ 6.50 के इकॉनमी रेट से रन दिए.

“ना धौंस चलेगी, ना दबाव…” ट्रंप की NATO को टैरिफ लगाने की मांग पर चीन ने सुनाया करारा जवाब

चीन ने अमेरिका द्वारा G-7 और नाटो देशों से अपने ऊपर और रूस से तेल खरीद रहे अन्य देशों पर शुल्क लगाने की अपील को एक पक्षीय तरीके से “धौंस जमाने’ और “आर्थिक दवाब’ बनाने का कृत्य करार दिया और चेतावनी दी कि यदि अमेरिका की इस अपील पर अमल किया गया तो वह जवाबी कदम उठाएगा. चीन की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब सोमवार को स्पेन में आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर अमेरिका और चीन के प्रतिनिधिमंडल दूसरी बार बैठक कर रहे हैं.

क्या है G-7 और NATO?
G-7 विश्व की सात प्रमुख विकसित और औद्योगिक शक्तियों का एक समूह है जिसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं. उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) एक सैन्य गठबंधन है, जिसमें प्रमुख पश्चिमी देशों ने मिलकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समझौता किया है और इसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली समेत 30 सदस्य देश हैं.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने क्या कहा?
एक नियमित प्रेस वार्ता में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, ‘रूस समेत दुनियाभर के देशों के साथ चीन का सामान्य आर्थिक और ऊर्जा सहयोग पूरी तरह वैध, कानून के अनुरूप है और इसमें कुछ गलत नहीं है.’ प्रवक्ता से इन खबरों के बारे में पूछा गया था कि अमेरिका ने G-7 और नाटो देशों से चीन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की अपील की है क्योंकि वह रूस से तेल खरीद रहा है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिन जियान ने कहा, ‘यह अमेरिका का आर्थिक दबाव बनाने और एकपक्षीय तरीके से धौंस दिखाने वाला कदम है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को कमजोर करता है और वैश्विक उद्योग व आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालता है.’

दबाव और धौंस से समस्याओं का हल नहीं निकलता- चीन
लिन जियान ने कहा, ‘दबाव और धौंस से समस्याओं का हल नहीं निकलता. यूक्रेन संकट को लेकर चीन का रुख स्पष्ट और स्थिर है-समाधान सिर्फ संवाद और समझौते से ही संभव है.’’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए नाटो देशों को चीन पर 50 से 100 प्रतिशत तक का टैक्स लगाना चाहिए और रूस से तेल खरीदना बंद कर देना चाहिए.