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Sports News:भारतीय खिलाड़ियों ने फिर पाकिस्तानियों से नहीं मिलाया हाथ, ‘गन सेलिब्रेशन’ का जीत से दिया जवाब

भारत और पाकिस्तान की ‘नो हैंडशेक कंट्रोवर्सी’ में नया मोड़ आ गया है. यह विवाद लंबा चल सकता है, क्योंकि भारतीय टीम ने सुपर 4 मैच जीतने के बाद भी टीम इंडिया ने पाक प्लेयर्स से हाथ नहीं मिलाया है. इससे पहले जब टॉस हुआ, तब भी भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने सलमान आगा से हाथ नहीं मिलाया था. तिलक वर्मा और हार्दिक पांड्या ने दोनों ग्राउंड अंपायरों से हाथ मिलाया और फिर ड्रेसिंग रूम की तरफ चल दिए.

तिलक वर्मा ने शाहीन अफरीदी की गेंद पर चौका लगाकर भारतीय टीम की 6 विकेट से जीत सुनिश्चित की. जब ग्रुप मैच में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने आए, तब 7 विकेट से जीत के बाद सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे सीधे ड्रेसिंग रूम चले गए थे. सुपर 4 मैच में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी नीति को जारी रखा और पाक प्लेयर्स को पूरी तरह नजरंदाज किया.

‘गन सेलिब्रेशन’ का लिया बदला

इस मुकाबले में पाकिस्तान टीम ने पहले बैटिंग करते हुए 171 रन बनाए थे. इसमें साहिबजादा फरहान की अर्धशतकीय पारी का बड़ा योगदान दिया, जिन्होंने 58 रन बनाए थे. दरअसल फरहान ने 50 रन पूरे करने पर बल्ले को बंदूक की तरह पकड़ कर अपनी फिफ्टी को सेलिब्रेट किया था. उनके इस सेलिब्रेशन को कुछ पाकिस्तानी फैन ऑपरेशन सिंदूर से भी जोड़ने लगे.

भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने ग्रुप स्टेज मैच के बाद ‘हैंडशेक’ ना होने को लेकर बताया था कि यह किसी का व्यक्तिगत नहीं बल्कि टीम का फैसला था. भारतीय टीम ने पाक प्लेयर्स के साथ हाथ ना मिलाकर कहीं ना कहीं उस ‘गन सेलिब्रेशन’ का जवाब दे दिया है.

भारत की 6 विकेट से जीत

ये दोनों टीमों का सुपर 4 चरण में पहला मैच रहा. पाकिस्तान टीम ने पहले बैटिंग करते हुए 171 रन बनाए थे. पाक बल्लेबाजों ने डिफेंड करने लायक स्कोर खड़ा कर दिया था, लेकिन अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल की पावरप्ले में तूफानी बैटिंग ने मैच भारत की झोली में डाल दिया था. 9 ओवरों में ही भारतीय टीम 100 रन के पार जा चुकी थी. अभिषेक शर्मा ने 74 रन और शुभमन गिल ने 47 रन की पारी खेली.

लंबी तानाशाही के दौर के बाद सीरिया में नई शुरुआत, 5 अक्टूबर को होंगे संसदीय चुनाव – जानें बड़ी बातें

सीरिया में दशकों की तानाशाही और एक लंबे गृहयुद्ध के बाद अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नई शुरुआत होने जा रही है. सरकारी समाचार एजेंसी साना (SANA) ने रविवार को पुष्टि की कि देश में 5 अक्टूबर को पहली बार नए प्रशासन के तहत संसदीय चुनाव होंगे. यह चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि पिछले 50 वर्षों से अधिक समय तक असद परिवार ने देश पर कठोर शासन किया था और पिछले दस वर्षों से गृहयुद्ध ने सीरिया को तबाह कर दिया था.

चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत
चुनावी प्रक्रिया का पहला चरण सुप्रीम इलेक्टोरल कमेटी द्वारा शुरू किया गया है. इस कमेटी ने उप-समितियों का गठन किया है जो चुनावी निकायों का चुनाव करेंगी. यही निकाय उम्मीदवारों के आवेदन स्वीकार करेंगे और फिर प्रारंभिक सूची तैयार करेंगे. इसके बाद नागरिकों को इन उम्मीदवारों पर आपत्ति दर्ज करने का अधिकार होगा. आपत्तियों की समीक्षा के बाद अंतिम उम्मीदवार सूची तैयार की जाएगी. इसके बाद चुनावी निकायों के सदस्य मतदान करेंगे, जो पूरी तरह से प्रत्यक्ष और गुप्त तरीके से होगा. मतगणना की जिम्मेदारी उप-समितियों की होगी और उसके बाद प्रारंभिक नतीजे घोषित किए जाएंगे.

संसद की नई संरचना
चुनाव के बाद कुल 210 सदस्यों की पीपल्स असेंबली यानी संसद का गठन होगा. इनमें से एक-तिहाई सदस्य राष्ट्रपति द्वारा सीधे नियुक्त किए जाएंगे, जबकि बाकी सदस्य चुनावी प्रक्रिया से चुनकर आएंगे. अंतिम परिणाम राष्ट्रपति के डिक्री के जरिए अधिसूचित किए जाएंगे और इसके बाद नई संसद का पहला सत्र आयोजित होगा.

असद परिवार के शासन का अंत
यह परिवर्तन सीरिया के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ है. असद परिवार के पांच दशकों से भी अधिक लंबे शासन के अंत के बाद, दिसंबर में विद्रोहियों ने राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से बेदखल कर दिया था. इसके बाद अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने देश की बागडोर संभाली और एक संक्रमणकालीन सरकार बनाई.

लोकतंत्र की ओर पहला कदम
इन चुनावों को सीरिया की जनता के लिए लोकतंत्र और स्थिरता की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है. लंबे समय से तानाशाही, विद्रोह और युद्ध से जूझते रहे इस देश में अब उम्मीद की जा रही है कि राजनीतिक ढांचा स्थिर होगा और नागरिकों को नई सरकार में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का अवसर मिलेगा.

हिज्बुल्लाह पर विजय के बाद शांति की राह पर इज़रायल! सीरिया से वार्ता को लेकर पीएम नेतन्याहू का क्या कहना है?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ मिली निर्णायक जीत ने अब इजरायल के लिए शांति की संभावनाओं के नए रास्ते खोल दिए हैं. नेतन्याहू ने बताया कि इजरायल अपने उत्तरी पड़ोसी देशों, लेबनान और सीरिया, दोनों से संपर्क और बातचीत कर रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी ठोस समझौते तक पहुंचने में अभी समय लगेगा.

सीरिया से सुरक्षा समझौते पर बातचीत
नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा, ‘हम सीरिया के साथ सुरक्षा समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं. इसमें थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन समझौते तक पहुंचने में अभी लंबा रास्ता तय करना है.’ सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि इजरायल और सीरिया के बीच बातचीत आने वाले दिनों में परिणाम दे सकती है. उनका मानना है कि सुरक्षा समझौता जरूरी है और इसमें सीरिया की हवाई सीमा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए.

लेबनान से भी बन रहा संपर्क
नेतन्याहू ने कहा कि लेबनान के साथ भी संपर्क बनाए जा रहे हैं. उनका कहना था कि अगर इजरायल ने उत्तरी मोर्चे पर हिज्बुल्लाह के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल नहीं की होती, तो ऐसी बातचीत संभव ही नहीं थी.

सीरिया की मांगें और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका
सीरिया ने साफ किया है कि किसी भी संभावित समझौते में दो शर्तें अहम होंगी- इजरायल को हवाई हमले रोकने होंगे. दक्षिणी सीरिया में घुसे इजरायली सैनिकों को वापस बुलाना होगा. साथ ही सीरिया चाहता है कि इस समझौते की निगरानी संयुक्त राष्ट्र करे, ताकि उसकी क्षेत्रीय एकता और संप्रभुता सुरक्षित रह सके.

शांति की नई उम्मीद
हालांकि अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, लेकिन हाल की घटनाओं ने संकेत दिए हैं कि लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच इजरायल और उसके उत्तरी पड़ोसियों के बीच शांति की उम्मीदें धीरे-धीरे मजबूत हो रही हैं.

शहबाज शरीफ ट्रंप और मुस्लिम नेताओं संग करेंगे मुलाकात, जानें किन मुद्दों पर होगी चर्चा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र से इतर कुछ मुस्लिम नेताओं के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने रविवार को यह घोषणा की.

कार्यालय ने एक बयान में बताया कि शरीफ न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें वार्षिक सत्र में हिस्सा लेने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल के साथ 22 से 26 सितंबर तक अमेरिका की यात्रा पर रहेंगे. बयान में कहा गया है कि शरीफ के प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री इशाक डार, अन्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे.

इन मुद्दों पर अमेरिका संग शहबाज शरीफ की बात

इसमें कहा गया है, ‘प्रधानमंत्री क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ चुनिंदा इस्लामी नेताओं की बैठक में भी हिस्सा लेंगे.’ बयान के मुताबिक, महासभा में अपने संबोधन में शरीफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लंबे अरसे से लंबित मुद्दों को सुलझाने का आग्रह करेंगे.

इसमें कहा गया है कि शरीफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खास तौर पर गाजा पट्टी में गंभीर संकट की ओर आकर्षित करेंगे और फिलिस्तीनियों की पीड़ा समाप्त करने के लिए निर्णायक कार्रवाई का आह्वान करेंगे. बयान के अनुसार, शरीफ क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, ‘इस्लामोफोबिया’ और सतत विकास सहित अंतरराष्ट्रीय चिंता के अन्य मुद्दों पर पाकिस्तान के दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डालेंगे.

जलवायु कार्रवाई पर विशेष उच्च स्तरीय कार्यक्रम शामिल

इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान कई उच्च स्तरीय कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की महत्वपूर्ण बैठकें, वैश्विक विकास पहल (जीडीआई) की उच्च स्तरीय बैठक और जलवायु कार्रवाई पर एक विशेष उच्च स्तरीय कार्यक्रम आदि शामिल हैं.

बयान में बताया गया है कि शरीफ आपसी हितों के मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए कई विश्व नेताओं और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे. इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र चार्टर को कायम रखने, संघर्ष को रोकने, शांति को बढ़ावा देने और सुरक्षा परिषद के सदस्य के रूप में पाकिस्तान की मौजूदा भूमिका में वैश्विक समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के साथ काम करने के इस्लामाबाद के संकल्प को भी रेखांकित करेंगे.

संयुक्त राष्ट्र के प्रति पाकिस्तान की मजबूत प्रतिबद्धता

बयान में कहा गया, ‘विश्व नेताओं की इस सबसे बड़ी वार्षिक सभा में प्रधानमंत्री की भागीदारी बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र के प्रति पाकिस्तान की मजबूत प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करेगी, शांति और विकास के साझा उद्देश्यों के प्रति देश के दीर्घकालिक योगदान को उजागर करेगी.’

डॉ. राजेश्वर सिंह की कड़ी आपत्ति से बड़ा बदलाव: सीएम योगी ने प्रदेश के इस बड़े अधिकारी क को हटाया, सड़कों व नालियों के लिए ₹200 करोड़ स्वीकृत

  • विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की आपत्ति और चिट्ठी के बाद सीएम योगी ने नगर विकास विभाग की समीक्षा की।
  • राजधानी की दुर्दशा पर नाराज़ होकर मुख्यमंत्री ने नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को तत्काल हटा दिया।
  • लखनऊ की जर्जर सड़कों और नालियों के लिए ₹200 करोड़ की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई।
  • सभी लंबित नगर निगम परियोजनाओं को प्राथमिकता पर मंज़ूरी देने का आदेश दिया गया।
  • जनता ने फैसले का स्वागत किया, राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इसे सख़्त नेतृत्व और जवाबदेही का उदाहरण बताया।

लखनऊ, 21 सितम्बर 2025 : राजधानी लखनऊ की नगर व्यवस्था को लेकर सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की सख़्त आपत्ति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई विशेष मुलाक़ात ने बड़ा असर डाला है। मुख्यमंत्री ने नगर विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराज़गी जताते हुए विभाग के प्रधान सचिव को तत्काल हटाने का आदेश दिया और शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए ₹200 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत कर दी।

विधायक का हस्तक्षेप और कड़ा रुख

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह राजधानी की समस्याओं को लगातार जनता के बीच से उठाते रहे हैं। 28 अगस्त 2025 को उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात कर एक विस्तृत पत्र सौंपा। इस पत्र में उन्होंने साफ़ लिखा कि राजधानी की सड़कों और नालियों की हालत जनता के लिए “असुविधाजनक और शर्मनाक” हो चुकी है। लगातार जलभराव, टूटी सड़कों, रुकी पड़ी परियोजनाओं और नगर विकास विभाग की लापरवाही पर उन्होंने तीखी नाराज़गी व्यक्त की।

पत्र में डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो न केवल जनता को भारी कष्ट झेलना पड़ेगा बल्कि लखनऊ जैसी राजधानी की छवि पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होगा। उनके इस कड़े रुख ने मुख्यमंत्री को तत्काल कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख़्त कार्रवाई

विधायक की आपत्ति और हस्तक्षेप के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत नगर विकास विभाग और नगर निगम की कार्यशैली की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री लखनऊ की दुर्दशा और जलभराव जैसी समस्याओं से बेहद असंतुष्ट थे। उन्होंने यह माना कि राजधानी का यह हाल जनता के साथ-साथ सरकार की छवि के लिए भी हानिकारक है।

मुख्यमंत्री ने निर्णायक कदम उठाते हुए नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को तत्काल प्रभाव से हटा दिया। इसके साथ ही उन्होंने अन्य ज़िम्मेदार अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने साफ़ संकेत दिया कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही सभी लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता पर मंज़ूरी देने और काम को तेज़ गति से पूरा करने के निर्देश जारी किए।

₹200 करोड़ की विशेष स्वीकृति

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा कि मुख्यमंत्री ने लखनऊ के लिए ₹200 करोड़ की विशेष धनराशि स्वीकृत कर दी। यह राशि सीधे राजधानी की बुनियादी समस्याओं को दूर करने में खर्च की जाएगी। सरकार ने तय किया है कि इस राशि का उपयोग जर्जर और टूटी सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफ़ाई और उनकी मज़बूती, तथा त्योहारों से पहले तेजी से विकास कार्यों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

इस कदम से जहां शहर की तस्वीर बदलने की उम्मीद जगी है, वहीं जनता को यह भरोसा भी मिला है कि उनकी आवाज़ पर शीर्ष स्तर पर असर हो रहा है।

जनता और राजनीतिक प्रतिक्रिया

लखनऊ के नागरिकों ने इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि यह सुधार लंबे समय से लंबित था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बरसात के दिनों में जलभराव और गड्ढों से भरी सड़कों ने उनका जीवन मुश्किल बना दिया था। अब मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम दो अहम बातों को उजागर करता है। पहली, डॉ. राजेश्वर सिंह की आक्रामक और जवाबदेही वाली नेतृत्व शैली, जो जनता की समस्याओं को सीधे शीर्ष स्तर पर पहुंचाने में सफल रही। दूसरी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह सख़्त कदम उनके “ज़ीरो टॉलरेंस” और त्वरित शासन के मॉडल को दर्शाता है, जो जनता के बीच उनकी छवि को और मजबूत करता है।

पृष्ठभूमि और पूर्व प्रयास

यह कोई पहला मौका नहीं है जब डॉ. राजेश्वर सिंह ने राजधानी की समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा हो। अगस्त 2024 में भी उन्होंने लखनऊ में जलभराव की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री को विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। उस समय उन्होंने “स्थायी एंटी-वॉटरलॉगिंग मास्टर प्लान” बनाने का सुझाव दिया था। उनकी लगातार कोशिशों और दबाव का ही नतीजा है कि अब राजधानी की मूलभूत समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जा रहा है।

आगे की राह

अब जब मुख्यमंत्री कार्यालय खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा और अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत हो चुकी है, तो आने वाले कुछ हफ्तों में लखनऊ की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। प्रशासनिक फेरबदल, अधिकारियों की जवाबदेही और नए फंड के साथ शहर में बड़े पैमाने पर सुधार कार्य शुरू होंगे। जनता के लिए यह राहत की नई उम्मीद है। साथ ही यह राजनीतिक संदेश भी देता है कि जब कोई विधायक मजबूती से जनता की आवाज़ उठाता है, तो पूरा सिस्टम हरकत में आ जाता है।

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की कड़ी आपत्ति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख़्त कार्रवाई से लखनऊ को एक नई शुरुआत मिली है। प्रशासनिक स्तर पर बदलाव, ₹200 करोड़ की धनराशि और कार्यों की निगरानी का निर्णय राजधानी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह घटनाक्रम न सिर्फ जनता को राहत देगा बल्कि यह भी दिखाएगा कि लोकतंत्र में जब जनप्रतिनिधि ईमानदारी से जनता की बात उठाते हैं, तो बदलाव संभव है।