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पाकिस्तान में भूकंप के तेज झटके, लोग घरों से बाहर निकले; ताजा हालात देखें

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्किल पर भूकंप की तीव्रता 4.8 दर्ज की गई. इसका केंद्र मुल्तान से 126 किलोमीटर वेस्ट में 55 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था.

पंजाब प्रांत के सभी जिलों में आया भूकंप 

रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी (PDMA) ने बताया कि पंजाब प्रांत के सभी जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. जिसके बाद लोग घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे. भूकंप के झटकों के बाद पूरे पंजाब में प्रशासनिक टीमें इमारतों के नुकसान की जांच कर रही है. पीडीएमए के महानिदेशक ने बताया कि भूकंप के बाद सभी जिला आपातकालीन संचालन केंद्र 24/7 अलर्ट पर हैं.

इस महीने पंजाब प्रांत में दूसरी बार भूकंप

पीडीएमए प्रवक्ता के अनुसार इस महीने पंजाब में यह दूसरा भूकंप है. इससे पहले 4 सितंबर को इन क्षेत्रों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. तब पंजाब, इस्लामाबाद और खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) में 5.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे कई शहरों में दहशत फैल गई और लोग घरों से बाहर निकल गए.

पाकिस्तान भूकंप के लिए दुनिया के सबसे सक्रिय देशों में से एक है. पाकिस्तान में कई बड़े फॉल्ट स्थित हैं, जिसके चलते यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान गिलगिट-बाल्टिस्तान जैसे प्रांत यूरेशियन प्लेट के दक्षिणी किनारे पर स्थित हैं, जिससे यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं.

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में इस मानसून बाढ़ ने काफी तबाही मचाई है. पूर्वी पंजाब प्रांत में आई बाढ़ से करीब 97 लोगों की मौत हो गई और 44 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हुए. PDMA के अनुसार, रावी, सतलुज और चिनाब नदियों का जल स्तर बढ़ने से पूरे प्रांत में 4,500 से ज्यादा गांवों को नुकसान पहुंचा. इस साल 26 जून को शुरू हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ से पाकिस्तान में करीब 900 लोगों की मौत हो गई है और 1182 लोग घायल हुए हैं.

Heart Attack In Women:महिलाओं में हार्ट अटैक के 5 प्रमुख संकेत, इन्हें कभी भी न करें नजरअंदाज

 हमारा शरीर हमेशा संकेत देता है जब कुछ ठीक नहीं होता, लेकिन अगर हम इन संकेतों पर ध्यान नहीं देंगे तो यह बड़ा नुकसान कर सकता है. खासकर महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारी जैसी लगती हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. हार्ट अटैक से पहले शरीर में कई तरह के संकेत दिखते हैं, जैसे चक्कर आना, सांस फूलना, उल्टी जैसी समस्या या शरीर में असामान्य महसूस होना. अगर ये लक्षण थोड़ी देर के लिए होते हैं तो यह किसी और समस्या का संकेत हो सकता है, लेकिन अगर ये लगातार बने रहें तो तुरंत सतर्क हो जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें.

1. पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द

अगर आपको छाती के अलावा किसी और जगह, जैसे पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द या असहजता महसूस होती है, तो यह हार्ट अटैक का चेतावनी संकेत हो सकता है, खासकर महिलाओं में. यह इसलिए होता है क्योंकि इन हिस्सों में और दिल में साझा तंत्रिका मार्ग होते हैं.

2. अचानक चक्कर आना या बेहोशी

अगर आपको अचानक बिना किसी कारण के चक्कर, हल्का सिर या बेहोशी महसूस होती है, तो यह हार्ट की समस्या का संकेत हो सकता है. यह इसलिए होता है क्योंकि दिल से मस्तिष्क तक खून सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा होता.

3. अपच, उल्टी या पेट में दर्द

अक्सर लोग अपच, उल्टी या पेट दर्द को सामान्य पाचन समस्या समझ लेते हैं, लेकिन ये हार्ट अटैक का भी संकेत हो सकते हैं. यह इसलिए होता है क्योंकि जब दिल दबाव में होता है और सही तरीके से काम नहीं कर पाता, तो यह शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित करता है. खासकर पेट और दिल के बीच साझा सिसटम मार्ग होने के कारण यह समस्या दिखाई देती है.

4. छाती में परेशानी या दर्द

छाती में असहजता या दर्द हमेशा अचानक या तीव्र नहीं होता. यह हल्का और कभी-कभी होने वाला भी हो सकता है, और हार्ट अटैक से एक महीना पहले भी दिखाई दे सकता है. इसे एंजाइना कहते हैं. यह इसलिए होता है क्योंकि दिल की मांसपेशियों तक खून की सप्लाई कम हो जाती है, जो ब्लॉक या संकुचित आर्टरी की वजह से होता है.

5. लगातार थकान महसूस होना

थकान एक सामान्य लक्षण है जिसे कई लोग अनुभव करते हैं, लेकिन अगर यह लगातार और गंभीर हो, और आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों या नींद की कमी से समझ में न आए, तो यह हार्ट अटैक का चेतावनी संकेत हो सकता है. यह इसलिए होता है क्योंकि दिल तक खून का प्रवाह कम होने के कारण शरीर में ऊर्जा की कमी रहती है. महिलाओं में हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारी जैसी लगती हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना आसान होता है. लेकिन अगर आप ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण को लगातार महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. शुरुआती पहचान और समय पर इलाज हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Wi-Fi पर रोक, लेकिन मोबाइल डेटा खुला… इस देश ने लिया हैरान कर देने वाला फैसला, जानें वजह।

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने संचार को लेकर एक अजीबोगरीब फैसला लिया है. तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा  के आदेश पर उत्तरी बल्ख प्रांत में फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट यानी वाई-फाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. सरकार ने इस फैसले के पीछे अनैतिकता को रोकने का उद्देश्य बताया है.

साल 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पलटने के बाद यह पहली बार है, जब तालिबान सरकार ने इस तरह का प्रतिबंध लागू किया है. तालिबानी सरकार के इस फैसले से उत्तरी बल्ख प्रांत में स्थित सरकारी कार्याल, निजी क्षेत्र, सार्वजनिक संस्थान और स्थानीय नागरिक के घर वाई-फाई इंटरनेट से वंचित हो गए हैं.

तालिबान सरकार ने फैसले को लेकर क्या दिया बयान?

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने मंगलवार  को कहा कि तालिबान नेता ने अनैतिकता को रोकने के लिए एक अफगान प्रांत में फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट (वाई-फाई) पर बैन लगा दिया है. हालांकि, मोबाइल इंटरनेट पर कोई असर नहीं होगा, यह अभी भी सक्रिय है.

जबकि प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता हाजी अताउल्लाह जैद ने कहा कि नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के पूर्व बैन के आदेश के चलते बल्ख में अब वाई-फाई की सुविधा को बैन किया गया है.

तालिबान सरकार विकसित करेगी वैकल्पिक व्यवस्था

प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता हाजी अताउल्लाह जैद ने बयान जारी कर कहा कि तालिबान के सर्वोच्च नेता ने अनैतिकता को रोकने के लिए उठाया गया है. इसके अलावा, जरूरतों की पूर्ति के लिए देश में हीं एक वैकल्पिक व्यवस्था विकसित की जाएगी.

हालांकि, उन्होंने इस संबंध में विस्तार से कोई जानकारी साझा नहीं की, न हीं उन्होंने इस बारे में कोई स्पष्ट रूप से यह बताया कि वाई-फाई पर बैन लगाने के लिए उत्तरी बल्ख प्रांत को ही क्यों चुना गया या उत्तरी बल्ख के बाद यह कार्रवाई अफगानिस्तान के अन्य प्रांतों में लागू की जाएगी.

कभी-कभी सुरक्षा कारणों से सस्पेंड किया जाता है नेटवर्क

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में अधिकारी की ओर से कभी-कभी सुरक्षा कारणों के चलते, विशेष तौर पर धार्मिक त्योहारों के दौरान, किसी भी संभावित विस्फोटक गतिविधि को रोकने के लिए मोबाइल फोन नेटवर्क को सस्पेंड कर दिया जाता है.

संजय दत्त, गोविंदा और मिथुन चक्रवर्ती में से किसकी नेटवर्थ है सबसे ज्यादा?

बॉलीवुड स्टार्स के फेम और वेल्थ से हर कोई वाकिफ है. बेशुमार फैन्स और ताबड़तोड़ कमाई, लेकिन इसके पीछे लंबा और कभी ना रुकने वाला हार्डवर्क बहुत कम लोगों को दिखाई देता है. आज बॉलीवुड के तीन सितारे की बात करेंगे जिन्होंने अपनी एक्टिंग के दम पर करोड़ों फैन्स का प्यार जीता और बेशुमार संपत्ति भी कमाई.

संजय, मिथुन और गोविंदा में से कौन हैं अमीर?

संजय दत्त, गोविंदा और मिथुन चक्रवर्ती तीनों ही सुपरस्टार हैं और अपने अपने दौर में बॉलीवुड पर राज किया. तीनों ही एक्टर अपनी एक्टिंग, डांस और एक्शन से लाखों दिल जीत चुके हैं. लेकिन पैसे की बात करें तो कौन सबसे आगे है. ये एक सवाल है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनकी नेट वर्थ में काफी फर्क है. कौन हैं सबसे आगे आज आपको बताएंगे

कितनी संपत्ति के मालिक हैं संजय दत्त?

संजय दत्त, जिन्हें ‘खलनायक’ से ‘हीरो’ तक का सफर तय करने वाले एक्टर के तौर पर जाना जाता है. संजय दत्त के स्टाइल और दमदार एक्शन ने उन्हें करोड़ों फैन्स का चहेता बनाया.

  • Financial Express के अनुसारसंजय दत्त की नेट वर्थ लगभग ₹295 करोड़ है. फिल्मों के अलावा प्रोडक्शन हाउस और इनवेस्टमेंट्स से कमाई के अलावा उनके पास कई लग्जरी प्रॉपर्टी भी हैं.
  • मुंबई में 40 करोड़ का घर और दुबई में भी संजय दत्त के पास प्रॉपर्टी हैं। इसके अलावा संजय दत्त के पास सुपर कार्स का शानदार कलेक्शन भी है.

कितनी है गोविंदा की नेटवर्थ?

डांस किंग और कॉमेडी के बादशाह या फिर हीरो नंबर-1, फैन्स चीची के आज भी दीवाने हैं. गोविंदा फिल्मों में अब कुछ खास एक्टिव नहीं हैं. लेकिन पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहते हैं.

  • उनकी नेट वर्थ की बात करें तो ये करीब 170 करोड़ रुपये के आसपास है. फिल्मों से कमाई के अलावा ब्रांड एंडोर्समेंट्स और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट के जरिए गोविंदा कमाई करते हैं.
  • गोविंदा के पास मुंबई, कोलकाता, लखनऊ में लग्जरी प्रॉपर्टीज हैं. इसके अलावा गोविंदा के पास लग्जरी कार्स जैसे मर्सिडीज GLC और टोयोटा जैसे ब्रांड्स कलेक्शन में मौजूद हैं.

मिथुन चक्रवर्ती की नेटवर्थ क्या है?

बॉलीवुड के ‘डिस्को डांसर’ मिथुन चक्रवर्ती एक दौर में बॉलीवुड के दिग्गज स्टार्स में शुमार रहे हैं. जो सालों से अपनी फिल्मों के जरिए फैंस का मनोरजंन कर रहे हैं.

  • डीएनए की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिथुन की नेटवर्थ की बात करें तो ये करीब 4दद करोड़ रुपये से ज्यादा है. कई भाषाओं में साढ़े तीन सौ से ज्यादा फिल्में करने वाले मिथुन अब प्रोडक्शन के जरिए भी कमाई करते हैं.
  • मिथुन के पास मुंबई के मड आईलैंड में शानदार बंगला समेत कई लग्जरी प्रॉपर्टी हैं. वहीं उनके कार कलेक्शन में मर्सिडीज जैसे बड़े ब्रांड्स शामिल हैं.

Women Sleep Problems: अगर दिन में सोने की है आदत, तो हो जाएं सावधान – बढ़ सकता है खतरनाक बीमारी का खतरा!

हाल ही में हुई एक नई स्टडी में पता चला है कि 80 की उम्र की महिलाएं, जिनकी दिन में नींद बढ़ती जाती है, उन्हें डिमेंशिया होने का खतरा दोगुना हो सकता है. हालांकि, यह स्टडी यह साबित नहीं करती कि दिन में नींद लेने से डिमेंशिया होता है, लेकिन यह दोनों के बीच मजबूत संबंध दिखाती है. नींद हमारे दिमाग के लिए बेहद जरूरी है. यह दिमाग को आराम और ऊर्जा देने का समय देती है, जिससे हम सोच सकते हैं और चीज़ें याद रख सकते हैं. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ नींद का पैटर्न बदल सकता है, और यही इस स्टडी का मुख्य विषय था.

स्टडी के बारे में

स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया, सैन फ्रांसिस्को के शोधकर्ताओं ने की थी, जिसका नेतृत्व डॉ. यू लेंग ने किया. इसमें 733 महिलाएं शामिल थीं, जिनकी औसत उम्र 83 साल थी. स्टडी शुरू होने पर इन महिलाओं में कोई भी याददाश्त या सोचने की समस्या नहीं थी. इन महिलाओं को पांच साल तक ट्रैक किया गया.

नींद के पैटर्न और परिणाम

स्टडी के अंत तक, 164 महिलाओं (22 प्रतिशत) को माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट और 93 महिलाओं (13 प्रतिशत) को डिमेंशिया हुआ. नींद के पैटर्न समझने के लिए सभी प्रतिभागियों ने तीन दिन तक अपनी कलाई की डिवाइस पहनी, जिसने उनकी नींद और दिन-रात की दिनचर्या रिकॉर्ड की.

शोधकर्ताओं ने पाया कि पांच साल में आधे से ज्यादा महिलाओं की नींद में महत्वपूर्ण बदलाव आया. उन्हें तीन समूहों में बांटा गया-

स्थिर या थोड़ी बेहतर नींद (44 प्रतिशत)

रात की नींद में गिरावट (35 प्रतिशत)

दिन और रात दोनों में बढ़ती नींद (21 प्रतिशत)

रात की नींद में गिरावट और बढ़ती नींद

रात की नींद में गिरावट वाले समूह में नींद की गुणवत्ता और समय कम हो गया. ये महिलाएं ज्यादा दिन में झपकी लेती थीं और उनकी नींद-जागने की दिनचर्या असामान्य हो गई.
बढ़ती नींद वाले समूह में रात और दिन दोनों में नींद लंबी हो गई, लेकिन उनका नींद का रिदम और बिगड़ गया.

डिमेंशिया का जोखिम

जब शोधकर्ताओं ने डिमेंशिया के जोखिम को देखा, तो बढ़ती नींद वाले समूह में सबसे अधिक जोखिम पाया गया. इस समूह में 19 प्रतिशत महिलाओं को डिमेंशिया हुआ, जबकि स्थिर नींद वाले समूह में यह 8 प्रतिशत और रात की नींद में गिरावट वाले समूह में 15 प्रतिशत था. अन्य कारण जैसे उम्र, शिक्षा, जाति, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती नींद वाले समूह की महिलाओं में डिमेंशिया होने का खतरा स्थिर नींद वाले समूह से दोगुना था. रोचक बात यह है कि रात की नींद में गिरावट वाले समूह में जोखिम में कोई खास बढ़ोतरी नहीं थी.

नींद और बुजुर्गों का स्वास्थ्य

डॉ. लेंग ने कहा कि नींद, झपकी और हमारे शरीर की दिनचर्या केवल पांच साल में भी काफी बदल सकती है. इसलिए बुजुर्गों में दिमागी स्वास्थ्य का अध्ययन करते समय सिर्फ रात की नींद नहीं बल्कि नींद के सभी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है. स्टडी में शामिल अधिकतर प्रतिभागी गोरे थे, इसलिए इसके रिजल्ट सभी जातियों और समूहों पर लागू नहीं हो सकते. भविष्य में ज्यादा विविध और बड़े अध्ययन की आवश्यकता है.

यह रिसर्च U.S. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑन एजिंग द्वारा फंड की गई थी. स्टडी का प्रकाशन Neurology जर्नल में हुआ है. यह अध्ययन बुजुर्ग महिलाओं में दिन-रात की नींद और डिमेंशिया के जोखिम के बीच संबंध को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देता है

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.