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Sports News:वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का दमदार प्रदर्शन, पाकिस्तान को 12-0 से हराकर अजेय रिकॉर्ड बरकरार

महिला वर्ल्ड कप 2025 में भारत ने पाकिस्तान को 88 रनों से हरा दिया है. इस जीत के साथ टीम इंडिया ने वनडे क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ अपने अजेय रिकॉर्ड को बरकरार रखा है. भारत-पाकिस्तान 12 बार वनडे मैच खेले हैं, जिनमें हर बार भारतीय टीम विजयी रही है. कोलंबो में खेले गए वर्ल्ड कप के मैच में टीम इंडिया ने पहले खेलते हुए 247 रन बनाए थे, जवाब में पूरी पाकिस्तान टीम सिर्फ 159 रनों पर ऑलआउट हो गई.

कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए इस वर्ल्ड कप मैच में भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी. स्लो पिच पर कोई भी भारतीय बल्लेबाज पचासा नहीं जड़ पाया. भारत के लिए हरलीन देओल ने सबसे ज्यादा 46 रन बनाए. प्रतिका रावल ने 31 और जेमिमा रोड्रीगेज ने 32 रन बनाए, वहीं अंतिम ओवरों में रिचा घोष ने 20 गेंद में 35 रनों की कैमियो पारी खेल भारतीय टीम को 247 के स्कोर तक पहुंचाया.

पाकिस्तान को बुरी तरह रौंदा

जवाब में पाकिस्तान टीम का हाल इतना बुरा रहा कि उसने 20 रन बनाने तक दोनों सलामी बल्लेबाजों का विकेट गंवा दिया था. इस बीच सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली का विकेट चर्चा में रहा. उन्हें थर्ड अंपायर ने 2 बार वीडियो रिप्ले देखने के बाद रन आउट करार दिया था. पहले 20 ओवरों में पाक टीम का रन रेट 3 से भी कम चल रहा था.

जैसे-तैसे सिदरा अमीन और नतालिया परवेज ने 69 रनों की पार्टनरशिप करके पाकिस्तान टीम को मुश्किल परिस्थिति से उबारा. परवेज 39 रन बनाकर आउट हुईं. उसके बाद कप्तान फातिमा सना सिर्फ 2 रन बनाकर चलती बनीं. पाकिस्तान टीम ने अपने आखिरी 5 विकेट मात्र 16 रनों के भीतर गंवा दिए. सिदरा अमीन की 81 रनों की पारी पाकिस्तान को 88 रनों की बड़ी हार से नहीं बचा सकी.

12-0 का अजेय रिकॉर्ड बरकरार

भारतीय टीम ने महिला वनडे क्रिकेट इतिहास में पाकिस्तान को लगातार 12वीं बार हराया है. दोनों टीम पहली बार 2005 में किसी वनडे मैच में आमने-सामने आई थीं, तभी से टीम इंडिया प्रत्येक ODI मैच में पाकिस्तान पर हावी रही है.

एक्सपर्ट का बड़ा दावा: “रूस अगर पाकिस्तान को RD-93 इंजन बेचता है, तो भारत को होगा फायदा”

स के रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि JF-17 में इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान को RD-93 इंजन की कथित बिक्री से वास्तव में भारत को फायदा होगा। विशेषज्ञों ने विपक्ष की ओर से भारत सरकार की आलोचना को अनुचित बताते हुए खारिज किया।

मॉस्को स्थित प्रतिष्ठित प्रिमाकोव इंस्टीट्यूट में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में नई चुनौतियों पर अनुभाग के प्रमुख प्योत्र तोपीचकानोव ने कहा, “अगर रूस की ओर से जेएफ-17 फाइटर जेट के लिए इंजन उपलब्ध कराने की खबरें सही हैं, तो इससे भारत को वास्तव में दो तरह से लाभ होगा।”

उन्होंने कहा, “सबसे पहले यह दर्शाता है कि चीन और पाकिस्तान अभी तक रूसी इंजन को बदलने में कामयाब नहीं हुए हैं। दूसरे, नया विमान भारत के लिए परिचित और अनुमानित होगा, खासकर इसलिए क्योंकि दोनों एक ही इंजन साझा करते हैं और भारत ने मई 2025 के संकट (ऑपरेशन सिंदूर) के दौरान जेएफ-17 के परिचालन उपयोग को देखा है।”

तोपीचकानोव ने याद दिलाया कि चीन ने रूस से अपने FC-17 जेट के लिए अस्थायी उपाय के तौर पर RD-93 इंजन की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया था और इसके पाकिस्तान को हस्तांतरण की संभावना के मुद्दे को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के समय उठाया गया था।

रूस ने भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ RD-33 इंजन का लाइसेंस दिया था।

हालांकि, एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर हुई बातचीत धुंधली-सी याद है। उन्होंने कहा, “मास्को ने नई दिल्ली को यह विश्वास दिलाया कि RD-93 सौदा बिना किसी तकनीकी हस्तांतरण (TOT) के पूरी तरह से व्यावसायिक है, जबकि भारत को तकनीकी हस्तांतरण (TOT) के तहत कहीं बेहतर RD-33 इंजन का लाइसेंस दिया गया है।”

क्लिमोव संयंत्र की ओर से उत्पादित RD-93, अपने मूल RD-33 की तुलना में अधिक थ्रस्ट देता है, लेकिन इसकी सेवा अवधि कम है। RD-93 की सेवा अवधि 2,200 घंटे है, जबकि RD-33 की 4,000 घंटे है।

रूस-चीन-पाकिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत, रूस 2000 के दशक की शुरुआत से पूरी तरह से असेंबल किए गए RD-93 इंजन की आपूर्ति कर रहा है। पाकिस्तान अब एक संशोधित संस्करण चाहता है, जो अभी तक विकसित नहीं हुआ है। बिक्री के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

कांग्रेस ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमान JF-17 के लिए रूस की ओर से इंजन की आपूर्ति की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि यह मोदी सरकार की कूटनीति की विफलता है और उसे देश को यह बताना चाहिए कि भारत का भरोसेमंद साथी रूस पाकिस्तान को सैन्य सहयोग क्यों दे रहा है।

भाजपा ने पाकिस्तान को JF-17 जेट इंजन की आपूर्ति पर रूस की खबरों को गैर-जिम्मेदाराना बताया और कांग्रेस की आलोचना की। भाजपा ने कांग्रेस पर भारत के बजाय दुश्मन का पक्ष लेने का आरोप लगाया।

Health Tips:शरद पूर्णिमा की चाँदनी में बनी खीर सेहत का खज़ाना, जानें इसके 5 चमत्कारिक लाभ

सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा के बेहद महत्व माना गया है। इस साल शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर यानी के कल मनाया जाएगा। शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से खीर में अमृक के सामान गुण शामिल हो जाते हैं। शरद पूर्णिमा की रात खीर खाने से व्यक्ति को सेहत से जुड़े कई लाभ मिलते हैं। आइए आपको बताते हैं इस खीर का सेवन करने से हेल्थ को कई फायदे होते हैं।

शरद पूर्णिमा की खीर खाने से सेहत को मिलते हैं ये फायदे

मजबूत पाचन तंत्र 

खीर में मौजूद दूध और चावल हल्के सुपाच्य होते हैं, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। क्योंकि दूध में लैक्टोज और प्रोटीन होता है, जो पेट को शांत रखते हैं। वहीं चावल में स्टार्च मौजूद होता है जो कब्ज और अपच जैसी समस्याओं को दूर करता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली रखें अच्छी

खीर में मेवे जरुर डालें जाते हैं जैसे कि बादाम, काजू, पिस्ता और केसर इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद करता है। ड्राई फ्रूट्स में विटामिन ई, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। जबकि केसर में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो रोगों से लड़ने में मदद करता है।

एनर्जी मिलती

खीर खाने से हाई एनर्जी मिलती है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है। खीर बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले चावल में कार्बोहाइड्रेट और दूध में प्रोटीन और फैट होता है। यह शरीर की ताकत और ऊर्जा प्रदान करता है। चीनी तुरंत ग्लूकोज देता है, इससे थकान भी कम होती है।

त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद

खीर में दूध और मेवे मौजूद होते हैं, जिससे स्किन ग्लोइंग और बालों को मजबूत बनाते हैं। दूध में कैल्शियम और प्रोटीन त्वचा को पोषण प्रदान करता है। मेवों में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन ई त्वचा को नमी और बालों को मजबूत बनाता है।

मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होती 

शरद पूर्णिमा वाली खीर खाने से तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। दूध में ट्रिप्टोफोन नामक अमीनो एसिड होता है, जो सोरोटोनिन के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे मूड बेहतर होता है। केसर भी मूड को बेहतर करने के लिए बढ़िया होता है।

Sports News:OUT या NOT OUT? भारत के खिलाफ मैच में पाकिस्तानी बल्लेबाज़ के रनआउट पर मचा विवाद, नियम क्या कहते हैं जानें यहाँ

महिला वर्ल्ड कप 2025 के भारत बनाम पाकिस्तान मैच में एक और विवाद सामने आया है. टॉस विवाद के बाद पाकिस्तान की सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली का रन आउट (Muneeba Ali Run Out) चर्चा में है. विवाद ने इसलिए विकराल रूप ले लिया है क्योंकि पहले मुनीबा को नॉट आउट करार दिया गया था, लेकिन थर्ड अंपायर ने दोबारा से रिव्यू किया तो पाया कि मुनीबा का बैट हवा में था. इसलिए फैसला बदलकर उन्हें आउट करार दिया गया.

यह घटना पाकिस्तानी पारी के चौथे ओवर की आखिरी गेंद का है. क्रान्ति गौड़ गेंदबाजी कर रही थीं, उनकी गेंद मुनीबा अली के पैड पर लगी इसलिए टीम इंडिया ने LBW की अपील कर दी. अंपायर ने उन्हें नॉट आउट करार दिया, लेकिन इसी बीच मुनीबा अपनी क्रीज से बाहर खड़ी थीं. उनके पैर क्रीज से बाहर ही थे, लेकिन उनसे बैट जमीन पर लैंड करवाने में देरी हो गई.

पहले रिप्ले में दिखाया गया कि मुनीबा ने अपना बैट जमीन पर टिका दिया था, लेकिन उसके बाद उन्होंने उसे दोबारा उठाया. संयोग से गेंद उसी समय स्टंप्स से टकराई, जब उन्होंने बल्ला दोबारा हवा में उठाया था. पहले मुनीबा को नॉट आउट करार दिया गया था, लेकिन थर्ड अंपायर ने फैसले को दोबारा रिव्यू किया तो पाया कि गेंद के स्टंप्स से लगने के समय मुनीबा का बैट हवा में था. ये फैसला पाकिस्तान टीम की कप्तान फातिमा सना को अच्छा नहीं लगा, जो इसके प्रति आपत्ति जताने के लिए ड्रेसिंग रूम से बाहर आ गई थीं. फातिमा को चौथे अंपायर से बहस करते भी देखा गया.

क्या कहता है नियम?

MCC की रूल बुक में नियम 30.1.1 कहता है कि बल्लेबाज को तब तक ग्राउंड से बाहर माना जाएगा जब तक उस छोर पर उसके शरीर या बल्ले का कोई हिस्सा जमीन से टिका हुआ ना हो. वहीं नियम 30.1.2 कहता है कि बल्लेबाज को तब आउट ऑफ ग्राउंड नहीं माना जाएगा जब वो दौड़ते या डाइव लगाते समय पॉपिंग क्रीज के अंदर शरीर या बल्ले का कोई हिस्सा ग्राउंडेड कर लेता है, फिर चाहे उसके बाद खिलाड़ी का पॉपिंग क्रीज से संपर्क टूट ही क्यों ना जाए. चूंकि मुनीबा अली ना तो दौड़ और ना ही डाइव लगा रही थीं, इसलिए उन्हें आउट करार दिया गया

एस. जयशंकर का बयान: “भारत की सीमाओं का सम्मान ज़रूरी,” US के साथ ट्रेड डील पर दिए विचार

आयात शुल्क (टैरिफ) पर वाशिंगटन की नीति को लेकर भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को बड़ा बयान दिया है. जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच किसी भी व्यापार समझौते में नई दिल्ली की लक्ष्मण रेखाओं का सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में साझा आधार खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं.

जयशंकर ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के संवाद सत्र में स्वीकार किया कि भारत और अमेरिका के बीच कुछ मुद्दे हैं और इनमें से कई प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप न दिए जाने से जुड़े हुए हैं.

अपनी व्यापारिक वार्ताओं के लिए किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं हम- जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर समझ बनाना जरूरी है, क्योंकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की लक्ष्मण रेखाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘आज हमारे अमेरिका के साथ कुछ मुद्दे हैं. इसका एक बड़ा कारण यह है कि हम अब तक अपनी व्यापारिक वार्ताओं के लिए किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाए हैं और वहां तक न पहुंच पाने के कारण भारत पर कुछ शुल्क लगाए गए हैं.’

रूस से ईंधन खरीदने पर शुल्क लगाना अनुचित- जयशंकर

जयशंकर कौटिल्य इकोनॉमिक एन्क्लेव में उथल-पुथल के दौर में विदेश नीति का स्वरूप विषय पर आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा, एक दोहरा शुल्क भी है, जिसे लेकर हमने सार्वजनिक रूप से कहा है कि हम उसे बेहद अनुचित मानते हैं. यह शुल्क हमें रूस से ईंधन खरीदने को लेकर निशाना बनाता है, जबकि कई अन्य देश भी ऐसा कर रहे हैं. उनमें वे देश भी शामिल हैं, जिनके रूस के साथ वर्तमान में हमारे मुकाबले कहीं अधिक टकरावपूर्ण संबंध हैं.’

US के साथ व्यापारिक समझ बनाना जरूरी- जयशंकर

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिए जाने के बाद से नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंध गंभीर तनाव में हैं. इसमें भारत की ओर से रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है. भारत ने अमेरिका की इस कार्रवाई को अनुचित, अवांछित और तर्कहीन करार दिया.

जयशंकर ने कहा, ‘अंत में जो भी हो, अमेरिका के साथ एक व्यापारिक समझ बनाना जरूरी है, क्योंकि वह दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और इसलिए भी क्योंकि दुनिया के अधिकांश देशों ने अमेरिका के साथ ऐसी समझ बना ली है.’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन यह एक ऐसी समझ होनी चाहिए जिसमें हमारी आधारभूत सीमाओं, हमारी लक्ष्मण रेखाओं का सम्मान किया जाए. किसी भी समझौते में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन पर आप बातचीत कर सकते हैं और कुछ ऐसी भी होती हैं जिन पर आप बातचीत नहीं कर सकते हैं.’

भारत का दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट- जयशंकर

जयशंकर ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट हैं. हमें वह जमीन तलाशनी है और इस पर मार्च से ही बातचीत चल रही है.’

भारत और अमेरिका ने कुछ हफ्तों के अंतराल के बाद हाल ही में प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत फिर से शुरू की है. विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि संबंधों में तनाव का असर बातचीत के हर पहलू पर नहीं पड़ रहा है. उन्होंने कहा, ‘समस्याएं हैं, मुद्दे हैं, कोई भी इससे इनकार नहीं कर सकता. उन मुद्दों पर बातचीत, चर्चा और समाधान की आवश्यकता है और हम यही करने का प्रयास कर रहे हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं वास्तव में मुद्दों से ज्यादा इसके बारे में कुछ भी निहितार्थ निकालने से बचूंगा. मुझे लगता है कि मैं यह भी कहना चाहता हूं कि संबंधों का एक बड़ा हिस्सा या तो पहले की तरह ही चल रहा है या कुछ मामलों में तो पहले से भी ज्यादा (बेहतर तरीके से) चल रहा है.’