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Health Tips: हफ्ते में सिर्फ दो बार इंस्टेंट नूडल्स खाना भी जानलेवा हो सकता है, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है

आजकल भागदौड़ भरी लाइफ में लोगों ने इंस्टेंट नूडल्स को पसंदीदा मील बना लिया है। झटपट से बन जाता है और खाने में भी टेस्टी है। घर की बोरिंग सब्जी किसे पसंद आती है, सब्जी पसंद नहीं आई तो इंस्टेंट नूडल्स को बना लिया। इनमें सबसे ज्यादा मैदा पाई जाती है जो सेहत के लिए हानिकारक भी है। इसके अत्यधिक सेवन करने से मोटापा बढ़ता है।  इंस्टेंट नूडल्स खाने से सिर्फ वजन बढ़ता है और इसका कोई और नुकसान नहीं है, तो आप यह गलत सोच रहे हैं। लगातार इंस्टेंट नूडल्स खाने से शरीर को काफी नुकसान पहुंचता है। यदि आप हफ्ते में 2-3 बार इंस्टेंट नूडल्स खाते हैं, तो यह वाकई हानिकारक है। आइए आपको बताते हैं इसके सेवन से क्या नुकसान हो सकता है।

अत्यधिक इंस्टेंट नूडल्स खाने से शरीर में क्या होता है

– हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, यदि आप हफ्ते में 2-3 बार इंस्टेंट नूडल्स खाते हैं, तो इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इन नूडल्स में अत्यधिक सोडियम होता है, जो बीपी बढ़ सकता है। 

– इनमें रिफाइंड कार्ब्स की मात्रा अधिक होती है। इससे शुगर स्पाइक होता है और ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।

– इसमें पाए जाने वाले  एमएसजी और कई प्रकार के एडेक्टिव्स गट और ब्रेन हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, इसमें प्रोटीन और फाइबर नहीं होता, जिससे इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और फिर क्रेविंग्स बढ़ जाती है।

– इसके सेवन से बीपी और कोलेस्ट्रोल बढ़ सकता है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यह शरीर को कमजोर भी कर देता है।

– काफी समय से  इंस्टेंट नूडल्स खाने से स्ट्रोक, डायबिटीज और अन्य कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, पैकेजिंग में बीपीए होता है, जो खतरनाक केमिकल है। इससे बॉडी का नेचुरल बैलेंस बिगड़ जाता है। इतना ही नहीं, यह हार्मोन से जुड़ी दिक्कते पैदा कर सकता है और फर्टिलिटी में परेशानी हो सकती है।

Sports News:टीम इंडिया की वर्ल्ड कप में धमाकेदार शुरुआत, श्रीलंका को 59 रन से करारी शिकस्त

भारत ने वर्ल्ड कप के पहले मैच में श्रीलंका को 59 रनों से हरा दिया है. ये महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 (Womens ODI World Cup 2025) का पहला मैच रहा, जिसमें बारिश ने भी खलल डाला. टीम इंडिया ने पहले खेलते हुए 269 रन बनाए थे, लेकिन बारिश के कारण DLS नियम अमल में लाया गया, जिसकी वजह से श्रीलंका को 47 ओवरों में 271 रनों का लक्ष्य मिला. इस टारगेट का पीछा करते हुए श्रीलंकाई टीम सिर्फ 211 रनों पर ऑलआउट हो गई.

भारतीय टीम के लिए प्रतिका रावल ने 37 रन, हरलीन देओल ने 48 रन और दीप्ति शर्मा ने 53 रनों की दमदार अर्धशतकीय पारी खेली. इस पारी में सबसे ज्यादा समां अमनजोत कौर और स्नेह राणा ने बांधा. आठवें क्रम पर बैटिंग करते हुए कौर ने 56 गेंद में 57 रन की शानदार पारी खेली. वहीं नंबर-9 बल्लेबाज स्नेह राणा 15 गेंद में 28 रनों की छोटी लेकिन तूफानी पारी खेल भारत को 269 के बड़े स्कोर तक पहुंचाया था.

पूरे मैच में रहा दीप्ति शर्मा का जलवा

दीप्ति शर्मा के ऑलराउंडर प्रदर्शन ने भारत की श्रीलंका पर जीत में बड़ा योगदान दिया. पहली पारी में दीप्ति शर्मा तब बैटिंग करने आईं, जब भारत के 4 विकेट 120 रन पर गिर गए थे. इसके बाद उन्होंने अमनजोत कौर के साथ मिलकर 103 रनों की पार्टनरशिप की. उन्होंने 53 गेंद में 53 रन बनाए. वहीं जब गेंदबाजी की बारी आई, तो यहां भी उन्होंने 3 विकेट लेकर जलवा बिखेरा. उन्होंने 9 ओवर में 54 रन देकर 3 विकेट झटके.

श्रीलंका ने भी अंतिम ओवरों तक हार नहीं मानी, जिसके 6 विकेट सिर्फ 140 रनों पर गिर गए थे. उसके बाद नीलाक्शी डी सिल्वा ने 35 रनों की पारी खेली, लेकिन उन्हें स्नेह राणा ने क्लीन बोल्ड कर दिया. कुलासूर्या भी काफी देर तक क्रीज पर डटी रहीं, लेकिन अपनी पारी को 17 रन से आगे नहीं बढ़ा पाईं.

भारत की ओर से सभी गेंदबाजों ने कम से कम एक विकेट जरूर लिया. दीप्ति शर्मा ने 3 विकेट, वहीं स्नेह राणा और श्री चरणी ने दो-दो विकेट झटके. उनके अलावा क्रान्ति गौड़, अमनजोत कौर और प्रतिका रावल ने एक-एक विकेट लिया.

Sports News:शाहिद अफरीदी का चौंकाने वाला खुलासा – कहा, अगर इंडिया एशिया कप फाइनल हारती तो पाकिस्तान क्या करता

एशिया कप 2025 का खिताब जीतकर भारतीय टीम अपनी अगली सीरीज (IND vs WI) के लिए तैयारी शुरू कर चुकी है. सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया ने रविवार को खेले गए एशिया कप फाइनल मैच में पाकिस्तान को 5 विकेट से हराया. हालांकि टूर्नामेंट की ट्रॉफी मोहसिन नकवी ने बाहर भिजवा दी, जब उन्हें पता चला कि टीम इंडिया उनके हाथ से ट्रॉफी नहीं लेना चाहती. इस बीच सामने आया है कि अगर पाकिस्तान फाइनल जीत जाता तो क्या करता, ये खुलासा किया पूर्व क्रिकेटर्स शाहिद अफरीदी और मुहम्मद यूनुस ने.

एशिया कप 2025 में फाइनल समेत 3 मैच भारत और पाकिस्तान के बीच हुए, पहले मुकाबले में सूर्यकुमार यादव एंड टीम ने पाकिस्तान के प्लेयर्स से हाथ नहीं मिलाया था. पीसीबी और उनकी टीम इसके बाद बौखला सी गई, सुपर-4 में उनके प्लेयर्स ने फील्ड पर ही टीम इंडिया को चिढ़ाने के इरादे से शर्मनाक हरकते कीं. फाइनल जीतकर सूर्यकुमार यादव ने ऐलान किया कि वह टूर्नामेंट में खेले सभी 7 मैचों की अपनी फीस इंडियन आर्मी को डोनेट कर रहे हैं.

अगर हार जाती टीम इंडिया तो क्या करता पाकिस्तान?

फाइनल से पहले पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी और मुहम्मद यूनुस ने खुलासा करते हुए बताया था कि अगर फाइनल में पाकिस्तान टीम ने भारत को हराया तो वो क्या करेंगे. उन्होंने बताया था कि अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान टीम इस जीत को पाकिस्तान एयर फाॅर्स को समर्पित करेगा. अफरीदी ने तो यह भी खुलासा किया था कि उन्होंने खुद ये आईडिया पाकिस्तान के प्लेयर्स को दिया था.

हालांकि पाकिस्तान का ये सपना पूरा नहीं हो सका कि वह जीत अपनी आर्मी या एयरफोर्स को समर्पित करे. बता दें कि ग्रुप स्टेज में पाकिस्तान को हराकर सूर्यकुमार यादव ने उस जीत को भारतीय सशस्त्र बलों और पहलगाम पीड़ितों को समर्पित की थी, जिसके बाद पीसीबी ने सूर्या की शिकायत आईसीसी से की थी.

आखिरी ओवर तक गया था फाइनल

हालांकि एशिया कप फाइनल में पाकिस्तान ने कड़ी टक्कर दी थी. 147 का पीछा करते हुए भारत के टॉप 3 विकेट मात्र 20 रन पर गिर गए थे, उसके बाद तिलक वर्मा और संजू सैमसन के बीच 57 रनों की साझेदारी हुई. संजू 24 रन बनाकर आउट हुए, फिर तिलक ने शिवम दुबे के साथ मिलकर 60 रनों की साझेदारी की.

दुबे 19वें ओवर की आखिरी गेंद पर आउट हुए थे.भारत को जीत के लिए आखिरी ओवर में 10 रन चाहिए थे. हारिस रउफ द्वारा डाले गए अंतिम ओवर में तिलक वर्मा ने छक्का लगाया, चौथी गेंद पर रिंकू सिंह ने विनिंग शॉट लगाया और भारत ने 5 विकेट से फाइनल जीत लिया. तिलक वर्मा ने नाबाद 69 रन बनाए, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया.

आसिम मुनीर के विवादित फैसले से मचा हंगामा, PAK आर्मी को जारी किया सख्त आदेश, डेथ स्क्वॉड भी सक्रिय किया गया

पाकिस्तान के एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने मंगलवार को कहा कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना द्वारा कम से कम चार बलूच नागरिकों को जबरन गायब कर दिया गया है, क्योंकि प्रांतभर में जबरन गायब करने की बढ़ती लहर के बीच उत्पीड़न का चक्र जारी है.

बलूच राष्ट्रीय आंदोलन के मानवाधिकार विभाग, पांक ने बताया कि 27 सितंबर को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने केच जिले के गिल्ली बुलेदा के दो निवासियों का अपहरण कर लिया. एक दिहाड़ी मजदूर, मुराद जान को उसके खेत जाते समय जबरन गायब कर दिया गया, जबकि अब्दुल हकीम को उसी इलाके में उसके घर से अगवा कर लिया गया. मानवाधिकार संस्था ने बताया कि दो दिन बाद, 29 सितंबर को, केच जिले की बुलेदा तहसील के गरदंक के एक दुकानदार शेर अली को भी पाकिस्तानी सेना ने जबरन गायब कर दिया.

अर्ज मुहम्मद बुलेदा से गायब

मंगलवार को, सीमा पार व्यापार में लगे एक ड्राइवर और पंजगुर ज़िले के पारूम निवासी निजार अर्ज मुहम्मद को पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने बुलेदा से जबरन गायब कर दिया, और उसका ठिकाना अज्ञात है. पांक ने कहा, “ये लगातार अपहरण बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के चल रहे चलन को उजागर करते हैं, जिसमें बिना किसी उचित प्रक्रिया या जवाबदेही के नागरिकों को निशाना बनाया जाता है.”

डेथ स्क्वॉड ने बरसाईं गोलियां

बलूच नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों पर प्रकाश डालते हुए, पांक ने कहा कि सोमवार को पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड के सदस्यों ने पंजगुर के झाईन इलाके में गोलीबारी की, जिसमें दो स्थानीय निवासी घायल हो गए. स्थानीय सूत्रों का हवाला देते हुए, मानवाधिकार संस्था ने बताया कि हमलावर ईरान निर्मित टोयोटा कार में आए और अंधाधुंध गोलीबारी की. घायलों की पहचान यूसुफ और उजैर के रूप में हुई है, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है.

अगस्त में 123 अपरण, 26 कत्ल

हाल ही में, बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) ने बलूचिस्तान में व्यापक मानवाधिकार उल्लंघनों का दस्तावेजीकरण किया है, जिसमें अगस्त महीने में पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए 123 जबरन गायब होने और 26 हत्याएं शामिल हैं.

106 लोग लापता, 12 रिहा

अपनी रिपोर्ट में, एचआरसीबी ने विस्तार से बताया कि अगस्त 2025 में जबरन गायब होने के 123 मामले दर्ज किए गए. इनमें से 106 लोग लापता हैं, 12 को रिहा कर दिया गया और पाँच को हिरासत में रहते हुए न्यायेतर तरीके से मार दिया गया. बलूचिस्तान के लोग वर्तमान में पाकिस्तान से अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

बलूचिस्तान के विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार प्रांत में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे दमन को उजागर किया है, जिसमें बलूच नेताओं और नागरिकों के घरों पर हिंसक छापे, गैरकानूनी गिरफ्तारियाँ, जबरन गायब करना, ‘मार डालो और फेंक दो’ की नीति, लोक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी अध्यादेश के तहत नजरबंदी और मनगढ़ंत पुलिस मामले दर्ज करना शामिल है.

भारत-पाक सीजफायर पर ट्रंप से आसिम मुनीर ने क्या बातचीत की? बड़ा खुलासा सामने आया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि मई महीने में उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में अहम भूमिका निभाई थी. ट्रंप ने कहा कि उनकी दखलअंदाजी ने एक बड़े संघर्ष को बढ़ने से रोका और पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने उन्हें बताया कि उन्होंने लाखों लोगों की जान बचाई. ट्रंप ने इसे ‘बेहद खूबसूरत कदम’ बताया.

ट्रंप के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख उनसे मिलने आए थे. उस दौरान मुनीर ने कहा, “इस शख्स ने लाखों जिंदगियां बचाई हैं क्योंकि इन्होंने युद्ध को रोक दिया.” ट्रंप ने आगे कहा कि उस वक्त हालात बेहद गंभीर थे और संघर्ष चार दिन तक चला, जिसमें सात लड़ाकू विमानों को मार गिराए जाने की खबरें थीं.

क्या बोले ट्रंप?

उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान आमने-सामने थे. मैंने दोनों को फोन किया और कहा कि अगर युद्ध शुरू किया तो व्यापार बंद कर दूंगा. आप दो परमाणु राष्ट्र हैं, ऐसा नहीं हो सकता. मैंने इस युद्ध को रोका.” हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि सात विमानों का नुकसान किस देश को हुआ.

भारत ने बार-बार ठुकराया है ट्रंप का दावा

भारत ने ट्रंप के इस दावे को बार-बार खारिज किया है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान के साथ युद्धविराम को लेकर समझौता सीधे दोनों देशों के डीजीएमओ (Directors General of Military Operations) के बीच हुई बातचीत से हुआ था, न कि किसी बाहरी हस्तक्षेप से. इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देते हुए दावा किया कि उनकी वायुसेना ने मई की झड़प के दौरान सात भारतीय लड़ाकू विमान गिराए. उन्होंने कहा, “हमारे फाल्कन्स ने उड़ान भरी और 7 भारतीय जेट्स को कबाड़ बना दिया.”

हालांकि सैटेलाइट तस्वीरों ने पाकिस्तान की इस कहानी को गलत साबित कर दिया. इमेजरी से पता चलता है कि भारतीय हमलों ने पाकिस्तान के एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचाया था, जहां हैंगर और रनवे तबाह हुए, जबकि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई नाकाम रही.

ट्रंप ने इस घटना का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई कि शायद उन्हें इसके लिए नोबेल शांति पुरस्कार न मिले, जबकि यह सम्मान किसी ऐसे व्यक्ति को दिया जा सकता है “जिसने कुछ भी नहीं किया”. हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता व्यक्तिगत पहचान नहीं बल्कि देश का हित है.