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इस शहर में मोबाइल पर कड़ी पाबंदी, नगर पालिका ने तय किया केवल 2 घंटे का इस्तेमाल

जापान के आइची प्रान्त की टोयोके नगरपालिका ने एक अध्यादेश जारी कर सभी निवासियों से स्मार्टफोन के उपयोग को सीमित करने के लिए कहा है. स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को बताया कि टोयोके की नगरपालिका सभा ने सभी निवासियों के लिए दैनिक अवकाश-संबंधी स्क्रीन टाइम को दो घंटे तक सीमित करने वाला एक अध्यादेश पारित किया है.

इस अध्यादेश का उद्देश्य स्मार्टफोन, पर्सनल कंप्यूटर और टैबलेट उपकरणों के अत्यधिक उपयोग को रोकना है. इसे असेंबली के पूर्ण सत्र में बहुमत से पारित किया गया. 1 अक्टूबर से प्रभावी, यह स्थानीय कानून मार्गदर्शन के रूप में कार्य करता है. ये छात्र, ऑफिस वर्कर्स या घरेलू काम कर रहे लोगों पर लागू नहीं होता. साथ ही इस अध्यादेश का उल्लंघन करने वालों के लिए कोई दंड का प्रावधान भी नहीं है.

स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग डाल रहा नींद में खलल

टोयोके के मेयर मासाफुमी कोउकी के हवाले से जापान टाइम्स ने कहा कि यह अध्यादेश शहर के निवासियों के स्वास्थ्य संबंधी उपायों का केवल एक हिस्सा है. इसका मकसद निवासियों को यह बताना है कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग उनकी नींद में भी खलल डाल रहा है.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हम स्मार्टफोन को अस्वीकार नहीं कर रहे हैं. यह अध्यादेश परिवारों के बीच आपसी संवाद को बढ़ाने के लिए भी बनाया गया है और प्राथमिक विद्यालय के छात्रों और छोटे बच्चों के लिए रात 9 बजे के बाद और जूनियर हाई स्कूल के छात्रों और 18 वर्ष से कम उम्र के अन्य बच्चों के लिए रात 10 बजे के बाद स्मार्टफोन और अन्य गैजेट्स के इस्तेमाल से परहेज करने का आह्वान करता है.’

अध्यादेश की समीक्षा करने का आह्वान

जापानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ‘कुछ निवासियों ने तर्क दिया है कि नगरपालिका को पारिवारिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए, जबकि अन्य ने इस कदम को परिवार के सदस्यों के साथ चर्चा के अवसर के रूप में लिया है. नगरपालिका असेंबली ने एक पूरक प्रस्ताव भी पारित किया है, जिसमें शहर से नियमित आधार पर इसके प्रभावों और निवासियों की राय की जांच करने के बाद आवश्यकता पड़ने पर अध्यादेश की समीक्षा करने का आह्वान किया गया है.’

निप्पॉन टेलीविजन नेटवर्क (एनटीवी) के अनुसार, पिछली चर्चाओं के दौरान, अध्यादेश का समर्थन करने वाले परिषद सदस्यों ने भी बार-बार कहा कि निवासियों को दिया गया स्पष्टीकरण अपर्याप्त था.  रिपोर्ट के अनुसार, ‘नगर परिषद ने एक पूरक प्रस्ताव भी पारित किया, जिसमें निवासियों की जीवनशैली और घरेलू वातावरण की विविधता का सम्मान करने और गलतफहमी से बचने के लिए स्पष्ट और संक्षिप्त जानकारी प्रदान करने के उपाय शामिल हैं.’

Sports News:कामिंदु मेंडिस ने संभाली श्रीलंका की लाज, करो या मरो मुकाबले में खेली 133 रनों की पारी, पाकिस्तान के लिए टूर्नामेंट का दरवाज़ा बंद

श्रीलंका ने पहले खेलते हुए पाकिस्तान के सामने 134 रनों का लक्ष्य रखा है. ये दोनों टीमों के लिए करो या मरो का मैच है. छोटा लक्ष्य मिलने से पाकिस्तान की फाइनल में जाने की उम्मीद बढ़ गई है, क्योंकि आज जीतने वाली टीम ही फाइनल की दौड़ में बनी रहेगी. पाकिस्तान की ओर से शाहीन अफरीदी और हुसैन तलत ने घातक स्पेल डाले, जिन्होंने श्रीलंकाई बैटिंग लाइन-अप की कमर तोड़ कर रख दी. हालांकि कामिंदु मेंडिस की अर्धशतकीय पारी ने कम स्कोर पर ऑलआउट होने से बचाया

पाकिस्तान टीम को शाहीन अफरीदी ने आदर्श शुरुआत दिलाई, जहां उन्होंने 8 गेंदों के अंतराल में 2 विकेट चटकाए. उसके बाद कुसल परेरा और चरिथ असालंका ने एकसाथ 25 रन जोड़ लिए थे और बड़ी पार्टनरशिप की ओर आगे बढ़ रहे थे, लेकिन हारिस रऊफ ने परेरा को आउट करके इस पार्टनरशिप का अंत किया. उसके बाद हुसैन तलत ने 8वें ओवर में लगातार गेंदों पर चरिथ असालंका और दासुन शनाका को चलता किया.

कामिंदु मेंडिस ने बचाई लाज

कामिंदु मेंडिस तब बैटिंग करने आए, जब श्रीलंका के 3 विकेट 43 रन पर गिर गए थे. दूसरे छोर से लगातार विकेट गिर रहे थे और देखते ही देखते 80 रन तक 6 बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे. ऐसे में कामिंदु मेंडिस की 50 रनों की पारी ने श्रीलंका की इज्जत बचाई. चामिका करुणारत्ने ने चाहे सिर्फ 15 रन बनाए, लेकिन उनके क्रीज पर टिके रहने के कारण ही श्रीलंकाई टीम पूरे 20 ओवर खेल पाई.

क्या पाकिस्तान होगा बाहर?

श्रीलंका ने अबू धाबी की स्लो पिच पर 133 रनों का स्कोर खड़ा कर दिया है. श्रीलंका के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए भी यह मैच जीतना बहुत जरूरी है. भयंकर गर्मी में यह पाक बल्लेबाजों के लिए बहुत कठिन लक्ष्य साबित हो सकता है. अगर पाक टीम इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाती है तो वो एशिया कप से लगभग बाहर हो जाएगी.

पाकिस्तान के लिए सबसे ज्यादा विकेट शाहीन अफरीदी ने लिए, जिन्होंने 3 बल्लेबाजों को आउट किया. हारिस रऊफ औरहुसैन तलत ने दो-दो विकेट चटकाए. अबरार अहमद ने 4 ओवरों के स्पेल में सिर्फ 8 रन देकर एक विकेट लिया.

संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान ही लोकतंत्र की असली ताक़त है – डॉ. राजेश्वर सिंह

  • डॉ. सिंह ने कहा कि लोकतंत्र तभी मज़बूत होगा जब उसकी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया जाएगा।
  • उन्होंने न्यायपालिका, चुनाव आयोग और सशस्त्र बलों पर हमलों को “भारत पर हमला” बताया।
  • राजनीतिक लाभ और सस्ती लोकप्रियता के लिए संस्थाओं पर आरोप लगाने वालों को गैर-जिम्मेदार करार दिया।
  • कहा कि भारत के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बाहर से नहीं, भीतर से है।
  • जनता से अपील: “संविधान की रक्षा करने वाली संस्थाओं के साथ खड़े हों, उन्हें कमज़ोर करने वालों को ठुकराएँ।”

लखनऊ : सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक सशक्त संदेश जारी करते हुए संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे निराधार हमलों को लोकतंत्र और राष्ट्रहित के लिए ख़तरनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि “लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब उसकी संस्थाओं का सम्मान और सशक्तिकरण हो, न कि उन्हें कमज़ोर और उपहास का पात्र बनाया जाए।”

संस्थाएँ लोकतंत्र की आत्मा

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत के लोकतंत्र की असली मजबूती उसकी स्वतंत्र और तटस्थ संस्थाओं में है। न्यायपालिका, चुनाव आयोग, सशस्त्र बल और ऑडिट संस्थाएँ — ये सभी किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से ऊपर हैं। “इन पर हमला केवल संस्थाओं पर नहीं, बल्कि पूरे भारत पर हमला है। अगर जनता अपने ही संस्थानों पर विश्वास खो दे, तो लोकतंत्र की नींव हिल जाती है।”

सस्ती लोकप्रियता के लिए हमला अस्वीकार्य

डॉ. सिंह ने उन नेताओं पर कटाक्ष किया जो राजनीतिक लाभ और सस्ती लोकप्रियता के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग बिना सोचे-समझे संस्थाओं की विश्वसनीयता पर उंगली उठाते हैं, वे सिर्फ़ प्रतिष्ठा ही नहीं बिगाड़ते, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास को भी चोट पहुँचाते हैं। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि चरम स्तर की गैर-जिम्मेदारी है।”

भीतर से बड़ा ख़तरा

अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बाहर से नहीं बल्कि भीतर से है। उन्होंने कहा कि कुछ त्रुटियों के आधार पर पूरे संस्थागत ढाँचे को कटघरे में खड़ा करना बेईमानी और राष्ट्र के लिए घातक है। “गैर-जिम्मेदार आलोचना कमज़ोर राजनीतिज्ञों का हथियार है, जो लोकतंत्र के प्रहरी संस्थानों का मनोबल तोड़ती है। यह आचरण केवल उन ताक़तों को मज़बूत करता है जो भारत को बँटा हुआ और अस्थिर देखना चाहती हैं।”

जनता से सीधा संदेश

डॉ. सिंह ने युवाओं और आम जनता से आह्वान किया कि वे ऐसी राजनीति को ठुकराएँ जो लोकतंत्र को कमज़ोर करती है। उन्होंने कहा, “हर आलोचना से पहले खुद से पूछें – क्या यह भारत को मज़बूत कर रही है या शत्रुओं का मनोबल बढ़ा रही है? अगर जवाब ‘कमज़ोर करना’ है, तो चुप रहना बेहतर है।”

उन्होंने जनता को चेताते हुए कहा कि इतिहास गवाह है—राष्ट्र बाहर से नहीं, बल्कि भीतर की ग़द्दारी से ढहते हैं। “जो आज संस्थाओं का उपहास करते हैं, कल उन्हें उसी लोकतंत्र के मलबे पर खड़ा होना पड़ेगा जिसे वे बचाने का दावा करते हैं।”

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का जादू, इन 4 शहरों में मनाएं यादगार नवरात्रि

नवरात्रि का पर्व की शुरुआत हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा केवल त्योहार नहीं है, यह एक भावना है जो हर गली, आंगन और समुदाय में देखने को मिलती है। ढाक के नगाड़ों की गूंज और पंडालों की मनमोहक कलात्मकता के साथ चमक के साथ, यह राज्य एक जीवंत मंच में बदल जाता है जहां भक्ति और क्रिएटिविटी का मिलन होता है। हर यात्रियों को अपनी त्योहारी यात्रा की योजना बनाने में हम आपकी मदद करने के लिए जा रहे हैं। इस लेख में हम आपको बताएंग बंगाल के 4 फेमस जगहें, जहां पर आप दुर्गा पूजा की भक्ति में डूब सकते हैं।

कोलकाता 

इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है क्योंकि कोलकाता दुर्गा पूजा उत्सवों का केंद्र माना जाता है। इस शहर के प्रसिद्ध पंडाल जैसे कुमारतुली पार्क, कॉलेज स्ट्रीट और बल्लीगंज कल्चरल अपनी अद्भुत थीम और विशालकाय मूर्तियों के लिए जाने जाते हैं। उत्तरी कोलकाता में बोनेडी बारी (पैतृक घर) पूजा सदियों पुराने रीति-रिवाजों की झलक पेश करती है। पतझड़ की ठंडी रातों में पंडालों में घूमना और फुचका और काठी रोल जैसे स्ट्रीट फूड का स्वाद लेना एक ऐसा अनुभव है जो इस मौसम की पहचान बन जाता है।

शांतिनिकेतन 

रवींद्रनाथ टैगोर की धरती शांतिनिकेतन, दुर्गा पूजा को बेहद ही शांत और क्रिएटिव रूप प्रदान करती है। यहां के फेस्टिवल बंगाल की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हुए हैं। यहां पर आपको लोक संगीत, बाउल संगीत और स्थानीय हस्तशिल्प के अनुभव का माहौल देखने को मिलेगा हैं। यहां का शांत वातावरण लोकल और पर्यटकों के लिए शानदार जगह हैं, यहां पर आप भक्ति में डूब जाएंगे। इस नवरात्रि में आप इस जगह पर दुर्गा पूजा आनंद लेने जरुर जाएं।

दुर्गापुर

यहां पर दुर्गा पूजा सामुदायिक सद्भाव और जीवंत आधुनिक थीम के साथ मनाई जाती है। इन पंडालों में आपको पारंपरिक रीति-रिवाजों और शानदार क्रिएटिविटी का मिश्रण देखने को मिलता है, जो इसे परिवारों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाता है। दुर्गा पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, मेले और खाने-पीने के स्टॉल उत्सव के उत्साह को और बढ़ा देते हैं और बंगाल की सांप्रदायिक भावना को करीब से अनुभव करने के इच्छुक लोगों के लिए एक दुर्गापुर के पंडाल बेहद खास हैं।

सिलीगुड़ी 

हिमालय की तलहटी में बसा सिलीगुड़ी में आप दुर्गा पूजा का एक अनोखा अनुभव महसूस करेंगे। शहर के पंडालों में ट्रेडिसनल और लेटस्टे डिजाइन देखने को मिल जाएंगे। यहां के सभी पंडालों से लुभावने पहाड़ी दृश्य दिखाई देते हैं। इस मौसम में दुर्गा पंडालों में घूमने-फिरना एक सुखद अनुभव बना देता है, और यह जगह उन यात्रियों के लिए आदर्श है जो फेस्टिवल के साथ दार्जिलिंग या कलिम्पोंग की एक छोटी सी यात्रा भी करना चाहते हैं। यहां के पंडालों में खूब भक्ति देखने को मिलती है, इसके साथ ही सिंदूर खेला और भी शानदार एहसास कराता है। इसलिए नवरात्रि में सिलीगुड़ी जरुर जाएं।

‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर साइन होने के बाद…’, H-1B वीजा शुल्क पर अमेरिकी पूर्व राजदूत का बयान

अमेरिका के पूर्व राजदूत टिम रोमर ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीयों पर नया और भारी H-1B वीजा शुल्क लगाने की योजना, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद फिर से बातचीत का विषय बन सकती है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम आव्रजन पर सख्ती के बीच आया है, जिसका असर भारतीय आईटी कंपनियों और कुशल पेशेवरों पर पड़ेगा। पहले से ही अमेरिका ने 50% टैरिफ बढ़ा दिया है और अब प्रस्तावित 1 लाख डॉलर का वीजा शुल्क भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए अमेरिकी अवसरों को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। फिलहाल भारत इस फैसले के प्रभाव का अध्ययन कर रहा है।

रोमर ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के रिश्तों में बाधा डाल सकता है, लेकिन उम्मीद है कि व्यापार वार्ता के बाद वीजा मुद्दे पर फिर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि अदालत या अमेरिकी कांग्रेस इस फैसले पर रोक लगा दे, क्योंकि H-1B वीजा की संख्या तय करने का अधिकार कांग्रेस के पास है।

भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए लाभ

रोमर ने जोर देकर कहा कि भारतीय छात्रों और पेशेवरों को H-1B वीजा देना अमेरिका के लिए भी फायदेमंद है। ये छात्र पीएचडी करते हैं, नई कंपनियां शुरू करते हैं और सैकड़ों-हजारों नौकरियों का सृजन करते हैं। अध्ययन के अनुसार, लगभग 25% नई टेक्नोलॉजी नौकरियां भारतीय मूल के छात्रों द्वारा बनाई जाती हैं, जो बाद में CEO बनकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं।

भारत इस पहलू पर भी जोर देता रहा है कि H-1B वीजा धारक दोनों देशों के बीच नवाचार, तकनीकी विकास और लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नीतियों का मूल्यांकन परस्पर लाभों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।