दक्षिण भारतीय फिल्मों के एक्टर और डायरेक्टर धनुष अपनी अपकमिंग फिल्म ‘इडली कढ़ाई’ में एक इडली की दुकान चलाने वाले के रोल में दिखाई देंगे. उन्होंने बताया कि कभी वह एक्टर नहीं, शेफ बनने का सपना देखते थे.
एक्टिंग से ज्यादा शेफ बनने का था जुनून हाल ही में कोयंबटूर में आयोजित एक कार्यक्रम में फिल्म का ट्रेलर लॉन्च हुआ था. इस इवेंट में बोलते हुए धनुष ने कहा, “मुझे नहीं पता क्यों मुझे शेफ की रोल मिलती रहती हैं. मैं खाना बनाना चाहता था. मैं शेफ बनना चाहता था. शायद मेरी ऐसी इच्छा थी, इसलिए मुझे ऐसी फिल्में और रोल मिल रही हैं. उन्होंने आगे कहा, ‘जगमे थांधीराम’ में मैंने पराठे बनाए, ‘तिरुचित्रम्बालम’ में मैं एक डिलीवरी बॉय था. ‘रायन’ में मेरी एक फास्ट फूड की दुकान थी. इस फिल्म में मैं इडली बनाता हूं. जब मैं खुद स्क्रिप्ट लिखता हूं, तब भी मुझे शेफ का रोल मिल जाता है और जब दूसरे डायरेक्टर संपर्क करते हैं तो वह भी मुझे ऐसे ही रोल ऑफर कर देते हैं. शायद यह मेरी अभिव्यक्ति और जुनून की वजह से होता है.”
सपनों पर फोकस करें, उन्हें साकार करें उन्होंने आगे कहा, “आप जो सोचते हैं, वही बन जाते हैं. अभिव्यक्ति की शक्ति मेरे एक्टर बनने के बाद भी मेरे साथ है. युवाओं को जीवन में जो हासिल करना है, उसे साकार करना चाहिए. उन्हें विश्वास होना चाहिए कि जो उन्होंने सोचा था, वह पहले ही हासिल हो चुका है. उन्हें उस सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए. जीवन में कोई भी जो चाहे हासिल कर सकता है. अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते रहें और उस पर काम करते रहें. अपने सपनों को साकार करें और उनके लिए कड़ी मेहनत करें. मैं बस वही कह रहा हूं जो मेरे जीवन में मेरे साथ हुआ.
धनुष ने कहा कि ये एक फैमिली फिल्म है, इसे लोग फैमिली के साथ एंजॉय कर सकते हैं.धनुष की फिल्म ‘इडली कढ़ाई’ 1 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. धनुष ने आकाश भास्करन और डॉन पिक्चर्स के बैनर अंडर इस फिल्म को कंस्ट्रक्ट किया है. फिल्म में नित्या मेनन धनुष के अपोजिट दिखाई देंगी. इस फिल्म को धनुष ने ही डायरेक्ट किया है. फिल्म में धनुष की नानी भी पहली बार एक्टिंग करती दिखाई देंगी.
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा: “युवा कौशल बढ़ाइए, जातिवादी राजनीति को ठुकराइए।”
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भारत में तकनीकी-कौशल वाले कर्मचारियों की गहरी कमी है, 81% कंपनियाँ टेक्निकल स्किल की कमी बता चुकी हैं।
डॉ. Singh ने प्रशिक्षण, डिजिटल सर्टिफिकेशन और इंटर्नशिप-लिंक्ड स्किल प्रोग्राम्स तेज़ करने का आग्रह किया।
उन्होंने चेताया कि जातिवाद नौकरियाँ नहीं देता, असली सशक्तिकरण शिक्षा, कौशल और एकता से आता है।
डॉ. सिंह का नारा: “जातिवाद ज़हर है, कौशल शक्ति है”, और 65% युवाओं के कौशलवान बनते ही भारत की दिशा बदल जाएगी
लखनऊ : “युवा कौशल बढ़ाइए, जातिवादी राजनीति को ठुकराइए।” यही संदेश देते हुए सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर युवाओं और नागरिकों से सीधे संवाद करते हुए स्पष्ट कहा कि भारत का भारत@2047 का सपना कौशल, शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण पर टिका हुआ है, न कि जातिवादी राजनीति पर।
डॉ. सिंह ने अपने संदेश में चेतावनी दी कि जब देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियाँ और अवसर उपलब्ध हैं, तब कंपनियाँ और उद्योग उपयुक्त तकनीकी कौशल वाले युवा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने समाज में जाति के नाम पर फैल रही बनने-बंटवारे वाली राजनीति की कड़ी निंदा की और कहा कि यह युवाओं के भविष्य और राष्ट्र के विकास को रोकने वाली सबसे बड़ी बाधा बन रही है।
समस्या की गंभीरता – आँकड़ों से क्या दिखता है
वर्तमान स्थिति की गंभीरता को समझने के लिए उपलब्ध आँकड़े चिंतास्पद हैं। EY–iMocha (2023) की रिपोर्ट बताती है कि 81% कंपनियाँ कहती हैं कि उनके पास टेक्निकल स्किल वाले कर्मचारी नहीं हैं। NSDC की Skill Gap Study (2024) के अनुसार तेज़ी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में लगभग 2.9 करोड़ कुशल युवाओं की कमी है। TeamLease Digital Report (2024) बताती है कि Generative AI जैसे उभरते क्षेत्र में हर 10 रिक्तियों के लिए केवल 1 इंजीनियर उपलब्ध है। ताज़ा India Skills Report (2025) यह संकेत देता है कि केवल लगभग 42-50% ग्रेजुएट्स ही तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार योग्य आवेदनकर्ता हैं। वहीं TOI (2024) के हवाले से बताया गया कि PMKVY के तहत ट्रेनिंग लेने वालों में से केवल 15% को ही रोजगार मिला।
इन आँकड़ों का मतलब साफ है – मांग बहुत अधिक है और आपूर्ति (कुशल जनशक्ति) कम। नतीजतन नौकरियाँ खाली पड़ी हैं और युवा बेरोज़गार बने हुए हैं, जबकि कुछ नेता जातिगत आधार पर लोगों को बांटकर असल समस्या छिपाने का प्रयास करते हैं।
डॉ. सिंह का संदेश – सख़्ती और समाधान दोनों
डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि “जातिवाद न नौकरी देता है, न अवसर”। उनका मानना है कि अगर युवा सही कौशल सीखकर, डिजिटल टूल्स अपनाकर और आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लैस हो जाएँ तो देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और युवाओं के हाथ में असल अवसर आएंगे। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे खाली वोट बैंक राजनीति में न उलझें, बल्कि तकनीकी प्रशिक्षण, सर्टिफिकेशन और व्यावहारिक कौशल हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाएँ।
साथ ही, डॉ. सिंह ने संस्थानों और उद्योगों से कहा कि वे मिलकर कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक उद्योग-सम्वद्ध बनाएँ, ताकि जो ट्रेनिंग दी जा रही है, वह बाजार की मांग के अनुरूप हो और नौकरियों में तब्दीली का रास्ता खुल सके। उन्होंने कहा कि सरकारों को भी स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण केंद्रों को मजबूत करना चाहिए, और निजी क्षेत्र को आज़माने के लिए ऋण, इन्केंटिव या टैक्स-प्रोत्साहन देना चाहिए ताकि स्किल डेवलपमेंट का पारिस्थितिक तंत्र तेजी से बन सके।
युवाओं और घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर – क्या बदल सकता है
यदि युवा जल्दी से बाजार के अनुरूप कौशल हासिल कर लें तो तीन तरह के लाभ तुरंत दिखेंगे। पहला, बेरोज़गारी घटेगी और युवाओं की आमदनी बढ़ेगी; दूसरा, घरेलू मांग बढ़ेगी जिससे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में निवेश आएगा; तीसरा, देश का वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक avantage बढ़ेगा क्योंकि कंपनियाँ भारत के युवा टैलेंट को हायर करने में विश्वास करेंगी। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुमान भी यही कहते हैं कि कुशल जनशक्ति मिलने से अगले 4-6 क्वार्टर में कंजम्प्शन-ड्रिवन ग्रोथ में बढ़त दिखाई दे सकती है।
डॉ. सिंह ने यह भी आगाह किया कि केवल ट्रेनिंग देना ही काफी नहीं — ट्रेनिंग का मानकीकरण, प्रमाणन, औद्योगिक इंटर्नशिप और प्लेसमेंट-लिंक्ड प्रोग्राम्स जरूरी हैं। उन्होंने PMKVY जैसे सरकारी प्रोग्रामों के सुधार की भी बात उठाई – सिर्फ़ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि रोजगार-निष्पादन को मापना और बेहतर बनाना होगा।
स्थानीय स्तर पर क्या किया जा सकता है – व्यवहारिक सुझाव
डॉ. सिंह ने अपने बयान में स्थानीय और व्यवहारिक कदमों का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत-स्तर और महकमों के साथ मिलकर प्रशिक्षण शिविर, डिजिटल सर्टिफ़िकेशन सेंटर, और कक्षाएँ चलायी जाएँ जिनमें युवा सस्ते या निशुल्क प्रशिक्षण के साथ वास्तविक नौकरी-कौशल सीख सकें। साथ ही, उद्योग-संस्थानों को स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप के अवसर बढ़ाने चाहिए। मीडिया और शैक्षिक संस्थान भी युवाओं के लिए करियर-गाइडेंस और स्किल-मैपिंग को बढ़ावा दें।
डॉ. सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा कि राजनीतिक विमर्श को हटाकर निर्णायक रूप से कौशल पर केंद्रित नीतियाँ बनानी होंगी – तभी भारत तेज़ी से विकसित राष्ट्र बनने का मार्ग तय कर पाएगा।
एक सार्थक अपील
डॉ. राजेश्वर सिंह का संदेश सरल और सशक्त है – जातिवाद ज़हर है, कौशल शक्ति है। यदि युवा आज़ अपने कौशल में निवेश करें, डिजिटल टूल्स अपनाएँ और उद्योग-समर्थन वाली प्रशिक्षण योजनाओं का लाभ उठाएँ, तो न सिर्फ़ उनकी व्यक्तिगत दशा बदलेगी बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूती से आगे बढ़ेगी। उन्होंने युवाओं से एकजुट होकर अपनी ऊर्जा कौशल में लगाने का आह्वान किया और कहा कि तब कोई शक्ति भारत को विकसित भारत@2047 बनने से नहीं रोक सकती।
कानपुर, 22 सितम्बर: कानपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में कैंसर और पीलिया की गंभीर समस्या से ग्रसित महिला की सफलतापूर्वक व्हिपल्स सर्जरी की गई। 55 साल की एक महिला, जिन्हें पीलिया और तेज़ बुखार की समस्या थी, जाँच में पता चला कि उन्हें पेरिअम्पुलरी कार्सिनोमा है। इसके कारण उनकी पित्त नली बंद हो गई थी और गंभीर संक्रमण (एक्यूट कोलेंजाइटिस) हो गया था। इस कठिन परिस्थिति में अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ने महिला का इलाज कर उन्हें स्वस्थ कर डिस्चार्ज किया।
डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी करने की बजाय पहले उनका पीलिया और संक्रमण नियंत्रित किया। इसके लिए एंडोस्कोपी के जरिए ई.आर.सी.पी स्टेंटिंग की गई और उन्हें एंटीबायोटिक्स दिए गए। इसके बाद उनका खास ख्याल रखा गया ताकि शरीर मजबूत हो सके। उन्हें पौष्टिक आहार, फिजियोथेरेपी और हल्का व्यायाम कराया गया। चार हफ्तों में उनका वजन 5 किलो बढ़ा और सामान्य स्वास्थ्य में सुधार हुआ।
इसके बाद डॉक्टरों ने उनकी व्हिपल्स सर्जरी (पैंक्रियाटिकोडुओडेनेक्टॉमी) की। यह एक बहुत जटिल ऑपरेशन है, जो लगभग 8 घंटे चला। इसमें पैंक्रियास का सिर, ड्यूडेनम, पेट का एक हिस्सा और जीजूनेम निकाला गया और फिर पैंक्रियास, बाइल डक्ट और शेष पेट को छोटी आंत से जोड़ा गया। सर्जरी के बाद मरीज को आई.सी.यू में रखा गया और चौथे दिन से उन्होंने सामान्य भोजन लेना शुरू किया। उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हुआ।
डॉ. साद अनवर, कंसल्टेंट, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड जी. आई कैंसर सर्जरी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर ने कहा कि, “व्हिपल्स सर्जरी एक बड़ी और जटिल ऑपरेशन है, जो मुख्य रूप से पैंक्रियाज़ (अग्न्याशय) के कैंसर या आसपास की गंभीर बीमारियों में किया जाता है। इसमें डॉक्टर पैंक्रियाज का आगे का हिस्सा, छोटी आंत का पहला हिस्सा (ड्यूडेनम), पित्त की थैली और कभी-कभी पेट का एक छोटा हिस्सा निकाल देते हैं। इसके बाद बचे हुए अंगों को आपस में जोड़कर नया रास्ता बनाया जाता है ताकि खाना पचने की प्रक्रिया जारी रह सकें। मरीज को पहले शारीरिक और पोषण की दृष्टि से तैयार करने से परिणाम बेहद अच्छे आ सकते हैं। यह सफलता इसी का उदाहरण है कि सही इलाज से मरीज सुरक्षित और जल्दी स्वस्थ हो सकते हैं।”
22 सितंबर से GST की नई दरें लागू, पनीर, घी, साबुन, शैंपू, कार और AC सस्ते होंगे।
अब केवल दो स्लैब होंगे – 5% और 18% – टैक्स सिस्टम को आसान बनाने के लिए।
होटल, जिम, फ्लाइट टिकट और सिनेमा टिकट पर भी GST घटाया गया, 100 रुपए तक की टिकटों पर 5% टैक्स लगेगा।
शौक और विलासिता की चीजों जैसे पान मसाला, तंबाकू और कुछ कार-बाइक्स पर 40% टैक्स लागू होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अर्थशास्त्रियों के अनुसार, GST रिफॉर्म से आम आदमी को राहत, खरीदारी क्षमता बढ़ेगी और GDP ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।
नई दिल्ली/लखनऊ, 22 सितंबर 2025 : आम आदमी और कारोबार जगत के लिए बड़ी राहत की खबर है। आज यानी 22 सितंबर से जीएसटी (GST) की नई दरें लागू हो गई हैं। अब जरूरत के सामानों से लेकर लग्जरी प्रोडक्ट्स तक पर टैक्स स्ट्रक्चर बदल चुका है। सरकार ने 3 सितंबर को जीएसटी दरों में कटौती और पुनर्गठन का ऐलान किया था, जो आज से पूरे देश में लागू हो गया है।
अब केवल दो प्रमुख स्लैब – 5% और 18%
सरकार ने टैक्स सिस्टम को सरल बनाने के उद्देश्य से जीएसटी स्लैब को नया रूप दिया है। पहले 5%, 12%, 18% और 28% जैसे कई स्लैब थे, लेकिन अब केवल दो प्रमुख स्लैब रहेंगे – 5% और 18%। इस बदलाव का सीधा असर रोजमर्रा की जरूरत की चीजों और बड़ी खरीदारी पर पड़ेगा।
रोजाना इस्तेमाल की चीजें सस्ती हुईं
पनीर, घी, UHT दूध, साबुन, शैंपू और डिटर्जेंट जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें अब पहले की तुलना में सस्ती हो गई हैं। पहले इन प्रोडक्ट्स पर 12% या 18% जीएसटी लगता था, जिसे घटाकर अब केवल 5% कर दिया गया है। इसका असर सीधा-सीधा आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा। हालांकि कंपनियों और रिटेलर्स ने अभी तक नए एमआरपी पूरी तरह घोषित नहीं किए हैं। लेकिन माना जा रहा है कि मार्केट में इन प्रोडक्ट्स की वास्तविक कीमतें और भी कम होंगी क्योंकि कंपनियां अतिरिक्त डिस्काउंट भी देंगी।
होटल, जिम और सर्विसेज पर राहत
जीएसटी काउंसिल ने केवल प्रोडक्ट्स ही नहीं बल्कि सेवाओं पर भी टैक्स घटाया है। होटल रूम, जिम, ब्यूटी पार्लर और हेल्थ सर्विसेज जैसी सेवाओं पर टैक्स 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी और वेलनेस इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा।
1000 रुपए तक के होटल कमरे पहले की तरह टैक्स फ्री ही रहेंगे।
1000 से 7500 रुपए तक के होटल रूम पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
वहीं 7500 रुपए से ऊपर के प्रीमियम होटल रूम पर 18% टैक्स लागू होगा।
सिनेमा प्रेमियों के लिए भी अच्छी खबर है। अब 100 रुपए तक की टिकट पर केवल 5% जीएसटी लगेगा, जो पहले 12% था। वहीं 100 रुपए से ज्यादा कीमत वाली टिकट पर 18% टैक्स लगेगा। इससे सिनेमा टिकट भी अपेक्षाकृत सस्ते हो जाएंगे।
कार और AC की खरीद पर फायदा
जिन लोगों की योजना कार या AC खरीदने की है, उनके लिए भी यह खबर राहत की है। अब गाड़ियां और इलेक्ट्रॉनिक्स पहले से सस्ते मिलेंगे। पहले इन पर जीएसटी के साथ अतिरिक्त सेस भी जुड़ा हुआ था, जिसकी वजह से कुल टैक्स 45% तक चला जाता था। अब इसे घटाकर 40% कर दिया गया है।
1200 सीसी से अधिक इंजन वाली और 4 मीटर से लंबी पेट्रोल कारों पर 40% टैक्स लगेगा।
1500 सीसी से अधिक इंजन वाली और 4 मीटर से लंबी डीजल कारों पर भी 40% टैक्स लगाया जाएगा।
350 सीसी से बड़ी मोटरसाइकिलें भी इसी टैक्स स्लैब में आएंगी।
इससे बड़ी गाड़ियां और लग्जरी टू-व्हीलर्स पहले से सस्ते हो जाएंगे।
विलासिता के सामान और तंबाकू महंगे
हालांकि हर चीज सस्ती नहीं होगी। पान मसाला, तंबाकू और कुछ लग्जरी प्रोडक्ट्स के लिए सरकार ने नया 40% का टैक्स स्लैब बनाया है। पहले इन पर 28% जीएसटी और 17% तक सेस लगता था। अब टैक्स स्ट्रक्चर को आसान करते हुए इसे सीधे 40% कर दिया गया है। यानी तंबाकू और पान मसाला जैसी चीजें महंगी बनी रहेंगी।
अर्थव्यवस्था पर असर
सरकार का दावा है कि जीएसटी 2.0 से आम आदमी को राहत मिलेगी, बिजनेस करना आसान होगा और देश की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विशाखापट्टनम में आयोजित “नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म्स” कार्यक्रम में कहा कि इन बदलावों से करीब 2 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त इकोनॉमी में आएंगे।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने कहा कि जीएसटी में सुधार से लोगों के हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे, जिससे डिमांड और प्रोडक्शन का चक्र मजबूत होगा और जीडीपी की ग्रोथ तेज होगी। वहीं अर्थशास्त्री गरीमा कपूर का कहना है कि ये रिफॉर्म्स खपत (कंजम्प्शन डिमांड) को अगले 4 से 6 क्वार्टर्स में 1% से 1.2% तक बढ़ा देंगे, जिससे जीडीपी ग्रोथ को सीधा बूस्ट मिलेगा।
कुल मिलाकर, जीएसटी की नई दरें आम आदमी की जेब पर बोझ कम करने वाली हैं। रोजमर्रा की चीजें सस्ती हुई हैं, जबकि लग्जरी और तंबाकू उत्पादों को महंगा रखा गया है। सरकार का मकसद टैक्स स्ट्रक्चर को आसान करना और अर्थव्यवस्था को तेज़ी से आगे बढ़ाना है।
ACCMAN Institute of Management ने Finance Conclave 2025 का आयोजन किया।
थीम रही “Sustainable Banking and Finance: Forging Ahead with Responsibility”।
दो पैनल डिस्कशन्स में बैंकों की चुनौतियों और जीएसटी पर गहन विमर्श हुआ।
वाद-विवाद और लेख प्रस्तुति में छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
विजेताओं को 6 पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
ग्रेटर नोएडा/लखनऊ : उत्तर भारत के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में शुमार ACCMAN Institute of Management ने शनिवार, 20 सितंबर 2025 को अपने नॉलेज पार्क-III, ग्रेटर नोएडा स्थित परिसर में Finance Conclave 2025 का सफल आयोजन किया।
इस वर्ष का कॉन्क्लेव “Sustainable Banking and Finance: Forging Ahead with Responsibility” थीम पर आधारित रहा। आयोजन का उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और भावी प्रबंधन पेशेवरों को एक साझा मंच प्रदान करना था, ताकि वे बदलते समय की चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श कर सकें।
ACCMAN का यह वार्षिक आयोजन वर्षों से वित्त और बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक बेंचमार्क इवेंट माना जाता है। इस बार के कॉन्क्लेव में देशभर के प्रतिष्ठित कॉलेजों से लगभग 50 प्रतिभागियों ने शिरकत की। आयोजन ने न केवल अकादमिक दृष्टि से छात्रों को लाभ पहुँचाया, बल्कि उन्हें उद्योग जगत की वास्तविक चुनौतियों से परिचित भी कराया। निदेशक डॉ. कृति गुलाटी ने स्वागत भाषण में कहा कि यह कॉन्क्लेव छात्रों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहाँ वे उद्योग विशेषज्ञों से सीधा संवाद कर सकते हैं और अपने विचारों को निखार सकते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कॉन्क्लेव की शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई, जहाँ डॉ. कृति गुलाटी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार यह आयोजन वित्तीय शिक्षा को नई दिशा देगा। इसके बाद श्री आलोक जैन ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने वित्तीय क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों और जिम्मेदारीपूर्ण बैंकिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाला समय ‘सस्टेनेबल फाइनेंस’ का होगा।
पब्लिक सेक्टर बैंकों पर पहला पैनल डिस्कशन
पहला पैनल “पब्लिक सेक्टर बैंकों का मौलिक विश्लेषण” विषय पर आधारित रहा। इसमें बिजनेस टुडे टेलीविज़न के श्री शैलेन्द्र भटनागर, STOX the Money™ के सीए अजय सिंगल, SAP FICO कंसल्टेंट एवं रजिस्टर्ड वैल्यूअर सीए आलोक जैन तथा संस्थान के पूर्व छात्र एवं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी श्री दीपक शर्मा शामिल रहे। पैनल का संचालन BIZ Tak के श्री रजत देवगन ने किया। चर्चा में बैंकों की वित्तीय स्थिति, तकनीकी बदलाव, डिजिटलीकरण और पब्लिक सेक्टर बैंकों के भविष्य को लेकर गंभीर विमर्श हुआ।
जीएसटी और भारतीय अर्थव्यवस्था पर दूसरा पैनल
दूसरे पैनल का विषय था “जीएसटी और इसका भारतीय बैंकिंग, व्यवसाय एवं अर्थव्यवस्था पर प्रभाव”। इसमें सीए राजेंद्र अरोड़ा, सीए मोहित चौधरी, सीए हरीश के. चौधरी और सुश्री स्वाति राय ने अपनी विशेषज्ञ राय साझा की। पैनल का संचालन सीए श्वेता सिंह ने किया। वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार जीएसटी ने टैक्स सिस्टम को सरल बनाया, व्यापार जगत को पारदर्शिता दी और भारतीय अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने में मदद की। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इसके क्रियान्वयन में अभी भी सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।
युवाओं की ऊर्जा: वाद-विवाद और लेख प्रस्तुति
कॉन्क्लेव का एक प्रमुख आकर्षण रहा वाद-विवाद प्रतियोगिता और लेख प्रस्तुति सत्र। वाद-विवाद का विषय था “जीएसटी ने भारत में व्यापार करना आसान बना दिया है”। प्रतिभागियों ने पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखते हुए जीएसटी के विभिन्न आयामों पर गहराई से चर्चा की। वहीं, लेख प्रस्तुति का विषय रहा “वित्त और बैंकिंग में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: युवा पेशेवरों के लिए अवसर”। छात्रों ने अपने शोध और दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए बताया कि कैसे डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक और एआई जैसी तकनीकें भविष्य की दिशा तय करेंगी।
समापन और पुरस्कार वितरण
कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण समारोह से हुआ। इस अवसर पर देश के सुप्रसिद्ध सीए एवं बालिभद्र फाउंडेशन के ट्रस्टी राजीव सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने युवाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नए भारत की वित्तीय सोच को मजबूत करते हैं। निदेशक डॉ. कृति गुलाटी ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि ACCMAN का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों को भविष्य के वित्तीय नेताओं के रूप में तैयार करना है।
वाद-विवाद और लेख प्रस्तुति में विजेताओं को कुल 6 पुरस्कार दिए गए। पुरस्कार पाकर प्रतिभागियों के चेहरे खुशी से चमक उठे। यह क्षण कॉन्क्लेव की सफलता और छात्रों की प्रतिभा का जीवंत उदाहरण रहा।
ACCMAN Finance Conclave की भविष्य दृष्टि
इस अवसर पर संस्थान ने घोषणा की कि ACCMAN Finance Conclave आने वाले वर्षों में भी वित्तीय क्षेत्र में विचार-विमर्श और नवाचार का प्रमुख मंच बना रहेगा। यह आयोजन न केवल छात्रों को अवसर देता है, बल्कि उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सेतु का काम करता है।