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Sunny Deol Parshuram Movie:Sunny Deol की ‘परशुराम’ पर लगा ब्रेक, हॉलीवुड प्रोजेक्ट के चलते टली फिल्म; 2027 तक बढ़ा इंतजार?

 सनी देओल इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘बटवारा 1947’ को लेकर सुर्खियों में हैं। इसी बीच उनकी एक और बहुप्रतीक्षित फिल्म को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सनी देओल की एक्शन फिल्म ‘परशुराम’ की शूटिंग फिलहाल आगे बढ़ा दी गई है।

इस फिल्म का निर्देशन निखिल नागेश भट्ट करने वाले हैं, जिन्होंने इससे पहले एक्शन फिल्म ‘किल’ के निर्देशन से खास पहचान बनाई थी। फिल्म का निर्माण मैत्री मूवी मेकर्स और मधु मंटेना से जुड़े प्रोडक्शन बैनर के तहत किया जा रहा है। पहले खबर थी कि फिल्म की शूटिंग अक्टूबर 2026 से शुरू हो सकती है, लेकिन अब इसके शेड्यूल में बदलाव की जानकारी सामने आई है।

हॉलीवुड फिल्म बनी ‘परशुराम’ की देरी की वजह

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘परशुराम’ के डायरेक्टर निखिल नागेश भट्ट को एक बड़े हॉलीवुड प्रोजेक्ट का निर्देशन करने का मौका मिला है। इसी वजह से सनी देओल की फिल्म का काम फिलहाल आगे खिसका दिया गया है।

बताया जा रहा है कि निखिल नागेश भट्ट Amazon MGM Studios की एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘Deadlocked’ का निर्देशन करेंगे। इस हॉलीवुड प्रोजेक्ट में ऑस्कर विजेता अभिनेता जेमी फॉक्स मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।

जानकारी के अनुसार, निखिल पिछले करीब दो वर्षों से इस प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत कर रहे थे। अब प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने के साथ ही यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट बनने जा रहा है।

2027 तक टल सकती है सनी देओल की फिल्म

निखिल नागेश भट्ट के हॉलीवुड प्रोजेक्ट में व्यस्त होने के कारण ‘परशुराम’ की शूटिंग का शेड्यूल प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हॉलीवुड फिल्म पूरी होने से पहले निर्देशक के लिए किसी दूसरे बड़े प्रोजेक्ट पर काम करना मुश्किल हो सकता है।

इसी वजह से सनी देओल की ‘परशुराम’ को 2027 तक आगे बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, फिल्म को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

निर्माता इस बात पर विचार कर रहे हैं कि निखिल नागेश भट्ट की उपलब्धता का इंतजार किया जाए या फिल्म के लिए किसी अन्य निर्देशक को जिम्मेदारी दी जाए। फिलहाल दोनों विकल्पों पर चर्चा जारी बताई जा रही है।

‘जाट 2’ को लेकर भी चल रहा है मंथन

इसी बीच मैत्री मूवी मेकर्स अपनी अन्य फिल्मों के शेड्यूल को लेकर भी योजना बना रहा है। सनी देओल की ‘जाट 2’ को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर भी अभी कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सनी देओल के प्रोजेक्ट्स के शेड्यूल में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

14 अगस्त को रिलीज होगी ‘बटवारा 1947’

सनी देओल की सबसे पहले आने वाली फिल्मों में ‘बटवारा 1947’ शामिल है। यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। खास बात यह है कि फिल्म का नाम पहले ‘लाहौर 1947’ रखा गया था, जिसे बाद में बदलकर ‘बटवारा 1947’ कर दिया गया।

फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि से जुड़ी बताई जा रही है और इसे लेकर सनी देओल के फैंस के बीच काफी उत्सुकता है।

‘रामायण’ में हनुमान के किरदार में दिखेंगे सनी देओल

सनी देओल के पास इस समय कई बड़े प्रोजेक्ट हैं। वह निर्देशक नितेश तिवारी की चर्चित फिल्म ‘रामायण’ में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।

फिल्म में सनी देओल को भगवान हनुमान के किरदार में देखा जाएगा। बड़े बजट में बन रही इस फिल्म की रिलीज 6 नवंबर को प्रस्तावित है।

इसके अलावा अभिनेता हाई-ऑक्टेन एक्शन-थ्रिलर ‘एंटनी’ में भी नजर आएंगे। इस फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री ज्योतिका की अहम भूमिका बताई जा रही है।

ऐसे में ‘परशुराम’ की शूटिंग भले ही आगे बढ़ गई हो, लेकिन सनी देओल के पास आने वाले समय में कई बड़े और अलग-अलग जॉनर के प्रोजेक्ट मौजूद हैं।

Iran News:ईरान की सत्ता में बढ़ी हलचल? राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- ‘सुप्रीम लीडर से संपर्क करना आसान नहीं’

 ईरान की सत्ता के भीतर कथित मतभेदों के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का एक अहम बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में देश के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई से सीधे बातचीत करना आसान नहीं है। उनके इस बयान के बाद ईरान के सत्ता तंत्र में अंदरूनी तालमेल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मुज्तबा खामेनेई को लेकर लंबे समय से सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहने की खबरें सामने आती रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव के दौरान हुए हमलों के बाद से वह सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मुज्तबा खामेनेई को ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलने की बात सामने आई थी।

पेजेशकियन बोले- उनकी मौजूदगी हमारे लिए बड़ी ताकत

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि भले ही मुज्तबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन देश की मौजूदा परिस्थितियों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।

पेजेशकियन के मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई की मौजूदगी सरकार और देश के लिए मनोबल बढ़ाने वाली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में उनसे संपर्क करना मुश्किल जरूर है, लेकिन उनका समर्थन और मौजूदगी सरकार को अपना काम जारी रखने की ताकत देती है।

सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं दिख रहे मुज्तबा खामेनेई?

मुज्तबा खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति को लेकर लगातार कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने अब तक मुख्य रूप से लिखित संदेशों के जरिए अपनी बात रखी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान भी उनके सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आने को लेकर चर्चाएं होती रही हैं।

उनकी गैरमौजूदगी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई जब वह अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी सार्वजनिक तौर पर दिखाई नहीं दिए।

हालांकि, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने मुज्तबा खामेनेई को लेकर लगाई जा रही अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनके साथ कई बार मुलाकात हुई है और बातचीत के दौरान मुज्तबा खामेनेई शांत, समझदार और तार्किक नजर आए।

पेजेशकियन ने अटकलों को बताया गलत

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा हालात ने कुछ लोगों को मुज्तबा खामेनेई के बारे में अलग-अलग तरह की बातें फैलाने का मौका दिया है। उनके अनुसार, सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देने की वजह से उनके बारे में गलत धारणा बनाई जा रही है।

पेजेशकियन ने मुज्तबा खामेनेई की नेतृत्व क्षमता और सोच का बचाव करते हुए कहा कि उनके साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही है।

ईरान में सत्ता के अंदर मतभेद की खबरें

इस बीच ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में कथित अंदरूनी मतभेदों की खबरें भी सामने आ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मुज्तबा खामेनेई और राष्ट्रपति पेजेशकियन के बीच कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर मतभेद हैं।

कुछ दावों के मुताबिक, युद्ध और सुरक्षा से जुड़े मामलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कमांडर अहमद वहीदी की भूमिका को समर्थन मिल रहा है।

इसी तरह कुछ रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया है कि मुज्तबा खामेनेई ने पेजेशकियन को पद छोड़ने की किसी भी कोशिश से बचने की सलाह दी है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस्तीफे को लेकर पहले भी सामने आया था विवाद

राष्ट्रपति पेजेशकियन की सरकार और ईरान के दूसरे शक्तिशाली संस्थानों के बीच अधिकारों को लेकर मतभेद की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं।

रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पेजेशकियन राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की भूमिका सीमित होने से असहमत थे। इसी वजह से उनके इस्तीफे की संभावनाओं को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं।

अब मुज्तबा खामेनेई से बातचीत में मुश्किल होने के पेजेशकियन के बयान ने ईरान के सत्ता तंत्र में समन्वय और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

युद्ध के बीच ईरान के लिए चुनौतीपूर्ण समय

ईरान इस समय क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में राष्ट्रपति और सर्वोच्च नेतृत्व के बीच सीधा संवाद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

पेजेशकियन के बयान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान की सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान के बीच किस तरह फैसले लिए जा रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ने मुज्तबा खामेनेई की मौजूदगी को देश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उनके खिलाफ चल रही अटकलों को खारिज करने की कोशिश की है।

Trump Tariff News: ट्रंप के टैरिफ पर बड़ा झटका, अमेरिका ने लौटाए करीब 100 अरब डॉलर; जानिए आम लोगों को क्यों नहीं मिला पैसा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति अब अमेरिका में ही राजनीतिक और आर्थिक विवाद का कारण बन गई है। ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए कई आयात शुल्क को लेकर कानूनी लड़ाई के बाद सरकार को बड़ी रकम वापस करनी पड़ी है।

अमेरिकी सीमा शुल्क अधिकारियों के अनुसार, अदालत के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने करीब 100 अरब डॉलर की टैरिफ राशि वापस कर दी है। यह रिफंड उन शुल्कों से जुड़ा है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम यानी IEEPA के तहत लगाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई रिफंड प्रक्रिया

ट्रंप प्रशासन ने अप्रैल 2025 में दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करना शुरू किया था। इसके बाद अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा और कई देशों के साथ टैरिफ को लेकर विवाद पैदा हुआ।

टैरिफ को चुनौती देने वाली कानूनी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका दिया। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति ने IEEPA का इस्तेमाल करके व्यापक आयात शुल्क लगाने के लिए अपनी शक्तियों की सीमा पार की।

अदालत के फैसले के बाद सरकार को ऐसे टैरिफ के तहत जमा की गई रकम वापस करने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।

सरकार ने लौटाए करीब 100 अरब डॉलर

अमेरिकी सीमा शुल्क अधिकारियों ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में बताया कि अब तक करीब 100 अरब डॉलर की राशि वापस की जा चुकी है।

बताया गया है कि रिफंड में ब्याज की रकम भी शामिल है। यह प्रक्रिया अमेरिकी सीमा शुल्क विभाग की रिफंड व्यवस्था के जरिए पूरी की गई और संबंधित राशि को वित्त विभाग को भेज दिया गया।

यह राशि उन कारोबारियों और आयातकों से जुड़े शुल्क की वापसी है, जिन्होंने सरकार को टैरिफ के रूप में भुगतान किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को क्यों बताया था गलत?

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, IEEPA कानून का निर्माण 1977 में राष्ट्रीय आपात स्थितियों से निपटने के लिए किया गया था। अदालत ने माना कि इस कानून के जरिए राष्ट्रपति को दुनिया भर से आने वाले सामान पर व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने की असीमित शक्ति नहीं मिलती।

अदालत ने इसी आधार पर ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए IEEPA आधारित कई टैरिफ को कानूनी अधिकार से बाहर माना।

इस फैसले के बाद प्रशासन के सामने उन आयातकों को भुगतान लौटाने की चुनौती खड़ी हो गई, जिन्होंने इन शुल्कों को पहले ही जमा कर दिया था।

अमेरिकी उपभोक्ताओं को रिफंड क्यों नहीं?

टैरिफ रिफंड को लेकर अमेरिका में एक नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि सरकार जिन कारोबारियों और आयातकों को पैसा वापस कर रही है, जरूरी नहीं कि वही लोग टैरिफ का वास्तविक आर्थिक बोझ उठाने वाले हों।

टैरिफ लगने के बाद कई कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। इसका सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा। यानी सामान खरीदते समय आम लोगों को पहले की तुलना में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी।

अब जब सरकार टैरिफ की रकम वापस कर रही है, तो यह पैसा मुख्य रूप से उन आयातकों और कंपनियों को मिल रहा है जिन्होंने शुल्क सरकार को जमा किया था। आलोचकों का सवाल है कि जिन उपभोक्ताओं ने महंगे सामान के रूप में इसका अप्रत्यक्ष बोझ उठाया, उन्हें इस रिफंड में कोई सीधा हिस्सा नहीं मिल रहा।

ट्रंप की टैरिफ नीति पर फिर उठे सवाल

टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना तथा विदेशी व्यापार पर अमेरिका की स्थिति मजबूत करना बताया गया था। लेकिन इसके साथ ही कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापारिक तनाव को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

करीब 100 अरब डॉलर के रिफंड के बाद यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। अब बहस सिर्फ टैरिफ की वैधता तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी हो रही है कि टैरिफ से पैदा हुए आर्थिक बोझ का असली असर किस पर पड़ा और रिफंड का फायदा किसे मिल रहा है।

Rare Stomach Cancer: मुंबई में सामने आए पेट के कैंसर के 2 दुर्लभ मामले, ओवरी में दिखा ट्यूमर; जानें क्या है क्रूकेनबर्ग ट्यूमर

पेट दर्द, वजन तेजी से कम होना या पीरियड्स में बदलाव जैसी समस्याओं को अक्सर सामान्य कारणों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन कुछ मामलों में यही लक्षण किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं। मुंबई में सामने आए दो मामलों में शुरुआत में महिलाओं की ओवरी में ट्यूमर देखकर ओवेरियन कैंसर का संदेह हुआ, लेकिन आगे की जांच में बीमारी की असली वजह कुछ और निकली।

जांच के दौरान पता चला कि दोनों महिलाओं की ओवरी में मौजूद ट्यूमर की शुरुआत ओवरी से नहीं हुई थी। कैंसर पेट से शुरू होकर ओवरी तक फैल चुका था। मेडिकल भाषा में ऐसे मामलों को क्रूकेनबर्ग ट्यूमर कहा जाता है। यह एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें शरीर के किसी दूसरे हिस्से से कैंसर ओवरी तक पहुंच जाता है।

दोनों महिलाओं में क्या लक्षण दिखे?

पहला मामला 25 वर्षीय महिला का बताया गया है। उन्हें पेट में दर्द, पीरियड्स अनियमित होने, भूख कम लगने और बिना किसी स्पष्ट वजह के वजन घटने की शिकायत थी। जांच के दौरान उनकी दाईं ओवरी में एक बड़ा ट्यूमर पाया गया।

शुरुआत में डॉक्टरों को ओवेरियन कैंसर की आशंका हुई। लेकिन आगे की जांच और टिश्यू की जांच से सामने आया कि कैंसर की शुरुआत ओवरी में नहीं बल्कि पेट में हुई थी। बाद में यह ओवरी तक फैल गया था।

दूसरा मामला 37 वर्षीय दो बच्चों की मां का था। उन्हें भी पेट दर्द और मासिक धर्म से जुड़ी परेशानी के साथ वजन कम होने की समस्या थी। इसके अलावा उनके मल त्याग के पैटर्न में भी बदलाव आया था।

जांच में दोनों ओवरी में बड़े ट्यूमर दिखाई दिए। आगे की जांच में पता चला कि ये ट्यूमर भी पेट से शुरू हुए कैंसर के ओवरी तक फैलने के कारण बने थे।

क्या है क्रूकेनबर्ग ट्यूमर?

क्रूकेनबर्ग ट्यूमर ओवरी में होने वाला एक ऐसा सेकेंडरी कैंसर है, जिसकी शुरुआत आमतौर पर ओवरी से नहीं होती। कैंसर शरीर के किसी दूसरे अंग में विकसित होकर बाद में ओवरी तक पहुंचता है।

ऐसे मामलों में पेट एक प्रमुख प्राथमिक स्रोत हो सकता है। हालांकि कुछ स्थितियों में कैंसर की शुरुआत आंत, अपेंडिक्स, पैंक्रियाज या ब्रेस्ट जैसे अंगों से भी हो सकती है।

यही वजह है कि ओवरी में ट्यूमर दिखाई देने पर केवल ओवेरियन कैंसर की जांच तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होता। डॉक्टरों को यह भी पता लगाना पड़ता है कि कैंसर की शुरुआत वास्तव में शरीर के किस हिस्से से हुई है।

कितने दुर्लभ हैं क्रूकेनबर्ग ट्यूमर?

क्रूकेनबर्ग ट्यूमर को ओवरी से जुड़े दुर्लभ ट्यूमर में गिना जाता है। उपलब्ध मेडिकल जानकारी के मुताबिक, यह सभी ओवेरियन ट्यूमर के लगभग 1 से 2 प्रतिशत मामलों में पाया जाता है।

यह स्थिति प्रजनन आयु की महिलाओं में अधिक देखी जा सकती है, हालांकि किसी भी उम्र में इसका निदान संभव है। कई मामलों में जब ओवरी में ट्यूमर के जरिए बीमारी का पता चलता है, तब तक कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका होता है। इसी कारण ऐसे मामलों का इलाज चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

क्रूकेनबर्ग ट्यूमर के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते और कई बार ये सामान्य पेट या स्त्री रोग संबंधी समस्याओं जैसे दिखाई दे सकते हैं।

इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • लगातार या बार-बार पेट दर्द होना
  • पेट फूलना या भारीपन महसूस होना
  • पीरियड्स में अनियमितता
  • भूख कम लगना
  • बिना वजह वजन कम होना
  • थोड़ी मात्रा में खाना खाने के बाद ही पेट भर जाना
  • मल त्याग की आदत में अचानक बदलाव

अगर किसी महिला में ओवरी में मास या ट्यूमर के साथ लगातार पेट संबंधी समस्या, तेजी से वजन कम होना या आंतों की आदत में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर सकते हैं।

कैसे पता चलता है कि कैंसर कहां से शुरू हुआ?

अल्ट्रासाउंड और CT स्कैन जैसी इमेजिंग जांचों से ओवरी में मौजूद ट्यूमर का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, केवल स्कैन के आधार पर यह निश्चित करना मुश्किल हो सकता है कि कैंसर की शुरुआत ओवरी से हुई है या किसी दूसरे अंग से।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर एंडोस्कोपी, बायोप्सी और पैथोलॉजी जांच की मदद ले सकते हैं। टिश्यू की जांच से कैंसर की प्रकृति और उसके संभावित मूल स्थान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

क्रूकेनबर्ग ट्यूमर का इलाज कैसे होता है?

इलाज मरीज की स्थिति, कैंसर के स्रोत, बीमारी के फैलाव और जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में ओवरी में मौजूद ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

लेकिन इलाज का मुख्य फोकस उस जगह पर रहता है जहां कैंसर की शुरुआत हुई है। उदाहरण के लिए, अगर कैंसर पेट से शुरू हुआ है तो उपचार की योजना एडवांस गैस्ट्रिक कैंसर के अनुसार बनाई जा सकती है।

कुछ मरीजों में कैंसर की विशेष जांच रिपोर्ट के आधार पर टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

समय पर जांच क्यों जरूरी?

क्रूकेनबर्ग ट्यूमर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती लक्षण सामान्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं। इसी कारण बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है।

ओवरी में ट्यूमर मिलने पर यह समझना जरूरी है कि वह प्राथमिक ओवेरियन कैंसर है या किसी अन्य अंग से फैलकर वहां पहुंचा है। सही समय पर विस्तृत जांच होने से बीमारी की वास्तविक स्थिति समझने और उपचार की उचित योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

Disclaimer: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई जानकारी को डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह, जांच या उपचार का विकल्प न मानें। लगातार पेट दर्द, असामान्य रक्तस्राव, बिना वजह वजन कम होने या अन्य चिंताजनक लक्षणों की स्थिति में योग्य डॉक्टर से जांच कराएं।

Emraan Hashmi Career:‘सीरियल किसर’ की इमेज से परेशान हो गए थे इमरान हाशमी, फिर विलेन बनकर बदली पहचान; जानें पूरा सफर

 इमरान हाशमी हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने करियर में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी पहचान बनाई है। दो दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने रोमांटिक फिल्मों से लेकर क्राइम ड्रामा, एक्शन और नेगेटिव रोल तक में अपनी एक्टिंग का दम दिखाया है। बॉलीवुड के अलावा साउथ सिनेमा और ओटीटी पर भी वह काम कर चुके हैं।

हालांकि, करियर के शुरुआती दौर में इमरान की पहचान लंबे समय तक ‘सीरियल किसर’ के तौर पर बनी रही। एक समय ऐसा भी आया जब वह इस टैग से परेशान हो गए थे और चाहते थे कि दर्शक उन्हें सिर्फ इसी छवि तक सीमित न रखें। बाद में उन्होंने अपने काम के जरिए इस इमेज को पीछे छोड़ दिया।

‘फुटपाथ’ से शुरू हुआ एक्टिंग करियर

इमरान हाशमी का फिल्म इंडस्ट्री से पारिवारिक रिश्ता रहा है। उनका जन्म 24 मार्च 1979 को मुंबई में हुआ था। आलिया भट्ट, पूजा भट्ट और निर्देशक मोहित सूरी उनके रिश्तेदारों में शामिल हैं।

इमरान को शुरुआती दौर में फिल्म ‘ये जिंदगी का सफर’ से लॉन्च किया जाना था, लेकिन बाद में उन्हें इस प्रोजेक्ट से हटा दिया गया। इसके बाद 2003 में उन्होंने विक्रम भट्ट के निर्देशन में बनी क्राइम-एक्शन फिल्म ‘फुटपाथ’ से बॉलीवुड में कदम रखा।

हालांकि पहली फिल्म से उन्हें वैसी पहचान नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी, लेकिन जल्द ही उनकी किस्मत बदलने वाली थी।

‘मर्डर’ ने दिलाया ‘सीरियल किसर’ का टैग

साल 2004 में आई फिल्म ‘मर्डर’ इमरान हाशमी के करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई। फिल्म में उन्होंने मल्लिका शेरावत के साथ काम किया था। दोनों के बीच फिल्माए गए बोल्ड और इंटीमेट सीन्स उस समय काफी चर्चा में रहे।

फिल्म की सफलता के साथ इमरान की लोकप्रियता बढ़ी, लेकिन इसी के साथ उनकी एक खास इमेज भी बन गई। उन्हें मीडिया और दर्शकों के बीच ‘सीरियल किसर’ के नाम से जाना जाने लगा।

इसके बाद उनकी कई फिल्मों में रोमांटिक और बोल्ड सीन्स को लेकर चर्चा हुई, जिससे यह टैग उनकी पहचान का हिस्सा बन गया।

‘जन्नत’ ने बना दिया बड़ा स्टार

‘मर्डर’ के बाद इमरान हाशमी ने ‘आशिक बनाया आपने’, ‘गैंगस्टर’, ‘जहर’ और ‘आवारापन’ जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि 2008 में आई ‘जन्नत’ ने उनके करियर को एक अलग स्तर पर पहुंचा दिया।

फिल्म में इमरान ने एक ऐसे किरदार को निभाया जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। ‘जन्नत’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और इमरान को एक लोकप्रिय स्टार के तौर पर स्थापित करने में इसकी अहम भूमिका रही।

फिल्म को भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली।

जब ‘सीरियल किसर’ टैग से होने लगी परेशानी

शुरुआती दौर में इमरान के लिए यह टैग उनकी लोकप्रियता का हिस्सा था, लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि इससे उनकी अभिनय क्षमता एक ही तरह की छवि में सीमित हो रही है।

एक समय ऐसा आया जब वह चाहते थे कि दर्शक उन्हें गंभीर और अलग तरह के किरदारों में भी स्वीकार करें। उनके मुताबिक, उनकी बनी-बनाई इमेज की वजह से कई बार लोग उन्हें दूसरी तरह की भूमिकाओं में देखने के लिए तैयार नहीं होते थे।

2025 में अपनी फिल्म ‘ग्राउंड जीरो’ के प्रमोशन के दौरान एक पॉडकास्ट बातचीत में इमरान ने इस टैग पर बात करते हुए बताया था कि वह चाहते थे कि लोग उन्हें एक अभिनेता के तौर पर गंभीरता से लें।

उन्होंने यह भी कहा था कि कई बार इस छवि का इस्तेमाल फिल्मों की मार्केटिंग के लिए किया गया और कुछ फिल्मों में सिर्फ दर्शकों की अपेक्षाओं के कारण ऐसी चीजें जोड़ी गईं।

विलेन बनकर इमरान ने बदली पूरी इमेज

इमरान हाशमी की छवि बदलने में उनके नेगेटिव किरदारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साल 2023 में आई सलमान खान और कैटरीना कैफ स्टारर ‘टाइगर 3’ में उन्होंने विलेन आतिश रहमान की भूमिका निभाई।

इस किरदार में इमरान का अलग अंदाज दर्शकों के सामने आया। उन्होंने एक खतरनाक और चालाक विरोधी का किरदार निभाकर यह साबित किया कि उनकी पहचान सिर्फ रोमांटिक फिल्मों या बोल्ड सीन्स तक सीमित नहीं है।

‘टाइगर 3’ के बाद इमरान को एक अभिनेता के तौर पर अलग तरह की भूमिकाओं के लिए भी देखा जाने लगा।

साउथ सिनेमा में भी बने खतरनाक विलेन

इमरान हाशमी ने साउथ इंडियन सिनेमा में भी नेगेटिव रोल के साथ एंट्री की। पवन कल्याण स्टारर ‘They Call Him OG’ में उन्होंने गैंगस्टर ओमी भाऊ का किरदार निभाया।

इस फिल्म के जरिए इमरान ने दक्षिण भारतीय दर्शकों के सामने भी अपना एक्शन और विलेन अवतार पेश किया। फिल्म में उनका किरदार काफी दमदार और खतरनाक अंदाज में दिखाया गया।

OTT पर भी आजमाया अभिनय का अलग अंदाज

बड़े पर्दे के अलावा इमरान हाशमी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। उन्होंने 2019 में नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘बार्ड ऑफ ब्लड’ से ओटीटी पर डेब्यू किया था।

इसके बाद वह ‘शोटाइम’ जैसी वेब सीरीज में भी नजर आए। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अलग तरह के किरदारों के साथ अपनी एक्टिंग की रेंज दिखाने की कोशिश की है।

अब ‘आवारापन 2’ में लौटेंगे शिवम पंडित बनकर

इमरान हाशमी अब अपनी चर्चित फिल्म ‘आवारापन’ के सीक्वल को लेकर सुर्खियों में हैं। 2007 में रिलीज हुई ‘आवारापन’ समय के साथ दर्शकों के बीच कल्ट फिल्म के तौर पर अपनी जगह बना चुकी है।

अब इसका सीक्वल ‘आवारापन 2’ रिलीज के लिए तैयार है। फिल्म में इमरान एक बार फिर शिवम पंडित के किरदार में नजर आएंगे।

फिल्म में इमरान के साथ दिशा पाटनी और शबाना आजमी भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगी। सीक्वल को लेकर इमरान के फैंस के बीच खासा उत्साह है।

इमरान हाशमी का सफर दिखाता है कि एक अभिनेता के लिए किसी एक इमेज में बंध जाना जरूरी नहीं है। ‘सीरियल किसर’ के टैग से शुरुआत करने वाले इमरान ने रोमांटिक हीरो से लेकर विलेन और गंभीर किरदारों तक अपनी पहचान का दायरा काफी बढ़ाया है।