पृथ्वी शॉ अपनी धाकड़ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं. इस बल्लेबाज ने अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताने के बाद भारत की सीनियर टीम में जगह पक्की कर ली थी और 2018 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया. लेकिन पृथ्वी शॉ की फॉर्म कुछ इस तरह बिगड़ी कि वे अब टीम इंडिया में वापसी करने की कोशिश में लगे हैं. रणजी ट्रॉफी 2025-26 से पहले पृथ्वी अभ्यास मैच भी खेल रहे हैं. इस मुकाबले में पृथ्वी का गुस्से से तिलमिलाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
पृथ्वी शॉ ने गुस्से में उठाया बल्ला
रणजी ट्रॉफी 2025-26 से पहले महाराष्ट्र और मुंबई के बीच अभ्यास मैच खेला जा रहा है. मुंबई के आठ साल रणजी खेलने वाले पृथ्वी शॉ इस बार महाराष्ट्र टीम की तरफ से खेलते नजर आएंगे. पृथ्वी ने अभ्यास मैच में मुंबई के खिलाफ 219 गेंदों में 181 रनों की दमदार पारी खेली. इस वार्म-अप मैच में पृथ्वी ने बेहतर बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया है. लेकिन 181 रन पर भी आउट होने पर पृथ्वी गुस्से ले तिलमिला गए.
पृथ्वी शॉ ने इस मैच में 140 गेंदों में अपना शतक पूरा किया था. इसके बाद पृथ्वी डबल सेंचुरी की तरफ बढ़ रहे थे कि मुशीर खान की गेंद पर वे कैच आउट हो गए. पृथ्वी के आउट होने के बाद उनकी सरफराज खान के छोटे भाई मुशीर के साथ बहस होने लगी. ये बात यहां तक बढ़ गई कि पृथ्वी ने मुशीर को मारने के लिए बल्ला उठा लिया. अंपायर ने बीच-बचाव करते हुए दोनों टीमों के खिलाड़ियों को अलग-अलग किया. पृथ्वी शॉ और मुशीर खान के बीच हुई इस झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.
नोबेल पुरस्कार सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित पुरस्कार है, जो हर साल किसी ऐसे संगठन या व्यक्ति को दिया जाता है, जिन्होंने पिछले वर्ष मानवता के लिए सबसे अधिक काम किया हो. 2025 के नोबेल पुरस्कार का वितरण 6 अक्टूबर 2025 से शुरू हो चुका है और 13 अक्टूबर 2025 तक चलेगा.
नोबेल पुरस्कार जीतना मानव जाति की सबसे बड़ी उपलब्धि है. इस साल 6 अक्टूबर 2025 को मैरी ई. ब्रुनको, फ्रेड रामस्डेल और शिमोन सकागुची को फिजियोलॉजी या मेडिसिन श्रेणी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. नोबेल पुरस्कार सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक हैं. 1901 में पहली बार प्रदान किए गए इन पुरस्कारों की स्थापना स्वीडिश केमिस्ट, इंजीनियर और इनवेंटर अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार की गई थी.
BREAKING NEWS The 2025 #NobelPrize in Physiology or Medicine has been awarded to Mary E. Brunkow, Fred Ramsdell and Shimon Sakaguchi “for their discoveries concerning peripheral immune tolerance.” pic.twitter.com/nhjxJSoZEr
नोबेल पुरस्कार जीतने वाले विजेता को क्या-क्या मिलता है ?
प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक गोल्ड मेडल, एक डिप्लोमा और इसके अलावा नकद इनाम भी मिलता है. बता दें कि नकद पुरस्कार (2023 में लगभग 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर, 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक था). आमतौर पर एक प्राइज अधिकतम तीन लोगों को दिया जा सकता है, जबकि पीस प्राइज किसी संगठन को भी दिया जा सकता है.
नोबेल प्राइज इन 6 कैटेगरी में दिए जाते हैं
फिजिक्स- प्रकृति और ब्रह्मांड में अभूतपूर्व खोजों के लिए केमिस्ट्री- रासायनिक विज्ञान में असाधारण उपलब्धियों के लिए फिजियोलॉजी या मेडिसिन- मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाली खोजों के लिए साहित्य- विशिष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए शांति- दुनिया में शांति को बढ़ावा देने और संघर्षों को सुलझाने के प्रयासों के लिए इकॉनमिक साइंस- अल्फ्रेड नोबेल के सम्मान में स्वीडिश केंद्रीय बैंक द्वारा 1968 में स्थापित
क्या है इतिहास?
अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 1833 में स्वीडन के स्टॉकहोम में हुआ था. वो एक कुशल आविष्कारक थे, जिनके पास डायनामाइट सहित 355 पेटेंट थे और उन्होंने अकूत धन दौलत अर्जित की. प्रयोगात्मक रूप से एक बार नोबेल ने समय से पहले ही एक मृत्यु लेख पढ़ लिया, जिसमें उनके विस्फोटकों के कारण उन्हें मौत का सौदागर कहा गया.
अयोध्या, 8 अक्टूबर: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या बुधवार को एक बार फिर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षण की साक्षी बनी, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचीं। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने केंद्रीय मंत्री का गरिमामय स्वागत किया।
स्वागत के दौरान वाद्ययंत्रों की पारंपरिक धुनों ने अयोध्या की सांस्कृतिक आत्मा को स्पंदित कर दिया। एयरपोर्ट से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच केंद्रीय मंत्री का काफिला सिविल लाइन्स स्थित होटल रेडिशन पहुंचा, जहां कुछ देर विश्राम के बाद वह अपने निर्धारित कार्यक्रमों के लिए रवाना हुईं।
बृहस्पति कुंड में होगा सांस्कृतिक आयोजन निर्मला सीतारमण का यह दौरा टेढ़ी बाजार स्थित बृहस्पति कुंड में आयोजित एक विशेष सांस्कृतिक आयोजन के लिए है। इस अवसर पर वह प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संयुक्त रूप से दक्षिण भारत के तीन महान संगीतज्ञों संत त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों का अनावरण करेंगी।
संगीत और भक्ति का संगम बनेगा बृहस्पति कुंड बृहस्पति कुंड परिसर में स्थापित की गई ये मूर्तियां भारतीय संगीत, भक्ति और कला परंपरा का जीवंत प्रतीक हैं। इन संत संगीतज्ञों ने भक्ति संगीत को भारतीय संस्कृति का आत्मस्वर बनाया। अब उनकी मूर्तियों का अयोध्या की पावन भूमि पर स्थापित होना उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक एकता का अनुपम उदाहरण है।
नई दिल्ली : सनातन धर्म और हिंदुत्व के मूल्यों के प्रसार के लिए कार्यरत विश्व हिंदू महासंघ के महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन. सिंह ने रविवार को दिल्ली स्थित इस्कॉन मंदिर प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान तीन ऐतिहासिक प्रस्ताव रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ महाराज ने की, जिसमें देशभर से आए हुए प्रदेशाध्यक्षों, जिलाध्यक्षों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और धर्माचार्यों ने भाग लिया।
तीन प्रस्तावों से गूंजी सम्मेलन की आवाज़
एडवोकेट रीना एन. सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत आज ऐसे नेतृत्व की अपेक्षा कर रहा है, जो निडर, निष्पक्ष और राष्ट्रहित के प्रति पूर्णतः समर्पित हो। उन्होंने मंच से तीन प्रस्ताव रखे जिन्हें उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में स्वीकार किया-
योगी आदित्यनाथ जी को प्रधानमंत्री बनाया जाए – देश के हित में निडर, निष्पक्ष और राष्ट्रवादी नेतृत्व की आवश्यकता है, जिसे केवल योगी आदित्यनाथ जैसा कर्मयोगी ही निभा सकता है।
महंत अवेद्यनाथ जी को भारत रत्न प्रदान किया जाए – जिन्होंने सामाजिक समरसता, सनातन संस्कृति और राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
देशभर में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए – ताकि सनातन परंपरा, धार्मिक आस्था और गौसंवर्धन की भावना को संवैधानिक बल मिले।
रीना एन. सिंह ने कहा कि यह केवल प्रस्ताव नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की चेतना की पुकार है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मठ की विरासत को न केवल जीवित रखा बल्कि उसे जनसेवा, राष्ट्रसेवा और हिंदुत्व की शक्ति में परिवर्तित किया है।
गोरखनाथ परंपरा और राम मंदिर आंदोलन की आत्मा
रीना एन. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि गोरखनाथ मठ की परंपरा ही राम मंदिर आंदोलन की आत्मा रही है। उन्होंने बताया कि महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवेद्यनाथ और योगी आदित्यनाथ ने जिस त्याग, संघर्ष और समर्पण से इस आंदोलन को आगे बढ़ाया, वह भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल अयोध्या तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज की आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक बन चुका है।
रीना एन. सिंह – संघर्षशील अधिवक्ता और लेखिका
एडवोकेट रीना एन. सिंह सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली जानी-मानी अधिवक्ता हैं, जो भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा विवाद और ज्ञानवापी प्रकरण में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य अदालतों से लेकर समाज तक हिंदू आस्था के मुद्दों को वैचारिक और संवैधानिक रूप से स्थापित करना है।
उनकी चर्चित पुस्तक “योगी आदित्यनाथ : लोक कल्याण के पथ पर” ने गोरखनाथ मठ, योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर आंदोलन के वैचारिक एवं ऐतिहासिक पक्ष को गहराई से उजागर किया है। इस पुस्तक में उन्होंने तथ्यात्मक शोध, दस्तावेज़ और ऐतिहासिक साक्ष्यों के माध्यम से दिखाया है कि गोरखनाथ परंपरा केवल धार्मिक धारा नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक चेतना का स्तंभ है।
देशभर में कार्यशालाएँ और सेमिनार
रीना एन. सिंह के लेखन और शोध कार्यों के आधार पर देशभर में कई कार्यशालाएँ और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं, जिनमें शिक्षाविद्, समाजसेवी, धर्माचार्य और शोधकर्ता भाग लेते हैं। इन मंचों पर गोरखनाथ परंपरा, राम जन्मभूमि आंदोलन और राष्ट्रवाद की भूमिका पर गहन चर्चा होती है। रीना एन. सिंह ने कहा कि भारत के युवाओं को इस गौरवशाली परंपरा से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, क्योंकि यही राष्ट्र की आत्मा और भविष्य की दिशा तय करेगी।
महिला प्रकोष्ठ की भूमिका और राष्ट्रीय एकता
महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में रीना एन. सिंह ने कहा कि मातृ शक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी ऊर्जा है। उन्होंने कहा, “भारत माता की रक्षा के लिए न केवल पुरुष, बल्कि महिलाएँ भी समान रूप से प्रतिबद्ध हैं। जब नारी जागेगी, तभी राष्ट्र जागेगा।” उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे सामाजिक और धार्मिक आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें ताकि सनातन संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके।
समर्थन और संकल्प
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ महाराज ने कहा कि योगी आदित्यनाथ और महंत अवेद्यनाथ दोनों ही राष्ट्र और समाज के ऐसे स्तंभ हैं, जिनकी सेवाओं को सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि रीना एन. सिंह के तीनों प्रस्तावों पर संगठन शीघ्र ही देशव्यापी अभियान शुरू करेगा, ताकि जनता की आवाज़ केंद्र सरकार तक पहुँचाई जा सके। सम्मेलन के समापन पर उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से प्रस्तावों का समर्थन किया और “भारत माता की जय”, “हर हर महादेव” और “जय श्रीराम” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा।
विश्व हिंदू महासंघ का यह सम्मेलन केवल प्रस्तावों का मंच नहीं, बल्कि एक नए वैचारिक आंदोलन का आरंभ बन गया, जहाँ राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और सामाजिक समरसता का संगम दिखाई दिया। रीना एन. सिंह ने जिस स्पष्टता, निडरता और शोधपूर्ण दृष्टिकोण से योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री और महंत अवेद्यनाथ को भारत रत्न दिए जाने की मांग की, उसने संगठन और सनातन समाज में नई ऊर्जा का संचार किया है।
लखनऊ, 07 अक्टूबर 2025 : महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राजधानी लखनऊ में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अलीगंज स्थित नया हनुमान मंदिर में अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर भक्तों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ रामचरितमानस का पाठ किया और भक्ति में लीन नजर आए।
प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ हुआ शुभारंभ
राज्य सरकार की इस पहल के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के मंदिरों में अखंड रामायण पाठ की शुरुआत हुई। इसमें जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु समुदाय का सक्रिय सहयोग रहा। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में धार्मिक चेतना, नैतिकता और सद्भाव को सशक्त बनाना है।
जानकीपुरम में दिया गया ‘वाल्मीकि सम्मान’
अखंड रामायण पाठ के उपरांत मंत्री जयवीर सिंह राजधानी के जानकीपुरम स्थित गौतम बुद्ध विहार कॉलोनी पहुंचे। यहां उन्होंने वाल्मीकि समाज के विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया और ‘वाल्मीकि सम्मान’ प्रदान किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद बृजलाल भी उपस्थित रहे।
महर्षि वाल्मीकि के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणा – जयवीर सिंह
पर्यटन मंत्री ने कहा कि
“माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की प्रेरणा से महर्षि वाल्मीकि जयंती पर प्रदेश के सभी जिलों के देव मंदिरों और वाल्मीकि स्थलों पर रामचरितमानस पाठ, अखंड रामायण पाठ, सुंदरकांड, भजन-कीर्तन और दीप प्रज्ज्वलन जैसे सांस्कृतिक आयोजन किए जा रहे हैं। ये आयोजन हमारी संस्कृति और लोक आस्था को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।”
अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि के नाम पर एयरपोर्ट और भव्य प्रतिमा
जयवीर सिंह ने बताया कि भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का नामकरण किया गया है। साथ ही वहां महर्षि वाल्मीकि की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी में वाल्मीकि प्रेक्षागृह, स्मारक, पुस्तकालय और छात्रावास जैसी परियोजनाएं संचालित हैं, जो वाल्मीकि समाज के सम्मान और गौरव को बढ़ाती हैं।
चित्रकूट में वाल्मीकि तपोस्थली का हो रहा विकास
पर्यटन मंत्री ने बताया कि चित्रकूट के लालापुर स्थित वाल्मीकि तपोस्थली में पर्यटन विभाग द्वारा भव्य प्रतिमा स्थापना, पर्यटन विकास कार्य और अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही, वृहद सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इन स्थलों से जुड़ सकें।
‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र से आगे बढ़ रही सरकार
जयवीर सिंह ने कहा कि
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार समाज के हर वर्ग के विकास के लिए कार्य कर रही है। बिना किसी भेदभाव के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र के साथ सांस्कृतिक विरासत को सशक्त किया जा रहा है।”
महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि
“महर्षि वाल्मीकि के उपदेश और विचार आज भी समाज के लिए पथ प्रदर्शक हैं। हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में सद्भाव, समानता और एकता को बढ़ावा देना चाहिए।”