Home Blog Page 470

Health Tips: न बैठने की स्थिति में रह पाएंगे, न ही लेटने में मिलेगी राहत – जानें रीढ़ के लिए कितना गंभीर हो सकता है सामान्य दिखने वाला पीठ दर्द

हर साल 16 अक्टूबर को World Spine Day मनाया जाता है. इस दिन का मकसद लोगों को रीढ़ की हड्डी और पीठ की हेल्थ के प्रति जागरूक करना है. बदलती लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठकर काम करना और लगातार तनाव की वजह से आजकल पीठ और गर्दन दर्द आम समस्याओं में शामिल हो गया है. ज्यादातर लोग इसे मामूली समस्या समझते हैं, लेकिन कभी-कभी यह जानलेवा और मेडिकल इमरजेंसी भी बन सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नॉर्मल लगने वाला पीठ दर्द रीढ़ के लिए कितना खतरनाक हो सकता है.

ये नॉर्मल पीठ दर्द रीढ़ के लिए हो सकते हैं खतरनाक

तेज या अचानक दर्द– अगर आपको भी कई बार पीठ में दर्द सिर्फ मीडियम या खिंचाव जैसा नहीं बल्कि एकदम से या तेज होता है तो यह मांसपेशियों या लिगामेंट में चोट या शरीर के अंदर के अंगों की समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसे में पीठ में होने वाले तेज या अचानक दर्द को आप गंभीरता से लें.

पीठ दर्द का पैर या कूल्हे तक फैलना- कई बार पीठ दर्द पैर या कूल्हे तक फैल जाता है. इसे रेडिएटिंग पेन कहते हैं. यह शरीर में नसों पर दबाव की वजह से होता है और अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह भी गंभीर रीढ़ की समस्या बन सकता है.

पैरों में अचानक कमजोरी- कई बार आपने महसूस किया होगा कि आपके पैरों में अचानक कमजोरी हो जाती है. साइटिका या स्पाइनल स्टेनोसिस जैसी स्थितियों के कारण रीढ़ की हड्डी में नसों के दबने से अंगों में कमजोरी हो सकती है. हालांकि यह कमजोरी कई बार स्ट्रोक का संकेत भी हो सकती है.

पेशाब पर कंट्रोल खोना- पीठ दर्द के साथ-साथ मल त्याग या पेशाब पर कंट्रोल न कर पाना गंभीर तंत्रिका दबाव या रीढ़ की हड्डी में संक्रमण जैसे डिस्काइटिस या मेनिन्जाइटिस का संकेत हो सकता है.

सिडल एनेस्थिसिया- कूल्हे और जननांग में सुन्नपन होने को सिडल एनेस्थिसिया कहा जाता है और यह यह भी गंभीर रीढ़ या नस की समस्या का संकेत है.

कैसे रखें रीढ़ और पीठ को हेल्दी?

एक्सपर्ट्स के अनुसार रीढ़ और पीठ को हेल्दी रखने के लिए डेली लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करना जरूरी होता है. अगर आप लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करते हैं, तो बैठने के लिए सही पोस्चर अपनाएं और लंबे समय तक लगातार एक ही स्थिति में न बैठे रहे. इसके अलावा रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करें. वहीं लगातार डेस्क वर्क करने वाले लोग हर 15 से 20 मिनट में खड़े हो या वॉक करें. इसके अलावा रीढ़ और पीठ को हेल्दी रखने के लिए एर्गोनॉमिक वर्कस्टेशन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. साथ ही वजन और खाने का ध्यान रखना भी जरूरी है जिससे रीढ़ पर ज्यादा दबाव न पड़े.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

दिल्ली के आसपास इन जगहों पर मनाएं गर्ल्स गैंग के साथ मजेदार बैचलर पार्टी और उठाएं नाइटलाइफ का पूरा आनंद

आज के समय में लव मैरिज हो या फिर अरेंज मैरिज हो, नए जीवन की शुरूआत को लेकर हर लड़की उत्साहित रहती हैं। उनको पता होता है कि शादीशुदा जिंदगी में प्रवेश करते ही जिम्मेदारी बढ़ने वाली हैं। इसलिए अधिकतर लड़कियां शादी से पहले दिल खोलकर मौज-मस्ती करना पसंद करती हैं। शादी से पहले दिल खोलकर मौज-मस्ती करने की बात होती है, तो बैचलर्स पार्टी की बात जरूर होती है। कई लड़कियां अपने घर पर बैचलर पार्टी करती हैं, तो कई आसपास में स्थित कुछ शानदार डेस्टिनेशन की तलाश करती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको दिल्ली से करीब 5-6 घंटे की ड्राइव पर स्थित हसीन और शानदार जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आप दिल खोलकर बैचलर पार्टी एंजॉय कर सकती हैं।

चंडीगढ़

दिल्ली-एनसीआर के करीब 4-5 घंटे की ड्राइव पर स्थित चंडीगढ़ में आप बेफिक्र होकर बैचलर्स पार्टी करने जा सकती हैं। यह एक बेहद खूबसूरत शहर है। पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ अपनी नाइटलाइफ और शानदार पार्टी के हब के रूप में भी जाना जाता है।

चंडीगढ़ में आपको कई ऐसे बार, रेस्तरां और क्लब हैं, जहां पर आप दिल खोलकर बैचलर्स पार्टी एंजॉय कर सकती हैं। वहीं आप बैचलर्स पार्टी के लिए सेक्टर 32 में जा सकती हैं।

शिवपुरी

दिल्ली एनसीआर से करीब 260 किमी दूर शिवपुरी स्थित है। यह ऋषिकेश के पास स्थित खूबसूरत और मनमोहक डेस्टिनेशन है। यह जगह अपनी शानदार नाइट पार्टी के लिए भी जाना जाता है।

आपको शिवपुरी की हसीन वादियों में कई गेस्ट हाउस और टेंट हाउस रेंट पर मिल जाएंगे। य़हां पर आप अपने दोस्तों के साथ धमाकेदार अंदाज में बैचलर्स पार्टी कर सकती हैं। यहां के टेंट हाउस में अपना म्यूजिक सिस्टम होता है और आप यहां पर रात भर पार्टी कर सकती हैं।

जयपुर

राजस्थान की राजधानी जयपुर अपने ऐतिहासिक और खूबसूरत इमारतों के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही जयपुर की नाइटलाइफ भी फेमस है। यह एक सुरक्षित शहर माना जाता है और यहां पर भी कई महिलाएं पार्टी करने के लिए घूमने पहुंचती हैं।

जयपुर की अपनी खूबसूरत जगहों के साथ यह बैचलर पार्टी के लिए भी जाना जाता है। इस शहर में कई ऐसे होटल, रिसॉर्ट और विला हैं, जहां पर आप अपने दोस्तों के साथ बैचलर पार्टी कर सकती हैं। आप यहां पर कम खर्च में द स्टैग रूफटॉप और द बूज ऑन लाउंज जैसी जगहों पर बैचलर्स पार्टी एंजॉय कर सकती हैं।

नैनीताल

अगर आप भी खूबसूरत और सुरक्षित हिल स्टेशन पर जाकर बैचलर्स पार्टी एंजॉय करना चाहती हैं, तो आपको नैनीताल की हसीन वादियों में जा सकते हैं। नैनीताल उत्तराखंड का एक फेमस और लोकप्रिय हिल स्टेशन है। जहां पर महिलाएं अक्सर अकेले घूमने के लिए पहुंचती हैं।

नैनीताल के पहाड़ों में कई विला, रिसॉर्ट और क्लब भी मौजूद हैं। जहां पर आप अपने दोस्तों के साथ रात भर पार्टी कर सकती हैं। नैनीताल में बैचलर्स पार्टी के बाद आप स्नो व्यू पॉइंट, नैनी झील और टिफिन टॉप जैसी शानदार जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं।

Health Tips: पहली बार एनेस्थीसिया देकर किस बीमारी का ऑपरेशन किया गया था? जवाब शायद 99% लोगों को नहीं पता

हर साल 16 अक्टूबर को वर्ल्ड एनेस्थिसिया डे मनाया जाता है. इस दिन उन डॉक्टर को धन्यवाद दिया जाता है, जो ऑपरेशन के दौरान मरीज को दर्द नहीं होने देते हैं. डॉक्टर आमतौर पर दर्द रहित ऑपरेशन के लिए एनेस्थिसिया देते हैं, जिससे मरीजों को सर्जरी के दौरान कोई तकलीफ नहीं होती है. वहीं  एनेस्थिसिया डे इसलिए भी मनाया जाता है, क्योंकि यह हमें याद दिलाता है कि कैसे एनेस्थिसिया ने सर्जरी के एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल दिया. ऐसे में चलिए आज वर्ल्ड एनेस्थिसिया डे पर आपको बताते हैं कि एनेस्थीसिया से किस बीमारी का पहला ऑपरेशन हुआ था।

एनेस्थिसिया से पहला ऑपरेशन

16 अक्टूबर 1846 को अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल में डेंटिस्ट  ने एक मरीज को एथर दिया था. इसके बाद सर्जन ने मरीज के गले के ट्यूमर को बिना दर्द पहुंचाए निकाला था. वहीं यह पहला रिकॉर्ड एनेस्थिसिया ऑपरेशन था. यह ऑपरेशन एनेस्थिसिया की दुनिया में मील का पत्थर साबित हुआ था. इस एनेस्थिसिया ऑपरेशन के पहले विक्टोरियन युग में ऑपरेशन बहुत दर्दनाक और खतरनाक होते थे. उसे समय मरीजों को लकड़ी की बेंच पर पकड़कर रखा जाता था और फिर सर्जन ऑपरेशन करते थे. वहीं, दर्द के कारण पहले ऑपरेशन को बहुत ही तेजी से क‍िया जाता थी. हालांकि इस तेजी के कारण संक्रमण और मृत्यु दर भी बहुत ज्‍यादा थी. कभी-कभी ऑपरेशन के दौरान मरीज, मरीज को पकड़ने वाला व्यक्ति भी मारा जाता था. उस समय तक ऑपरेशन सिर्फ अंतिम उपाय के तौर पर किया जाता था, क्योंकि अगर हड्डी में फ्रैक्चर या गंभीर चोट होती थी तो सही करने के विकल्प बहुत कम थे. ऐसे में उस समय एनेस्थिसिया का आविष्कार मरीज और डॉक्टर दोनों के लिए क्रांतिकारी साबित हुआ था.

कैसे हुई एनेस्थिसिया की खोज?

1846 से पहले ऑपरेशन के दौरान दर्द कम करने के लिए कई तकनीकी आजमाई गई. वहीं 1845 में डेंटिस्ट Horace Wells ने नाइट्रस ऑक्साइड का प्रयोग किया, लेकिन इसका परीक्षण भी असफल रहा. इसके कुछ महीनों बाद William Morton ने एथर का सफल प्रयोग किया था. बाद में क्लोरोफॉर्म का भी आविष्कार हुआ, जिसका खूब इस्तेमाल किया गया. लेकिन शुरुआती दौर में एनेस्थिसिया के इस्तेमाल में कई खतरे थे. इसके बाद वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने एनेस्थिसिया को सुरक्षित बनाने के लिए सही मात्रा और तकनीक विकसित की. हालांकि एनेस्थिसिया आने के बाद भी आज भी लगभग 5 अब लोग सुरक्षित एनेस्थिसिया तक नहीं पहुंच पाते हैं.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

ट्रंप ने कहा, “200 फीसदी टैरिफ लगा दूंगा…” और भारत-पाकिस्तान का जिक्र करते हुए किया बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे वक्त से नोबेल प्राइज पर नजर गड़ाए बैठे थे, लेकिन उन्हें नोबेल नहीं मिला. ट्रंप इस बात से काफी निराश हुए. उन्होंने भारत-पाकिस्तान को लेकर दावा किया था कि उनकी वजह से दोनों देशों के बीच सीजफायर हुआ था. अब ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि दुनिया में आठ युद्ध रुकवाए, फिर भी नजरअंदाज कर दिया गया

ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने टैरिफ का नाम लेकर कर कई युद्ध टाले हैं. उन्होंने उदाहरण के तौर पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का जिक्र किया. ‘एनडीटीवी’ की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच बहुत जोरदार मुकाबला चल रहा था और सात विमान नष्ट हो गए थे. उन्होंने कहा, ”मैंने कहा कि जब तक आप युद्ध नहीं रोकेंगे, हम आपके सामान पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा देंगे. मैंने दोनों नेताओं से बात की. मैं दोनों को पसंद करता हूं. और अगले दिन मुझे कहा गया कि उन्होंने तनाव कम करने का फैसला कर लिया.”

युद्ध रुकवाना ट्रंप का पसंदीदा काम

ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें युद्ध रोकना पसंद है और वे ऐसे कदम के पक्ष में रहते हैं जो टकराव को रोकें. उन्होंने कहा, ”मुझे नहीं लगता कि किसी राष्ट्रपति ने एक भी युद्ध रोका है. मैंने आठ महीनों में आठ युद्ध रोके. क्या मुझे नोबेल पुरस्कार मिला? नहीं…लेकिन मुझे लगता है कि अगला साल बेहतर होगा. लेकिन आप जानते हैं कि मुझे किस बात की परवाह है? मैंने शायद सैकड़ों-लाखों लोगों की जान बचाई है.”

हमास-इजरायल के बीच ट्रंप ने रुकवाया युद्ध

ट्रंप ने हाल ही में इजरायल और हमास के बीच लंबे वक्त से चल रहे युद्ध की मध्यस्थता की. ट्रंप के 20 पॉइंट के शांति प्रस्ताव ने हमास और इजरायल के बीच युद्ध रुकवा दिया. इसके पहले फेज में बंधकों की रिहाई शामिल थी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी कहा था कि उनकी वजह से भारत-पाक ने तनाव खत्म करने पर सहमति जताई थी. 

IND vs AUS ODI Head-to-Head: ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है? आंकड़ों के जरिए जानिए पूरी कहानी

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हमेशा से मुकाबले रोमांच से भरपूर रहे हैं. अब एक बार फिर दोनों टीमें 19 अक्टूबर से आमने-सामने होंगी, जब भारतीय टीम तीन मैचों की वनडे सीरीज खेलने ऑस्ट्रेलिया पहुंचेगी. इस बार कमान होगी शुभमन गिल के हाथों में, जबकि ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी करेंगे मिचेल मार्श. यह सीरीज न सिर्फ दोनों टीमों के लिए अहम है, बल्कि गिल के लिए कप्तान के तौर पर अपनी पहली बड़ी परीक्षा भी होगी.

भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया: अब तक का वनडे मुकाबला

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अब तक कुल 152 वनडे मैच खेले गए हैं. इनमें से ऑस्ट्रेलिया ने 84 मुकाबले जीते हैं, जबकि भारत 58 मैचों में विजयी रहा है. दोनों टीमों के बीच की यह टक्कर 1980 से चली आ रही है, और हर दशक में कुछ यादगार मैच देखने को मिले हैं.

ऑस्ट्रेलिया में भारत का प्रदर्शन

ऑस्ट्रेलिया की धरती पर भारत के लिए वनडे जीतना हमेशा चुनौती भरा रहा है. अब तक भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में 54 वनडे मैच में आमने-सामने आयी है. इनमें से 14 मैचों में जीत, 38 में हार, और 2 मैच बिना नतीजे के समाप्त हुए हैं. यानी जीत प्रतिशत करीब 26 फीसदी का रहा है. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऑस्ट्रेलिया में अपने प्रदर्शन में सुधार किया है और कई यादगार जीत दर्ज की हैं.

ऑस्ट्रेलिया में भारत का सबसे बड़ा स्कोर

भारत ने ऑस्ट्रेलिया में वनडे क्रिकेट में अपना सर्वाधिक स्कोर 338/9 बनाया था. यह रिकॉर्ड 29 नवंबर 2020 को सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर बना था. वहीं, भारत की सबसे बड़ी वनडे जीत 1991 में पर्थ के वाका ग्राउंड पर आई थी, जब टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 107 रनों से हराया था. मेलबर्न में भी भारत ऑस्ट्रेलिया को दो बार 8 विकेट से मात दे चुका है.

रोहित शर्मा का ऑस्ट्रेलिया में दबदबा

जब बात ऑस्ट्रेलिया में बल्लेबाजी की आती है, तो रोहित शर्मा का नाम सबसे ऊपर आता है. उन्होंने अब तक ऑस्ट्रेलिया में खेले गए 19 वनडे मैचों में 990 रन बनाए हैं, जो किसी भी भारतीय बल्लेबाज से ज्यादा हैं. रोहित ने चार शतक जड़े हैं, जिनमें से सबसे यादगार पारी पर्थ (2016) में आई थी, जब उन्होंने 163 गेंदों पर नाबाद 171 रन ठोके थे.

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में खेले 19 मैचों में 58.23 की शानदार औसत से रन बनाए और 29 छक्के जड़े, जो किसी भारतीय का सर्वाधिक रिकॉर्ड है. रोहित ने जनवरी 2016 की पांच मैचों की सीरीज में 441 रन बनाकर इतिहास रच दिया था.

सीरीज से उम्मीदें

टीम इंडिया के लिए यह दौरा आसान नहीं होगा, लेकिन युवा कप्तान शुभमन गिल के लिए यह मौका है खुद को साबित करने का. अगर भारतीय बल्लेबाजों ने ऑस्ट्रेलिया की तेज पिचों पर बेहतर प्रदर्शन किया और गेंदबाजों ने शुरुआती विकेट दिलाए, तो यह सीरीज टीम इंडिया के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकती है.