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PM Modi Netanyahu Call:मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच नेतन्याहू ने PM मोदी को किया फोन, द्विपक्षीय रिश्तों और क्षेत्रीय हालात पर हुई चर्चा

पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच भारत-इजरायल संबंधों के साथ-साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा हुई।

फोन कॉल के दौरान दोनों देशों के बीच चल रही विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने अलग-अलग क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

पश्चिम एशिया के हालात पर हुई बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर विचार साझा किए। क्षेत्र में जारी तनाव के बीच दोनों नेताओं ने स्थिति पर संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।

भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और बातचीत के जरिए विवादों का समाधान निकालने की अपील करता रहा है। ऐसे समय में दोनों नेताओं की बातचीत को क्षेत्रीय घटनाक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा

बातचीत में दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के तहत हो रही प्रगति का भी जायजा लिया गया। भारत और इजरायल के संबंधों में रक्षा, कृषि, तकनीक, नवाचार और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने आपसी सहयोग को भविष्य में और मजबूत करने की इच्छा जताई। बातचीत से यह भी संकेत मिला कि पश्चिम एशिया की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारत और इजरायल अपने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

1992 में स्थापित हुए थे राजनयिक संबंध

भारत और इजरायल ने 1992 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ता गया।

समय के साथ दोनों देशों के संबंध रक्षा से आगे बढ़कर कृषि, हाईटेक, साइबर, नवाचार और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत-इजरायल संबंधों को विशेष रणनीतिक महत्व मिला है।

रक्षा और तकनीक में मजबूत सहयोग

भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से द्विपक्षीय रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। दोनों देश आधुनिक तकनीक, सुरक्षा और रक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग करते हैं।

इसके अलावा कृषि तकनीक, हाईटेक रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी आगे बढ़ी है।

दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार

भारत और इजरायल के बीच आर्थिक संबंध भी पिछले वर्षों में मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार कई अरब डॉलर के स्तर पर है। व्यापार के साथ-साथ तकनीक, रक्षा और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं में सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाता है।

ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत से दोनों देशों के बीच रणनीतिक समन्वय और संपर्क को बनाए रखने की अहमियत सामने आती है।

लखनऊ: यातायात पुलिसकर्मियों द्वारा कमता चौराहे में बुजुर्ग से हुई अवैध वसूली के मामले में कार्रवाई हुई, अब पूरे शहर के प्रमुख चौराहों की बारी, बड़े एक्शन की उठ रही मांग

लखनऊ के कमता चौराहे पर यातायात पुलिसकर्मियों द्वारा कथित अवैध वसूली का वीडियो सामने आने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई निश्चित रूप से आवश्यक थी, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल दो पुलिसकर्मियों के निलंबन से समस्या समाप्त हो जाएगी?

अगर राजधानी के एक प्रमुख चौराहे पर इस तरह की घटना कैमरे में कैद हो सकती है, तो यह मान लेना कठिन है कि यह समस्या केवल एक स्थान तक सीमित है। आवश्यकता इस बात की है कि पूरे लखनऊ शहर के प्रमुख चौराहों और ट्रैफिक प्वाइंट्स की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच कराई जाए। यदि कहीं भी अवैध वसूली का संगठित नेटवर्क या भ्रष्ट आचरण सामने आता है, तो उसे जड़ से समाप्त किया जाए।

यह केवल दो पुलिसकर्मियों का मामला नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस की साख, जनता के विश्वास और कानून के राज का प्रश्न है। प्रदेश सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की बात करती है, ऐसे में ट्रैफिक व्यवस्था के भीतर यदि कहीं भ्रष्टाचार पनप रहा है तो उस पर भी उतनी ही कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश पुलिस में हजारों ऐसे अधिकारी और कर्मचारी हैं जो पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ दिन-रात अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। लेकिन कुछ भ्रष्ट कर्मचारी पूरे विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा देते हैं। जनता की नजर में पूरे विभाग पर सवाल उठने लगते हैं, जबकि अधिकांश पुलिसकर्मी अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभा रहे होते हैं।

ऐसे मामलों की जांच केवल औपचारिक विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। एक विशेष जांच दल (SIT) या स्वतंत्र निगरानी तंत्र गठित कर राजधानी के संवेदनशील ट्रैफिक प्वाइंट्स का औचक निरीक्षण कराया जाना चाहिए। जहां भी भ्रष्टाचार के ठोस प्रमाण मिलें, वहां केवल निलंबन जैसी अस्थायी कार्रवाई नहीं, बल्कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद सेवा से बर्खास्तगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाना चाहिए।

राजधानी की सड़कें कानून का पालन कराने के लिए हैं, कानून का सौदा करने के लिए नहीं। जनता का विश्वास तभी मजबूत होगा जब ईमानदार पुलिसकर्मियों का सम्मान और भ्रष्ट तत्वों के प्रति शून्य सहनशीलता—दोनों समान रूप से दिखाई देंगे।

आज आवश्यकता किसी एक चौराहे पर कार्रवाई की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने की है। तभी उत्तर प्रदेश पुलिस की वह सकारात्मक छवि और मजबूत होगी, जिसके लिए हजारों ईमानदार पुलिसकर्मी प्रतिदिन कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं।

विधानसभा में गूंजी सरोजनीनगर की आवाज़ : विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने नियम-301 और नियम-51 के तहत उठाए जनहित के अहम मुद्दे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने क्षेत्र की आधारभूत अवस्थापना सुविधाओं के विकास एवं जलभराव की गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार का ध्यान जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने नियम-301 के तहत बदालीखेड़ा, नीलमथा, पंडितखेड़ा एवं गौरी क्षेत्रों में सड़क, सीवर, नाली, जल निकासी तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान की मांग की। वहीं नियम-51 के अंतर्गत सरोजनीनगर के शहरी क्षेत्रों में जलभराव की स्थायी समस्या के समाधान के लिए 10 महत्वपूर्ण नाला परियोजनाओं को शीघ्र वित्तीय स्वीकृति प्रदान किए जाने का विषय सदन में मजबूती से रखा।

आधारभूत सुविधाओं के लिए बजट की मांग

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि बदालीखेड़ा, नीलमथा, पंडितखेड़ा एवं गौरी सहित अनेक क्षेत्रों में सड़क, सीवर, नालियां और जल निकासी व्यवस्था वर्षों से जर्जर एवं अपर्याप्त हैं। प्रत्येक वर्ष बारिश के दौरान इन इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे आम नागरिकों, विद्यार्थियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और तीव्र शहरीकरण को देखते हुए वर्तमान आधारभूत ढांचा क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं रह गया है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि इन क्षेत्रों में सड़क, सीवर, नाली, जल निकासी एवं अन्य आवश्यक विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजटीय व्यवस्था सुनिश्चित कर संबंधित विभागों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं, ताकि लोगों को स्थायी राहत मिल सके।

जलभराव के स्थायी समाधान पर जोर

नियम-51 के अंतर्गत डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर के शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के कारण प्रभावी जल निकासी व्यवस्था की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी इस विषय को उठाया गया था, लेकिन प्रस्तावित कार्य समय पर पूरे न होने के कारण आज भी कई क्षेत्रों में जलभराव की समस्या बनी हुई है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रस्तावित 10 महत्वपूर्ण नाला परियोजनाओं को तत्काल वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।

इन 10 नाला परियोजनाओं की रखी मांग

डॉ. राजेश्वर सिंह ने विधानसभा में साईं दाता रोड (अहिमामऊ), शांति नगर, गिंदन खेड़ा, अमौसी, बंगला बाजार, अर्जुनगंज (सरस्वतीपुरम), कानपुर रोड, नगर निगम जोन-5 सहित विभिन्न क्षेत्रों में सीसी एवं आरसीसी नालों के निर्माण, क्षतिग्रस्त नालों के चौड़ीकरण एवं गहरीकरण से जुड़ी कुल 10 परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से वर्षा के दौरान जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी, जल निकासी व्यवस्था मजबूत होगी तथा हजारों परिवारों को स्थायी राहत मिलेगी।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश सरकार जनहित से जुड़े इन दोनों महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए आवश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां प्रदान करेगी, जिससे सरोजनीनगर में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और जलभराव की समस्या का प्रभावी एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सकेगा।

‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ पर पाकिस्तान को भारत की दो टूक, कहा- प्रोपेगेंडा बंद करे इस्लामाबाद

भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की ओर से की जा रही बयानबाजी पर कड़ा पलटवार किया है। पाकिस्तान की तरफ से 5 अगस्त को ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ के तौर पर मनाए जाने और जम्मू-कश्मीर में 2019 में किए गए संवैधानिक बदलावों का विरोध किए जाने पर नई दिल्ली ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।

भारत ने पाकिस्तान पर अपने देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने और गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। भारतीय पक्ष का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों के जरिए पाकिस्तान अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान हटाने की कोशिश करता है।

5 अगस्त को पाकिस्तान मनाता है ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’

भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेष दर्जे को खत्म करने का फैसला किया था। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को पुनर्गठित कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, जबकि लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया।

पाकिस्तान इस फैसले का विरोध करता रहा है और हर साल 5 अगस्त को ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ के नाम से कार्यक्रम आयोजित करता है। इस साल भी इस्लामाबाद की ओर से भारत के खिलाफ बयान और आरोप लगाए गए।

भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को बताया बेबुनियाद

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के इस अभियान को खारिज करते हुए कहा कि 5 अगस्त 2019 को किए गए संवैधानिक बदलाव भारत का आंतरिक विषय हैं।

भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में शासन व्यवस्था, विकास और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में कई बदलाव देखने को मिले हैं। नई दिल्ली ने पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से भी परहेज करने की सलाह दी।

‘अपने रिकॉर्ड से ध्यान भटकाने की कोशिश’

भारत ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि से जुड़े गंभीर सवालों से ध्यान हटाने के लिए जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने का आरोप लगाया।

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का मकसद अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर उठने वाले सवालों से वैश्विक ध्यान हटाना है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत का रुख स्पष्ट

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। नई दिल्ली के मुताबिक 2019 के संवैधानिक बदलाव के बाद दोनों केंद्र शासित प्रदेशों को लेकर भारत का रुख पहले की तरह स्पष्ट है।

भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का हिस्सा थे, हैं और आगे भी रहेंगे।

PoJK में कार्रवाई को लेकर भी पाकिस्तान पर निशाना

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शनों और वहां की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई।

भारत के मुताबिक PoJK में नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर होने वाले प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है। भारत ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के लिए बल प्रयोग, हिंसा और प्रतिबंधों का सहारा लिया गया।

नई दिल्ली ने कहा कि नागरिकों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई पाकिस्तान के उस रुख पर सवाल खड़े करती है, जिसमें वह जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत पर आरोप लगाता रहता है।

भारत-पाकिस्तान के बीच फिर बढ़ी बयानबाजी

जम्मू-कश्मीर का मुद्दा लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव का प्रमुख कारण रहा है। 5 अगस्त 2019 के फैसले के बाद इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हुई है।

‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ को लेकर पाकिस्तान के विरोध पर भारत की प्रतिक्रिया से एक बार फिर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

वनडे में बिना शतक लगाए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले 7 बल्लेबाज, टॉप पर पाकिस्तान के मिस्बाह उल हक

वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजों के लिए शतक बनाना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। कई खिलाड़ियों ने अपने करियर में हजारों रन बनाए, लेकिन वे कभी 100 रन के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके। कुछ बल्लेबाज ऐसे भी रहे, जिन्होंने लगातार अच्छी पारियां खेलीं और बड़ी संख्या में रन बनाए, लेकिन उनके खाते में एक भी वनडे शतक दर्ज नहीं हुआ।

आज हम ऐसे ही 7 बल्लेबाजों की बात कर रहे हैं, जिन्होंने वनडे इंटरनेशनल में बिना शतक लगाए सबसे ज्यादा रन बनाए। इस सूची में पाकिस्तान के खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिलता है। वहीं भारत के पूर्व ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा भी इस खास सूची में शामिल हैं।

1. मिस्बाह उल हक – 5122 रन

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मिस्बाह उल हक इस सूची में सबसे ऊपर हैं। उन्होंने अपने वनडे करियर में 162 मुकाबले खेले और 149 पारियों में 5122 रन बनाए।

मिस्बाह के नाम वनडे में 42 अर्धशतक हैं, लेकिन वह कभी शतक पूरा नहीं कर सके। उनका इस फॉर्मेट में सर्वोच्च स्कोर 96 रन रहा। यानी वह कई बार बड़ी पारी के करीब पहुंचे, लेकिन तीन अंकों के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए।

2. वसीम अकरम – 3717 रन

पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम इस सूची में दूसरे नंबर पर हैं। गेंदबाजी में अपनी पहचान बनाने वाले अकरम ने बल्ले से भी टीम के लिए उपयोगी पारियां खेलीं।

उन्होंने 356 वनडे मैचों की 280 पारियों में 3717 रन बनाए। उनके नाम वनडे में 6 अर्धशतक हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 86 रन रहा। अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के बावजूद वह वनडे में शतक नहीं लगा सके।

3. मोईन खान – 3266 रन

पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज मोईन खान ने वनडे क्रिकेट में 219 मुकाबले खेले। इस दौरान 183 पारियों में उनके बल्ले से 3266 रन निकले।

मोईन खान ने 12 अर्धशतक लगाए और उनका सर्वोच्च वनडे स्कोर 72 रन नाबाद रहा। हालांकि उन्होंने कई उपयोगी पारियां खेलीं, लेकिन वनडे करियर में शतक लगाने में सफल नहीं हो पाए।

4. हीथ स्ट्रीक – 2943 रन

जिम्बाब्वे के दिग्गज ऑलराउंडर हीथ स्ट्रीक भी इस सूची में अपनी जगह बनाते हैं। उन्होंने 189 वनडे मैचों में 159 पारियां खेलीं और कुल 2943 रन बनाए।

स्ट्रीक का वनडे में सर्वश्रेष्ठ स्कोर 79 रन रहा। उनके करियर में कई बार अर्धशतकीय पारियां देखने को मिलीं, लेकिन वह कभी शतक तक नहीं पहुंच सके।

5. रविंद्र जडेजा – 2905 रन

भारत के स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा इस सूची में शामिल इकलौते भारतीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने भारत के लिए 210 वनडे मुकाबले खेले और इस दौरान 2905 रन बनाए।

जडेजा के नाम वनडे में 13 अर्धशतक हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 87 रन है। जडेजा ने कई मौकों पर बल्ले से टीम के लिए अहम योगदान दिया, लेकिन वनडे क्रिकेट में अभी तक शतक नहीं बना पाए हैं।

6. एंड्रू जोंस – 2784 रन

न्यूजीलैंड के पूर्व बल्लेबाज एंड्रू जोंस इस सूची में छठे स्थान पर हैं। उन्होंने 1987 से 1995 के बीच न्यूजीलैंड के लिए 87 वनडे मैच खेले।

87 पारियों में जोंस ने 2784 रन बनाए। उनका सर्वोच्च वनडे स्कोर 93 रन रहा। यानी वह शतक बनाने से सिर्फ 7 रन दूर रह गए थे। उनके नाम वनडे में 11 अर्धशतक दर्ज हैं।

7. जेम्स व्हिटल – 2705 रन

जिम्बाब्वे के पूर्व क्रिकेटर जेम्स व्हिटल इस सूची में सातवें स्थान पर हैं। उन्होंने 1993 से 2003 के बीच 147 वनडे मुकाबले खेले और 142 पारियों में 2705 रन बनाए।

व्हिटल ने वनडे करियर में 11 अर्धशतक लगाए। हालांकि उन्होंने लगातार रन बनाने में योगदान दिया, लेकिन उनके बल्ले से भी वनडे में कभी शतक नहीं आया।

बिना शतक के बड़े रन बनाने वाले बल्लेबाजों की खास सूची

इस आंकड़े से साफ है कि शतक बनाना ही किसी बल्लेबाज के पूरे वनडे करियर का पैमाना नहीं होता। मिस्बाह उल हक जैसे बल्लेबाज ने 5000 से ज्यादा रन बनाए, लेकिन उनके खाते में एक भी शतक नहीं है। वहीं वसीम अकरम और मोईन खान जैसे खिलाड़ियों ने भी बिना शतक के हजारों रन बनाए।

भारत की ओर से रविंद्र जडेजा का नाम इस सूची में खास है। जडेजा ने निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए कई महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं और टीम के लिए मैच जिताऊ योगदान भी दिया है।