एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो और पुलिस रिकॉर्ड से जाति का उल्लेख हटेगा
सार्वजनिक स्थलों और वाहनों से जातीय नारे और संकेत हटाए जाएंगे
जाति आधारित रैलियों और सोशल मीडिया गतिविधियों पर प्रतिबंध
SC/ST एक्ट जैसे मामलों में जाति का उल्लेख जारी रहेगा
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार ने जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब पुलिस रिकॉर्ड्स, सरकारी नोटिस बोर्ड, वाहनों और सार्वजनिक स्थलों पर जाति का उल्लेख पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। इस संबंध में मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी विभागों और पुलिस महकमे को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
एफआईआर और पुलिस रिकॉर्ड से हटेगा जाति का उल्लेख
अब किसी भी एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो, या पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी या पीड़ित की जाति का जिक्र नहीं किया जाएगा। पहचान के लिए केवल माता-पिता के नाम दर्ज होंगे। यह व्यवस्था न सिर्फ जातिगत भेदभाव को कम करेगी बल्कि कानूनी प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी बनाएगी।
थानों और सार्वजनिक स्थलों से हटेंगे जातीय संकेत
सरकार ने आदेश दिया है कि सभी थानों, सरकारी दफ्तरों, पुलिस वाहनों और सार्वजनिक नोटिस बोर्डों से जाति-आधारित संकेत, नारे और प्रतीक तुरंत हटाए जाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जाति विशेष चिन्ह लोगों के बीच भेदभाव या असमानता का कारण न बने।
जातीय रैलियों और सोशल मीडिया पर सख्ती
जाति के आधार पर रैली, जुलूस और uप्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी जातीय टिप्पणियों, प्रचार और नारों पर निगरानी रखी जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि जाति के नाम पर समाज में वैमनस्य फैलाने की किसी भी कोशिश पर कठोर कार्रवाई होगी।
SC/ST एक्ट में रहेगी छूट
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि SC/ST एक्ट जैसे संवैधानिक और विशेष मामलों में जाति का उल्लेख जारी रहेगा। इसका उद्देश्य उन वर्गों को न्याय और संरक्षण देना है जिनके लिए यह कानून विशेष रूप से बनाया गया है।
SOP और पुलिस नियमावली में संशोधन
मुख्य सचिव दीपक कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस फैसले को लागू करने के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया जाए। साथ ही, पुलिस नियमावली में भी आवश्यक संशोधन किए जाएंगे ताकि आदेश का पालन हर स्तर पर सुनिश्चित हो सके।
ऐतिहासिक निर्णय की गूंज
कानूनी और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला जातिगत भेदभाव को खत्म करने और समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में सरकार का यह कदम आने वाले समय में सामाजिक समरसता को और मजबूत करेगा।
136 हफ़्तों से लगातार डॉ. राजेश्वर सिंह गाँव-गाँव जाकर जनता की समस्याएँ सुन और हल कर रहे हैं।
बेहटवा शिविर में 31 समस्याओं का समाधान दर्ज हुआ और ग्रामीणों के लिए आयुष्मान कार्ड बनाए गए।
टीएस मिश्रा हॉस्पिटल के सहयोग से स्वास्थ्य शिविर में ग्रामीणों को मुफ्त जांच और 50 चश्मे प्रदान किए गए।
गाँव के 4 मेधावी छात्रों को सम्मानित कर शिक्षा को नई प्रेरणा दी गई।
युवा क्लबों के गठन और खेल किट वितरण से युवाओं को नशे से दूर कर खेल और अनुशासन की राह पर अग्रसर किया गया।
लखनऊ, सितम्बर 2025 : लोकतंत्र की असली पहचान केवल चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता और जनप्रतिनिधि के बीच सतत संवाद और समस्याओं का त्वरित समाधान है। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने इसी सोच को आधार बनाकर “आपका विधायक – आपके द्वार” अभियान की शुरुआत की थी, जो आज लगातार 136 हफ़्तों से गाँव-गाँव में विश्वास, सेवा और समर्पण का प्रतीक बन चुका है।
रविवार को ग्रामसभा बेहटवा इस अभियान के 136वें अध्याय का साक्षी बना, जहाँ डॉ. सिंह ने न सिर्फ ग्रामीणों की समस्याएँ सुनीं, बल्कि उनके समाधान का आश्वासन देकर एक बार फिर यह साबित किया कि राजनीति का असली अर्थ लोकसेवा है।
मेधावी छात्रों का सम्मान: गाँव की शान पहल
शिक्षा के क्षेत्र में भी डॉ. सिंह लगातार प्रयासरत हैं। वे मानते हैं कि किसी गाँव की वास्तविक पहचान उसके मेधावी छात्रों से होती है।बेहटवा में आयोजित शिविर में “गाँव की शान” पहल के तहत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया।सम्मानित छात्रों के नाम और उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं-
वैष्णवी वर्मा – 90.83%
अनुष्का राजपूत – 77%
रघुवंश यादव – 75%
कुणाल वर्मा – (विशिष्ट प्रदर्शन)
इन चारों मेधावियों को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. सिंह ने कहा- “यदि गाँव का मेधावी सम्मानित होगा, तो पूरी पीढ़ी प्रेरित होगी। शिक्षा से ही समाज को नई दिशा मिल सकती है।”
जनता की समस्याओं को प्राथमिकता
शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और अपनी समस्याएँ लेकर विधायक के सामने पहुंचे। डॉ. सिंह की टीम ने प्रत्येक ग्रामीण की बात सुनी और उन्हें गंभीरता से दर्ज कराया। ग्रामीणों द्वारा सड़क और नाली निर्माण, सोलर एवं स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन से जुड़ी समस्याएँ, बिजली कनेक्शन जैसी कुल 31 शिकायतें दर्ज करवाई गईं। इनमें से कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश देकर समाधान प्रक्रिया शुरू कराई गई। साथ ही, शिविर में चार ग्रामीणों के आयुष्मान भारत कार्ड भी बनाए गए, जिससे उन्हें भविष्य में निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें। डॉ. सिंह का यह प्रयास दर्शाता है कि वे समस्याओं को सिर्फ “सुनने” तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका “समाधान” सुनिश्चित करने की ठोस कार्यवाही करते हैं।
स्वास्थ्य शिविर: जनता की सेहत पर विशेष ध्यान
बेहटवा शिविर का सबसे विशेष आकर्षण रहा स्वास्थ्य एवं नेत्र चिकित्सा शिविर, जिसे टीएस मिश्रा हॉस्पिटल के सहयोग से आयोजित किया गया।इसमें दर्जनों ग्रामीणों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण, ब्लड प्रेशर और शुगर की जाँच की गई। साथ ही, नेत्र परीक्षण के बाद 50 ग्रामीणों को नि:शुल्क चश्मे प्रदान किए गए। डॉ. सिंह ने इस अवसर पर कहा- “स्वस्थ नागरिक ही एक मजबूत समाज की नींव रखते हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि गाँव-गाँव में स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ हों।”उनकी यह पहल दिखाती है कि उनका दृष्टिकोण सिर्फ बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव कल्याण और स्वास्थ्य सुरक्षा तक विस्तृत है।
युवा शक्ति और खेलों को बढ़ावा
सरोजनीनगर विधायक युवाओं को गाँव की सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। उनकी सोच है कि यदि युवाओं को खेल और सकारात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ा जाए, तो वे नशे और निराशा से बच सकते हैं।बेहटवा शिविर में उन्होंने 147वाँ और 148वाँ बॉयज़ यूथ क्लब तथा 87वाँ गर्ल्स यूथ क्लब गठित किया। इन क्लबों को क्रिकेट, वॉलीबॉल, फुटबॉल और कैरम की खेल किट प्रदान की गई। डॉ. सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा-“जो खेलता है वही खिलता है, और जो खिलता है वही देश को गढ़ता है। खेल अनुशासन, ऊर्जा और एकता का प्रतीक है।”यह पहल न केवल युवाओं को खेलों से जोड़ती है, बल्कि उन्हें टीम भावना और आत्मविश्वास भी सिखाती है।
ताराशक्ति रसोई: सेवा का अद्भुत उदाहरण
हर जनसंवाद शिविर की तरह बेहटवा में भी ताराशक्ति नि:शुल्क रसोई का संचालन किया गया, जिसमें ग्रामीणों और आगंतुकों को ताज़ा एवं पौष्टिक भोजन प्रदान किया गया। यह रसोई डॉ. सिंह की माता तारा सिंह के नाम से संचालित होती है और हर शिविर में लोगों को भोजन कराकर सेवा और समर्पण का अद्वितीय संदेश देती है। जनप्रतिनिधि और जनता का सीधा जुड़ावशिविर में मंडल अध्यक्ष के.के. श्रीवास्तव, पार्षद राम नरेश रावत, पूर्व मंडल अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम सिर्फ राजनीतिक औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मंच बना जहाँ जनता, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी एक साथ बैठे और समस्याओं के समाधान की राह खोजी।
लोकतंत्र की नई परंपरा
डॉ. राजेश्वर सिंह का यह अभियान अब केवल सरोजनीनगर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में एक आदर्श पहल के रूप में देखा जा रहा है। लगातार 136 हफ़्तों से गाँव-गाँव जाकर समस्याएँ सुनना और हल निकालना अपने आप में लोकतंत्र की जीवंत मिसाल है। यह मॉडल दिखाता है कि यदि जनप्रतिनिधि जनता के द्वार तक पहुँचे, तो लोकतंत्र में विश्वास और गहराई दोनों बढ़ती हैं।
सेवा ही राजनीति का सार
बेहटवा का यह जनसंवाद शिविर साबित करता है कि डॉ. सिंह की राजनीति सत्ता की नहीं, बल्कि सेवा की है। उनका विज़न साफ़ है- “विधायक का कार्यालय किसी इमारत में नहीं, बल्कि जनता के द्वार पर होना चाहिए।”136 हफ़्तों से चल रही यह पहल जनता को यह भरोसा दिला रही है कि उनकी आवाज़ अनसुनी नहीं होगी। आने वाले समय में यह अभियान सामाजिक समरसता, विकास और जनता-जनप्रतिनिधि के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी बनकर उभरेगा।
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि के कोशिकाओं का असामान्य और घातक विकास है. प्रोस्टेट एक अखरोट के आकार का ग्रंथि है, जो यूरिन सिस्टम के नीचे स्थित होता है और स्पर्म ( बनाने का काम करता है. अधिकांश प्रोस्टेट कैंसर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, और शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते. इसलिए शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे उपचार जल्दी शुरू किया जा सकता है और जीवन की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. चलिए इसके पांच साइन के बारे में आपको बताते हैं.
1. यूरिन में बदलाव
प्रोस्टेट कैंसर का सबसे पहला संकेत अक्सर पेशाब की आदतों में बदलाव के रूप में दिखाई देता है. प्रोस्टेट ग्रंथि यूरिन मार्ग (urethra) को घेरे रहती है, और अगर यह ग्रंथि बढ़ती है तो मूत्र के बहाव में समस्या होती है. पुरुषों को निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं-
यूरिन शुरू या रोकना मुश्किल होना
यूरिन का बहाव कमजोर होना या बीच-बीच में रुकना
यूरिन के अंत में थोड़ी बूंदों का रह जाना
यूरिट्रा पूरी तरह खाली न होना
रात में बार-बार यूरिन आना (Nocturia)
ये लक्षण प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने या कैंसर के कारण हो सकते हैं. डॉक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए क्योंकि सामान्य प्रोस्टेट वृद्धि और कैंसर के लक्षण मिलते-जुलते होते हैं.
2. यूरिन या स्पर्म में रक्त
यदि यूरिन या स्पर्म में रक्त दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है. इसे हिमाचुरिया (hematuria) और हीमाटोस्पर्मिया (hematospermia) कहा जाता है. यह प्रोस्टेट कैंसर या अन्य प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है.
3. इरेक्टाइल डिसफंक्शन या दर्दनाक स्खलन
प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण में यौन समस्या भी हो सकती है. इसमें मुख्य रूप से इरेक्टाइल डिसफंक्शन और दर्द के साथ स्खलन शामिल हैं. प्रोस्टेट ग्रंथि और इसके आसपास की नसें यौन क्रियाओं को नियंत्रित करती हैं, और कैंसर इनके कार्य को प्रभावित कर सकता है.
4. पेल्विक क्षेत्र या कमर में दर्द
कुछ मरीजों में पेल्विक क्षेत्र, कमर, कूल्हों और जांघ में लगातार या कभी-कभी दर्द हो सकता है. यह भी प्रोस्टेट कैंसर का प्रारंभिक संकेत हो सकता है. लंबे समय तक या बार-बार होने वाले दर्द की जांच डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.
5. रात में बार-बार पेशाब आना
प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना और ट्यूमर से ब्लैडर में दबाव पड़ना रात में बार-बार यूरिन आने का कारण बन सकता है. यह नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है.
PSA ब्लड टेस्ट का महत्व
PSA (Prostate-Specific Antigen) ब्लड टेस्ट प्रोस्टेट से निकलने वाले प्रोटीन का स्तर मापता है. उच्च PSA स्तर प्रोस्टेट कैंसर का संकेत दे सकता है, हालांकि यह अन्य गैर-कैंसर प्रोस्टेट समस्याओं जैसे बढ़ी हुई ग्रंथि, सूजन या संक्रमण से भी हो सकता है. PSA टेस्ट से डॉक्टर कैंसर का पता लक्षण दिखने से पहले लगा सकते हैं. डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम के साथ PSA टेस्ट मिलाकर कैंसर का पता जल्दी लगाया जा सकता है. विशेष रूप से 50 साल से ऊपर और जिनके परिवार में प्रोस्टेट कैंसर रहा हो, उन्हें नियमित PSA जांच करवानी चाहिए. प्रोस्टेट कैंसर में शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है. यूरिन में बदलाव, रक्त, दर्द, यौन समस्या और रात में यूरिन आने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. PSA ब्लड टेस्ट कैंसर को जल्दी पहचानने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जिससे समय पर उपचार और जीवन रक्षा संभव हो सकती है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
यूटा के एक कॉलेज में 10 सितंबर को हुई चार्ली किर्क की हत्या के बाद रविवार को उनकी श्रद्धांजलि सभा से पहले अमेरिका के एरिजोना राज्य के ग्लेनडेल शहर में स्थित स्टेट फार्म स्टेडियम के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई.
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, लोग सुबह 4:20 बजे से ही अपनी कारों में पहुंचने लगे थे और स्टेडियम के बाहर कई ब्लॉकों तक कारों की लंबी लाइन लग गई. यह श्रद्धांजलि सभा ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के नियम पर आयोजित की जा रही है. स्थानीय पुलिस का मानना है कि इस कार्यक्रम में 1 लाख से अधिक लोग हिस्सा ले सकते हैं.
सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य प्रमुख MAGA सहयोगी दिवंगत रूढ़िवादी कार्यकर्ता को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. ट्रंप ने व्हाइट हाउस से एरिजोना के लिए रवाना होते हुए कहा, ‘हम आज एक महान व्यक्ति के जीवन का जश्न मनाने जा रहे हैं.’ चार्ली किर्क की मृत्यु और राष्ट्रपति ट्रंप के श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
‘होमलैंड सुरक्षा विभाग’ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि सेवा को एजेंसी की सर्वोच्च सुरक्षा रेटिंग दी गई है, जो सुपर बाउल जैसे ‘सर्वोच्च राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों’ के लिए आरक्षित है. रॉयटर्स के अनुसार, आयोजकों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 73,000 से अधिक लोगों की क्षमता वाला स्टेडियम पूरी तरह भर जाएगा और उन्होंने पास के एक अखाड़े में अतिरिक्त जगह की व्यवस्था भी कर ली है.
क्या है चार्ली किर्क हत्या की पूरी घटना?
बता दें कि 10 सितंबर को यूटा के ओरेम स्थित यूटा वैली यूनिवर्सिटी (यूवीयू) परिसर में एक ‘प्रश्नोत्तर सेशन’ के दौरान चार्ली किर्क की हत्या कर दी गई. चार्ली से अमेरिका में सामूहिक गोलीबारी के बारे में सवाल किया जा रहा था, तभी शूटर ने उनकी गर्दन में गोली मार दी.
जांच के दौरान 22 वर्षीय टायलर रॉबिन्सन पर हत्या का आरोप लगाया गया है. जांच एजेंसी का कहना है कि उसने अपने पार्टनर को टेक्स्ट मैसेज में बताया था कि उसने किर्क की हत्या इसलिए की, क्योंकि वह उससे बहुत नफरत करता था. हालांकि इस गोलीबारी से कुछ अमेरिकियों में यह डर बैठ गया है कि ट्रंप इस हत्या पर उपजे आक्रोश का इस्तेमाल अपने आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों की आवाज दबाने के के रूप में कर रहे हैं.
भारत ने पाकिस्तान को एशिया कप सुपर-4 में 6 विकेट से हरा दिया है. टीम इंडिया ने इस मैच को 7 गेंद रहते हुए जीत लिया. भारत को पाकिस्तान ने 172 रनों का लक्ष्य दिया था. टीम इंडिया के लिए ओपनिंग बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और उपकप्तान शुभमन गिल ने आक्रामक बल्लेबाजी की. अभिषेक ने पाकिस्तान के मैच हारने के बाद सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर एक्स्ट्रा इनिंग्स प्रोग्राम में बात करते हुए इस ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के पीछे की वजह बताई. अभिषेक ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के बारे में कहा कि ‘वे लोग हमें लगातार उकसा रहे थे, इसके लिए उन्हें जवाब देना जरूरी था’. अभिषेक ने आगे कहा कि ‘वे लोग लगातार पर्सनल अटैक कर रहे थे, इसलिए उन्हें इसी तरह जवाब देना था’.
पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने दिखा दी औकात
भारतीय टीम के बल्लेबाज जब बैटिंग करने आए, तब अभिषेक शर्मा ने पारी की पहली गेंद पर ही छक्का जड़कर पाकिस्तानी गेंदबाज शाहीन अफरीदी को घुटनों पर ला दिया. वहीं अगले ओवर में शुभमन गिल ने सईम अयूब पर दो चौके जड़े. भारत के इन दोनों युवा बल्लेबाजों की धमाकेदार पारी को देखकर पाकिस्तानी खिलाड़ी तिलमिला उठे और अभिषेक-गिल को उकसाने की कोशिश करने लगे. वहीं भारत के इस सलामी जोड़ी ने पाकिस्तानी गेंदबाजों की बातों का अपने बल्ले से जवाब दिया.
भारत के बल्लेबाजों के सामने जब पाकिस्तानी गेंदबाज अपने खेल से कुछ नहीं कर पा रहे थे, तब उन्होंने मैदान पर ऐसी शर्मनाक हरकत करनी शुरू कर दी. एक तरफ जहां टीम इंडिया के खिलाड़ी पाकिस्तानियों से बात भी करना चाहते, वे जबरदस्ती बात करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन ऐसी शर्मनाक हरकत का भी पाकिस्तान को कोई फायदा नहीं हुआ, वहीं एशिया कप में फिर एक बार भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी.
अभिषेक-गिल ने दिया करारा जवाब
पाकिस्तान के खिलाफ मैच में अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल के बीच 100 रनों से ज्यादा की पार्टनरशिप हुई. अभिषेक शर्मा ने 189.74 के स्ट्राइक रेट से 39 गेंदों में 74 रन बनाए, जिसमें इस धाकड़ बल्लेबाज ने 6 चौके और 5 छक्के मारे. वहीं शुभमन गिल ने भी 167.86 के स्ट्राइक रेट से 28 गेंदों में 47 रनों की दमदार पारी खेली. गिल ने पाकिस्तान के खिलाफ आज के मैच में 8 चौके मारे. भारत के ओपनिंग बल्लेबाजों की इस ताबड़तोड़ बैटिंग को देखकर पाकिस्तान के खिलाड़ी हक्के-बक्के रह गए.