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Sports News: भारत के तीन दिग्गज खिलाड़ी जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया में कभी नहीं बनाया ODI शतक; एक को अभी भी है मौका

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम इंडिया पहले 3 मैचों की वनडे सीरीज खेलेगी, पहला वनडे 19 अक्टूबर को पर्थ में खेला जाएगा. इस सीरीज के तीनों मैचों के टिकट बिक चुके हैं, इसको लेकर काफी क्रेज देखने को मिल रहा है क्योंकि विराट कोहली, रोहित शर्मा इसमें खेल रहे हैं. दोनों टी20 और टेस्ट से रिटायरमेंट ले चुके हैं. खैर, हम यहां आपको उन 3 बड़े बल्लेबाजों के बारे में बता रहे हैं, जो कभी ऑस्ट्रेलिया में वनडे फॉर्मेट में शतक नहीं लगा पाए हैं. इस लिस्ट में 1 खिलाड़ी ऐसा है, जो आगामी सीरीज का हिस्सा हैं और उनके पास मौका होगा कि इस बार शतक लगाकर इस आंकड़े को बदला जाए.

भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज का पहला मैच 19 अक्टूबर को ऑप्टस स्टेडियम में खेला जाएगा. दूसरा वनडे 23 अक्टूबर को एडिलेड ओवल और तीसरा वनडे सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में 25 अक्टूबर को खेला जाएगा. तीनों मुकाबले भारत के समयनुसार सुबह 9 बजे से शुरू होंगे.

राहुल द्रविड़

पूर्व कप्तान और भारत के पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ क्रिकेट जगत में बड़ा नाम है, लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि वह ऑस्ट्रेलिया में कभी वनडे शतक नहीं लगा पाए हैं. द्रविड़ ने ऑस्ट्रेलिया में 22 वनडे खेले हैं, जिसमें उन्होंने 666 रन बनाए. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में 7 अर्धशतक लगाए हैं, लेकिन कभी शतक नहीं लगा पाए.

सुरेश रैना

पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना भी इस लिस्ट में शामिल है, वह कभी ऑस्ट्रेलिया में वनडे में शतक नहीं लगा पाए. रैना ने ऑस्ट्रेलिया में 15 मैच खेले, जिसमें 409 रन बनाए और 3 अर्धशतक जड़े. रैना ने धोनी के साथ 2020 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था.

केएल राहुल

इस लिस्ट में केएल राहुल भी शामिल है, जो ऑस्ट्रेलिया के साथ आगामी सीरीज (IND vs AUS ODI Series 2025) का हिस्सा हैं. राहुल ने ऑस्ट्रेलिया में 3 वनडे खेले हैं, जिसमें 101.09 की स्ट्राइक रेट से 93 रन बनाए. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में वनडे में 76 रनों की पारी खेली थी, लेकिन वह अपने शतक तक नहीं पहुंच पाए थे. राहुल अच्छी फॉर्म में हैं, और उम्मीद है कि इस दौरे में वह 1 शतक कम से कम लगाएंगे.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत का ODI स्क्वाड

शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उपकप्तान), अक्षर पटेल, केएल राहुल (विकेटकीपर), नितीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), यशस्वी जयसवाल.

2025 की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट: केवल 3 फिल्मों ने मचाया धमाका, नई बॉलीवुड फिल्मों का नाम लिस्ट में नहीं

इस साल ‘छावा’ से लेकर ‘कुली’ और ‘जाट’ जैसी कई बड़ी फिल्में रिलीज हुईं. किसी ने 600 करोड़ का कलेक्शन कर डाला तो किसी ने 200 और किसी ने 300 करोड़ का. कई फिल्में ऐसी रहीं जिन्होंने आराम से 100 करोड़ बटोर लिए.

यानी कुछ बहुत बड़ी ब्लॉकबस्टर हो गईं तो तो कुछ हिट और कुछ फ्लॉप भी हुईं. इस बीच अगर आप ये जानना चाहते हैं कि इस साल कि हिट और फ्लॉप के अलावा वो कौन सी फिल्में हैं जो सुपरहिट कैटेगरी में आती हैं. तो हम आपके लिए ये जानकारी लाए हैं.

इस साल हिंदी में कितनी फिल्में हुईं सुपरहिट

साल 2025 में सिर्फ 3 फिल्में हिंदी बेल्ट में सुपरहिट कैटेगरी में शामिल हो पाईं. इन फिल्मों की लिस्ट देखेंगे तो वो चौंकाने वाली है. दरअसल सिर्फ एक फिल्म है जो इसी साल रिलीज हुई है और सुपरहिट हुई है. इसके अलावा, दो फिल्में ऐसी हैं जो पुरानी हैं और इस साल री-रिलीज की गई हैं.

इन फिल्मों की लिस्ट आप नीचें देख सकते हैं. बता दें कि ये लिस्ट कोईमोई के डेटा के मुताबिक है और 14 अक्टूबर तक का है.

    • कांतारा चैप्टर 1 (हिंदी वर्जन)- 150.67 करोड़ रुपये अभी तक (कमाई अभी जारी है)
    • सनम तेरी कसम (री-रिलीज)- 35.55 करोड़ रुपये
    • ये जवानी है दीवानी (री-रिलीज)- 22.04 करोड़ रुपये

दो पुरानी फिल्मों ने किया कमाल

हर्षवर्धन राणे की ‘सनम तेरी कसम’ और रणबीर कपूर की ‘ये जवानी है दीवानी’ को दोबारा से रिलीज किया गया. इन फिल्मों को लेकर लोगों का नॉस्टैल्जिया और प्यार इतना ज्यादा था कि लोगों ने उमड़-उमड़कर इनकी टिकटें खरीदीं.

यही वजह रही कि हर्षवर्धन राणे की ‘सनम तेरी कसम’ जहां पिछली बार रिलीज होने के बाद फ्लॉप हो गई थी. वहीं इस बार ओपनिंग डे पर ही 4.50 करोड़ रुपये का कमाल कलेक्शन किया. तो वहीं रणबीर की ‘ये जवानी है दीवानी’ ने भी 1.15 करोड़ रुपये का ओपनिंग डे कलेक्शन किया था.

Health News: क्या बार-बार हाथ धोना भी सेहत के लिए नुकसानदेह है? शरीर को झेलनी पड़ती हैं ये परेशानियां

हाथ धोना एक जरूरी आदत है, जो हमें कई बीमारियों से बचा सकती है. चाहे हम खाना खा रहे हों, टॉयलेट से आ रहे हों, किसी को छूने के बाद या बाहर से घर आने पर, हर बार हाथ धोने की सलाह दी जाती है. दरअसल हमारे हाथ रोजाना मोबाइल, दरवाजों, पैसों, गाड़ियों और खाने-पीने की चीजों को छूते हैं, जिससे लाखों-करोड़ों कीटाणु हमारी स्किन पर आ जाते हैं. अगर हम हाथ नहीं धोते, तो यही कीटाणु हमारे शरीर में पहुंचकर बीमारियां फैला सकते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन  और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित और सही तरीके से हाथ धोने से डायरिया, सर्दी-जुकाम, फ्लू, स्किन संक्रमण, सांस लेने से जुड़ी समस्याएं और कोरोना जैसी बीमारियों को रोका जा सकता है.

इसी वजह से हर साल 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैंडवाशिंग डे मनाया जाता है ताकि लोगों को याद दिलाया जा सके कि साफ-सुथरे हाथ ही बीमारियों से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बहुत ज्यादा हाथ धोना भी नुकसानदायक हो सकता है. तो आइए जानते हैं कि क्या ज्यादा हाथ धोने से भी इंसान बीमार हो सकता है और इसके कारण बॉडी में कितनी दिक्कतें हो जाती हैं.

क्या ज्यादा हाथ धोने से भी इंसान बीमार हो सकता है?

हाथ धोने की आदत अगर जरूरत से ज्यादा बार दोहराई जाए तो इससे शरीर में कुछ समस्याएं हो सकती हैं. दरअसल, हमारी स्किन में कुछ नेचुरल ऑयल और गुड बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो हमारी रक्षा करते हैं. ये बैरियर की तरह काम करते हैं और बाहरी कीटाणुओं से लड़ने में मदद करते हैं. जब हम बहुत अधिक बार साबुन या हैंडवॉश इस्तेमाल करते हैं तो ये नेचुरल सुरक्षा कवच धीरे-धीरे हटने लगता है. इसकी वजह से स्किन रूखी और बेजान हो जाती है, हाथों में लालपन, खुजली और दरारें पड़ने लगती हैं. वहीं, कुछ लोगों में एक्जिमा जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं और फटी स्किन से बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है.

बार-बार हाथ धोने से बॉडी में होती हैं कितनी दिक्कतें?

1. स्किन में जलन और खुजली: बार-बार साबुन से हाथ धोने से स्किन की ऊपरी लेयर डैमेज हो जाती है. इससे हाथों में जलन, खुजली और कभी-कभी छाले जैसी स्थिति भी हो सकती है.

2. नेचुरल ऑइल का नुकसान: हमारी स्किन में मौजूद नैचुरल ऑयल हाथों को सॉफ्ट बनाए रखते हैं. बार-बार हाथ धोने से ये ऑयल खत्म हो जाते हैं, जिससे स्किन रूखी और बेजान हो जाती है.

3. डर्मेटाइटिस: बहुत ज्यादा हाथ धोने से संपर्क डर्मेटाइटिस हो सकता है, जिससे स्किन में  सूजन, खुजली और लालपन जैसी शिकायत होती है.

4. एक्जिमा की समस्या: जिन लोगों को पहले से एक्जिमा है, उनके लिए बार-बार हाथ धोना एक गंभीर समस्या बन सकती है. ये बीमारी और भी तेज हो सकती है और हाथों में लगातार जलन बनी रह सकती है.

5. संक्रमण का खतरा बढ़ना: जब स्किन फट जाती है या उस पर दरारें आ जाती हैं, तो यह कीटाणुओं के शरीर में घुसने का आसान रास्ता बन जाता है. इस वजह से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है.

कब और कैसे हाथ धोने चाहिए?

हाथ धोना जरूरी है, लेकिन जरूरत के अनुसार हाथ धोने से दिक्कतें नहीं होती है. जैसे टॉयलेट यूज करने के बाद, खाना खाने या बनाने से पहले, बाहर से घर आने के बाद, किसी बीमार व्यक्ति को छूने के बाद, छींकने या खांसने के बाद हाथ धोना ज्यादा असरदार होता है. वहीं, हाथ धोने का सही तरीका यह है कि कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और बहते पानी से हाथ धोएं. उंगलियों के बीच, नाखूनों के नीचे और हाथ की पीठ को अच्छे से रब करें.

हनुमत चित्रों के विश्व कीर्तिमान के लिए मेयर सुषमा खर्कवाल ने किया विवेक पाण्डेय का अभिनंदन : श्री पांडेय द्वारा संग्रहित 12,500 हनुमत चित्रों को “इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड” में मिला स्थान

लखनऊ: 16 अक्टूबर। लखनऊ की प्रथम नागरिक, मेयर सुषमा खर्कवाल ने गुरुवार 16 अक्टूबर को अपने कैंप कार्यालय में, राम भक्त हनुमान जी के 12,500 चित्रों का अद्वितीय और विशाल संग्रह करने वाले स्थानीय हनुमान भक्त, विवेक पांडेय का अभिनंदन किया। इस वैश्विक उपलब्धि के लिए विवेक पाण्डेय का नाम, “इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड” में दर्ज हो गया है। मेयर सुषमा खर्कवाल ने उनके सतत आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की, वहीं विवेक ने अपना यह सम्मान पवनसुत मारुति नंदन को समर्पित करते हुए इसे, सभी हनुमान भक्तों का सम्मान बताया है।साल 2009 में हनुमान महाराज की प्रेरणा से विवेक पांडे ने सेवा कार्य शुरू किया था। साल 2012 में हनुमत सेवा समिति का गठन कर उन्होंने विधिवत हनुमत सेवा कार्य को अधिक वृहद स्तर पर संचालित करना शुरू किया। इस क्रम में उनके द्वारा सीतापुर रोड पर जरूरतमंद बच्चों के लिए हनुमत पाठशाला का संचालन और कुष्ठ पीड़ितों की सेवा का महती कार्य भी किया जा रहा है। साल 2012 से ही उनके द्वारा हर साल राम हनुमत महोत्सव का आयोजन भव्य और दिव्य रूप में लखनऊ में करवाया जा रहा है। सदर रामलीला मैदान से शुरू हुआ यह दो दिवसीय महोत्सव अपने वृहद रूप में बलरामपुर गार्डन में आयोजित किया जा रहा है। इसमें सांस्कृतिक अनुष्ठान के साथ-साथ हनुमत सम्मान समारोह, गंगा आरती और प्रसाद वितरण आदि से भक्तों को व्यापक स्तर पर जोड़ा जा रहा है।

विदेश में कमाई 1 लाख, भारत में वापसी पर 5 लाख के बराबर – खूबसूरत मुस्लिम देश की दूरी भी जानें

मालदीव भारतीय यात्रियों के बीच एक लोकप्रिय और लग्जरी ट्रैवल डेस्टिनेशन है. हर साल हजारों भारतीय यहां छुट्टियां बिताने, हनीमून मनाने और समुद्र के किनारे आराम करने पहुंचते हैं, लेकिन बहुत से लोगों के मन में एक सवाल रहता है कि भारत के रुपए की कीमत मालदीव में कितनी होती है? आइए जानते हैं भारत और मालदीव की करेंसी वैल्यू का पूरा अंतर.

मालदीव की आधिकारिक मुद्रा का नाम मालदीवियन रूफिया (Maldivian Rufiyaa) है, जिसका शॉर्ट फॉर्म MVR होता है. यह नाम संस्कृत के शब्द रूप्य से लिया गया है, जिसका मतलब होता है चांदी. मालदीवियन रूफिया को मालदीव मोनेटरी अथॉरिटी (Maldives Monetary Authority – MMA) नियंत्रित करती है, जो देश का सेंट्रल बैंक है और मुद्रा आपूर्ति, विनिमय दर और वित्तीय स्थिरता की देखरेख करती है.

भारत के रुपए की कीमत मालदीव में कितनी है?
वाइस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक 1 मालदीवियन रूफिया की कीमत भारत की करेंसी के मुकाबले 5 रुपये 77 पैसा है. इस  हिसाब से अगर कोई इंडियन मालदीव जाकर 1 लाख कमाता है तो भारत में आकर ये 5 लाख 77 हजार 71 रुपये हो जाएगा. वहीं भारत का 1 रुपया मालदीव में महज 17 पैसों के बराबर है. इस हिसाब से अगर कोई भारतीय 1 लाख रुपये लेकर मालदीव घूमने जाता है तो वहां जाकर उसकी वैल्यू महज 17 हजार 329 मालदीवियन रूफिया  के बराबर रह जाएगी.

मालदीव की करेंसी की खासियत और डिजाइन
मालदीव की करेंसी केवल आर्थिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि यह कला और संस्कृति का भी प्रतीक है. यहां के नोट और सिक्के समुद्री जीवन, पारंपरिक मछली पकड़ने और मालदीव की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं, क्योंकि मालदीव हिंद महासागर के बीचों बीच स्थित एक द्वीप देश है, इसलिए इसकी करेंसी में समुद्र से जुड़ी थीम जैसे मछलियां, तरह-तरह के इमेज, जलक्रीड़ा और नौकायन की झलक देखने को मिलती हैं.