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डॉ.राजेश्वर सिंह की सुपुत्री के जन्मदिन की खुशियां पहुंचीं वृद्धाश्रम: राजलक्ष्मी सिंह के जन्मदिन पर बुजुर्गों के चेहरों पर आई मुस्कान ; केक काटकर मनाया गया जन्मदिन, बुजुर्गों को बांटे अंगवस्त्र, फल और उपहार; वृद्धजनों ने दिया आशीर्वाद

लखनऊ, सरोजनीनगर। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की बेटी राजलक्ष्मी सिंह का जन्मदिन इस बार कुछ अलग अंदाज में मनाया गया।

जन्मदिन की खुशियां परिवार और दोस्तों तक सीमित रखने के बजाय वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के साथ साझा की गईं। इस दौरान केक काटकर बुजुर्गों के साथ जन्मदिन मनाया गया और उन्हें फल, अंगवस्त्र तथा उपहार वितरित किए गए।

विधायक प्रतिनिधि प्रदीप मिश्रा वृद्धाश्रम पहुंचे और वहां मौजूद बुजुर्गों से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम जानी।

जन्मदिन के अवसर पर बुजुर्गों ने राजलक्ष्मी सिंह को स्नेह और आशीर्वाद दिया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम में पार्षद रामनरेश रावत, पार्षद प्रतिनिधि लवकुश रावत, पार्षद गीता देवी, पार्षद केएन सिंह सहित भाजपा के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने वृद्धजनों के साथ समय बिताया और उनके अनुभवों एवं जरूरतों को जाना।

विधायक प्रतिनिधि प्रदीप मिश्रा ने कहा कि डॉ. राजेश्वर सिंह समाजसेवा और संस्कारों को विशेष महत्व देते हैं। राजलक्ष्मी के जन्मदिन को वृद्धाश्रम में मनाने का उद्देश्य बुजुर्गों के साथ खुशियां साझा करने और उनके प्रति सम्मान एवं संवेदना का संदेश देने का है।

उन्होंने कहा कि जन्मदिन पर मिले उपहार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना और बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करना है। वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच मनाया गया यह जन्मदिन इसी भावना का संदेश देता नजर आया।

अन्न की बर्बादी रोकना किसान की मेहनत और प्रकृति के संसाधनों का सम्मान: डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ: International Day of Awareness of Food Loss and Waste के अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि अन्न की बर्बादी केवल भोजन का नुकसान नहीं है। इसके साथ किसान का श्रम और पानी, भूमि तथा ऊर्जा जैसे बहुमूल्य संसाधन भी व्यर्थ होते हैं।

FAO के अनुसार :

  • दुनिया में उत्पादित भोजन का लगभग 13% हिस्सा retail तक पहुँचने से पहले नष्ट हो जाता है।
  • उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध भोजन का करीब 19% हिस्सा retail, food services और घरों में बर्बाद होता है।
  • यह कुल बर्बादी लगभग 1.05 अरब टन भोजन प्रतिवर्ष है।
  • Food Loss & Waste से वैश्विक greenhouse-gas emissions का लगभग 8-10% जुड़ा है।

डॉ. सिंह ने कहा कि ये आँकड़े बताते हैं कि खेत से बाजार और बाजार से थाली तक उपज को सुरक्षित पहुँचाना, उत्पादन बढ़ाने जितना ही महत्वपूर्ण है। भोजन की बर्बादी कम करना खाद्य सुरक्षा, किसान हित और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में जरूरी कदम है।

बेहतर भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था की जरूरत

बेहतर भंडारण, cold-chain, परिवहन, food processing और value addition से फसल के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना जैसी पहलें आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हैं।

पहल घर और थाली से

उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत हर घर से हो सकती है—जितनी जरूरत हो उतना ही भोजन लें, भोजन का सही भंडारण करें, बचे हुए भोजन का उपयोग करें और जैविक कचरे से खाद बनाने जैसी आदतें अपनाएं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि Net Zero Sarojininagar के व्यापक विजन में संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग महत्वपूर्ण है। सौर ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और जल संरक्षण के साथ भोजन की बर्बादी रोकना भी टिकाऊ और Net Zero भविष्य की दिशा में जरूरी कदम है।

अन्न का सम्मान किसान की मेहनत और प्रकृति के संसाधनों का सम्मान है। अन्न का हर दाना-किसान, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए अनमोल है।

TRAI का बड़ा फैसला: बिना डेटा वाले मोबाइल रिचार्ज में अब मिलेंगे छोटे वैधता विकल्प, 30 दिन का प्लान भी अनिवार्य ; लिक में क्लिक करें और विस्तार से पढ़ें पूरी खबर

नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026: मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने बड़ा बदलाव किया है। TRAI ने Telecom Consumers Protection (Thirteenth Amendment) Regulations, 2026 को अंतिम रूप देते हुए टेलीकॉम कंपनियों के लिए Voice और SMS-only Special Tariff Vouchers (STVs) की उपलब्धता बढ़ाना अनिवार्य कर दिया है।

नए नियमों का उद्देश्य ऐसे उपभोक्ताओं को राहत देना है जिन्हें मोबाइल डेटा की जरूरत नहीं है और जो केवल कॉल तथा SMS सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। TRAI की आधिकारिक वेबसाइट पर यह विनियमन 22 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।

छोटी अवधि के रिचार्ज विकल्प देना होगा अनिवार्य

TRAI के नए प्रावधान के तहत यदि कोई टेलीकॉम कंपनी Voice, SMS और Data वाले STV को 30 दिन या उससे कम अवधि के लिए उपलब्ध कराती है, तो उसी अवधि के अनुरूप केवल Voice और SMS वाला STV भी उपलब्ध कराना होगा। यानी उपभोक्ता को ऐसी अवधि के लिए डेटा वाला पैक लेने के लिए बाध्य नहीं होना पड़ेगा, जब उसे केवल कॉल और SMS की जरूरत हो।

इसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो कम अवधि का रिचार्ज चाहते हैं। TRAI ने अपने विस्तृत स्पष्टीकरण में कहा है कि पहले उपलब्ध Voice-SMS-only STV मुख्य रूप से 80/84 दिन अथवा 336/365 दिन जैसी लंबी वैधता वाले थे, जिससे कम आय वाले उपभोक्ताओं के सामने एकमुश्त अधिक भुगतान की समस्या आती थी।

30 दिन का विकल्प और हर महीने उसी तारीख पर रिन्यूअल

नए नियम में मासिक वैधता वाले Voice और SMS-only STV का भी प्रावधान किया गया है। ऐसा STV हर महीने उसी तारीख को रिन्यू किया जा सकेगा जिस तारीख को उसका पिछला रिन्यूअल हुआ था। यदि किसी महीने में वह तारीख उपलब्ध नहीं है, तो उस महीने की अंतिम तारीख को रिन्यूअल किया जाएगा।

इससे उपभोक्ताओं को हर महीने अलग-अलग दिनों की वैधता के बजाय एक निश्चित मासिक चक्र के अनुरूप रिचार्ज रखने का विकल्प मिलेगा।

30 दिन से कम अवधि वाले प्लान भी आएंगे

TRAI ने केवल 30 दिन के विकल्प तक व्यवस्था सीमित नहीं रखी है। टेलीकॉम कंपनियों को 30 दिन से कम वैधता वाले Voice और SMS-only STV भी उपलब्ध कराने होंगे, जहां संबंधित अवधि के Voice-SMS-Data STV बाजार में पेश किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य छोटी अवधि के लिए कम राशि में मोबाइल सेवा जारी रखने का विकल्प उपलब्ध कराना है।

लंबी वैधता वाला कम से कम एक Voice-SMS-only STV भी जरूरी

नए नियम में लंबी अवधि के उपभोक्ताओं का भी ध्यान रखा गया है। प्रत्येक सेवा प्रदाता को कम अवधि और मासिक विकल्पों के अलावा कम से कम एक ऐसा Voice और SMS-only STV उपलब्ध कराना होगा जिसकी वैधता अधिक हो और जो कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे किसी लंबे Voice-SMS-Data STV की वैधता के अनुरूप हो।

डेटा नहीं तो टैरिफ में उचित कमी करनी होगी

TRAI ने स्पष्ट किया है कि केवल Voice और SMS उपलब्ध कराने वाले STV में उचित टैरिफ कटौती होनी चाहिए। यानी जिस पैक में डेटा शामिल नहीं है, उसकी कीमत संबंधित Voice-SMS-Data पैक के मुकाबले डेटा घटने के अनुरूप कम होनी चाहिए। हालांकि TRAI ने कोई एक निश्चित प्रतिशत छूट तय नहीं की है; अंतिम विनियमन में “appropriate reduction in tariff” का प्रावधान किया गया है।

TRAI के अनुसार अलग-अलग प्रकार के डेटा पैक—जैसे एकमुश्त डेटा और प्रतिदिन निर्धारित डेटा सीमा वाले पैक—की लागत संरचना अलग होती है। इसलिए कंपनियों को डेटा घटाने के आधार पर उचित मूल्य निर्धारण करना होगा, लेकिन TRAI ने सीधे किसी एक निश्चित कीमत या प्रतिशत को निर्धारित नहीं किया है।

क्यों पड़ी नए नियम की जरूरत ?

TRAI के मुताबिक दिसंबर 2024 में 12वें संशोधन के जरिए कंपनियों को कम से कम एक Voice और SMS-only STV उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था। इसके बाद कंपनियों ने ऐसे कुछ STV तो पेश किए, लेकिन वे मुख्य रूप से लंबी वैधता वाले थे। छोटी अवधि के Voice-SMS-only विकल्प पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए।

TRAI ने यह भी पाया कि Voice-SMS-only विकल्पों की तुलना में Voice-SMS-Data वाले पैक कई अलग-अलग वैधताओं में उपलब्ध थे। इससे उन उपभोक्ताओं के विकल्प सीमित हो जाते थे जिन्हें डेटा की जरूरत नहीं थी और वे अनावश्यक रूप से डेटा वाले पैक लेने को मजबूर हो सकते थे।

कम आय वाले, ग्रामीण और फीचर फोन उपयोगकर्ताओं पर विशेष ध्यान

TRAI ने अपने विस्तृत दस्तावेज में विशेष रूप से कम आय वाले उपभोक्ताओं, ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं, वरिष्ठ नागरिकों और फीचर फोन उपयोगकर्ताओं की जरूरतों का उल्लेख किया है। ऐसे उपभोक्ताओं में कई ऐसे हैं जिन्हें मुख्य रूप से Voice और SMS की आवश्यकता होती है और मोबाइल डेटा की जरूरत सीमित या नहीं होती।

नए ढांचे के पीछे यही विचार है कि उपभोक्ता अपनी जरूरत और आर्थिक क्षमता के अनुसार केवल उन्हीं सेवाओं के लिए भुगतान कर सके जिनका वह इस्तेमाल करना चाहता है।

1132 प्रतिक्रियाओं के बाद हुआ अंतिम फैसला

TRAI ने यह बदलाव सीधे लागू नहीं किया बल्कि विस्तृत परामर्श प्रक्रिया के बाद अंतिम रूप दिया। 7 अप्रैल 2026 को संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया गया। इसके बाद हितधारकों से टिप्पणियां और प्रति-टिप्पणियां मांगी गईं। TRAI को कुल 1,132 प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं और 15 जून 2026 को Open House Discussion भी आयोजित किया गया। इसके बाद प्राप्त सुझावों और अपने विश्लेषण के आधार पर अंतिम विनियमन तैयार किया गया।

बंडल पैक बंद नहीं होंगे

महत्वपूर्ण बात यह है कि नए नियमों का मतलब यह नहीं है कि डेटा वाले मौजूदा पैक खत्म हो जाएंगे। TRAI ने स्पष्ट किया है कि Voice-SMS-only STV मौजूदा Voice-SMS-Data पैक के अतिरिक्त विकल्प होंगे। जिन उपभोक्ताओं को डेटा सहित बंडल पैक चाहिए, वे उन्हें अपनी पसंद के अनुसार जारी रख सकेंगे।

नियम कब लागू होंगे?

TRAI की अधिसूचना के अनुसार Telecom Consumers Protection (Thirteenth Amendment) Regulations, 2026 राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 30 दिन बाद प्रभावी होंगे।

कुल मिलाकर, नए नियमों से मोबाइल उपभोक्ताओं के सामने Voice और SMS के लिए छोटी अवधि, 30 दिन की मासिक वैधता और कम से कम एक लंबी अवधि वाले अलग STV का विकल्प सुनिश्चित करने का ढांचा तैयार हुआ है। TRAI का कहना है कि इससे उपभोक्ता अपनी जरूरत, उपयोग और आर्थिक क्षमता के अनुसार टेलीकॉम सेवा चुन सकेंगे।

पांच बड़ी बातें

  • Voice-SMS-only रिचार्ज में 30 दिन और उससे कम अवधि के विकल्प उपलब्ध कराने होंगे।
  • हर महीने एक ही तारीख पर रिन्यू होने वाला STV देना होगा; तारीख न होने पर महीने की आखिरी तारीख को रिन्यूअल होगा।
  • कम से कम एक लंबी वैधता वाला Voice-SMS-only STV भी अनिवार्य होगा।
  • डेटा हटाए जाने के अनुरूप Voice-SMS-only STV के टैरिफ में उचित कमी करनी होगी।
  • नियम राजपत्र में प्रकाशन के 30 दिन बाद लागू होंगे।

अंतरिक्ष बन रहा युद्ध का नया मोर्चा, भारत के युवाओं को Innovation और R&D की शक्ति बनना होगा: डॉ. राजेश्वर सिंह

  • “कल तलवार थी, आज Code, Satellites और AI हैं”
  • सीमा पर जवान और Laboratory में वैज्ञानिक, दोनों राष्ट्र के रक्षक

लखनऊ : अंतरिक्ष में तेजी से बढ़ती सैन्य और तकनीकी क्षमताओं ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि Space और Cyber Space भी रणनीतिक संघर्ष के महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकते हैं। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने बदलते युद्ध के स्वरूप पर चिंता जताते हुए भारत से अपनी Space Defence, Innovation, Research एवं Advanced Technology क्षमताओं को और मजबूत करने का आह्वान किया है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि दुनिया तेजी से ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां किसी देश की सैन्य शक्ति का आकलन केवल उसके टैंक, मिसाइल या लड़ाकू विमानों से नहीं, बल्कि उसके Satellites, Artificial Intelligence, Cyber Capabilities, Data Networks और Space-Based Technologies से भी होगा। ऐसे में भारत के लिए अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारियों को समानांतर रूप से मजबूत करना आवश्यक है।

Space अब केवल Research नहीं, National Security का भी अहम क्षेत्र

डॉ. सिंह ने कहा कि अमेरिका की Space-based military capabilities, चीन और रूस की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताएं तथा अमेरिका की Golden Dome missile-defence पहल वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में हो रहे बदलावों के संकेत हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार Golden Dome की प्रस्तावित architecture में space-based sensors और interceptors सहित land, sea और space आधारित technologies को एकीकृत करने की योजना शामिल है। (Defense.gov)

उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य अभियानों में Satellites की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। Communication, Navigation, Surveillance, Intelligence और विभिन्न सैन्य प्रणालियां अंतरिक्ष आधारित infrastructure पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी देश के महत्वपूर्ण space assets को निशाना बनाना उसकी communication और situational awareness क्षमताओं को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिकी Space Force भी space domain awareness, resilient satellite architecture और counter-space capabilities को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनाती है, जो यह दर्शाता है कि अंतरिक्ष अब वैश्विक सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। (Defense.gov)

Mission Shakti से SBS-3 तक, बढ़ रही भारत की Space Defence Capability

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत ने भी अपनी अंतरिक्ष-आधारित सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वर्ष 2019 में Mission Shakti के माध्यम से भारत ने Anti-Satellite (ASAT) क्षमता का सफल प्रदर्शन किया था।

इसके बाद भारत ने Space-Based Surveillance को मजबूत करने की दिशा में भी बड़े कदम उठाए हैं। Space-Based Surveillance-3 (SBS-3) programme के तहत 52 surveillance satellites की योजना को मंजूरी दी गई है। सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹26,968 करोड़ है और इसमें 21 satellites ISRO तथा 31 satellites private sector द्वारा बनाए जाने की योजना बताई गई है। (Hindustan Times)

यह programme भारत की land और maritime domain awareness को मजबूत करने तथा देश की surveillance capabilities को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (MP-IDSA)

“युद्ध के हथियार बदल रहे हैं, इसलिए तैयारी का तरीका भी बदलना होगा”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि तकनीक ने युद्ध की परिभाषा को तेजी से बदल दिया है। उन्होंने कहा,

“सीमा पर खड़ा जवान और Laboratory में काम करता वैज्ञानिक, दोनों देश के रक्षक हैं। युद्ध के हथियार और तरीके बदल रहे हैं- कल तलवार थी, आज Code, Satellites और AI हैं।”

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जिस देश के पास अत्याधुनिक Research, Artificial Intelligence, Cyber Security, Space Technology, Advanced Computing और Indigenous Defence Technologies की मजबूत क्षमता होगी, वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को बेहतर तरीके से मजबूत कर सकेगा।

R&D और Private Innovation में बढ़े निवेश पर जोर

डॉ. सिंह ने भारत में Research and Development (R&D) पर सार्वजनिक और निजी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के Universities, Research Institutions, Start-ups, Defence Industry और Technology Companies को एक साथ लाकर ऐसी innovation ecosystem तैयार करने की जरूरत है, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए अत्याधुनिक तकनीक विकसित कर सके।

उन्होंने Scientists, Engineers, Researchers और Innovators को बेहतर अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार केवल imported technology पर निर्भर रहने के बजाय भारत को अपनी strategic technologies के विकास में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

युवाओं से Innovation और Research को Career का हिस्सा बनाने का आह्वान

डॉ. राजेश्वर सिंह ने देश के युवाओं से केवल पारंपरिक career विकल्पों तक सीमित न रहने और Innovation, Coding, Artificial Intelligence, Robotics, Space Technology, Cyber Security, Electronics और Advanced Research जैसे क्षेत्रों में आगे आने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी technological strength बन सकती है। यदि युवाओं की ऊर्जा को Research और Innovation से जोड़ा जाए तो भारत न केवल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत कर सकता है, बल्कि वैश्विक Space और Technology ecosystem में भी अपनी भूमिका और बढ़ा सकता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारी केवल सीमा पर हथियारों से नहीं होती, बल्कि Research Laboratories, Universities और Innovation Centres में भी होती है। इसलिए भारत के लिए अपनी technological strength को लगातार बढ़ाना और भविष्य की चुनौतियों के लिए अभी से तैयार रहना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए तैयारी का समय अभी है- क्योंकि भविष्य की सुरक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि Technology, Data, Cyber Space और Space में भी तय होगी।

यूपीआईटीएस 2026 में जालौन की पहचान बना रहा ‘कागज सखी’ : अनुरागिनी संस्था द्वारा इंफोसिस फाउंडेशन के सहयोग से कालपी के हस्तनिर्मित उत्पादों का कदौरा विकास खंड के ग्राम नाका की वंदना कर रही अपने हुनर का प्रदर्शन

लखनऊ : उरई (जालौन) जनपद के कालपी क्षेत्र की पारंपरिक हस्तनिर्मित कागज कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिल रही है। उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी 2026 में ‘कागज सखी’ अपने हस्तनिर्मित एवं पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का प्रदर्शन कर रही है। इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच पर कागज सखी जनपद जालौन की स्थानीय कला, महिला उद्यमिता और आजीविका की संभावनाओं को प्रस्तुत कर रही है यूपीआईटीएस में कागज सखी का प्रतिनिधित्व जनपद जालौन के विकासखंड कदौरा के ग्राम नाका की रहने वाली वंदना द्वारा किया जा रहा है।

वंदना ने अनुरागिनी संस्था के माध्यम से हस्तनिर्मित कागज उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और अब वह यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच पर कागज सखी तथा जालौन की महिला कारीगरों के उत्पादों को प्रस्तुत कर रही हैं। यह जानकारी देते हुए संस्था के समन्वयक श्याम करन प्रजापति ने बताया कि अनुरागिनी संस्था वर्ष 1996 से ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत है।

संस्था का उद्देश्य महिलाओं और युवाओं को स्वावलंबी बनाना तथा स्थानीय संसाधनों एवं पारंपरिक कौशल को स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ना है।अनुरागिनी संस्था द्वारा इंफोसिस फाउंडेशन एवं सक्षम – द चेंज मेकर्स ट्रस्ट के सहयोग से संचालित कागज सखी पहल का उद्देश्य कालपी क्षेत्र की महिला कारीगरों को हस्तनिर्मित कागज उत्पादों के निर्माण, कौशल विकास, उद्यमिता और बाजार से जोड़ना है।इस पहल के अंतर्गत मार्च माह में अनुरागिनी संस्था द्वारा 50 महिलाओं को हस्तनिर्मित कागज से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को उत्पाद निर्माण के साथ-साथ डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।

कागज सखी के उत्पादों की डिजाइन एवं उनमें नवीन तकनीकों के समावेश के लिए आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोज़गार शिक्षण केंद्र द्वारा अनुरागिनी संस्था को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इस मार्गदर्शन से पारंपरिक हस्तनिर्मित कागज कला को आधुनिक डिजाइन, उपयोगिता और नवीन तकनीकों के साथ जोड़ने में सहायता मिली, जिससे तैयार उत्पाद बाजार की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए जा सकें।उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी 2026 में कागज सखी के स्टॉल पर हस्तनिर्मित कागज से तैयार बैग, डायरी, लिफाफे, लैम्प, पेन स्टैंड, उपहार पैक, स्टेशनरी एवं अन्य उपयोगी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

इन उत्पादों में कालपी की पारंपरिक हस्तकला के साथ आधुनिक डिजाइन, उपयोगिता और पर्यावरण-अनुकूलता का समावेश किया गया है।इस प्रदर्शनी के माध्यम से कागज सखी के उत्पादों को देशभर के खरीदारों, कॉर्पोरेट संस्थानों, आगंतुकों एवं संभावित बाजारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से कॉर्पोरेट उपहार, थोक ऑर्डर और नए बाजारों से जुड़ने के अवसर तलाशे जा रहे हैं।कागज सखी से जुड़ी महिला कारीगरों के लिए उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी 2026 में भागीदारी उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

कालपी की महिलाओं के हाथों से तैयार ये हस्तनिर्मित कागज उत्पाद अब उत्तर प्रदेश के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।कागज सखी का स्टॉल उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी 2026 में आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां कालपी की पारंपरिक कला, आधुनिक डिजाइन, महिला उद्यमिता और स्थानीय आजीविका की कहानी एक साथ देखने को मिल रही है।