अफगानिस्तान बनाम बांग्लादेश के बीच तीसरा वनडे मुकाबला अबू धाबी के शेख जायद स्टेडियम में खेला गया. इस मैच में अफगानिस्तान के अनुभवी ऑलराउंडर मोहम्मद नबी की विस्फोटक बल्लेबाजी से बांग्लादेश के गेंदबाजों के होश उड़ गए. आखिरी 10 गेंदों में नबी ने 43 रन ठोक दिए, जिससे अफगानिस्तान ने एक औसत स्कोर को मैच विनिंग टोटल में बदल दिया.
10 गेंदों में बना डाले 43 रन
48वें ओवर तक अफगानिस्तान का स्कोर 249 रन पर 9 विकेट था. ऐसा लग रहा था कि टीम 260-265 तक ही पहुंचेगी, लेकिन नबी के तेवर कुछ और ही थे. 49वें ओवर की शुरुआत में सिर्फ 1 रन बना, इसके बाद नाहिद राणा की चोट के चलते गेंदबाजी बदलनी पड़ी और मेंहदी हसन मिराज को गेंद थमाई गई. मिराज ने आते ही नबी के तूफान का शिकार बनना शुरू कर दिया. नबी ने उनके ओवर में लगातार तीन छक्के उड़ाए, बीच में कुछ वाइड बॉल्स भी पड़ीं, और ओवर खत्म होते-होते 25 रन बन गए.
इसके बाद हसन महमूद ने आखिरी ओवर डाला, लेकिन वहां भी नबी नहीं रुके. उन्होंने चौके-छक्कों की बौछार करते हुए इस ओवर में 19 रन ठोक डाले. इस तरह आखिरी 10 गेंदों में कुल 44 रन बने, जिसमें से 38 रन नबी ने अकेले ही बना डाले.
37 गेंदों में 62 रन, नबी का तूफानी अंदाज
नबी ने सिर्फ 37 गेंदों में 62 रन की नाबाद पारी खेली. इस दौरान उन्होंने 5 छक्के और 4 चौके जड़े. उनकी यह पारी अफगानिस्तान के लिए संकटमोचक साबित हुई. टीम एक समय मुश्किल में थी, लेकिन नबी ने पारी को संभालते हुए स्कोर 293 रन तक पहुंचा दिया.
इससे पहले अफगानिस्तान की पारी की नींव इब्राहिम जादरान (95 रन) और रहमानुल्लाह गुरबाज (42 रन) ने रखी थी. दोनों ने टीम को मजबूत शुरुआत दी, लेकिन बीच के ओवरों में विकेट गिरने से रन गति धीमी पड़ गई. ऐसे में नबी ने आते ही खेल की तस्वीर पलट दी.
बांग्लादेश की शर्मनाक हार
नबी के तूफान के बाद बांग्लादेश की पूरी गेंदबाजी अस्त-व्यस्त हो गई. लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की टीम बल्लेबाजी के दौरान भी दबाव में नजर आई. उनकी पूरी टीम 93 रन ही बना सकी और 28वें ओवर में ऑलआउट हो गई. अफगानिस्तान ने ये मैच 200 रन के बड़े अंतर से अपने नाम कर लिया.
भारत में महिलाओं की हेल्थ से जुड़े कई मुद्दों पर अब समाज और मेडिकल में खुलकर चर्चा होने लगी है. लेकिन ऑटोइम्यून बीमारियां एक ऐसा जरूरी हेल्थ प्रॉब्लम विषय है, जो अब भी चर्चा से बाहर रह जाता है. हाल ही में गुजरात के द्वारका में आयोजित भारतीय रुमेटोलॉजी एसोसिएशन, IRACON 2025 के 40 वें वार्षिक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस गंभीर विषय पर रोशनी डाली. इस सम्मेलन में यह हैरान करने वाला तथ्य सामने आया कि ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित हर 10 मरीजों में से लगभग 7 महिलाएं होती हैं यानी 70 प्रतिशत ऑटोइम्यून मरीज महिलाएं होती हैं. यह आंकड़ा न सिर्फ परेशानी वाला है, बल्कि यह भी बताता है कि महिलाओं की लाइफस्टाइल, हार्मोन, और सामाजिक परिस्थितियां किस तरह उन्हें इन बीमारियां के प्रति ज्यादा सेंसिटिव बनाती हैं. तो चलिए जानते हैं कि आखिर ऑटोइम्यून बीमारियां क्या होती हैं और यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा क्यों होती है.
क्या होती हैं ऑटोइम्यून बीमारियां?
ऑटोइम्यून बीमारियों का मतलब ऐसी बीमारियां हैं, जिसमें शरीर का अपना इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही हेल्दी टिशू और ऑर्गन पर हमला करने लगता है. आम तौर पर यह सिस्टम शरीर को संक्रमण और बीमारियों से बचाता है, लेकिन ऑटोइम्यून डिसऑर्डर में यही सुरक्षा सिस्टम शरीर के लिए खतरा बन जाता है. इन बीमारियों में शरीर के जोड़ों, स्किन, मांसपेशियों, ब्लड वेसल्स और इंटरनल ऑर्गन को नुकसान पहुंच सकता है. कुछ आम ऑटोइम्यून बीमारियों में रुमेटीइड गठिया, ल्यूपस, हाइपोथायरायडिज्म और सोरायसिस शामिल हैं.
ऑटोइम्यून बीमारियां महिलाओं में ज्यादा क्यों होती है
एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऑटोइम्यून बीमारियां महिलाओं में पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा पाई जाती हैं. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे –
1. हार्मोनल बदलाव: महिलाओं के शरीर में हार्मोन, उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं. पीरियड्स, प्रेगनेंसी और मेनोपॉज जैसे चरणों में हार्मोन में बदलाव होता है, जिससे शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया खराब हो सकती है.
2. जेनेटिक कारण: कुछ बीमारियां परिवारों में चलती हैं. अगर किसी महिला की मां या बहन को ऑटोइम्यून बीमारी है, तो उस महिला में भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है.
3. इम्यून सिस्टम की सेंसिटिविटी: महिलाओं का इम्यून सिस्टम पुरुषों की तुलना में ज्यादा एक्टिव होता है. यही कारण है कि वे संक्रमण से बेहतर लड़ पाती हैं, लेकिन कभी-कभी यही एक्टिवनेस शरीर के अपने ही अंगों पर हमला कर देती है.
भारत में स्थिति क्यों ज्यादा खराब?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 70 प्रतिशत ऑटोइम्यून मरीज महिलाएं होती हैं. लेकिन चिंता की बात यह है कि ज्यादातर महिलाएं डॉक्टर के पास तब आती हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है. कई महिलाएं बार-बार थकावट, जोड़ों का दर्द, स्किन की समस्याएं या लगातार बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करती रहती हैं. वे इन्हें सामान्य कमजोरी या उम्र का असर समझ बैठती हैं. वहीं भारत में पर्यावरण और लाइफस्टाइल की समस्याएं इस स्थिति को और बिगाड़ देती हैं. शहरों में बढ़ता प्रदूषण और संक्रमण भी इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है. इसके अलावा खराब खानपान, तनाव, और नींद की कमी से स्थिति खराब होने लगती है.
अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ वॉर आक्रामक होता नजर आ रहा है. चीन ने पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सोयाबीन न खरीदने के फैसले से झटका दिया था. अब ट्रंप बीजिंग को कुकिंग ऑयल को लेकर सबक सिखाने की तैयारी में हैं. ट्रंप ने चीन को धमकी दी है कि वे बीजिंग के साथ कुकिंग ऑयल का व्यापार खत्म करने को लेकर विचार कर रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को खुली धमकी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर लिखा, ”मुझे लगता है कि चीन जानबूझकर हमसे सोयाबीन नहीं खरीद रहा है और हमारे सोयाबीन किसानों को मुश्किल में डाल दिया रहा है, जो कि एक आर्थिक रूप से दुश्मनी बढ़ाने वाला काम है. हम इसका बदला लेने के लिए चीन के साथ खाना पकाने के तेल (कुकिंग ऑयल) और अन्य व्यापारिक वस्तुओं का लेन-देन खत्म करने पर विचार कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, हम आसानी से कुकिंग ऑयल खुद बना सकते हैं, इसके लिए हमें चीन से खरीदने की जरूरत नहीं है.”
चीन-अमेरिका के विवाद का क्या है कारण
दरअसल चीन, अमेरिकी सोयाबीन का सबसे बड़ा खरीददार रहा है. सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक उसने 2024 में करीब 2.7 करोड़ टन सोयाबीन खरीदा था. इसकी कीमत करीब 12.8 अरब डॉलर थी, लेकिन मई 2025 से चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीदना बंद कर दिया है. जिनपिंग ने अमेरिकी टैरिफ के जवाब में यह फैला लिया था. हालांकि चीन ने भी अमेरिकी सामान पर रिटालिएटरी टैक्स लगा दिया.
अमेरिका ने नहीं खरीदा कुकिंग ऑयल तो क्या होगा
अगर कुकिंग ऑयल की बात करें तो चीन 2024 में इसके रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. अहम बात यह है कि अमेरिका ने चीन के कुल एक्सपोर्ट का करीब 43 प्रतिशत हिस्सा खरीदा था. अगर ट्रंप अब चीन से कुकिंग ऑयल न खरीदने का फैसला करते हैं तो बीजिंग के लिए यह बड़ा झटका साबित होगा. इसकी वजह से दोनों देशों की फूड और बायोफ्यूल सप्लाई चेन पर भी बुरा असर पड़ेगा.
सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने लखनऊ में ‘नेक्स्ट जेनरेशन GST रिफॉर्म्स कॉन्क्लेव’ का भव्य आयोजन किया।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना बोले – जीवन बीमा, रोटी-ब्रेड पर जीएसटी शून्य, आमजन को बड़ी राहत मिली।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा – व्यापारी हैं भारत की साइलेंट इकोनॉमिक आर्मी, जीएसटी ने पारदर्शिता बढ़ाई।
उत्तर प्रदेश का जीएसटी कलेक्शन ₹1.35 लाख करोड़ पार, विकास दर 11.6% तक पहुँची।
‘वन नेशन, वन टैक्स’ से ‘वन विज़न, वन ग्रोथ’ की ओर बढ़ा भारत, योगी मॉडल बना भरोसे का प्रतीक।
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के आर्थिक परिदृश्य के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शहीद पथ, फीनिक्स पलासियो मॉल के समीप होटल मर्क्योर में ‘नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स कॉन्क्लेव’ का भव्य आयोजन किया। मुख्य अतिथि के रूप में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना उपस्थित रहे, जबकि प्रदेश के उद्योग जगत, व्यापारिक संगठनों और कर विशेषज्ञों की भागीदारी ने इसे एक ऐतिहासिक विमर्श का रूप दिया।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू ऐतिहासिक जीएसटी सुधारों पर चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापारियों, कर विशेषज्ञों और उद्यमियों के बीच इसके व्यावहारिक उपयोग, पारदर्शिता और आमजन पर पड़े सकारात्मक प्रभाव को साझा करना भी रहा।
व्यापार संगठनों का सम्मान और संवाद
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने अमौसी, खजाना मार्केट, गौरी, आशियाना अवध, तेलीबाग, उतरठिया आदर्श और नीलमथा आदर्श व्यापार मंडल सहित कई संस्थाओं के पदाधिकारियों को सम्मानित किया। इसके पश्चात मंत्री सुरेश खन्ना ने उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल, लखनऊ सराफा एसोसिएशन, सरोजनीनगर इंडस्ट्रियल एरिया मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन, ट्रांसपोर्ट नगर व्यापार मंडल, पंडित खेड़ा व्यापार मंडल समेत कई संगठनों को सम्मानित किया।
उद्योगपति अनिल धीमानी, सीए ऋषभ मिश्रा, सीए रीना भार्गव, उद्योगपति शिवशंकर सिंह ‘शंकरी’ और शिवशंकर अवस्थी ने जीएसटी के भविष्य, डिजिटल ट्रांजिशन और औद्योगिक सरलीकरण पर विचार साझा किए।
डॉ. राजेश्वर सिंह बोले – व्यापारी हैं भारत की साइलेंट इकोनॉमिक आर्मी
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने संबोधन में कहा –
“व्यापारी बंधु राष्ट्र की साइलेंट आर्मी हैं। इन्हीं के योगदान से भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 17 राज्यीय कर कानून और 13 सेस समाप्त कर एकल GST व्यवस्था लागू हुई, जो भारत के कर इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक क्रांति है। जहां पहले चार टैक्स स्लैब हुआ करते थे, अब उन्हें दो श्रेणियों में सीमित किया जा रहा है ताकि छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिले।
‘इंस्पेक्टर राज’ से ‘पोर्टल राज’ की ओर भारत का परिवर्तन
डॉ. सिंह ने कहा –
“मोदी, योगी और खन्ना जी का साझा विज़न है कि इंस्पेक्टर राज और लाइसेंस राज का अंत हो, और भारत ‘पोर्टल राज’ की ओर बढ़े जहाँ हर व्यापारी को Self Declaration का सम्मान मिले।”
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में Ease of Doing Business रैंकिंग 14वें से दूसरे स्थान पर पहुँच चुकी है। राज्य का GST कलेक्शन ₹1.35 लाख करोड़ पार कर चुका है, जो 2017 की तुलना में लगभग दोगुना वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने बताया कि करदाताओं की संख्या 65 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ तक पहुँच गई है और यूपी की विकास दर 11.6% तक पहुँच चुकी है, यह ‘योगी मॉडल’ की पारदर्शिता का परिणाम है।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना बोले – जीएसटी सुधार सिर्फ टैक्स नहीं, ट्रस्ट की कहानी है
मुख्य अतिथि सुरेश कुमार खन्ना ने कहा –
“व्यापारी समाज की वर्षों पुरानी मांग थी कि ‘वन नेशन, वन टैक्स’ व्यवस्था लागू हो। प्रधानमंत्री मोदी जी ने यह कर दिखाया। GST सिर्फ टैक्स नहीं, यह ट्रस्ट की कहानी है।”
उन्होंने बताया कि अब तक GST Council की 56 बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें राज्यों को पूरा अवसर मिला। जीवन बीमा, रोटी और ब्रेड पर टैक्स शून्य किया गया है, जबकि 36 जीवनरक्षक दवाओं को टैक्स-फ्री किया गया है। उन्होंने बताया कि ₹7,500 तक के होटल कमरों पर 5% टैक्स, और खाने-पीने की वस्तुओं पर कर दरों में कमी की गई है, ताकि आमजन को राहत मिले।
खन्ना ने कहा कि डीजल, पेट्रोल, सोना, हीरा और अफोर्डेबल हाउसिंग पर उत्तर प्रदेश देश में सबसे कम टैक्स दरें लागू कर रहा है। उन्होंने कहा –
“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनोन्मुख आर्थिक नीति ने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद गंतव्य बना दिया है।”
‘One Nation, One Tax’ से ‘One Vision, One Growth’ की ओर भारत
कॉन्क्लेव में भाजपा के वरिष्ठ नेता पुष्कर शुक्ला, पवन धवन, वीरेंद्र तिवारी, विजय मौर्य, आनंद स्वरूप, रीना चौधरी, शंकरी सिंह, अनिल सिंह गहलोत, अजीत शुक्ला, राकेश सिंह सहित अनेक गणमान्य मौजूद रहे।
लखनऊ में यह आयोजन केवल जीएसटी नीति की चर्चा नहीं थी, बल्कि यह “वन नेशन, वन टैक्स” से “वन विज़न, वन ग्रोथ” की दिशा में बढ़ते भारत की एक नई आर्थिक एकता का संदेश भी था।
सरोजनीनगर से शुरू हुआ यह संवाद अब एक राष्ट्रीय विमर्श का रूप ले रहा है – जहाँ GST सिर्फ एक टैक्स सिस्टम नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता और विश्वास की नई पहचान बन चुका है।
लखनऊ: 14 अक्टूबर, 2025 : अयोध्या दीपोत्सव-2025 में रामायण के सात कांडों पर आधारित झांकियों का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा। शोभायात्रा में प्रभु श्रीराम के बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक की प्रसंगों को कलाकार झांकियों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगे। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया इस शोभायात्रा का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों की शिक्षाओं को आमजन तक पहुंचाना, विशेषकर बच्चों और युवा पीढ़ी को उनकी पौराणिक कथाओं और संस्कृति से जोड़ना भी है। इसके साथ ही मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया अयोध्या दीपोत्सव की शोभायात्रा में शहर के मार्गों पर सांस्कृतिक समृद्धि और धार्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जिसमें स्थानीय और देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु शामिल होंगे। रामनगरी 26 लाख से अधिक दीयों से जगमगाएगी। लक्ष्मण किला घाट से नया घाट तक 2100 लोगों द्वारा महाआरती विशेष आकर्षण होगा। यह दीपोत्सव पिछले वर्षों से अधिक भव्य होगा, जिसमें आस्था और नवाचार का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। पर्यटन मंत्री ने बताया कि भगवान श्रीराम के त्याग एवं लोकजीवन की लीला सदियों तक मानव समुदाय को प्रेरित करती रहेंगी।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि दीपोत्सव-2025 में भगवान श्रीराम की जीवन गाथा को जीवंत करने वाली भव्य झांकियों का प्रदर्शन होगा। प्रत्येक झांकी में रामायण के प्रमुख प्रसंगों का कलात्मक चित्रण किया जाएगा, जो भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों, मर्यादा और धर्म की विजय के संदेश से प्रेरित होंगे। पारंपरिक परिधानों, संगीत, नृत्य और साज-सज्जा के माध्यम से प्रस्तुत ये झांकियां दीपोत्सव के सांस्कृतिक उल्लास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगी। उन्होंने बताया कि झांकियों एवं विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र को धरातल पर उतारकर त्रेतायुग का आभास कराना है।
बालकांड की झांकी में भगवान राम के जन्म और विश्वामित्र आश्रम गमन के प्रसंग को दर्शाया जाएगा, वहीं अयोध्या कांड में राम और सीता के विवाह, वनगमन आदि को प्रस्तुत किया जाएगा। अरण्य कांड में सीता हरण और जटायु प्रसंग, किष्किंधा कांड में सुग्रीव-मित्रता, सुंदरकांड में हनुमान की लंका यात्रा और उनके पराक्रम, लंका कांड में रावण-वध और उत्तर कांड में श्रीराम के राज्याभिषेक के दृश्य विशेष आकर्षण रहेंगे।